पारी खेलने कूदने फिसलने आदि से हड्डियों की संध्या खुल जाती है उसे वह जाना कहते हैं मौत का स्थान सोचकर दर्द करता है मोच वाले अंग को सर्दी के मौसम में गुनगुना नमक मिले पानी में कुछ देर रखने से मोच काफी ठीक हो जाती है गर्मी के मौसम में ठंडा पानी आराम देता है मोच वाले अंग को मसाला नहीं चाहिए मोच आने के पश्चात रोगी को हल्दी मिलाकर गर्म दूध पिलाना चाहिए इसके रक्त संचार बढ़ता है और दर्द कम होता है
हड्डी का टूटना -
छठ अथवा किसी ऊंचे पेड़ से गिरने पर खेल कूद में गिर जाने पर लाठी आई के लगने पर व्यक्ति की कोई हड्डी टूट सकती है हड्डी टूटने का स्थान सूख जाता है और उसमें दिए दर्द होता है ऐसी अवस्था में यदि रक्तस्राव रोकना चाहिए उसे अंग को बिना हिलाए व्यक्ति को आराम से लेट देना चाहिए हो सके तो व्यक्ति जहां गिरा हो वहीं पर उसे प्राथमिक चिकित्सा देते समय रेप कार्ड का प्रयोग करना चाहिए हड्डी टूटे हुए अंग के नीचे हल्की लकड़ी या तकदी या के बच्चा रखकर उसे भले भांति बांध देना चाहिए शरद ऋतु में रोगी को गर्म रखने का प्रयास करना चाहिए
धन्यवाद-
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