गृह व्यवस्था निर्णय की एक श्रृंखला है जिसमें पारिवारिक साधनों के अनुसार पारिवारिक लक्षण को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है इस प्रयास में नियोजन नियंत्रण एवं मूल्यांकन इन तीनों चरणों को सम्मिलित किया जाता है
परिवार तभी सुखी वह समृद्ध होता है जब उसे परिवार को चलने वाली निर्देशिका अर्थात ग्रहणी है कुशल व्यक्तित्व की हो परिवार को अच्छा ऐप सुख अर्थात सुव्यवस्थित घर देखकर ग्रैनी के योग्य होने का परिचय मिलता है परिवार को अच्छा वह सुखी बनाने के लिए ग्रहणी को अनेक कार्य करने पड़ते हैं एक परिवार के सदस्यों के रहन-सहन के स्तर को उच्च बनाने में धन अथवा संपत्ति की इतनी आवश्यकता नहीं होती जितनी करनी की सूचना वह कुशलता की किसी भी परिवार के स्तर को देखने से परिवार की संचालिका के गुना की झलक मिलती है
गृह व्यवस्था का अर्थ:-
गृह व्यवस्था का शाब्दिक अर्थ है- 'घर की व्यवस्था या घर का प्रबंध ग्रह कार्यों को योजना बंद है संयोजित ढंग से संपन्न करना ही गृह व्यवस्था कहलाता है'
वास्तव में व्यवस्था शब्द मनुष्य के संपूर्ण जीवन से जुड़ा हुआ है यह सारी प्रकृति एवं व्यवस्थित ढंग से ही कार्य कर रही है इसी प्रकार यदि मनुष्य अपने जीवन को आदर्श जीवन के रूप में बनाना चाहता है तो उसे व्यवस्था के बंधन में बांधना ही पड़ेगा इसी प्रकार ग्रह को यदि एक आदर्श ग्रह के रूप में दर्शन है तो प्रत्येक कार्य व्यवस्थित ढंग से ही करना पड़ेगा
व्यवस्था या प्रबंध एक मानसिक प्रक्रिया है जो योजना के रूप में प्रकट होती है तथा योजना के अनुरूप ही संपादित एवं नियंत्रित होती है व्यवस्था के रूप में योजना कहां कार्यांव लक्ष्य प्राप्ति का उत्तम साधन बन जाता है
डेविस के अनुसार, " व्यवसाय कार्यकारी नृत्य तब का कार्य यह मुख्यत एक मानसिक प्रक्रिया है यह कार्य नियोजन संगठन तथा सामूहिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए अन्य व्यक्तियों के कार्य के नियंत्रण से संबंधित है"
क्रो एवं क्रो के अनुसार गृह व्यवस्था घर के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक सीमित साधनों के विषय में उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया है
प्राचीन समय में मनुष्य की आवश्यकता बहुत सीमित थी व्यक्ति का रहन-सहन सामान्य वह साधारण हुआ करता था अतः घर को चलाने में कठिनाइयों का सामना काम करना पड़ता था परंतु वर्तमान में वैज्ञानिक आधुनिक फैशन परिषद युग में कदम कदम पर समस्या है वर्तमान मनुष्य की आवश्यकता में वृद्धि हुई है साथ ही साथ एसएमएस साधन भी उपलब्ध हो गए हैं जिससे ग्रहणी के लिए गृह व्यवस्था करने का कार्य जटिल हो गया है अतः एक कुशल ग्रैनी ही परिवार के उपलब्ध साधन का उचित उपयोग करके परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करके उन्हें अधिकतम संतुष्ट प्रधान कर सकती है
गृह व्यवस्था की परिभाषा :-
गृह व्यवस्था के संदर्भ में निखिल तथा डारसी मैं अपने विचार इस प्रकार प्रस्तुत किए हैं -" गृह व्यवस्था परिवार के लक्षण की पूर्ति के उद्देश्य से परिवार के साधनों के प्रयोग का नियोजन नियंत्रण व मूल्यांकन है अर्थात पारिवारिक लक्षण की प्राप्ति के लिए गृह प्रबंध योजना बंद ढंग से करना चाहिए तथा समय-समय पर मूल्यांकन भी आवश्यक है करो या करो के अनुसार गृह व्यवस्था ग्रह के उद्देश्य की पूर्ति में सहायक सीमित साधनों के विषय में उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया मात्र है गुड जॉनसन मैं गृह व्यवस्था को इन शब्दों में परिभाषित किया है गृह व्यवस्था निर्णय की ऐसी श्रृंखला है जो पारिवारिक लक्षण की प्राप्ति के लिए पारिवारिक साधनों को प्रयुक्त करने की प्रक्रिया प्रस्तुत करती है
गृह व्यवस्था के चरण:-
उपयुक्त परिभाषा से स्पष्ट है कि ग्राम व्यवस्था के तीन चरण होते हैं इन्हें गृह व्यवस्था के तत्व या अंग भी कहा जाता है
गृह व्यवस्था के चरण- नियोजन -नियंत्रण -मूल्यांकन -( सापेक्ष,निरपेक्ष)
नियोजन- किसी कार्य की सफलता के मूल में नियोजन का बहुत महत्व होता है उदाहरण के लिए घर में चार बच्चे हैं परिवार की आय के अनुसार उनकी शिक्षा की एक योजना बनाने होगी अर्थात नियोजन का अर्थ है कि भविष्य में हमें क्या और कैसे करना है इसका पूर्ण निश्चय कर लिया जाना इससे भविष्य में होने वाला कार्य सहज हो जाता है और उसकी सफलता में संदेह भी काम रह जाता है निखिल और दर्शी ने नियोजन को इस प्रकार परिभाषित किया है- एक वांछित लक्ष्य एक पहुंचने के विभिन्न संभावित मार्गों के विषय में सूचना कल्पना करना तथा उनकी योजना की संपत्ति तक अनुसरण करना और व्यापक योजना का चयन करना है
योजना लक्ष्य निर्दिष्ट प्रक्रिया होती है इससे इन बातों का उपयोग किया जाता है
1चिंतन 2 कल्पना 3 तक शक्ति तथा 4 सिमरन शक्ति
नियोजन के अनेक लाभ भी होते हैं
नियंत्रण:- नियोजित कार्य को करने में नियंत्रण की आवश्यकता होती है यदि कार्य करने में नियंत्रण नहीं रह पाएगा तो नियोजित कार्य भी पूर्ण नहीं हो सकता नियंत्रण में परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग आवश्यक है
मूल्यांकन - कार्य को संपन्न करने के पश्चात उसका मूल्यांकन आवश्यक है पूर्व नियोजन के अनुसार कार्य करने में कितनी सफलता और कितनी असफलता मिली तथा क्या उचित हुआ वह क्या अनुचित हुआ इसका निर्धारण करने को मूल्यांकन कहते हैं मूल्यांकन से कार्य में पाए जाने वाली त्रुटियां का ज्ञान होता है तथा भविष्य में उन त्रुटियों से बचा जा सकता है साथ ही यह भी ज्ञात हो जाता है कि मूल्यांकन करने के आगे इस कार्य को करने में कौन-कौन से परिवर्तन आवश्यक है
गृह व्यवस्था के उद्देश्य
गृह करने वाली संस्था है मनुष्य के जीवन में घर का विशेष महत्व है परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं को पूर्ण करना ग्रैनी का उत्तरदायित्व होता है अतः ग्रहों को इस बात का पूर्ण ज्ञान होता है चाहिए कि गृह व्यवस्था को क्या उद्देश्य होते हैं
गृह व्यवस्था के निम्नलिखित उद्देश्य होते हैं
अनिवार्य आवश्यकताओं की संतुष्टि- गृह व्यवस्था का प्रथम उद्देश्य परिवार की सभी अनिवार्य आवश्यकता की संतुष्टि करना है परिवार के सभी सदस्यों को उत्तम व पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए भोजन परोसते समय परिवार के प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता में रुचि का भी ध्यान रखना आवश्यक है परिवार के सभी सदस्यों के लिए वस्त्रो का उचित प्रबंध होना चाहिए तथा एक मकान की व्यवस्था हो जिसमें परिवार के सभी सदस्य सुख पूर्वक रह सके
समय का शुद्ध प्रयोग - घर के सभी कार्यों को इतनी कुशलता से करना चाहिए जिससे बच्चे हुए समय का अधिकतम शुद्ध प्रयोग हो सके इसके लिए ग्रहणी अपनी सामर्थ्य के अनुसार आधुनिक यंत्रों का प्रयोग भी कर सकती है
आय वय का संतुलन- घर के संचालन में आए तथा वे में समाज से होना अत्यंत आवश्यक है परिवार की आई सीमित होती है तथा आवश्यकता है स सीमित होती है अतः उसे सीमित आय में ही वह करना चाहिए तथा साथ ही साथ इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि परिवार के सदस्यों को अधिकतम संतुष्टि भी मिल सके
समाज सेवा - ग्रह के विभिन्न कार्य इस प्रकार व्यवस्थित होने चाहिए कि परिवार के सदस्य अपने समय में से कुछ समय बचाकर समाज की सेवा अधिकारियों में भाग ले सके जिससे मैं सच्चा आत्मिक संतोष कर सके
विश्राम एवं मनोरंजन- घर के सभी कार्यों में प्रत्येक सदस्य को थकान होती है अतः इसके लिए विश्राम करना आवश्यक होता है विश्राम के साथ-साथ मनोरंजन के लिए समय निकलने से परिवार के सदस्यों में सामाजिक बना रहता है
सर्वांगीण विकास - एक कुशल गृह व्यवस्था परिवार के लिए सुख शांति का वातावरण उत्पन्न करके परिवार के संसद सदस्यों का शारीरिक मानसिक आर्थिक है वह अत्यधिक विकास करती है
गृह व्यवस्था के तत्व या कारक-
गृह एवं परिवार दो भिन्न शब्द है- गृह वह स्थान है जहां कोई परिवार रहकर जीवन व्यतीत करता है इस प्रकार ग्रह का आशय मकान से है परिवार व्यक्ति का वह समूह है जो आपस में रक्त संबंधों से संबंध होते हैं व्यवस्था के तत्वों के संदर्भ में गृह तथा परिवार संबंधित तत्वों का अलग-अलग विवेचन करना चाहिए ग्रह के संदर्भ में व्यवस्था के तत्वों या कारक ऑन का सामान्य परिचय निम्नलिखित है
घर का सुविधाजनक होना- घर का निर्माण करते समय अथवा किराए पर लेते समय ध्यान रखना चाहिए की विभिन्न कक्षाओं का नियोजन सुविधाजनक हो धारण के लिए डाइनिंग रूम और रसोईघर निकट होने से शक्तियां समय की बचत होती है स्टोर रूम और रसोई घर भी निकट होना चाहिए अध्ययन कक्ष और स्वयं कक्षा का डाइनिंग रूम से अंतर होना चाहिए जिससे विश्राम में अध्ययन में बाधा ना पड़े शौचालय और गुसलखाने निकट होने चाहिए इसी प्रकार डाइनिंग रूम की व्यवस्था इस प्रकार की होनी चाहिए की मेहमान घर में आंतरिक हिस्सों में काम से कम प्रवेश करते हुए डाइनिंग रूम तक पहुंच जाएं गृह संबंधित इस विशेषता या तत्व को पर्सपानुकूलता कहा जाता है अवश्य भवन में इस विशेषता के होने पर गृह व्यवस्था में लागू की जा सकती है
सफाई- परिवार का लक्ष्य परिवार के सदस्यों को स्वस्थ रखना है और यह तब तक संभव नहीं है जब तक घर में सफाई की उचित व्यवस्था न हो व्यवस्थित और आकर्षक घर के लिए भी सफाई का होना आवश्यक है यदि घर मैं सफाई नहीं है तो मक्खी मच्छर मकड़िया आदि जन्म लेंगे और रोग फैलेंगे रसोई घर की सफाई स्वच्छता के लिए अनिवार्य डाइनिंग रूम की सफाई से ग्रैनी की सुरुचि पूर्णता का आभास होता है बच्चों का पर्याप्त समय अध्ययन कक्ष में बिकता है यदि अध्ययन पक्ष साफ सुथरा है किताबें करने से सजी है मेज कुर्सियां पर धूल नहीं है तो बच्चे के पढ़ने में अधिक रुचि लगे इस प्रकार स्पष्ट है कि गृह व्यवस्था के लिए घर की सफाई एक महत्वपूर्ण तथा अति आवश्यक कारक है
जलवायु और प्रकाश की उचित व्यवस्था- शुद्ध वायु शुद्ध जल और प्रकाश की घर में उचित व्यवस्था होनी चाहिए सभी कमरों में पर्याप्त खिड़की दरवाजे और रोशनदान होने चाहिए जिससे स्वच्छ वायु और प्रकाश का प्रवेश हो सके घर में धूप का आना भी आवश्यक होता है जिन घरों में सूर्य का प्रकाश नहीं आता आता है वहां शिलान और अनेक कीटाणुओं का सामाजिक हो जाता है जो परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है अध्ययन कक्षा में प्रकाश की तथा शौचालय स्नानागार और रसोई में जल की उचित व्यवस्था होनी चाहिए यदि घर में यह सांसद कारक ठीक है तो निश्चित रूप से उत्तम गृह व्यवस्था के अनुपालन में सरलता होगी
भोज्य सामग्री की व्यवस्था - परिवार के सदस्यों को समय पर उचित और संतुलित भोजन उपलब्ध होना चाहिए भोजन अल्पाहार में अतिथि सरकार के लिए सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए अतिथियों के आने पर चाय या कॉफी से उनका सत्कार होना चाहिए यदि घर में दूध या चाय की पट्टी समय पर उपलब्ध नहीं है तो उसे ग्रहण की या कुशलता और व्यवस्था का पता चलता है भोजन सामग्री की व्यवस्था के अंतर्गत घर में शुद्ध और पर्याप्त मात्रा में खाद सामग्री रहनी चाहिए तथा समय-समय पर उनकी सफाई की जानी चाहिए खाद्य पदार्थों का संरक्षण भी इसी में सम्मिलित है काग पदार्थ का अपव्यव नहीं होना चाहिए
घर की सामग्री की व्यवस्था- घर की सामग्री से तात्पर्य है दैनिक प्रयोग की वस्तुएं जैसे बर्तन वस्त्र पुस्तक के बिस्तर फर्नीचर आदि आधुनिक परिवारों में रेडियो टेप रिकॉर्डर टेलीविजन फीस पंखे कूलर सिलाई मशीन कपड़े धोने की मशीन प्रेशर कुकर टोस्टर ओवन चाहिए जिससे इन उपकरणों की टूट-फूट कम से कम हो आवश्यकता अनुसार सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए यदि कोई उपकरण या वस्तु टूट जाती है या खराब तो उसको ठीक करने का प्रबंध होना चाहिए
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Vanshika
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My father name is MR.Sonu and My mother name is MS. Rajo. My father is a carpenter and My mother is a Housewife. My father is a Honest. and My father is a good man .My father is a very Intelligent.I like my father .and my mother is a good lady. My mother is a very Intillgent .and my mother is a very beautiful.
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