Blog by Vanshika | Digital Diary
" To Present local Business identity in front of global market"
" To Present local Business identity in front of global market"
Digital Diary Submit Post
राजा और नवाब को अंग्रेजों से खतरा कंपनी को भेंट देते और उसकी सेवा का खर्चा उठाने में भारतीय राजाओं पर बहुत-बहुत पढ़ने लगा राजा बना भाव व्यापार के खिलाफ नहीं थे परंतु वह अपने राज्य में किसी और की सैनिक ताकत नहीं बढ़ने दे सकते थे उन्होंने कंपनी की सैनिक ताकत पर रोक लगाने की कोशिश की अस्त्र-शस्त्र सैनिक बल में किलेबंदी के सहारे होने वाला व्यापार कोई साधारण व्यापार नहीं रहा भारत के र...
Read More
भारत में राज्य और विदेशी कंपनियों की सेना भारत के राजा और नवाब अपना अपना राज्य बढ़ाने में और एक दूसरे पर हमला करने में लगे रहते थे इनमें उत्तर अधिकार संबंधी युद्ध भी होते थे और वह इन विदेशी कंपनियों की सहायता लेने में नहीं हिचकते थे दोनों कंपनियां इन झगड़ों में अपनी टांगे बढ़ने लगी अगर कंपनी किसी राज्य या अनुभव का साथ देने को तैयार हो जाति और अपनी सेना उसके लिए लड़ने भेज देती तो...
Read More
भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना अंग्रेज फ्रांसीसी वह अन्य यूरोपीय की तरह भारत में व्यापार करने के लिए आए थे लेकिन धीरे-धीरे भारत में अपना राज्य स्थापित कर लिया इसके लिए उन्होंने कौन-कौन से तरीके अपनाए? आएइ इन्हें भी जाने - 18 वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य की शक्ति से होने पर प्रत्यय क्षेत्रीय शासको ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली थी इनमें बंगाल बिहार में उड़ीसा हैद...
Read More
रामकृष्ण परमहंस रामकृष्ण परमहंस 1834 से 1886 ई का भी योगदान महत्वपूर्ण था यह भी एक ईश्वर की उपासना में विश्वास करते थे तथा पश्चिमी संस्कृति की अपेक्षा भारतीय संस्कृति को उत्तम बताते थे धन्यवाद
Read More
पारसी सुधार आंदोलन दादाभाई जो रोगी ने पर्सन में सामाजिक बुराइयां तथा धार्मिक अंधविश्वासों को दूर किया उन्होंने पाठ समुदाय को आधुनिक भारतीय समाज के अनुरूप बनाने का प्रयास किया था धन्यवाद
Read More
महादेव गोविंद रानाडे महादेव गोविंद रानाडे 1842 से 1901 ई 1867 ई मुंबई में डॉक्टर आत्माराम पांडुरंग द्वारा संस्थापित प्रार्थना समाज को प्रसिद्धि दिलाने का श्री महादेव गोविंद रानाडे को जाता है प्रार्थना समाज के माध्यम से इन्होंने बाल विवाह प्रदा प्रथम एवं जाति पाति का विरोध किया तथा स्त्री शिक्षा एवं विधवा विवाह प्रोत्साहित किया धन्यवाद
Read More
दयानंद सरस्वती दयानंद सरस्वती 1824 से 83 ई नमक संन्यासी ने आर्यों की वैदिक संस्कृति को अपने पर जोर दिया और सन 1875 ईस्वी में आर्य समाज की स्थापना की उन्होंने वेदों को ज्ञान का खजाना बताया तथा मूर्ति पूजा जाति प्रथा ब्राह्मण वर्षा का विरोध किया वह एक ईश्वर के पक्षधर थे इन्होंने सत्यार्थ प्रकाश की रचना की आर्य समाज द्वारा शिक्षा के प्रसार हेतु विद्यालय खोले गए गुरुकुल पद्धति को बनाए रखने...
Read More
ईश्वर चंद्र विद्यासागर 1820 से 1891 ई एक महान समाज सुधारक लेखक एवं शिक्षक थे यह समाज की कुरीतियों को बदलने के लिए निरंतर कार्य करते रहते थे इन्होंने भारत में बहु पत्नी या बाल विवाह का जोरदार विरोध किया विधवा पुनर्विवाह और महिला शिक्षा का समर्थन किया इन्हीं के प्रयासों से ब्रिटिश सरकार ने 1856 ईस्वी में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया जिससे विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता मि...
Read More
मुस्लिम सुधार आंदोलन सर सैयद अहमद खान 1817 से 1898 ई ने 1864 ईस्वी में सर्टिफिकेट समिति विज्ञान समिति की स्थापना किए पश्चिमी शिक्षा के पक्ष में थे इन्होंने मुसलमान के लिए अंग्रेजी शिक्षा की वकालत की और पश्चिमी विज्ञान पढ़ने तथा आधुनिक विचारों को अपनाने की बात कही वे मुसलमान में पर्दा प्रथा बहु विवाह आसान तलाक व्यवस्था के विरुद्ध थे इन्होंने मुसलमान के लिए अलीगढ़ में अग्लो ओरिएंटल विद्य...
Read More
mahilaon ke liye naye Kanoon Raja Ram Mohan Roy 1774 se 1833 neighbours 1828 isvi Mein bra Samaj ki sthapna kinhone Samaj sudharak ke Anek Karya ke Bal Vivah Bahu Patni per tha Jati vyavastha Balli Parda Pratha ka virodh Kiya vidhva Punarvivah antarjatiy Vivah mahilaon ke Adhikar mahilaon ki Shiksha ke pakshdhar the Murti Puja tatha vyarth ke karmkandon mein Unka Vishwas nahin tha kashtprad...
Read More
--icon----> --icon---->