" स्वस्थ जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा परोक्ष रूप से सेवा करने के योग्य बनता है"
"स्वस्थ मनुष्य की पूर्ण शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्थिति है केवल रोगी की अनुपस्थिति स्वास्थ्य नहीं है "
स्वास्थ्य शब्द मानव जीवन से संबंधित है प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह स्वस्थ रहे स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठाता है स्वस्थ व्यक्ति जीवन में अनेक सफलता प्राप्त कर सकता है
" Health is wealth" अर्थात स्वास्थ्य ही धन है स्वस्थ व्यक्ति अपने लिए परिवार के लिए और समाज के लिए एक धन के समान है इसके विपरीत एक स्वस्थ व्यक्ति सबके लिए बोझ होता है रोग से दुखी व्यक्ति के जीवन में उत्साह नहीं रहता आर्थिक सामाजिक आत्मिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है किसी ने कहा है किसी देश की उन्नति उसके नागरिकों की प्रबलता है जो की खानों नदिया वह वनों की संपत्ति से कहीं ज्यादा मूल्यवान है किसी भी समाज व राष्ट्रीय की उन्नति उसके व्यक्तियों की कमतता तथा साहस पर निर्भर करती है कमर्टता तथा साहस के लिए स्वास्थ्य उत्तम होना आवश्यक है
व्यक्तिगत स्वास्थ्य का अर्थ:-
शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्तिगत स्वास्थ्य कहते हैं यदि व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा हो तो व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और परिणाम स्वरुप घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहेगी स्वास्थ्य का अर्थ मंत्र रोग मुक्त होना ही नहीं है बल्कि कार्य क्षमता व क्रियाशीलता से भी है अतः व्यक्तिगत स्वास्थ्य को सदैव उत्तम बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य का सीधा संबंध व्यक्तिगत स्वास्थ्य से होता है वह स्वच्छता जो हमारे शरीर की देखभाल से संबंध रहती है व्यक्तिगत स्वच्छता कहलाती है व्यक्तिगत स्वच्छता के सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिसमें वह इनका सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिससे वह इनका पालन करते हुए पूर्ण स्वच्छ रह सके और अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सके
व्यक्तिगत स्वास्थ्य के नियम:-
अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य के कुछ नियम इस प्रकार है
आदत:- स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति में अच्छी आदतों का विकास होना चाहिए प्राकृतिक नियमों का पालन न करना है भोज्य भोजन का प्रयोग करना नाशाहत्री रात्रि में देर से सोना और सुबह देर से उठाना आदि बुरी आदतें हैं यदि ऐसी आदतों को नहीं छोड़ा जाए तो व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है आदतों का जीवन में विशेष महत्व है आदतें एक दिन में नहीं बन जाती आदतों का विकास तो बाल्यावस्था से शुरू हो जाता है अतः माता को चाहिए कि प्रारंभ से ही बच्चों मे अच्छी आदतों का विकास करें जैसे प्राप्त सूर्योदय से पहले उठना सच में दांत साफ करने के पश्चात ही कुछ आहार ग्रहण करना समय से स्नान करना स्वच्छ वस्त्र पहनना दूसरे का तोलिया गंगा वह कपड़ों का उपयोग न करना आदि
स्वच्छता:- स्वच्छ रहने के लिए स्वच्छता का भी होना आवश्यक है शारीरिक स्वच्छता होने से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है शारीरिक रूप से स्वच्छ होने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता के नियमों के विषय में पूर्ण ज्ञान रखता है स्वच्छ रहने के लिए अच्छा वातावरण बनाया जाए शुद्ध भोजन किया जाए तथा शुद्ध व ताजी हवा का सेवन किया जाए इस प्रकार का वातावरण बनाने पर व्यक्ति रोग मुक्त रह सकेगा
पौष्टिक भोजन:- स्वस्थ रहने के लिए शुद्ध तथा पौष्टिक भोजन बहुत आवश्यक है पौष्टिक भोजन का अभिप्राय है व्यक्ति की आवश्यकता अनुसार पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा विटामिन वह खनिज लवण युक्त भोजन ही भोजन शुद्ध होना चाहिए भोजन को स्वच्छता से बनाना चाहिए भोजन करने का समय निर्धारित होना चाहिए तथा अधिक तला भुनाव घनिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए सभी बातों को ध्यान में रखने से व्यक्ति पूर्णता स्वस्थ रहता है
मानसिक शांति:- शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति के मस्तिष्क में शांति होनी चाहिए घर का वातावरण कल है युक्त नहीं बनना चाहिए तथा किसी भी समस्या का हाल आपस में विचार विमर्श तथा विचारों का आदान-प्रदान करके किया जाना चाहिए
जीवन में नियम बांधता :- अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए यह आवश्यक है कि दैनिक कार्यों को नियम अनुसार किया जाए उदाहरण के लिए समय पर सो आदि में निवृत होना नाश्ता भोजन आदि समय से करना व्यायाम नियम अनुसार एवं नृत्य प्रतिदिन करना समय पर सोने तथा समय से उठाना आदि अनेक कार्य प्रतिदिन श्याम अनुसार करने चाहिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या तथा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही अपने दैनिक जीवन के नियमों को शुद्ध भुज पूर्वक निर्धारित करना चाहिए तथा निर्धारित नियमों को यथासंभव सदैव पालन करना चाहिए
नियमित रूप से व्यायाम :- शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन व्यायाम करना आवश्यक है व्यायाम का आशय शरीर के अंगों की व्यवस्थित गति से है व्यायाम के अनेक प्रकार है टहलने दौड़ना धड़ बैठक लगाना योगाभ्यास एवं प्रनियम मलखंब आदि सभी व्यायाम के उदाहरण है अब व्यायाम के लिए विभिन्न मशीनों एवं कर्म को भी तैयार कर लिया गया है व्यायाम शरीर की मांसपेशियों को क्रियाशील बनता है जिससे कार्य करने की क्षमता बढ़ती है इसके अतिरिक्त शरीर स्वस्थ प्रतिनियुक्त तथा सुंदर रहता है
पर्याप्त निद्रा तथा विश्राम :- उत्तम स्वास्थ्य के लिए निंद्रा एवं विश्राम अत्यंत आवश्यक होता है हम जो भी शारीरिक तथा मानसिक कार्य करते हैं उसे हमारे शरीर में थकान आ जाती है वास्तव में शारीरिक परिश्रम करते समय हमारे शरीर में अनेक हानिकारक पदार्थ एक तरफ हो जाते हैं यह पदार्थ ही हमारी मांसपेशियों को ताकते हैं इससे अतिरिक्त कार्य करते समय हमारे शरीर में ऊतक टूटे फट्टे रहते हैं कार्य करते समय इसकी मरम्मत नहीं हो पाती है अतः शरीर के स्वस्थ रहने के लिए इन उत्तकों की मरम्मत तथा हानिकारक पदार्थों का बाहर निकलना अनिवार्य होता है इसके लिए निद्रा अविश्रम ही सर्वोत्तम उपाय हैं
शारीरिक स्वच्छता:-
शारीरिक स्वच्छता के अंतर्गत संपूर्ण शरीर के प्रत्येक अंगों की स्वच्छता आती है अतः हमें अपने शरीर के विभिन्न अंगों की संस्थान प्रकार करनी चाहिए
त्वचा की स्वच्छता:- तू अच्छा शरीर का बाहरी आवरण होता है जो शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है त्वचा के विभिन्न रंग होते हैं किसी त्वचा का रंग काला होता है किसी का रंग सांवला या किसी त्वचा का रंग गेहुआ तथा किसी त्वचा का रंग गोरा होता है
त्वचा में करोड़ों छिद्र होते हैं इसमें कुछ छिद्रतलीय ग्रंथि में खुलते हैं और कुछ श्वेत ग्रंथियां में श्वेत ग्रंथियां हमारे शरीर से पसीना निकलने का कार्य करती है इससे हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है साथ ही पसीने के द्वारा हमारे शरीर की गंदगी एवं उत्सर्जी पदार्थ का विसर्जन हो जाता है ग्रंथि तेल उत्पन्न करती है जिससे हमारी त्वचा चिकनी व चमकदार बनती है
हमारे शरीर से पसीना निकलना अनेक प्रकार के कार्य करना बाहर जाने आदि से हमारी त्वचा गंदी हो जाती है त्वचा के रोमचंद्र बंद हो जाते हैं जिससे सफेद वह तो लिए ग्रंथियां बंद हो जाती है गांधी त्वचा पर विभिन्न प्रकार के रोगाणु बैठते हैं और त्वचा संबंधित रोग उत्पन्न करते हैं जैसे फुंसी फोड़े आदि साथ ही शरीर से पसीने की दुर्गंध आने लगती है अतः त्वचा की प्रतिदिन सफाई करनी चाहिए स्नान करने से हमारे शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और त्वचा में रक्त संचार होता है और शरीर में चमक आती है
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