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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

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हीरा चमकता क्यों है


 हीरा चमकता क्यों है   हीरे की किस्से कहानियों को अपने भी जरूर सुनी होगी हीरा एक बहुमूल्य वस्तु है और इसे पहनना प्रतिष्ठा का सूचक माना जाता है इसलिए लोग आभूषण में इसका इस्तेमाल करते हैं हीरे की निम्नलिखित विशेषताएं होती है   यह सर्वाधिक सत्य धातु होती है   किसी भी अन्य वस्तु या धातु से हीरे को काटा नहीं जा सकता  केवल हीरे से ही हीरे को काटा जा सकता है... Read More

 हीरा चमकता क्यों है 

 हीरे की किस्से कहानियों को अपने भी जरूर सुनी होगी हीरा एक बहुमूल्य वस्तु है और इसे पहनना प्रतिष्ठा का सूचक माना जाता है इसलिए लोग आभूषण में इसका इस्तेमाल करते हैं हीरे की निम्नलिखित विशेषताएं होती है 

  •  यह सर्वाधिक सत्य धातु होती है 

  •  किसी भी अन्य वस्तु या धातु से हीरे को काटा नहीं जा सकता

  •  केवल हीरे से ही हीरे को काटा जा सकता है

  •  हीरा बहुत अधिक उच्च तापमान पर पिघलता है इसे पिघलना के लिए लगभग 900 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान चाहिए

  •  अधिक तापमान पर हीरा बदलकर ग्रेट 5 बन जाता है 

  •  शीशे को काटने के लिए हीरे का प्रयोग किया जाता है

 हीरा परावर्तन की प्रक्रिया के कारण चमकता है प्रकाश की जो कितने हीरे के अंदर प्रवेश करती है वह बाहर नहीं निकाल पाती है और अंदर ही बार-बार परावर्तित होकर चक्कर काटती रहती है इसी कारण हीरा बहुत अधिक चमकता है क्योंकि हीरा काफी महंगा होता है इसलिए आजकल कृत्रिम हीरे भी बाजार में आ गए हैं सबसे अधिक हीरे अफ्रीका में पाए जाते हैं हीरो की बड़ी-बड़ी खान होती है भारत में गोलकुंडा की खान से हीरे निकल जाते हैं गुजरात का सूरत शहर हीरे की कैंटीन और पुलिस के लिए विश्व विख्यात है

 धन्यवाद


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क्यों हिलती हैं धरती आएइ जानते हैं इसकी असली वजह


 क्यों हिलती है धरती   अपने भूकंप के बारे में अवश्य सुना होगा कई बार विभिन्न कर्म से धरती का कुछ हिस्सा हिलने लगता है इस कारण धरती पर तबाही मर जाती है इस घटना को भूकंप कहते हैं जैसा कि हम पढ़ चुके हैं कि पृथ्वी के भीतर विभिन्न प्रकार की भौतिक वारासायनिक क्रिया लगातार चलती रहती है इस कारण धरती के नीचे हलचल का माहौल रहता है क्योंकि चट्टानों और प्लेट परस्पर आपस में टकराती रहती है ... Read More

 क्यों हिलती है धरती 

 अपने भूकंप के बारे में अवश्य सुना होगा कई बार विभिन्न कर्म से धरती का कुछ हिस्सा हिलने लगता है इस कारण धरती पर तबाही मर जाती है इस घटना को भूकंप कहते हैं जैसा कि हम पढ़ चुके हैं कि पृथ्वी के भीतर विभिन्न प्रकार की भौतिक वारासायनिक क्रिया लगातार चलती रहती है इस कारण धरती के नीचे हलचल का माहौल रहता है क्योंकि चट्टानों और प्लेट परस्पर आपस में टकराती रहती है 

 धरातल के नीचे प्लेटो की यह टकराहट जब एक सीमा से अधिक बढ़ जाती है तो उसका प्रभाव धरातल पर भी दिखाई देने लगता है और धरती का एक हिस्सा तेजी से हिन लगता है स्पष्ट है कि जब धरातल के एक हिस्से में कंपन होता है तो इस स्थिति को भूकंप कहा जाता है प्लेटो की टकराहट के अलावा भूकंप का एक कारण और है हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी के भीतर छोटी बड़ी चट्टानें तरल बैठोस पदार्थ गैस और धातु एवं भारी मात्रा में है जब धरातल की तरफ से दबाव पड़ता है तो यह चट्टानें खिसकने लगती है चट्टानों के खिसकने की प्रक्रिया के कारण पृथ्वी की सतह को जोरदार धक्का लगता है इस धक्के को ही भूकंप कहा जाता है

 प्रशांत महासागर के आसपास दक्षिणी अमेरिका में पश्चिमी किनारे और उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी किनारे पर भूकंप पत्रिका आते हैं भूकंप से जान माल की भारी होने लगती है जान माल की यह हनी भूकंप की तीव्रता पर निर्भर करती है पहले भूकंप की तीव्रता को मापने का कोई साधन नहीं था लेकिन अब सिर्फ ग्राफ नामक यंत्र अस्तित्व में आ चुका है आजकल सीस्मोग्राफ की सहायता से ही भूकंप की तीव्रता मापी जाती है इस रिएक्टर पैमाने से भी मापा जाता है

यदि भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर चार तक होते हैं तो उससे कोई ज्यादा नुकसान नहीं होता है लेकिन यदि भूकंप की तीव्रता 6 से ज्यादा हो तो जान माल की काफी हानि होती है 7 से अधिक तीव्रता के भूकंप तो भारी भारी भारी तबाही मचाते हैं ऊंची ऊंची इमारत धराशाई हो जाती है फूल गिर जाते हैं और रेलवे सड़क यातायात पूरी तरह से ठप हो जाता है विश्व के अधिकांश भूकंप से 50 से 100 किलोमीटर की गहराई पर पैदा होते हैं जिस स्थान पर भूकंप पैदा होता है उसे उद्गम केंद्र या फॉक्स कहते हैं यह बिंदु धरातल के नीचे गहराई में स्थित होता है इस फॉक्स के ठीक ऊपर पृथ्वी के धरातल पर स्थित स्थान को अधिक केंद्रीय या ऑफिस सेंटर कहा जाता है भूकंप की तरंगे अधिक केंद्र से चारों दिशाओं में चलती है भूकंप की तीव्रता अधिकेंद्र पर सर्वाधिक होती है और जिस जिस हम अधिकेंद्र से दूर होते हैं भूकंप की तीव्रता भी कम होती जाती है 

 भूकंप को मापने वाली सीस्मोग्राफ से हजारों किलोमीटर दूर पैदा होने वाले छोटे से भूकंप को भी रिपोर्ट किया जा सकता है यह इतना अधिक संवेदनशील होता है कि यह उसे कंपन को भी रिकॉर्ड कर लेता है जिसकी अनुभूति मानव नहीं कर सकता हालांकि भूकंप की भविष्यवाणी करना बेहद कठिन कार्य है लेकिन कुछ वैज्ञानिक आधारों पर उसकी लगभग ठीक-ठाक भविष्यवाणी की जा सकती है विश्व में लगभग 68% भूकंप प्रशांत महासागर के तटीय भागों में आते हैं इसके अलावा मैं किसी को भूमध्य सागर हिमालय क्षेत्र लाल सागर और मृत सागर के आसपास भी काफी भूकंप आते हैं

धन्यवाद

 


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ज्वालामुखी क्यों पढ़ते हैं


 ज्वालामुखी क्यों फटते  हैं   हो सकता है कि आपने ज्वालामुखी को पेट नहीं देखा हो लेकिन आपने इस बारे में सुनना जरूर होगा संभव है कि आपने फिल्म या टेलीविजन पर ज्वालामुखी को करते हुए भी देखा हो सवाल है कि ज्वालामुखी कहते किसे है और यह फटता  क्यों है  जब पृथ्वी के भीतर से पिछला हुआ लव धरातल पर फोड़ कर बाहर निकलता है तो उसे ज्वालामुखी का फटना कहते हैं यह ज्वालामुखी पृथ्वी क... Read More

 ज्वालामुखी क्यों फटते  हैं 

 हो सकता है कि आपने ज्वालामुखी को पेट नहीं देखा हो लेकिन आपने इस बारे में सुनना जरूर होगा संभव है कि आपने फिल्म या टेलीविजन पर ज्वालामुखी को करते हुए भी देखा हो सवाल है कि ज्वालामुखी कहते किसे है और यह फटता  क्यों है

 जब पृथ्वी के भीतर से पिछला हुआ लव धरातल पर फोड़ कर बाहर निकलता है तो उसे ज्वालामुखी का फटना कहते हैं यह ज्वालामुखी पृथ्वी के भीतर होने वाली विभिन्न प्रकार की हलचलों का परिणाम होते हैं ज्वालामुखी दो शब्दों से मिलकर बना है ज्वाला और मुख जब पृथ्वी के धरातल से किसी मुफ्त छिद्र के जरिए ज्वाला आदि निकलती है तो उसे ज्वालामुखी कहा जाता है

 जब हम धरातल से नीचे पृथ्वी के केंद्र की ओर चलते हैं तो तापमान लगातार बढ़ता जाता है पृथ्वी की ऊपरी सतह मिट्टी से बनी होती है और भूपति कहलाती है भूपति के बाद चट्टानों और धातुओं की एक परत होती है जिसे मेंटल कहा जाता है पृथ्वी का केंद्र कौन कहलाता है यह धातु निखिल और लोहे का बना होता है यहां पर तापमान इतना अधिक होता है की धातु पिंगली हुई अवस्था में होती है पिंगली हुई इन धातुओं को लव कहा जाता है जब आसपास की चट्टानों का दबाव बढ़ता है तो पिंगला हुआ यह लव दर्शन की और चल जाता है जब दबाव और अधिक बढ़ता है तो यह लव चट्टानों को तोड़ता हुआ धरातल से बाहर निकलने लगता है

 धरातल को तोड़ता हुआ यह लव बहुत तेजी के साथ ऊपर को निकलता है इस लावे में पिछली हुई धातुओं के अलावा विभिन्न प्रकार के खनिज गैस दुआ और चट्टानों के छोटे-छोटे टुकड़े भी होते हैं धरातल पर आकर लव ठंडा होकर हमने ठोस होने लगता है किस कारण ज्वालामुखी पर्वत बन जाते हैं धरातल पर ठंडा होकर जम गया यह लव बेहद उपजाऊ होता है क्योंकि इसमें विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ होते हैं

 प्रशांत महासागर और जापान के आसपास सबसे अधिक ज्वालामुखी फटते हैं यही कारण है कि इस क्षेत्र को द रिंग ऑफ फायर या अग्निबालिया कहा जाता है विश्व के कुछ मुख्य ज्वालामुखी निम्नलिखित है

  •  फ्यूजी यामा 

  •  याकुहमा 

 भारत में भी एक ज्वालामुखी है अंडमान निकोबार दीप समूह के बैरन डीपी पर स्थित यह ज्वालामुखी फिलहाल शांत है लेकिन अतीत में यह ज्वालामुखी कई बार आग उगल चुका है

 धन्यवाद


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नीला क्यों होता है आकाश


 नीला क्यों होता है आकाश  मुंह ऊपर उठकर आसमान की तरफ देखिये सारा आकाश हमें नीला दिखाई देता है बरसात के समय जरूर आसमान कुछ देर के लिए काला सा हो जाता है लेकिन सामान्य रूप से आकाश का रंग नीला ही होता है सवाल है कि आकाश का रंग नीला ही क्यों होता है यह पिलाया लाल क्यों नहीं होता   इस रहस्य का राज सूर्य के प्रकाश की प्रकृति में आसानी से खोजा जा सकता है हम जानते हैं कि सूर्य का प्रका... Read More

 नीला क्यों होता है आकाश

 मुंह ऊपर उठकर आसमान की तरफ देखिये सारा आकाश हमें नीला दिखाई देता है बरसात के समय जरूर आसमान कुछ देर के लिए काला सा हो जाता है लेकिन सामान्य रूप से आकाश का रंग नीला ही होता है सवाल है कि आकाश का रंग नीला ही क्यों होता है यह पिलाया लाल क्यों नहीं होता 

 इस रहस्य का राज सूर्य के प्रकाश की प्रकृति में आसानी से खोजा जा सकता है हम जानते हैं कि सूर्य का प्रकाश कुल सात रंगों से मिल कर बना होता है और कोई वस्तु हमें इस रंग की दिखाई देती है जिस रंग को वह वस्तु सोख लेती है 

 पृथ्वी के किसी न किसी हिस्से पर सूर्य का प्रकाश लगातार पढ़ता रहता है सूर्य से जब प्रकाश धरातल की ओर आता है तो रास्ते में वह वायुमंडल में उपस्थित धूल बर्फ पानी आदि के अंगों से टकराकर फैल जाता है सूर्य प्रकाश में उपस्थित नीले रंग की करने की सर्वाधिक फैलती है इसलिए आकाश हमें नीला दिखाई देता है वास्तव में तो आकाश का वास्तविक रंग काला होता है लेकिन सूर्य के प्रकाश के परावर्तन के कारण वह हमें कल दिखाई देता है

धन्यवाद

 


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गिरगिट का रंग बदलता क्यों है


 गिरगिट का रंग बदलता क्यों है  हम में से कोई कला है तो कोई गोरा किसी कारण सांवला है तो किसी का कुछ पिला हमारा रंग तो अलग-अलग हो सकता है लेकिन एक ही व्यक्ति जब चाहे अपना रंग नहीं बदल सकता गोरा व्यक्ति जब चाहे अपना रंग काला नहीं कर सकता इसी प्रकार कल या सावला व्यक्ति अचानक से अपना रंग गोरा नहीं कर सकता है लेकिन प्रकृति में एक जीव ऐसा भी है जो जब चाहे अपना रंग बदल सकता है जी हां हम बात कर र... Read More

 गिरगिट का रंग बदलता क्यों है

 हम में से कोई कला है तो कोई गोरा किसी कारण सांवला है तो किसी का कुछ पिला हमारा रंग तो अलग-अलग हो सकता है लेकिन एक ही व्यक्ति जब चाहे अपना रंग नहीं बदल सकता गोरा व्यक्ति जब चाहे अपना रंग काला नहीं कर सकता इसी प्रकार कल या सावला व्यक्ति अचानक से अपना रंग गोरा नहीं कर सकता है लेकिन प्रकृति में एक जीव ऐसा भी है जो जब चाहे अपना रंग बदल सकता है जी हां हम बात कर रहे हैं गिरगिट की 

 प्रकृति ने गिरगिट को अपनी त्वचा का रंग बदलने की अद्भुत क्षमता दी है अपनी इस विशेषता का प्रयोग गिरगिट दुश्मनों से अपनी रक्षा करने में करता है जैसे ही गिरगिट को अपने आसपास किसी दुश्मन की उपस्थिति का आभास होता है वह अपना रंग वैसा ही कर लेता है जिस जगह पर वह छिपा होता है गिरगिट यह है कमल कैसे कर पता है दरअसल गिरगिट की त्वचा की ऊपरी परत पारदर्शी होती है और इस पारदर्शी व्रत के नीचे लाल नीले काले वह पीले रंग के दानेदार पदार्थ होते हैं

 इन रंगीन दोनों की विशेषता होती है कि यह शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक बहुत आसानी से गति कर लेते हैं जब गिरगिट अपने शरीर को सकोरटा है तो दोनों की अधिकतम संख्या एक ही स्थान पर इकट्ठा हो जाती है जिस कारण हमें गिरगिट की त्वचा का रंग काला दिखाई देने लगता है इसी प्रकार जब गिरगिट अपने शरीर को फैलाता है तो उसकी त्वचा का रंग फिर बदल जाता है इस प्रकार अपनी इच्छा अनुसार और जरूरत के मुताबिक गिरगिट अपने शरीर की त्वचा का रंग बदल लेता है 

 त्वचा की पारदर्शी परत पर प्रकाश की क्रिया के कारण भी क्रिकेट किट त्वचा का रंग बदल जाता है दुश्मनों से रक्षा में यह बादल देखने योग्य त्वचा गिरगिट की काफी मदद करती है 

 धन्यवाद


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आए इ जानते हैंमांसाहारी पेड़ पौधे के बारे में


 मांसाहारी पेड़ पौधे  हमने से कुछ लोग मांसाहारी होते हैं तो कुछ लोग शाकाहारी लेकिन क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि कुछ पेड़ पौधे भी मांसाहारी होते हैं यह मांसाहारी पौधे कीट पतंग का शिकार करके उनसे अपना भोजन प्राप्त करते हैं यह पौधे बेहद अद्भुत तरीके से कीट पतंग का शिकार करते हैं  यह मांसाहारी पौधे देखने में बेहद सुंदर होते हैं जिस कारण कीड़े मकोड़े उनकी तरफ आकर्षित होते हैं कुछ पौधे... Read More

 मांसाहारी पेड़ पौधे

 हमने से कुछ लोग मांसाहारी होते हैं तो कुछ लोग शाकाहारी लेकिन क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि कुछ पेड़ पौधे भी मांसाहारी होते हैं यह मांसाहारी पौधे कीट पतंग का शिकार करके उनसे अपना भोजन प्राप्त करते हैं यह पौधे बेहद अद्भुत तरीके से कीट पतंग का शिकार करते हैं

 यह मांसाहारी पौधे देखने में बेहद सुंदर होते हैं जिस कारण कीड़े मकोड़े उनकी तरफ आकर्षित होते हैं कुछ पौधे की गंध भी कीट पतंग को आकर्षित करती है कुछ पौधों में पत्तियों का आकार एक घड़े की भांति होता है इस घड़े की भीतरी भाग पर एक चिपचिपा पदार्थ लगा होता है जब कीट पतंगे पौधे के आकार सुगंध या रंग से आकर्षित होकर उनकी और आकर्षित होते हैं तो में खड़े के चिपचिपी पदार्थ से चिपक जाते हैं इस प्रकार शिकार आसानी से पौधे के शिकंजे में आ जाता है

 रोसरा घटपर्णी और नेपच्यून जैसे पौधे अपनी मांसाहारी प्रकृति के लिए प्रसिद्ध है यह पौधे शिकार के अमृत शरीर से अपना भोजन प्राप्त करते हैं


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कैसे बनता है मोती


 कैसे बनता है मोती   अपने मोदी तो जरूर देखा हो गया अपने मोतियों की माला भी जरूर पहनी होगी क्या आप जानते हैं कि यह मोटी प्राकृतिक होते हैं और एक समुद्री जीव इनका निर्माण करता है मोटी काफी बहुमूल्य होते हैं और लोग इन का उपयोग आभूषणों माला माला अंगूठियां आदि में करते हैं  समुद्र में एक छोटा सा जीव रहता है जिससे होगा कहा जाता है गोगा अन्य जीवों से अपने सुरक्षा के लिए अपने शरीर के ऊ... Read More

 कैसे बनता है मोती 

 अपने मोदी तो जरूर देखा हो गया अपने मोतियों की माला भी जरूर पहनी होगी क्या आप जानते हैं कि यह मोटी प्राकृतिक होते हैं और एक समुद्री जीव इनका निर्माण करता है मोटी काफी बहुमूल्य होते हैं और लोग इन का उपयोग आभूषणों माला माला अंगूठियां आदि में करते हैं

 समुद्र में एक छोटा सा जीव रहता है जिससे होगा कहा जाता है गोगा अन्य जीवों से अपने सुरक्षा के लिए अपने शरीर के ऊपर एक क्वेश्चन आवरण का निर्माण करता है जिसे सिर्फ कहा जाता है इसकी सीट के भीतर निगम होती का निर्माण करता है जब कभी दोगे की सीट मेरे का कोई कारण आप हंसता है तो सिर्फ का पदार्थ उसके ऊपर व्रत के रूप में चढ़ने लगता है

 रेत के कारण पर चढ़ने वाली सी पद्धति की यह परत कैल्शियम कार्बोनेट की होती है व्रत चढ़ने की प्रक्रिया से कुछ ही समय के भीतर शिव के भीतर मोती का निर्माण हो जाता है यह मोटी आकार में गोल चमकदार और सफेद रंग का होता है


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क्यों आते हैं चक्रवात


 क्यों आते हैं चक्रवात  अक्सर आपने सुना होगा कि ओडिशा और तमिलनाडु के पूर्व हिस्सों में चक्रवात के कारण भारी तबाही हुई है यह चक्रवात एक प्राकृतिक आपदा है इसके तहत तेज तूफान के साथ बारिश होती है जिस कारण प्रभावित क्षेत्र में भारी तबाही मस्ती है चक्रवात निम्न वायुदाब का वह भाग है जो चारों ओर से उच्च वायुदाब द्वारा गिरा हुआ होता है वायु चारों ओर से चक्रवात के नियम निम्न वायुदाब वाले केंद्र क... Read More

 क्यों आते हैं चक्रवात

 अक्सर आपने सुना होगा कि ओडिशा और तमिलनाडु के पूर्व हिस्सों में चक्रवात के कारण भारी तबाही हुई है यह चक्रवात एक प्राकृतिक आपदा है इसके तहत तेज तूफान के साथ बारिश होती है जिस कारण प्रभावित क्षेत्र में भारी तबाही मस्ती है चक्रवात निम्न वायुदाब का वह भाग है जो चारों ओर से उच्च वायुदाब द्वारा गिरा हुआ होता है वायु चारों ओर से चक्रवात के नियम निम्न वायुदाब वाले केंद्र की ओर चलती है

 भारत में दो प्रकार के चक्रवात आते हैं शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात उत्तर पश्चिम भारत में प्रभावित होता है इसके कारण जाड़े के मौसम में हल्की बारिश होती है यह बारिश रवि की फसल के लिए बेहतर विधायक होती है दूसरे प्रकार का चक्रवात अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में पैदा होता है इसे उष्णकटिबंधी चक्रवात कहते हैं इसके कारण ओडिशा और तमिलनाडु के टट्टी इलाकों में भारी बारिश होती है

 धन्यवाद


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क्यों बनती है भाप


 क्यों बनती है भाप   अपने रसोई में चाय बनती हुई तो जरूर देखी होगी बर्तन में जब पानी भरने लगता है तो वहां पैदा होकर उड़ने लगती है यह भाप क्यों बनती है हम जानते हैं कि प्रत्येक पदार्थ कुछ अंगों से मिलकर बनता है पदार्थ के इन अंगों के नीचे एक आकर्षक बाल होता है जिस कारण यह अनु परस्पर बंधे रहते हैं  जब पदार्थ के अंगों के बीच लगने वाला बाल अधिक मात्रा में और सशक्त होता है तो पदार्थ ठ... Read More

 क्यों बनती है भाप 

 अपने रसोई में चाय बनती हुई तो जरूर देखी होगी बर्तन में जब पानी भरने लगता है तो वहां पैदा होकर उड़ने लगती है यह भाप क्यों बनती है हम जानते हैं कि प्रत्येक पदार्थ कुछ अंगों से मिलकर बनता है पदार्थ के इन अंगों के नीचे एक आकर्षक बाल होता है जिस कारण यह अनु परस्पर बंधे रहते हैं

 जब पदार्थ के अंगों के बीच लगने वाला बाल अधिक मात्रा में और सशक्त होता है तो पदार्थ ठोस अवस्था में होता है जब यह बाल कम मात्रा में होता है तो वस्तु तरल अवस्था में होती है यदि आकर्षण बल बहुत कम होता है तो पदार्थ गैस व्यवस्था में होती है जब हम किसी ठोस पदार्थ को गर्म करते हैं तो उसे पदार्थ के अनु बेहद गतिशील हो जाते हैं इस प्रक्रिया द्वारा अनु एक दूसरे से अलग-अलग होने का प्रयास करते हैं 

 जब उन्होंने की गति का बाल उसके आकर्षण बल के बराबर हो जाता है तो पदार्थ ठोस अवस्था से तरल अवस्था में बदल जाता है यदि पदार्थ को और अधिक गर्म किया जाए तो इस बार तरल पदार्थ गैस में बदल जाता है पानी के मामले में तरल से गैस बनते ही प्रक्रिया ही भाव बना कहलाती है बाप में काफी शक्ति होती है बाप की शक्ति को सबसे पहले जेम्स वाटसन ने पहचाना था और इसी शक्ति से उन्होंने बाप का इंजन बनाया बाप के इंजन में इतनी शक्ति होती है कि वह लंबी-लंबी रेलगाड़ी को आसानी से खींच लेता है

 धन्यवाद


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क्यों बहते हैं आंसू


 क्यों कहते हैं आंसू   शायद ही कोई व्यक्ति हो जो कभी-कभी रोता नहीं हूं बच्चे तो लगभग हर समय ही रोते रहते हैं हालांकि हर व्यक्ति के रोने के कारण अलग-अलग होते हैं लेकिन सच्चाई यही है कि हम सभी किसी न किसी अवस्था पर रोटी जरूर है रोने के साथ जो चीज सबसे ज्यादा जुड़ी है वह है आंसू रोते ही हमारी आंखों से आंसू टपकने लगते हैं क्या कभी आपने सोचा है कि आंसू होते क्या है और यह क्यों निकालते है... Read More

 क्यों कहते हैं आंसू 

 शायद ही कोई व्यक्ति हो जो कभी-कभी रोता नहीं हूं बच्चे तो लगभग हर समय ही रोते रहते हैं हालांकि हर व्यक्ति के रोने के कारण अलग-अलग होते हैं लेकिन सच्चाई यही है कि हम सभी किसी न किसी अवस्था पर रोटी जरूर है रोने के साथ जो चीज सबसे ज्यादा जुड़ी है वह है आंसू रोते ही हमारी आंखों से आंसू टपकने लगते हैं क्या कभी आपने सोचा है कि आंसू होते क्या है और यह क्यों निकालते हैं

 रो यह मत हम आपको बता देते हैं कि आंसू क्यों निकालते हैं हमारी आंखों के किनारे पर लिखरीमल नामक एक ग्रंथि होती है जब किसी कारणवश हमारी आंखों पर दबाव पड़ता है तो लिख क्रिमिनल ग्रंथि से एक तरल पदार्थ का श्रवण होने लगता है यह तरल पदार्थ ही आंसू होता है जब भी हम रोते हैं तो हमारी आंखों पर दबाव पड़ता है जिस कारण आंखों से आंसू टपकने लगते हैं यह आंसू एक विशेष प्रकार की प्रोटीन के बने होते हैं इस प्रोटीन को प्रोलेक्टिन कहा जाता है

 वैसे-वैसे अलग कर्म से निकले आंसू का रासायनिक संगठन भी अलग-अलग होता है जब दुख आदि किसी भावनात्मक कारण से हम रोते हैं तो निकालने वाले आंसुओं का रासायनिक संगठन अलग होते हैं जबकि धुएं आदि के कारण निकले वाले आंसू अलग प्रकार के होते हैं भावनात्मक कर्म से निकलने वाले एसुस में प्रोलेक्टिन प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है क्योंकि महिलाओं में प्रोलेक्टिन प्रोटीन का स्तर पुरुषों के मुकाबले अधिक होता है इसलिए भावनात्मक कर्म से महिलाओ की आंखों से आंसू जल्दी टपकने लगते हैं 

 एक मजेदार बात और बहुत अधिक खुशी की अवस्था में भी हमारे आंखों से आंसू टपकने लगते हैं इसका कारण यह है कि अत्यधिक खुशी के कारण आंखों में उत्तर जाना पैदा होती है जिससे लकरीमल ग्रंथि पर दबाव पड़ता जाता है और आंसू टपकने लगते हैं अब आप बताइए कि आप दुख के कारण रोना चाहते हैं या खुशी के मारे


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