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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

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सेल चट्टानें कैसे बनते हैं


 सेल चट्टानें कैसे बनते हैं   समानता चट्टान से ऐसे पदार्थ का बोध होता है जो पत्थर की भांति हो लेकिन वैज्ञानिक रूप से में सभी पदार्थ चट्टानें कहलाते हैं जिनसे धरातल की ऊपरी सतह का निर्माण होता है सेल निम्नलिखित तीन प्रकार की होती है:  आग्नेय चट्टाने   अवसादी चट्टानें   रूपानंदनतरित चट्टाने   अग्नि का अर्थ आज होता है इस प्रकार आग में चट्टान म... Read More

 सेल चट्टानें कैसे बनते हैं 

 समानता चट्टान से ऐसे पदार्थ का बोध होता है जो पत्थर की भांति हो लेकिन वैज्ञानिक रूप से में सभी पदार्थ चट्टानें कहलाते हैं जिनसे धरातल की ऊपरी सतह का निर्माण होता है सेल निम्नलिखित तीन प्रकार की होती है:

  •  आग्नेय चट्टाने 

  •  अवसादी चट्टानें 

  •  रूपानंदनतरित चट्टाने 

 अग्नि का अर्थ आज होता है इस प्रकार आग में चट्टान में है जिनका निर्माण पृथ्वी की विधि भाग में उपस्थित गम दर्द के ठंडा होने से हुआ है सभी सालों का मूल पदार्थ गर्म तरल तथा चिपचिपा मैग्मा होता है जब यह मैग्मा दरारों के सहारे ऊपर धरातल पर आता है तो यह ठंडा होकर जम जाता है और आग न चट्टान बन जाती है

 पृथ्वी के अधिकतर हिस्से पर अवसादी चट्टानें फैली हुई है नदी वायु जल आदि के कारण पत्थर घिसते रहते हैं जिस कारण तलछट बन जाती है इस ताल छत से ही अवसादी चट्टानें बनती है बलूह पत्थर और चिड़िया और शादी चट्टानें के दो प्रमुख उदाहरण है उदाहरण है बलुआ पत्थर बालू के कानों से बनता है जबकि खड़िया करोड़ सुषमा जीवन के छोटे-छोटे कैल्शियम कार्बोनेट की अवशेषी से बनती है

 कुछ चट्टान ऐसी होती है जो किसी अन्य चट्टानों के रूप बदलने से बनती है इन्हें रूपानंदानी चट्टानें कहते हैं पृथ्वी में पाए जाने वाले ताप या दबाव या दोनों के कारण अक्सर अग्नि या अवसादी चट्टानों के रूप रंग कठोरता व गुना आदि में परिवर्तन आ जाता है इस प्रकार परिवर्तित पदार्थ को रूपांतरित चट्टान कहा जाता है कुछ प्रमुख रूपांतरित चट्टानें निम्नलिखित है 

  •  संगमरमर 

  • हीरा 

  •  फाईलाइट


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जावा के लकड़हारा


 जावा के लकड़हारा  जावा में कलंक समुदाय के लोग कुशल लकड़हारा और घुमंतू किसान थे उनका महत्व इस बात से आकर जा सकता है कि 1755 में जब जवा की मातरम रियासत बैठी तो यहां के 6000 कलंक परिवार को भी दोनों राज्यों में बराबर बांट दिया गया उनके कौशल के बगैर सागौन की कटाई कर राजाओं के महल बनाना बहुत मुश्किल था बच्चों ने जब 18वीं साड़ी में वनों पर नियंत्रण स्थापित करना प्रारंभ किया तब उन्होंने भी कोशि... Read More

 जावा के लकड़हारा

 जावा में कलंक समुदाय के लोग कुशल लकड़हारा और घुमंतू किसान थे उनका महत्व इस बात से आकर जा सकता है कि 1755 में जब जवा की मातरम रियासत बैठी तो यहां के 6000 कलंक परिवार को भी दोनों राज्यों में बराबर बांट दिया गया उनके कौशल के बगैर सागौन की कटाई कर राजाओं के महल बनाना बहुत मुश्किल था बच्चों ने जब 18वीं साड़ी में वनों पर नियंत्रण स्थापित करना प्रारंभ किया तब उन्होंने भी कोशिश की की कलंक उनके लिए कम करें 1770 में कलंकों ने एक टच किले पर हमला करके इसका प्रतिरोध किया लेकिन इस विरोध को दबा दिया गया

 धन्यवाद


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कैसे बने थे महाद्वीप


 कैसे बने थे महाद्वीप  यह एक रोचक विषय है कि किस प्रकार महाद्वीपों और महासागरों का निर्माण हुआ था इस बुद्धि को सुलझाने का दावा किया वेगनर नामक वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक ने बताया कि कार्बनिक फेरस युग में सभी स्थल खंड परस्पर जुड़े हुए थे इस महकहैंड को जब पैजिया कहा जाता था पेजिया  के चारों ओर एक विशाल महासागर था जिसे पतलासा कहां गया है   कुछ समय बाद पैसा दो भागों में बट गया उत्... Read More

 कैसे बने थे महाद्वीप

 यह एक रोचक विषय है कि किस प्रकार महाद्वीपों और महासागरों का निर्माण हुआ था इस बुद्धि को सुलझाने का दावा किया वेगनर नामक वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक ने बताया कि कार्बनिक फेरस युग में सभी स्थल खंड परस्पर जुड़े हुए थे इस महकहैंड को जब पैजिया कहा जाता था पेजिया  के चारों ओर एक विशाल महासागर था जिसे पतलासा कहां गया है 

 कुछ समय बाद पैसा दो भागों में बट गया उत्तरी हिस्से को लार सिया कहा गया जबकि दक्षिण हिस्से को गोल्ड दबाना लैंड कहा गया उत्तर अमेरिका यूरोप तथा एशिया उत्तरी हिस्से लारा एशिया के भाग थे जबकि दक्षिणी हिस्से गोल्डबरग्लैंड में दक्षिणी अमेरिका अफ्रीका भारत ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका महाद्वीप सम्मिलित थे इन दोनों हिस्सों के बीच एक पुतला सागर बन गया था जिसे टेनिस सागर कहते हैं

 महासागर और महाद्वीपों के निर्माण से संबंधित एक परिकल्पना और है इस प्लेट सिद्धांत कहते हैं इसके मुताबिक महाद्वीप प्लेटो से बने हैं और यह प्लेट महासागरों पर तैयार रही है इन प्लाटों में विभिन्न कर्म से गति भी होती रहती है जब प्लेट आपस में टकराती है तो भूकंप आते हैं खाया और ज्वालामुखी भी इन प्लाटों की गति के कारण ही पैदा होते हैं आजकल इस सिद्धांत को अधिक मान्यता दी जाती है

धन्यवाद


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कैसे बनी थी पृथ्वी आएइ जानते हैं


 कैसे बनी थी पृथ्वी  आज हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं उसकी उत्पत्ति लाखों साल पहले हुई थी पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई इस बारे में वैज्ञानिक के मध्य मतभेद है लेकिन इतना तो निश्चित है कि हमारी पृथ्वी सौरमंडल का एक ग्रह है और इसकी उत्पत्ति भी अन्य ग्रहों की भांति ही हुई होगी प्रमोशन कांत नमक जर्मन दार्शनिक ने बताया कि पृथ्वी की उत्पत्ति एक आज पदार्थ से मिलकर हुई जो कानों के रूप में बिखरा हुआ था... Read More

 कैसे बनी थी पृथ्वी

 आज हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं उसकी उत्पत्ति लाखों साल पहले हुई थी पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई इस बारे में वैज्ञानिक के मध्य मतभेद है लेकिन इतना तो निश्चित है कि हमारी पृथ्वी सौरमंडल का एक ग्रह है और इसकी उत्पत्ति भी अन्य ग्रहों की भांति ही हुई होगी प्रमोशन कांत नमक जर्मन दार्शनिक ने बताया कि पृथ्वी की उत्पत्ति एक आज पदार्थ से मिलकर हुई जो कानों के रूप में बिखरा हुआ था गुरुत्वाकर्षण के कारण यह कारण आपस में टकराकर जिससे कुल नौ ग्रह बन गए हमारी पृथ्वी भी इन्हीं लोग है में से एक है

 लेप्लेस नमक फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने बताया कि पृथ्वी की उत्पत्ति एक निहारिका से हुई है इस निहारिका से एक छल्ला अलग हुआ जो कालांतर में कई छल्लो में बट गया यह छाले ही ठंडा होकर गृह व उपग्रह बन गए इस निहारिका का शेष भाग हमारा वर्तमान सूर्य है 

 एक अन्य परिकल्पना के मोती बिग आरंभ में सूर्य गैस का एक पिंड था एक दूसरा बड़ा तारा सूर्य के नजदीक आया और अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण उसने सूर्य के कैसे भाग को अपनी ओर खींच लिया यह प्रक्रिया पृथ्वी पर चंद्रमा द्वारा उत्पन्न ज्वार भाटी के समान थी धीरे-धीरे गैस से पदार्थ छोटे-छोटे टुकड़ों में बट गया जिन्हें ग्रहण कहा गया परस्पर टक्कर और गुरुत्वाकर्षण के आकर्षण और ग्रहण के बड़े टुकड़ों में छोटे टुकड़ों को अपने में मिल लिया और पृथ्वी सहित अन्य ग्रहों की रचना हुई

 पृथ्वी के नीचे क्या है

 क्या आप जानते हैं कि हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं उसके नीचे क्या है दरअसल पृथ्वी एक गोल गेंद के समान है यदि हम एक स्थान पर लगातार हुआ खोदते जाए तो हम पृथ्वी के दूसरे सिरे तक पहुंच जाएंगे पृथ्वी की आंतरिक संरचना का ज्ञान हमें खानों से मिलता है विश्व की सबसे गहरी खान दक्षिण अफ्रीका में रवि नेशन गणित है इस खान से सोना निकाला जाता है इस खान की गहराई लगभग 4 किलोमीटर है तेल की खोज के लिए खोजे गए कण की गहराई भी लगभग 6 किलोमीटर तक ही होती है

 पृथ्वी का व्यास लगभग 6370 किलोमीटर है इसका अर्थ हुआ है कि अगर हम 6370 किलोमीटर गहरी खान को दे तो हम गेंद रूपी पृथ्वी के केंद्र तक पहुंच जाएंगे यदि सुरंग को हम आगे 6370 किलोमीटर और कोड दे तो हम पृथ्वी के दूसरे सिरे तक पहुंच जाएंगे जैसे-जैसे हम पृथ्वी की गहराई में जाते हैं तापमान बढ़ता जाता है आमतौर पर 32 मीटर की गहराई पर एक डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ जाता है

 वैज्ञानिकों का विचार है कि पृथ्वी के आंतरिक भाग का तापमान 2000 से 6000 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए इतने अधिक तापमान पर कोई भी वस्तु ठोस अवस्था में नहीं रह सकते इसलिए पृथ्वी के भीतर सभी कुछ सरल अवस्था में हैं इसी तरह को लव कहा जाता है जो कभी-कभी ज्वालामुखियों के रूप में फूट कर बाहर आ जाता है पृथ्वी के भीतर की चट्टानें प्लास्टिक अवस्था में होती है और में पर्याप्त लचीली होती है 

धन्यवाद

 

 


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लाल क्यों होता है रक्त


 लाल क्यों होता है रक्त  क्या कभी आपको चोट लगी है जब भी हमारे हाथ पैर पर कोई चोट या खरोच लगती है तो गम से लाल रंग का एक प्रकार निकलता है यह पदार्थ रक्त या खून होता है क्या कभी आपने सोचा है कि खून का रंग लाल ही क्यों होता है  हमारे शरीर में धमनियों और शिष्यों का एक जाल सा बढ़ा होता है खून इन्हीं धमनियों व शिराओं में दौड़ता है हमारे शरीर के विभिन्न अंगों में उत्तकों को लगातार ऑक्सीजन... Read More

 लाल क्यों होता है रक्त

 क्या कभी आपको चोट लगी है जब भी हमारे हाथ पैर पर कोई चोट या खरोच लगती है तो गम से लाल रंग का एक प्रकार निकलता है यह पदार्थ रक्त या खून होता है क्या कभी आपने सोचा है कि खून का रंग लाल ही क्यों होता है

 हमारे शरीर में धमनियों और शिष्यों का एक जाल सा बढ़ा होता है खून इन्हीं धमनियों व शिराओं में दौड़ता है हमारे शरीर के विभिन्न अंगों में उत्तकों को लगातार ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है यह ऑक्सीजन रक्त के द्वारा ही विभिन्न अंगों तथा उत्तकों तक पहुंचती है हालांकि हमारे खून का रंग लाल होता है लेकिन सभी जीवो का रक्त लाल नहीं होता है कुछ जीव ऐसे भी होते हैं जिनके रक्त का रंग सफेद या नीला भी होता है

 हमारे रक्त में लगभग 80% मंत्र जल की होती है बाकी के 20% भाग में मुख्य तीन आवश्यक होते हैं प्लाज्मा लाल रक्त कणिकाएं और प्लेट टेस्ट प्लाज्मा पीले रंग का एक पदार्थ होता है जिसमें निम्नलिखित अव्यय होते हैं

  •  प्रोटीन

  •  एंटीबॉडीज 

  •  फाइव विंडो जेन 

  •  वसा 

  •  कार्बोहाइड्रेट

  •  लवण 

 रक्त में दो प्रकार की कणिकाएं भी होती है लाल वह सफेद रक्त कणिकाएं रक्त का लाल रंग उसमें उपस्थित लाल रक्त कणिकाओं के कारण ही होता है इन लाल रक्त कणिकाओं का मुख्य कार्य ऑक्सीजन का परिवहन करना होता है इन लाल रक्त कणिकाओं का लाल रंग उसमें उपस्थित लाल रंग के एक पिगमेंट वरना के कारण होता है इस पिगमेंट की हिमोग्लोबिन कहा जाता है कहा जा सकता है कि स का लाल रंग हीमोग्लोबिन के कारण ही लाल होता है

 धन्यवाद

 


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बिन जल तड़पे मछली


 ब्रिंजल तड़पे मछली :-  बचपन में आपने जरूर सुना होगा की मछली को जल से बाहर निकलने पर वह मर जाती है यह बात बिल्कुल सत्य है की मछली को अगर जल से बाहर निकाल ले तो उसकी मौत हो जाती है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है  कितने आश्चर्य की बात है कि यदि हम सास ना रोके तो क्षण भर के लिए भी हम पानी के भीतर नहीं रह सकते हैं जबकि मछली घंटे पानी के भीतर मजे से तैरती रहती है यदि हम बिना... Read More

 ब्रिंजल तड़पे मछली :-

 बचपन में आपने जरूर सुना होगा की मछली को जल से बाहर निकलने पर वह मर जाती है यह बात बिल्कुल सत्य है की मछली को अगर जल से बाहर निकाल ले तो उसकी मौत हो जाती है क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है

 कितने आश्चर्य की बात है कि यदि हम सास ना रोके तो क्षण भर के लिए भी हम पानी के भीतर नहीं रह सकते हैं जबकि मछली घंटे पानी के भीतर मजे से तैरती रहती है यदि हम बिना सांस रुक जल के भीतर चले जाए तो सांस के साथ अपनी शरीर के भीतर चला जाएगा और हमारी मौत हो जाएगी मछली के मामले में इसका बिल्कुल उल्टा होता है यदि हम मछली को जल के बाहर निकाल ले तो दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है

 इसका कारण मछली का श्वसन तंत्र होता है हमारी तरह मछलियां ना तो नाक से सांस लेती है और ना ही उसके पास फेफड़े होते हैं सांस लेने के लिए मछलियां गर्ल फेफड़े का प्रयोग करती है इन गर्ल फेफड़ों की उपस्थिति के कारण मछली के साथ लेने की प्रक्रिया कुछ अलग प्रकार की होती है सांस लेने के लिए मछली में पानी भर लेती है इस पानी में जो ऑक्सीजन होती है उसे गर्ल फेफड़े सक लेते हैं ऑक्सीजन रहित पानी गाल फेफड़ों के द्वारा ही मुंह से बाहर निकल जाता है गर्ल फेफड़ों में रक्त भी बेहतर रहता है इस प्रकार गर्ल फेफड़ों में रक्त और ऑक्सीजन का मिश्रण हो जाता है गर्ल फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त पूरे शरीर में फैल जाता है

 शरीर के अंगों में उत्तकों में कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से मिल जाती है यहां से यह रक्तगल फेफड़ों तक पहुंच जाता है जहां शिकार बनता है ऑक्साइड शरीर के बाहर निकल जाते हैं स्पष्ट है की मछली के सांस लेने की प्रक्रिया में पानी का बहुत अधिक महत्व होता है यही कारण है कि जब हम मछली को जल से बाहर निकलते हैं तो वह सांस नहीं ले पाती है और तड़प तड़प कर मर जाती है 

 धन्यवाद


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फिंगरप्रिंट का कमाल


 फिगर प्रिंट का कमाल   अपने फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में पुलिस को फिगर प्रिंट की सहायता लेते आवश्यक देखा होगा क्या आप इन फिंगरप्रिंट का राज जानते हैं आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया में किन्हीं भी दो उंगलियों के निशान एक जैसे नहीं होते हैं और तो और एक ही व्यक्ति के दो हाथों और एक ही हाथ की दो उंगलियों के निशान भी एक समान नहीं होते हैं उंगली के निशाने की इसी विशेषता का उपयोग... Read More

 फिगर प्रिंट का कमाल 

 अपने फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में पुलिस को फिगर प्रिंट की सहायता लेते आवश्यक देखा होगा क्या आप इन फिंगरप्रिंट का राज जानते हैं आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया में किन्हीं भी दो उंगलियों के निशान एक जैसे नहीं होते हैं और तो और एक ही व्यक्ति के दो हाथों और एक ही हाथ की दो उंगलियों के निशान भी एक समान नहीं होते हैं उंगली के निशाने की इसी विशेषता का उपयोग व्यक्ति की पहचान के लिए किया जाता है

 शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए शरीर से पसीना निकलता है हाथ की हथेली और पैर के तलवे पर भी पसीने की ग्रंथियां पाई जाती है अगर आप हथेली को ध्यान से देखे तो पाएंगे कि उसे पर कुछ रेखाएं उभरी हुई होती है इन्हीं रेखाओं के बीच पसीने की ग्रंथियां होती है हमारे शरीर में अन्य पदार्थों के अलावा कुछ मात्रा वास की भी होती है हर उंगली पर रेखाओं का प्रिंटर एक विशेष प्रकार का होता है जब हम किसी वस्तु को स्पर्श करते हैं तो उंगली की रेखाओं पर उपस्थित पसीने वास के कारण रेखाओं की छाप उसे वस्तु पर आ जाती है

 प्रत्येक उंगली पर रेखाओं का पैटर्न एक विशेष प्रकार का होता है वैज्ञानिक शोधों से साबित हो चुका है की किन्हीं भी दो उंगलियों के निशान एक जैसे नहीं होते हैं इस पर की गई वस्तु पर आ गए उंगली निशानों की छाप के आधार पर आसानी से पता लगाया जा सकता है कि अमुक वस्तु को किस व्यक्ति ने छुआ होगा

 किसी अपराध के घटित होने पर यह उंगलियों के निशान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं हथियार आदि से पुलिसकर्मी अपराधी की उंगलियों के निशान उठा लेते हैं और फिर इनका मिलन पुलिस रिकॉर्ड में रखे अपराधियों को उंगलियों के निशान से किया जाता है इसके अलावा भी कई अन्य क्षेत्रों में भी यह फिंगरप्रिंट महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं कुछ देशों में आजकल पासपोर्ट और राष्ट्रीय पहचान पत्रों पर भी फिगर प्रिंटर लिए जाने लगे हैं


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इंद्रधनुष का रहस्य


 इंद्रधनुष का रहस्य  बारिश का मौसम बेहद सुहावना होता है इस सुहावने मौसम में आकाश में एक रंगीन पट्टी सी दिखाई देती है आपने भी या रंगीन पट्टी जरूर देखी होगी इस रंगीन पट्टी को इंद्रधनुष कहा जाता है हम बताएंगे कि यह इंद्रधनुष किस प्रकार बनता है  वर्षा के बाद वायुमंडल की ऊपर ऊपर सात जल की छोटी-छोटी बूंद से भर जाता है जब सूर्य से निकलने वाली करने वायुमंडल की इन छोटी-छोटी बूंद में प्रवेश क... Read More

 इंद्रधनुष का रहस्य

 बारिश का मौसम बेहद सुहावना होता है इस सुहावने मौसम में आकाश में एक रंगीन पट्टी सी दिखाई देती है आपने भी या रंगीन पट्टी जरूर देखी होगी इस रंगीन पट्टी को इंद्रधनुष कहा जाता है हम बताएंगे कि यह इंद्रधनुष किस प्रकार बनता है

 वर्षा के बाद वायुमंडल की ऊपर ऊपर सात जल की छोटी-छोटी बूंद से भर जाता है जब सूर्य से निकलने वाली करने वायुमंडल की इन छोटी-छोटी बूंद में प्रवेश करती है तो वह सात रंग में विभाजित हो जाती है दरअसल इस प्रक्रिया में वर्षा की बूंदे प्रिज्म का काम करती है जिस प्रकार प्रिज्म सफेद रंग के प्रकाश को साथ अलग-अलग रंगों में विभाजित कर देता है ठीक उसी प्रकार वर्षा की बूंदे भी सफेद रंग के प्रकाश को निम्नलिखित सात रंगों में विभक्त कर देती है 

V- बैंगनी (वायलेट )

I- जमनी (इंडिगो)

B-नीला ( ब्लु )

G–हरा (ग्रीन)

Y–पीला (येलो)

O–नारागी ( ऑरेंज)

R–लाल (रेड )

 इंद्रधनुष तभी बनता है जो वर्ष की बूंद का समूह हमारी आंखों के सामने और सूर्य हमारी पीठ के पीछे होता है इस स्थिति के लिए आवश्यक है की बारिश के मौसम में भी सूर्य निकल रहा हो यह इंद्रधनुष देखने में बेहद सुंदर लगता है इंद्रधनुष में प्रकाश के सभी सात रंग होते हैं

 धन्यवाद

 


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बर्फ पानी पर तैरता क्यों है


 बर्फ पानी पर तैरता क्यों है  क्या कभी अपने बर्फ का टुकड़ा पानी में फेंका है बर्फ का यह टुकड़ा तुरंत ही पानी पर देने लगता है ऐसा क्यों होता है बस पानी पर तैरता क्यों है आखिरी लेडिस का सिद्धांत है कि जब भी हम किसी वस्तु को पानी में डालते हैं तो यह पुस्तक अपनी भर के बराबर जल को उठा देती है   जब वस्तु को पानी में डाला जाता है तो वस्तु के भर से एक बार पानी पर नीचे की ओर लगता है ठीक... Read More

 बर्फ पानी पर तैरता क्यों है

 क्या कभी अपने बर्फ का टुकड़ा पानी में फेंका है बर्फ का यह टुकड़ा तुरंत ही पानी पर देने लगता है ऐसा क्यों होता है बस पानी पर तैरता क्यों है आखिरी लेडिस का सिद्धांत है कि जब भी हम किसी वस्तु को पानी में डालते हैं तो यह पुस्तक अपनी भर के बराबर जल को उठा देती है 

 जब वस्तु को पानी में डाला जाता है तो वस्तु के भर से एक बार पानी पर नीचे की ओर लगता है ठीक इसी समय पानी भी वस्तु पर एक बाल ऊपर की ओर लगता है ऊपर की ओर लगने वाले इस बाल को उत्प्लावन बल कहा जाता है जब वस्तु का भार उत्प्लावन भर से कम या उसके बराबर होता है तो वस्तु तैरने लगती है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि जब वस्तु का भर उसके द्वारा हटाए गए जल के भर के बराबर या उससे कम होता है तो वस्तु जल पर तैरने लगती है

 वास्तु के पानी में डूबने की प्रक्रिया इसके ठीक विपरीत होती है यदि वस्तु का भर उसके द्वारा हटाए गए जल के भर से अधिक होता है तो वस्तु जल में डूब जाती है यही कारण है कि बहुत बड़ा जहाज तो पानी पर तैरता रहता है लेकिन छोटी सी छोरी पानी में डूब जाती है जहाज का आयतन बहुत अधिक होता है क्योंकि वह खोखला होता है इस कारण पानी के जहाज का भार जहाज द्वारा हटाए गए जल के बाहर से काफी कम होता है यही कारण है कि जहाज पानी पर तैरता रहता है

 छोटी सी सोनी ठोस होती है सी द्वारा हटाए गए जल का आयतन भर सी के भर से कम होता है जिस कारण पानी में डालते ही सुई डूब जाती है


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डकार क्यों आती है


 डकार क्यों आती है  आपने भी भरपेट भोजन आवश्यक किया होगा भरपेट भोजन करते ही क्या होता है हमें एक डकार आती है सवाल है कि हमें डकार क्यों आती है इसे समझने के लिए अपने पाचन तंत्र को समझना होगा हमारे भोजन नली में पेट और छाती के बीच एक वाले होता है जो खाना खाते समय खुल जाता है जब भोजन हमारे पेट के भीतर चला जाता है तो यह वाला बंद हो जाता है  भोजन करते वक्त यह प्रक्रिया बहुत तेजी से होती है... Read More

 डकार क्यों आती है

 आपने भी भरपेट भोजन आवश्यक किया होगा भरपेट भोजन करते ही क्या होता है हमें एक डकार आती है सवाल है कि हमें डकार क्यों आती है इसे समझने के लिए अपने पाचन तंत्र को समझना होगा हमारे भोजन नली में पेट और छाती के बीच एक वाले होता है जो खाना खाते समय खुल जाता है जब भोजन हमारे पेट के भीतर चला जाता है तो यह वाला बंद हो जाता है

 भोजन करते वक्त यह प्रक्रिया बहुत तेजी से होती है भोजन को पीपीटी समय भोजन तंत्र में कुछ गैस से भी पैदा होती है जब यह कैसे पेट में अधिक मात्रा में इकट्ठी हो जाती है तो उन्हें बाहर निकालने की आवश्यक होती है इस अवस्था में हमारा मस्त तक इस गैस को बाहर निकलने का संदेश देता है

 पेट से हम अतिरिक्त गैस को बाहर निकालने के लिए भी एक प्रक्रिया होती है इसमें पेट की मांसपेस या सख्त हो जाती है और वल्लभ कुछ देर के लिए खुल जाता है और गैस बाहर निकल जाती है इस प्रकार जो गैस बाहर निकलती है उसी को हम आम भाषा में डकार कहते हैं

 आमतौर पर आने वाली डकार एक सामान्य प्रक्रिया होती है लेकिन अक्सर आप आने वाली खट्टी डकारें अप्पाचन की निशानी होती है खट्टे डेकारों से बचने के लिए जरूरी है कि हम नियमित रूप से व्यायाम आदि करें ताकि हमारी पाचन क्रिया ठीक बनी रहे


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