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Blog by Vanshika | Digital Diary

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Meri Kalam Se
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बैठक की सजावट किस प्रकार करते हैं आज इस ब्लॉग में आप जानेंगे

बैठक की सजावट किस प्रकार करते हैं आज इस ब्लॉग में आप जानेंगे
  बैठक हमारे घर का वह मुख्य हिस्सा है जिसका उपयोग हम विश्राम, मनोरंजन और मेहमानों से मिलने के लिए करते हैं। इसलिए बैठक की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो दिखने में सुंदर और बैठने में आरामदायक हो। आइए जानते हैं बैठक को सजाने के कुछ बेहतरीन तरीके: 1. बैठने का सही प्रबंध और फर्नीचर  सोफा सेट: बैठक के लिए सोफा सेट सबसे आरामदायक होता है। इसे हमेशा अपने कमरे के साइज (नाप) के अनुसार छोटा या बड़ा चुनें।... Read More
  बैठक हमारे घर का वह मुख्य हिस्सा है जिसका उपयोग हम विश्राम, मनोरंजन और मेहमानों से मिलने के लिए करते हैं। इसलिए बैठक की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो दिखने में सुंदर और बैठने में आरामदायक हो। आइए जानते हैं बैठक को सजाने के कुछ बेहतरीन तरीके: 1. बैठने का सही प्रबंध और फर्नीचर  सोफा सेट: बैठक के लिए सोफा सेट सबसे आरामदायक होता है। इसे हमेशा अपने कमरे के साइज (नाप) के अनुसार छोटा या बड़ा चुनें। बजट अनुकूल विकल्प: यदि गद्देदार सोफा बजट से बाहर या महंगा है, तो आप बेंत (वेद) का सोफा सेट या कुर्सियां इस्तेमाल कर सकते हैं। यह दिखने में भी बेहद सुंदर लगती हैं। पारंपरिक दीवान या तखत: भारतीय रीति के अनुसार लकड़ी का तखत या दीवान भी बैठक में उपयोगी होता है। इन्हें आकर्षक गद्दों और सुंदर रंग-बिरंगे बेडशीट व तकियों (पलंग पोस और गाड़ी के गिलास) से सजाएं। इन्हें समय-समय पर धोकर और बदल-बदलकर आप कमरे को हमेशा एक नया लुक दे सकते हैं। 2. मेज और जरूरी अलमारियां  सेंटर टेबल (बीच की मेज): सोफा सेट के ठीक बीच में एक कम ऊंचाई वाली मेज होनी चाहिए, जिस पर एक सुंदर फूलों का गुलदस्ता रखा जा सके। यह कमरे की शोभा बढ़ाता है। छोटी मेज (Side Table): कमरे में एक छोटी मेज भी रखें ताकि चाय के कप या अन्य छोटी-मोटी वस्तुएं आसानी से रखी जा सकें। स्टोरेज और शेल्फ: कमरे में टेलीविजन, रेडियो और अन्य चीजें रखने के लिए शेल्फ बनवाएं। इसके अलावा, किताबें, पत्रिकाएं और समाचार पत्र व्यवस्थित रखने के लिए एक छोटी अलमारी जरूर होनी चाहिए। 3. रोशनी (प्रकाश) का सही प्रबंध  बैठक में रोशनी की व्यवस्था केवल सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि जरूरत के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। कमरे में एक आकर्षक लैंप की व्यवस्था जरूर करें। प्रकाश का प्रबंध ऐसा होना चाहिए जिससे बैठक का प्रत्येक कोना अच्छी तरह से आलोकित (प्रकाशित) हो सके। 4. मनोरंजन और खेलकूद का कोना  बैठक में मेहमानों और परिवार के मनोरंजन के लिए कुछ इनडोर गेम्स (खेलों का सामान) जैसे- कैरम बोर्ड, लूडो और पासा आदि जरूर होने चाहिए। मधुर संगीत सुनने के लिए ग्रामोफोन या म्यूजिक सिस्टम की व्यवस्था भी बैठक में चार चांद लगा देती है। 5. दीवारें, फर्श और सजावटी वस्तुएं  मुख्य बदलाव जो आपके ब्लॉग को बेहतर बनाएंगे: पैराग्राफ को छोटा किया गया: पुराना ब्लॉग एक बड़े पैराग्राफ में था, जिसे पढ़ना मुश्किल था। अब इसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया गया है। बुलेट पॉइंट्स और हेडिंग्स: महत्वपूर्ण जानकारियों को पॉइंट्स में लिखने से पाठक का ध्यान आसानी से आकर्षित होता है। मुख्य शब्दों को बोल्ड (Bold) करना: जो जरूरी चीजें हैं (जैसे सोफा, कालीन, लैंप), उन्हें बोल्ड किया गया है ताकि यूजर जल्दी से पूरा ब्लॉग  यदि आप चाहें, तो मैं इस ब्लॉग के लिए एक आकर्षक और छोटा टाइटल (Title) और गूगल सर्च (SEO) के लिए मुख्य कीवर्ड्स भी तैयार कर सकता हूँ। क्या आप इसे और आगे बढ़ाना चाहते हैं? दीवारों का रंग: बैठक की दीवारों पर हमेशा सफेद रंग या कोई हल्का व शांत रंग करवाना चाहिए। तस्वीरें और कलाकृतियां: दीवारों को सूना न छोड़ें। इस पर कुछ आकर्षक प्राकृतिक दृश्य (सीनरी) या किसी महापुरुष के प्रेरणादायक चित्र लगाएं। इसके अलावा कुछ कलात्मक और हस्तशिल्प की वस्तुएं भी कमरे में रखें। कालीन (Carpet): फर्श की सुंदरता बढ़ाने के लिए कालीन का प्रयोग करें। ध्यान रहे, कालीन को पूरे फर्श पर बिछाने के बजाय कमरे के मध्य (बीच) में बिछाना ज्यादा आकर्षक लगता है। दीवार घड़ी: कमरे की एक दीवार पर एक सुंदर और आकर्षक घड़ी भी लगी होनी 
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[email protected] 01 Sep 2026 154 Views

प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ

प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ
? प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ और महत्व (Meaning and Importance of First Aid) ? परिचय (Introduction) प्राथमिक चिकित्सा एक प्रकार का तात्कालिक उपचार है, जो किसी भी दुर्घटनाग्रस्त या बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुँचाने या डॉक्टर के आने से पहले तुरंत प्रदान किया जाता है। आमतौर पर किसी दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने या डॉक्टर को मौके पर बुलाने में कुछ समय अवश्य लगता है। ऐसे संवेदनशील समय... Read More
? प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ और महत्व (Meaning and Importance of First Aid) ? परिचय (Introduction) प्राथमिक चिकित्सा एक प्रकार का तात्कालिक उपचार है, जो किसी भी दुर्घटनाग्रस्त या बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुँचाने या डॉक्टर के आने से पहले तुरंत प्रदान किया जाता है। आमतौर पर किसी दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने या डॉक्टर को मौके पर बुलाने में कुछ समय अवश्य लगता है। ऐसे संवेदनशील समय में पीड़ित को दी गई शुरुआती सहायता ही उसकी जान बचा सकती है। ❓ प्राथमिक चिकित्सा क्यों जरूरी है? (Why is First Aid Important?) शरीर विज्ञान और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद मिलने वाली सहायता से पीड़ित को निम्नलिखित लाभ होते हैं: स्थिति को बिगड़ने से रोकना: यह घायल व्यक्ति की स्थिति को अधिक गंभीर होने से बचाती है। मानसिक संबल देना: समय पर मदद मिलने से पीड़ित व्यक्ति को सांत्वना मिलती है और उसका गिरता हुआ मनोबल संभल जाता है। जान बचाना: सही समय पर दी गई प्राथमिक चिकित्सा किसी व्यक्ति को जीवनदान दे सकती है। ? संकट के समय हमारी भूमिका जब भी और कहीं भी कोई दुर्घटना घटित होती है, तो वहां उपस्थित अन्य नागरिकों का यह कर्तव्य होता है कि वे पीड़ित व्यक्ति या व्यक्तियों को आवश्यक और त्वरित सहायता प्रदान करें। स्थानीय स्तर पर की गई यह छोटी सी कोशिश एक बड़ा बदलाव ला सकती है। ? निष्कर्ष (Conclusion) संक्षेप में हम कह सकते हैं कि प्राथमिक चिकित्सा वह शुरुआती और जरूरी सहायता है, जो किसी डॉक्टर या चिकित्सक द्वारा व्यवस्थित (Formal) इलाज शुरू करने से पहले, दुर्घटना स्थल पर मौजूद आम लोगों द्वारा दी जाती है। यह चिकित्सा भले ही स्थायी उपचार न हो, लेकिन यह दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के लिए विशेष रूप से लाभकारी और जीवन रक्षक साबित होती है। ?‍♂️ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) Q1. प्राथमिक चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य क्या होता है? Ans: इसका मुख्य उद्देश्य घायल व्यक्ति की जान बचाना, उसकी स्थिति को और खराब होने से रोकना तथा उसे जल्द से जल्द सुरक्षित रूप से अस्पताल पहुंचाना है। Q2. प्राथमिक चिकित्सा कौन कर सकता है? Ans: कोई भी व्यक्ति जिसे प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) के बुनियादी नियमों और तरीकों की जानकारी हो, वह आवश्यकता पड़ने पर इसे कर सकता है। धन्यवाद! यदि आप इस ब्लॉग में प्राथमिक चिकित्सा के नियम या फर्स्ट एड बॉक्स की ज़रूरी चीजें भी जोड़ना चाहते हैं, तो मुझे बताएं ताकि मैं इसे और विस्तार दे सकूं!      
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[email protected] 05 Apr 2026 206 Views

आईए जानते हैं की प्राथमिक चिकित्सा किसे कहते हैं

आईए जानते हैं की प्राथमिक चिकित्सा किसे कहते हैं
 प्राथमिक चिकित्सा किसे कहते हैं " प्राथमिक चिकित्सा वह है जो किसी को अनायास चोट लग जाने अथवा अचानक बीमार पड़ जाने पर डॉक्टर के आने तक रोगी की मरहम पट्टी अथवा उपचार करने में दी जा सके"  प्रत्येक व्यक्ति दिन भर कुछ ना कुछ कार्य करता रहता है कोई रोजी-रोटी कमाने के लिए खदानों में कार्यकर्ता है कोई खेतों में कोई कार्यालय में तो कोई नियंत्रण कहीं भी जाते समय कार्य करते समय गृह में कार्य करते समय अर्थात... Read More
 प्राथमिक चिकित्सा किसे कहते हैं " प्राथमिक चिकित्सा वह है जो किसी को अनायास चोट लग जाने अथवा अचानक बीमार पड़ जाने पर डॉक्टर के आने तक रोगी की मरहम पट्टी अथवा उपचार करने में दी जा सके"  प्रत्येक व्यक्ति दिन भर कुछ ना कुछ कार्य करता रहता है कोई रोजी-रोटी कमाने के लिए खदानों में कार्यकर्ता है कोई खेतों में कोई कार्यालय में तो कोई नियंत्रण कहीं भी जाते समय कार्य करते समय गृह में कार्य करते समय अर्थात कहीं भी और किसी के भी साथ कोई अक्षय कुमार दुर्घटना हो सकती है किसी वाहन में टकरा जाना फिसल जाना किसी जीव जंतु द्वारा काट लेना अधिक घटनाएं हो सकती है कभी-कभी यह घटनाएं साधारण होती है तथा कभी-कभी एसा धारण होती है ऐसे अवसरों पर तुरंत सहायता की आवश्यकता होती है ऐसे अवसरों पर ही प्राथमिक चिकित्सा की जाती है धन्यवाद
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[email protected] 05 Apr 2026 169 Views

आएइ जाने जंग फूड के बारे में

आएइ जाने जंग फूड के बारे में
 जंक फूड :-  आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ   जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व में बहुत तेजी से हुआ... Read More
 जंक फूड :-  आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ   जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व में बहुत तेजी से हुआ है वैसे तो यह भोज्य पदार्थ सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों द्वारा अपनाई जा रहे हैं परंतु बच्चों तथा युवा वर्ग की यह पहली पसंद बन गए हैं  परी सभी जंक फूड में पर संस्कृत कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा होती है इनमें तेल तथा खाद पदार्थों के संरक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रेट काफी अधिक मात्रा में होती है इसके अतिरिक्त इन भोज्य पदार्थों को स्वादिष्ट बनाने के लिए अनेक प्रकार के मिर्च मसाले भी इस्तेमाल किए जाते हैं  जंक फूड के प्रभाव  जंक फूड का प्रचलन बहुत अधिक है तथा इन्होंने सुविधाजनक होने के कारण हमारे आहार में विशेष स्थान पा लिया है परंतु विभिन्न अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि जंक फूड के अधिक इस्तेमाल से जन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है धन्यवाद  
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[email protected] 07 Mar 2026 137 Views

आएइ जानते हैं कि प्लीहा क्या है

आएइ जानते हैं कि  प्लीहा क्या है
 प्लीहा   इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है  धन्यवाद Read More
 प्लीहा   इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है  धन्यवाद
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[email protected] 06 Mar 2026 169 Views

कोल्लम ग्रंथि क्या है हम इसके बारे में जानेंगे

कोल्लम ग्रंथि क्या है हम इसके बारे में जानेंगे
 कोल्लम ग्रंथि   कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं  धन्यवाद Read More
 कोल्लम ग्रंथि   कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं  धन्यवाद
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[email protected] 06 Mar 2026 193 Views

अग्नाशय के बारे में जाने

अग्नाशय के बारे में जाने
 अग्नाशय के बारे में जाने  यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं धन्यवाद Read More
 अग्नाशय के बारे में जाने  यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं धन्यवाद
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[email protected] 06 Mar 2026 156 Views

आएइ जाने की पिताशय से क्या है

आएइ जाने की पिताशय से क्या है
 पिताशय क्या है  यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है  धन्यवाद Read More
 पिताशय क्या है  यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है  धन्यवाद
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[email protected] 06 Mar 2026 178 Views

Whst is Duodenum

Whst is Duodenum
Duodenum:-  amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain   than... Read More
Duodenum:-  amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain   thank you 
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[email protected] 05 Mar 2026 214 Views

हम आज जानेंगे की छोटी आंत क्या है

हम आज जानेंगे की छोटी आंत क्या है
 छोटी आत   आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत   छोटी आंत   ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतली होती है इसकी संरचना में सब स्टार... Read More
 छोटी आत   आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत   छोटी आंत   ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतली होती है इसकी संरचना में सब स्टार वही होता है जो ग्रास मिली तथा आमाशय की दीवार में होते हैं लेकिन अंतर केवल पैसे सूत्रों के फैलाव की दिशा में ही होता है छोटी आंत की बाहरी परत को सिस आवरण कहते हैं यह अत्यंत सूक्ष्म होता है और भीतरी पर तो से बिल्कुल सत रहता है इसके बाद वाली परत पेशी सूत्रों की होती है इस प्रकार मांस सूत्र आंतरिक को गोलाकार घिरे हुए होते हैं धन्यवाद
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[email protected] 05 Mar 2026 187 Views