प्रस्तावना:- " स्वस्थ जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा परोक्ष रूप से सेवा करने के योग्य बनता है" "स्वस्थ मनुष्य की पूर्ण शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्थिति है केवल रोगी की अनुपस्थिति स्वास्थ्य नहीं है " स्वास्थ्य शब्द मानव जीवन से संबंधित है प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह स्वस्थ रहे स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठाता है...
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प्रस्तावना:-
" स्वस्थ जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा परोक्ष रूप से सेवा करने के योग्य बनता है"
"स्वस्थ मनुष्य की पूर्ण शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्थिति है केवल रोगी की अनुपस्थिति स्वास्थ्य नहीं है "
स्वास्थ्य शब्द मानव जीवन से संबंधित है प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह स्वस्थ रहे स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठाता है स्वस्थ व्यक्ति जीवन में अनेक सफलता प्राप्त कर सकता है
" Health is wealth" अर्थात स्वास्थ्य ही धन है स्वस्थ व्यक्ति अपने लिए परिवार के लिए और समाज के लिए एक धन के समान है इसके विपरीत एक स्वस्थ व्यक्ति सबके लिए बोझ होता है रोग से दुखी व्यक्ति के जीवन में उत्साह नहीं रहता आर्थिक सामाजिक आत्मिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है किसी ने कहा है किसी देश की उन्नति उसके नागरिकों की प्रबलता है जो की खानों नदिया वह वनों की संपत्ति से कहीं ज्यादा मूल्यवान है किसी भी समाज व राष्ट्रीय की उन्नति उसके व्यक्तियों की कमतता तथा साहस पर निर्भर करती है कमर्टता तथा साहस के लिए स्वास्थ्य उत्तम होना आवश्यक है
व्यक्तिगत स्वास्थ्य का अर्थ:-
शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्तिगत स्वास्थ्य कहते हैं यदि व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा हो तो व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और परिणाम स्वरुप घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहेगी स्वास्थ्य का अर्थ मंत्र रोग मुक्त होना ही नहीं है बल्कि कार्य क्षमता व क्रियाशीलता से भी है अतः व्यक्तिगत स्वास्थ्य को सदैव उत्तम बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य का सीधा संबंध व्यक्तिगत स्वास्थ्य से होता है वह स्वच्छता जो हमारे शरीर की देखभाल से संबंध रहती है व्यक्तिगत स्वच्छता कहलाती है व्यक्तिगत स्वच्छता के सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिसमें वह इनका सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिससे वह इनका पालन करते हुए पूर्ण स्वच्छ रह सके और अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सके
व्यक्तिगत स्वास्थ्य के नियम:-
अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य के कुछ नियम इस प्रकार है
आदत:- स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति में अच्छी आदतों का विकास होना चाहिए प्राकृतिक नियमों का पालन न करना है भोज्य भोजन का प्रयोग करना नाशाहत्री रात्रि में देर से सोना और सुबह देर से उठाना आदि बुरी आदतें हैं यदि ऐसी आदतों को नहीं छोड़ा जाए तो व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है आदतों का जीवन में विशेष महत्व है आदतें एक दिन में नहीं बन जाती आदतों का विकास तो बाल्यावस्था से शुरू हो जाता है अतः माता को चाहिए कि प्रारंभ से ही बच्चों मे अच्छी आदतों का विकास करें जैसे प्राप्त सूर्योदय से पहले उठना सच में दांत साफ करने के पश्चात ही कुछ आहार ग्रहण करना समय से स्नान करना स्वच्छ वस्त्र पहनना दूसरे का तोलिया गंगा वह कपड़ों का उपयोग न करना आदि
स्वच्छता:- स्वच्छ रहने के लिए स्वच्छता का भी होना आवश्यक है शारीरिक स्वच्छता होने से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है शारीरिक रूप से स्वच्छ होने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता के नियमों के विषय में पूर्ण ज्ञान रखता है स्वच्छ रहने के लिए अच्छा वातावरण बनाया जाए शुद्ध भोजन किया जाए तथा शुद्ध व ताजी हवा का सेवन किया जाए इस प्रकार का वातावरण बनाने पर व्यक्ति रोग मुक्त रह सकेगा
पौष्टिक भोजन:- स्वस्थ रहने के लिए शुद्ध तथा पौष्टिक भोजन बहुत आवश्यक है पौष्टिक भोजन का अभिप्राय है व्यक्ति की आवश्यकता अनुसार पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा विटामिन वह खनिज लवण युक्त भोजन ही भोजन शुद्ध होना चाहिए भोजन को स्वच्छता से बनाना चाहिए भोजन करने का समय निर्धारित होना चाहिए तथा अधिक तला भुनाव घनिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए सभी बातों को ध्यान में रखने से व्यक्ति पूर्णता स्वस्थ रहता है
मानसिक शांति:- शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति के मस्तिष्क में शांति होनी चाहिए घर का वातावरण कल है युक्त नहीं बनना चाहिए तथा किसी भी समस्या का हाल आपस में विचार विमर्श तथा विचारों का आदान-प्रदान करके किया जाना चाहिए
जीवन में नियम बांधता :- अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए यह आवश्यक है कि दैनिक कार्यों को नियम अनुसार किया जाए उदाहरण के लिए समय पर सो आदि में निवृत होना नाश्ता भोजन आदि समय से करना व्यायाम नियम अनुसार एवं नृत्य प्रतिदिन करना समय पर सोने तथा समय से उठाना आदि अनेक कार्य प्रतिदिन श्याम अनुसार करने चाहिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या तथा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही अपने दैनिक जीवन के नियमों को शुद्ध भुज पूर्वक निर्धारित करना चाहिए तथा निर्धारित नियमों को यथासंभव सदैव पालन करना चाहिए
नियमित रूप से व्यायाम :- शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन व्यायाम करना आवश्यक है व्यायाम का आशय शरीर के अंगों की व्यवस्थित गति से है व्यायाम के अनेक प्रकार है टहलने दौड़ना धड़ बैठक लगाना योगाभ्यास एवं प्रनियम मलखंब आदि सभी व्यायाम के उदाहरण है अब व्यायाम के लिए विभिन्न मशीनों एवं कर्म को भी तैयार कर लिया गया है व्यायाम शरीर की मांसपेशियों को क्रियाशील बनता है जिससे कार्य करने की क्षमता बढ़ती है इसके अतिरिक्त शरीर स्वस्थ प्रतिनियुक्त तथा सुंदर रहता है
पर्याप्त निद्रा तथा विश्राम :- उत्तम स्वास्थ्य के लिए निंद्रा एवं विश्राम अत्यंत आवश्यक होता है हम जो भी शारीरिक तथा मानसिक कार्य करते हैं उसे हमारे शरीर में थकान आ जाती है वास्तव में शारीरिक परिश्रम करते समय हमारे शरीर में अनेक हानिकारक पदार्थ एक तरफ हो जाते हैं यह पदार्थ ही हमारी मांसपेशियों को ताकते हैं इससे अतिरिक्त कार्य करते समय हमारे शरीर में ऊतक टूटे फट्टे रहते हैं कार्य करते समय इसकी मरम्मत नहीं हो पाती है अतः शरीर के स्वस्थ रहने के लिए इन उत्तकों की मरम्मत तथा हानिकारक पदार्थों का बाहर निकलना अनिवार्य होता है इसके लिए निद्रा अविश्रम ही सर्वोत्तम उपाय हैं
शारीरिक स्वच्छता:-
शारीरिक स्वच्छता के अंतर्गत संपूर्ण शरीर के प्रत्येक अंगों की स्वच्छता आती है अतः हमें अपने शरीर के विभिन्न अंगों की संस्थान प्रकार करनी चाहिए
त्वचा की स्वच्छता:- तू अच्छा शरीर का बाहरी आवरण होता है जो शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है त्वचा के विभिन्न रंग होते हैं किसी त्वचा का रंग काला होता है किसी का रंग सांवला या किसी त्वचा का रंग गेहुआ तथा किसी त्वचा का रंग गोरा होता है
त्वचा में करोड़ों छिद्र होते हैं इसमें कुछ छिद्रतलीय ग्रंथि में खुलते हैं और कुछ श्वेत ग्रंथियां में श्वेत ग्रंथियां हमारे शरीर से पसीना निकलने का कार्य करती है इससे हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है साथ ही पसीने के द्वारा हमारे शरीर की गंदगी एवं उत्सर्जी पदार्थ का विसर्जन हो जाता है ग्रंथि तेल उत्पन्न करती है जिससे हमारी त्वचा चिकनी व चमकदार बनती है
हमारे शरीर से पसीना निकलना अनेक प्रकार के कार्य करना बाहर जाने आदि से हमारी त्वचा गंदी हो जाती है त्वचा के रोमचंद्र बंद हो जाते हैं जिससे सफेद वह तो लिए ग्रंथियां बंद हो जाती है गांधी त्वचा पर विभिन्न प्रकार के रोगाणु बैठते हैं और त्वचा संबंधित रोग उत्पन्न करते हैं जैसे फुंसी फोड़े आदि साथ ही शरीर से पसीने की दुर्गंध आने लगती है अतः त्वचा की प्रतिदिन सफाई करनी चाहिए स्नान करने से हमारे शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और त्वचा में रक्त संचार होता है और शरीर में चमक आती है
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साइबर समिति का मतलब:- 'साइबर सोसाइटी 'को हिंदी में मुख्य रूप से ' साइबर समाज' या 'डिजिटल समाज' कहते हैं जो कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों के वैश्विक नेटवर्क को दर्शाता है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार ऑनलाइन शॉपिंग और अभ्यासी दुनिया शामिल है और इसका संबंध साइबर सुरक्षा और डिजिटल जीवन से भी है जिसे डिजिट...
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साइबर समिति का मतलब:-
'साइबर सोसाइटी 'को हिंदी में मुख्य रूप से ' साइबर समाज' या 'डिजिटल समाज' कहते हैं जो कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों के वैश्विक नेटवर्क को दर्शाता है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार ऑनलाइन शॉपिंग और अभ्यासी दुनिया शामिल है और इसका संबंध साइबर सुरक्षा और डिजिटल जीवन से भी है जिसे डिजिटल दुनिया या आभासी दुनिया भी कहा जाता है
मुख्य शब्द और अर्थ:
साइबर समाज (cyber society):- कंप्यूटर नेटवर्क द्वारा निर्मित इलेक्ट्रॉनिक समाज जैसे इंटरनेट पर होने वाले सामाजिक मेलजोल
डिजिटल समास (digital society):- प्रौद्योगिकी और डिजिटल माध्यमों पर आधारित समाज
साइबर स्पेस (cyberspace ):- कंप्यूटर नेटवर्क काव्य आवासी स्थान जहां जानकारी और संचार होता है जिसे आभासी दुनिया भी कहते हैं
उदाहरण और संदर्भ:
- साइबर सोसाइटी ऑफ़ इंडिया जैसी संस्थाएं साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलती है
- यह शब्द उन सामाजिक अतः क्रियो को दर्शाता है जो कंप्यूटर मध्य स्थिरता से होती है जैसे ऑनलाइन चैट और ईमेल
साइबर सोसाइटी है क्या:-
साइबर सोसाइटी (cyber society)का मतलब एक ऐसी दुनिया या समुदाय से है जो कंप्यूटर इंटरनेट और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर आधारित है जहां लोग ऑनलाइन जुड़ते हैं जानकारी शेयर करते हैं और डिजिटल सेवा का उपयोग करते हैं लेकिन साथ ही हैकिंग फिशिंग मलेरिया जैसे साइबर खतरों से बचने के लिए साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है जो हमारे डिजिटल जीवन को सुरक्षित रखती है
यह एक ऐसा समाज है जहां संचार व्यापार शिक्षा मनोरंजन और लगभग हर गतिविधि डिजिटल माध्यम इंटरनेट कंप्यूटर मोबाइल से होता है
इसमें सोशल मीडिया ऑनलाइन शॉपिंग बैंकिंग सरकारी सेवाएं और वर्चुअल दुनिया जैसे मेंटावर शामिल है
साइबर समिति से जुड़े मुख्य पहलू:-
1. साइबर स्पेस: कंप्यूटर और नेटवर्क से बनी आभासी दुनिया
2. साइबर सुरक्षा (cyber society): कंप्यूटर सिस्टम नेटवर्क और डाटा को साइबर हम लोग से बचने के तरीके और तकनीकी (जैसे एंटीवायरस फायरवॉल )
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AI के बारे में कुछ जानकारी:- IA का मतलब साधना के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) इंटेलिजेंस ऑग्मेंटेशन (intelligence augmentation- AI) हो सकता है जिसमें AI- मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने में चश्मा बनता है जबकि IA- मानव बुद्धि को बढ़ाने और उसे सपोर्ट करने पर केंद्रित है जिसे siri और हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक में इसका मतलब सूचना और आश्वासन&n...
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AI के बारे में कुछ जानकारी:-
IA का मतलब साधना के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) इंटेलिजेंस ऑग्मेंटेशन (intelligence augmentation- AI) हो सकता है जिसमें AI- मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने में चश्मा बनता है जबकि IA- मानव बुद्धि को बढ़ाने और उसे सपोर्ट करने पर केंद्रित है जिसे siri और हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक में इसका मतलब सूचना और आश्वासन (Information Assurance ) भी हो सकता है या कुछ नाम जैसे (आयोवा ) के लिए एक संक्षिप्त रूप
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI)
A) क्या है: यह कंप्यूटर साइंस का एक क्षेत्र है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, सीखने,समस्याओं को हल करने और निर्णय लेने की क्षमता देता है
B) कैसे काम करता है: यह एल्गोरिदम और डाटा का उपयोग करता है ताकि मशीन पेटरन पहचान सके,और काम कर सके, जैसे चेहरे पहचाने, भाषा समझने,और डाटा का विश्लेषण करना
उदाहरण : चैट बोर्ड,सिफारिश प्रणाली
( recommendation system ) और सेल्फ ड्राइविंग करें
2. इंटेलिजेंस ओंगमेंटेशन (AI)
A) क्या है: यह AI का एक प्रकार है जो मशीनों को इंसानों की जगह लेने के बजाय उनकी क्षमताओं (जैसे निर्णय लेने और रचनात्मकता) को बढ़ाने में मदद करता है
B) कैसे काम करता है: यह इंसानों और टेक्नोलॉजी के बीच सहयोग पर जोर देता है जिससे वह मिलकर बेहतर काम कर सके
उदाहरण : डॉक्टर को मेडिकल इमेज का विश्लेषण करने में मदद करने वाले तोलिया श्री जैसे व्यक्तिगत सहायक जो जानकारी ढूंढने में मदद करते हैं
3. अन्य अर्थ
A) सूचना आश्वासन (Information Assurance)-AI : साइबर सुरक्षा से संबंधित है जो डाटा और सूचना की सुरक्षा सुनिश्चित करती है
B) संक्षिप्त रूप (Acronym) जैसे आयोवा (lowa) राज्य के लिए AI
संक्षेप में जब आप IA देखते हैं तो यह अक्सर कृत्रिम बुद्धिमत्ता AI या मानव क्षमताओं को बढ़ाने वाली बुद्धिमत्ता के (AI) बारे में होता है लेकिन इसका मतलब सूचना सुरक्षा या किसी स्थान का संक्षिप्त नाम भी हो सकता है
AI - का मतलब
IA का मतलब मुख्य रूप से दो संदर्भ में होता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता )या इंटेलिजेंस ऑग्मेंटेशन (बुद्धि वृद्धि) जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने सीखने और समस्याओं का हल करने की क्षमता देता है और कभी-कभी किसी भाषा में प्रयुक्त के रूप में या फिर किसी स्थान के संक्षिप्त नाम जैसेआयोवा के रूप में भी होता है
AI- Artificial Intelligence- कृत्रिम बुद्धिमत्ता
AI कितने प्रकार के होते हैं
हाल ही में विभिन्न औद्योगिक में कृत्रिम बुद्धिमता ए के अनुप्रयोगों में भारी वृद्धि हुई है और उनकी क्षमता और प्रभाव का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है हम मोटे तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीन प्रकारों को पहचान सकते हैं संकीर्ण या कमजोर एआई (एएन आई) सामान्य एआई ( AGI ) और कृत्रिम आती बुद्धिमत्ता (ASI)
AI( कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को मुख्य रूप से क्षमता (ability) और कार्य क्षमता ( functionality) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जिसमें संता के आधार पर संकीर्ण AI( Narrow all) सामान्य AI ( AGI ) और सुपर AI ( ASI ) प्रमुख है जबकि कार्य क्षमता के आधार पर प्रतिक्रियाशील मशीन (Reactive Machines) सीमित मेमोरी (Limited Memory) मां का सिद्धांत theory of mind और आत्मा जागरूक AI (salf aware) जैसे प्रकार होते हैं जिनमें से अधिकांश वर्तमान में मौजूद है और कुछ भविष्य की अवधारणाएं है
समता आधारित प्रकार-: (types of ability)
1. संकीर्ण AI -: यह AI किसी एक विशिष्ट कार्य के लिए बनाया जाता है जैसे सिरी गूगल स्टेटस या चेहरे की पहचान
2. सामान्यAI-: यह इंसानों की तरह किसी भी भौतिक कार्य को करने की क्षमता रखता है लेकिन यह अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है
3. सुपरAI:- यह मानव से कहीं ज्यादा बुद्धिमान होगा और अपनी सोच को खुद सुधर सकेगा जो अभी केवल एक काल्पनिक अवधारणा है
कार्य क्षमता आधारित प्रकार( types of functionality)
1. प्रतिक्रियाशील मशीन:- यह सिर्फ वर्तमान इनपुट पर प्रतिक्रिया करती है कोई पिछली या दस्त नहीं होती जैसे डीप ब्लू शतरंज कंप्यूटर
2. सीमित मेमोरी:- यह थोड़े समय के लिए पिछली जानकारी को याद रख सकती है और उनका उपयोग करती है जैसे सेल्फ ड्राइविंग करो
3. मां का सिद्धांत:- यह AI भावनाओं विश्वासों और इरादों को समझने और उनसे बातचीत करने में सक्षम होगा (अभी विकास के अधीन है)
4. आत्म जागरूक :- यह सबसे अनंत स्टार है जिससे(AI) में चेतना और स्वयं की समझ होगी पूरी तरह सिद्धांत ट्रिक
AI मैं कितने प्रकार के अभिज्ञान है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षमता आधारित प्रकार
मैं किस प्रकार सीखते हैं और अपने ज्ञान को किस हद तक लागू कर सकते हैं इसके आधार पर सभी AI को तीन समता प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है संकीर्ण कृत्रिम AI सामान्य बुद्धिमत्ता और कृत्रिम सुपर इंटेलिजेंस
AI मॉडल कितने प्रकार के होते हैं?
विभिन्न प्रकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( AI )अलग-अलग समस्याओं का समाधान करती है जेनरेटिव AI सर्जन करती है प्रिडिकेटिव AI परमाणु लगती है ईस्ट आई कार्य में सहायता करती है और एग्जॉटिक आई स्वत रूप से कार्य करती है बड़े भाषा मॉडल आईआईएम और मल्टी मॉडल सिस्टम अब आधुनिक कार्य स्थल विशेष रूप से ज्ञान आधारित कार्यों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं
AI के पिता:-
AI के जनक john macarthy है जिन्होंने 1956 में दांत माउस सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द गदा और इसे एक अकादमिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया साथ ही इन्होंने LIPS प्रोग्रामिंग भाषा का भी विकास किया जो AI रिसर्च में महत्वपूर्ण रही है
मुख्य बिंदु :
जनक : john macarthy अमेरिका कंप्यूटर वैज्ञानिक और संज्ञानात्मक वैज्ञानिक
शब्द गणना:- उन्होंने 1956 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AIशब्द का आविष्कार किया
डॉट माउस सम्मेलन :- उन्होंने 1956 में डार्क माउस सम्मेलन आयोजित किया जिसे AI का जन्म स्थान माना जाता है
योगदान :-इन्होंने AI के शुरुआती विकास और जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया
जबकि एलेन टरिक को AI के शुरुआती विचारों और तुरी कि टेस्ट के लिए जाना जाता है जॉन में करती को AI के क्षेत्र के संस्थापक और जनक के रूप में मान्यता प्राप्त है
AI के फायदे व नुकसान-
AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कई फायदे हैं जैसे उत्पादकता बढ़ाना दोहराए जाने वाले कामों को स्वचालित करना स्वास्थ्य सेवा में सुधार 24/7और उपलब्धता लेकिन इसके नुकसान भी है जिसमें नौकरियों का विस्थापन उच्च लागत को पंत संबंधी चिंताएं एल्गोरिदम में पक्षपात और मानवीय भावनाओं व रचनात्मक की कमी शामिल है इसलिए इसका उपयोग संतुलन और जिम्मेदारी के साथ करना महत्वपूर्ण है
फायदे( benefits )
उत्पादकता और दक्षता:-AI कार्यों को तेजी से और अधिक सटीक रूप से करता है जिस समय बचता है और काम की गुणवत्ता बढ़ती है
स्वचालन: यह दोहराए जाने वाले और निराशा कार्यों को स्वचालित करता है जिससे मानव कर्मचारी अधिक जटिल कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं
24/7 उपलब्धता: AI सिस्टम बिना थके जब से घंटे काम कर सकते हैं
बेहतर निर्णय :- यह बड़े बेटे सेट का विश्लेषण करके पैटर्न और अंतर्दृष्टि प्रदान करता है जिसे बेहतर और तेज निर्णय लेने में मदद मिलती है जैसे स्वास्थ्य सेवा में
नवाचार : यह नहीं खोजो और समाधानों को बढ़ावा देता है
नुकसान (Disadvantages)
नौकरी का विस्थापन:- स्वचालन के कारण कुछ नौकरियां खत्म हो सकती है जिससे बेरोजगारी बढ़ सकती है
उच्च लागत: AI सिस्टम को विकसित करना और लागू करना बहुत महंगा हो सकता है
गोपनीयता और सुरक्षा:- AI बड़ी मात्रा में डाटा का प्रयोग करता है जिससे गोपनीयता के उल्लंघन और सुरक्षा जोखिम का खतरा होता है
पक्षपात : यदि प्रशिक्षण उत्तर पक्ष पाती है तो AI सिस्टम भी पक्षपाती निर्णय ले सकते हैं
मानवीय स्पर्श की कमी:-AI मैं भावना रचनात्मक और सुहानुभूति की कमी होती है जो कुछ क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है
AI का इतिहास( history of AI)
AI का इतिहास 1905 के दशक में शुरू हुआ जब जॉन में मैं मेकाथरी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट शब्द गदा और दांत माउस कार्यशाला में इसे एक वैज्ञानिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया हालांकि एलन टयूरिंग जैसे अग्रद्ध हो तो ने पहले ही मशीनों बुद्धिमता की नींव रखी थी और तब यह यह कई चरणों जैसे संकीर्ण AI सामान्य AI में गुजरते हुए आदमी मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के जरिए तेजी से विकसित हो रहे हैं
शुरुआती विचार ने नीव (1940- 1950)
1950: एलेन टरिक ने मशीनस सोच सकती है लेख में टयूरिंग टेस्ट का प्रस्ताव रखा जो मशीन की बुद्धिमत्ता मापने का एक तरीका था और मशीनों के सोने की संभावना पर विचार किया
1952: ऑथर सैमुअल ने पहले सीखने वाला चेकर प्रोग्राम बनाया
1956: जॉन मैंकाथ्री ने डांट माउस कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द का प्रयोग किया और इस क्षेत्र को एक नाम दिया जिससे ए आई का औपचारिक जन्म हुआ
प्रारंभिक उत्साह और शीतकाल (1960-1960)
AI शुरुआती प्रोग्राम जैसे लॉजिक थियोसिटी बने लेकिन जल्द ही कंप्यूटर की सीमित शक्ति और जटिल समस्याओं के कारण उत्साह कम हुआ AI विंटर
विशेषज्ञ सिस्टम और AI पुनरुत्थान 1980
विशेषज्ञ सिस्टम लोकप्रिय हुए जो विशिष्ट क्षेत्रों में मानव ज्ञान का अनुकरण करते थे जिससे आई में नये जान आई
मशीन लर्निंग और दीप लर्निंग का युग (1990 वर्तमान)
1917: IBS का डीप ब्लू शतरंज में विश्व चैंपियन गिरी कस्प रोग को हराया
2010: मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग की प्रगति ने AI को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंचा बड़े डाटा सेट और शक्तिशाली कंप्यूटर्स ने इमेज रिकॉर्डिंग नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में क्रांति लाती
मुख्य मिल के पत्थर
NLP:- सीरी (siri) अलकासा( alexa) जैसे वर्चुअल अीस्टेट
कंप्यूटर विजन:- सेल्फ ड्राइविंग कर फेस रिकॉग्निशन
वर्तमान: जेनरेटिव AI जैसी तकनीकी जो मानव जैसी सामग्री बन सकती है
संक्षेप में का इतिहास काल्पनिक से शुरू होकर सिद्धांत्रिक आधार उत्साह और निराशा के दौर से गुजरते हुए आवाज के दाता संचालित तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिदृश्य तक पहुंचा है जिसका उद्देश्य मशीनों को बुद्धिमान बनाना है
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जैसे कि मैंने आपको अपने पिछले ब्लॉग में बताया है कि मानव जीवन पर पर्यावरण तथा प्रदूषण का प्रभाव कैसे पड़ता है तो उसमें मैं आपको कुछ बातें बता चुकी हूं जैसे- प्रस्तावना,पर्यावरण का अर्थ तथा परिभाषा, प्राकृतिक पर्यावरण, पर्यावरण के मुख्य भाग या वर्ग, पर्यावरण से लाभ तथा जीवन पर होने वाले प्रभाव, पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव और मैं आपको प्रदूषण का अर्थ भी बता चुकीहूँ तो इस ब्लॉक&nbs...
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जैसे कि मैंने आपको अपने पिछले ब्लॉग में बताया है कि मानव जीवन पर पर्यावरण तथा प्रदूषण का प्रभाव कैसे पड़ता है तो उसमें मैं आपको कुछ बातें बता चुकी हूं जैसे- प्रस्तावना,पर्यावरण का अर्थ तथा परिभाषा, प्राकृतिक पर्यावरण, पर्यावरण के मुख्य भाग या वर्ग, पर्यावरण से लाभ तथा जीवन पर होने वाले प्रभाव, पर्यावरण का जनजीवन पर प्रभाव और मैं आपको प्रदूषण का अर्थ भी बता चुकीहूँ
तो इस ब्लॉक मैं और जानकारी बताऊंगी जैसे- प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं और मानव जीवन पर इनका प्रभाव
प्रदूषण के प्रकार तथा मानव जीवन पर इनका प्रभाव:-
प्रदूषण निम्न प्रकार के होते हैं-1. वायु प्रदूषण 2.जल प्रदूषण 3.ध्वनि प्रदूषण 4.मृदा प्रदूषण तथा 5.रेडियो धर्मी प्रदूषण
1. वायु प्रदूषण:-
वायु प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ है - वायु का दूषित हो जाना ऑक्सीजन के अतिरिक्त वायु में किसी भी गैस की मात्रा संतुलित अनुपात से अधिक होने पर वायु श्वसन योग्य नहीं रहती अतः वायु में किसी गैस की वृद्धि या अन्य पदार्थ का समावेश होना वायु प्रदूषण कहलाता है सैमसंग में सभी जीव कार्बन डाइऑक्साइड विसर्जित करते हैं तथा ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं किंतु हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति के कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं तथा वायुमंडल में ऑक्सीजन छोड़ते हैं इस प्रकार इन दोनों गैसों का अनुपात संतुलित बना रहता है वायु मे गैसीय और ठोस दो प्रकार की अशुद्धियां मिलती है
a) गैसीय अशुद्धियां :-
वायु विभिन्न प्रकार की गैसीय का मिश्रण है अशुद्ध गैस जैसे -कार्बन डाइ-ऑक्साइड,कार्बन मोनोऑक्साइड, क्लोरीन,अमोनिया,आदि वायुमंडल में मिल जाती है जिससे वायु अशुद्ध हो जाती है तथा वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ती है
b) ठोस अशुद्धियां :-
विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया, जीवाणु,बाल,मिट्टी, धूल के हल्के कण,धागे,लकड़ी के कण, कोयले के महीन कण,वायुमंडल में मिल जाते हैं और वातावरण को धूल युक्त तथा प्रदूषण युक्त बनाते हैं
प्रदूषण वायु से फैलने वाले रोग
हम जानते हैं कि प्रदूषण वायु में ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है इससे वायु में रोग के कीटाणु बढ़ाने लगते हैं यह कीटाणु ही अनेक रोगों को फैलाने का कार्य करते हैं प्रदूषण वायु के सेवन से फैलने वाले रोगों का संक्षिप्त परिचय निम्न वक्त है
1. सांस द्वारा फैलने वाले रोग:-
सभी जीव स्वसन क्रिया के द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड गैस को वायुमंडल में छोड़ते रहते हैं इस अशुद्ध वायु का सेवन करने से व्यक्ति को घुटन का अनुभव होने लगता है तथा सिर दर्द, चक्कर आना,भारीपन,आदि की शिकायत हो जाती है
2. वास्तु के सड़ने से हुई अशुद्ध वायु से रोग :-
विभिन्न वस्तुओं के सड़ने तथा जलने से भी वायु अशुद्ध होती रहती है इस क्रिया में वायु में दोनों प्रकार की अशुद्धियां अर्थात ठोस अथवा कैसी है व्यापक हो जाती है इस प्रकार असुद्ध वायु में सांस लेने से भी विभिन्न रोग लगा सकते हैं जिसमें मुख्य है- भूख न लगना,अतिसार, अतिसार, सर दर्द,भारीपन, तथा चक्कर आना
3. धूल कानों से युक्त वायु से रोग:-
धूल कणों की अधिकता से भी दूषित हो जाते हैं इस प्रकार की अशुद्ध वायु में सांस लेने में मुख्य रूप से सांस के रोग अर्थात दमा के अतिरिक्त आंखों गले तथा कानों के रोग भी हो सकते है
4. औद्योगिक अशुद्ध वायु से रोग:-
वर्तमान समय में वायु को अशुद्ध बनाने में औद्योगिक संस्थानों का मुख्य हाथ है इनके द्वारा अनेक प्रकार की विषैली कैसे विषैली पदार्थ के अभिषेक निरंतर वायुमंडल में व्यापक होते रहते हैं इस प्रकार की अशुद्धियां अनेक प्रकार के रोगों का कारण बनती है सांस के रोग, फेफड़ों के रोग तपेदिक,खांसी,कुकर खांसी,बुखार तथा अनेक गंभीर रोग इस प्रकार की अशुद्ध वायु से ही फैलते हैं
उपयुक्त विवरण से स्पष्ट है कि अशुद्ध वायु से अनेक प्रकार के रोग फैल सकते हैं जो हमारे जीवन के लिए घातक भी सिद्ध हो सकते हैं वास्तव में शुद्ध वायु ही हमारे जीवन का आधार है हमें चाहिए कि हम अधिक से अधिक शुद्ध वायु का सेवन करें तथा वायु को दूषित होने से बचाए विश्व की अनेक संस्थाएं इस और भरकस प्रकाश कर रही है
वायु प्रदूषण का भरसक जीवन पर प्रभाव:-
वायु प्रदूषण का जनजीवन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है
वायु प्रदूषण का जन स्वास्थ्य पर प्रभाव:-
1. सल्फर डाइऑक्साइड एक वायु प्रदूषक है फेफड़ों के ऊतकों पर कुप्रभाव, पुराने खांसी का रोग हमारे जन स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है
2. नाइट्रोजन के ऑक्साइड एक वायु प्रदूषक है फेफड़ों का कैंसर इन्फ्लूएंजा के प्रति प्रतिरोधक शक्ति का ह्रास हमारे जन स्वास्थ्य पर पड़ता है
3. कार्बन मोनोऑक्साइड एक वायु प्रदूषक है मस्तिष्क पर कुप्रभाव सोचने विचारने की शक्ति का ह्रास हमारे जन स्वास्थ्य पर पड़ता है
4. सूक्ष्म कण (क )कैडमियम व शिक्षा (ख) रख कालिक वेद हुआ एक वायु प्रदूषक है रक्तचाप वह वृद्धि रुधिर व अधिक मात्रा के कारण मृत्यु वह कम मात्रा के कारण तंत्रिका तंत्र तथा गुर्दों पर को प्रभाव नेत्रों में जलन व अन्य रोग फेफड़ों के कैंसर की संभावना का जन स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है
5. क्लोरोफ्लोरोकार्बन एक वायु प्रदूषक है वायुमंडल की ओजोन की परत में छिद्र कर रहा है जिससे पराबैंगनी करने सूर्य का प्रकाश अधिक के में पृथ्वी पर पहुंचकर कैंसर जैसे असाध्य रोगों की उत्पत्ति का कारण बन रही है
2. जल प्रदूषण:-
जल प्रदूषण का अर्थ है:- जल प्राप्ति के प्रमुख स्रोतों का दूषित हो जाना जल में अशुद्धियों एवं हानिकारक पदार्थों के घुल मिल जाने से जल प्रदूषित हो जाता है इस प्रकार के हानिकारक पदार्थ कार्बनिक तथा अकार्बनिक पदार्थ भी हो सकते हैं तथा कुछ कैसे भी हो सकते हैं प्रदूषण जल जीवन में विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न कर सकता है जल प्रदूषण के अंतर्गत विभिन्न रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु, विषाणु, कीटाणु नाशक पदार्थ, अप्रत्नाशक पदार्थ, रासायनिक खाद्य, कार्बनिक पदार्थ, औद्योगिक संस्थानों से निकले अपशिष्ट तथा व्हाइट माल आदि अनेक पदार्थ हो सकते हैं इन पदार्थों का स्वास्थ्य तथा अर्थ व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ता है जल प्रदूषण वर्तमान में एक गंभीर समस्या है घरों के वायित मां कारखाने के अपशिष्ट पदार्थ आदि नदियों और अंत में समुद्र में मिलाए जाते हैं मनुष्य के लिए दिए जल सामान्य रूप से इन्हीं जल स्रोतों से सामान्य उपचार के बाद प्राप्त किया जाता है प्रदूषण जल के सेवन से प्रतिवर्ष लाखों व्यक्ति विभिन्न लोगों को के शिकार हो जाते हैं ऐसा अनुमान है कि पेट के रोग क्यों में काम से कम 50% रोगी दूषित जल के सेवन से ही रोग ग्रस्त होते हैं
जल प्रदूषण का जन स्वास्थ्य पर प्रभाव:-
जल प्रदूषण का भी प्रतिकूल प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ता है विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक बच्चे जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप उत्पन्न बीमारियों से मर जाते हैं तथा 50% से अधिक लोग केवल प्रदूषण जल के सेवन के कारण ही बीमार होते हैं प्रदूषण जल के सेवन से मुख्य रूप से पाचन तंत्र संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं इसमें मुख्य है हैजा पेचिस पीलिया टाइफाइड परतीफाइड आदि यह सभी रोग सकारात्मक रूप से फैलते हैं तथा घातक सिद्ध होते हैं प्रदूषण जल एक अन्य प्रकार से भी मनुष्य को प्रभावित करता है हम जानते हैं कि यह संख्या लोग मांसाहारी है तथा मांस प्रताप का एक मनुष्य स्रोत मछलियां एवं अन्य जल जीव है जब जल प्रदूषित हो जाता है तब इन मछलियों के शरीर में भी अनेक विषैले तत्वों का समावेश हो जाता है तथा ऐसे जीवों का मांस खाने में व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न रसायनों से प्रदूषण समुद्री जल में रहने वाली मछलियों को खाने से अंधेपन एवं मस्तिष्क समृद्धि रोगों की आशंका रहती है जल प्रदूषण से हमारे फैसले की प्रभावित होती है प्रदूषण जल द्वारा संचित फसलों को खाने से मनुष्य तथा अन्य प्राणियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है
3.ध्वनि प्रदूषण:-
ध्वनि प्रदूषण का आशय है पर्यावरण में अनावश्यक शोर का व्यापक हो जाना शोर एक वचन ध्वनि है यह सिद्ध हो चुका है किसी और मनुष्य तथा अन्य सभी जीव जंतु पर विपरीत प्रभाव डालता है अतः इसको भी पर्यावरण का प्रदूषण माना जाता है शोर की तीव्रता सरवन शक्ति शारीरिक संतुलन आदि को स्थाई या अस्थाई रूप से हानि पहुंचती है इस प्रकार वायुमंडल में उत्पन्न की गई व्यस्चित ध्वनि जिसका मानव तथा अन्य प्राणियों के श्रवण तंत्र एवं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ध्वनि शोर प्रदूषण कहलाता है
सोना केवल बातचीत आराम आदि में बाधा उत्पन्न करता है बल्कि यह मानव के स्वास्थ्य तथा व्यवहार को भी प्रभावित करता है अचानक उत्पन्न होने वाली ऊंची ध्वनि कान के पर्दे तथा भीतरी कान में स्थित संवेदी कोशिकाओं को हानि पहुंचती है यदि अधिक लंबे समय तक सो रहे तो सरवन तंत्र को स्थाई अथवा स्थाई रूप में क्षीत हो सकती है सामान्य ऐसा माना जाता है कि अधिक तीव्रता से अचानक उत्पन्न होने वाले शोर नियंत्रण शोर की अपेक्षा अधिक हानिकारक सिद्ध होते हैं शरीर के कारण स्वास्थ्य संबंधित अनेक समस्या उत्पन्न हो जाती है
ध्वनि प्रदूषण का जन्म स्वास्थ्य पर कुप्रभाव :-
ध्वनि प्रदूषण के जन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यवस्थित ग्रिफिथ कामत है कि, "शोर व्यक्ति को समय से पहले बुढा कर देता है " हमारे शरीर पर शोर का प्रभाव अनेक प्रभाव से पड़ता है सूर्य ध्वनि प्रदूषण से व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर होता है तथा उनके कार्य क्षमता घटती है यह विभिन्न दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकता है अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति बड़ा हो सकता है अर्थात उसकी सुनने की शक्ति समाप्त हो सकती है इस विषय में कहा गया है कि कानों को शोर के कारण कष्ट उठाना पड़ता है क्योंकि शोर के कारण हमारे आराम नहीं कर पाते बताइए अतिरिक्त थकान के शिकार बने रहते हैं कानों के अतिरिक्त ध्वनि प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव व्यक्तियों के हृदय स्नायु मंडल तथा पाचन तंत्र पर भी पड़ता है अत्यधिक शोर के कारण उच्च रक्तचाप श्वसन गति नदी गति में उतार चढ़ाव यात्रा की गतिशीलता में कमी रक्त संचरण में परिवर्तन तथा हृदय पेशी के गुना में परिवर्तन हो जाता है शोर से शरीर एवं मानसिक तनाव बढ़ता है तथा तांत्रिक संबंधित व्यक्तियों की आशंका बनी रहती है अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण के कारण निश्चय ग्रंथ हो सकता है तथा व्यक्ति को चक्कर आने लगते हैं शोर के कारण ही व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा तथा झूला पूर्ण हो सकता है
पर्यावरण प्रदूषण का जन जीवन पर प्रभाव :-
पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न पक्षों का सामान्य परिचय हम प्राप्त कर चुके हैं संक्षेप में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका प्रतिकूल प्रभावजन जीवन के प्रत्येक पक्ष पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रभावजन स्वास्थ्य पर पड़ता है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप विभिन्न साधारण गंभीर तथा अति गंभीर रोग पर अपने लगते हैं पर्यावरण प्रदूषण का अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिकूल प्रभावजन साधारण के आर्थिक जीवन पर भी पड़ता है रोगों की वृद्धि तथा स्वास्थ्य के निम्न स्तर के कारण जनसाधारण की उत्पादक क्षमता घटती है तथा रोग निवारण के लिए अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ता है इसे जनसाधारण का जीवन आर्थिक संकट का शिकार हो जाता है
4. मृदा प्रदूषण:-
मृदा प्रदूषण का अर्थ है भूमि या मिट्टी का दूषित हो जाना मृदा प्रदूषण के अंतर्गत मुख्य रूप से उसे भूमि के दूषित होने का अध्ययन किया जाता है जैसे कृषि कार्यों के लिए अर्थात फैसले उगाने के लिए प्रयोग किया जाता है वास्तव में प्रदूषण जल तथा वायु के कारण मर्दा भी प्रदूषित हो जाती है वर्षा अत्यधिक के जल के साथ यह प्रदूषण मर्दा में आ जाते हैं जनसंख्या की वृद्धि के साथ-साथ अधिक फसल पैदा करने के लिए भूमि की आवश्यकता बढ़ाने या बनाए रखने के लिए रासायनिक अवरोह को का उपयोग किया जाता है इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के कीटाणु नाशक है अब ताराणसी आदि पदार्थ भी फसलों पर छिड़क जाते हैं यह सब पदार्थ मर्दा के साथ मिलकर हानिकारक प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं
इस प्रकार मृदा को दूषित करने में घरेलू अपमर्जकों वही कमल वाहित जल उद्योगों के अभीष्ट पदार्थ तेल कीटाणु नाशक अप प्रदन्नासी रेडियोधर्म में पदार्थ तथा गर्म पदार्थ के निकशासन आदि की प्रमुख भूमिका रहती है
मुंद्रा प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव :-
मृदा प्रदूषण का मनुष्य के जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है
मृदा प्रदूषण के कारण भूमि की उत्पादन शक्ति कम हो जाती है
खाद पदार्थ में पूर्ण शुद्धता नहीं रहती
D. D. T के अधिक प्रयोग से खाद पदार्थ में विश् उत्पन्न हो जाता है
मृदा प्रदूषण फसलों की वृद्धि को रोक देता है
मृदा प्रदूषण को रोकने के उपाय:-
वृक्षारोपण का अभियान चलाना चाहिए
वनों के विनाश पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए
खेतों में मेड बंदी करनी चाहिए
भूमि की चकबंदी करनी चाहिए
5. रेडियोधर्मी प्रदूषण:-
परमाणु शक्ति से भी प्रदूषण बढ़ता है परमाणु परीक्षणों के दौरान होने वाले रेडियोधर्मी विकिरण सीजन स्वास्थ्य प्रभावित होता है इससे वायु जल व पृथ्वी प्रदूषित होती है इस प्रकार का प्रदूषण अधिक भैया वह होता है द्वितीय विश्व युद्ध में नागासाकी और हिरोशिमा शहर पर हुए परमाणु बम के विस्फोट से लाखों व्यक्तियों को कल के मुंह में जाना पड़ा तथा बहुत से अपंग हो गए और बहुत से रोग उनकी संतानों में भी उत्पन्न हुए
रेडियो धर्मी प्रदूषण के रोकने के उपाय- इस प्रदूषण से बचने के लिए न्यू क्लियर परीक्षण जान शून्य स्थान पर किए जाने चाहिए तथा कानून का उल्लंघन करने वाले को दंड दिया जाना चाहिए
पर्यावरण तथा प्रदूषण में अंतर
पर्यावरण तथा प्रदूषण को भली भंते समझ लेने के पश्चात प्रसन्न यह उड़ता है कि इसमें क्यों अंतर है यदि हम दोनों ही विषयों का गहराई से अध्ययन करें तो पता चलता है कि दोनों एक दूसरे से विपरीत है जहां पर्यावरण संरक्षण मनुष्य के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है वहीं प्रदूषण चाहे जल का हो ध्वनि अथवा जनसंख्या का होनारात्मक प्रभाव डालता है दूसरे शब्दों में पर्यावरण मानव जीव जंतु जंगली जानवर पेड़ पौधे एवं दुर्लभ देवी की को जीवित रखते हुए उनकी संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि करता है वहीं दूसरी ओर प्रदूषण मानव जीव जंतु पेड़ पौधे तथा दुर्लभ जातियों को नष्ट करता है जिससे पारिस्थितिक तंत्र है संतुलित बन जाता है संक्षेप में यही मुख्य अंतर है
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प्रस्तावना:- पर्यावरण प्रकृति द्वारा प्रदत्त उन सभी पदार्थों से बना है जो स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए आवश्यक है पृथ्वी का धरातल एवं उसकी सभी प्राकृतिक दिशाएं तथा प्राकृतिक साधन भूमि और पानी पर्वत वह मैदान खनिज पदार्थ पौधे पशु जलवायु की शक्ति गुरुत्वाकर्षण विद्युत अवकरण शक्तियां जो पृथ्वी पर क्रियाशील है पृथ्वी पर प्रकृति ने मानव के रहने योग्य व्यवस्था की है प्रकृति के द्वारा प...
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प्रस्तावना:-
पर्यावरण प्रकृति द्वारा प्रदत्त उन सभी पदार्थों से बना है जो स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए आवश्यक है पृथ्वी का धरातल एवं उसकी सभी प्राकृतिक दिशाएं तथा प्राकृतिक साधन भूमि और पानी पर्वत वह मैदान खनिज पदार्थ पौधे पशु जलवायु की शक्ति गुरुत्वाकर्षण विद्युत अवकरण शक्तियां जो पृथ्वी पर क्रियाशील है
पृथ्वी पर प्रकृति ने मानव के रहने योग्य व्यवस्था की है प्रकृति के द्वारा पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक संसाधन प्राप्त हुए हैं परंतु मनुष्य स्वयं पृथ्वी का पर्यावरण बिगड़ने के लिए उत्तरदाई है तेजी में बढ़ते हुए जनसंख्या के कारण जंगलों को खेती तथा आवास के लिए काटा जा रहा है और पर्यावरण का संतुलन खराब होता जा रहा है अधिक वन काटने से वर्षा कम होने लगी है जिससे पीने के पानी का स्तर घटता जा रहा है साथ ही शुद्ध वायु ना मिल जाने के लिए कारण अनेक प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो रही है यही कारण है कि प्रतिदिन पर्यावरण का संतुलन बढ़ता ही जा रहा है
पर्यावरण का अर्थ तथा परिभाषाएं :-
पर्यावरण दो शब्दों 'परि' तथा 'आवरण' से मिलकर बना है 'परि' का अर्थ है 'चारों' ओर तथा 'आवरण' का अर्थ है 'ढका हुआ' अर्थात वह सभी दिशाएं जो हमारे वायुमंडल को चारों ओर से ढके होती है, पर्यावरण कहलाती है
मेकाइवर अप पेज के अनुसार :-
पर्यावरण प्रकृति द्वारा उन सभी पदार्थों से बना है जो स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए आवश्यक है पृथ्वी का धरातल एवं उसकी सभी प्राकृतिक दिशाएं तथा प्राकृतिक साधन भूमि और पानी पर्वत वह मैदान खनिज पदार्थ पौधे पशु जलवायु की शक्ति गुरुत्वाकर्षण विद्युत एवं विकिरण शक्तियां जो पृथ्वी पर क्रियाशील है
जिस्बार्ट के अनुसार :-
पर्यावरण वह है जो एक वस्तु को चारों ओर से घिरे हुए हैं तथा उसे पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालता है
प्राकृतिक पर्यावरण:-
प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत जलवायु भूमि की उत्पादक क्षमता जंगल मैदान पहाड़ झड़ने समुद्र आकाश सूर्य चंद्रमा तारे पशु पक्षी कीट पतंगे आदि सभी सम्मिलित किए जाते हैं प्राकृतिक पर्यावरण प्रकृति द्वारा मनुष्य को प्रदान किया जाता है
सोरोकिन के अनुसार:-
भौगोलिक पर्यावरण का संबंध ऐसी प्राकृतिक दशाओं से है जो मनुष्य से प्रभावित हुए बिना अपना कार्य करती है तथा जो मनुष्य के अस्तित्व में कार्यों से स्वतंत्र रहते हुए स्वयं परिवर्तित रहती है
पर्यावरण के मुख्य भाग या वर्ग
पर्यावरण के व्यवस्थित अध्ययन के लिए उसका समुचित वर्गीकरण नितांत आवश्यक है सुविधा के लिए संपूर्ण पर्यावरण को तीन वर्गों या भागों में विभाजित किया गया है, यह है, (i) प्राकृतिक या भौगोलिक पर्यावरण, (ii) सामाजिक पर्यावरण तथा (iii) सांस्कृतिक पर्यावरण पर्यावरण के इन तीनों भागों का सामान्य परिचय निम्नलिखित है
1.प्राकृतिक या भौगोलिक पर्यावरण
मनुष्य के जीवन में विभिन्न प्राकृतिक शक्तियों एवं कारक ही प्राकृतिक या भौगोलिक पर्यावरण का निर्माण करते हैं इस प्रकार पृथ्वी आकाश वायु जल वनस्पति मौसम तथा सांसद जीव जंतु आदि सम्मिलित रूप से प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं प्राकृतिक या भौगोलिक पर्यावरण के निर्माण में मनुष्य की कोई भूमिका नहीं है, परंतु मनुष्य ने प्राकृतिक पर्यावरण के प्रदूषण में बहुत अधिक योगदान दिया है मानव जन जीवन पर सार्वजनिक प्रभाव प्राकृतिक पर्यावरण का ही पड़ता है
2. सामाजिक पर्यावरण :-
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है प्रत्येक व्यक्ति सामाजिक से प्रभावित होता है समाज संबंधी सभी कारक सम्मिलित रूप में व्यक्ति के लिए सामाजिक पर्यावरण का निर्माण करते हैं इस प्रकार संपूर्ण सामाजिक ढांचा ही सामाजिक पर्यावरण है व्यावहारिक दृष्टिकोण से परिवार पास पड़ोस समुदाय खेल तथा विद्यालय आदि सभी सामाजिक पर्यावरण है व्यक्ति के जीवन पर सामाजिक पर्यावरण का भी विशेष प्रभाव पड़ता है
3. सांस्कृतिक पर्यावरण:-
मनुष्य द्वारा निर्मित वस्तुओं का समग्र रूप तथा परिवेश की सांस्कृतिक पर्यावरण है सांस्कृतिक पर्यावरण के दो रूप स्वीकार किए गए हैं जिन्हें क्रमश भौतिक सांस्कृतिक पर्यावरण और भौतिक सांस्कृतिक पर्यावरण कहा जाता है भौतिक पक्ष के अंतर्गत आवास औद्योगिक संस्थान उपयोग के उपकरण एवं वस्तुएं तथा मशीन आदि सम्मिलित की जाती है अब भौतिक सांस्कृतिक पर्यावरण के अंतर्गत धर्म संस्कृतियों भाषण लिपि और कानून तथा प्रथम को सम्मिलित किया जाता है मनुष्य के अतिरिक्त अन्य प्राणियों के पास सांस्कृतिक पर्यावरण नहीं है
पर्यावरण से लाभ तथा जनजीवन पर होने वाले प्रभाव:-
पर्यावरण संसार में रहने वाले प्रत्येक प्राणी के पूरे क्रियाकलाप को प्रभावित करता है अतः पर्यावरण से निम्नलिखित लाभ होते हैं
प्रत्येक प्राणी के जीवन का आधार स्वच्छ वायु है यह हमें स्वच्छ पर्यावरण से ही प्राप्त होती है
अच्छे पर्यावरण से भूमि की उभरा शक्ति बढ़ती है
शुद्ध जल की प्राप्ति शुद्ध पर्यावरण से होती है शुद्ध जल प्राणी का अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आवश्यक है
वातावरण में पेड़ पौधे उचित तथा आवश्यक नमी प्रदान करते हैं
वनों जंगलों को ना काटने पर प्राकृतिक संतुलन नहीं होता
वनों से विभिन्न प्रकार की औषधीय जड़ी बूटियां आदि प्राप्त होती है प्राप्त होती है
पर्यावरण का जन जीवन पर प्रभाव
आज हमारे चारों ओर का वातावरण दूषित हो गया है विभिन्न प्रकार की जानलेवा बीमारियां उत्पन्न हो रही है पेड़ पौधे को प्रतिदिन काटा जा रहा है और परिणाम स्वरूप आज पर्यावरण प्रदूषण के प्रति विश्व स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है परंतु इस प्रकार के कार्यों का पूर्ण उत्तरदायित्व मनुष्य पर ही है मनुष्य ने अपने वर्तमान स्वार्थ हेतु भविष्य को नष्ट कर दिया तथा जीव जंतु को भी हानि पहुंचाई है
बढ़ती हुई जनसंख्या धूल एवं दुआ उड़ते वहां वायुमंडल में फैलती हुई हानिकारक रक गैस पर्यावरण को दूषित कर रही है ऐसा लगता है कि यदि इन पर रोक ना लगाई गई तो यह संपूर्ण धरती जीवन वहीं हो जाएगी अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने प्राकृतिक संस्थाओं का उपयोग एक सीमा में करें तथा पर्यावरण संतुलन को बनाए रखें ऐसा करने से प्राणी मात्र को लाभ मिलेगा तथा प्रत्येक प्राणी का अस्तित्व भी बना रहेगा
प्रदूषण का अर्थ:-
मनुष्य ही नहीं अपितु सभी सजीवों का जलवायु और मंत्र से बहुत ही गहरा संबंध है जब कभी कोई ऐसा बाहरी पदार्थ इसमें आ जाता है जिसके कारण इसके भौतिक और रासायनिक गुना में परिवर्तन हो जाता है एवं इसके गुना में हुए परिवर्तनों से मानव तथा उसके उपयोगी जीवो को हानि पहुंचती है तो उसे प्रदूषण कहते हैं
इन प्रकार जलवायु और मंत्र के भौतिक एवं जैविक गुना में होने वाले ऐसे परिवर्तनों को जो मनुष्यों के जीवन उसके रहन-सहन है उसके महत्व के अन्य जीवों को हानि पहुंचाते हैं प्रदूषण कहते हैं
जब पर्यावरण में असंतुलन उत्पन्न होता है तो प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़ सूखा भूकंप जल प्रदूषण वायु प्रदूषण मुद्रा प्रदूषण भूमि में कटाव आना और विभिन्न ऋतु में अंतर आ जाता है इसके परिणाम स्वरुप जनसंख्या वृद्धि गरीबी गंदगी अपराध भयंकर रोग उत्पन्न होते हैं
प्रदूषण एक ऐसी आवाज सुनने स्थित है जिसमें भौतिक रासायनिक एवं जैविक परिवर्तनों के द्वारा हवा जल और भूमि अपनी प्राकृतिक गुणवत्ता को हो बैठे हैं और इस कारण जीवन प्रक्रिया बाधित होती है और प्रगति रुक जाती है आज प्रदूषण की स्थिति इतनी गंभीर है कि इसे रोकने के तत्काल प्रयास किया जाए अतः बच्चों को कक्षाओं में पर्यावरण की शिक्षा दी जानी चाहिए और साथ ही उनकी आदत और रुचियां एवं अभी वृत्तियों को पर्यावरण सुधार में लगाना भी आवश्यक है
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कुछ घरेलू सामान्य दुर्घटना एवं उनका उपचार :- जैसे कि मैंने आपको अपने पिछले ब्लॉग में सामान्य दुर्घटना के बारे में बताया है तो इस ब्लॉक में भी हम कुछ ऐसी ही जानकारी प्राप्त करेंगे पानी में डूबना :- यह दुर्घटना नदी तालाब समुद्र आदि के तट पर होती है अचानक पर पानी में फिसल जाने आदि से यह दुर्घटना होती है ऐसी स्थिति में सर्वप्रथम उसे व्यक्ति को पानी से बाहर निकलना चाहिए उसके पश्...
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कुछ घरेलू सामान्य दुर्घटना एवं उनका उपचार :-
जैसे कि मैंने आपको अपने पिछले ब्लॉग में सामान्य दुर्घटना के बारे में बताया है तो इस ब्लॉक में भी हम कुछ ऐसी ही जानकारी प्राप्त करेंगे
पानी में डूबना :-
यह दुर्घटना नदी तालाब समुद्र आदि के तट पर होती है अचानक पर पानी में फिसल जाने आदि से यह दुर्घटना होती है ऐसी स्थिति में सर्वप्रथम उसे व्यक्ति को पानी से बाहर निकलना चाहिए उसके पश्चात उसका उपचार करना चाहिए
उपचार:-
रोगी के गले वस्त्र को उतार देना चाहिए रोगी को पेट के बाल लाकर उसकी कमर को दबाकर पानी निकालना चाहिए यदि विश्वास की आवश्यकता हो तो कृत्रिम विधि से स्वास्थ्य देनी चाहिए होश में आने पर रोगी को गर्म दूध या गर्म चाय देनी चाहिए
बिजली का झटका
कभी-कभी अकस्मात बिजली के तारों अथवा पलंग या स्विच को छूने से करंट लग जाता है यह एक खतरनाक दुर्घटना है इसमें मृत्यु तक हो सकती है
उपचार:-
सबसे पहले मैं स्विच बंद कर देना चाहिए रोगी के हाथ पैर को रगड़ना चाहिए कृत्रिम स्वास्थ्य की आवश्यकता होने पर स्वास्थ्य देनी चाहिए रोगी को डॉक्टर को दिखाना चाहिए रोगी को गर्म दूध या चाय देनी चाहिए
सांप का काटना:-
कभी-कभी सांप के काट लेने से रोगी के शरीर में विश करने लगता है अधिकतर यह दुर्घटना गांव या पेड़ पौधों युक्त स्थान अथवा सड़क पर होती है सांप की अनेक जातियां होती है कुछ विषैली होती है तथा कुछ विशेष होते हैं कहा जाता है कि सांप का कांटा व्यक्ति मरता नहीं है उपयुक्त बेहोशी की दशा में उसकी सभी इंदिरा राय निश्चित करिए हो जाती है और उसे मरा हुआ समझ लिया जाता है
लक्षण :-
काटने पर व्यक्ति को चुभन होती है कटे हुए स्थान पर तेज दर्द में सूजन आ जाती है सांस तथा नदी की गति धीमी हो जाती है कटे हुए स्थान का रंग का लाया नील पड़ने लगता है सांप के दांतों का निशान कटे हुए स्थान पर दिखाई देता है हाथ पैरों में ऐंठन होती है रोगी बेहोश होने लगता है तथा उसे नींद आती है नीम की पत्तियां खिलाने पर वह मीठी लगने लगती है
उपचार:-
सबसे पहले कटे हुए स्थान पर1/4 इंच गहरा प्लस जरा लगा देना चाहिए विषैली रक्त को दबा दबा कर निकाल देना चाहिए कटे हुए व्यक्ति को सोने नहीं देना चाहिए कृति में स्वास्थ्य देने की आवश्यकता पड़ने पर रोगी को कृत्रिम स्वास्थ्य देनी चाहिए सांप द्वारा कटे हुए व्यक्ति को गर्म दूध अथवा गर्म चाय देनी चाहिए
बिच्छू का काटना:-
बिच्छू एक जहरीला जीव है बिच्छू की पूछ में डंक होता है बिच्छू का विश्व नदी तंत्र को प्रभावित करता है
लक्षण:-
कटे हुए स्थान पर भयंकर दर्द होता है कटे हुए स्थान पर जलन होती है शरीर में अदन होती है तथा कटा हुआ स्थान आज की तरह जलता है
उपचार:-
कटे हुए स्थान से 2 इंच ऊपर पट्टी कसकर बांधनी चाहिए कटे हुए स्थान पर बर्फ लगाने चाहिए लोगों के इंजेक्शन लगवाना चाहिए
पागल कुत्ते का काटना:-
पागल कुत्ते के काटने से हाइड्रोफोबिया नामक रोग हो जाता है पागल कुत्ते की जीव सदैव वहां निकली रहती है तथा तेजी से हफ्ता है पागल कुत्ता किसी व्यक्ति को काटने के 10 15 दिन बाद मर जाता है पागल कुत्ते के काटने से मानसिक शक्ति से हो जाती है
लक्षण :-
गार्डन में तीर दर्द होता है रोगी की मानसिक शक्ति नष्ट हो जाती है रोगी को पानी से डर लगता है रोगी कुत्ते की तरह आवाज निकलने लगता है
उपचार:-
कुत्ते के काटने के तुरंत एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए घाव को पोटेशियम परमैंगनेट से धोना चाहिए घाव को कार्बनिक एसिड से जला देना चाहिए
ट्यूनिकेट :-
यह एक प्रकार का यंत्र है जो हाथ पैर के दबाव बिंदु पर दबाव डालकर रखते स्राव रोकने के उपयोग में आता है डुप्लीकेट बढ़ने के लिए मोटा कपड़ा अच्छा होता है कपड़े को पद बनाकर दबाव बिंदु के ऊपर रखकर बांध देना चाहिए तथा टानिकेट को दबाव बिंदु पर दो बार लपेटकर गांठ बांध देनी चाहिए तथा लगी हुई कार्ड पर एक लकड़ी का टुकड़ा रखकर दोबारा गांठ लगा देते हैं
ट्यूनिकेट का उपयोग करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए
तेजी से बहते हुए रक्त को रोकने के लिए ट्यूनिकेट का प्रयोग करते हैं
टानिकेट को ज्यादा देर तक कम नहीं रहने देना चाहिए
यह क्रिया हानिकारक भी हो सकती है तो इसका प्रयोग सावधानी के साथ करना चाहिए
नकसीर
गर्मी चोट रक्त नलिका के फटने या रक्त की न्यूनता के कारण नाक से रक्त बहने को नकशील फोड़ना कहते हैं ऐसी अवस्था में रोगी को तुरंत खुली ताजी हवा में गर्दन को पीछे झुककर सीधा कुर्सियां चौकी पर बैठा देना चाहिए उसके वेस्टन को ढीली करके उससे मुंह द्वारा सांस लेने को कहा जाए तक पश्चात नाक से ऊपर तथा गर्दन पर बर्फ की थैली से सिकाई करनी चाहिए उसके पैरों को गर्म पानी में रखना चाहिए और चूसने के लिए बर्फ देना चाहिए रोगी को बिना हिले दुले उसके नाक को अंगूठे और उंगली के बीच पड़कर लगभग 5 मिनट तक दबाना चाहिए नासिर के बंधन होने पर कुछ देर तक नाक दबाए या नाक के अंदर हुई भरते रोगी को धैर्य है संतान देते रहना चाहिए और नाक साफ नहीं करनी चाहिए सब प्रयासों के सफल होने पर तुरंत चिकित्सा की सलाह लेनी चाहिए
शहर की मक्खियों का काटना:-
शहर की मक्खी अथवा पर के काटने पर उसे स्थान पर बहुत पीड़ा होती है जलन होने लगती है कटे हुए स्थान के चारों ओर सूजन आ जाती है कभी-कभी कटे हुए स्थान पर बंक रह जाता है शहर की मक्खी अथवा पर के काटने से उसके ढंग को पी या चाबी की सहायता से बाहर निकाल देना चाहिए कटे हुए स्थान पर कोई बिना जंग लगा साफ लोहा तुरंत रगड़ना चाहिए और स्प्लिट सोना अथवा कुरेशी तक सोडा मिलना चाहिए रोगी को पानी को पिलाना चाहिए गाव के ऊपर तुरंत एक पट्टी कसकर बांध देने से विश्व को फैलने से रोका जा सकता है
दम घुटने :-
धुएं कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य विशाली गैसों से युक्त हवा में सांस लेने डूबने फांसी लगाने आदि कर्म से दम घुटने लगता है
विषैली हवा में सांस लेने से दम घुटने पर व्यक्ति को तुरंत खुली वह ताजी हवा में लेटा देना चाहिए उसकी पंखे से हवा करें और उसके आसपास भेद इकट्ठा न होने दे
डूबने से दम घुटने पर व्यक्ति को पानी से बाहर निकाल कर उल्टा लेटना चाहिए और पेट का पानी निकाल देना चाहिए फिर के लिए वस्त्र उतार कर उसे कंबल में लपेट देना चाहिए तब कृत्रिम विधि से उसे स्वाद देनी चाहिए उसे पीने के लिए गर्म चाय कॉफी या दूध देना चाहिए
फांसी लगाने से दम घुटने पर व्यक्ति को थोड़ा ऊपर उठकर उसकी गर्दन से रस्सी का फंदा निकालना चाहिए फिर उसे लाकर क्रिसमस विधि से सांस देनी चाहिए
उपरोक्त प्राथमिक चिकित्सा के प्रसाद डॉक्टर से सिर्फ ही परामर्श आवश्यक कर लेना चाहिए
धन्यवाद:-?
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प्रस्तावना :- सावधानी ही दुर्घटना का कारण होती है सावधानी बरतने पर दुर्घटनाएं डाली जा सकती है आज का योग विज्ञान का योग है इस युग में समझ में नई-नई मशीन तथा कर्म का प्रयोग होता है घर और बाहर दोनों जगह जरा सिया सावधानी होने पर दुर्घटनाएं हो जाती है इसके अतिरिक्त कीड़े मकोड़े जानवर आदि के काटने से दुर्घटना होती है ऐसी अवस्था में प्राथमिक चिकित्सा के द्वारा घायल की चिकित्सा की...
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प्रस्तावना :-
सावधानी ही दुर्घटना का कारण होती है सावधानी बरतने पर दुर्घटनाएं डाली जा सकती है
आज का योग विज्ञान का योग है इस युग में समझ में नई-नई मशीन तथा कर्म का प्रयोग होता है घर और बाहर दोनों जगह जरा सिया सावधानी होने पर दुर्घटनाएं हो जाती है इसके अतिरिक्त कीड़े मकोड़े जानवर आदि के काटने से दुर्घटना होती है ऐसी अवस्था में प्राथमिक चिकित्सा के द्वारा घायल की चिकित्सा की जाती है तथा जीवन संकट से उभारा जाता है
दुर्घटना के निम्नलिखित कारण है
असावधानी :- आज व्यक्ति इतनी जल्दी कार्य करना चाहता है कि उसे अपनी जिंदगी का भी ध्यान नहीं रहता सड़क पर चलने फिरने अथवा वाहन चलाने आदि से और असावधानी रखना है और दुर्घटना का सामना करता है
अशिक्षा तथा ज्ञानता :- बहुत सी मशीनों की पर्याप्त जानकारी न होने से अथवा मशीनों को चलाने का ज्ञान न होने के कारण भी दुर्घटना संभव होती है
शारीरिक असमर्थता :- कभी-कभी शारीरिक रूप से असमर्थ होने पर भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है जैसे पैरों से विकलांग होने पर दुर्घटना हो जाना
सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ भाड़ के कारण :- कभी-कभी अधिक भीड़ भाड़ होने पर दुर्घटनाएं हो जाती है लोग गिर सकते हैं तो आप बेहोश भी हो सकती है
जीव जंतु के काटने पर:- सांप बंदर कुत्ते हाथी के काटने से भी दुर्घटना संभव हो सकती है
कुछ सामान्य दुर्घटनाएं तथा उनका उपचार
जालना
यह दुर्घटना अक्सर खाने बनाते समय अथवा अधिक ताप वाले स्थान पर कार्य करते समय होती है आंख से जल जाना खोलथे तेल का शरीर पर गिर जाना भाग से जालना गम वस्तु का शरीर पर गिर जाना बिजली के करंट आदि से व्यक्ति जल सकता है
जलने के लक्षण
जलने पर त्वचा का रंग लाल हो जाता है जले हुए स्थान पर फफोले पड़ जाते हैं जलने के स्थान पर तेज जलन में दर्द भी होता है
जलने पर उपचार
जले हुए स्थान पर अति स्पीड क्रीम लगानी चाहिए जले हुए स्थान पर बर्फ लगानी चाहिए कच्चा आलू पीसकर जले हुए स्थान पर लगाना चाहिए वर्ष के समय गिरे हुए ओलो को एकत्रित कर किसी सीसी में रखना चाहिए तथा उसे जेल स्थान पर लगाया जा सकता है कपड़ों पर लगी आग को बुझाने के लिए मोटा कपड़ा या कंबल शरीर पर लपेटना चाहिए तथा रोगी का मुंह खुला रहना चाहिए घाव पर जैतून अथवा नारियल का तेल अथवा बहनोल का मलहम लगाना चाहिए रोगी को श्री गतिशील डॉक्टर को दिखाना चाहिए रोगी को गर्म दूध पिलाना चाहिए तथा उसे धैर्य वह संता बंता देनी चाहिए
धन्यवाद:-
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(This is a story of a clever farmer who lives on the Hillside where farmers do Terrace farming.) Once a farmer bought a field near a Hillside. He, then bought a pair of bullocks and begin ploughing is field happily. Hardly had he ploughed half of the field when a tall man came and cried out angrily, " hey, you there, my house is at the photo of this Hill. What are you doing on My terrace.? &q...
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(This is a story of a clever farmer who lives on the Hillside where farmers do Terrace farming.)
Once a farmer bought a field near a Hillside. He, then bought a pair of bullocks and begin ploughing is field happily. Hardly had he ploughed half of the field when a tall man came and cried out angrily, " hey, you there, my house is at the photo of this Hill. What are you doing on My terrace.? "
"Please do not get angry, be claim, " replied the farmer. He said further, " I am ploughed the field to sow the seeds. When I grow the crop, I shall share the harvest with you year. 1 year you take want grows below the ground and the next year you take what grows above the ground.
The tall man was please he had no idea of the farmers plain of fooling him. The first year the farmers sowed wheat. He took all the wheat as it grew about the ground and gave the roots to the tall man which were blow the ground.
The tall man good angry. He told the farmer that the next time he would take format took all the groundnuts. The Poor talman goat only the leaves which were above the ground.
In this way the tall man was fooled by the farmer.
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This is the story of an old man who planted some turnip seeds in his farm.the turnip seeds grew. the turnip seeds grew and grew.. The old man wanted to pull up the Enormous turnip. He tried to pull it many times but he could not pull up the enormous turnip. An old woman came there. "What are you doing?" see asked the old man. "I want to full of this enormous...
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This is the story of an old man who planted some turnip seeds in his farm.the turnip seeds grew. the turnip seeds grew and grew..
The old man wanted to pull up the Enormous turnip. He tried to pull it many times but he could not pull up the enormous turnip.
An old woman came there. "What are you doing?" see asked the old man.
"I want to full of this enormous turnip," said the old man.
"I can pull up this enormous turnip alone," said the old woman. " no, you cannot full it up alone, I will help you. " said the old man.
The old man and the old woman who lead the bullet but they could not pull up the enormous turnip.
A boy came there.
" We want to pull up this enormous turnip. Can you help? " us asked the old woman yes I will help you, "sad the boy.
The bullet and Bullet together but they could not pull up the enormous turnip.
Meanwhile a girl came there."will you help us to pull up the turnip?"the boy asked the girl." who not, I will definitely help you. "said the girl.
The old man,the old woman, the boy and the girl pulled and pulled.
Up came the enormous turnip.
" Who will cook this turnip so that we can enjoy eating it. " the old woman asked I will cook it. " the old woman replied. She made delicious dish of the turlip and they all ate the enjoyed it.
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Last Sunday, the weather was cloudly Arun along with his younger sister Neha, visited the zoo has they reached the main gate of the zoo. they say a hug crowd.some people were during entrance tickets wheel others were relaxing in the shade of the trees. As the entered the zoo. Neha: I am scared to go inside the zoo. don't you think we may be attacked by the animals of the zoo. Arun:...
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Last Sunday, the weather was cloudly Arun along with his younger sister Neha, visited the zoo has they reached the main gate of the zoo. they say a hug crowd.some people were during entrance tickets wheel others were relaxing in the shade of the trees. As the entered the zoo.
Neha: I am scared to go inside the zoo. don't you think we may be attacked by the animals of the zoo.
Arun: don't worry Neha in the josham animals are kept in the cages and some are kept in the area surrounded by the barrier. Look there are so many animal here.
Neha: Oh yes,I want to see a giraffe first.where is the giraffe.
Arun: see,the zirak is near the French it has a long neck.
Neha: brother,look at the monkeys.
Arun: yes, the monkeys are swinging up and down the trees.
Neha: oh my god! look at the tiger.
Arun: it's on the rock
Neha: look brother, the tiger is coming down the rock. it has stripeus on its body.where is the lion?
Arun: see the lion is in front of its den. It looks so powerfully.it is sleeping.
Neha: wow! look at the peacock.
Arun: it is dancing in the garden.
Neha: look at those yellow Birds there.
Arun: yes,those bird are flying over the trees. can you see a baby dear behind the tree?
Neha: oh yes! and look,there is a family of zebras.
Arun: yes dear,the baby Zebra is playing between the mother Zebra and the father Zebra.they all have black and white stripes on dear bodies.
Desh se adar animals 2 and enjoyed very much. when it was evening they came out of the zoo andboarded the bus.
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