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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

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राजा और ना भाव को अंग्रेजों से खतरा


 राजा और नवाब को अंग्रेजों से खतरा  कंपनी को भेंट देते और उसकी सेवा का खर्चा उठाने में भारतीय राजाओं पर बहुत-बहुत पढ़ने लगा राजा बना भाव व्यापार के खिलाफ नहीं थे परंतु वह अपने राज्य में किसी और की सैनिक ताकत नहीं बढ़ने दे सकते थे उन्होंने कंपनी की सैनिक ताकत पर रोक लगाने की कोशिश की  अस्त्र-शस्त्र सैनिक बल में किलेबंदी के सहारे होने वाला व्यापार कोई साधारण व्यापार नहीं रहा भारत के र... Read More

 राजा और नवाब को अंग्रेजों से खतरा

 कंपनी को भेंट देते और उसकी सेवा का खर्चा उठाने में भारतीय राजाओं पर बहुत-बहुत पढ़ने लगा राजा बना भाव व्यापार के खिलाफ नहीं थे परंतु वह अपने राज्य में किसी और की सैनिक ताकत नहीं बढ़ने दे सकते थे उन्होंने कंपनी की सैनिक ताकत पर रोक लगाने की कोशिश की

 अस्त्र-शस्त्र सैनिक बल में किलेबंदी के सहारे होने वाला व्यापार कोई साधारण व्यापार नहीं रहा भारत के राजाओं और दबाव को यह बात बड़ी खतरनाक लगी कि उनके राज्य में किसी दूसरे देश के लोग सीन रखें युद्ध लड़े किले बनाए और अपनी सैनिक शक्ति की दाग जमाई वह कंपनी की दूसरी बातों से भी परेशान रहते थे

 धन्यवाद


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भारत के राज्य और विदेशी कंपनियों की सेना


 भारत में राज्य और विदेशी कंपनियों की सेना   भारत के राजा और नवाब अपना अपना राज्य बढ़ाने में और एक दूसरे पर हमला करने में लगे रहते थे इनमें उत्तर अधिकार संबंधी युद्ध भी होते थे और वह इन विदेशी कंपनियों की सहायता लेने में नहीं हिचकते थे दोनों कंपनियां इन झगड़ों में अपनी टांगे बढ़ने लगी अगर कंपनी किसी राज्य या अनुभव का साथ देने को तैयार हो जाति और अपनी सेना उसके लिए लड़ने भेज देती तो... Read More

 भारत में राज्य और विदेशी कंपनियों की सेना 

 भारत के राजा और नवाब अपना अपना राज्य बढ़ाने में और एक दूसरे पर हमला करने में लगे रहते थे इनमें उत्तर अधिकार संबंधी युद्ध भी होते थे और वह इन विदेशी कंपनियों की सहायता लेने में नहीं हिचकते थे दोनों कंपनियां इन झगड़ों में अपनी टांगे बढ़ने लगी अगर कंपनी किसी राज्य या अनुभव का साथ देने को तैयार हो जाति और अपनी सेना उसके लिए लड़ने भेज देती तो उसे राजा या दबाव की ताकत बहुत बढ़ जाती थी यूरोपीय सेनन का बड़ा दबदबा था 

 धन्यवाद


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भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना


 भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना   अंग्रेज फ्रांसीसी वह अन्य यूरोपीय की तरह भारत में व्यापार करने के लिए आए थे लेकिन धीरे-धीरे भारत में अपना राज्य स्थापित कर लिया इसके लिए उन्होंने कौन-कौन से तरीके अपनाए? आएइ इन्हें भी जाने -  18 वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य की शक्ति से होने पर प्रत्यय क्षेत्रीय शासको ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली थी इनमें बंगाल बिहार में उड़ीसा हैद... Read More

 भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना 

 अंग्रेज फ्रांसीसी वह अन्य यूरोपीय की तरह भारत में व्यापार करने के लिए आए थे लेकिन धीरे-धीरे भारत में अपना राज्य स्थापित कर लिया इसके लिए उन्होंने कौन-कौन से तरीके अपनाए? आएइ इन्हें भी जाने -

 18 वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य की शक्ति से होने पर प्रत्यय क्षेत्रीय शासको ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली थी इनमें बंगाल बिहार में उड़ीसा हैदराबाद मैसूर और मराठा प्रमुख थे मुगल बादशाह का निरंतर नाम मात्र का रह गया था इसी सदी में यूरोप में फ्रांस और इंग्लैंड के बीच विश्व में उपनिवेशों व व्यापार से ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कई वर्षों तक निरंतर युद्ध होते रहे दोनों देशों के व्यापारी इतने अमीर हो गए थे कि अपने-अपने देश के शासन में भी इनका बोलबाला था यहां तक की इंग्लैंड और फ्रांस के राजा अपने-अपने देश की कंपनियों का पूरा समर्थन करते थे और उन्हें मदद देते थे

 धन्यवाद


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रामकृष्ण परमहंस


 रामकृष्ण परमहंस   रामकृष्ण परमहंस 1834 से 1886 ई का भी योगदान महत्वपूर्ण था यह भी एक ईश्वर की उपासना में विश्वास करते थे तथा पश्चिमी संस्कृति की अपेक्षा भारतीय संस्कृति को उत्तम बताते थे  धन्यवाद Read More

 रामकृष्ण परमहंस 

 रामकृष्ण परमहंस 1834 से 1886 ई का भी योगदान महत्वपूर्ण था यह भी एक ईश्वर की उपासना में विश्वास करते थे तथा पश्चिमी संस्कृति की अपेक्षा भारतीय संस्कृति को उत्तम बताते थे

 धन्यवाद


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पारसी सुधार आंदोलन


 पारसी सुधार आंदोलन   दादाभाई जो रोगी ने पर्सन में सामाजिक बुराइयां तथा धार्मिक अंधविश्वासों को दूर किया उन्होंने पाठ समुदाय को आधुनिक भारतीय समाज के अनुरूप बनाने का प्रयास किया था  धन्यवाद Read More

 पारसी सुधार आंदोलन 

 दादाभाई जो रोगी ने पर्सन में सामाजिक बुराइयां तथा धार्मिक अंधविश्वासों को दूर किया उन्होंने पाठ समुदाय को आधुनिक भारतीय समाज के अनुरूप बनाने का प्रयास किया था

 धन्यवाद


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महादेव गोविंद रानाडे


 महादेव गोविंद रानाडे  महादेव गोविंद रानाडे 1842 से 1901 ई 1867 ई मुंबई में डॉक्टर आत्माराम पांडुरंग द्वारा संस्थापित प्रार्थना समाज को प्रसिद्धि दिलाने का श्री महादेव गोविंद रानाडे को जाता है प्रार्थना समाज के माध्यम से इन्होंने बाल विवाह प्रदा प्रथम एवं जाति पाति का विरोध किया तथा स्त्री शिक्षा एवं विधवा विवाह प्रोत्साहित किया धन्यवाद Read More

 महादेव गोविंद रानाडे

 महादेव गोविंद रानाडे 1842 से 1901 ई 1867 ई मुंबई में डॉक्टर आत्माराम पांडुरंग द्वारा संस्थापित प्रार्थना समाज को प्रसिद्धि दिलाने का श्री महादेव गोविंद रानाडे को जाता है प्रार्थना समाज के माध्यम से इन्होंने बाल विवाह प्रदा प्रथम एवं जाति पाति का विरोध किया तथा स्त्री शिक्षा एवं विधवा विवाह प्रोत्साहित किया

धन्यवाद


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दयानंद सरस्वतीदयानंद सरस्वती


 दयानंद सरस्वती  दयानंद सरस्वती 1824 से 83 ई नमक संन्यासी ने आर्यों की वैदिक संस्कृति को अपने पर जोर दिया और सन 1875 ईस्वी में आर्य समाज की स्थापना की उन्होंने वेदों को ज्ञान का खजाना बताया तथा मूर्ति पूजा जाति प्रथा ब्राह्मण वर्षा का विरोध किया वह एक ईश्वर के पक्षधर थे इन्होंने सत्यार्थ प्रकाश की रचना की आर्य समाज द्वारा शिक्षा के प्रसार हेतु विद्यालय खोले गए गुरुकुल पद्धति को बनाए रखने... Read More

 दयानंद सरस्वती

 दयानंद सरस्वती 1824 से 83 ई नमक संन्यासी ने आर्यों की वैदिक संस्कृति को अपने पर जोर दिया और सन 1875 ईस्वी में आर्य समाज की स्थापना की उन्होंने वेदों को ज्ञान का खजाना बताया तथा मूर्ति पूजा जाति प्रथा ब्राह्मण वर्षा का विरोध किया वह एक ईश्वर के पक्षधर थे इन्होंने सत्यार्थ प्रकाश की रचना की आर्य समाज द्वारा शिक्षा के प्रसार हेतु विद्यालय खोले गए गुरुकुल पद्धति को बनाए रखने के लिए हरिद्वार में लड़कों और लड़कियों के लिए गुरुकुल कान गांधी खोल 

धन्यवाद


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आएइ जाने ईश्वर चंद्र विद्यासागर के बारे में


 ईश्वर चंद्र विद्यासागर  1820 से 1891 ई एक महान समाज सुधारक लेखक एवं शिक्षक थे यह समाज की कुरीतियों को बदलने के लिए निरंतर कार्य करते रहते थे इन्होंने भारत में बहु पत्नी या बाल विवाह का जोरदार विरोध किया विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा का समर्थन किया इन्हीं के प्रयासों से ब्रिटिश सरकार ने 1856 ईस्वी में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया जिससे विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता मि... Read More

 ईश्वर चंद्र विद्यासागर

 1820 से 1891 ई एक महान समाज सुधारक लेखक एवं शिक्षक थे यह समाज की कुरीतियों को बदलने के लिए निरंतर कार्य करते रहते थे इन्होंने भारत में बहु पत्नी या बाल विवाह का जोरदार विरोध किया विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा का समर्थन किया इन्हीं के प्रयासों से ब्रिटिश सरकार ने 1856 ईस्वी में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया जिससे विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता मिली

धन्यवाद


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मुस्लिम सुधार आंदोलन


 मुस्लिम सुधार आंदोलन  सर सैयद अहमद खान 1817 से 1898 ई ने 1864 ईस्वी में सर्टिफिकेट समिति विज्ञान समिति की स्थापना किए पश्चिमी शिक्षा के पक्ष में थे इन्होंने मुसलमान के लिए अंग्रेजी शिक्षा की वकालत की और पश्चिमी विज्ञान पढ़ने तथा आधुनिक विचारों को अपनाने की बात कही वे मुसलमान में पर्दा प्रथा बहु विवाह आसान तलाक व्यवस्था के विरुद्ध थे इन्होंने मुसलमान के लिए अलीगढ़ में अग्लो ओरिएंटल विद्य... Read More

 मुस्लिम सुधार आंदोलन

 सर सैयद अहमद खान 1817 से 1898 ई ने 1864 ईस्वी में सर्टिफिकेट समिति विज्ञान समिति की स्थापना किए पश्चिमी शिक्षा के पक्ष में थे इन्होंने मुसलमान के लिए अंग्रेजी शिक्षा की वकालत की और पश्चिमी विज्ञान पढ़ने तथा आधुनिक विचारों को अपनाने की बात कही वे मुसलमान में पर्दा प्रथा बहु विवाह आसान तलाक व्यवस्था के विरुद्ध थे इन्होंने मुसलमान के लिए अलीगढ़ में अग्लो ओरिएंटल विद्यालय खोला यही बात में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से विकसित हुआ

 धन्यवाद


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Mahilaon ke liye naye Kanoon


 mahilaon ke liye naye Kanoon Raja Ram Mohan Roy 1774 se 1833 neighbours 1828 isvi Mein bra Samaj ki sthapna kinhone Samaj sudharak ke Anek Karya ke Bal Vivah Bahu Patni per tha Jati vyavastha Balli Parda Pratha ka virodh Kiya vidhva Punarvivah antarjatiy Vivah mahilaon ke Adhikar mahilaon ki Shiksha ke pakshdhar the Murti Puja tatha vyarth ke karmkandon mein Unka Vishwas nahin tha kashtprad... Read More

 mahilaon ke liye naye Kanoon

Raja Ram Mohan Roy 1774 se 1833 neighbours 1828 isvi Mein bra Samaj ki sthapna kinhone Samaj sudharak ke Anek Karya ke Bal Vivah Bahu Patni per tha Jati vyavastha Balli Parda Pratha ka virodh Kiya vidhva Punarvivah antarjatiy Vivah mahilaon ke Adhikar mahilaon ki Shiksha ke pakshdhar the Murti Puja tatha vyarth ke karmkandon mein Unka Vishwas nahin tha kashtprad jaati vyavastha tatha Ke Virodhi the Ve tatha upnishadon ka sthaniya boliyon mein anuvad kiya angreji Vidyalay Hindu College Vedant college ki sthapna ki


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