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Blog by partiksha | Digital Diary

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साइकिल भारत की लोकप्रिय


                साइकिल साइकिल भारत में बहुत लोकप्रिय हैं। बड़े और जवान, दूधवाला, अखबार वाला लड़का डाकिया और फेरीवाला सभी इसका प्रयोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए करते हैं।  बहुत से शिक्षित नौजवान पर्यावरण की चिंता करके साइकिल का प्रयोग करते हैं। पहली साइकिल 1816 मैं एक जर्मन नेबनाई थी। वह लकड़ी से बनी थी। साइकिल सवार सीट पर बैठता और अपने पैरों... Read More

                साइकिल

साइकिल भारत में बहुत लोकप्रिय हैं। बड़े और जवान, दूधवाला, अखबार वाला लड़का डाकिया और फेरीवाला सभी इसका प्रयोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए करते हैं।  बहुत से शिक्षित नौजवान पर्यावरण की चिंता करके साइकिल का प्रयोग करते हैं। पहली साइकिल 1816 मैं एक जर्मन नेबनाई थी। वह लकड़ी से बनी थी। साइकिल सवार सीट पर बैठता और अपने पैरों से जमीन को धक्का मार कर उसे चलता।

इंग्लैंड मैं इस मशीन को "होगी हॉर्स" कहते थे। एक एस्कॉटिश आदमी मेकमिलन ने हॉबी हॉर्स में सुधार किया। उसने इसमें पैडल लगाए जो पिछले पहिए से लंबे छड़ियों से जुड़े हुए थे। एक फ्रैंच आदमी ने 1861 में एक बेहतर मशीन बनाई। उसका नाम था "बोनशेकर" क्योंकि उसके लकड़ी के पहिए उबड-खुद सवारी देते थे। जल्द ही रबड़ के पहिए लगाए गए और तब से इस मशीन का नाम साइकिल पड़ा।


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आइये गंगा नदी के बारे विस्तार पूर्वक समझे।


गंगा नदी तंत्र - गंगा नदी की मुख्य धारा भागीरथी कहलाती हैं, जो गंगोत्री हिमनद से निकाल कर दक्षिण की ओर बढ़ती है। देवप्रयाग में अलकनंदा इसमें मिलकर इसे गंगा नदी का नाम दे देती हैं। हरिद्वार निकट गंगा नदी पर्वतीय जन्म भूमि को छोड़कर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। गंगा भारत की सबसे लंबी, महत्वपूर्ण और पवित्र नदी है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी प्रशंसा इन शब्दों में की है, "अप... Read More

गंगा नदी तंत्र -

गंगा नदी की मुख्य धारा भागीरथी कहलाती हैं, जो गंगोत्री हिमनद से निकाल कर दक्षिण की ओर बढ़ती है। देवप्रयाग में अलकनंदा इसमें मिलकर इसे गंगा नदी का नाम दे देती हैं। हरिद्वार निकट गंगा नदी पर्वतीय जन्म भूमि को छोड़कर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। गंगा भारत की सबसे लंबी, महत्वपूर्ण और पवित्र नदी है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी प्रशंसा इन शब्दों में की है, "अपनी अधिगम स्रोप्रशंसा सागर तक, पुराने समय से आधुनिक काल तक गंगा भारत की सभ्यता की कहानी है।

" गंगा नदी का जल भारत में भौतिक उपयोग के साथ धार्मिक, आर्थिक जीवन और विकास की कहानी है। पश्चिम बंगाल में यह हुगली तथा बांग्लादेश में पदमा बन जाती है। यह बंगाल की खाड़ी में गिरने से एक विशाल डेल्टा बनाती है। यह विश्व का विशालतम तथा तीव्रता के साथ वृद्धि करने वाला डेल्टा है। इसमें सुंदरी वृक्ष तथा टाइगर पाए जाते हैं। इसे सुंदरवन डेल्टा का नाम दिया जाता है।यमुना, घाघरा,गंडक तथाकोशी इसकी सहायक नदियां हैं जो हिमालय पर्वत से निकलती है। जबकि चंबल औरसोन सहायक नदियां प्रायद्वीपीय उच्चभूमि कर आती है। गंगा नदी की द्रोणी 25 किमी लंबी है। अंबाला नगर सिंधु तथा गंगा अपवाह तंत्र के बीच जल विभाजन का कार्य करता है। यमुना नदी जो गंगा नदी की सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदी है। यमुनोत्री हिमनद से निकलकर इलाहाबाद में गंगा से मिलकर पवित्र संगम का निर्माण करती है।


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आइये निर्धनता का अर्थ समझे।


        निर्धनता का अर्थ  निर्धनता शब्द का अर्थ है,धनहीन होना की अथवा धनभव की स्थिति की ही मूलरूप में निर्धनता कहा जाता है। निर्धनता वह स्थित है जो व्यक्ति को अपनी तथा अपने परिवार की आवश्यक आवश्यकताओं को संतुष्ट बनती हैं। धन दैनिक जीवन यापन करने का एकमात्र स्रोत है, जबकि धनहीनता ही निर्धनता का अभिशाप बन जाती है। धन का अभाव व्यक्ति की सबसे बड़ी दुर्बलता और विवशता है, क्योंक... Read More

        निर्धनता का अर्थ 

निर्धनता शब्द का अर्थ है,धनहीन होना की अथवा धनभव की स्थिति की ही मूलरूप में निर्धनता कहा जाता है। निर्धनता वह स्थित है जो व्यक्ति को अपनी तथा अपने परिवार की आवश्यक आवश्यकताओं को संतुष्ट बनती हैं। धन दैनिक जीवन यापन करने का एकमात्र स्रोत है, जबकि धनहीनता ही निर्धनता का अभिशाप बन जाती है। धन का अभाव व्यक्ति की सबसे बड़ी दुर्बलता और विवशता है, क्योंकि धन से ही सब कुछ होता है। बिन धन के कुछ भी नहीं होता। निर्धनता व्यक्ति लिए दुखद एवं समाज के लिए घर अभिशाप है।

निर्धनता उन वस्तुओं का अभाव या अपर्याप्त पूर्ति हैं। जोकि एक व्यक्ति तथा उसके आश्रित को स्वस्थ बनाए के लिए आवश्यक है।" दूसरे शब्दों में, "निर्धनता एक ऐसा जीवन स्तर हैं जिसमें स्वास्थ्य और शारीरिक दक्षता नहीं बनी रहती है। निर्धनता के करण व्यक्ति रोटी, वस्त्र तथा भवन की सुविधाओं से वंचित होकर दयनीय जीवन जीने के लिए विवश हो जाता    है। 

         निर्धनता के प्रकार 

शहरी निर्धनता -

नगरों एवं महानगरों में झुग्गी झोपड़ियों से निर्धनता जगती दिखाई पड़ रही है। रामसरण एक मिल में रू० 3,500 माह नौकरी है, इतने कम पैसों न तो वह अपने परिवार के लिए ठीक से भोजन और वस्त्रों की व्यवस्था कर पता है न मकान ही सुलभ कर पता है। नगरों में बसने वाले हजारों रामसन इसी तरह निर्धनता के दुष्चक्र में जीवन जीते थे।

ग्रामीण निर्धनता -

रामदास भूमिहीन होने के कारण प्रतिदिन भूपतियो के घर रोजगार पाने के लिए चक्कर लगाता है। उसे रुपए 50 प्रतिदिन की दहाड़ी   पर किसानों के खेतों में काम करके अपने परिवार का पालन पोषण करना है। बलवान गांव से मरियल से घोड़ा वाली टांगे में सवारियां कस्बे तक ले जाता है। और शाम तक मारखाप कर ₹200 कम पता हैं। उसी आय से घोड़े का चारा तथा 6 लोगों के पेट पालने पर विवश  रहता है।

 


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संत रविदास जी की जयंती।


        संत रविदास जयंती         आज गुरु रविदास जयंती हैं। गुरु रविदास जयंती हर वर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह जानती गुरु रविदास के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाई जाती है। गुरु रविदास का जन्म 1398 ई में हुआ था। गुरु रविदास एक आध्यात्मिक नेता थे। जिन्होंने समानता, एकता और ईश्वर के प्रति भक्ति का संदेश फैलाया। गुरु रविदास जी को संत रविदास जी के नाम से भी ज... Read More

        संत रविदास जयंती

        आज गुरु रविदास जयंती हैं। गुरु रविदास जयंती हर वर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह जानती गुरु रविदास के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाई जाती है। गुरु रविदास का जन्म 1398 ई में हुआ था। गुरु रविदास एक आध्यात्मिक नेता थे। जिन्होंने समानता, एकता और ईश्वर के प्रति भक्ति का संदेश फैलाया। गुरु रविदास जी को संत रविदास जी के नाम से भी जाना जाता है‌। वे 14वीं शताब्दी के संत कवि और समाज सुधारक थे।

जिन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से जातिगत भेदभाव को चुनौती दी। संत रविदास जी, संत कबीर दास समकालीन थे। उन्हें कृष्णा भक्त मीराबाई के आध्यात्मिक गुरु के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका नभाई। उन्होंने सभी इंसानों को एक समान माना। उनका जीवन बेहद सरल और पवित्र था। संत रविदास की पुण्यतिथि पर लोग मंदिर जाकर भजन करते थे। 

उनके भक्त उनकी शिक्षाओं और भक्ति गीतों का पाठ करते हैं। इस अवसर पर कई श्रद्धालु गंगा नदी मैं पवित्र स्नान करते हैं। कई स्थान पर संत रविदास के संबंधित स्वभाव और विशेष परेड का आयोजन किया जाता है। यह जयंती केवल उत्सव नहीं, वास्तव में संत रविदास के ज्ञान और शिक्षाओं कोई याद करने और समाज में प्रेम एवं समानता की प्रेरणा देता है।


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स्वयं पर विश्वास


         स्वयं पर विश्वास सामान्य और आसमान या समय में प्राथमिकताएं बदल जाती है। उनकी भी प्राथमिकता बदल गई। अब वह उन कार्यों और विचारों से हटकर करते और सोचते हैं। जो समान्य समय में उनके लिए सबसे जरूरी लगता था। उन्होंने तय किया कि 'पहले वाली प्रथमिकताएं 'दूसरे के लिए ही कार्य करना और सोचने से हटकर अब पहले स्वयं को सुरक्षित रखना और स्वयं के बारे में सोने को प्राथमिकता... Read More

         स्वयं पर विश्वास

सामान्य और आसमान या समय में प्राथमिकताएं बदल जाती है। उनकी भी प्राथमिकता बदल गई। अब वह उन कार्यों और विचारों से हटकर करते और सोचते हैं। जो समान्य समय में उनके लिए सबसे जरूरी लगता था। उन्होंने तय किया कि 'पहले वाली प्रथमिकताएं 'दूसरे के लिए ही कार्य करना और सोचने से हटकर अब पहले स्वयं को सुरक्षित रखना और स्वयं के बारे में सोने को प्राथमिकता देंगे।

यह प्राथमिकता जब उन्होंने बनाई तो उन्हें असहज तो लगा, परी है करना अपने जीवन और परिवार समाज की सरक्षा के लिए जरूरी था। असामान्य काल में नियम- सिद्धांत किस तरह से बदल जाते हैं और बदल देने चाहिए। उन्होंने बखूबी समझ लिया था। इस समाज की वजह से खुद ही नहीं, बल्कि उनके परिवार और आस-पड़ोस भी सुरक्षित है।


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जयशंकर प्रसाद


         जयशंकर प्रसाद जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी सन 1890 ई में जन्मे जयशंकर प्रसाद की बाल्यकाल में ही इनके पिता देवीप्रसाद तथा बड़े भाई का स्वर्गवास हो गया ; अतः अल्पायु में ही लाड़ प्यार में पाले प्रसाद जी को घर का सारा उत्तरदायित्व वहन करना पड़ा। विद्यालयी शिक्षा छोड़कर इन्होंने घर पर ही अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, संस्कृत भाषा का अच्छा ज्ञान प्राप्त&nb... Read More

         जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी सन 1890 ई में जन्मे जयशंकर प्रसाद की बाल्यकाल में ही इनके पिता देवीप्रसाद तथा बड़े भाई का स्वर्गवास हो गया ; अतः अल्पायु में ही लाड़ प्यार में पाले प्रसाद जी को घर का सारा उत्तरदायित्व वहन करना पड़ा। विद्यालयी शिक्षा छोड़कर इन्होंने घर पर ही अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, संस्कृत भाषा का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया।

इन्होंने अपने पैतृक व्यवसाय को करते हुए भी अपने काव्य प्रेरणा को जीवित रखा। इनका मन अवसर बातें ही कविता कामिनी के कानन में भ्रमण करनेलगता था। अपने मन में आए भाव को यह दुकान की बही के पन्नू पर लिखा करते थे। इस प्रकार जयशंकर पसाद का काव्य जीवन आरंभ हुआ। प्रसाद जी काजीवन बहुत सरल था। यह सभा सम्मेलनों को भीड़ में बहुत दूर रखा करते थे।

जय बहुमुखी प्रतिभा के घनी और भगवान शिव के उपासक थे। इनके पिता साहित्य प्रेमी और साहित्यकार ऑन का सम्मान करने वाले व्यक्ति थे, जिसका प्रसाद जी के जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा।अत्यधिक श्रम तथा राज्यक्ष्मा से पीड़ित होने के कारण 14 नवंबर, 1937 ई को लगभग 48 वर्ष की अल्पायु में इनका देहावसान हो गया। जयशंकरपसाद आधुनिक हिंदी काव्य के एक प्रथम कवि थे।

जिन्होंने अपने काव्य में सूक्ष्म रहस्यवादी अनुभूतियां का चित्रण किया। यही इस काव्य  की प्रमुख विशेषता थी। इसकी इस नवीन प्रयोग के काव्य जगत में क्रांति उत्पन्न कर दी, जिसके परिणाम स्वरूप हिंदी साहित्य में छायावाद।  नाम से एक युग का सूत्रपात हुआ। इसके द्वारा रचित कामायनी छायावादी युग की अप्रतिम कृति है।


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26 जनवरी


26 जनवरी हमारे देश की 77 वी 26 जनवरी कि आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू हुआ था, जिसने भारत को पूर्ण रूप से एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया। भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान हैं। डॉ भीमराव अंबेडकर जी के नेतृत्व में बना हमारा संविधान हमें समनता, स्वतंत्रता, और न्याय का अधिकार देता है। आज का दिन हमें अपने महान स्वतंत्रता सेनानीयों ... Read More

26 जनवरी

हमारे देश की 77 वी 26 जनवरी कि आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू हुआ था, जिसने भारत को पूर्ण रूप से एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया। भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान हैं। डॉ भीमराव अंबेडकर जी के नेतृत्व में बना हमारा संविधान हमें समनता, स्वतंत्रता, और न्याय का अधिकार देता है।

आज का दिन हमें अपने महान स्वतंत्रता सेनानीयों के बलिदान को याद करने का अवसर देता है। उनकी कड़ी मेहनत और त्याग के कारण ही आज हमें एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं। गणतंत्र दिवस हमारी विविधता में एकता का उत्सव है। यह दिवस के अवसर पर देशभर झंडा फहरायाराया जाता हैं और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजन किए जाते हैं।

दिल्ली के राजपथ पर विशेष परेड का आयोजन होता है, जिसमें भारतीय सेना, संस्कृतिक का प्रदर्शन होता है।आइए, हम सब यह संकल्प लेते हैं कि, हम देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे। देश की एकता और अखंडता को बनाए रखेंगे। 

                   जय हिंद , जय भारत

आन देश की शान देश की 

इस देश की हम संतान है 

तीन रंगों से रंगा तरंगा

हम सब की पहचान है।

                                      धन्यवाद


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बेरोजगारी हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या है।


           बेरोजगारी बेरोजगारी का अर्थ - बेरोजगारी की समस्या हमारे देश की एक प्रमुख समस्या है। यह दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इससे एक और गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है, जो है भखमरी,  भुखमरी से आदमी इस हद तक पहुंच जाता है कि वह आत्महत्या करने को तैयार हो जाता है। वह चोरी, डकैती, हिंसा आदि अनेक समस्याओं का मूल कारण बेरोजगारी है। जब कोई योग्य तथा काम करने के लिए इ... Read More

           बेरोजगारी

बेरोजगारी का अर्थ -

बेरोजगारी की समस्या हमारे देश की एक प्रमुख समस्या है। यह दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इससे एक और गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है, जो है भखमरी,  भुखमरी से आदमी इस हद तक पहुंच जाता है कि वह आत्महत्या करने को तैयार हो जाता है। वह चोरी, डकैती, हिंसा आदि अनेक समस्याओं का मूल कारण बेरोजगारी है। जब कोई योग्य तथा काम करने के लिए इच्छुक व्यक्ति प्रचलित मजदूरी पर काम करने के लिये तो ऐसी अवस्था बेरोजगारी कहलाती है।

बेरोजगारी का कारण 

बेरोजगारी के कारण कुछ इस प्रकार है। जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि, शिक्षक का अभाव वैज्ञानिक उपकरणों का अधिक मात्रा में प्रयोग जिससे सारा कार्य मशीन द्वारा हो। और सरकारी नौकरी में कमी हो रही है।

• बढ़ती जनसंख्या -

जिसमें यह एक प्रमुख कारण है बेरोजगारी का। बढ़ती जनसंख्या से कई बड़ा ऑन का सामना करना पड़ता है। 

• शिक्षा की प्रणाली -

हमारे देश में शिक्षा का अभाव एक प्रमुख कारण है, क्योंकि हमारे देश में शिक्षा सिर्फ प्रस्तुक तक ही सीमित है। 

• उद्योग में विकास की कमी -

देश में उद्योगों का विकास बहुत धीमा है। जिससे लोगों को रोजगार नहीं मिलता हैं।

बेरोजगारी का समाधान -

इसे पूर्ण रूप से खत्म नहीं कियाज सकता। सरकार के कुछ अच्छे प्रयासों से इस काम किया जा सकता है। सर्वोत्तम हमें बढ़ती जनसंख्या को काबू करना होगा। दूसरी चीज शिक्षा प्रणाली अच्छी होनी चाहिए। इसके लिए हमें भी जागरूक होने की ज़रूरत है। हमें स्वयं का छोटा सा काम शुरू करके लोगों को रोजगार देना चहिए। ज्यादा से ज्यादा मजदूरको रोकना चाहिए। 

बेरोजगारी के प्रकार-

• सामान्य बरोजगारी -

यह वह स्थिति होती है। जिसमें व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने का इच्छुक होता है। परंतु उसे कोई काम नहीं मिलता हैं।

• स्वैच्छिक बेरजगारी -

जब किसी व्यक्ति को कहां मिल रहा है, परंतु वह अपनी इच्छा से काम नहीं करना चाहता है तो उसे स्वैच्छिक बेरोजगारी कहते हैं।

 • अक्षमता बेरोजगारी - 

जब कोई व्यक्ति शारीरिक या मनसिक रूप से काम करने में सक्षम नहीं होता है, तो अक्षमता बेरोजगारी कहते हैं। 

• संरचनात्मक बेरोजगारी -

जब किसी राष्ट्र में भौतिक, वृत्तीय और मानवीय संरचना कमजोर होने के कारण रोजगार का अभाव होता है। तो उसे संरचनात्मक बेरोजगारी कहते हैं।

उदाहरण 

•किसी राष्ट्र में उत्पादन कम होने के कारण।

•जब किसी राष्ट्र में परिवहन की अधिक समस्या।

•जब किसी राष्ट्र में ज्ञान और कौशलकी कमी होती है।

• मौसमी बेरोजगारी -

मौसमी बेरोजगारी में लोगों को साल के कुछ ही महीने काम मिलता हैं। और बाकी महीने उन्हें कुछ काम नहीं मिलता है।


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राष्ट्रीय मतदाता दिवस


     राष्ट्रीय मतदाता दिवस हमारे भारत देश में हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस पहली बार वर्ष सन 2011 में मतदाताओं मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मनाया गया था। यह दिवस लोगों को मतदान के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना दिवस के दिन ही राष्ट्रीय मतद... Read More

     राष्ट्रीय मतदाता दिवस

हमारे भारत देश में हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस पहली बार वर्ष सन 2011 में मतदाताओं मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मनाया गया था। यह दिवस लोगों को मतदान के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना दिवस के दिन ही राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है।

इस दिन मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन चुनावी प्रक्रिया में अच्छा प्रदर्शन करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया जाता है। यह दिवस आम नागरिकों को यह बतलाता है कि एक वोट भी देश के हित में कितना निर्णायक सिद्ध हो सकता है।

यह दिवस प्रत्येक वर्ष एक अलग विषय (थीम) के साथ मनाया जाता है। इस दिन देश के प्रत्येक मतदाता को अपनी सक्रिय भागीदारी के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करने का करण लेना चाहिए। मतदान एक नागरिक का अधिकार तथा कर्तव्य दोनों है। इसके माध्यम से हम अपने देश के भविष्य को आकर देते हैं। हमारे द्वारा चुने गए नेता हमारे देश का शासन चलाते हैं। इसके उद्देश्य लोकतंत्रक को मजबूत बनाते हैं।

 धन्यवाद


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हरिवंश राय बच्चन


       हरिवंशरय बच्चन डॉ हरिवंश राय बच्चन का जन्म प्रज्ञा के एक सम्मानित कायस्थ परिवार में सन 1907 ई में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रतापनरायण था। माता-पिता की धार्मिक रुचियां व संस्कारों का उनके जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा। इनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू माध्यम से हुई। इन्होंने वाराणसी व प्रयाग में शिक्षा प्राप्त में यह अनेक वर्षों तक प्रयोग विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रध्यापक... Read More

       हरिवंशरय बच्चन

डॉ हरिवंश राय बच्चन का जन्म प्रज्ञा के एक सम्मानित कायस्थ परिवार में सन 1907 ई में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रतापनरायण था। माता-पिता की धार्मिक रुचियां व संस्कारों का उनके जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा। इनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू माध्यम से हुई। इन्होंने वाराणसी व प्रयाग में शिक्षा प्राप्त में

यह अनेक वर्षों तक प्रयोग विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रध्यापक रहे। सन् १९५५ ई० में ये विदेश मंत्रालय में हिंदी विशषज्ञ के पद पर आसीन हुए। सन्१९६६ ई० में इन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया। हरिवंश राय बच्चन तत्कालीन वातावरण से प्रभावित होकर युवाकाल में ही पढ़ाई छोड़कर राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े।

 पत्नी के वियोग ने इन्हीं निराशा वेद दुख से।  भर दिया। किंतु कुछ समय पश्चात इन्होंने तेजी बचपन से दोबारा विवाह करके पूर्ण नये सुख और संपन्नता से परिपूर्ण जीवन किया। २८ जनवरी सन २००३ ई० को निधन  हो गया। अध्यापक राज्यसभा सदस्य तथा कई आदि   रहे। इन्हें पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित    किया गया।


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