पर्यावरण प्रदूषण का जन जीवन पर प्रभाव:-
पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न पक्षों का सामान्य परिचय हम प्राप्त कर चुके हैं संपर्क में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका प्रतिकूल प्रभावजन जीवन के प्रत्येक पक्ष पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रभावजन स्वास्थ्य पर पड़ता है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप विभिन्न साधारण गंभीर तथा अति गंभीर रोग पनपन लगते हैं पर्यावरण प्रदूषण का अप्रत्यक्ष रूप में प्रतिकूल प्रभावजन साधारण के आर्थिक जीवन पर भी पड़ता है रोगों की वृद्धि तथा स्वास्थ्य के निम्न स्तर के कारण जनसाधारण की उत्पादक क्षमता घटती है तथा रोग निवारण के लिए अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ता है इससे जनसाधारण का जीवन आर्थिक संकट का शिकार हो जाता है जन्म जीवन पर पर्यावरण प्रदूषण से पढ़ने वाले प्रभाव का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है
जल स्वास्थ्य पर प्रभाव-
पर्यावरण प्रदूषण का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव जन स्वास्थ्य पर पड़ता है जैसे-जैसे पर्यावरण का अधिक प्रदूषण होने लगता है वैसे-वैसे प्रदूषण जनित रोगों की दर एवं वीरता में वृद्धि होने लगती है पर्यावरण के विभिन्न पक्षों में होने वाले प्रदूषण से भिन्न-भिन्न प्रकार के रोग बढ़ाते हैं उदाहरण के लिए वायु प्रदूषण के परिणाम स्वरुप शोषण तंत्र से संबंधित रोग तथा जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप पाचन तंत्र संबंधित रोग अधिक फैलते हैं ध्वनि प्रदूषण भी तंत्रिका तंत्र हृदय एवं विकारों को जन्म देता है तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहारगत समानता को भी विकृत कर देता है अन्य प्रकार के प्रदूषण विजन सामान्य को विभिन्न सामान्य एवं गंभीर रोगों का शिकार बनाते हैं संक्षेप में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण अनिवार्य रूप से जन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है प्रदूषण पर्यावरण में रहने वाले व्यक्तियों की औसत आयु भी करती है तथा स्वास्थ्य का स्तर भी सामान्य निम्न ही रहता है
व्यक्तिगत कार्य क्षमता पर प्रभाव-
व्यक्ति एवं समाज की प्रगति में संबंधित व्यक्तियों की कार्य क्षमता का विशेष महत्व होता है यदि व्यक्ति की कार्य क्षमता सामान्य या सामान्य से अधिक हो तो वह निश्चित रूप से प्रगति के मार्ग पर ए घर्षण होता है पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की कार्य क्षमता निश्चित रूप से घटित है तथा जन स्वास्थ्य का स्तर निम्न होता है निम्न स्वास्थ्य स्टार वाला व्यक्ति ना तो अपने कार्य को कुशलता पूर्वक कर सकता है और ना उसकी उत्पादन क्षमता की सामान्य रह पाती है यह दोनों ही स्थितियां व्यक्ति एवं समाज के लिए हानिकारक सिद्ध होती है वास्तव में प्रदूषित वातावरण में ही व्यक्ति अस्वस्थ ना भी हो तो भी उसकी चुस्ती एवं इस फुर्ती तो घाट ही जाती है
आर्थिक जीवन पर प्रभाव-
व्यक्ति समाज तथा राष्ट्र की आर्थिक स्थिति पर भी पर्यावरण प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की उत्पादन क्षमता घट जाती है यदि व्यक्ति का सामान स्वास्थ्य का स्तर निम्न होगा तथा उसकी कार्य क्षमता भी कम होगी तो वह अपनी आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए समुचित धन कदापि अर्जित नहीं कर पाएगा इस स्थिति में यदि व्यक्ति अथवा उसके परिवार का कोई सदस्य प्रदूषण का शिकार होकर के निसाधारण या गंभीर रोगों से ग्रस्त रहता है तो उसके उपचार पर भी अधिक व्यय करना पड़ सकता है इससे परिवार का आर्थिक बजट बिगड़ जाता है तथा आर्थिक स्थिति निम्न हो जाती है अतः कह सकते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति प्रत्यक्ष एवं परोक्ष दोनों ही रूपों मैं प्रभावित होती है इस कारक के प्रबल तथा विस्तृत हो जाने पर समाज एवं राष्ट्र की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है
उपयुक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि पर्यावरण प्रदूषण का जनजीवन पर बहुपक्षीय गंभीर तथा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यही कारण है कि पर्यावरण प्रदूषण को आज गंभीरतम राष्ट्रीय समस्या माना जाने लगा है
धन्यवाद*
Vanshika
@DigitalDiaryWefru