Company Logo

Vanshika

WEFRU9450291115202
Scan to visit website

Scan QR code to visit our website

Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
Digital Diary Submit Post Vanshika

स्कर्वी रोग क्या हैक्या है

स्कर्वी रोग क्या हैक्या है
डिस्कवरी भी एक अभाव जनित रोग है यह रोग बच्चों में भी होता है तथा वयस्कों में भी दोनों प्रकार के रोगों का विवरण निम्न वर्णित है-  बच्चों में स्कर्वी  रोग-  बच्चों में आहार में विटामिन सी की निरंतर कमी बनी रहने में इन्हें इस कवि नामक रोग हो जाता है जैसे-जैसे बच्चों में इस रोग का पर कौन बढ़ता है वैसे-वैसे ही रोग लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं प्रारंभ में बच्चों की भूख घटने लगती है बच्चा बेचैन रहने लगता ह... Read More
डिस्कवरी भी एक अभाव जनित रोग है यह रोग बच्चों में भी होता है तथा वयस्कों में भी दोनों प्रकार के रोगों का विवरण निम्न वर्णित है-  बच्चों में स्कर्वी  रोग-  बच्चों में आहार में विटामिन सी की निरंतर कमी बनी रहने में इन्हें इस कवि नामक रोग हो जाता है जैसे-जैसे बच्चों में इस रोग का पर कौन बढ़ता है वैसे-वैसे ही रोग लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं प्रारंभ में बच्चों की भूख घटने लगती है बच्चा बेचैन रहने लगता है तथा उसकी टांगों और टांगों में सूजन हो जाती है तथा दर्द रहता है स्वभाव में बच्चा चिड़चिड़ा सा रहने लगता है तथा धीरे-धीरे वह वजन भी करने लगता है रक्त की कमी होने लगती है अतः रोगी बच्चे का रंग पीला पड़ने लगता है कभी-कभी बच्चों को दस्त तथा वामन भी होने लगती है इस कवि रोग का प्रभाव धातु एवं मसूड़े पर भी पड़ता है मसूड़े सो जाते हैं तथा उसमें से रक्त भी निकलने लगता है इस कवि का बच्चों की हड्डियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यदि डिस्कवरी का रोग अधिक पुराना हो जाए तथा बढ़ जाए तो बच्चों का शरीर हटा सा रहने लगता है सही समय पर उचित उपचार न होने की स्थिति में बच्चों की मृत्यु भी हो सकती है  वयस्कों में स्कर्वी रोग - ​​​​​​ बड़ों में भी यह रोग का कारण विटामिन सी की कमी ही है इस रोग के कारण प्रारंभ में व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने लगती है तथा वह परेशान सा रहने लगता है इसका प्रभाव मसूड़े पर भी पड़ता है मसूड़े फर बुरे से होने लगते हैं तथा इनमें से रक्त बहने लगता है इसके साथ ही साथ दांत भी ढीले होने लगते हैं तथा गिरने भी लगते हैं इस रोग के कारण ही व्यक्ति के शरीर में विभिन्न उत्तकों से रक्त का स्त्राव भी होने लगता है मांसपेशियों में सूजन लगती है तथा जोड़ों में भी सूजन तथा दर्द होने लगता है यदि कहीं चोट लग जाए तो सामान्य से अधिक रक्त बहता है तथा रक्त का बहाना देर से रुकता है इस रोग के रोग के कारण व्यक्ति को सांस लेने में भी परेशानी होती है  उपचार-  इस रोग के उपचार के लिए विटामिन सी की अतिरिक्त मात्रा देनी होती है यदि किसी बड़े व्यक्ति को यह रोग हो तो प्रारंभ में प्रतिदिन सो मिलीग्राम एक को ब्रेक एसिड का इन ड्राइव मस्कुलर इंजेक्शन एक सप्ताह तक दिया जाता है बच्चों को केवल 50 मिलीग्राम का ही इंजेक्शन दिया जाना चाहिए इसके बाद लगभग एक माह तक बड़ों को 500 मिलीग्राम तथा बच्चों को 100 मिलीग्राम विटामिन सी मुंह में दिया जाना चाहिए इसके अतिरिक्त आहार में ताजे फल जैसे संतरा अमरूदम पपीता ना ना शादी तथा हरी सब्जियां देनी चाहिए धन्यवाद-
Read Full Blog
[email protected] 03 Feb 2026 74 Views

एनीमिया रोग क्या है

एनीमिया रोग क्या है
 "मैं आज आपको एनीमिया के बारे में बताऊंगी"  यह रोग किस प्रकार होता है  एनीमिया रोग- साप्ताहिक अर्थ के अनुसार शरीर में सामान्य से कम रक्त होना ही एनीमिया है परंतु शरीर विज्ञान के स्पष्टीकरण के अनुसार रक्त में हीमोग्लोबिन का सामान्य से कम होना ही रखताल पता इस स्पष्टीकरण के अनुसार यदि व्यक्ति के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 14 मिलीग्राम प्रतिशो मिली रक्त से कम होती है तो व्यक्ति को रक्ताल पता का शि... Read More
 "मैं आज आपको एनीमिया के बारे में बताऊंगी"  यह रोग किस प्रकार होता है  एनीमिया रोग- साप्ताहिक अर्थ के अनुसार शरीर में सामान्य से कम रक्त होना ही एनीमिया है परंतु शरीर विज्ञान के स्पष्टीकरण के अनुसार रक्त में हीमोग्लोबिन का सामान्य से कम होना ही रखताल पता इस स्पष्टीकरण के अनुसार यदि व्यक्ति के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 14 मिलीग्राम प्रतिशो मिली रक्त से कम होती है तो व्यक्ति को रक्ताल पता का शिकार माना जाता है हिमोग्लोबिन रक्त के लाल कणों में पाया जाता है अतः यदि शरीर में लाल रक्त कण होते हैं तो हीमोग्लोबिन का स्तर भी निम्न हो जाता है एनीमिया की अवस्था में शरीर की कोशिका को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती तथा व्यक्ति छेद होने लगता है एनीमिया की अवस्था में जो शारीरिक लक्षण प्रकट होते हैं उनमें से मुख्य है सर दर्द भूख की कमी अपच विश्वास में परेशानी त्वचा का पीला होना तथा हृदय की धड़कन का बढ़ जाना   सामान्य रूप से एनीमिया के दो प्रमुख कारण है   शरीर में लोह खनिज की कमी  तथा विटामिन बी 12 की कमी इस प्रकार यह रोग भी पोषक तत्वों की कमी के कारण होने वाला एक रोग है  धन्यवाद-
Read Full Blog
[email protected] 03 Feb 2026 71 Views

हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं

हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं
" हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं "  "कुछ दुर्घटनाएं निम्नलिखित प्रकार से है "  आंख में किसी चीज का गिर जाना-  अक्सर किसी कारण बस ढुल आदि के कारण आंख में गिर जाते हैं अतः यदि कोई वस्तु पलक पर गिर गई है तो कोई साफ मुलायम कपड़ा लेकर किनारे से थोड़ा सा भिगोकर आज को साफ करना चाहिए क्लास में पानी भरकर आंख खोलने चाहिए आंखों में गुलाब जल डालना चाहिए जिससे आपकी आंखें स्वच्छ हो जाए और कोई जलन ना हो ... Read More
" हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं "  "कुछ दुर्घटनाएं निम्नलिखित प्रकार से है "  आंख में किसी चीज का गिर जाना-  अक्सर किसी कारण बस ढुल आदि के कारण आंख में गिर जाते हैं अतः यदि कोई वस्तु पलक पर गिर गई है तो कोई साफ मुलायम कपड़ा लेकर किनारे से थोड़ा सा भिगोकर आज को साफ करना चाहिए क्लास में पानी भरकर आंख खोलने चाहिए आंखों में गुलाब जल डालना चाहिए जिससे आपकी आंखें स्वच्छ हो जाए और कोई जलन ना हो   नाक में कुछ अटकना -  कभी-कभी छोटे बच्चे खेल-खेल में नाक में कोई वस्तु डाल लेते हैं इसे निकालने के लिए सबसे पहले दूसरी तरफ की नाक को दबाया रोगी को स्वास्थ्य मुंह से लेनी चाहिए ठीक है दिलाना चाहिए जिस वस्तु झटके से बाहर निकल आती है  कान में कुछ चला जाना-  कान में कट मच्छर या कुछ चले जाने पर सरसों के तेल को गर्म करके ठंडा कर दे तथा कान में डाल ले और धीरे से पलट ले से आसानी से गेट निकल जाएगा  तालुवे में कुछ अटक जाना-  पर यह छोटे बच्चे मुंह में किसी भी वस्तु को डाल लेते हैं जो उनके मुंह में अटक जाती है ऐसा होने पर बच्चों का सिर नीचे की ओर करके कर ली तथा पीठ पर थपथपाना चाहिए   मुछरा आना -  सर पर चोट लगने या किसी अत्यंत दुखद घटना से घटित होने से पहले व्यक्ति मुचिछत हो जाता है इसमें मस्तिष्क अपना कार्य बंद कर देता है सांस नदी और हृदय की धड़कन की गति कम हो जाती है  ऐसी अवस्था में व्यक्ति को खुले स्थान पर लेट कर उसके मुंह पर पानी के चीते थे और उसकी हवा करें उसके आसपास भीड़ एकत्रित नहीं होने देना चाहिए शरद ऋतु में उसे घर में पहुंचने चाहिए और आवश्यकता अनुसार कृत्रिम स्वास्थ्य देनी चाहिए उसे खाने पीने को कुछ नहीं देना चाहिए अधिक देर तक मुजरा ना जाने पर डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए  धन्यवाद:-    
Read Full Blog
[email protected] 03 Feb 2026 78 Views

हम आज आपको मोच आना और हड्डी के टूटने के बारे में बताइए

हम आज आपको मोच आना और हड्डी के टूटने के बारे में बताइए
 हमारे जीवन में आने वाली घरेलू दुर्घटना -  कुछ इस प्रकार-  मोच आना -  पारी खेलने कूदने फिसलने आदि से हड्डियों की संध्या खुल जाती है उसे वह जाना कहते हैं मौत का स्थान सोचकर दर्द करता है मोच वाले अंग को सर्दी के मौसम में गुनगुना नमक मिले पानी में कुछ देर रखने से मोच काफी ठीक हो जाती है गर्मी के मौसम में ठंडा पानी आराम देता है मोच वाले अंग को मसाला नहीं चाहिए मोच आने के पश्चात रोगी को हल्दी मिलाकर गर... Read More
 हमारे जीवन में आने वाली घरेलू दुर्घटना -  कुछ इस प्रकार-  मोच आना -  पारी खेलने कूदने फिसलने आदि से हड्डियों की संध्या खुल जाती है उसे वह जाना कहते हैं मौत का स्थान सोचकर दर्द करता है मोच वाले अंग को सर्दी के मौसम में गुनगुना नमक मिले पानी में कुछ देर रखने से मोच काफी ठीक हो जाती है गर्मी के मौसम में ठंडा पानी आराम देता है मोच वाले अंग को मसाला नहीं चाहिए मोच आने के पश्चात रोगी को हल्दी मिलाकर गर्म दूध पिलाना चाहिए इसके रक्त संचार बढ़ता है और दर्द कम होता है  हड्डी का टूटना -  छठ अथवा किसी ऊंचे पेड़ से गिरने पर खेल कूद में गिर जाने पर लाठी आई के लगने पर व्यक्ति की कोई हड्डी टूट सकती है हड्डी टूटने का स्थान सूख जाता है और उसमें दिए दर्द होता है ऐसी अवस्था में यदि रक्तस्राव रोकना चाहिए उसे अंग को बिना हिलाए व्यक्ति को आराम से लेट देना चाहिए हो सके तो व्यक्ति जहां गिरा हो वहीं पर उसे प्राथमिक चिकित्सा देते समय रेप कार्ड का प्रयोग करना चाहिए हड्डी टूटे हुए अंग के नीचे हल्की लकड़ी या तकदी या के बच्चा रखकर उसे भले भांति बांध देना चाहिए शरद ऋतु में रोगी को गर्म रखने का प्रयास करना चाहिए  धन्यवाद-  
Read Full Blog
[email protected] 03 Feb 2026 81 Views

विश या कोई जहरीली वस्तु खाना

विश या कोई जहरीली वस्तु खाना
जलन पैदा करने वाले विश्व जैसे - कार्बोलिक एसिड पेट में हलचल मचाने वाले विश्व जैसे - पर संख्या आधी नदी को प्रभावित करने वाले विश्व जैसे - क्लोरोफॉर्म धतूरा आदि और नींद पैदा करने वाले विश्व जैसे अफीम कंपोज आदि मुख्य खाए जाने वाली विश्व है विश्व खाए हुए व्यक्ति का उपचार शीघ्र होना चाहिए नेता उसकी मृत्यु हो सकती है सबसे पहले खाए हुए विश्व का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए जलन पैदा करने वाले विश्व से प्यास अ... Read More
जलन पैदा करने वाले विश्व जैसे - कार्बोलिक एसिड पेट में हलचल मचाने वाले विश्व जैसे - पर संख्या आधी नदी को प्रभावित करने वाले विश्व जैसे - क्लोरोफॉर्म धतूरा आदि और नींद पैदा करने वाले विश्व जैसे अफीम कंपोज आदि मुख्य खाए जाने वाली विश्व है विश्व खाए हुए व्यक्ति का उपचार शीघ्र होना चाहिए नेता उसकी मृत्यु हो सकती है सबसे पहले खाए हुए विश्व का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए जलन पैदा करने वाले विश्व से प्यास अधिक कोर्ट और मुंह पर पीले काले सफेद दाग और पेट में दर्द होने के लक्षण होते हैं परी इसमें एक चम्मच चुनाव अथवा खड़िया मिट्टी सांसों म जल में मिलाकर और काफी या दूध देना चाहिए  संख्या आदि खाने पर उल्टी सफेद दस्त आते हैं और मूत्र रुक जाता है हाथ पांव ऐड लगते हैं तो अच्छा पर फुंसी निकल आती है ऐसी अवस्था में अंडे की सफेदी पानी में मिलाकर देनी चाहिए तथा पानी खूब पीने को देना चाहिए पेट पर बर्फ की पट्टी रखनी चाहिए और हाथ पांव को गर्म रखने चाहिए रोगी को विश्व प्रतिरोधक दवा देनी चाहिए और डॉक्टर को तुरंत बुलाना चाहि  अफीम कंपो जाति के खाने पर सिर में दर्द थकावट और निंद्रा आती है चेहरा पीला पड़ जाता है तथा शरीर ठंडा होने लगता है स्वास्थ्य गति धीमी हो जाती है रोगी मूर्छित हो जाता है ऐसी दशा में रोगी को जगाने का प्रयत्न करना चाहिए तेज चाय या कॉफी पीने को देवास में कठिनाई होने पर क्रिसमस देना चाहिए और डॉक्टर को तुरंत बुला देना चाहिए धतूरा तंबाकू आदि के खाने पर रोगी को उल्टी आती है और पेट में दर्द होता है अधिक कमजोरी आ जाती है ऐसी अवस्था में नमक और जल से पेट को साफ करें और उलटी करवा तेज छाया कॉफी डे क्षण में कठिनाई होने पर कृत्रिम स्वास्थ्य  धन्यवाद:-  
Read Full Blog
[email protected] 03 Feb 2026 66 Views

मैं आज आपको नकसीर फूटना और शहर की मक्खी का बर्र का काटना बताऊंगी

मैं आज आपको नकसीर फूटना और शहर की मक्खी का बर्र का काटना बताऊंगी
 "मैं आज आपको हमारे जीवन में आने वाली कुछ घरेलू दुर्घटनाओं के बारे में बताने जा रही"  हमारे जीवन में बहुत से दुर्घटनाएं आती है जो निम्नलिखित प्रकार से है   नकसीर फुटना किसे कहते हैं -  गर्मी चोट रत्नलिका के फटने या रक्त की जनता के कारण नाक से रक्त पहने को नकसीर पटना कहते हैं सेवावस्था में रोगी को तुरंत खुली ताजी हवा में गर्दन को पीछे झुककर सीधा कुर्सी आज चौकी पर बैठा देना चाहिए उसके वेस्टन को ढीली... Read More
 "मैं आज आपको हमारे जीवन में आने वाली कुछ घरेलू दुर्घटनाओं के बारे में बताने जा रही"  हमारे जीवन में बहुत से दुर्घटनाएं आती है जो निम्नलिखित प्रकार से है   नकसीर फुटना किसे कहते हैं -  गर्मी चोट रत्नलिका के फटने या रक्त की जनता के कारण नाक से रक्त पहने को नकसीर पटना कहते हैं सेवावस्था में रोगी को तुरंत खुली ताजी हवा में गर्दन को पीछे झुककर सीधा कुर्सी आज चौकी पर बैठा देना चाहिए उसके वेस्टन को ढीली करके उसे मुंह द्वारा सांस लेने को कहा जाए तत्पश्चात नाक से ऊपर तथा गर्दन पर बर्फ की थैली से सिकाई करनी चाहिए उसके पैरों को गर्म पानी में रखना चाहिए और चूसने के लिए बर्फ देनी चाहिए रोगी को बिना हिले डोले उसकी नाक को अंगूठे और उंगली के बीच पड़कर लगभग 5 मिनट तक दबाना चाहिए नकसीर के बाद न होने पर कुछ और देर नाक दबाए या नाक के अंदर भी भर दे   रोगी को धैर्य संतान देते रहना चाहिए और नाक साफ नहीं करने देना चाहिए जब प्रयासों के सफल होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए   शहर की मुखिया बर्र का काटना-  शहर की मक्खी अथवा बदल के काटने पर उसे स्थान पर बहुत बड़ा होती है जलन होने लगती है कटे हुए स्थान के चारों ओर सूजन आ जाती है कभी-कभी कटे हुए स्थान पर धक रह जाता है शहर की मक्खी अथवा बदल के काटने से उसके डाक को पी या चाबी की सहायता से बाहर निकाल देना चाहिए कटे हुए स्थान पर कोई बिना जग लगा साफ लोहा तुरंत रगड़ना चाहिए और स्पीड छोड़ना अथवा को रिस्टिक सोडा मारना चाहिए रोगी को पानी को पिलाना चाहिए गांव के ऊपर तुरंत एक पट्टी कसकर बांध देने से विश्व को फैलने से रोका जा सकता है धन्यवाद-  
Read Full Blog
[email protected] 03 Feb 2026 75 Views

आएय जाने दिव्यंगता क्या है

आएय जाने दिव्यंगता क्या है
अपने अपने घर गांव तथा समाज में ऐसे लोगों को देखा होगा चोला टीका सहारा लेकर या दूसरों का हाथ पकड़ कर चलते हैं काम या बिल्कुल नहीं सुनते तथा मुंह से बोल नहीं पाते पैरों से चल नहीं पाते हैं तथा हाथों से काम नहीं कर पाते हैं ऐसे लोगों जिन्हें सुनने बोलने देखने तथा चलने में कठिनाई महसूस होती है उन्हें दिव्यांग कहा जाता है दिव्यांग या क्षमता की सामान्य कर श्रेणी होती है  1.सरवन संबंधी अक्षमता   2.दृष्टि... Read More
अपने अपने घर गांव तथा समाज में ऐसे लोगों को देखा होगा चोला टीका सहारा लेकर या दूसरों का हाथ पकड़ कर चलते हैं काम या बिल्कुल नहीं सुनते तथा मुंह से बोल नहीं पाते पैरों से चल नहीं पाते हैं तथा हाथों से काम नहीं कर पाते हैं ऐसे लोगों जिन्हें सुनने बोलने देखने तथा चलने में कठिनाई महसूस होती है उन्हें दिव्यांग कहा जाता है दिव्यांग या क्षमता की सामान्य कर श्रेणी होती है  1.सरवन संबंधी अक्षमता   2.दृष्टि संबंधी अक्षमता  3. अस्थि संबंधी अक्षमता   4.मानसिक अक्षमता  लेकिन क्या आप बता सकते हैं कि शारीरिक है अक्षमताएं लोगों में कैसे आ जाती है वास्तव में यह शारीरिक स अक्षमताएं चाहे दृष्टि संबंध हो या मानसिक या अस्थि संबंधी हो हमें मुख्य दो तरह से प्राप्त होती है  1.जन्मजात   2.जन्म के अपरांत   जन्मजात दिव्यांगता -  जन्मजात दिव्यंका का आशा ए गर्भावस्था शिशु में शारीरिक दोष आ जाना है आपने सुनाया देखा होगा कि कुछ बच्चे जन्म अंत लगभग मंद बुढ़िया अन्य शारीरिक दोष के साथ जन्म लेते हैं ऐसे बच्चे जन्मजात दिव्यांग किस श्रेणी में आते हैं  कारण है बचाव -  जन्मजात दिव्या गता के मुख्य कई कारण होते हैं   कभी-कभी दिव्यंका अनुवांशिक कर्म से होती है परंतु ऐसा काम ही होता है  अभी इसके कारण है ऐसी स्थिति में संतुलित आहार तथा जरूरी विटामिन युक्त भोजन तथा युक्त खाद पदार्थ द्वारा कम वजन कमजोर दृष्टि तथा लखवायुक्त शिशु के जन्म की संभावना को काम किया जा सकता है गर्भवती माता को ऐसी स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा जरूरी सावधानी रखनी चाहिए  इसे भी जाने-  जिन बच्चों को हम पहले दीवान कहते थे उन्हें अब विशेष आवश्यकता वाले बच्चे कहते हैं यह बच्चे अपनी उम्र के अन्य बच्चों के समान ही है केवल उनकी आवश्यकता है की दूसरे बच्चों से अलग है सभी बच्चों को एक समान शिक्षा का बुनियादी अधिकार है  इन बच्चों को हमारी सहानुभूति या दया की कोई आवश्यकता नहीं है इन बच्चों को केवल हमारे सहयोग और प्रेम की आवश्यकता है  जन्म के बाद दिव्यांगता -  जन्म के बाद दिव्यंगता की चार श्रेणियां है   दृष्टि दोष (आंखों से कम या बिल्कुल ना दिखाई देना)   श्रवण दोष (कानों से सुने ना पढ़ना )  मुख बधिर (ऐसे लोग जो बोल नहीं पाते में कार्य सुन भी नहीं पाते )  शारीरिक रूप से आश्रम (ऐसे लोग जो पावे से चलने तथा हाथ से कार्य करने में असमर्थ है या कठिनाई महसूस करते हैं) ​​​​​ अति आवश्यक-  हमारे बीच कुछ ऐसे बच्चे भी होते हैं जिनका मानसिक विकास उनकी उम्र के हिसाब से कम होता है ऐसे बच्चों में भी सीखने समझने और कुछ करने की लगन होती है हमें इन बच्चों के प्रति कोई पूर्वक रह नहीं रखना चाहिए हमें इसे इसमें और सहयोग करना चाहिए   सगमय भारत अभियान-  दिव्यांग जनों की प्रकृति एवं विकास हेतु भारत सरकार द्वारा चलाई गई योजना है जिनके द्वारा प्रत्येक से परिवेश को दिव्यांगजनों के अनुकूलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है  धन्यवाद  
Read Full Blog
[email protected] 03 Feb 2026 109 Views

इंनिश फ्री का झील द्वीप

इंनिश फ्री का झील द्वीप
मैं उठूंगा और अब चला जाऊंगा और इनिश फ्री को चला जाऊंगा और वहां में मिट्टी और टहनियां ट्रैक्टरों की एक छोटी झोपड़ी बनाऊंगा मैं वहां जो से की पंक्तियां लगाऊंगा और शहद के लिए एक छत्ता होगा और मधुमक्खियां की गुर्जर से युक्त खुले स्थान में अकेला रहूंगा  वहां में शांति का अनुभव करूंगा क्योंकि वहां सुबह के कारण से धीरे-धीरे कीर्ति शांति आती है जहां चीकू कहते हैं वहां आधी रात को मंत्र प्रकाश होता है और दो... Read More
मैं उठूंगा और अब चला जाऊंगा और इनिश फ्री को चला जाऊंगा और वहां में मिट्टी और टहनियां ट्रैक्टरों की एक छोटी झोपड़ी बनाऊंगा मैं वहां जो से की पंक्तियां लगाऊंगा और शहद के लिए एक छत्ता होगा और मधुमक्खियां की गुर्जर से युक्त खुले स्थान में अकेला रहूंगा  वहां में शांति का अनुभव करूंगा क्योंकि वहां सुबह के कारण से धीरे-धीरे कीर्ति शांति आती है जहां चीकू कहते हैं वहां आधी रात को मंत्र प्रकाश होता है और दोपहर को गुलाबी दीप्ति होती है और शामली नेट पक्षी के पंखों से भरी होती है अर्थात संध्या के आकाश में वाहन लेने पक्षी उड़ते हैं  मैं उठूंगा और अब चला जाऊंगा क्योंकि हमेशा रात दिन मुझे झील के किनारे धीमी आवाज में पानी की जब जब आहट सुनाई देती है जबकि मैं सड़क के मार्ग पर यह सड़क की पूरी पटरी पर खड़ा होता हूं मैं इस ध्वनि को मिलती है की गहराई से सुनता हूं  धन्यवाद-
Read Full Blog
[email protected] 02 Feb 2026 89 Views

व्यायाम के लाभ

व्यायाम के लाभ
 व्यायाम के लाभ   हानिकारक पदार्थों का विसर्जन- शरीर में विभिन्न हानिकारक पदार्थ एकत्रित होते रहते हैं जिनके शरीर से बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है व्यायाम के द्वारा पीसने के रूप में उनके उत्सर्जी पदार्थ शरीर से विसर्जित हो जाते हैं इसके अतिरिक्त व्यायाम पेट और आम तो का कार्य भी नियमित कर देता है जिससे कब्ज दूर हो जाता है और शरीर में माल भी सरलता से बाहर आ जाता है  रक्त संचरण में वृद्धि- ध... Read More
 व्यायाम के लाभ   हानिकारक पदार्थों का विसर्जन- शरीर में विभिन्न हानिकारक पदार्थ एकत्रित होते रहते हैं जिनके शरीर से बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है व्यायाम के द्वारा पीसने के रूप में उनके उत्सर्जी पदार्थ शरीर से विसर्जित हो जाते हैं इसके अतिरिक्त व्यायाम पेट और आम तो का कार्य भी नियमित कर देता है जिससे कब्ज दूर हो जाता है और शरीर में माल भी सरलता से बाहर आ जाता है  रक्त संचरण में वृद्धि- ध्यान सी केवल रक्त ही शुद्ध होता है वर्णन इसमें रक्त की गति भी बढ़ जाती है जिससे शरीर के विभिन्न अंगों में रक्त का ठीक संचरण होता है इससे मांसपेशियां मजबूत होती है और शरीर के विभिन्न क्रियाशील रहते हैं  पाचन शक्ति में वृद्धि- व्यायाम भोजन की भली भांति बचाने में सहायक होता है जिससे पाचन शक्ति में वृद्धि होती है  भूख में वृद्धि- ध्यान द्वारा जब पाचन शक्ति ठीक हो जाती है तो भूख में खूब खुलकर लगती है अतः व्यायाम से भूख में भी वृद्धि होती है  नियमित श्वास गति - व्यायाम से नियमित स्वास्थ्य गति फेफड़ों को अधिक आक्सीजन प्रदान करती है जिससे शरीर में से अधिक से अधिक गंदी वायु बाहर आती है  कार्य क्षमता में वृद्धि - व्यायाम द्वारा शारीरिक एवं मानसिक विकास होने से मनुष्य की कार्य क्षमता बढ़ जाती है जिससे वह अधिक धन का अपवर्जन करने में सफल हो सकता है   शारीरिक एवं मानसिक विकास: जब व्यायाम द्वारा शरीर के हानिकारक पदार्थों का विसर्जन हो जाता है स्वास्थ्य गति और रक्त की मात्रा बढ़ जाती है पाचन शक्ति और भूख में वृद्धि हो जाती है और मांसपेशियां मजबूत हो जाती है तो शारीरिक विकास होता है शारीरिक विकास से स्वस्थ ही मस्तिष्क विकसित होता है   सुख शांति की अनुभूति- नियमित व्यायाम मनुष्य को स्वस्थ बना देता है और विभिन्न रोगों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है इससे मनुष्य का शरीर कांतिमान है सुंदर बन जाता है परिणाम फल स्वरुप मनुष्य सुख शांति की अनुभूति करता है  व्यायाम न करने से कई हानियां होती है शरीर की चर्बी और रक्तचाप बढ़ जाता है पाचन शक्ति खराब हो जाती है हारती है और स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है व्यक्ति स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाता है और चेहरे से क्रांति लुप्त हो जाती है इससे शरीर समय से पहले कमजोर हो जाता है  स्त्रियों पुरुषों और बच्चों के लिए व्यायाम कार्य अलग-अलग प्रकार के होते हैं घूमने तो सभी के लिए उपयुक्त है योगासन तो बड़े बच्चों पुरुषों और स्त्रियों के लिए अत्यंत लाभकारी है  स्त्रियों के लिए नृत्य और घर के विभिन्न कार्य अभियान है विशेष कर लेते में पेशी ए सुडौल बनती है और शारीरिक सौंदर्य में वृद्धि होती है जो व्यक्ति शारीरिक कार्य करते होने व्यायाम करना आवश्यक नहीं है परंतु मानसिक कार्य करने वाले व्यक्ति को शारीरिक व्यायाम विशेष कर टहलने का काम आवश्यक करना चाहिए  धन्यवाद-
Read Full Blog
[email protected] 02 Feb 2026 61 Views

शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के उपाय

शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के उपाय
 शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के उपाय  शारीरिक स्वास्थ्य उत्तम रहे इसके लिए हम स्वास्थ्य रक्षा के निम्नलिखित उपाय करने चाहिए  वातावरण- व्यक्ति का अधिकांश हमें घर पर ही बीतता है अतः घर का वातावरण आनंद देतायक होना चाहिए परिवार के सभी सदस्यों में आत्म संतोष की भावना होनी चाहिए हमेशा सकारात्मक सूचना चाहिए और नारात्मक प्रवृत्ति का त्याग करना चाहिए  चिंता रहित जीवन- चिंता एवं चिंता के समान यह सत्य है कि प... Read More
 शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के उपाय  शारीरिक स्वास्थ्य उत्तम रहे इसके लिए हम स्वास्थ्य रक्षा के निम्नलिखित उपाय करने चाहिए  वातावरण- व्यक्ति का अधिकांश हमें घर पर ही बीतता है अतः घर का वातावरण आनंद देतायक होना चाहिए परिवार के सभी सदस्यों में आत्म संतोष की भावना होनी चाहिए हमेशा सकारात्मक सूचना चाहिए और नारात्मक प्रवृत्ति का त्याग करना चाहिए  चिंता रहित जीवन- चिंता एवं चिंता के समान यह सत्य है कि प्रत्येक के जीवन में कुछ ना कुछ समस्याएं रहती है परंतु निरंतर चिंता चिंता करने रहने से किसी समस्या का समाधान नहीं होता बल्कि आत्म शक्ति कम हो जाती है तब फल की इच्छा के बिना अपना कर्तव्य करते रहना चाहिए  मादक पदार्थों से दूर रहना- स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक होता है कि हमें विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए सभी प्रकार के मादक पदार्थों के प्रयोग में हमारे जीवन की सोने विराज ने की शक्ति नष्ट हो जाती है आमाशय की क्रियाशीलता काम हो जाती है हृदय की धड़कन बढ़ जाती है कैंसर अधिक नींद आती बीमारियां उत्पन्न हो जाती है तो मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहना चाहिए   सार्वजनिक स्वच्छता - स्वस्थ रहने के लिए घर ही नहीं हैप्पी तो सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना प्रतीक नागरिक का कर्तव्य बन जाता है खसते या चकते समय मुंह पर रुमाल लगाना चाहिए सार्वजनिक स्थानों पर बने तोक दान का प्रयोग ठोकने के लिए करना चाहिए घर का कूड़ा निर्धारित स्थान पर ही फेंकना चाहिए यदि किसी सकरात्मक बीमारी की जानकारी मिले तो पास के किसी सरकारी अस्पताल में जाकर बताना चाहिए  बच्चों में अच्छी आदतों का विकास- बच्चों में प्रारंभ से ही अच्छी आदतों का विकास करना चाहिए छोटे बच्चों का अनुकरण से सीखते हैं अतः स्वयं अपनी ऐसी जीवन शैली अपने जिससे बच्चे प्रेरणा का सके और अपने सुंदर आता तो का विकास कर सके एक बार यदि बचपन में कोई आदत पड़ जाए तो जीवन भर यह आदत फिरती नहीं है अतः अच्छी आदतों को जीवन के प्रारंभिक काल में ही डालने का ऑपरेशन करना चाहिए  धन्यवाद-
Read Full Blog
[email protected] 02 Feb 2026 67 Views