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Blog by partiksha | Digital Diary

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जयशंकर प्रसाद


         जयशंकर प्रसाद जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी सन 1890 ई में जन्मे जयशंकर प्रसाद की बाल्यकाल में ही इनके पिता देवीप्रसाद तथा बड़े भाई का स्वर्गवास हो गया ; अतः अल्पायु में ही लाड़ प्यार में पाले प्रसाद जी को घर का सारा उत्तरदायित्व वहन करना पड़ा। विद्यालयी शिक्षा छोड़कर इन्होंने घर पर ही अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, संस्कृत भाषा का अच्छा ज्ञान प्राप्त&nb... Read More

         जयशंकर प्रसाद

जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी सन 1890 ई में जन्मे जयशंकर प्रसाद की बाल्यकाल में ही इनके पिता देवीप्रसाद तथा बड़े भाई का स्वर्गवास हो गया ; अतः अल्पायु में ही लाड़ प्यार में पाले प्रसाद जी को घर का सारा उत्तरदायित्व वहन करना पड़ा। विद्यालयी शिक्षा छोड़कर इन्होंने घर पर ही अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, संस्कृत भाषा का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया।

इन्होंने अपने पैतृक व्यवसाय को करते हुए भी अपने काव्य प्रेरणा को जीवित रखा। इनका मन अवसर बातें ही कविता कामिनी के कानन में भ्रमण करनेलगता था। अपने मन में आए भाव को यह दुकान की बही के पन्नू पर लिखा करते थे। इस प्रकार जयशंकर पसाद का काव्य जीवन आरंभ हुआ। प्रसाद जी काजीवन बहुत सरल था। यह सभा सम्मेलनों को भीड़ में बहुत दूर रखा करते थे।

जय बहुमुखी प्रतिभा के घनी और भगवान शिव के उपासक थे। इनके पिता साहित्य प्रेमी और साहित्यकार ऑन का सम्मान करने वाले व्यक्ति थे, जिसका प्रसाद जी के जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा।अत्यधिक श्रम तथा राज्यक्ष्मा से पीड़ित होने के कारण 14 नवंबर, 1937 ई को लगभग 48 वर्ष की अल्पायु में इनका देहावसान हो गया। जयशंकरपसाद आधुनिक हिंदी काव्य के एक प्रथम कवि थे।

जिन्होंने अपने काव्य में सूक्ष्म रहस्यवादी अनुभूतियां का चित्रण किया। यही इस काव्य  की प्रमुख विशेषता थी। इसकी इस नवीन प्रयोग के काव्य जगत में क्रांति उत्पन्न कर दी, जिसके परिणाम स्वरूप हिंदी साहित्य में छायावाद।  नाम से एक युग का सूत्रपात हुआ। इसके द्वारा रचित कामायनी छायावादी युग की अप्रतिम कृति है।


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26 जनवरी


26 जनवरी हमारे देश की 77 वी 26 जनवरी कि आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू हुआ था, जिसने भारत को पूर्ण रूप से एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया। भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान हैं। डॉ भीमराव अंबेडकर जी के नेतृत्व में बना हमारा संविधान हमें समनता, स्वतंत्रता, और न्याय का अधिकार देता है। आज का दिन हमें अपने महान स्वतंत्रता सेनानीयों ... Read More

26 जनवरी

हमारे देश की 77 वी 26 जनवरी कि आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान लागू हुआ था, जिसने भारत को पूर्ण रूप से एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया। भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान हैं। डॉ भीमराव अंबेडकर जी के नेतृत्व में बना हमारा संविधान हमें समनता, स्वतंत्रता, और न्याय का अधिकार देता है।

आज का दिन हमें अपने महान स्वतंत्रता सेनानीयों के बलिदान को याद करने का अवसर देता है। उनकी कड़ी मेहनत और त्याग के कारण ही आज हमें एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं। गणतंत्र दिवस हमारी विविधता में एकता का उत्सव है। यह दिवस के अवसर पर देशभर झंडा फहरायाराया जाता हैं और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजन किए जाते हैं।

दिल्ली के राजपथ पर विशेष परेड का आयोजन होता है, जिसमें भारतीय सेना, संस्कृतिक का प्रदर्शन होता है।आइए, हम सब यह संकल्प लेते हैं कि, हम देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे। देश की एकता और अखंडता को बनाए रखेंगे। 

                   जय हिंद , जय भारत

आन देश की शान देश की 

इस देश की हम संतान है 

तीन रंगों से रंगा तरंगा

हम सब की पहचान है।

                                      धन्यवाद


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बेरोजगारी हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या है।


           बेरोजगारी बेरोजगारी का अर्थ - बेरोजगारी की समस्या हमारे देश की एक प्रमुख समस्या है। यह दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इससे एक और गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है, जो है भखमरी,  भुखमरी से आदमी इस हद तक पहुंच जाता है कि वह आत्महत्या करने को तैयार हो जाता है। वह चोरी, डकैती, हिंसा आदि अनेक समस्याओं का मूल कारण बेरोजगारी है। जब कोई योग्य तथा काम करने के लिए इ... Read More

           बेरोजगारी

बेरोजगारी का अर्थ -

बेरोजगारी की समस्या हमारे देश की एक प्रमुख समस्या है। यह दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इससे एक और गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है, जो है भखमरी,  भुखमरी से आदमी इस हद तक पहुंच जाता है कि वह आत्महत्या करने को तैयार हो जाता है। वह चोरी, डकैती, हिंसा आदि अनेक समस्याओं का मूल कारण बेरोजगारी है। जब कोई योग्य तथा काम करने के लिए इच्छुक व्यक्ति प्रचलित मजदूरी पर काम करने के लिये तो ऐसी अवस्था बेरोजगारी कहलाती है।

बेरोजगारी का कारण 

बेरोजगारी के कारण कुछ इस प्रकार है। जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि, शिक्षक का अभाव वैज्ञानिक उपकरणों का अधिक मात्रा में प्रयोग जिससे सारा कार्य मशीन द्वारा हो। और सरकारी नौकरी में कमी हो रही है।

• बढ़ती जनसंख्या -

जिसमें यह एक प्रमुख कारण है बेरोजगारी का। बढ़ती जनसंख्या से कई बड़ा ऑन का सामना करना पड़ता है। 

• शिक्षा की प्रणाली -

हमारे देश में शिक्षा का अभाव एक प्रमुख कारण है, क्योंकि हमारे देश में शिक्षा सिर्फ प्रस्तुक तक ही सीमित है। 

• उद्योग में विकास की कमी -

देश में उद्योगों का विकास बहुत धीमा है। जिससे लोगों को रोजगार नहीं मिलता हैं।

बेरोजगारी का समाधान -

इसे पूर्ण रूप से खत्म नहीं कियाज सकता। सरकार के कुछ अच्छे प्रयासों से इस काम किया जा सकता है। सर्वोत्तम हमें बढ़ती जनसंख्या को काबू करना होगा। दूसरी चीज शिक्षा प्रणाली अच्छी होनी चाहिए। इसके लिए हमें भी जागरूक होने की ज़रूरत है। हमें स्वयं का छोटा सा काम शुरू करके लोगों को रोजगार देना चहिए। ज्यादा से ज्यादा मजदूरको रोकना चाहिए। 

बेरोजगारी के प्रकार-

• सामान्य बरोजगारी -

यह वह स्थिति होती है। जिसमें व्यक्ति प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने का इच्छुक होता है। परंतु उसे कोई काम नहीं मिलता हैं।

• स्वैच्छिक बेरजगारी -

जब किसी व्यक्ति को कहां मिल रहा है, परंतु वह अपनी इच्छा से काम नहीं करना चाहता है तो उसे स्वैच्छिक बेरोजगारी कहते हैं।

 • अक्षमता बेरोजगारी - 

जब कोई व्यक्ति शारीरिक या मनसिक रूप से काम करने में सक्षम नहीं होता है, तो अक्षमता बेरोजगारी कहते हैं। 

• संरचनात्मक बेरोजगारी -

जब किसी राष्ट्र में भौतिक, वृत्तीय और मानवीय संरचना कमजोर होने के कारण रोजगार का अभाव होता है। तो उसे संरचनात्मक बेरोजगारी कहते हैं।

उदाहरण 

•किसी राष्ट्र में उत्पादन कम होने के कारण।

•जब किसी राष्ट्र में परिवहन की अधिक समस्या।

•जब किसी राष्ट्र में ज्ञान और कौशलकी कमी होती है।

• मौसमी बेरोजगारी -

मौसमी बेरोजगारी में लोगों को साल के कुछ ही महीने काम मिलता हैं। और बाकी महीने उन्हें कुछ काम नहीं मिलता है।


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राष्ट्रीय मतदाता दिवस


     राष्ट्रीय मतदाता दिवस हमारे भारत देश में हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस पहली बार वर्ष सन 2011 में मतदाताओं मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मनाया गया था। यह दिवस लोगों को मतदान के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना दिवस के दिन ही राष्ट्रीय मतद... Read More

     राष्ट्रीय मतदाता दिवस

हमारे भारत देश में हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस पहली बार वर्ष सन 2011 में मतदाताओं मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मनाया गया था। यह दिवस लोगों को मतदान के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना दिवस के दिन ही राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है।

इस दिन मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन चुनावी प्रक्रिया में अच्छा प्रदर्शन करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया जाता है। यह दिवस आम नागरिकों को यह बतलाता है कि एक वोट भी देश के हित में कितना निर्णायक सिद्ध हो सकता है।

यह दिवस प्रत्येक वर्ष एक अलग विषय (थीम) के साथ मनाया जाता है। इस दिन देश के प्रत्येक मतदाता को अपनी सक्रिय भागीदारी के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करने का करण लेना चाहिए। मतदान एक नागरिक का अधिकार तथा कर्तव्य दोनों है। इसके माध्यम से हम अपने देश के भविष्य को आकर देते हैं। हमारे द्वारा चुने गए नेता हमारे देश का शासन चलाते हैं। इसके उद्देश्य लोकतंत्रक को मजबूत बनाते हैं।

 धन्यवाद


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हरिवंश राय बच्चन


       हरिवंशरय बच्चन डॉ हरिवंश राय बच्चन का जन्म प्रज्ञा के एक सम्मानित कायस्थ परिवार में सन 1907 ई में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रतापनरायण था। माता-पिता की धार्मिक रुचियां व संस्कारों का उनके जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा। इनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू माध्यम से हुई। इन्होंने वाराणसी व प्रयाग में शिक्षा प्राप्त में यह अनेक वर्षों तक प्रयोग विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रध्यापक... Read More

       हरिवंशरय बच्चन

डॉ हरिवंश राय बच्चन का जन्म प्रज्ञा के एक सम्मानित कायस्थ परिवार में सन 1907 ई में हुआ था। इनके पिता का नाम प्रतापनरायण था। माता-पिता की धार्मिक रुचियां व संस्कारों का उनके जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा। इनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू माध्यम से हुई। इन्होंने वाराणसी व प्रयाग में शिक्षा प्राप्त में

यह अनेक वर्षों तक प्रयोग विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रध्यापक रहे। सन् १९५५ ई० में ये विदेश मंत्रालय में हिंदी विशषज्ञ के पद पर आसीन हुए। सन्१९६६ ई० में इन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया। हरिवंश राय बच्चन तत्कालीन वातावरण से प्रभावित होकर युवाकाल में ही पढ़ाई छोड़कर राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े।

 पत्नी के वियोग ने इन्हीं निराशा वेद दुख से।  भर दिया। किंतु कुछ समय पश्चात इन्होंने तेजी बचपन से दोबारा विवाह करके पूर्ण नये सुख और संपन्नता से परिपूर्ण जीवन किया। २८ जनवरी सन २००३ ई० को निधन  हो गया। अध्यापक राज्यसभा सदस्य तथा कई आदि   रहे। इन्हें पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित    किया गया।


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मीराबाई


               मीराबाई  मीराबाई का जन्म १४९८ ई० मैं राजस्थान मैं मेड़ता के समीप चौकड़ी नामक गांव में हुआ। जोधपुर के संस्थापक राव जोधाजी की प्रपौत्री एवं रत्नसिंह की पुत्री भी बचपन में ही में की माता का स्वर्गवास हो गया था। अतः इनका पालन पोषण दादा की देखरेख मैं राजश्री ठाट बाट के साथ हुआ। मेरा जब मात्र 8 वर्ष    की थी तभी उन्होंन कृष्ण को... Read More

               मीराबाई 

मीराबाई का जन्म १४९८ ई० मैं राजस्थान मैं मेड़ता के समीप चौकड़ी नामक गांव में हुआ। जोधपुर के संस्थापक राव जोधाजी की प्रपौत्री एवं रत्नसिंह की पुत्री भी बचपन में ही में की माता का स्वर्गवास हो गया था। अतः इनका पालन पोषण दादा की देखरेख मैं राजश्री ठाट बाट के साथ हुआ। मेरा जब मात्र 8 वर्ष    की थी तभी उन्होंन कृष्ण को पति में स्वीकार कर लिया था।

उनकी भक्ति भावना के विषय में डॉक्टर राजेश्वर प्रसाद चतुर्वेदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए लिखा है- "२० वर्ष की अवस्था  में ही मेरा विधवा हो गई और जीवन का लौकिक आधार चीन जाने पर अब स्वाभाविक रूप से उनका असीम स्नेह अनन्त प्रेम की अद्भुत प्रतिभा स्त्रोत गिरधरलाल की ओर उमड़ पड़ा। मीरा का विवाह चित्तौड़ की महाराणा सांगा की सबसे बड़े पुत्र भोजराज के साथ हुआ।

विवाह के कुछ समय बाद ही इसके पति की मृत्यु हो गई। इसका मेरा के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि वह तो पहले से ही भगवान कृष्ण को अपने पति रूप में स्वीकार कर चुकी थीं। वे सदैव श्रीकृष्णा के चरणों मैं अपना ध्यान केंद्रित रखती थी। मीरा के इस कार्य से परिवार के लोग रुष्ट रहते थ; क्योंकि उनका यह कार्य राजघराने की प्रतिष्ठा की विपरीत था।

मीरा के भजन एवं गीतों मैं सच्चे प्रेम की पीर और वेदना का रूप साथ पाया जाता हैं। मीरा को पूरा संसार मिथ्या प्रतीत होता है। इसलिए वह कृष्ण भक्ति को अपने जीवन के रूप मैं स्वीकार करती है। कहा जाता है कि 'हरि तुम हरौ जन की पीर'पंक्ति गाते - गाते मीराबाई सन् १५४६ ई० में द्वारिका मैं कृष्ण की भक्ति मूर्ति में विलीन हो गई। 


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मुंशी प्रेमचंद


            मुंशी प्रेमचंद  प्रेमचंद का जन्म ३१ जुलाई सन १८८० ई०      में उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लमही        ग्राम में मे हुआ था। इनके पिता का नाम मुंशी अजायबराय था। किंतु यह अपनी कहानी उर्दू   में 'नायाबराय' के नाम से लिखते थे और हिंदी  मैं प्रेमचंद के नाम से। कुछ राजनैतिक कहानी इन्होंने उर्... Read More

            मुंशी प्रेमचंद 

प्रेमचंद का जन्म ३१ जुलाई सन १८८० ई०      में उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लमही        ग्राम में मे हुआ था। इनके पिता का नाम मुंशी अजायबराय था। किंतु यह अपनी कहानी उर्दू   में 'नायाबराय' के नाम से लिखते थे और हिंदी  मैं प्रेमचंद के नाम से। कुछ राजनैतिक कहानी इन्होंने उर्दू में 'धनपत' राय नाम से लिखी। इसके द्वारा रचित 'सोचे वतन'ने ऐसी हलचल मचायी की सरकार ने उसे जब्त कर लिया। गरीब परिवार में जन्म लेने और अल्पायु में ही पिता की मृत्यु हो जाने के कारण इनका बचपन बड़े कष्टों से बीता, किंतु जिस सास और परिश्रम से इन्होंने अपना अध्ययन जारी रखा।

इन्होंने एम ए और बी ए की परीक्षा उत्तीर्ण     की। प्रारंभ में ही कुछ वर्षों तक एक स्कूल में २० रुपए मासिक पर अध्यापक रहे। बाद में शिक्षा विभाग से सब-डिप्टी इंस्पेक्टर हो गय। कुछ  दिनों बाद असहयोग आंदोलन से सहानुभूति रखने   के कारण इन्होंने सरकारी नौकरी से त्याग-पत्र  दे दिया और आजीवन साहित्य सेवा करते रहे। इन्होंने अनेक पत्रिकाओं का संपादन किया।  फिर उनकी मृत्यु ८ अक्टूबर १९३६ ई को हो गई। यह अध्यापक, लेखक, पत्रकार भी थे।

                               धन्यवाद               


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भारतेंदु हरिश्चंद्र


          भारतेंदु हरिश्चंद्र हरिश्चंद्र का जन्म सन १८५० ई० को काशी की एक संपन्न वैश्य परिवार में हुआ था। इनके पिता बाबू गोपाल चंद्रजी 'गिरधरदास'के उपन्यास से कविता लिखा करते थे। जल्पायु में ही माता-पिता का साया उठ गया, और घर का सारा भोज उनके कंधों पर आ पड़ा इन्होंने हिंदी, मराठी, बांग्ला, संस्कृत आदि भाषाओं का ज्ञान घर पर ही प्राप्त किया। १३ वर्ष की अल्प... Read More

          भारतेंदु हरिश्चंद्र

हरिश्चंद्र का जन्म सन १८५० ई० को काशी की एक संपन्न वैश्य परिवार में हुआ था। इनके पिता बाबू गोपाल चंद्रजी 'गिरधरदास'के उपन्यास से कविता लिखा करते थे। जल्पायु में ही माता-पिता का साया उठ गया, और घर का सारा भोज उनके कंधों पर आ पड़ा इन्होंने हिंदी, मराठी, बांग्ला, संस्कृत आदि भाषाओं का ज्ञान घर पर ही प्राप्त किया।

१३ वर्ष की अल्पायु में ही बन्नो देवी से इनका विवाह हुआ। यहां के बाद २५ वर्ष की अवस्था  में इन्होंने जगन्नाथपुरी की यात्रा की, यहीं से इनके  मन में साहित्य-सृजन के अंकुर फटे। इन्होंने अपने साहित्यिक जीवन में अनेक पत्र पत्रिकाओं का संपादन किया और बनारस में एक कॉलेज की स्थापना की। इसके अतिरिक्त इन्होंने हिंदी साहित्य की समृद्धि के लिए अनेक सभा संस्थाओं की स्थापना भी की।

इनकी ऐसी दानशीलता की प्रवृत्ति के कारण इनका छोटा भाई संपत्ति का बंटवारा करके इसे अलग हो गया। इस घटना का भारतेंदु के जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ा और इन्हें अनेक कष्ट झेलने पडे। यह ऋणि हो गए। अपनी ३५ वर्ष की अल्पायु में इन्होंने १७५ ग की रचना करके हिंदी साहित्य की महती सेवा की। सन १८८५ ईस्वी में ३५ वर्ष की अल्पायु में इनका निधन हो गया।

 


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सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम


सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम  प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अमूल्य है। इसका कोई मतलब नहीं हो सकता जब घर से बाहर सड़क पर निकलते हैं तो दुर्घटनाओं की आशंकाओं के चलते हमारा जीवन जिंदगी की कश्मकश के बीच दांव पर लगा होता हैं। सड़क पर चलते जीवन पर मंडराते इस खतरे को हम सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियमों का पालन करके समाप्त नहीं कर सकते तो न्यूनतम अवश्य कर सकते हैं। सड़क दुर्घटनाओं एवं उससे होने वाली... Read More

सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम 

प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अमूल्य है। इसका कोई मतलब नहीं हो सकता जब घर से बाहर सड़क पर निकलते हैं तो दुर्घटनाओं की आशंकाओं के चलते हमारा जीवन जिंदगी की कश्मकश के बीच दांव पर लगा होता हैं। सड़क पर चलते जीवन पर मंडराते इस खतरे को हम सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियमों का पालन करके समाप्त नहीं कर सकते तो न्यूनतम अवश्य कर सकते हैं। सड़क दुर्घटनाओं एवं उससे होने वाली म्यूट का सबसे मुख्य कारण यातायात के नियमों की जानकारी का अभाव और उन नियमों का पालन न करना ही है। लोग इन नियमों को जाने, समझे, उनका पालन करें और दूसरों को भी सुरक्षित बनाने में सहयोग करें। 

दो शब्दों से मिलकर है, 'रात + आयात'; जिसका अर्थ है, आना- जना। संपूर्ण विश्व में यातायात से संबंधित महत्वपूर्ण नियम बनाए गए हैं। क्योंकि इससे नए केवल यातायात सुखम बनता है बल्कि सड़क दुर्घटना से होने वाले भयावह खतरों से भी बचा जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रतिवर्ष १० लोक से अधिक सड़क- हादसों के शिकार व्यक्तियों की मौत हो जाती   है।

हादसों से बचने के लिए यातायात के नियमों   का पालन करना अति आवश्यक है इसके    ज्ञान के अभाव में एवं एवं सुचारु रूप से    पालन न करने के कारण भारत में प्रत्येक वर्ष १,४०,००० से अधिक व्यक्ति सड़क दुर्घटना      में मारे जाते हैं। ऐसी विकट परिस्थितियों की भयवहता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है। कि विवभर के कुल वाहनों में से केवल एक प्रतिशत ही वहां भारत में हैं।      जबकि विश्व की कुल सड़क दुर्घटना मैं से १०% हादसे भारत में होते हैं।


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रवींद्रनाथ टैगोर


          रवींद्रनाथ टैगोर रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म सन् १८६१ को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ टैगोर तथा माता का नाम शारदा देवी था। तू इनके पिता तथा दादा अत्यंत संपन्न व्यक्ति होने के कारण के साथजीवन व्यतीत करते थे। उनके परिवार का समाज में अत्यधिक सम्मान था, इसी सम्मान के कारण लोग इनके दादा और पिता को ठाकुर कहकर बुलाते थे। यही ठाकुर शब्द अंग्र... Read More

          रवींद्रनाथ टैगोर

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म सन् १८६१ को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ टैगोर तथा माता का नाम शारदा देवी था। तू इनके पिता तथा दादा अत्यंत संपन्न व्यक्ति होने के कारण के साथजीवन व्यतीत करते थे। उनके परिवार का समाज में अत्यधिक सम्मान था, इसी सम्मान के कारण लोग इनके दादा और पिता को ठाकुर कहकर बुलाते थे। यही ठाकुर शब्द अंग्रेजी के प्रभाव से टैगोर बन गया। घर में नौकरों की अधिकता और विलासिता के अत्यधिक साधनों के कारण इनको स्वतन्त्रता पूर्वक घूमने तथा खेलने के अवसर प्राप्त न हो सके। यह स्वयं को बंदी जैसे अनुभव करते हुए अत्यधिक खिन्न रहते थे। 

टैगोर जी की प्रारंभिक शिक्षा बांग्ला भाषा में घर पर ही आरंभ हुई। प्रारंभिक शिक्षा समाप्त होने के पश्चात इनका प्रवेश पहले कलकात्ता के ओरिएंटल सेमिनार विद्यालय नार्मल विद्यालय में कराया गया। रवींद्रनाथ टैगोर साहित्यकार, विचारक देशभक्त और उच्च कोटि के दार्शनि थे। सरस्वती के इस महान आराधक का ७ अगस्त १९४१ ई० को निधनह गया।


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