एक जंगल में दो दोस्त रहते थे, एक आम का पेड़ और एक बरगद का पेड़। मैं एक दूसरे से बातें करते और पूरे दिन मजा करते थे। हर रात बाघ और शेर उसके नीचे सोते थे। आम का पेड़ जानवरों से नफरत करता था। उसने कहा, "मैं उन्हें भाग दूंगा, वे तेरे दहाड़ते हैं। बरगद के पेड़न कहा, इतनी अशिष्ट मैं बानो। हम पेड़ों और जानवरों की एक-दूसरे की आवश्यकता है। हमें तालमेल से रहना चाहिए और एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। आम का पेड़ अदियाल था। वह उसकी सुनने को तैयार न था। वह उनकी सुनने को तैयार नहीं था। उसे रात जब जानवर उसके नीचे सो रहे थे, आम के पेड़ ने अपनी शाखाओं को जोर से हिलाया। और तेज आवाज निकाली। जानवरों ने सोचा कि वो एक राक्षस था और भाग गए। आम का पेड़ हंसा और प्रसन्न हुआ।
अगली शाम दो लकड़हारे जंगल में आय। उनके हाथों में कुलहड़ियां था। उन्होंने बड़ा आम का पेड़ देखा और बहुत खुश हुए। एक लकड़हारे ने कहां, "दोस्तों, देखो कितना बड़ा पेड़ है ये!"दूसरे ने कहा, "हां, और यहां कोई नहीं है, न इंसान न कोई जंगली जानवर। इसीलिए चलो इस पेड़ को काटते हैं।" इन्होंने पेड़ काटना शुरू किया। आम का पेड़ दर्द से चिल्लाने लगा। अपने मित्र की दशा देखकर बरगद का पेड़ चिल्लाया, "मदद करो! मदद करो!"उनकी आवाज़ जंगली जानवरों ने सुन ली। वे बरगद के पेड़ ओर भागे। जब लकड़हारा ने जंगली जानवरों को वे अपनी कुलहड़ियां छोड़कर वहां से भाग गए। आम का पेड़ बोला तुम सही थे, मित्र ! हमें खुश और सुरक्षित रहने के लिए एक दूसरे की आवश्यकता है।
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मेरा नाम प्रतीक्षा प्रजापति है। मैं दसवीं क्लास में पढ़ती हूं। मेरे पिताजी का नाम श्रीमान सोनू कुमार है। मेरी माता जी का नाम श्रीमती रेखा देवी है। मेरे दो बहन भाई और है। मेरी बहन का नाम प्रिया है, और मेरे भाई का नाम आर्यन प्रजापति है। मेरे गांव का नाम असदपुर करांजलि देवबंद सहारनपुर हैं। मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना मेरी कामयाबी है। मैं अपने जीवन में कामयाब होना चाहती हूं।
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