पश्चिमोत्तानासन क्या है और इसके लाभ क्या होते है? पश्चिमोत्तानासन (paschimottanasana )-पैरो को आगे की और फैलाकर जमीन पर बैठ जाइए। उसके बाद अपने दोनों हाथों की उंगलियों से दोनों पैरों के अंगूठों को पकड़िए। स्वास्थ्य धीरे-धीरे निकाल दीजिए वह माथे से अपने घुटनों को छूने का प्रयत्न कीजिए। उसके बाद धीरे-धीरे श्वास लीजिए। अपना सिर ऊपर उठाई तथा पहले वाली दशा में आ जाइए। इस आसन को 10 से 12 बार कीजिए। paschimottanasana ke लाभ यह पेट की गैस को दूर करता है। यह हड्डियों को शीघ्र टूटने से रोकता है। यह कब्ज कोदर करता है। यह मासिक धर्म में अच्छा बडी को सही रखता है। यह अस्थमा साइटिका वह पीठ दर्दक सही। इससे मोटापा कम होता है यह उदर के सभी रोगों हेतु लाभदायक होता है। यह चर्म रोग को दूर करता है । इससे रीढ़ की हड्डी स्वस्थ व लचीली हो जाती है। विपरीत संकेत- यदि आप बड़े हुए यकृत अथवा दिल्ली अथवा तीव्र अपेंडिसाइटिस से पीड़ित हैं, तो इस आसन को कभी ना करें। यदि आप अस्थमा अथवा किसी सत्संग संबंधी बीमारी से ग्रसित है तो इस आसन के अभ्यास से बचिए। यदि आपको पीट या रीड की समस्या है तो इस आसन को विशेषज्ञ के निर्देश में ही कीजिए।
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