श्री रामचंद्र जी के कार्य श्रेष्ठ और लोक कल्याणकारी थे। उनके व्यक्तित्व उच्च मानवीय गुणों से संपन्न था। राम अयोध्या निरीक्षा दशरथ के सबसे बड़े पुत्र थे। राम गुरुजनों की आज्ञा का पालन निष्ठा पूर्वक करते थे। पिता की आज्ञा से राम ने अपने छोट भाई लक्ष्मण के साथ ऋषि विश्वामित्र के आश्रम में जाकर उनके यज्ञ को हानि पहुंचाने वाले राक्षसों का वध किया। यहीं से ये सीता जी के स्वयंवर में गए। वहां शिव जी का धनुष तोड़ने के पश्चात सीता जी के साथ श्री राम का विवाह हुआ।
जब राजा दशरथ वृद्ध हो चली, तब उन्होंने राम को शासन का भार सपना चाहा। परंतु मथुरा दासी के बहकावे मैं आकर कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। यह वर्ड दशरथ ने देवासुर संग्राम में कैकेयी के असीम शौर्य और सहायता से प्रसन्न होकर उसे मांगने को कहा था। कैकेयी ने भविष्य में कभी मांगने की बात कही थी। पहले वरदान मैं उसने भारत को राजगद्दी देने को कहा। और दूसरे वरदान में राम को 14 वर्ष का वनवास मांगा।
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मेरा नाम प्रतीक्षा प्रजापति है। मैं दसवीं क्लास में पढ़ती हूं। मेरे पिताजी का नाम श्रीमान सोनू कुमार है। मेरी माता जी का नाम श्रीमती रेखा देवी है। मेरे दो बहन भाई और है। मेरी बहन का नाम प्रिया है, और मेरे भाई का नाम आर्यन प्रजापति है। मेरे गांव का नाम असदपुर करांजलि देवबंद सहारनपुर हैं। मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना मेरी कामयाबी है। मैं अपने जीवन में कामयाब होना चाहती हूं।
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