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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se Digital Diary Submit Post


गुरु रविदास जयंती


आज हम सभी गुरु रविदास जयंती के शुभ अवसर पर एकत्रित हुए हैं यह दिन महान संत गुरु रविदास जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है गुरु रविदास जी 15वीं शताब्दी के एक महान संत समाज सुधारक और कवि थे उन्होंने समाज में पहले जातिवाद छुआछूत और अन्य का विरोध किया और सामान्य प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया  गुरु रविदास जी का जीवन परिचय  गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था वह बचपन... Read More

आज हम सभी गुरु रविदास जयंती के शुभ अवसर पर एकत्रित हुए हैं यह दिन महान संत गुरु रविदास जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है गुरु रविदास जी 15वीं शताब्दी के एक महान संत समाज सुधारक और कवि थे उन्होंने समाज में पहले जातिवाद छुआछूत और अन्य का विरोध किया और सामान्य प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया

 गुरु रविदास जी का जीवन परिचय

 गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था वह बचपन से ही भक्ति और आध्यात्मिकता भेरुजी रखते थे उन्होंने समाज को यह सिखाया की कोई भी व्यक्ति अपने जन्म से महान नहीं होता बल्कि उसके कर्म उसे महान बनाते हैं 

 गुरु रविदास जी की शिक्षाएं 

 सभी इंसान समान है- इन्होंने समाज में सभी को एक सम्मान मानने की बात कही

 ईश्वर की भक्ति सर्वोपरि है -इन्होंने कहा कि सच्चे मन से की गई भक्ति सबसे बड़ी पूजा है

 परिश्रम और सच्चाई -इन्होंने मेहनत और ईमानदारी से जीवन जीने पर जोर दिया

 बेगमपुर की कल्पना -इन्होंने एक ऐसा समाज की कल्पना की जहां कोई दुख गरीबी और भेदभाव न हो 

 गुरु रविदास जयंती का महत्व

 इस दिन भक्तगण भजन कीर्तन शोभायात्रा और लंगर सेवा का आयोजन करते हैं उनकी शिक्षाएं आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है 

 निष्कर्ष

 गुरु रविदास जी के विचार हमें सामान्य प्रेम और भाईचारा की सीख देते हैं यदि हम उनके दिखाएं मार्ग पर चले तो समझ में सद्भाव बना रहेगा

 जय गुरु रविदास जी

 धन्यवाद


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स्वच्छ भारत अभियान


 "हर नागरिक का हुई  ये सपना,  स्वच्छ हो संपूर्ण भारत अपना "  प्रस्तावना :- स्वच्छता का हम सभी के जीवन में विशेष महत्व है स्वछता हमारे घर अथवा गली मोहल्ले के लिए तो जरूरी होती ही है साथ ही संपूर्ण देश हेतु भी आवश्यक होती है यदि हमारे घर आंगन की तरह पूरा देश भी स्वच्छ रहे तो भारत स्वर्ग समान बन जाएगा इसी को मध्य नजर रखते हुए भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत अभियान आरं... Read More

 "हर नागरिक का हुई  ये सपना,

 स्वच्छ हो संपूर्ण भारत अपना "

 प्रस्तावना :- स्वच्छता का हम सभी के जीवन में विशेष महत्व है स्वछता हमारे घर अथवा गली मोहल्ले के लिए तो जरूरी होती ही है साथ ही संपूर्ण देश हेतु भी आवश्यक होती है यदि हमारे घर आंगन की तरह पूरा देश भी स्वच्छ रहे तो भारत स्वर्ग समान बन जाएगा इसी को मध्य नजर रखते हुए भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत अभियान आरंभ किया गया है यह एक राष्ट्रीय स्तर का ध्यान है 

 स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत:- इस अभियान की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर 2014 को हुई स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है माननीय प्रधानमंत्री बहुते द्वारा प्रत्येक देशवासी से स्वच्छ भारत अभियान पर भाग लेने और इसे सफल बनाने की अपील की गई है इस प्रकार से साफ सफाई के संदर्भ में देश के सबसे बड़े अभियान को जन आंदोलन बनाकर इसकी शुरुआत की गई है यह अभियान हमारे देश के प्रत्येक गांव और शहर में आरंभ किया गया है

 अभियान का उद्देश्य:- इस अभियान का उद्देश्य देश के प्रत्येक गली मोहल्ले गांव से लेकर प्रत्येक शहर पक्की सड़कों से लेकर शौचालय का निर्माण करना साफ सफाई कूड़े का उचित निस्तारण और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करना है लोगों की मानसिकता को बदलकर उन्हें उचित स्वच्छता रखने के पर्दे जागरूक करना घरों तक पाइपलाइन के द्वारा स्वच्छ पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित करना आती इस अभियान के उद्देश्य है 

 आखिर इस अभियान की जरूरत क्यों? यह अभियान सभी भारतवासियों के लिए बेहद जरूरी है इसके तहत भारत के हर घर में शौचालय होने से लोगों पर खुले में सोच के पर्ववर्ती खत्म हो रही है जिससे खुले पैसों से होने वाले ऑडियो से भी बचा जा रहा है और स्वच्छता भी बनी रहेगी कचरे का फुट चक्कर और दोबारा इस्तेमाल सुरक्षित दस्तरण वैज्ञानिक तरीके से बोल प्रबंध का खुदा भी स्वच्छता और हरियाली हेतु अति आवश्यक है गद्य की जानलेवा है यह कई प्रकार की बीमारियों का कारण बनती है आता लोगों पर खुद के स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक और साफ सफाई की प्रक्रियाओं का पालन करना होने के लिए हितकर होगा

 "स्वच्छता ही सेवा है,

              गद्य की जानलेवा है "

 स्वच्छ भारत अभियान का क्रियान्वयन :- इस अभियान के कितने देश से निर्धारित किए गए थे उन सभी का जीवनी स्तर पर क्रियान्वयन होता हुआ साफ दिखाई दे रहा है सरकारी आंकड़ों की बात करें तो इस अभियान के तहत अब तक लगभग 10,19,64, 757 घरों में शौचालय का निर्माण किया जा चुका है 63,55 दिखाओ ऊपर डेफिनेशन फ्री हो चुके हैं 706 जिले इसकी श्रेणी में आ चुके हैं 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में लेकर,

 इस मुहिम को सफल बना रहे हैं इस अभियान का प्रतीक चिन्ह गांधीजी का चश्मा है इसे भारत सरकार मंत्रालय के जल शक्ति मंत्रालय के अधीन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को सोपा गया है

 प्रधानमंत्री जी की अपील को पूरे देश में सहमति प्रदान की ओर यह अभियान राष्ट्रीय व्यापी आंदोलन बन कर कोबरा बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटिस्ट डे इन अभियान में सहयोग किया सफाई आंदोलन के तहत सभी जीएफ के साथ सड़कों पर उतरे 

​​​​​​ उप संहार -  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश को दासता से मुक्त कराया परंतु स्वच्छ भारत का उनका सपना पूरा नहीं हुआ किंतु अब उनका यह सपना प्रधानमंत्री जी की अगुवाई में हम सब मिलकर पूरा करेंगे एक सच्चा नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम ना तो गंदगी फैलाएंगे और ना ही फैलाने देंगे देश को अपने घर की तरह जब गाय के ताकि हम सभी तरह से कह सके कि हम सभी भारत देश में निवास करते हैं

 "बापू के सपने को करना है साकार,

 स्वच्छता से भारत को देना है आकर"

 


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विश्व हिंदी दिवस


 "सम्मान की अधिकारी है हिंदी  हमें जान से प्यारी है हिंदी "  विश्व हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना करना हिंदी के प्रति अनुराग पैदा करना हिंदी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिंदी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है  विदेश में भारत के दूतावास इस दिन को... Read More

 "सम्मान की अधिकारी है हिंदी

 हमें जान से प्यारी है हिंदी "

 विश्व हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना करना हिंदी के प्रति अनुराग पैदा करना हिंदी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिंदी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है

 विदेश में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप में मनाते हैं सभी सरकारी कार्यालय में विभिन्न विषयों पर हिंदी में व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं विश्व में मिट्टी का विकास करने और इसे प्रचारित प्रसारित करने के उद्देश्य में विश्व हिंदी सम्मेलनों की शुरुआत की गई और प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया था

 1975 से भारत मॉरीशस यूनाइटेड किंगडम 3D दांत और टॉकबैक को संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विभिन्न देश में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजित किया गया है विश्व हिंदी दिवस पहली बार 10 जनवरी 2006 को बनाया गया था तब से यह हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रतिवर्ष विश्व हिंदी दिवस के रूप में बनाए जाने की घोषणा की थी

 उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय देवी देश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिंदी दिवस मनाया था

 हिंदी दिवस अभी यह एहसास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि हिंदी भाषा पूरी दुनिया में सबसे पुरानी और सबसे प्राचीन और प्रभावशाली भाषाओं में से एक है और ऐसे में हमें अपनी मातृभाषा यानी हिंदी भाषा में बोलने में करो महसूस करना चाहिए

 हिंदी एक राष्ट्रीय के रूप में भारत को एक साथ रखती है और भारत की अखंडता और एकता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है तो लिए हम एक साथ कहे कि हमें हिंदी भाषा होने पर गर्व है 

 "हिंदी हमारी शान है,

 हिंदुस्तानियों का मान है "

 धन्यवाद:-


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विश्व शांति दिवस


​​​ विश्व शांति दिवस अथवा अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता शांति और खुशी का एक आदर्श बन जाता है विश्व शांति दिवस मुख्य रूप से पूरी पृथ्वी पर शांति और अहिंसा स्थापित करने के लिए बनाया जाता है शांति सभी को प्यारी होती है  आपको बता दे कि विश्व शांति दिवस साल 1981 से मनाया जा रहा है संयुक्त राष्ट्रीय ने दुनिया भर म... Read More

​​​ विश्व शांति दिवस अथवा अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता शांति और खुशी का एक आदर्श बन जाता है विश्व शांति दिवस मुख्य रूप से पूरी पृथ्वी पर शांति और अहिंसा स्थापित करने के लिए बनाया जाता है शांति सभी को प्यारी होती है

 आपको बता दे कि विश्व शांति दिवस साल 1981 से मनाया जा रहा है संयुक्त राष्ट्रीय ने दुनिया भर में इस दिन को बनाने की घोषणा की था कि तब आप देश और अनेक लोगों के बीच शाब्दिक कायम रह सके और वक्त का थीम write two piece of people साल 1982 से लेकर विश्व शांति दिवस को हर साल सितंबर महीने के तीसरे मंगलवार के दिन मनाया जाता है बाद में इसे बदलकर साल 2002 में 21 सितंबर कर दिया गया

 2002 के बाद से यह दिवस 21 सितंबर के दिन ही हर साल मनाया जाता है सफेद कबूतरों को हमेशा से शांति दूत माना जाता है इसलिए इस दिन सफेद कबूतरों को उड़ाने की परंपरा भी है शांति किस प्यारी नहीं होती शांति की ही खोज में मनुष्य अपना जीवन लिए सवार कर देता है लेकिन अफसोस आज इंसान दिन वह दिन इस शांति से दूर जाता जा रहा है आज चारों तरफ फैल बाजार बाद दे शांति को हमसे और भी दूर कर दिया है

 हमें यह समझना होगा कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है मानव कल्याण की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है भाषा संस्कृति पहनते भिन्न-भिन्न हो सकते हैं लेकिन विश्व के कल्याण का मार्ग एक ही है मनुष्य को नफरत का मार्ग छोड़कर प्रेम के मार्ग पर चलना चाहिए शांति के महत्व को स्वीकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 1981 में एक प्रस्ताव प्रेषित किया था जिसमें कहा गया कि हर 21 सितंबर को विश्व शांति दिवस मनाया जाएगा

 कई लोग हैं शांति का कारण विज्ञान को बताते हैं किंतु यह बात स्वच्छता गलत है विज्ञान तो एक साधन है उसे भले काम में भी लगाया जा सकता है और पूरे काम में भी जिस प्रकार बिजली भाव आदि वैज्ञानिक आविष्कारों ने विश्व को उन्नति की राह दिखाई है और जीवन को सुखी बनाया है क्या इस प्रकार अनु शक्ति का शुद्ध प्रयोग नहीं किया जा सकता इसके विपरीत बिजली और भाग को भी तो विलास कार्य स्रोतों के रूप में बढ़ता जा सकता है इससे सिद्ध हुआ की अशांति के मूल कारण विज्ञान नहीं है अभी तू उसकी आज्ञा है 

 धन्यवाद-


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Veer Abdul Hamid


This is the story of a brave Soldier named Abdul Hamid he was a company quarter master Havaldar in the Indian Army he was a very brave Soldier he Fought in the 1965 war between India and Pakistan   Abdul Hamid was born in Dhampur village of Ghazipur district in Uttar Pradesh on 1st July 1933 in a Muslim family Sakina Begum and Mohammad Usman   Would you like to know how he beca... Read More

This is the story of a brave Soldier named Abdul Hamid he was a company quarter master Havaldar in the Indian Army he was a very brave Soldier he Fought in the 1965 war between India and Pakistan 

 Abdul Hamid was born in Dhampur village of Ghazipur district in Uttar Pradesh on 1st July 1933 in a Muslim family Sakina Begum and Mohammad Usman 

 Would you like to know how he became and Hero me 1965 war between Indian and Pakistan?

 It was the early morning of 10th September 1965 India was fighting against Pakistan a Pakistani Patton tanks was marching the bhikhiwind - amritsar road in the khemkaran sector of India it had reached a village named Cheema this village was on the Indo Pak border in this sector the battle had been going on since September 6 year Havaldar Abdul Hamid and the other soldier of four grenadiers company were waiting to face the Pakistani army brave Abdul Hamid was sitting in a jeep he had a special gun the Patton tanks of the Pakistani army were not very far from him he could hit the tanks with his guns if he wanted to he was a good shot but he did not want to waste his shots he wanted to hit the tanks with each of his source the Pakistani tanks were very powerful and dangerous they were approaching nearar and nearar they were firing continuely brave Abdul Hamid March ed four word he say a Pakistani tank he turned his gun and fired is sort the tank caught fire and bird up in flames. All the soldiers of Abdul Hamid Company were very happy

 Suddenly he say another tank he fire a shot again and it also breast into flames four more tanks were seen the Pakistani Wanted to attack Abdul Hamid company and kill him he was there biggest enemy they turned the guns of their tanks towards him before they could fire Abdul Hamid hit the third tank to and their it want it had caught fireflims were rising high up into the sky but alas! 

 One Shell of the enemy hit his Jeep The Brave Hero fill down he was deeply wounded yet he did not lose heart he ordered his soldiers move forward and fight on they obeyed his orders and fought bravely 

 Some more tags of the baby were destroyed the Pakistani soldiers got afraid and fled this brave soldier of the Indian Army died for his country he was awarded the Param Vir Chakra posthumously he will always be revived and rememberd by the people for country as the bra waste hero of 1965 war against Pakistan his village has been named Hamid dham after his name


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डॉक्टर भीमराव अंबेडकर


" मैं आज आपको एक महान डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के बारे में बता रही जिन्होंने हमारे संविधान का निर्माण किया इन्हें हमेशा याद किया जाएगा"  "अगर मरने के बाद भी जीना चाहते हो तो एक काम जरुर करना पढ़ने लायक कुछ लिख जाना या लिखने लायक कुछ कर जाना" डॉ भीमराव अंबेडकर एक महान समाज सुधारक विधि बेटा और भारत के संविधान निर्माता थे उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश को महू नामक स्थान... Read More

" मैं आज आपको एक महान डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के बारे में बता रही जिन्होंने हमारे संविधान का निर्माण किया इन्हें हमेशा याद किया जाएगा"

 "अगर मरने के बाद भी जीना चाहते हो तो एक काम जरुर करना पढ़ने लायक कुछ लिख जाना या लिखने लायक कुछ कर जाना"

डॉ भीमराव अंबेडकर एक महान समाज सुधारक विधि बेटा और भारत के संविधान निर्माता थे उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश को महू नामक स्थान पर हुआ था में एक दलित परिवार से थे और बचपन से ही उन्होंने जातिगत भेदभाव का सामना किया इसके बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त करने में कभी हार नहीं मानी 

 डॉक्टर अंबेडकर ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की वह पहले भारतीय थे जिन्होंने विदेश से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की उन्होंने समाज में बराबरी और न्याय की स्थापना के लिए जीवन पर संघर्ष किया इन्होंने दलितों को उनके अधिकार दिलाने के लिए कई आंदोलन चलाए 

 डॉक्टर अंबेडकर भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार थे उन्होंने ऐसा संविधान बनाया जिसमें हर नागरिक को समान अधिकार मिल सके उन्होंने मिलाओ के अधिकार शिक्षा और सामाजिक न्याय पर विशेष ध्यान दिया 

 14 अप्रैल को उनके जन्मदिन अंबेडकर जयंती के रूप में मनाया जाता है डॉक्टर अंबेडकर का जीवन प्रेरणा का स्रोत है हमें सच्चे अर्थों में भारत रत्न थे जिनका योगदान सदैव याद किया जाएगा

 सच्चाई को कभी यारों छोड़ना नहीं अपनी बातों से मुख कभी मोड़ना नहीं जो भूल गए भीम के एहसान को हमेशा ऐसे मत करो से रिश्ता भूल कर भी जोड़ना नहीं

 धन्यवाद-


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पराक्रम दिवस


पराक्रम दिवस भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है यह दिवस हर वर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य नेताजी के अधीन भी साहस देश भक्ति और अनेक योगदान को याद करना है  परिचय:- सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था उनके पिता जानकी नाथ बस एक... Read More

पराक्रम दिवस भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है यह दिवस हर वर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य नेताजी के अधीन भी साहस देश भक्ति और अनेक योगदान को याद करना है

 परिचय:- सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था उनके पिता जानकी नाथ बस एक प्रसिद्ध वकील थे नेताजी बचपन से ही तेज सभी और कस्बा बुद्धि के थे उन्होंने अपनी शिक्षा कोलकाता और इंग्लैंड में पुरी की भारतीय प्रशासनिक सेवा आईसीएस में चयनित होने के बदलाव उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए इस सेवा को त्याग दिया

पराक्रम दिवस की शुरुआत :- भारत सरकार ने 2021 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की इस दिवस का उद्देश्य युवाओं को नेताजी के साहस निर्धारणता और संघर्ष से प्रेरणा देना ही नेताजी ने अपने जीवन में जो पराक्रम दिखाया वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है

 नेताजी का योगदान और पराक्रम नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वतंत्रता संग्राम में एक अलग रहता चुन्नी उन्होंने महात्मा गांधी की अहिंसा की नीति का सम्मान करते हुए अपनी अलग विचारधारा पर चलने का निर्णय किया उनका मानना था कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष और बलिदान से प्राप्त हो सकती है

 उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया और दिल्ली चलो का नारा आती है यह नारा भारती के दिलों में आजादी की नई लहर लेकर आया उन्होंने तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा के माध्यम से युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया

 पराक्रम दिवस का महत्व:-

 पराक्रम दिवस केवल नेताजी के योगदान को याद करने का दिन नहीं है बल्कि यह हर भारतीय को यह याद दिलाता है कि पराक्रम और साहस के बिना स्वतंत्रता और सम्मान की प्राप्ति संभव है इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों रेडियो और संगतियों का आयोजन किया जाता है जिसमें नेताजी के जीवन और उनके आदर्शों पर चर्चा की जाती है

 नेताजी की शिक्षाएं और आज का युग :-

 नेताजी ने भारतीय युवाओं को हमेशा अपने अधिकारों के लिए खड़े होने और अपने कर्तव्य को निभाने की प्रेरणा दी उनका जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और दंड निश्चय के साथ आगे बढ़ना चाहिए आज के समय में जब युवा पीढ़ी के सामने कई चुनौतियां हैं नेताजी का जीवन एक आदर्श है

 नेताजी का संदेश और प्रेरणा:-

 नेताजी का संदेश था कि हम अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए हर संभव प्रयास करें उन्होंने अपने जीवन के हर क्षण कोर्स देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित किया उनकी यह भावना हमें सिखाती है कि किसी भी नागरिक का प्रथम कर्तव्य देश के प्रति नागरिक से होना चाहिए

 निष्कर्ष:-

पराक्रम दिवस केवल एक तिथि नहीं है बल्कि एक भावना है जो हमें नेताजी के पराक्रम निष्ठा और त्याग की याद दिलाती है यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमें अपनी आजादी की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी इसकी प्राप्ति में न जाने कितने क्रांतिकारी शहीद हुए इसलिए हमें इस आजादी को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए

Thanks for watching -

 


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Planets roll call


Eight planets around the sun,  Listen as I call each one,  Mercury! year! number one, Closest  planet to the sun.  Vinus year number two,  Shining bright just like new.  Earth! here !number three Earth is home to you and me.  Mars !  Here! number four,  Red and ready  to explore.  Jupiter! here !number five,  Largest planet, that's no... Read More

Eight planets around the sun, 

Listen as I call each one, 

Mercury! year! number one,

Closest  planet to the sun. 

Vinus year number two, 

Shining bright just like new. 

Earth! here !number three

Earth is home to you and me. 

Mars !  Here! number four, 

Red and ready  to explore. 

Jupiter! here !number five, 

Largest planet, that's no jive. 

Saturn! Here! Number six , 

With rings of dust and ice that mix. 

Uranus! Here! Number seven, 

A planet tilted high in heaven. 

Neptune! Here! Number  eight, 

With one dark Spot whose size is great

 Thank you so much-


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The man who gave India wings


 do you know the name of the man who gave India wings  it was Jahangir ratn ji Dada bhai Tata he was properly know as grd he was born in Paris of July 29 , 1904 his father Ratanji Dadabhai Tata was Persi and mother Suzanne bruere was France Tata childhood was spent travelling between France and India . Some people said in just that he got his surname from an a​​​ncestor who is tooed on t... Read More

 do you know the name of the man who gave India wings

 it was Jahangir ratn ji Dada bhai Tata he was properly know as grd he was born in Paris of July 29 , 1904 his father Ratanji Dadabhai Tata was Persi and mother Suzanne bruere was France Tata childhood was spent travelling between France and India .

Some people said in just that he got his surname from an a​​​ncestor who is tooed on the shores  Bombay and waved  ta- ta  desperating ships

In 1924 at the age of 20 as a friends citizen he was recruited into the French Army a year letter he was sent to England to prepare for admission in Cambridge University but his father Ratanji asked him to return to Bombay to work in his crystal plant called the Tata Steel industry is father did not consider a College degree necessary to  succeed in life a year letter ratnajee died his elderst son and heir Jahangir inherited the directorship of the Tata sons and board

Jrd became Indians first licensed pilot in  1929 it was jrd who gave India wins of fly in 1932 jrd setup data aviation  service by piloting the first flight himself from Karachi to Bombay in a small aircraft jrd at the age of 34 vause elected the chairman of Tata and sons in 1938 making him the youngest head  of the largest industrial group in India in 1948 Air India was launched jointly by jrd and the Indian government in 1953 jrd was made the chairperson of air India for the next 25 years he worked tirelessly to make Air India successful jrd excelled not only as an aviator but also as a philanthripist, educationist, sportman poet and sculptor he received the highest civilian award the Bharat Ratna in 1992 from the Indian government

Jrd last major public statement was an appeal to  Indians to maintain peace he breathed his last own November 2993 to you know jrd Tata was not only the director of the TATA company but also a great human being he made sure that 75% of the company profit was spent on looking after the work is and those in need

 When you work ,work as if Everything depends on you when you pray as if everything depend on god - JRD Tata

 Thank you so much-


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The Missile man of India


Avul pakir jainulabdeen Abdul Kalam usually known as doctor APJ Abdul Kalam was the 11th president of India (from 2002 to 2007) APJ Abdul Kalam was born 15th October 1931 at Rameshwaram in  Tamilnadu all thought he was born in a poor family ? he was an exceptionally brilliant child his father jainulabdeen was a boat owner who ferried Hindu pilgrims temple in Tamilnadu his father was also and... Read More

Avul pakir jainulabdeen Abdul Kalam usually known as doctor APJ Abdul Kalam was the 11th president of India (from 2002 to 2007) APJ Abdul Kalam was born 15th October 1931 at Rameshwaram in  Tamilnadu all thought he was born in a poor family ? he was an exceptionally brilliant child his father jainulabdeen was a boat owner who ferried Hindu pilgrims temple in Tamilnadu his father was also and iman at the local mosque and his mother Ashi Amma he he sold tamarind seeds and newspaper to support his family

After completing his schooling at the Rameshwaram Elementary School Kalam went attend saint joseph's college in tiruchirappalli the college was affiliated to the university of Madras from where hegraduated in Physics in 1954 he specialised in aero engineering from Madras Institute of Technology (MIT) 

Doctor APJ Abdul Kalam was a great scientist he was made the Chancellor of the institute of space Science and Technology he worked in defence research and development organisation (DRDO) in 1958 and then joined Indian space research Organisation (ISRO) in 1963 he made significant  contribution to Indian statellite 

And also in the Missile program of DADO as a project director of SLV-lll, he contributed to the development and management of india first indigenous satellite launch vehicle ??⛵? SLV- lll  in injecting rohinisatellite in the orbit of the earth?? his greatest contribution was in the field of missiles Agni Prithvi Aakash Trishul and Nag missiles where developed by him for him work on the developedment of ballistic and launch vehicle Technology he is known as the Missile man of India

Besides begin such a great scientist he was a great writer to he has written many books such as Wings of Fire lanited minds, target 3 billon, turrning point India 20- 20 A vision for the new millenium my journey he has mentioned his dream of making India a developed country in his book India 20-20 ab vision  for the new millenium. Is advised to the youngest of the Nation was to Dream dream dream dreams dance from into thought and thoughts result in action

The Government of India honoured him with Padma Bhushan 1981 Padma vibhushan 1990 Bharat ratn 1997 including Indira Gandhi Award for National Integration 1997.

Dr Kalam passed Away on 27th July 2015 while delivering  a lecture at the  Indian Institute of Management in Shillong the wolworld was sold and suddenned by the sudden and untimely death of the simple humble yet one of the greatest man of all times

 in you want to sign like a sun first burn like a Sun

 thank you:-


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