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Blog by partiksha | Digital Diary

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ध्वनि (sound)


            ध्वनि (Sound) सभी जिओ तथा निर्जीवों द्वारा उतन्न अनेक प्रकार की आवाज जैसे चिड़िया का चहचाना, सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों का बचाना, बरसात के मौसम में बादलों का गर्जना आदि, भाषाओं की वैज्ञानिक रूप ध्वनि कहते हैं। ध्वनि ऊर्जा का वह रूप है जो(Vibration) या विक्षोभ (disturbance) के कारण उत्पन्न होती है और ठोस , द्रव, गैस जैसे माध्यम से तिरंगे(Waves) के रूप... Read More

            ध्वनि (Sound)

सभी जिओ तथा निर्जीवों द्वारा उतन्न अनेक प्रकार की आवाज जैसे चिड़िया का चहचाना, सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों का बचाना, बरसात के मौसम में बादलों का गर्जना आदि, भाषाओं की वैज्ञानिक रूप ध्वनि कहते हैं।

ध्वनि ऊर्जा का वह रूप है जो(Vibration) या विक्षोभ (disturbance) के कारण उत्पन्न होती है और ठोस , द्रव, गैस जैसे माध्यम से तिरंगे(Waves) के रूप में फैलती है। 

(1) कंम्पन -

जब कोई वस्तु अपनी मध्य स्थित के दोनों और इधर-उधर गति करती है तो उसकी गति दोलन, कंम्पन कहलाती है।

(2) आवर्तकाल- 

कंम्पन करने वाली वास्तु दोबारा एक कंम्पन     में लगे समय को आवर्तकाल (Perion) कहते हैं।

(3) आवृती (Frijuency)-

प्रति सेकंड में किए गए कंम्पनो की संख्या उसकी आवृती (Frijuency) कहलाती है इसका SI मात्रक हर्टज होता है। इसका संकेत HZ हैं। एक हर्टज आवर्ती $1 प्रति सेकंड के बराबर होती है। 

(4) आयाम (dimension)-

कंम्पन करती हुई वस्तु का अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है।

(5) प्रबलता-

प्रबलता ध्वनि का वह गुण है जिससे ध्वनि तीव्र तथा मंद्र सुनाई देती है।

(6) तारत्व(Pitch)-

तारत्व ध्वनि का वह गुण है जिसके द्वारा हम मोती (भारी) या पतली (धीमी) ध्वनि मैं अंतर कर सकते हैं। उच्च तरत्व वाली ध्वनि की आवृती उच्च तथा निम्न तारत्व वाली ध्वनि की आवृति निम्न होती हैं।

 

 


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आइये ऊर्जा के बारे में समझे।


                   ऊर्जा  किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा का मात्रक वही होता हैं। जो कार्य का मात्रक है तथा कार्य भी भांति यह भी एक अदिश राशि है। MKS यध्दिति में ऊर्जा का मात्रक जूल है। किसी वस्तु की ऊर्जा की मैप उसे कार्य से की जाती हैं। जो वह सुनने ऊर्जा वली स्थिति आने तक कर सकती हैं। • ऊर्जा के रूप -  ऊ... Read More

                   ऊर्जा 

किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा का मात्रक वही होता हैं। जो कार्य का मात्रक है तथा कार्य भी भांति यह भी एक अदिश राशि है। MKS यध्दिति में ऊर्जा का मात्रक जूल है। किसी वस्तु की ऊर्जा की मैप उसे कार्य से की जाती हैं। जो वह सुनने ऊर्जा वली स्थिति आने तक कर सकती हैं।

• ऊर्जा के रूप - 

ऊर्जा के विभिन्न रूप हैं।

(1) यांत्रिक ऊर्जा-

वह ऊर्जा जो किसी वस्तु में यांत्रिक कार्य के कारण सचित होती है। यांत्रिक ऊर्जा कहलाती है। जैसे-गिरता हुआ पत्थर, खींचा हुआ तीर, घड़ी का स्प्रिंग, दबी हुई स्प्रिंग आदि से प्राप्त ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा है। यांत्रिक ऊर्जा दो प्रकार की होती है।

(1) गतिज ऊर्जा।

(2) स्तितिज ऊर्जा।

(2) ऊष्मीय ऊर्जा -

ईंधन चलने से ऊर्जा अथवा सौर विकरण से उत्पन्न ऊषा ऊष्मीय ऊर्जा कहलाती है जैसे  ईंधन,पेट्रोल, इंजन तथा डीजल इंजन से प्राप्त ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा है।

(3) प्रकाश ऊर्जा-

वह ऊर्जा जिसके कारण हमें दिखाई देता है। प्रकाश ऊर्जा कहलाती है। जैसे-विद्युत बल्ब मोमबत्ती, सूर्य आदि प्राप्त ऊर्जा प्रकाश ऊर्जा है।

(4) रासायनिक ऊर्जा-

वह ऊर्जा जो किसी रसायनिक अभिक्रिया से प्राप्त होती है। रासायनिक ऊर्जा है ।जैसे- कोयला, पेट्रोल ,डीजल आदि से प्राप्त ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा है।

(5) विद्युत ऊर्जा-

वह ऊर्जा जो विद्युत धारा द्वारा संचारित विद्युत ऊर्जा कहलाती है। जैसे विद्युत जनित्र ऊर्जा विद्युत ऊर्जा कहलाती हैं।

(6) ध्वनि ऊर्जा -

वह ऊर्जा जिसके कारण हमारे कान के पर्दों हिला कर सनते ध्वनि को सुन है जैसे लाउडस्पीकर से प्राप्त ध्वनि ऊर्जा हैं।

 


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कार्य क्या है।


(1) कार्य की वैज्ञानिक संकल्पना  बल लगातार किसी वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करने की क्रिया को कार्य कहते हैं। अर्थात कार्य होने के लिए बल तथा बल की दिशा में विस्थापन दोनों आवश्यक हैं। एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य  किसी वस्तु की एक निश्चित दूरी तक विस्थापित करने में किया गया कार्य वस्तु पर लगाए गए बल के अंनुक्रमा अनुपाती है।              &... Read More

(1) कार्य की वैज्ञानिक संकल्पना 

बल लगातार किसी वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करने की क्रिया को कार्य कहते हैं। अर्थात कार्य होने के लिए बल तथा बल की दिशा में विस्थापन दोनों आवश्यक हैं।

एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य 

किसी वस्तु की एक निश्चित दूरी तक विस्थापित करने में किया गया कार्य वस्तु पर लगाए गए बल के अंनुक्रमा अनुपाती है। 

                कार्य ( W ) ×  बल  ( F )

अतः सामान बल लगातार किसी वास्तु को विस्थापित करने में किया गया विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता हैं।

          कार्य  ( W ) × विस्थापन ( d )

 कार्य का मात्रक 

कार्य का मत्रक = बाल का मात्रक × विस्थापन का मात्र अतः कार्य का मात्रक = I N×1ma-N-msi पद्धति में कार्य के मात्रक न्यूटन मीटर को सकेत J सब प्रदर्शित करते हैं। अतः 1J का कार्य उसे समय होगा जब 1N का बल लगातार वस्तु को बालक दिशा में 1m विस्थापित किया जाता है। अतः इसका प्रतिशत करते समय दिशा बताने की आवश्यकता नहीं होती हैं।


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एक समान गति तथा असमान गति


एक समान गति तथा आसमान गति  (Uniform motion and non-uniform motion) (1) एक समान गति(Uniform motion) जब कोई वस्तु समान अंतराल में निश्चित दिशा में समान दूरी तय करती है तब वस्तु की गति एक समान गति कहलाती है।एक समान गति में वस्तु का वेग नेट रहता है।  (2) असमान गति (non-uniform motion) जब कोई वस्तु सामान अंतरालों में आसमान दूरियां तय करती है, तब वस्तु की यह गति आसमान गति या परिवर्ती गति कहलात... Read More

एक समान गति तथा आसमान गति 

(Uniform motion and non-uniform motion)

(1) एक समान गति(Uniform motion)

जब कोई वस्तु समान अंतराल में निश्चित दिशा में समान दूरी तय करती है तब वस्तु की गति एक समान गति कहलाती है।एक समान गति में वस्तु का वेग नेट रहता है। 

(2) असमान गति (non-uniform motion)

जब कोई वस्तु सामान अंतरालों में आसमान दूरियां तय करती है, तब वस्तु की यह गति आसमान गति या परिवर्ती गति कहलाती है। असमान गति में वस्तु का वेग समय के साथ परिवर्तित होता है। 

चाल(Speld)

किसी वस्तु द्वारा एकांक समयांतराल(Time in terval) मैं चली गई दूरी को वस्तु की चाल कहते हैं। यह अदिश राशि है। इसे (V) से प्रतिशत किया जाता है।

वेग(Velocity)

किसी वस्तु द्वारा एकांक समय में निश्चित दिशा में चली गई दूरी अर्थात विस्थापन को उसका वेग कहते हैं। अर्थात किसी वस्तु द्वारा एकांक समयांतराल में तय की गई विस्थापन वस्तु का वेग कहलाता है। वेग को (V) से प्रदर्शित करते हैं। 

 

 

 

 


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दूरी तथा विस्थापन में अंतर


           दूरी (dispanc) किसी गतिमान वस्तु द्वारा किसी समय में तय की गई पथ की लंबाई को उसे वस्तु द्वारा चली गई दूरी कहते हैं। दूरी एक अदिश राशि है। दूरी का मात्रक SI प्रणाली में मीटर होता है। दूरी सदैव धनात्मक होती है। यह वस्तु के पद की आकृति पर निर्भर करती है। इसका मन विस्थापन के परिणाम के बराबर अथवा उससे बड़ा होता है।   विस्थ... Read More

           दूरी (dispanc)

किसी गतिमान वस्तु द्वारा किसी समय में तय की गई पथ की लंबाई को उसे वस्तु द्वारा चली गई दूरी कहते हैं। दूरी एक अदिश राशि है। दूरी का मात्रक SI प्रणाली में मीटर होता है। दूरी सदैव धनात्मक होती है। यह वस्तु के पद की आकृति पर निर्भर करती है। इसका मन विस्थापन के परिणाम के बराबर अथवा उससे बड़ा होता है।

  विस्थापन(Displacement)

वास्तु के अंतिम स्थिति तथा प्रारंभिक स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते हैं । विस्थापन एक सदिश राशि हैं। इसमें परिणाम और दिशा दोनों होते हैं। विस्थापन का मात्रक SI प्रणाली में मीटर होता है।

 


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गति एवं गति के प्रकार


            गति (Motion)  किसी वस्तु की स्थिति किसी स्थिर बिंदु की सापेक्ष समय के साथ-साथ परिवर्तन हो तब वह गति की अवस्था में कहलाती है तथा यह स्थिर बिंदु मूल बिंदु या निर्देश बिंदु कहलाती हैं।              गति के प्रकार  (1) सरल रेखीय गति          (Rectilinear Motion) जब को... Read More

            गति (Motion)

 किसी वस्तु की स्थिति किसी स्थिर बिंदु की सापेक्ष समय के साथ-साथ परिवर्तन हो तब वह गति की अवस्था में कहलाती है तथा यह स्थिर बिंदु मूल बिंदु या निर्देश बिंदु कहलाती हैं।

             गति के प्रकार 

(1) सरल रेखीय गति          (Rectilinear Motion)

जब कोई कण एक सरल रेखा में गतिमान होता हैं तो उनकी गति सरल रेखा गति कहलाती है और जब एक वस्तु एक सीधी रेखा मे गतिमान होती है तो उसकी गति स्थानांतरित गति कहलाती है।

उदाहरण 

सीधे चलती हुई ट्रेन की गति ।

(2) वृत्तीय गति(Cirular Motion)

जब कोई कण किसी वृत्ताकार मार्क पर गति करता है तो उसकी गति वृत्तीय गति कहलाती  हैं।

उदाहरण 

सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की गति। 

(3) आसमान में गति

(Non-uniform motion) 

जब कोई वस्तु समय अंतराल में आसमान में दरी तय करती है तो उसे आसमान गति कहते हैं। 

उदाहरण 

एक मक्खी का उड़ना। 

(4) दोलन गति तथा कंपन गति

(Virbra ting motion)

जब कोई वस्तु किसी निश्चित बिंदु के इधर-उधर गति करती है। तो उसकी गति कंपन गति या दोलन गति कहलाती है। 

उदाहरण 

झूला झूलती हुई लड़की। 

(5) प्रक्षेप्य गति

(Praje ctic motion)

जब कोई वस्तु गरुत्वाकर्षण बल के अधीन गति करती है तो उसे गति को प्रक्षेप्य गति कहलाती हैं।

उदाहरण 

छत से फेंकी गई गेंद की गति , टॉप से छट्टी
 गले की गति।

(6) एक समान वृत्तीय गति 

जब कोई कम एक समान चार से वृत्तीय पथ पर गति करता है। तो कण की इस गति को एक समान वृत्तीय गति कहते हैं। 

उदाहरण 

घड़ी की सीई की नोक की गति।









 

 




      




 

 

 




 

 

 


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एपीथीलियमी ऊतक


एपीथीलियमी ऊतक  जंतु के शरीर को ढकने या बाहा रक्षा प्रदान  करने वाले ऊतक एपीथीलियमी ऊतक है।एपीथीलियमी शरीर के अंदर स्थिर बहुत से   अंगों और गुहिकाओ को ढखते है। यह भिन्न-भिन्न प्रकार के शारीरिक तंत्र को एक-दूसरे से अलग करने के लिए अवरोध का निर्माण करते हैं। त्वचा, मुंह ,आहारनलिया, रक्तवहनी नली        का अस्तर, फेफड़ों की फूपिका नली आदि   ... Read More

एपीथीलियमी ऊतक 

जंतु के शरीर को ढकने या बाहा रक्षा प्रदान  करने वाले ऊतक एपीथीलियमी ऊतक है।एपीथीलियमी शरीर के अंदर स्थिर बहुत से   अंगों और गुहिकाओ को ढखते है। यह भिन्न-भिन्न प्रकार के शारीरिक तंत्र को एक-दूसरे से अलग करने के लिए अवरोध का निर्माण करते हैं।

त्वचा, मुंह ,आहारनलिया, रक्तवहनी नली        का अस्तर, फेफड़ों की फूपिका नली आदि         सभी एपीथिलियमी ऊतक से बने होते हैं।          एपीथिलियमी ऊतक की कोशिकाएं एक दूसरे  से सटी होती है। और यह एक अनवरत परत   का निर्माण करती है। इन परतों के बीच चिपकाने वाले पदार्थ काम होते हैं। जो भी  पदार्थ शरीर    में प्रवेश करता है। या बाहर निकलता हैं, वह एपीथिलियमी कि किसी     परत से होकर गुजरता हैं।


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जटिल ऊतक


जटिल ऊतक  अब तक हम एक ही प्रकार की कोशिकाओं     से बने भिन्न-भिन्न प्रकार के ऊतकों पर विचार कर चुके हैं जो की एक ही तरह के दिखाई      देते हैं। ऐसे ऊतकों को साधारण स्थायी     ऊतक कहते  हैं। अन्य प्रकार के स्थायी ऊतक कहते हैं। जटिल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं    से मिलकर एक इकाई की तरह कार्य करते हैं। जाइलम और फलोएम इसी प्र... Read More

जटिल ऊतक 

अब तक हम एक ही प्रकार की कोशिकाओं     से बने भिन्न-भिन्न प्रकार के ऊतकों पर विचार कर चुके हैं जो की एक ही तरह के दिखाई      देते हैं। ऐसे ऊतकों को साधारण स्थायी     ऊतक कहते  हैं।

अन्य प्रकार के स्थायी ऊतक कहते हैं। जटिल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं    से मिलकर एक इकाई की तरह कार्य करते हैं। जाइलम और फलोएम इसी प्रकार के जटिल ऊतकों के उदाहरण है।

 


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स्थायी ऊतक सरल स्थायी ऊतक


स्थायी ऊतक‌ विभज्योतक द्वारा बनी कोशिकाओं का क्या होता हैं। ये यह विशिष्ट कार्य करती हैं और विभाजित होने की शक्ति को खो देती है। जिसके फल स्वरुप वे स्थायी ऊतक का निर्माण करती है। सरल स्थायी ऊतक कोशिकाओं की कुछ परतें होती हैं । जिसे सरल स्थायी ऊतक कहते हैं। पैरेंकाइमा सबसे अधिक पाया जाने वाला सरल स्थायी ऊतक है। पतली कोशिकाओं भित्ति वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है। ये जीवित... Read More

स्थायी ऊतक‌

विभज्योतक द्वारा बनी कोशिकाओं का क्या होता हैं। ये यह विशिष्ट कार्य करती हैं और विभाजित होने की शक्ति को खो देती है। जिसके फल स्वरुप वे स्थायी ऊतक का निर्माण करती है।

सरल स्थायी ऊतक

कोशिकाओं की कुछ परतें होती हैं । जिसे सरल स्थायी ऊतक कहते हैं। पैरेंकाइमा सबसे अधिक पाया जाने वाला सरल स्थायी ऊतक है। पतली कोशिकाओं भित्ति वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है। ये जीवित कोशिकाएं हैं। यह प्रायः बंधन मुक्त होती हैं। तथा इस प्रकार के उत्तक की कोशिकाओं के मध्य काफी रिक्त स्थान पाया जाता है।


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पादप ऊतक क्या हैं।


पादप ऊतक पौधों में वृद्धि कुछ निश्चित क्षेत्र में ही होती है। ऐसा विभाजित ऊतकों के उन भागों में पाए  जाने के कारण होता हैं। ऐसा ऊतकों को विभाज्योतक(Meristematic Tissue) भी कहा जाता हैं‌। ये विभज्योतक किस में स्थित है। विभज्योतक की उपस्थिति वाले क्षेत्रों के आधार पर इन्हें शीर्षस्थ के बियम अंतर्विष्ट भागो में वर्गीकृत किया जाता हैं। विभज्योतक के द्वारा तैयार नई कोशिका प्रारम्भ म... Read More

पादप ऊतक

पौधों में वृद्धि कुछ निश्चित क्षेत्र में ही होती है। ऐसा विभाजित ऊतकों के उन भागों में पाए  जाने के कारण होता हैं। ऐसा ऊतकों को विभाज्योतक(Meristematic Tissue) भी कहा जाता हैं‌। ये विभज्योतक किस में स्थित है। विभज्योतक की उपस्थिति वाले क्षेत्रों के आधार पर इन्हें शीर्षस्थ के बियम अंतर्विष्ट भागो में वर्गीकृत किया जाता हैं। विभज्योतक के द्वारा तैयार नई कोशिका प्रारम्भ में विभज्योतक की तरह होती हैं।लेकिन जैसे ही ये बढ़ती और परिपक्व होती हैं। इनकी गुणों में धीरे-धीरे परिवर्तन होता हैं और ये दूसरे ऊतकों के घटकों के रूप में विभाजित हो जाती हैं।


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