Company Logo

Vanshika

WEFRU9450291115202
Scan to visit website

Scan QR code to visit our website

Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se Digital Diary Submit Post


सैनी संगठन के बारे में जाने


 सैनी संगठन   भारतीय सेवा का सर्वोच्च सेनापति कमांडर राष्ट्रपति है किंतु देश की वास्तविक सुरक्षा का दायित्व मंत्रिमंडल पर होता है मंत्रिमंडल की ओर से रक्षा संबंधी मामलों पर विचार विमर्श करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति है जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है रक्षा मंत्री और रक्षा मंत्रालय इसके कार्य का संचालन करता है और सुना के तीनों अंगों के कार्यों की निगरानी रखता है  अपने गणतं... Read More

 सैनी संगठन 

 भारतीय सेवा का सर्वोच्च सेनापति कमांडर राष्ट्रपति है किंतु देश की वास्तविक सुरक्षा का दायित्व मंत्रिमंडल पर होता है मंत्रिमंडल की ओर से रक्षा संबंधी मामलों पर विचार विमर्श करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति है जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है रक्षा मंत्री और रक्षा मंत्रालय इसके कार्य का संचालन करता है और सुना के तीनों अंगों के कार्यों की निगरानी रखता है

 अपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर टेलीविजन में सेवा के तीनों अंगों तथा जल सीनेटल सेवा एवं वायु सेवा को मार्च पास्ट करते देखा होगा

 धन्यवाद


Read Full Blog...


देश की सुरक्षा के बारे में जाने


 देश की सुरक्षा  स्वतंत्रता के बाद देश की आजादी को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक था कि देश की सैन्य शक्ति को मजबूत किया जाए आजादी के तुरंत बाद पाकिस्तान द्वारा किए गए आक्रमण ने हमें और सतर्क कर दिया अतः सी को आधुनिक बनाने सैन्य बल की संख्या बढ़ाने तथा सेवा की नई जरूरत को पूरा करने के लिए सैन्य अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए विश्व में हथियारों की होने देश को आधुनिक हथियारों के... Read More

 देश की सुरक्षा

 स्वतंत्रता के बाद देश की आजादी को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक था कि देश की सैन्य शक्ति को मजबूत किया जाए आजादी के तुरंत बाद पाकिस्तान द्वारा किए गए आक्रमण ने हमें और सतर्क कर दिया अतः सी को आधुनिक बनाने सैन्य बल की संख्या बढ़ाने तथा सेवा की नई जरूरत को पूरा करने के लिए सैन्य अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए विश्व में हथियारों की होने देश को आधुनिक हथियारों के विकास के लिए मजबूत किया जिससे परंपरागत युद्ध प्रणाली के साथ-साथ युद्ध के नए तरीकों तथा सुरक्षा के प्रबंध किए गए सेवा के तीनों अंगों थल सी जल सेवा एवं वायु सेवा को अधिक शक्तिशाली बनाया गया 

धन्यवाद


Read Full Blog...


वायु सेवा


 वायु सेवा   भारतीय वायु सेवा में इस समय चार कमाने हैं पश्चिमी वायु कमान पूर्वी वायु कमान परिश्रण कमान और रखरखाव कमान इसका भी मुख्यालय दिल्ली में है वायु सेवा अध्यक्ष को एयर चीफ मार्शल कहते हैं  धन्यवाद Read More

 वायु सेवा 

 भारतीय वायु सेवा में इस समय चार कमाने हैं पश्चिमी वायु कमान पूर्वी वायु कमान परिश्रण कमान और रखरखाव कमान इसका भी मुख्यालय दिल्ली में है वायु सेवा अध्यक्ष को एयर चीफ मार्शल कहते हैं

 धन्यवाद


Read Full Blog...


आएइ जाने भारतीय नौसेना के बारे में


 भारतीय नौसेना  भारतीय नौसेना को जल सेवा भी कहते हैं यह तीन कमांडो में विभाजित है पश्चिमी कमान पूर्वी कमान और दक्षिणी कमान नौसेना के भारत में दो बेडे है पूर्वी बेड़ा और पश्चिमी बेड़ा इसका मुख्यालय भी दिल्ली में है  धन्यवाद Read More

 भारतीय नौसेना

 भारतीय नौसेना को जल सेवा भी कहते हैं यह तीन कमांडो में विभाजित है पश्चिमी कमान पूर्वी कमान और दक्षिणी कमान नौसेना के भारत में दो बेडे है पूर्वी बेड़ा और पश्चिमी बेड़ा इसका मुख्यालय भी दिल्ली में है

 धन्यवाद


Read Full Blog...


आएइ जाने थल सेना के बारे में


 थल सेना   भारतीय थल सी 5 कमांडो में विभाजित है पश्चिमी पूर्वी दक्षिणी उत्तरी और केंद्रीय कमान थल सेवा में कई प्रकार की सीन हैं जैसे इन फैक्ट्री टॉप खान अमरी मेडिकल कोर आमिर शिक्षा कौर यह हमारी सी है और इसका मुख्यालय दिल्ली मे है  धन्यवाद Read More

 थल सेना 

 भारतीय थल सी 5 कमांडो में विभाजित है पश्चिमी पूर्वी दक्षिणी उत्तरी और केंद्रीय कमान थल सेवा में कई प्रकार की सीन हैं जैसे इन फैक्ट्री टॉप खान अमरी मेडिकल कोर आमिर शिक्षा कौर यह हमारी सी है और इसका मुख्यालय दिल्ली मे है 

धन्यवाद


Read Full Blog...


खान अब्दुल गफ्फार खा


 खान अब्दुल गफ्फार खा  पेशावर में जाना क्रॉस की अभिव्यक्ति कई रूपों में देखने को मिलती है यहां कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर जनता ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया इस इलाके में सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खा वर्षों से सक्रिय थे उनके द्वारा जनता में किए गए कार्यों के कारण अहिंसक क्रांतिकारियों के वीर जाट थे अर्थात् खुदाई खिदमतगारो के दल तैयार हुए थे यह लोग लाल कुर्ती के नाम से जाने जा... Read More

 खान अब्दुल गफ्फार खा

 पेशावर में जाना क्रॉस की अभिव्यक्ति कई रूपों में देखने को मिलती है यहां कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर जनता ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया इस इलाके में सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खा वर्षों से सक्रिय थे उनके द्वारा जनता में किए गए कार्यों के कारण अहिंसक क्रांतिकारियों के वीर जाट थे अर्थात् खुदाई खिदमतगारो के दल तैयार हुए थे यह लोग लाल कुर्ती के नाम से जाने जाते थे सविनय अवज्ञा आंदोलन में उनकी भूमिका काफी सक्रिय थी इसी प्रकार देवबंद शाखा की राजनीति या संस्था जमात उल अल्मा ए हिंद में इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया 

 धन्यवाद


Read Full Blog...


सशस्त्र क्रांतिकारी का योगदान


 सशस्त्र क्रांतिकारी का योगदान  प्रथम विश्व युद्ध के दौरान क्रांतिकारी आंदोलनकारी को बुरी तरह कुचल दिया गया बहुत से नेता जेल भेज दिए गए और शेष इधर-उधर बिखर गए 1920 ई के प्रारंभ की क्रांतिकारी को जेल से रिहा कर दिया गया इसके कुछ समय बाद ही कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन छेड़ दिया क्रांतिकारी सशस्त्र क्रांति का रास्ता छोड़कर असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए किंतु असहयोग आंदोलन को एकाएक वापस ले लेन... Read More

 सशस्त्र क्रांतिकारी का योगदान

 प्रथम विश्व युद्ध के दौरान क्रांतिकारी आंदोलनकारी को बुरी तरह कुचल दिया गया बहुत से नेता जेल भेज दिए गए और शेष इधर-उधर बिखर गए 1920 ई के प्रारंभ की क्रांतिकारी को जेल से रिहा कर दिया गया इसके कुछ समय बाद ही कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन छेड़ दिया क्रांतिकारी सशस्त्र क्रांति का रास्ता छोड़कर असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए किंतु असहयोग आंदोलन को एकाएक वापस ले लेने से क्रांतिकारी की उम्मीद पर पानी फिर गया इन क्रांतिकारियों ने पुणे अपना क्रांतिकारी संगठन बनाना प्रारंभ कर दिया इसके नेता पुराने क्रांतिकारी सचिंद्रनाथ सरियाला राम प्रसाद बिस्मिल तथा योगेश चंद्र चटर्जी थे 

 धन्यवाद 


Read Full Blog...


सविनय अवज्ञा आंदोलन


 सविनय अवज्ञा आंदोलन  सन 1928 में अंग्रेज सरकार ने भारतीय शासन अधिनियम 1919 ई की समीक्षा करने के लिए साइमन नामक व्यक्ति के नेतृत्व में एक समिति बनाई इस समिति में एक भी भारतीय ना था इसे बिल्कुल स्पष्ट हो गया कि अंग्रेज सरकार यह मानने को तैयार नहीं थी कि भारत के लोगों को अपने देश का शासन चलाने का अधिकार होना चाहिए इसलिए भारत में साइमन जहां-जहां गया वहां उसके विरोध में जुलूस वह हड़ताल हुई औ... Read More

 सविनय अवज्ञा आंदोलन

 सन 1928 में अंग्रेज सरकार ने भारतीय शासन अधिनियम 1919 ई की समीक्षा करने के लिए साइमन नामक व्यक्ति के नेतृत्व में एक समिति बनाई इस समिति में एक भी भारतीय ना था इसे बिल्कुल स्पष्ट हो गया कि अंग्रेज सरकार यह मानने को तैयार नहीं थी कि भारत के लोगों को अपने देश का शासन चलाने का अधिकार होना चाहिए इसलिए भारत में साइमन जहां-जहां गया वहां उसके विरोध में जुलूस वह हड़ताल हुई और साइमन वापस जाओ का नारा जोरों से गूंजा 

धन्यवाद


Read Full Blog...


आएइ जानते हैं कि अल्फ्रेड पार्क का नाम शाहिद चंद्रशेखर आजाद पार्क क्यों रखा गया


 अल्फ्रेड पार्क  सत्ता सत्ता के दामन में धीरे-धीरे क्रांतिकारी आंदोलन को बाइबल कर दिया 27 फरवरी 1931 ई को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में मुठभेड़ के दौरान चंद्रशेखर आजाद शहीद हो गए वर्तमान में अल्फ्रेड पार्क का नाम सहित चंद्रशेखर आजाद पार्क है आजाद की मृत्यु के बाद पंजाब उत्तर प्रदेश और बिहार में क्रांतिकारी आंदोलन लगभग समाप्त सा हो गया  धन्यवाद Read More

 अल्फ्रेड पार्क

 सत्ता सत्ता के दामन में धीरे-धीरे क्रांतिकारी आंदोलन को बाइबल कर दिया 27 फरवरी 1931 ई को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में मुठभेड़ के दौरान चंद्रशेखर आजाद शहीद हो गए वर्तमान में अल्फ्रेड पार्क का नाम सहित चंद्रशेखर आजाद पार्क है आजाद की मृत्यु के बाद पंजाब उत्तर प्रदेश और बिहार में क्रांतिकारी आंदोलन लगभग समाप्त सा हो गया 

धन्यवाद


Read Full Blog...


लाहौर कांड के बारे में जाने


 लाहौर कांड:-  भगत सिंह और राजगुरु ने दिसंबर 1928 ई को साइमन कमीशन का विरोध करते हुए लाला लाजपत राय को लाठी से चोट पहुंचाने वाले पुलिस का नेतृत्व करने वाले अंग्रेज उच्च अधिकारी सांडर्स की हत्या कर दी सरकारी नीतियों के विरुद्ध में 8 अप्रैल 1929 ई को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका बम से नुकसान नहीं हुआ दोनों वहां से भेज नहीं और पुलिस ने उन्हें गिरफ्त... Read More

 लाहौर कांड:-

 भगत सिंह और राजगुरु ने दिसंबर 1928 ई को साइमन कमीशन का विरोध करते हुए लाला लाजपत राय को लाठी से चोट पहुंचाने वाले पुलिस का नेतृत्व करने वाले अंग्रेज उच्च अधिकारी सांडर्स की हत्या कर दी सरकारी नीतियों के विरुद्ध में 8 अप्रैल 1929 ई को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका बम से नुकसान नहीं हुआ दोनों वहां से भेज नहीं और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया भगत सिंह एवं उनके साथियों पर सांडर्स हत्याकांड से संबंधित मुकदमा लोहार में चलाया गया 7 अक्टूबर 1930 ई को भगत सिंह राजगुरु एवं सुखदेव को फांसी की सजा सुनाई गई

धन्यवाद


Read Full Blog...



<--icon---->