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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
Digital Diary Submit Post Vanshika

सफलता का असली रहस्य

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में राहुल नाम का एक लड़का रहता था। राहुल बहुत मेहनती था, लेकिन वह जो भी काम शुरू करता, उसमें उसे असफलता ही हाथ लगती थी। लगातार मिल रही असफलताओं से तंग आकर उसने गाँव के एक बुद्धिमान साधु से मिलने का फैसला किया। राहुल साधु के पास पहुँचा और अपनी समस्या बताई, "महाराज, मैं बहुत मेहनत करता हूँ, फिर भी मुझे सफलता क्यों नहीं मिलती? सफलता का असली रहस्य क्या है?" साधु मुस्क... Read More
एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में राहुल नाम का एक लड़का रहता था। राहुल बहुत मेहनती था, लेकिन वह जो भी काम शुरू करता, उसमें उसे असफलता ही हाथ लगती थी। लगातार मिल रही असफलताओं से तंग आकर उसने गाँव के एक बुद्धिमान साधु से मिलने का फैसला किया। राहुल साधु के पास पहुँचा और अपनी समस्या बताई, "महाराज, मैं बहुत मेहनत करता हूँ, फिर भी मुझे सफलता क्यों नहीं मिलती? सफलता का असली रहस्य क्या है?" साधु मुस्कुराए और बोले, "इसका जवाब तुम्हें कल सुबह नदी के किनारे मिलेगा।" अगली सुबह राहुल नदी के किनारे पहुँचा। साधु ने राहुल से कहा, "चलो, मेरे साथ नदी के अंदर चलो।" दोनों पानी में आगे बढ़ने लगे। जब पानी राहुल के गले तक पहुँच गया, तो अचानक साधु ने राहुल का सिर पकड़कर पानी के अंदर डुबो दिया। राहुल पानी से बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगा। उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन साधु बलवान थे। जब राहुल का शरीर नीला पड़ने लगा, तब साधु ने उसका सिर पानी से बाहर निकाला। राहुल ने हांफते हुए तेजी से एक गहरी सांस ली। साधु ने पूछा, "जब तुम पानी के अंदर थे, तो तुम्हें सबसे ज्यादा किस चीज की जरूरत महसूस हो रही थी?" राहुल ने उत्तर दिया, "सिर्फ हवा (सांस) की!" साधु ने मुस्कुराते हुए कहा, "यही सफलता का असली रहस्य है। जब तुम सफलता को उतनी ही शिद्दत और बेताबी से चाहोगे जितना कि तुम पानी के अंदर हवा को चाह रहे थे, तो सफलता तुम्हें निश्चित रूप से मिल जाएगी।" राहुल को अपनी गलती समझ आ गई थी कि उसकी मेहनत में उस तीव्र इच्छाशक्ति की कमी थी। उस दिन के बाद से उसने पूरे समर्पण के साथ काम करना शुरू किया और अंततः सफल हुआ।
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[email protected] 01 Oct 2026 42 Views

रोटी का टुकड़ा और बंदर का इंसाफ़: बच्चों के लिए एक मज़ेदार कहानी

रोटी का टुकड़ा और बंदर का इंसाफ़: बच्चों के लिए एक मज़ेदार कहानी
दो बिल्लियां और बंदर का इंसाफ़ (बंदर और बिल्ली की कहानी)   रोटी का टुकड़ा और बिल्लियों का झगड़ा एक बार की बात है, एक सुंदर गाँव में सोनू और मोनू नाम की दो बिल्लियां रहती थीं। दोनों आपस में बहुत अच्छी दोस्त थीं। एक दिन उन्हें कहीं से एक स्वादिष्ट और ताज़ा रोटी का टुकड़ा मिला। रोटी देखकर दोनों के मुँह में पानी आ गया। सोनू बोली, "इसे पहले मैंने देखा है, इसलिए पूरी रोटी मेरी है।" मोनू ने कहा, "लेकिन इ... Read More
दो बिल्लियां और बंदर का इंसाफ़ (बंदर और बिल्ली की कहानी)   रोटी का टुकड़ा और बिल्लियों का झगड़ा एक बार की बात है, एक सुंदर गाँव में सोनू और मोनू नाम की दो बिल्लियां रहती थीं। दोनों आपस में बहुत अच्छी दोस्त थीं। एक दिन उन्हें कहीं से एक स्वादिष्ट और ताज़ा रोटी का टुकड़ा मिला। रोटी देखकर दोनों के मुँह में पानी आ गया। सोनू बोली, "इसे पहले मैंने देखा है, इसलिए पूरी रोटी मेरी है।" मोनू ने कहा, "लेकिन इसे मुँह से मैंने उठाया है, इसलिए इस पर मेरा हक़ है।"   बंदर की चालाकी और तराजू का खेल दोनों रोटी के लिए आपस में लड़ने लगीं। तभी पेड़ पर बैठा एक चालाक कालू बंदर उन्हें देख रहा था। उसने सोचा कि क्यों न इन दोनों की लड़ाई का फ़ायदा उठाया जाए। वह पेड़ से नीचे उतरा और बड़े प्यार से बोला, "तुम दोनों इतनी अच्छी सहेलियां होकर क्यों लड़ रही हो? लाओ, मैं तुम दोनों के बीच इस रोटी का बराबर-बराबर बँटवारा कर देता हूँ।" बिल्लियां उसकी बातों में आ गईं और रोटी बंदर को दे दी।   बराबर करने का बहाना बंदर कहीं से एक तराजू लेकर आया। उसने रोटी के दो टुकड़े किए और तराजू के दोनों पलड़ों पर एक-एक टुकड़ा रख दिया। एक टुकड़ा थोड़ा बड़ा था, तो उस तरफ का पलड़ा नीचे झुक गया। बंदर ने कहा, "ओहो! यह टुकड़ा तो थोड़ा भारी है। रुको, मैं इसे खाकर दूसरे के बराबर कर देता हूँ।" यह कहकर उसने भारी टुकड़े में से एक बड़ा हिस्सा तोड़कर खा लिया।   सारी रोटी ख़त्म ऐसा करने से अब दूसरा पलड़ा भारी हो गया। बंदर ने मुस्कुराते हुए कहा, "अब यह भारी हो गया, चलो इसे भी बराबर कर देता हूँ।" इस तरह बंदर बार-बार 'बराबर' करने के बहाने हर बार रोटी का एक हिस्सा खुद खाता गया। बिल्लियां चुपचाप खड़ी होकर अपनी रोटी को छोटा होते देखती रहीं। अंत में, तराजू पर रोटी का सिर्फ एक छोटा सा टुकड़ा बचा।   बिल्लियों का पछतावा सोनू और मोनू समझ गईं कि बंदर उन्हें बेवकूफ़ बना रहा है। उन्होंने डरते-डरते कहा, "बंदर भाई, अब आप रहने दीजिए। जो बचा है, वही हमें दे दो, हम खुद बाँट लेंगी।" लेकिन बंदर बहुत चालाक था, उसने कहा, "यह आखिरी टुकड़ा तो मेरी मेहनत का फल (इंसाफ़ करने की फ़ीस) है!" यह कहकर उसने वह आखिरी टुकड़ा भी अपने मुँह में डाल लिया और पेड़ पर कूद गया। दोनों बिल्लियां हाथ मलती रह गईं।   कहानी से सीख (Moral of the Story) इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि "जब दो लोग आपस में लड़ते हैं, तो हमेशा किसी तीसरे को फ़ायदा होता है।" इसलिए हमें अपने आपसी विवादों को हमेशा खुद ही मिल-बैठकर सुलझा लेना चाहिए, न कि किसी बाहरी इंसान को बीच में लाना चाहिए।    
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[email protected] 25 Sep 2026 103 Views

घमंडी खरगोश और समझदार कछुआ की अमर कहानी

घमंडी खरगोश और समझदार कछुआ की अमर कहानी
खरगोश और कछुए की दौड़ (कछुआ और खरगोश की कहानी)   एक जंगल की बात एक सुंदर जंगल में एक खरगोश और एक कछुआ रहते थे। खरगोश को अपनी तेज़ रफ़्तार पर बहुत घमंड था। वह जब भी कछुए को देखता, उसकी धीमी चाल का मज़ाक उड़ाता था। कछुआ उसकी बातों से परेशान हो जाता था, लेकिन वह चुप रहता था।   दौड़ की चुनौती एक दिन, खरगोश के रोज़-रोज़ के मज़ाक से तंग आकर कछुए ने कहा, "क्यों न हम दोनों के बीच एक दौड़ हो जाए? इससे साफ़... Read More
खरगोश और कछुए की दौड़ (कछुआ और खरगोश की कहानी)   एक जंगल की बात एक सुंदर जंगल में एक खरगोश और एक कछुआ रहते थे। खरगोश को अपनी तेज़ रफ़्तार पर बहुत घमंड था। वह जब भी कछुए को देखता, उसकी धीमी चाल का मज़ाक उड़ाता था। कछुआ उसकी बातों से परेशान हो जाता था, लेकिन वह चुप रहता था।   दौड़ की चुनौती एक दिन, खरगोश के रोज़-रोज़ के मज़ाक से तंग आकर कछुए ने कहा, "क्यों न हम दोनों के बीच एक दौड़ हो जाए? इससे साफ़ हो जाएगा कि हममें से कौन तेज़है।" खरगोश ने हँसते हुए चुनौती स्वीकार कर ली। उन्होंने जंगल के दूसरे छोर पर मौजूद एक बड़े बरगद के पेड़ को अपनी मंज़िल तय किया।   दौड़ की शुरुआत अगले दिन दौड़ शुरू हुई। खरगोश पलक झपकते ही बहुत आगे निकल गया और कछुआ अपनी धीमी चाल से धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। कुछ ही समय में खरगोश मंज़िल के बेहद करीब पहुँच गया। उसने पीछे मुड़कर देखा तो कछुआ कहीं नज़र नहीं आ रहा था।   खरगोश का घमंड और नींद खरगोश ने सोचा, "कछुए को यहाँ तक पहुँचने में अभी घंटों लगेंगे। क्यों न मैं इस ठंडी छाँव में थोड़ी देर आराम कर लूँ?" यह सोचकर वह एक पेड़ के नीचे लेट गया। ठंडी हवा के कारण खरगोश की आँख लग गई और वह गहरी नींद में सो गया।   कछुए की अटूट लगन और जीत दूसरी ओर, कछुआ बिना रुके, बिना थके लगातार अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ता रहा। वह चुपचाप सोए हुए खरगोश के पास से गुज़र गया और बरगद के पेड़ के पास पहुँच गया। जब खरगोश की नींद खुली, तो उसने देखा कि सूरज ढलने वाला था। वह तेज़ी से मंज़िल की ओर भागा, लेकिन तब तक कछुआ दौड़ जीत चुका था। खरगोश का घमंड पूरी तरह टूट गया।   कहानी से सीख (Moral of the Story) इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि "धीमी और निरंतर चाल से ही दौड़ जीती जाती है" (Slow and steady wins the race)। हमें कभी भी अपनी काबिलियत पर घमंड नहीं करना चाहिए और अपने लक्ष्य को पाने के लिए बिना रुके लगातार मेहनत करते रहना चाहिए।    
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[email protected] 25 Sep 2026 101 Views

ईमानदार लकड़हारे की कहानी: लालच का त्याग और ईमानदारी का अनोखा इनाम

ईमानदार लकड़हारे की कहानी: लालच का त्याग और ईमानदारी का अनोखा इनाम
ईमानदार लकड़हारे की कहानी: ईमानदारी का सबसे बड़ा इनाम बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज़ जंगल जाता, पेड़ से सूखी लकड़ियाँ काटता और उन्हें बाज़ार में बेचकर अपना गुज़ारा करता था। वह बहुत ही ईमानदार और मेहनती था।   नदी में गिरी कुल्हाड़ी एक दिन, रामू एक नदी के किनारे लगे पेड़ की डालियाँ काट रहा था। अचानक उसका हाथ फिसला और उसकी लोहे की कुल्हाड़ी सीधे गहर... Read More
ईमानदार लकड़हारे की कहानी: ईमानदारी का सबसे बड़ा इनाम बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज़ जंगल जाता, पेड़ से सूखी लकड़ियाँ काटता और उन्हें बाज़ार में बेचकर अपना गुज़ारा करता था। वह बहुत ही ईमानदार और मेहनती था।   नदी में गिरी कुल्हाड़ी एक दिन, रामू एक नदी के किनारे लगे पेड़ की डालियाँ काट रहा था। अचानक उसका हाथ फिसला और उसकी लोहे की कुल्हाड़ी सीधे गहरे पानी में जा गिरी। कुल्हाड़ी पानी में डूब गई। रामू के पास केवल वही एक कुल्हाड़ी थी, जिससे वह अपनी रोज़ी-रोटी कमाता था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह अब क्या करे। वह नदी के किनारे बैठकर फूट-फूट कर रोने लगा।   जल देवता का आना लकड़हारे के रोने की आवाज़ सुनकर नदी में से जल देवता प्रकट हुए। जल देवता ने उससे पूछा, "पुत्र, तुम क्यों रो रहे हो? क्या बात है?" रामू ने रोते हुए कहा, "भगवन! मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है। अब मैं लकड़ियाँ कैसे काटूँगा और अपने परिवार का पेट कैसे पालूँगा?" जल देवता को उस पर दया आ गई। उन्होंने नदी के गहरे पानी में डुबकी लगाई और एक सोने की चमचमाती कुल्हाड़ी लेकर बाहर आए। उन्होंने रामू से पूछा, "क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?" रामू ने ईमानदारी से सिर हिलाया और कहा, "नहीं भगवन, यह सोने की कुल्हाड़ी मेरी नहीं है।" जल देवता ने दोबारा पानी में डुबकी लगाई। इस बार वे एक चांदी की सुंदर कुल्हाड़ी लेकर बाहर आए। उन्होंने पूछा, "तो क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?" रामू ने फिर कहा, "नहीं महाराज, यह चांदी की कुल्हाड़ी भी मेरी नहीं है। मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की थी।" जल देवता रामू की सच्चाई देखकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने तीसरी बार डुबकी लगाई और इस बार वे रामू की पुरानी लोहे की कुल्हाड़ी निकाल लाए। अपनी कुल्हाड़ी देखकर रामू खुशी से उछल पड़ा और बोला, "हाँ भगवन! यही मेरी कुल्हाड़ी है! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।"   ईमानदारी का फल जल देवता रामू की इस निष्ठा और ईमानदारी से बेहद खुश हुए। उन्होंने रामू से कहा, "तुम बहुत सच्चे और ईमानदार इंसान हो। तुमने लालच में आकर सोने या चांदी की कुल्हाड़ी नहीं ली।" इनाम के रूप में जल देवता ने लोहे की कुल्हाड़ी के साथ-साथ वह सोने और चांदी की कुल्हाड़ी भी रामू को भेंट में दे दी। रामू तीनों कुल्हाड़ियाँ लेकर खुशी-खुशी अपने घर लौटा। अब उसकी गरीबी दूर हो चुकी थी और वह अपनी ईमानदारी के कारण पूरे गाँव में आदर और सम्मान के साथ रहने लगा।   कहानी से सीख (Moral of the Story) इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है (Honesty is the best policy)। लालच में आकर कभी अपना ईमान नहीं खोना चाहिए, क्योंकि ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।    
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[email protected] 25 Sep 2026 124 Views

रोज नियम से है जो पड़ता

रोज नियम से है जो पड़ता
रोज नियम से जो पड़ता पढ़ने में जो बात ना करता पुस्तक पर वह कर चढ़ता पढ़ने में गाना नहीं गाता  नहीं करता वह काम अधूरा रखता वह हर काम को पूरा करता नहीं आज को वह कल कक्षा में आता वह अव्वल   धन्यवाद Read More
रोज नियम से जो पड़ता पढ़ने में जो बात ना करता पुस्तक पर वह कर चढ़ता पढ़ने में गाना नहीं गाता  नहीं करता वह काम अधूरा रखता वह हर काम को पूरा करता नहीं आज को वह कल कक्षा में आता वह अव्वल   धन्यवाद
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[email protected] 31 Aug 2026 98 Views

रहे हमेशा जो मुस्कुराता है

रहे हमेशा जो मुस्कुराता है
 रहे हमेशा जो मुस्कुराता   रहे हमेशा जो मुस्कुराता गीत खुशी के जो वह गाता रोने का जो नाम न लेता  सदा खुशी से उत्तर देता   औरों को वह नहीं चीढ़ाता   मुंह अपना  कभी नहीं बनाता  सचमुच ही वह बहुत भला है अच्छे घर में वह पल है   धन्यवाद Read More
 रहे हमेशा जो मुस्कुराता   रहे हमेशा जो मुस्कुराता गीत खुशी के जो वह गाता रोने का जो नाम न लेता  सदा खुशी से उत्तर देता   औरों को वह नहीं चीढ़ाता   मुंह अपना  कभी नहीं बनाता  सचमुच ही वह बहुत भला है अच्छे घर में वह पल है   धन्यवाद
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[email protected] 31 Aug 2026 132 Views

रोज नियम से कसरत करता

रोज नियम से कसरत करता
 रोज नियम से कसरत करता  रोज नियम से कसरत करता पैदल चलने से नहीं डरता दौड़ में रहता सबसे आगे सबसे पहले प्राप्त जागे.  होता जो तैयार समय से   डरता नहीं किसी भी भय से, हैं वह ऊंचे संस्कार कर   है अधिकारी वही प्यार  का  Read More
 रोज नियम से कसरत करता  रोज नियम से कसरत करता पैदल चलने से नहीं डरता दौड़ में रहता सबसे आगे सबसे पहले प्राप्त जागे.  होता जो तैयार समय से   डरता नहीं किसी भी भय से, हैं वह ऊंचे संस्कार कर   है अधिकारी वही प्यार  का 
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[email protected] 31 Aug 2026 135 Views

रोज नहाता है जो बच्चा

 रोज नहाता है जो बच्चा  रोज नहाता है जो बच्चा लगता है वह सबको अच्छा  पानी से नहीं कतराता है  साबुन भी जो लगवाता है   मल - मल अंग साफ करता जो गंदा नहीं कभी रहता वो   यह आदत उसकी प्यारी है माता उसे पर बलिहारी है  धन्यवाद✍️ Read More
 रोज नहाता है जो बच्चा  रोज नहाता है जो बच्चा लगता है वह सबको अच्छा  पानी से नहीं कतराता है  साबुन भी जो लगवाता है   मल - मल अंग साफ करता जो गंदा नहीं कभी रहता वो   यह आदत उसकी प्यारी है माता उसे पर बलिहारी है  धन्यवाद✍️
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[email protected] 31 Aug 2026 125 Views

झगड़ा जो बालक करता है

 झगड़ा जो बालक करता है  झगड़ा जो बालक करता है   हरदम जो सबसे लड़ता है  है वह सचमुच गंदा बच्चा  लगता नहीं किसी को अच्छा  करता है बदनाम पिता को  माता को दुख पहुंचता है  दूर सभी उसे रहते हैं  प्यार किसी से नहीं पता है Read More
 झगड़ा जो बालक करता है  झगड़ा जो बालक करता है   हरदम जो सबसे लड़ता है  है वह सचमुच गंदा बच्चा  लगता नहीं किसी को अच्छा  करता है बदनाम पिता को  माता को दुख पहुंचता है  दूर सभी उसे रहते हैं  प्यार किसी से नहीं पता है
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[email protected] 23 Aug 2026 109 Views

छुप छुप कर वह मिट्टी खाता है

 छिप-छिपकर मिट्टी वह खाता है   छिप-छिपकर वह मिट्टी खाता  गंदा होकर घर में आता  हाथ नहीं धोता घर जाकर  करता नहीं कुला वह खाकर   वह सचमुच ही गंदा बच्चा  लगता नहीं तनिक भी अच्छा  कामना अच्छे कर पाएगा  असफल ही वह रह जाएगा Read More
 छिप-छिपकर मिट्टी वह खाता है   छिप-छिपकर वह मिट्टी खाता  गंदा होकर घर में आता  हाथ नहीं धोता घर जाकर  करता नहीं कुला वह खाकर   वह सचमुच ही गंदा बच्चा  लगता नहीं तनिक भी अच्छा  कामना अच्छे कर पाएगा  असफल ही वह रह जाएगा
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[email protected] 23 Aug 2026 127 Views