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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

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गोल्ड लोन क्या है


 गोल्ड लोन क्या है-  मुथूट फाइनेंस बजाज फाइनेंस के पास गिरवी रखकर तुरंत नकद राशि प्राप्त की जा सकती है सोने की शुद्धता का वजन के आधार पर वैल्यू का 75% से 90% तक लोन एलटीवी मिल जाता है यह व्यक्तिगत शरण की तुलना के कम ब्याज दर और निरंतर दस्तावेज के साथ उपलब्ध है  गोल्ड लोन की मुख्य विशेषताएं  ब्याज दर - आमतौर पर 10% से 16 परसेंट सालाना के बीच लेकिन यह शरण डाटा के आधार पर काम... Read More

 गोल्ड लोन क्या है-

 मुथूट फाइनेंस बजाज फाइनेंस के पास गिरवी रखकर तुरंत नकद राशि प्राप्त की जा सकती है सोने की शुद्धता का वजन के आधार पर वैल्यू का 75% से 90% तक लोन एलटीवी मिल जाता है यह व्यक्तिगत शरण की तुलना के कम ब्याज दर और निरंतर दस्तावेज के साथ उपलब्ध है

 गोल्ड लोन की मुख्य विशेषताएं

 ब्याज दर - आमतौर पर 10% से 16 परसेंट सालाना के बीच लेकिन यह शरण डाटा के आधार पर काम या ज्यादा हो सकती है

 अवधि- आमतौर पर 6 महीने से 12 महीने या अधिक 

 पात्रता- 18 से 75 वर्ष की आयु सोने के आभूषणों का वेद मालिक 

 दस्तावेज- आधार कार्ड पैन कार्ड पत्ते का प्रमाण केवाईसी दस्तावेज

 सुरक्षा- गिरवी रखा गया सोना बैंक की सुरक्षित तिजोरी में रहता है

 गोल्ड लोन कैसे काम करता है

 मूल्यांकन- बैंक आपके सोने की शुद्धता और वजन की जांच करता है

 लोन राशि- वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार 75 से 90% तक की राशि मंजूर की जाती है

 वितरण- स्वीकृति के बाद धन सीधे बैंक खाते में या नगद में मिल जाता है

 पूर्ण भुगतान - इसमें एमी या बुलेट फोन भुगतान अवधि के अंत में एक साथ ब्याज व मूलधन जैसे विकल्प होते हैं

 सावधानी- यदि समय पर ऋण नहीं चुकाया जाता है तो बैंक एनबीएफसी सोने सोनी को बेच कर लोन राशि वसूल कर सकते हैं 

धन्यवाद


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आएइ जाने हेल्थकेयर क्या है


 हेल्थ केयर क्या है  हेल्थ केयर स्वास्थ्य सेवा बीमारी की रोकथाम निदान उपचार और प्रबंधन के लिए दिए जाने वाले चिकित्सा सेवाओं पैसे वालों और संस्थाओं की एक प्रणाली है इसमें अस्पताल डॉक्टर दवाइयां और मेडिकल तकनीकी शामिल है यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्राथमिक माध्यमिक और तृतीय स्तर पर कार्य करती है  स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के मुख्य पहलू  सेक्टर के प्रकार -&nbs... Read More

 हेल्थ केयर क्या है

 हेल्थ केयर स्वास्थ्य सेवा बीमारी की रोकथाम निदान उपचार और प्रबंधन के लिए दिए जाने वाले चिकित्सा सेवाओं पैसे वालों और संस्थाओं की एक प्रणाली है इसमें अस्पताल डॉक्टर दवाइयां और मेडिकल तकनीकी शामिल है यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्राथमिक माध्यमिक और तृतीय स्तर पर कार्य करती है

 स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के मुख्य पहलू

 सेक्टर के प्रकार - स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सार्वजनिक सरकार और निजी क्षेत्र दोनों शामिल है जो मिलकर सेवाएं प्रदान करते हैं

 स्तर-

 प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल:- जैसे उपकेंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र PHCs या आयुष्मान आरोग्य मंदिर

 माध्यमिक देखभाल :- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र CHCs और छोटे उप जिला अस्पताल

    प्रमुख घटक- इसमें फार्मेसी आर्टिकल दवाई बायोटेक्नोलॉजी मेडिकल डिवाइस निर्माता और अस्पताल शामिल है

 भारत में प्रमुख सरकारी पहल- आयुष्मान भारत के तहत गरीब परिवारों को स्वास्थ बीमा और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के माध्यम से व्यापक स्वास्थ्य सेवा मात्रा एवं शिशु स्वास्थ्य प्रदान की जा रही है

 टेलीमेडिसिन - आजकल तकनीकी के उपयोग से घर बैठे डॉक्टर से परामर्श की सुविधा भी बढ़ रही है

 हेल्थ केयर सिर्फ बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए निवारक उपायों पर भी जोड़ देता है 


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आइए जाने की होम लोन क्या है


 होम लोन क्या है  होम लोन मुख्य रूप से बिना अपनी सारी जमा पूंजी एक साथ खर्च के सपनों का घर खरीदने बनाने या नवीनीकरण के लिए लिया जाता है यह लंबी अवधि 30 लाख तक के लिए कम ब्याज दरों पर बड़ी राशि उपलब्ध कराता है जिससे मानसिक किस्तों (EMI) का बोझ कम रहता है और आयकर (income tax) में भी बचत होती है  होम लोन लेने के मुख्य कारण और फायदे  आसमान वृत्तीय प्रबंधन - घर खरीदने के लिए बड... Read More

 होम लोन क्या है

 होम लोन मुख्य रूप से बिना अपनी सारी जमा पूंजी एक साथ खर्च के सपनों का घर खरीदने बनाने या नवीनीकरण के लिए लिया जाता है यह लंबी अवधि 30 लाख तक के लिए कम ब्याज दरों पर बड़ी राशि उपलब्ध कराता है जिससे मानसिक किस्तों (EMI) का बोझ कम रहता है और आयकर (income tax) में भी बचत होती है

 होम लोन लेने के मुख्य कारण और फायदे

 आसमान वृत्तीय प्रबंधन - घर खरीदने के लिए बड़ी रकम एक साथ देने के बजाय आप इस छोटी-छोटी आसान किस्तों में चुका सकते हैं

 टैक्स में छूट- आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत मूलधन और धारा 24 के तहत ब्याज भुगतान पर आयकर में कटौती का लाभ मिलता है 

 संपत्ति का स्वामित्व- किराए पर रहने के बजाय आप अपनी खुद की संपत्ति बनाते हैं जिसका मूल्य समय के साथ बढ़ता है

 लंबी अवधि - लोन चुकाने के लिए 30 साल तक का समय मिलता है जिससे मानसिक किस्तों का बोझ कम होता है

 तरलता - अपनी सारी बचत घर में लगाने के बजाय आप आपातकालीन स्थिति के लिए पैसा बचा सकते हैं

 कानूनी जांच - बैंक लोन देने से पहले संपत्ति के दस्तावेजों की गहन जांच करते हैं जिससे धोखाधड़ी का जोखिम कम होता है

 इसके अलावा महिलाओं के लिए कम ब्याज दरें और स्टांप ड्यूटी में छूट जैसे विशेष फायदे भी उपलब्ध होते हैं 

 मुख्य बिंदु:-

 सरकारी प्रोत्साहन और सामाजिक परिवर्तन के कारण भारत में महिलाओं को घर का मालिक बनने में बढ़ोतरी हो रही है

 समय-समय पर फाइनेंशियल संस्थान भी महिला आप्टे के लिए विशेष ऑफर लेकर आता है 

 महिला शहर उधर करता कि आई को छोड़ने पर कल लोन राशि बढ़ सकती है जिससे लोन की पात्रता अधिक हो सकती है

 इन सभी कारकों का अर्थ है भारत एक ऐसा युग है प्रवेश कर रहा है जहां अधिक से अधिक महिलाओं के पास अपने नाम पर घर होगा

 देश में महिलाएं फाइनेंशियल रूप से स्वतंत्र बन रही है इसलिए में अपने परिवारों के लिए घर खरीदने जैसे बड़े निर्णय मैं भी भूमिका निभा रही है इसके कारण होम लोन प्रोवाइडर समय-समय पर महिलाओं के लिए खास होम लोन लाभ लाते हैं और विशेष स्कीम बनाते हैं ताकि महिलाओं को अपना घर लेने में मदद मिल सके

 भारत में महिलाओं के लिए होम लोन के लाभ

 महिलाओं के लिए होम लोन के कई लाभ है महिलाएं यह समझ रही है और होम लोन लेने का विकल्प चुन रही है यहां कुछ लाभ दिए गए हैं

 महिलाओं को शहर उधर करता बनाने का लाभ

 महिलाएं उधर करता और शह उधर करता दोनों के रूप में अप्लाई कर सकती है उधर करता और शहर उधर करता की संयुक्त आई का अर्थ उच्च लोन पात्रता और परिवार के लिए संयुक्त घर चुनने में अधिक सुविधा मिलना हो सकता है इसके अलावा महिलाओं को भी होम लोन रीपेमेंट पर टैक्स कटौती का लाभ मिलता है जिसके तहत मूलधन और ब्याज के लिए क्रमश 1.5 लाख और और 5 लाख और 2 लाख की अधिकतम कटौती की सुविधा मिलती है

 कम स्टॉप ड्यूटी -

 केंद्र सरकार और साथ ही राज्य सरकार महिलाओं को घर का मालिक बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है महिलाओं के लिए होम लोन के लाभ में कई राज्य सरकारों द्वारा 1-2% तक काम स्टॉप ड्यूटी शुल्क का भुगतान शामिल है इस प्रकार एक महिला 80 लाख की प्रॉपर्टी पर 80000 से 160000 तक बचा सकती है 

 अप्रूवल की उच्च संभावनाएं -

 ऐसा देखा गया है कि अब टिकट को एक्टिवेट के तौर पर किसी महिला के होने से होम लोन के अप्रूव होने पर सरकार आत्मक प्रभाव पड़ता है इसके कई कारण हो सकते हैं जिसमें महिला द्वारा अनुशासित रूप से बचत करने आवश्यक कर्ज लेने से बचने की प्रवृत्ति और फाइनेंस को सोच समझकर मैनेज करने की आदत शामिल है इसके अलावा उत्तर यह भी प्रदर्शित करते हैं की महिला उद्धार करता काम डिफॉल्ट करती है जिससे उनको होम लोन देने के लिए फाइनेंशियल संस्थाओं को भरोसा मजबूत हुआ है इन अनुकूलन विशेषताओं के कारण फाइनेंशियल संस्थान खासतौर पर महिलाओं के लिए घर को फाइनेंस करने की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रेरित हुई है

 महिलाओं को होम लोन क्यों लेना चाहिए

 कई कारकों के कारण महिलाओं को होम लोन लेना चाहिए

 पसंदीदा कस्टमर- कई लैंडिंग संस्थाओं के दाता के विश्लेषण से पता चलता है कि महिला एपीटीईटी के लोन बहुत कम डिफॉल्ट होते हैं इसलिए एक महिला के होम लोन के अपूर्ण होने की संभावनाएं अधिक होती है

 विशेष स्कीम- लेंडर महिलाओं को घर का मालिक बनने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं और सीमित अवधि की स्कीम लांच कर रहे हैं और महिलाओं के लिए विशेष रूप से कम ब्याज दरें प्रदान कर रहे हैं 

 खरीदने का सही समय- महिलाओं को घर खरीदने पर विचार करना चाहिए क्योंकि यह भारत में घर खरीदने का सही समय है

 धन्यवाद

 

 


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गृह विज्ञान का उद्देश्य


 गृह विज्ञान का उद्देश्य -  गृह विज्ञान एक पूर्ण व्यावहारिक है महत्वपूर्ण विज्ञान है इसका मुख्य उद्देश्य मनुष्य के जीवन को सुखी तथा समृद्ध बनाना है इस विषय के अंतर्गत मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है इस विषय को पढ़कर बालिकाएं भविष्य में एक कुशल ग्रहणी सिद्ध हो सकती है इस विषय के निम्नलिखित उद्देश्य है   1.गृह विज्ञान विषय के माध्यम से ही करनी अपने परिवार के सद... Read More

 गृह विज्ञान का उद्देश्य -

 गृह विज्ञान एक पूर्ण व्यावहारिक है महत्वपूर्ण विज्ञान है इसका मुख्य उद्देश्य मनुष्य के जीवन को सुखी तथा समृद्ध बनाना है इस विषय के अंतर्गत मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है इस विषय को पढ़कर बालिकाएं भविष्य में एक कुशल ग्रहणी सिद्ध हो सकती है इस विषय के निम्नलिखित उद्देश्य है 

 1.गृह विज्ञान विषय के माध्यम से ही करनी अपने परिवार के सदस्यों में आदर्श गुना का विकास कर श्रेष्ठ तथा होनहार नागरिकों का निर्माण कर सकती है 

 2.गृह विज्ञान विषय को पढ़कर ग्रहण की सौंदर्यात्मक ज्ञान में वृद्धि होती है

 3.गृह विज्ञान में इन और बचत संबंधी ज्ञान दिया जाता है गृह विज्ञान का अध्ययन करके ग्रहणी अपने पारिवारिक बजट को एक आदर्श बजट के रूप में बना सकती है

4. गृह विज्ञान विषय का ज्ञान होने पर ग्रहणी को घर के प्रति अपने कर्तव्य और उत्तरदायित्वों का बोध होता है

 5.व्यर्थ बड़ी वस्तुओं से अच्छी वह उपयोगी वस्तु तैयार करना गृह विज्ञान में सिखाया जाता है

 6.गृह विज्ञान विषय का उद्देश्य अनेक व्यसायो की जानकारी देना भी है 

 7.गृह विज्ञान में श्रेणी कढ़ाई सिलाई बनाई जाती क्रियात्मक कार्यों से बचे हुए समय का शुद्ध प्रयोग कर सकती है साथ ही आएगा एक स्रोत भी बन सकती है

 गृह विज्ञान के गुण तत्व 

 नियोजन- किसी भी कार्य को करने से पहले उसकी योजना बनाना नियोजन कहलाता है गृह विज्ञान में प्रत्येक कार्य को करने से पहले उसकी योजना आवश्यक बनाई जाती है उदाहरण के लिए महीने में धन खर्च करने से पहले बजट बना लेने पर भी करना आसान होता है 

 नियंत्रण- मातृ योजना बनाने से ही कार्य पूर्ण नहीं होता हैप्पी तो योजना पर नियंत्रण की आवश्यक है आज चक चौथ के युग में यदि हम खर्चे पर नियंत्रण नहीं कर पाए तो बजट बनाना व्यर्थ हो जाता है

 मूल्यांकन - प्रति कार्यों को करने की पश्चात उसका मूल्यांकन प्रिया आवश्यक है उदाहरण के लिए बजट में वेस्टन पर जितना धन भी किया गया वह आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त है या नहीं इसका मूल्यांकन करना चाहिए वह आवश्यकता प्रतीत होने पर इसे कटाया या बढ़ाया जा सकता है

​​ धन्यवाद-


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भारत में गृह विज्ञान का विकास


मैं आज आपको भारत में गृह विज्ञान के विकास के बारे में बताऊंगी  प्राचीन काल में गृह विज्ञान का विकास-  भारत में प्राचीन काल में गृह विज्ञान की सीबीएसई के रूप में नहीं पढ़ा जाता था किंतु गुरु कुलो मैं अन्य विश्व के साथ ग्रस्त  धर्म की बेसिक साड़ी जाती थी गणेश चतुर्थी में गृह विज्ञान का एक रूप था इसमें बालिकाओं को पारिवारिक जीवन यापन संबंधित ज्ञान सिलाई बुनाई कढ़ाई पाक कला हाथी का ज्ञा... Read More

मैं आज आपको भारत में गृह विज्ञान के विकास के बारे में बताऊंगी

 प्राचीन काल में गृह विज्ञान का विकास-

 भारत में प्राचीन काल में गृह विज्ञान की सीबीएसई के रूप में नहीं पढ़ा जाता था किंतु गुरु कुलो मैं अन्य विश्व के साथ ग्रस्त  धर्म की बेसिक साड़ी जाती थी गणेश चतुर्थी में गृह विज्ञान का एक रूप था इसमें बालिकाओं को पारिवारिक जीवन यापन संबंधित ज्ञान सिलाई बुनाई कढ़ाई पाक कला हाथी का ज्ञान दिया जाता था

 मध्यकाल में गृह विज्ञान -

 मध्यकाल मुगल शासको का योगदान इस समय बालिकाओं को बाहर शिक्षा नहीं दी जाती थी उन पर बाहर निकलने पर रोक थी पर्दा प्रथा का प्रचलन अधिक था तब वाले गांव को गृह विज्ञान की शिक्षा घरों पर ही बड़ी बुजुर्ग महिला देती थी उन्हें सिलाई कढ़ाई पकला अच्छी शिक्षा घर पर ही दी जाती थी 

 आधुनिक युग में गृह विज्ञान-

 आधुनिक काल में अंग्रेजी ने भारत में प्रदापान किया इस समय महिलाओं वह वाले गांव की शिक्षा पर ध्यान दिया जाने लगा बहुत से समाज सुधारकों जैसे स्वामी दयानंद सरस्वती ने स्त्री शिक्षा पर विशेष बल दिया राजा राम राय ने सती प्रथा जैसी कुरीतियों का विरोध किया इस युग में वाले गांव के लिए अलग से पाठशालाओं की व्यवस्था का प्रारंभ हुआ और उन्हें गृह विज्ञान एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाने लगा

 स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात गृह विज्ञान का स्वरूप-

 स्वतंत्रता प्राप्ति की पश्चात गृह विज्ञान का बहुत विकास हुआ इसे एक प्रथा क्या संपूर्ण विषय के रूप में मान्यता मिली गृह विज्ञान के अनेक कॉलेज खोले गए जहां पर गृह विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र का प्रस्तुत अध्ययन किया जाता है

 धन्यवाद-

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सार्वजनिक स्वास्थ्य


 सार्वजनिक स्वास्थ्य  मनुष्य समाज में रहता है प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य हो जाता है कि वह व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ समाज में रहने वाले अन्य व्यक्तियों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें अधिकतर लोग अपने घरों को साफ करके कूड़ा करकट सड़कों पर एकत्रित कर देते हैं जहां तहां थूक देते हैं इससे समाज में वातावरण दूषित होता है और प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है  सार्वजनिक स... Read More

 सार्वजनिक स्वास्थ्य

 मनुष्य समाज में रहता है प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य हो जाता है कि वह व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ समाज में रहने वाले अन्य व्यक्तियों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें अधिकतर लोग अपने घरों को साफ करके कूड़ा करकट सड़कों पर एकत्रित कर देते हैं जहां तहां थूक देते हैं इससे समाज में वातावरण दूषित होता है और प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है

 सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक

 सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है 

 अधिकतर घरों में सफाई करने के पश्चात कूड़ा बाहर फेंक दिया जाता है और दुर्गंध वातावरण में फैलती रहती है

 बहुत से क्षेत्र में आज भी शौचालय का अभाव है परिणाम स्वरुप लोग इधर-उधर सोच के लिए जाते हैं और वातावरण को दूषित कर देते हैं

 आज सड़कों पर पान मसाला या पान खाने वाले जहां दांत थूक देते हैं थूकने से उसे पर मक्खियों बैठी है और मुख्य फल भोजन आदि पर रोक को ले आती है जब कोई व्यक्ति इस प्रकार का भोजन करता है तो उसे विभिन्न रोग हो जाते हैं

 लाउडस्पीकर आदि तेज आवाज में चलने से भी व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है

 बड़ी-बड़ी फैक्ट्री से निकलने वाला दुआ भी स्वास्थ्य को प्रभावित करता है सभी नागरिकों का यह कर्तव्य बनता है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य किस अवस्था का विशेष ध्यान रखें 

 धन्यवाद-


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शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक


 शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक-  शारीरिक स्वास्थ्य को प्रमुख रूप से निम्नलिखित बातें प्रभावित करती है  पौष्टिक और संतुलित भोजन   मनुष्य का स्वास्थ्य ठीक रहे इसके लिए पौष्टिक एवं संतुलित भोजन करना चाहिए जिसमें आवश्यक मात्रा में वे सभी पोषक तत्व हो जो स्वास्थ्य को उत्तम बना सके संतुलित भोजन से तात्पर्य है वह सभी पदार्थ जिसमें पोषक तत्व उचित मात्रा में हो तथा स... Read More

 शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक-

 शारीरिक स्वास्थ्य को प्रमुख रूप से निम्नलिखित बातें प्रभावित करती है

 पौष्टिक और संतुलित भोजन 

 मनुष्य का स्वास्थ्य ठीक रहे इसके लिए पौष्टिक एवं संतुलित भोजन करना चाहिए जिसमें आवश्यक मात्रा में वे सभी पोषक तत्व हो जो स्वास्थ्य को उत्तम बना सके संतुलित भोजन से तात्पर्य है वह सभी पदार्थ जिसमें पोषक तत्व उचित मात्रा में हो तथा साथ ही उन पदार्थों में शुद्धता भी हो प्रमुख पोषक तत्व है कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन वसा खनिज लवण विटामिन तथा जल ऊर्जा प्राप्ति के लिए वर्ष तथा कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है शरीर वृद्धि तथा निर्माण के लिए प्रोटीन एवं स्वास्थ्य को निरोगी बनाए रखने के लिए विटामिन और खनिज लवण की आवश्यकता होती है

 व्यक्ति का रहन-सहन 

 स्वास्थ्य पर व्यक्ति के रहन-सहन का बहुत प्रभाव पड़ता है प्रकृति से दूर रहने वाले व्यक्तियों का स्वास्थ्य खराब बना रहता है जबकि प्राप्त समय से उठाने तथा रात्रि में समय से सोना नियमित सो जाना दांत साफ करना स्नान करना स्वच्छ वस्त्र पहनना व्यायाम करना समय से भोजन करना बुरी आदतों तथा नशे से दूर रहना अधिक क्रियो से व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहता है इसके अतिरिक्त उत्तम स्वास्थ्य हेतु व्यक्ति को जल भोजन में वातावरण की शुद्धि की ओर ध्यान देना चाहिए

 जनसंख्या का प्रभाव

 खराब स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण कारक जनसंख्या वृद्धि भी है अधिक संतान होने से माता-पिता प्रत्येक संतान के लिए संतुलित है पौष्टिक भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाते 

 रोगों से दूर रहना

 व्यक्ति को रोगों से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए इसके लिए उसे हर संभव उपाय करना चाहिए तथा प्राकृतिक नियमों का पालन करना चाहिए स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक है कि स्वयं को रोगों के संक्रमण से बचाया जाए और रोगी व्यक्ति के संपर्क से स्वयं को दूर रखा जाए

 व्यायाम 

 आज विज्ञान के द्वारा यह सिद्ध हो गया है कि जो भी व्यक्ति नियमित व्यायाम करते हैं रोग उनसे दूर भागते हैं व्यायाम करने से शरीर के सभी तंत्र अपना कार्य से चारों रूप से करने लगते हैं हमारे कार्य क्षमता तथा पाचन शक्ति में वृद्धि होती है हमारी मांसपेशियां मजबूत होती है रक्त शुद्ध होता है तथा विभिन्न प्रकार के भयंकर रोग भी दूर हो जाते हैं व्यायाम शुरू करते समय व्यायाम के नियमों को आवश्यक जान लेना और उनका पालन करना चाहिए

धन्यवाद:-

 

 


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जल प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव


 जल प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव   जल प्रदूषण का भी प्रतिकूल प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ता है विश्वास से संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक बच्चे जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप उत्पन्न बीमारियों से मर जाते हैं तथा 50% से अधिक लोग केवल प्रदूषण जल के सेवन के कारण ही बीमार होते हैं प्रदूषण जल के सेवन से मुख्य रूप से पाचन तंत्र संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं इसमे... Read More

 जल प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव 

 जल प्रदूषण का भी प्रतिकूल प्रभाव मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ता है विश्वास से संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक बच्चे जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप उत्पन्न बीमारियों से मर जाते हैं तथा 50% से अधिक लोग केवल प्रदूषण जल के सेवन के कारण ही बीमार होते हैं प्रदूषण जल के सेवन से मुख्य रूप से पाचन तंत्र संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं इसमें मुख्य है हैजा पेचिश पीलिया टाइफाइड परता फाइट आदि यह सभी रोग सकारात्मक रूप से फैलते हैं तथा घातक सिद्ध होते हैं प्रदूषण जल एक अन्य प्रकार से भी मनुष्य को प्रभावित करता है हम जानते हैं कि यह संख्या लोग मांसाहारी है तथा मांस प्रताप का एक मुख्य स्रोत मछली एवं जल जीव

 जब जल प्रदूषित हो जाता है तब इन मछलियों के शरीर में भी अनेक विषैलीन तत्वों का समावेश हो जाता है तथा ऐसे जीवों का मांस खाने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न रासायनिक से प्रदूषण समुद्र जल में रहने वाली मछलियों को खाने में अंधेपन एवं मस्तिष्क संबंधित रोगों की आशंका रहती है जल प्रदूषण से हमारे फैसले भी प्रभावित होती है प्रदूषित जल द्वारा संचित फसलों को खाने में मनुष्य तथा अन्य प्राणियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता ह 

धन्यवाद-


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जल प्रदूषण के स्रोत


 जल प्रदूषण के स्रोत:  सामान्य शब्दों में कहा जा सकता है कि जल का दूषित हो जाना ही जल प्रदूषण है जल स्वयं में एक योग है जिसमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन मुख्य घटक होते हैं शुद्ध जल का रासायनिक सूत्र है h2o शुद्ध जल रंगीन स्वाधीन गांधी तथा स्वाभाविक चमक युक्त होता है यह कक्षा विलायत है जिसमें विभिन्न पद्धति शीघ्र ही भूल जाते हैं इस कारण से किसी भी विजातीय तथा हानिकारक पदार्थ काजल स्रोतों में... Read More

 जल प्रदूषण के स्रोत:

 सामान्य शब्दों में कहा जा सकता है कि जल का दूषित हो जाना ही जल प्रदूषण है जल स्वयं में एक योग है जिसमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन मुख्य घटक होते हैं शुद्ध जल का रासायनिक सूत्र है h2o शुद्ध जल रंगीन स्वाधीन गांधी तथा स्वाभाविक चमक युक्त होता है यह कक्षा विलायत है जिसमें विभिन्न पद्धति शीघ्र ही भूल जाते हैं इस कारण से किसी भी विजातीय तथा हानिकारक पदार्थ काजल स्रोतों में मिल जाना अथवा गुल जाना जल प्रदूषण का कारण बन जाता है व्यावहारिक रूप में हम कह सकते हैं कि जल में किसी प्रकार की गंदगी रासायनिक तत्व धातु कारण औद्योगिक विशेष तथा रोगाणु ऑन का मिल जाना ही जल प्रदूषण है इसके मुख्य कर्म अथवा स्रोतों का परिचय निम्नलिखित है 

 घरेलू वाहित मल (सीवेज)-

 इसमें मल मूत्र घरेलू गढ़ की तथा कपड़ों को धोने के बाद बच्चा जल आदि सम्मिलित होते हैं इन्हें कार्य उन नदियों के जाल में मिला दिया जाता है जिनके किनारो पर यह गांव कस्बे नगर आदि बसे होते हैं इसके परिणाम स्वरुप बस्तियों के किनारे की नदियां झील आदि के जाल में ऑक्सीजन की की कमी हो जाती है वहीद माल से अनेक प्रकार के कीटाणुओं जल में आ जाते हैं जिनके कारण विभिन्न प्रकार के रोग फैलते हैं 

 वर्षा का जल -

 वर्षा काजल खेतों की मिट्टी की ऊपरी परत को बाहर कर नदियों झीलों तथा समुद्र तक पहुंचा देता है इसके साथ अनेक प्रकार की खाद नाइट्रोजन एवं फास्फेट के योग एवं कीटनाशक पदार्थ भी जल में पहुंच जाते हैं जिससे जल प्रदूषित हो जाता है

 औद्योगिक संस्थानों द्वारा विसर्जित पदार्थ -

 औद्योगिक संस्थानों द्वारा विसर्जित पदार्थ में अनेक विषैली पदार्थ अमल शरण एड आदि रंग रंग चमड़े का कागज उद्योग द्वारा विसर्जित पार मरकरी के योग रासायनिक एवं पेस्टिसाइड उद्योग द्वारा विसर्जित शीशे लैंड के योग तथा कॉपर व जिंक के योग के प्रकार है यह सभी अवशेष जल स्रोतों को निरंतर प्रदूषित करते रहते हैं

 तेल द्वारा प्रदूषण-

 इस प्रकार का प्रदूषण समुद्र के जाल में या तो जहाज द्वारा तेल विसर्जित करने से होता है अथवा समुद्र के किनारे स्थित तेल शोधक संस्थाओं के कारण होता है

 रेडियोधर्मी पदार्थ-

 नाभिकीय विखंडन के फल स्वरुप रेडियो धर्मी पदार्थ जल को दूषित कर देते हैं इस प्रकार का प्रदूषण पर समुद्र के जाल में होता है

 सव विसर्जन -

 हमारे समाज में विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के कारण मृत व्यक्तियों के सब को हस्तियों को चिंता की राख आदि को नदियों में विसर्जित कर दिया जाता है इसमें भी जल प्रदूषण में वृद्धि होती है

 उपयुक्त विवरण द्वारा जल प्रदूषण तथा मंदिर प्रदूषण भी जल प्रदूषण की वृद्धि में कुछ ना कुछ योगदान आवश्यक देते हैं आवश्यक में प्रदूषण वायु और प्रदूषण मिट्टी के संपर्क में आने वाला जल भी प्रदूषित हो जाता है

 धन्यवाद-


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पर्यावरण प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव


 पर्यावरण प्रदूषण का जन जीवन पर प्रभाव:-  पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न पक्षों का सामान्य परिचय हम प्राप्त कर चुके हैं संपर्क में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका प्रतिकूल प्रभावजन जीवन के प्रत्येक पक्ष पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रभावजन स्वास्थ्य पर पड़ता है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप विभिन्न साधारण गंभीर तथा अति गंभीर रोग पनपन लगते हैं पर्यावरण प्र... Read More

 पर्यावरण प्रदूषण का जन जीवन पर प्रभाव:-

 पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न पक्षों का सामान्य परिचय हम प्राप्त कर चुके हैं संपर्क में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका प्रतिकूल प्रभावजन जीवन के प्रत्येक पक्ष पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रभावजन स्वास्थ्य पर पड़ता है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप विभिन्न साधारण गंभीर तथा अति गंभीर रोग पनपन लगते हैं पर्यावरण प्रदूषण का अप्रत्यक्ष रूप में प्रतिकूल प्रभावजन साधारण के आर्थिक जीवन पर भी पड़ता है रोगों की वृद्धि तथा स्वास्थ्य के निम्न स्तर के कारण जनसाधारण की उत्पादक क्षमता घटती है तथा रोग निवारण के लिए अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ता है इससे जनसाधारण का जीवन आर्थिक संकट का शिकार हो जाता है जन्म जीवन पर पर्यावरण प्रदूषण से पढ़ने वाले प्रभाव का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है 

 जल स्वास्थ्य पर प्रभाव-

 पर्यावरण प्रदूषण का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव जन स्वास्थ्य पर पड़ता है जैसे-जैसे पर्यावरण का अधिक प्रदूषण होने लगता है वैसे-वैसे प्रदूषण जनित रोगों की दर एवं वीरता में वृद्धि होने लगती है पर्यावरण के विभिन्न पक्षों में होने वाले प्रदूषण से भिन्न-भिन्न प्रकार के रोग बढ़ाते हैं उदाहरण के लिए वायु प्रदूषण के परिणाम स्वरुप शोषण तंत्र से संबंधित रोग तथा जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप पाचन तंत्र संबंधित रोग अधिक फैलते हैं ध्वनि प्रदूषण भी तंत्रिका तंत्र हृदय एवं विकारों को जन्म देता है तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहारगत समानता को भी विकृत कर देता है अन्य प्रकार के प्रदूषण विजन सामान्य को विभिन्न सामान्य एवं गंभीर रोगों का शिकार बनाते हैं संक्षेप में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण अनिवार्य रूप से जन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है प्रदूषण पर्यावरण में रहने वाले व्यक्तियों की औसत आयु भी करती है तथा स्वास्थ्य का स्तर भी सामान्य निम्न ही रहता है 

 व्यक्तिगत कार्य क्षमता पर प्रभाव-

  व्यक्ति एवं समाज की प्रगति में संबंधित व्यक्तियों की कार्य क्षमता का विशेष महत्व होता है यदि व्यक्ति की कार्य क्षमता सामान्य या सामान्य से अधिक हो तो वह निश्चित रूप से प्रगति के मार्ग पर ए घर्षण होता है पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की कार्य क्षमता निश्चित रूप से घटित है तथा जन स्वास्थ्य का स्तर निम्न होता है निम्न स्वास्थ्य स्टार वाला व्यक्ति ना तो अपने कार्य को कुशलता पूर्वक कर सकता है और ना उसकी उत्पादन क्षमता की सामान्य रह पाती है यह दोनों ही स्थितियां व्यक्ति एवं समाज के लिए हानिकारक सिद्ध होती है वास्तव में प्रदूषित वातावरण में ही व्यक्ति अस्वस्थ ना भी हो तो भी उसकी चुस्ती एवं इस फुर्ती तो घाट ही जाती है

 आर्थिक जीवन पर प्रभाव-

 व्यक्ति समाज तथा राष्ट्र की आर्थिक स्थिति पर भी पर्यावरण प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की उत्पादन क्षमता घट जाती है यदि व्यक्ति का सामान स्वास्थ्य का स्तर निम्न होगा तथा उसकी कार्य क्षमता भी कम होगी तो वह अपनी आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए समुचित धन कदापि अर्जित नहीं कर पाएगा इस स्थिति में यदि व्यक्ति अथवा उसके परिवार का कोई सदस्य प्रदूषण का शिकार होकर के निसाधारण या गंभीर रोगों से ग्रस्त रहता है तो उसके उपचार पर भी अधिक व्यय करना पड़ सकता है इससे परिवार का आर्थिक बजट बिगड़ जाता है तथा आर्थिक स्थिति निम्न हो जाती है अतः कह सकते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति प्रत्यक्ष एवं परोक्ष दोनों ही रूपों मैं प्रभावित होती है इस कारक के प्रबल तथा विस्तृत हो जाने पर समाज एवं राष्ट्र की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है

 उपयुक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि पर्यावरण प्रदूषण का जनजीवन पर बहुपक्षीय गंभीर तथा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यही कारण है कि पर्यावरण प्रदूषण को आज गंभीरतम राष्ट्रीय समस्या माना जाने लगा है

धन्यवाद*


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