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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
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भारत में गृह विज्ञान का विकास

भारत में गृह विज्ञान का विकास
मैं आज आपको भारत में गृह विज्ञान के विकास के बारे में बताऊंगी  प्राचीन काल में गृह विज्ञान का विकास-  भारत में प्राचीन काल में गृह विज्ञान की सीबीएसई के रूप में नहीं पढ़ा जाता था किंतु गुरु कुलो मैं अन्य विश्व के साथ ग्रस्त  धर्म की बेसिक साड़ी जाती थी गणेश चतुर्थी में गृह विज्ञान का एक रूप था इसमें बालिकाओं को पारिवारिक जीवन यापन संबंधित ज्ञान सिलाई बुनाई कढ़ाई पाक कला हाथी का ज्ञान दिया जाता था... Read More
मैं आज आपको भारत में गृह विज्ञान के विकास के बारे में बताऊंगी  प्राचीन काल में गृह विज्ञान का विकास-  भारत में प्राचीन काल में गृह विज्ञान की सीबीएसई के रूप में नहीं पढ़ा जाता था किंतु गुरु कुलो मैं अन्य विश्व के साथ ग्रस्त  धर्म की बेसिक साड़ी जाती थी गणेश चतुर्थी में गृह विज्ञान का एक रूप था इसमें बालिकाओं को पारिवारिक जीवन यापन संबंधित ज्ञान सिलाई बुनाई कढ़ाई पाक कला हाथी का ज्ञान दिया जाता था  मध्यकाल में गृह विज्ञान -  मध्यकाल मुगल शासको का योगदान इस समय बालिकाओं को बाहर शिक्षा नहीं दी जाती थी उन पर बाहर निकलने पर रोक थी पर्दा प्रथा का प्रचलन अधिक था तब वाले गांव को गृह विज्ञान की शिक्षा घरों पर ही बड़ी बुजुर्ग महिला देती थी उन्हें सिलाई कढ़ाई पकला अच्छी शिक्षा घर पर ही दी जाती थी   आधुनिक युग में गृह विज्ञान-  आधुनिक काल में अंग्रेजी ने भारत में प्रदापान किया इस समय महिलाओं वह वाले गांव की शिक्षा पर ध्यान दिया जाने लगा बहुत से समाज सुधारकों जैसे स्वामी दयानंद सरस्वती ने स्त्री शिक्षा पर विशेष बल दिया राजा राम राय ने सती प्रथा जैसी कुरीतियों का विरोध किया इस युग में वाले गांव के लिए अलग से पाठशालाओं की व्यवस्था का प्रारंभ हुआ और उन्हें गृह विज्ञान एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाने लगा  स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात गृह विज्ञान का स्वरूप-  स्वतंत्रता प्राप्ति की पश्चात गृह विज्ञान का बहुत विकास हुआ इसे एक प्रथा क्या संपूर्ण विषय के रूप में मान्यता मिली गृह विज्ञान के अनेक कॉलेज खोले गए जहां पर गृह विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र का प्रस्तुत अध्ययन किया जाता है  धन्यवाद- ​​​​​​
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[email protected] 07 Feb 2026 368 Views

सार्वजनिक स्वास्थ्य

सार्वजनिक स्वास्थ्य
 सार्वजनिक स्वास्थ्य  मनुष्य समाज में रहता है प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य हो जाता है कि वह व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ समाज में रहने वाले अन्य व्यक्तियों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें अधिकतर लोग अपने घरों को साफ करके कूड़ा करकट सड़कों पर एकत्रित कर देते हैं जहां तहां थूक देते हैं इससे समाज में वातावरण दूषित होता है और प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है  सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्र... Read More
 सार्वजनिक स्वास्थ्य  मनुष्य समाज में रहता है प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य हो जाता है कि वह व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ समाज में रहने वाले अन्य व्यक्तियों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें अधिकतर लोग अपने घरों को साफ करके कूड़ा करकट सड़कों पर एकत्रित कर देते हैं जहां तहां थूक देते हैं इससे समाज में वातावरण दूषित होता है और प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है  सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक  सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है   अधिकतर घरों में सफाई करने के पश्चात कूड़ा बाहर फेंक दिया जाता है और दुर्गंध वातावरण में फैलती रहती है  बहुत से क्षेत्र में आज भी शौचालय का अभाव है परिणाम स्वरुप लोग इधर-उधर सोच के लिए जाते हैं और वातावरण को दूषित कर देते हैं  आज सड़कों पर पान मसाला या पान खाने वाले जहां दांत थूक देते हैं थूकने से उसे पर मक्खियों बैठी है और मुख्य फल भोजन आदि पर रोक को ले आती है जब कोई व्यक्ति इस प्रकार का भोजन करता है तो उसे विभिन्न रोग हो जाते हैं  लाउडस्पीकर आदि तेज आवाज में चलने से भी व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है  बड़ी-बड़ी फैक्ट्री से निकलने वाला दुआ भी स्वास्थ्य को प्रभावित करता है सभी नागरिकों का यह कर्तव्य बनता है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य किस अवस्था का विशेष ध्यान रखें   धन्यवाद-
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[email protected] 06 Feb 2026 146 Views

शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक

शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक
 शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक-  शारीरिक स्वास्थ्य को प्रमुख रूप से निम्नलिखित बातें प्रभावित करती है  पौष्टिक और संतुलित भोजन   मनुष्य का स्वास्थ्य ठीक रहे इसके लिए पौष्टिक एवं संतुलित भोजन करना चाहिए जिसमें आवश्यक मात्रा में वे सभी पोषक तत्व हो जो स्वास्थ्य को उत्तम बना सके संतुलित भोजन से तात्पर्य है वह सभी पदार्थ जिसमें पोषक तत्व उचित मात्रा में हो तथा साथ ही उन पदार्थों में शुद... Read More
 शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक-  शारीरिक स्वास्थ्य को प्रमुख रूप से निम्नलिखित बातें प्रभावित करती है  पौष्टिक और संतुलित भोजन   मनुष्य का स्वास्थ्य ठीक रहे इसके लिए पौष्टिक एवं संतुलित भोजन करना चाहिए जिसमें आवश्यक मात्रा में वे सभी पोषक तत्व हो जो स्वास्थ्य को उत्तम बना सके संतुलित भोजन से तात्पर्य है वह सभी पदार्थ जिसमें पोषक तत्व उचित मात्रा में हो तथा साथ ही उन पदार्थों में शुद्धता भी हो प्रमुख पोषक तत्व है कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन वसा खनिज लवण विटामिन तथा जल ऊर्जा प्राप्ति के लिए वर्ष तथा कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है शरीर वृद्धि तथा निर्माण के लिए प्रोटीन एवं स्वास्थ्य को निरोगी बनाए रखने के लिए विटामिन और खनिज लवण की आवश्यकता होती है  व्यक्ति का रहन-सहन   स्वास्थ्य पर व्यक्ति के रहन-सहन का बहुत प्रभाव पड़ता है प्रकृति से दूर रहने वाले व्यक्तियों का स्वास्थ्य खराब बना रहता है जबकि प्राप्त समय से उठाने तथा रात्रि में समय से सोना नियमित सो जाना दांत साफ करना स्नान करना स्वच्छ वस्त्र पहनना व्यायाम करना समय से भोजन करना बुरी आदतों तथा नशे से दूर रहना अधिक क्रियो से व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहता है इसके अतिरिक्त उत्तम स्वास्थ्य हेतु व्यक्ति को जल भोजन में वातावरण की शुद्धि की ओर ध्यान देना चाहिए  जनसंख्या का प्रभाव  खराब स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण कारक जनसंख्या वृद्धि भी है अधिक संतान होने से माता-पिता प्रत्येक संतान के लिए संतुलित है पौष्टिक भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाते   रोगों से दूर रहना  व्यक्ति को रोगों से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए इसके लिए उसे हर संभव उपाय करना चाहिए तथा प्राकृतिक नियमों का पालन करना चाहिए स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक है कि स्वयं को रोगों के संक्रमण से बचाया जाए और रोगी व्यक्ति के संपर्क से स्वयं को दूर रखा जाए  व्यायाम   आज विज्ञान के द्वारा यह सिद्ध हो गया है कि जो भी व्यक्ति नियमित व्यायाम करते हैं रोग उनसे दूर भागते हैं व्यायाम करने से शरीर के सभी तंत्र अपना कार्य से चारों रूप से करने लगते हैं हमारे कार्य क्षमता तथा पाचन शक्ति में वृद्धि होती है हमारी मांसपेशियां मजबूत होती है रक्त शुद्ध होता है तथा विभिन्न प्रकार के भयंकर रोग भी दूर हो जाते हैं व्यायाम शुरू करते समय व्यायाम के नियमों को आवश्यक जान लेना और उनका पालन करना चाहिए धन्यवाद:-    
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[email protected] 06 Feb 2026 180 Views

जल प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव

जल प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव
 जल प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव   जल प्रदूषण का भी प्रतिकूल प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ता है विश्वास से संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक बच्चे जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप उत्पन्न बीमारियों से मर जाते हैं तथा 50% से अधिक लोग केवल प्रदूषण जल के सेवन के कारण ही बीमार होते हैं प्रदूषण जल के सेवन से मुख्य रूप से पाचन तंत्र संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं इसमें मुख्य है हैजा... Read More
 जल प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव   जल प्रदूषण का भी प्रतिकूल प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ता है विश्वास से संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक बच्चे जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप उत्पन्न बीमारियों से मर जाते हैं तथा 50% से अधिक लोग केवल प्रदूषण जल के सेवन के कारण ही बीमार होते हैं प्रदूषण जल के सेवन से मुख्य रूप से पाचन तंत्र संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं इसमें मुख्य है हैजा पेचिश पीलिया टाइफाइड परता फाइट आदि यह सभी रोग सकारात्मक रूप से फैलते हैं तथा घातक सिद्ध होते हैं प्रदूषण जल एक अन्य प्रकार से भी मनुष्य को प्रभावित करता है हम जानते हैं कि यह संख्या लोग मांसाहारी है तथा मांस प्रताप का एक मुख्य स्रोत मछली एवं जल जीव  जब जल प्रदूषित हो जाता है तब इन मछलियों के शरीर में भी अनेक विषैलीन तत्वों का समावेश हो जाता है तथा ऐसे जीवों का मांस खाने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न रासायनिक से प्रदूषण समुद्र जल में रहने वाली मछलियों को खाने में अंधेपन एवं मस्तिष्क संबंधित रोगों की आशंका रहती है जल प्रदूषण से हमारे फैसले भी प्रभावित होती है प्रदूषित जल द्वारा संचित फसलों को खाने में मनुष्य तथा अन्य प्राणियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता ह  धन्यवाद-
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[email protected] 05 Feb 2026 125 Views

जल प्रदूषण के स्रोत

जल प्रदूषण के स्रोत
 जल प्रदूषण के स्रोत:  सामान्य शब्दों में कहा जा सकता है कि जल का दूषित हो जाना ही जल प्रदूषण है जल स्वयं में एक योग है जिसमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन मुख्य घटक होते हैं शुद्ध जल का रासायनिक सूत्र है h2o शुद्ध जल रंगीन स्वाधीन गांधी तथा स्वाभाविक चमक युक्त होता है यह कक्षा विलायत है जिसमें विभिन्न पद्धति शीघ्र ही भूल जाते हैं इस कारण से किसी भी विजातीय तथा हानिकारक पदार्थ काजल स्रोतों में मिल जाना अ... Read More
 जल प्रदूषण के स्रोत:  सामान्य शब्दों में कहा जा सकता है कि जल का दूषित हो जाना ही जल प्रदूषण है जल स्वयं में एक योग है जिसमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन मुख्य घटक होते हैं शुद्ध जल का रासायनिक सूत्र है h2o शुद्ध जल रंगीन स्वाधीन गांधी तथा स्वाभाविक चमक युक्त होता है यह कक्षा विलायत है जिसमें विभिन्न पद्धति शीघ्र ही भूल जाते हैं इस कारण से किसी भी विजातीय तथा हानिकारक पदार्थ काजल स्रोतों में मिल जाना अथवा गुल जाना जल प्रदूषण का कारण बन जाता है व्यावहारिक रूप में हम कह सकते हैं कि जल में किसी प्रकार की गंदगी रासायनिक तत्व धातु कारण औद्योगिक विशेष तथा रोगाणु ऑन का मिल जाना ही जल प्रदूषण है इसके मुख्य कर्म अथवा स्रोतों का परिचय निम्नलिखित है   घरेलू वाहित मल (सीवेज)-  इसमें मल मूत्र घरेलू गढ़ की तथा कपड़ों को धोने के बाद बच्चा जल आदि सम्मिलित होते हैं इन्हें कार्य उन नदियों के जाल में मिला दिया जाता है जिनके किनारो पर यह गांव कस्बे नगर आदि बसे होते हैं इसके परिणाम स्वरुप बस्तियों के किनारे की नदियां झील आदि के जाल में ऑक्सीजन की की कमी हो जाती है वहीद माल से अनेक प्रकार के कीटाणुओं जल में आ जाते हैं जिनके कारण विभिन्न प्रकार के रोग फैलते हैं   वर्षा का जल -  वर्षा काजल खेतों की मिट्टी की ऊपरी परत को बाहर कर नदियों झीलों तथा समुद्र तक पहुंचा देता है इसके साथ अनेक प्रकार की खाद नाइट्रोजन एवं फास्फेट के योग एवं कीटनाशक पदार्थ भी जल में पहुंच जाते हैं जिससे जल प्रदूषित हो जाता है  औद्योगिक संस्थानों द्वारा विसर्जित पदार्थ -  औद्योगिक संस्थानों द्वारा विसर्जित पदार्थ में अनेक विषैली पदार्थ अमल शरण एड आदि रंग रंग चमड़े का कागज उद्योग द्वारा विसर्जित पार मरकरी के योग रासायनिक एवं पेस्टिसाइड उद्योग द्वारा विसर्जित शीशे लैंड के योग तथा कॉपर व जिंक के योग के प्रकार है यह सभी अवशेष जल स्रोतों को निरंतर प्रदूषित करते रहते हैं  तेल द्वारा प्रदूषण-  इस प्रकार का प्रदूषण समुद्र के जाल में या तो जहाज द्वारा तेल विसर्जित करने से होता है अथवा समुद्र के किनारे स्थित तेल शोधक संस्थाओं के कारण होता है  रेडियोधर्मी पदार्थ-  नाभिकीय विखंडन के फल स्वरुप रेडियो धर्मी पदार्थ जल को दूषित कर देते हैं इस प्रकार का प्रदूषण पर समुद्र के जाल में होता है  सव विसर्जन -  हमारे समाज में विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के कारण मृत व्यक्तियों के सब को हस्तियों को चिंता की राख आदि को नदियों में विसर्जित कर दिया जाता है इसमें भी जल प्रदूषण में वृद्धि होती है  उपयुक्त विवरण द्वारा जल प्रदूषण तथा मंदिर प्रदूषण भी जल प्रदूषण की वृद्धि में कुछ ना कुछ योगदान आवश्यक देते हैं आवश्यक में प्रदूषण वायु और प्रदूषण मिट्टी के संपर्क में आने वाला जल भी प्रदूषित हो जाता है  धन्यवाद-
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[email protected] 05 Feb 2026 104 Views

पर्यावरण प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव

पर्यावरण प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव
 पर्यावरण प्रदूषण का जन जीवन पर प्रभाव:-  पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न पक्षों का सामान्य परिचय हम प्राप्त कर चुके हैं संपर्क में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका प्रतिकूल प्रभावजन जीवन के प्रत्येक पक्ष पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रभावजन स्वास्थ्य पर पड़ता है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप विभिन्न साधारण गंभीर तथा अति गंभीर रोग पनपन लगते हैं पर्यावरण प्रदूषण का अप... Read More
 पर्यावरण प्रदूषण का जन जीवन पर प्रभाव:-  पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न पक्षों का सामान्य परिचय हम प्राप्त कर चुके हैं संपर्क में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका प्रतिकूल प्रभावजन जीवन के प्रत्येक पक्ष पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रभावजन स्वास्थ्य पर पड़ता है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप विभिन्न साधारण गंभीर तथा अति गंभीर रोग पनपन लगते हैं पर्यावरण प्रदूषण का अप्रत्यक्ष रूप में प्रतिकूल प्रभावजन साधारण के आर्थिक जीवन पर भी पड़ता है रोगों की वृद्धि तथा स्वास्थ्य के निम्न स्तर के कारण जनसाधारण की उत्पादक क्षमता घटती है तथा रोग निवारण के लिए अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ता है इससे जनसाधारण का जीवन आर्थिक संकट का शिकार हो जाता है जन्म जीवन पर पर्यावरण प्रदूषण से पढ़ने वाले प्रभाव का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है   जल स्वास्थ्य पर प्रभाव-  पर्यावरण प्रदूषण का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव जन स्वास्थ्य पर पड़ता है जैसे-जैसे पर्यावरण का अधिक प्रदूषण होने लगता है वैसे-वैसे प्रदूषण जनित रोगों की दर एवं वीरता में वृद्धि होने लगती है पर्यावरण के विभिन्न पक्षों में होने वाले प्रदूषण से भिन्न-भिन्न प्रकार के रोग बढ़ाते हैं उदाहरण के लिए वायु प्रदूषण के परिणाम स्वरुप शोषण तंत्र से संबंधित रोग तथा जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप पाचन तंत्र संबंधित रोग अधिक फैलते हैं ध्वनि प्रदूषण भी तंत्रिका तंत्र हृदय एवं विकारों को जन्म देता है तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहारगत समानता को भी विकृत कर देता है अन्य प्रकार के प्रदूषण विजन सामान्य को विभिन्न सामान्य एवं गंभीर रोगों का शिकार बनाते हैं संक्षेप में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण अनिवार्य रूप से जन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है प्रदूषण पर्यावरण में रहने वाले व्यक्तियों की औसत आयु भी करती है तथा स्वास्थ्य का स्तर भी सामान्य निम्न ही रहता है   व्यक्तिगत कार्य क्षमता पर प्रभाव-   व्यक्ति एवं समाज की प्रगति में संबंधित व्यक्तियों की कार्य क्षमता का विशेष महत्व होता है यदि व्यक्ति की कार्य क्षमता सामान्य या सामान्य से अधिक हो तो वह निश्चित रूप से प्रगति के मार्ग पर ए घर्षण होता है पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की कार्य क्षमता निश्चित रूप से घटित है तथा जन स्वास्थ्य का स्तर निम्न होता है निम्न स्वास्थ्य स्टार वाला व्यक्ति ना तो अपने कार्य को कुशलता पूर्वक कर सकता है और ना उसकी उत्पादन क्षमता की सामान्य रह पाती है यह दोनों ही स्थितियां व्यक्ति एवं समाज के लिए हानिकारक सिद्ध होती है वास्तव में प्रदूषित वातावरण में ही व्यक्ति अस्वस्थ ना भी हो तो भी उसकी चुस्ती एवं इस फुर्ती तो घाट ही जाती है  आर्थिक जीवन पर प्रभाव-  व्यक्ति समाज तथा राष्ट्र की आर्थिक स्थिति पर भी पर्यावरण प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की उत्पादन क्षमता घट जाती है यदि व्यक्ति का सामान स्वास्थ्य का स्तर निम्न होगा तथा उसकी कार्य क्षमता भी कम होगी तो वह अपनी आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए समुचित धन कदापि अर्जित नहीं कर पाएगा इस स्थिति में यदि व्यक्ति अथवा उसके परिवार का कोई सदस्य प्रदूषण का शिकार होकर के निसाधारण या गंभीर रोगों से ग्रस्त रहता है तो उसके उपचार पर भी अधिक व्यय करना पड़ सकता है इससे परिवार का आर्थिक बजट बिगड़ जाता है तथा आर्थिक स्थिति निम्न हो जाती है अतः कह सकते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति प्रत्यक्ष एवं परोक्ष दोनों ही रूपों मैं प्रभावित होती है इस कारक के प्रबल तथा विस्तृत हो जाने पर समाज एवं राष्ट्र की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है  उपयुक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि पर्यावरण प्रदूषण का जनजीवन पर बहुपक्षीय गंभीर तथा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यही कारण है कि पर्यावरण प्रदूषण को आज गंभीरतम राष्ट्रीय समस्या माना जाने लगा है धन्यवाद*
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[email protected] 05 Feb 2026 176 Views

सुख रोग या रिकेट्स

सुख रोग या रिकेट्स
कुपोषण जनित एक रोग सूखा रोग भी है इसे अस्थियां भी करती या रिकेट्स भी कहते हैं   अस्थि विकृति अथवा स्टेट्स नामक रोग मुख्य रूप से बच्चों में पाया जाता है यह रोग विटामिन डी की कमी के कारण होता है स्थिर विकृति जैसे कि नाम पर ही स्पष्ट है इस रोग में बच्चों की हत्या समान आकार की नहीं रहती इसमें विकार आ जाता है शब्द रूप से 6 बाहर से लेकर 2 वर्ष तक के बच्चों को यह रोग अधिक होता है  विटामिन डी की कमी के का... Read More
कुपोषण जनित एक रोग सूखा रोग भी है इसे अस्थियां भी करती या रिकेट्स भी कहते हैं   अस्थि विकृति अथवा स्टेट्स नामक रोग मुख्य रूप से बच्चों में पाया जाता है यह रोग विटामिन डी की कमी के कारण होता है स्थिर विकृति जैसे कि नाम पर ही स्पष्ट है इस रोग में बच्चों की हत्या समान आकार की नहीं रहती इसमें विकार आ जाता है शब्द रूप से 6 बाहर से लेकर 2 वर्ष तक के बच्चों को यह रोग अधिक होता है  विटामिन डी की कमी के कारण होने वाले इस रोग में अस्थियां कमजोर पड़ने लगती है इसका मुख्य कारण कैल्शियम तथा फास्फोरस है पर्याप्त अवशोषण होता है जब हत्या कमजोर पड़ने लगती है जब वह शरीर का भर नहीं सहन कर पाती है वह या तो झुक जाती है अथवा टेढ़ी होने लगती है इस रोग के कारण शरीर की सबसे दस्तीय क्रमश विकृत होने लगती है सर्वप्रथम इस रोग में शरीर की हड्डी कुछ लंबी बड़ी तथा चपटी होने लगती है तथा वह था आगे की ओर निकला हुआ सा प्रतीत होने लगता है इसके अतिरिक्त शरीर की लंबी हड्डियों के सीरी कुछ बढ़ जाते हैं तथा मोटे हो जाते हैं पसलियां पर हड्डी और उपस्थिति के जोड़ों के स्थान पर गोल उभर दिखाई देने लगता है इसे क्रिकेट रोसरी कहते हैं इसके अतिरिक्त श्रोणि मेखला की हड्डी कुछ संकुचित हो जाती है तथा रीड की हड्डी कुछ झुकी हुई सी प्रतीत होने लगती है क्रिकेटर्स डबोक रोग में घुटने कलाई तथा एडी की अस्थियां सामान्य रूप से अधिक चौड़ी हो जाती है अस्थियों के अतिरिक्त इस रोग का प्रभाव मांसपेशियां पर भी पड़ता है इस रोग में मांसपेशियों कमजोर हो जाती है तथा उनका समुचित विकास नहीं हो पता बच्चों का पेट बढ़ जाता है तथा आगे निकला हुआ तब प्रतीत होता है  क्रिकेटर्स नामक रोग जो कि विटामिन डी की कमी से परिणाम स्वरुप होता है में शारीरिक लक्षणों में अतिरिक्त कुछ सब भागवत परिवर्तन भी देखे जा सकते हैं इस रोग का शिकार हुआ बालक स्वभाव से चिड़चिड़ा सा हो जाता है हर समय थका हुआ परेशान दुखी तथा ऑपरेशन सा रहता है बच्चे को शांत नींद नहीं आती तथा सोते वक्त शरीर बैठा हुआ साफ रहता है कभी-कभी बच्चा सोते-सोते चौक पड़ता है यार होने लगता है रोग अधिक बढ़ जाने पर बच्चों को सांस लेने में भी तकलीफ होती है यह स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है   इस रोग के उपचार के लिए बच्चों के आहार में विटामिन डी युक्त भोज्य पदार्थों का अधिक समावेशन होना चाहिए तथा कैल्सियम वाले भोज्य पदार्थ भी दिए जाने चाहिए चिकित्सक के परावर्ष से विटामिन डी की अतिरिक्त मात्रा दी जाती है बच्चे को कुछ समय के लिए सूर्य के प्रकाश में भी रखना आवश्यक होता है सामान्य सुपाच्य एवं संतुलन आहार देना चाहिए धन्यवाद-
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[email protected] 03 Feb 2026 128 Views

स्कर्वी रोग क्या हैक्या है

स्कर्वी रोग क्या हैक्या है
डिस्कवरी भी एक अभाव जनित रोग है यह रोग बच्चों में भी होता है तथा वयस्कों में भी दोनों प्रकार के रोगों का विवरण निम्न वर्णित है-  बच्चों में स्कर्वी  रोग-  बच्चों में आहार में विटामिन सी की निरंतर कमी बनी रहने में इन्हें इस कवि नामक रोग हो जाता है जैसे-जैसे बच्चों में इस रोग का पर कौन बढ़ता है वैसे-वैसे ही रोग लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं प्रारंभ में बच्चों की भूख घटने लगती है बच्चा बेचैन रहने लगता ह... Read More
डिस्कवरी भी एक अभाव जनित रोग है यह रोग बच्चों में भी होता है तथा वयस्कों में भी दोनों प्रकार के रोगों का विवरण निम्न वर्णित है-  बच्चों में स्कर्वी  रोग-  बच्चों में आहार में विटामिन सी की निरंतर कमी बनी रहने में इन्हें इस कवि नामक रोग हो जाता है जैसे-जैसे बच्चों में इस रोग का पर कौन बढ़ता है वैसे-वैसे ही रोग लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं प्रारंभ में बच्चों की भूख घटने लगती है बच्चा बेचैन रहने लगता है तथा उसकी टांगों और टांगों में सूजन हो जाती है तथा दर्द रहता है स्वभाव में बच्चा चिड़चिड़ा सा रहने लगता है तथा धीरे-धीरे वह वजन भी करने लगता है रक्त की कमी होने लगती है अतः रोगी बच्चे का रंग पीला पड़ने लगता है कभी-कभी बच्चों को दस्त तथा वामन भी होने लगती है इस कवि रोग का प्रभाव धातु एवं मसूड़े पर भी पड़ता है मसूड़े सो जाते हैं तथा उसमें से रक्त भी निकलने लगता है इस कवि का बच्चों की हड्डियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यदि डिस्कवरी का रोग अधिक पुराना हो जाए तथा बढ़ जाए तो बच्चों का शरीर हटा सा रहने लगता है सही समय पर उचित उपचार न होने की स्थिति में बच्चों की मृत्यु भी हो सकती है  वयस्कों में स्कर्वी रोग - ​​​​​​ बड़ों में भी यह रोग का कारण विटामिन सी की कमी ही है इस रोग के कारण प्रारंभ में व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने लगती है तथा वह परेशान सा रहने लगता है इसका प्रभाव मसूड़े पर भी पड़ता है मसूड़े फर बुरे से होने लगते हैं तथा इनमें से रक्त बहने लगता है इसके साथ ही साथ दांत भी ढीले होने लगते हैं तथा गिरने भी लगते हैं इस रोग के कारण ही व्यक्ति के शरीर में विभिन्न उत्तकों से रक्त का स्त्राव भी होने लगता है मांसपेशियों में सूजन लगती है तथा जोड़ों में भी सूजन तथा दर्द होने लगता है यदि कहीं चोट लग जाए तो सामान्य से अधिक रक्त बहता है तथा रक्त का बहाना देर से रुकता है इस रोग के रोग के कारण व्यक्ति को सांस लेने में भी परेशानी होती है  उपचार-  इस रोग के उपचार के लिए विटामिन सी की अतिरिक्त मात्रा देनी होती है यदि किसी बड़े व्यक्ति को यह रोग हो तो प्रारंभ में प्रतिदिन सो मिलीग्राम एक को ब्रेक एसिड का इन ड्राइव मस्कुलर इंजेक्शन एक सप्ताह तक दिया जाता है बच्चों को केवल 50 मिलीग्राम का ही इंजेक्शन दिया जाना चाहिए इसके बाद लगभग एक माह तक बड़ों को 500 मिलीग्राम तथा बच्चों को 100 मिलीग्राम विटामिन सी मुंह में दिया जाना चाहिए इसके अतिरिक्त आहार में ताजे फल जैसे संतरा अमरूदम पपीता ना ना शादी तथा हरी सब्जियां देनी चाहिए धन्यवाद-
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[email protected] 03 Feb 2026 136 Views

एनीमिया रोग क्या है

एनीमिया रोग क्या है
 "मैं आज आपको एनीमिया के बारे में बताऊंगी"  यह रोग किस प्रकार होता है  एनीमिया रोग- साप्ताहिक अर्थ के अनुसार शरीर में सामान्य से कम रक्त होना ही एनीमिया है परंतु शरीर विज्ञान के स्पष्टीकरण के अनुसार रक्त में हीमोग्लोबिन का सामान्य से कम होना ही रखताल पता इस स्पष्टीकरण के अनुसार यदि व्यक्ति के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 14 मिलीग्राम प्रतिशो मिली रक्त से कम होती है तो व्यक्ति को रक्ताल पता का शि... Read More
 "मैं आज आपको एनीमिया के बारे में बताऊंगी"  यह रोग किस प्रकार होता है  एनीमिया रोग- साप्ताहिक अर्थ के अनुसार शरीर में सामान्य से कम रक्त होना ही एनीमिया है परंतु शरीर विज्ञान के स्पष्टीकरण के अनुसार रक्त में हीमोग्लोबिन का सामान्य से कम होना ही रखताल पता इस स्पष्टीकरण के अनुसार यदि व्यक्ति के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 14 मिलीग्राम प्रतिशो मिली रक्त से कम होती है तो व्यक्ति को रक्ताल पता का शिकार माना जाता है हिमोग्लोबिन रक्त के लाल कणों में पाया जाता है अतः यदि शरीर में लाल रक्त कण होते हैं तो हीमोग्लोबिन का स्तर भी निम्न हो जाता है एनीमिया की अवस्था में शरीर की कोशिका को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती तथा व्यक्ति छेद होने लगता है एनीमिया की अवस्था में जो शारीरिक लक्षण प्रकट होते हैं उनमें से मुख्य है सर दर्द भूख की कमी अपच विश्वास में परेशानी त्वचा का पीला होना तथा हृदय की धड़कन का बढ़ जाना   सामान्य रूप से एनीमिया के दो प्रमुख कारण है   शरीर में लोह खनिज की कमी  तथा विटामिन बी 12 की कमी इस प्रकार यह रोग भी पोषक तत्वों की कमी के कारण होने वाला एक रोग है  धन्यवाद-
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[email protected] 03 Feb 2026 121 Views

हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं

हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं
" हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं "  "कुछ दुर्घटनाएं निम्नलिखित प्रकार से है "  आंख में किसी चीज का गिर जाना-  अक्सर किसी कारण बस ढुल आदि के कारण आंख में गिर जाते हैं अतः यदि कोई वस्तु पलक पर गिर गई है तो कोई साफ मुलायम कपड़ा लेकर किनारे से थोड़ा सा भिगोकर आज को साफ करना चाहिए क्लास में पानी भरकर आंख खोलने चाहिए आंखों में गुलाब जल डालना चाहिए जिससे आपकी आंखें स्वच्छ हो जाए और कोई जलन ना हो ... Read More
" हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं "  "कुछ दुर्घटनाएं निम्नलिखित प्रकार से है "  आंख में किसी चीज का गिर जाना-  अक्सर किसी कारण बस ढुल आदि के कारण आंख में गिर जाते हैं अतः यदि कोई वस्तु पलक पर गिर गई है तो कोई साफ मुलायम कपड़ा लेकर किनारे से थोड़ा सा भिगोकर आज को साफ करना चाहिए क्लास में पानी भरकर आंख खोलने चाहिए आंखों में गुलाब जल डालना चाहिए जिससे आपकी आंखें स्वच्छ हो जाए और कोई जलन ना हो   नाक में कुछ अटकना -  कभी-कभी छोटे बच्चे खेल-खेल में नाक में कोई वस्तु डाल लेते हैं इसे निकालने के लिए सबसे पहले दूसरी तरफ की नाक को दबाया रोगी को स्वास्थ्य मुंह से लेनी चाहिए ठीक है दिलाना चाहिए जिस वस्तु झटके से बाहर निकल आती है  कान में कुछ चला जाना-  कान में कट मच्छर या कुछ चले जाने पर सरसों के तेल को गर्म करके ठंडा कर दे तथा कान में डाल ले और धीरे से पलट ले से आसानी से गेट निकल जाएगा  तालुवे में कुछ अटक जाना-  पर यह छोटे बच्चे मुंह में किसी भी वस्तु को डाल लेते हैं जो उनके मुंह में अटक जाती है ऐसा होने पर बच्चों का सिर नीचे की ओर करके कर ली तथा पीठ पर थपथपाना चाहिए   मुछरा आना -  सर पर चोट लगने या किसी अत्यंत दुखद घटना से घटित होने से पहले व्यक्ति मुचिछत हो जाता है इसमें मस्तिष्क अपना कार्य बंद कर देता है सांस नदी और हृदय की धड़कन की गति कम हो जाती है  ऐसी अवस्था में व्यक्ति को खुले स्थान पर लेट कर उसके मुंह पर पानी के चीते थे और उसकी हवा करें उसके आसपास भीड़ एकत्रित नहीं होने देना चाहिए शरद ऋतु में उसे घर में पहुंचने चाहिए और आवश्यकता अनुसार कृत्रिम स्वास्थ्य देनी चाहिए उसे खाने पीने को कुछ नहीं देना चाहिए अधिक देर तक मुजरा ना जाने पर डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए  धन्यवाद:-    
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[email protected] 03 Feb 2026 129 Views