
क्यों आता है मानसून बरसात का मौसम तो आपको भी अच्छा लगता होगा क्या कभी आपने सोचा है कि हमेशा पूरे साल की बारिश क्यों नहीं होती रहती है बारिश के और मानसून के मौसम में ही होती है अक्सर कर्मियों के मौसम में लोग कहते रहते हैं कि मानसून कब आएगा यह मानसून क्या है ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु आती है इसका आगमन दक्षिण पश्चिम मानसून के शुरू होने के साथ होता है वर्षा का मौसम जून से शुर...
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क्यों आता है मानसून
बरसात का मौसम तो आपको भी अच्छा लगता होगा क्या कभी आपने सोचा है कि हमेशा पूरे साल की बारिश क्यों नहीं होती रहती है बारिश के और मानसून के मौसम में ही होती है अक्सर कर्मियों के मौसम में लोग कहते रहते हैं कि मानसून कब आएगा यह मानसून क्या है
ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु आती है इसका आगमन दक्षिण पश्चिम मानसून के शुरू होने के साथ होता है वर्षा का मौसम जून से शुरू होकर अक्टूबर तक चलता है दर्शन मानसून एक प्रकार की पढ़ते हैं जो हिंद महासागर से चलकर भारत के तटीय क्षेत्रों में पहुंचती है क्योंकि यह पढ़ने कम होती है इसलिए जब यह समुद्र के ऊपर से चलती है तो भारी मात्रा में जलवाष्प को रोक लेती है इसकी एक धारा अरब सागर होती हुई पश्चिमी किनारे से भारत में प्रवेश करती है जबकि दूसरी धारा बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करके पूर्वी किनारे से भारत में प्रवेश करती है जब यह मानसून पकाने रास्ते में किसी पहाड़ से टकराती है तो यह वर्ष के रूप में बरस जाती है भारत के टट्टी इलाकों में मानसून जून के पहले सप्ताह हुए आ जाता है जबकि अन्य क्षेत्रों में है जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई तक ही आ पाता है
भारत में दो प्रकार की मानसून पढ़ने प्रभावित है अरब सागर के मानसून पढ़ने और बंगाल की खाड़ी की मानसून पढ़ने पहले धारा के कारण समूचे महाराष्ट्र गुजरात केवल व तमिलनाडु में वर्षा होती है तो दूसरी शाखा के कारण से समूचे भारत में खूब बारिश होती है दिल्ली में दोनों की शाखाएं बारिश के लिए जिम्मेदार है भारत में सबसे अधिक वर्षा मेघालय के मोहसिन राम में होती है यहां पर 12 21 सेमी वार्षिक वर्षा रिकार्ड की गई है इससे पहले चेरापूंजी में 1102 सेमी वर्षा को सर्वाधिक माना जाता था मानसिंह राम चेरापूंजी के पश्चिम में लगभग 16 किमी दूर है
मानसून के कारण कोलकाता में 119 सेमी पटना में 105 सेमी इलाहाबाद में क्षेत्र सेमी और दिल्ली में 56 सेमी वर्षा होती है भारत का पूर्वी तट विशेष रूप से तमिलनाडु तक दक्षिण पश्चिम मानसून के कारण वर्ष प्राप्त नहीं करता है सितंबर के दूसरे सप्ताह तक दक्षिण पश्चिम मानसून उत्तरी भारत से लोग ने लगता है मानसून के लौट के साथ ही निम्नलिखित परिवर्तित होते हैं
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बादल खत्म हो जाते हैं
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आकाश स्वच्छ हो जाता है
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दिन का तापमान कुछ बढ़ जाता है
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राकेश सुखद वह सुहावनी हो जाती है
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दैनिक तापांतर अधिक हो जाता है
भारत में सबसे अधिक बारिश पश्चिमी घाट के पश्चिमी भाग उत्तर पूर्व में अप हिमालय क्षेत्र और मेघालय की पहाड़ियों पर होती है परिधि पर भारत में केवल 60 सेमी वर्षा ही होती है भारत में सबसे कम वर्षा पश्चिमी राजस्थान के किनारे और पश्चिमी घाट के पूर्वी किनारे पर होती है भारत एक कृषि प्रधान देश है इसलिए हमारे लिए मानसून वेद महत्वपूर्ण होता है
धन्यवाद✍️
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ज्वार भाटे क्यों आते हैं आपने सुना ही होगा कि समुद्र का जलस्तर सदैव एक्स नहीं रहता है कभी यह ऊपर उठना है तो कभी यह नीचे गिरता है जब जल स्तर ऊपर उठना है तो सागर काजल किनारे की ओर चलता है इसी प्रकार जब जल स्तर गिरता है तो जल की राशि तट किस बीच समुद्र की ओर बढ़ती है समुद्र का जलस्तर नियमित रूप से दिन में दो बार ऊपर उठना है और दो बार नीचे गिरता है समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ज्वार और नीच...
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ज्वार भाटे क्यों आते हैं
आपने सुना ही होगा कि समुद्र का जलस्तर सदैव एक्स नहीं रहता है कभी यह ऊपर उठना है तो कभी यह नीचे गिरता है जब जल स्तर ऊपर उठना है तो सागर काजल किनारे की ओर चलता है इसी प्रकार जब जल स्तर गिरता है तो जल की राशि तट किस बीच समुद्र की ओर बढ़ती है समुद्र का जलस्तर नियमित रूप से दिन में दो बार ऊपर उठना है और दो बार नीचे गिरता है समुद्री जलस्तर के ऊपर उठने को ज्वार और नीचे उतरने को भाटा कहते हैं
ज्वार भाटी की उत्पत्ति का कारण चंद्रमा सूर्य तथा पृथ्वी की पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति है गुरुत्वाकर्षण द्वारा संपूर्ण पृथ्वी सूर्य तथा पृथ्वी की ओर खींचती है इसका प्रभाव स्थल की अपेक्षा जल पर अधिक होता है ज्वार भाटे निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
उच्च ज्वार भाटा
निम्न ज्वार भाटा
ब्रहत ज्वार भाटा
लघु ज्वार भाटा
ज्वार भाटे हमारे लिए बेहद कम की चीज है जिन बंदरगाहों पर जल काम होता है वहां ज्वार के कारण ही जहाज बंदरगाह तक पहुंच पाते हैं यहां से जहाज भाटे के साथ वापस गहरे समुद्र में आ जाता है मछली पकड़ने वाले नाविक ज्वार के साथ खुले समुद्र में मछली पकड़ने जाते हैं और बातें के साथ सुरक्षित तट पर लौट आते हैं ज्वार भाटे की वापसी लहरें समुद्री तट पर बसे नगरों की सारी गंदगी को बहाकर ले जाती है ज्वार भाटी के कारण समुद्री जल गतिशील रहता है जिससे वह हमेशा साफ बना रहता है
आजकल तो ज्वार भाटे से बिजली भी पैदा की जाती है उसे ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं फ्रांस तथा जापान में जो आर्य ऊर्जा का काफी प्रयोग किया जाता है आजकल भारत में भी ज्वारीय ऊर्जा पैदा करने के प्रयास किया जा रहे हैं गंगा डेल्टा के सुंदरवन से जो ज्वारीय ऊर्जा प्राप्त की जाने लगी है
धन्यवाद✍️
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हिमपात क्यों होता है क्या कभी आप किसी पहाड़ी स्थान हिल स्टेशन पर गए हैं यदि हां तो आपने वहां बर्फ के मजे भी जरूर लिए होंगे ऊंचे ऊंचे स्थानों जैसे शिमला मसूरी कुल्लू मनाली आदि में जाने के मौसम में बर्फ गिरती है अर्थात पत होता है हिमपात के कारण पूरे धरातल सड़क घरों आदि पर बर्फ की एक चादर सी बढ़ जाती है क्या कभी आपने सोचा है कि आकाश से बर्फ क्यों बरसती है और यह किस प्रकार पैदा होती है &nb...
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हिमपात क्यों होता है
क्या कभी आप किसी पहाड़ी स्थान हिल स्टेशन पर गए हैं यदि हां तो आपने वहां बर्फ के मजे भी जरूर लिए होंगे ऊंचे ऊंचे स्थानों जैसे शिमला मसूरी कुल्लू मनाली आदि में जाने के मौसम में बर्फ गिरती है अर्थात पत होता है हिमपात के कारण पूरे धरातल सड़क घरों आदि पर बर्फ की एक चादर सी बढ़ जाती है क्या कभी आपने सोचा है कि आकाश से बर्फ क्यों बरसती है और यह किस प्रकार पैदा होती है
हम जानते हैं कि पृथ्वी के धरातल से लगातार वापसी कारण होता रहता है जिससे बादल बन जाते हैं यह बदल ही वर्ष के रूप में बरसते हैं बादल बनने के समय जलवाष्प का संगठन जब हिमांक से भी कम ताप पर होता है तो वह तरल अवस्था बूंद में आए बिना सीधे ही ठोस अवस्था में बदल जाता है इसे इन कहते हैं शुरुआत में यह हम महीन कणों के रूप में होती है लेकिन बाद में इनका आकार बड़ा होने लगता है जब कानों का आकार बड़ा हो जाता है तो यह कान बोतल पर धोनी हुई हुई की भांति गिरने लगती है जिस कारण बर्फ की एक चादर सी बीच जाती है
कई बार हिमपात के साथ वर्षों की बूंदे भी गिरती है इसे सहीम दृष्टि कहते हैं यह वर्ष की बूंद के हमने या हम कानों के पिघलने जल के पूर्ण है हमने से होता है वास्तव में यह जलवृष्टि और हम वृष्टि का मिश्रण होता है सहीम वृष्टि ऐसी ही दृष्टि को भी कहा जाता है जिसमें हम के कुछ रवि पिंगला होते हैं जब बोतल के पास वाली वायु का तापमान ही मांग से ऊंचा होता है तो सही दृष्टि होती है जब बर्फ की कड़ी बड़ी गलियों की बौछार होती है तो इसे ओलावृष्टि कहते हैं आमतौर पर बरसात के दौरान ही ही ओले पड़ते हैं
धन्यवाद
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कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं :- क्या कभी अपने सुबह के समय लोन की खास अच्छी है घास के किनारे पर पानी की छोटी-छोटी बंदे दिखाई देती है इन बूंद को उसे कहते हैं इसी प्रकार जाने के मौसम में देर रात और सुबह के समय आपने सड़क व सफेद रंग का धुआं सा जरूर देखा होगा इस कुहरा व कहते हैं इस कोहरे के कारण ऐसा लगता है जैसे सफेद रंग के बदले सड़क पर उतर आए हो सो सोचिए की आस और कोहरा क्यों पैदा होता है&nbs...
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कोहरा व उसे क्यों पढ़ते हैं :-
क्या कभी अपने सुबह के समय लोन की खास अच्छी है घास के किनारे पर पानी की छोटी-छोटी बंदे दिखाई देती है इन बूंद को उसे कहते हैं इसी प्रकार जाने के मौसम में देर रात और सुबह के समय आपने सड़क व सफेद रंग का धुआं सा जरूर देखा होगा इस कुहरा व कहते हैं इस कोहरे के कारण ऐसा लगता है जैसे सफेद रंग के बदले सड़क पर उतर आए हो सो सोचिए की आस और कोहरा क्यों पैदा होता है
आस और कुहरा क्यों बनते हैं यह समझने के लिए पहले हमें संगठन की प्रक्रिया समझनी होगी जल की गैसीय अवस्था के तरल या ठोस अवस्था में परिवर्तित होने की क्रिया को संगठन कहते हैं आधार वायु के ठंडा होने पर संगठन होता है
दिन के समय पृथ्वी गर्म हो जाती है और रात्रि के समय यह ठंडी हो जाती है कभी-कभी पृथ्वी का ताल इतना अधिक ठंडा हो जाता है कि उसे छूने वाली वायु का तापमान पोशाक से नीचे गिर जाता है इससे वायु में उपस्थित जलवाष्प का संगठन हो जाता है और वह छोटी-छोटी बूंद के रूप में पौधे की पत्तियां और अन्य वस्तुओं पर जम जाता है इसी को उसे कहते हैं
अब बात कोहरा की वायुमंडल की निचली परत में स्त्री धुलकंद हुए के कारण तथा संगीत सुषमा जल पिंडों को कुहरा कहते हैं वायु का तापमान पोषण से भी नीचे होने पर कोहरे का निर्माण होता है विकिरण सब वहां तथा कर्म व ठंडी वायु के मिलने से वायु उसे सीमा तक ठंडी हो जाती है कि कोहरे का निर्माण हो सके इसमें केवल एक किलोमीटर की दूरी तक ही हम देख सकते हैं कोहरे का हल्का रूप ढूंढ कहलाता है ढूंढ के समय दक्षता एक कमी से दो किमी तक हो सकती है ढूंढ सहयोगरिया एवं सूर्यास्त के समय नदियों तालाबों जिलों और सागर के किनारे बनती है
धन्यवाद
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पवन क्यों चलती है ठंडी ठंडी हवा किस अच्छी नहीं लगती लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की हवा चलती क्यों है इस सवाल का जवाब ढूंढने से पहले हमें हवा और पवन में अंतर समझना होगा स्थिर हवा को हवा कहते हैं लेकिन जब यह है एक और को चलने आप कहने लगती है तो उसे पवन कहा जाने लगता है स्पष्ट है की चलती हुई हवा को ही पवन कहा जाता है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर चलने वाल...
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पवन क्यों चलती है
ठंडी ठंडी हवा किस अच्छी नहीं लगती लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की हवा चलती क्यों है इस सवाल का जवाब ढूंढने से पहले हमें हवा और पवन में अंतर समझना होगा स्थिर हवा को हवा कहते हैं लेकिन जब यह है एक और को चलने आप कहने लगती है तो उसे पवन कहा जाने लगता है स्पष्ट है की चलती हुई हवा को ही पवन कहा जाता है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर चलने वाली वायु को पवन कहते हैं
पवन धरातल पर वायुदाब में 33 विषमताओं के कारण चलती है जिस प्रकार से जल उच्च स्थान से निम्न स्थान की ओर बहता है ठीक उसी प्रकार से पवन भी उच्च वायु भर वाले क्षेत्र से निम्न वायु भर वाले क्षेत्र की ओर चलती है कहा जा सकता है कि पवन वायुदाब की विषमताओं को संतुलित करने में प्रकृति के प्रयास को दर्शाती है यदि पृथ्वी स्थिर होती है और उसका धरातल समतल होता है तो पवन उच्च वायुदाब वाले क्षेत्र से सीधे निम्न वायुदाब वाले क्षेत्र की और संताप रेखाओं पर समकोण बनाती हुई चलती है
क्योंकि पृथ्वी का धरातल समतल नहीं होता है और पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती रहती है इसलिए पवन कहीं शक्तियों के प्रभाव से चलती है पवन की गति और दिशा को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं
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दाब प्रवणता बाल
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करी और लिस्ट प्रभाव
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अभिकेंद्रीय त्वरण
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भू घर्षण
कुछ पढ़ने धीमी गति से चलती है तो कुछ पढ़ने इतनी तेजी गति से चलती है कि अपने रास्ते में आने वाली प्रत्येक चीज को तहस-नहस कर देती है कुछ पढ़ने पश्चिम दिशा से चलती है तो कुछ पूर्व की दिशा से
धन्यवाद
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धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं हम सभी की त्वचा का रंग अलग-अलग होता है कुछ लोग बेहद गोरे होते हैं तो कुछ लोग बहुत कल इसके अलावा कुछ लोग सांवले रंग के भी होते हैं और तो और एक ही परिवार के भाई-बहन के रंग में भी बहुत अंतर देखने को मिलता है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है हम कल या गोरे क्यों होते हैं पहली बात तो यह है कि हमारा रंग बहुत कुछ अनुवांशिक कर्म से होता है हमारा रंग क...
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धूप में हम काले क्यों हो जाते हैं
हम सभी की त्वचा का रंग अलग-अलग होता है कुछ लोग बेहद गोरे होते हैं तो कुछ लोग बहुत कल इसके अलावा कुछ लोग सांवले रंग के भी होते हैं और तो और एक ही परिवार के भाई-बहन के रंग में भी बहुत अंतर देखने को मिलता है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है हम कल या गोरे क्यों होते हैं पहली बात तो यह है कि हमारा रंग बहुत कुछ अनुवांशिक कर्म से होता है हमारा रंग किस प्रकार का होगा यह कोशिका के प्रमोशन पर उपस्थित जींस ही तय करते हैं इसके अलावा हमारी त्वचा की गहराई में उपस्थित मेलानिन नमक पिगमेंट वर्णन के कारण भी हमारा रंग काला पड़ जाता है सूर्य की तेज धूप से हमारी त्वचा को बहुत अधिक नुकसान पहुंचता है इसलिए तेज धूप से बचाने को त्वचा में मेलेनिन नामक एक पिगमेंट पाया जाता है यह पिगमेंट काले रंग का होता है जब हम लंबे समय तक धूप में काम करते हैं तो त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन शुरू हो जाता है मेलानिन के असर से हमारी त्वचा का रंग काला पड़ जाता है इसके विपरीत जब हम काफी समय तक धूप में नहीं निकलते हैं अधिकतर घर के भीतर ही रहते हैं तो त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन नहीं होता और हमारी त्वचा गोरी दिखाई देती है
यही कारण है कि कल होने से बचने के लिए हम धूप में छाते का प्रयोग करते हैं पृथ्वी पर कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पूरे दिन तेज धूप बनी रहती है ऐसे क्षेत्रों में लोग काले रंग के होते हैं इसके विपरीत कुछ क्षेत्र ऐसे भी है जहां दिन की अवधि बहुत कम होती है और तेज धूप के स्थान पर हमेशा सुहावना मौसम बना रहता है ऐसे क्षेत्र के निवासी गोरे रंग के होते हैं यही कारण है कि अफ्रीका के लोग बिल्कुल काले रंग के होते हैं जबकि इंग्लैंड के लोग गोरे होते हैं अब तो आप समझ गए होंगे कि मेलानिन नमक पिगमेंट के कारण हम कल या गोरे होते हैं
धन्यवाद
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ऐसे बना वायुमंडल पृथ्वी को चारों ओर से घिरे हुए वायु के विस्तृत फैलाव को वायुमंडल कहते हैं वायु का यह आवरण एक लिफाफे के रूप में है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसका एक अब इन अंग बन गया है कहा जा सकता है कि वायुमंडल गैसों की एक परत है जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण धरातल से लगी रहती है वायुमंडल की वायु रंगीन गांधी अस्वाधीन होती है सवाल है कि यह वायुमंडल बना कैसे? पृथ्वी का वर्त...
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ऐसे बना वायुमंडल
पृथ्वी को चारों ओर से घिरे हुए वायु के विस्तृत फैलाव को वायुमंडल कहते हैं वायु का यह आवरण एक लिफाफे के रूप में है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसका एक अब इन अंग बन गया है कहा जा सकता है कि वायुमंडल गैसों की एक परत है जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण धरातल से लगी रहती है वायुमंडल की वायु रंगीन गांधी अस्वाधीन होती है सवाल है कि यह वायुमंडल बना कैसे?
पृथ्वी का वर्तमान वायुमंडल पांच अरब साल पहले ठंडे करो मुख्य रूप से लोहे एवं मैग्नीशियम सिलिकेट लोगे एवं ग्रेफाइट की अभिवृत्ति द्वारा शुरू हुए बहुत धीमी परिवर्तनों का परिणाम है उसे समय पृथ्वी इतनी छोटी थी कि यह वायुमंडल को अपने आप से जोड़कर नहीं रख सकती गुरुत्वाकर्षण विखंडन तथा रेडियम प्रीति के कारण पृथ्वी गर्म हुई और इससे पृथ्वी के पदार्थ में भिन्नता है परिणाम स्वरुप एक नए वायुमंडल और जलमंडल की रचना हुई इस प्रकार बना वायुमंडल ऑक्सीजन से वंचित था परंतु इसमें निम्नलिखित पदार्थ मौजूद थे
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मीथेन
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अमोनिया
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कार्बन डाइऑक्साइड
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जल वाष्प
वायुमंडल कई गैसों का मिश्रण होता है गैसों के अतिरिक्त वायुमंडल में जलवाष्प और धूल के कारण भी उपस्थित होते हैं अधिक मात्रा में उपस्थित ठोस एवं धर्म कानों को सामूहिक रूप से असोसॉल कहते हैं धरातल से लगभग 90 किलोमीटर की ऊंचाई तक इसमें नाइट्रोजन ऑक्सीजन वह अंग एक समान होती है इनके अतिरिक्त इसमें नियम क्रिप्टन अप जुनून जैसी दुर्बल कैसे भी होती है वायुमंडल में नाइट्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है
वायुमंडल में कुछ मात्रा जल वाष्प की भी होती है जो हमारी जलवायु को सबसे अधिक प्रभावित करती है वायुमंडल में जलवाष्प की औसत मात्रा लगभग दो प्रतिशत होती है और चाय के साथ जलवाष्प की मात्रा कम होती जाती है जलवायु सूर्य से आने वाली उसका के कुछ भाग को अवशोषित कर लेता है तथा पृथ्वी द्वारा विकृत उसका को सजा रखती है इस प्रकार यह एक कंबल का काम करती है इससे धरातल ना ज्यादा गर्म हो पता है और ना ज्यादा ठंडा पृथ्वी की धरातल से लेकर ऊपर तक वायुमंडल एक समान नहीं होता है घनत्व तापमान और गैसों के संगठन के आधार पर वायुमंडल
की सबसे निचली परत सौरमंडल कहलाती है यह लगभग 16 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला रहता है वायुमंडल के इसी भाग में बादल बनते हैं वर्षा होती है और मौसम संबंधित घटनाएं होती है इस प्रकार हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण यही सौरमंडल होता है समताप मंडल के ओजोन गैस की मात्रा पाई जाती है हम जानते हैं कि सूर्य करने के अत्यंत खतरनाक पराबैंगनी करने भी होती है समताप मंडल में उपस्थित ओजोन गैस इस खतरनाक पराबैंगनी किरणों को शक लेती है जिस कारण हम पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभाव से बच्चे रहते हैं रेडियो तरंगे परावर्तित होकर आयन मंडल से ही वापस लौटी है वायुमंडल की सबसे बाहरी परत को एक जो स्फीयर कहा जाता है वायुमंडल हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है वायुमंडल हमारी पृथ्वी पर जीवन का आधार है वायुमंडल के बिना हम पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते पूरे सौरमंडल में केवल पृथ्वी पर ही जीवन पाया जाता है और यह सब संभव है सिर्फ वायुमंडल के करण
मौसम तथा जलवायु संबंधित सभी घटनाएं भी वायुमंडल में ही घटती है कहा जा सकता है कि दुनिया के विभिन्न भागों में मिलने वाले अलग-अलग तरह की जलवायु वायुमंडल की ही देन है वायुमंडल हमारे लिए एक आवरण का भी काम करता है जो हमें सूर्य की घातक पराबैंगनी किरणों और तेज तप से भी बचाता है वास्तव में यह वायुमंडल हमारे लिए बहुत काम की चीज है
धन्यवाद
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हीम नदी किसे कहते हैं द्रव्य तथा प्रवृत्तियां क्षेत्र में तापमान आमतौर पर बहुत कम होता है जिन क्षेत्रों में तापमान ही मांग से कम होता है वहां वर्ष के स्थान पर हिमपात होता है धोनी हुई दूरी की भांति पत बेहद कोमल होता है लेकिन जब हिमपात की मात्रा अधिक होती है तो नीचे ही हम दबाव के कारण ठोस संगम तथा रविदास बर्फ बन जाती है यह बर्फ अपने भर तथा पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण ढलान के साथ-साथ...
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हीम नदी किसे कहते हैं
द्रव्य तथा प्रवृत्तियां क्षेत्र में तापमान आमतौर पर बहुत कम होता है जिन क्षेत्रों में तापमान ही मांग से कम होता है वहां वर्ष के स्थान पर हिमपात होता है धोनी हुई दूरी की भांति पत बेहद कोमल होता है लेकिन जब हिमपात की मात्रा अधिक होती है तो नीचे ही हम दबाव के कारण ठोस संगम तथा रविदास बर्फ बन जाती है यह बर्फ अपने भर तथा पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण ढलान के साथ-साथ धीमी गति से नीचे की ओर बहने लगती है इस गतिशील बर्फ को ही हिमानी या हिमनदी कहते हैं
सामान्य नदियों की भांति हिमनदी भी अपरदन परिवहन तथा निक्षेप का कार्य करती है हिमानी अपने अपरदन तथा निष्पक्ष प्रक्रियाओं द्वारा विभिन्न प्रकार की स्थलाकृति का निर्माण करती है
धन्यवाद
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मिट्टी कैसे बनती है मिट्टी में लाखों जीवन पालते हैं हम भी मिट्टी में खेल कर ही बड़े हुए हैं क्या कभी आपने सोचा है कि यह मिट्टी आखिर बनती कैसे हैं मिट्टी भीतर पर एक पतली परत के रूप में पाई जाती है जिसका निर्माण चट्टानों के टूटने से प्राप्त हुए खनिज कानून पेड़ पौधों के सड़े गले अंशु आदि से होता है मिट्टी में करोड़ों की संख्या में कीटाणु तथा उनके जैविक पदार्थों पर पढ़ने वाले अगणित ज...
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मिट्टी कैसे बनती है
मिट्टी में लाखों जीवन पालते हैं हम भी मिट्टी में खेल कर ही बड़े हुए हैं क्या कभी आपने सोचा है कि यह मिट्टी आखिर बनती कैसे हैं मिट्टी भीतर पर एक पतली परत के रूप में पाई जाती है जिसका निर्माण चट्टानों के टूटने से प्राप्त हुए खनिज कानून पेड़ पौधों के सड़े गले अंशु आदि से होता है मिट्टी में करोड़ों की संख्या में कीटाणु तथा उनके जैविक पदार्थों पर पढ़ने वाले अगणित जीवाणु भी होते हैं मिट्टी में जल भी होता है जो पेड़ पौधों को जीवन प्रदान करता है मिट्टी निर्माण के पांच प्रमुख कारण है जो निम्नलिखित है :
आधारित चट्टान अथवा जनक पदार्थ
जलवायु
जैविक पदार्थ
स्थलाकृति
विकास की अवधि
मिट्टी और चट्टान में भी अंतर होता है मिट्टी की उत्पत्ति चट्टानों से होती है जबकि चट्टानों का निर्माण खनिजों से होता है मिट्टी एक जैव पदार्थ है जबकि चट्टानें जब और अजब दोनों प्रकार की हो सकती है मिट्टी केवल धरातलीय पदार्थ है जबकि चट्टान तरह के लिए के अलावा भूगर्भ में भी पाई जाती है मिट्टी के कारण बारीक होते हैं जबकि चट्टानों में बारीक और मोटे दोनों प्रकार के कान होते हैं
मिट्टी को उसके गठन संरचना रूप रंग एवं उर्वरक करता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है संयुक्त राज्य का वर्गीकरण सभी मिशन को 11 मुख्य विभाग और 54 भागों 238 समूह 1922 उप समूह आदि में बांटा जाता है भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर ने भारत की मिट्टियों को वर्गीकरण उत्पत्ति रंग संगठन आदि के आधार पर निम्नलिखित आर्ट वर्गों में विभाजित किया है
जलोढ़ मिट्टी
काली मिट्टी
लाल पीली मिट्टी
लेटराइट मिट्टी
शुष्क मिट्टी
खारि मिट्टी
जैविक मिट्टी
वन मिट्टी
नदी आदि द्वारा बहा कर लाई गई मिट्टी को जलोढ़ मिट्टी कहते हैं यह बेहद उपजाऊ मिट्टी होती है भारत के गंगा जमुना के दो आप क्षेत्र में यही जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है दक्कन के पत्थर में काली मिट्टी की अधिकता है
धन्यवाद
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खनिज कठोर क्यों होते हैं खनिजों की पहचान उनके कठोरता रंग प्रकाश को परिवर्तित करने की विधि और घनत्व आदि के आधार पर की जाती है खनिज कुलचे प्रकार की क्रिस्टल आकृति वाले होते हैं जो निम्नलिखित है: त्रीसमलंबाक्ष दीरसमलंबाक्ष सेट कोनिया विषम लंबाश एकनाताक्ष त्रिनताक्ष एक खनिज अटैक किसी अंश तक खुर्जा ज...
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खनिज कठोर क्यों होते हैं
खनिजों की पहचान उनके कठोरता रंग प्रकाश को परिवर्तित करने की विधि और घनत्व आदि के आधार पर की जाती है खनिज कुलचे प्रकार की क्रिस्टल आकृति वाले होते हैं जो निम्नलिखित है:
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त्रीसमलंबाक्ष
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दीरसमलंबाक्ष
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सेट कोनिया
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विषम लंबाश
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एकनाताक्ष
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त्रिनताक्ष
एक खनिज अटैक किसी अंश तक खुर्जा जाने का प्रतिरोध कर सकती है उसे खनिज की कठोरता कहते हैं खनिज की कठोरता वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होती है खनिज के कठोरता को मुंह के कठोरता मापन से मापा जाता है इसके लिए सबसे मुलायम से सबसे कठोर के क्रम में मापने के लिए कुल 10 मापकों की रचना की गई है 10th सबसे मुलायम खनिज है और उनकी कठोरता एक है इसके विपरीत हीरा सबसे कठोर खनिज है और इसकी कठोरता 10 मापी जाती है
कुछ खनिजों के रंग भी विशेष होते हैं और इन्हीं से इन्हीं पहचाना जाता है भौतिक विशेषताओं के अतिरिक्त खनिजों की पहचान उनके प्रकाश के गुना के आधार पर की जाती है खनिज संसाधनों को कुल चार वर्गों में विभाजित किया जाता है आवश्यक संसाधन ऊर्जा संसाधन धातु संसाधन एवं औद्योगिक संसाधन
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