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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

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आएइ जाने की वनस्पति तंतु क्या है


 वनस्पति तंतु -  यह वनस्पति जगत से प्राप्त होते हैं जैसे कपास वह कपड़ों के बीच के बालों से प्राप्त होते हैं कुछ अन्य तंतु जैसे झूठ लीलन वह हम पौधों के तानों से प्राप्त होते हैं   बीज वाले तंतु-  इसमें पेड़ के बीजों से तंतु प्राप्त किए जाते हैं पेड़ के बीच के चारों ओर तंतु चिपके रहते हैं इन बीजों को इकट्ठा करके उनसे तंतुओं को निकाला जाता है इस समूह का प्रमुख तंतु कपास है जि... Read More

 वनस्पति तंतु -

 यह वनस्पति जगत से प्राप्त होते हैं जैसे कपास वह कपड़ों के बीच के बालों से प्राप्त होते हैं कुछ अन्य तंतु जैसे झूठ लीलन वह हम पौधों के तानों से प्राप्त होते हैं 

 बीज वाले तंतु-

 इसमें पेड़ के बीजों से तंतु प्राप्त किए जाते हैं पेड़ के बीच के चारों ओर तंतु चिपके रहते हैं इन बीजों को इकट्ठा करके उनसे तंतुओं को निकाला जाता है इस समूह का प्रमुख तंतु कपास है जिसके बारे में हम बताएंगे 

 सूती (कपास)

 सूती अथवा कपास का तंतु कपास के बीजों से प्राप्त होता है भारतवर्ष में सूती कपड़ों का प्रयोग सर्वाधिक किया जाता है कुछ समय पहले मशीनों के अभाव में सूती धागे चरखा चलाकर प्राप्त किए जाते थे यह बहुत मुलायम तथा महीन होते हैं ढाका की मलमल विश्व प्रसिद्ध सूती कपड़ा है कहा जाता है कि यह मलमल इतनी महीन होती है किसका पूरा थन एक अंगूठी से निकाल दिया जा सकता है


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कृत्रिम तंतु


 कृत्रिम तंतु किसे कहते हैं  द्वितीय वर्ग के वस्त्र उपयोगी तंतु को कृत्रिम तंतु कहा जाता है इस वर्ग के वस्त्र प्रयोग तंतु प्रकृति में स्वतंत्र रूप से विद्वान नहीं होते इन तंतु को मानव ने अपने वैज्ञानिक विवेक के आधार पर प्रयोगशाला में निर्मित किया है इन तंतु को वस्त्र प्रयोग आधुनिक तंतु भी कहा जाता है वस्त्र प्रयोग कृत्रिम तंतु को भी विभिन्न वीडियो द्वारा तैयार किया जाता है इस आधार पर इन... Read More

 कृत्रिम तंतु किसे कहते हैं

 द्वितीय वर्ग के वस्त्र उपयोगी तंतु को कृत्रिम तंतु कहा जाता है इस वर्ग के वस्त्र प्रयोग तंतु प्रकृति में स्वतंत्र रूप से विद्वान नहीं होते इन तंतु को मानव ने अपने वैज्ञानिक विवेक के आधार पर प्रयोगशाला में निर्मित किया है इन तंतु को वस्त्र प्रयोग आधुनिक तंतु भी कहा जाता है वस्त्र प्रयोग कृत्रिम तंतु को भी विभिन्न वीडियो द्वारा तैयार किया जाता है इस आधार पर इन तंतुओं की भी दो वर्गों के अंतर्गत विभाजित किया जाता है जिन्हें क्रमश यांत्रिक वीडियो द्वारा तैयार कृत्रिम तंतु तथा रासायनिक वीडियो से तैयार तंतु के रूप में जाना जाता है यांत्रिक पद्धति से तैयार किया गया सर्वप्रथम कृत्रिम तंतु लियोन है रासायनिक विधि से तैयार किए जाने वाले कृत्रिम तंतु में प्रमुख है एक्रो लोन देखलो और लोन नायलॉन

 रासायनिक तंतु :-

 इनके तंतु मनुष्य द्वारा निर्मित किया जाता है प्राकृतिक साधनों से प्राप्त देश की तरह रासायनिक वीडियो से इन देशों का निर्माण करके टेलरों नायलॉन अल्फा आदि वस्त्रो का निर्माण किया जाता है आजकल इनका प्रचलन अधिक बढ़ रहा है यह रेशम के समान चमकीले होते हैं यह वस्त्र रश्मि वस्त्र के स्थान की पूर्ति करते हैं यह देखने में आकर्षक भर में हल्का व कोमल होता है भारत में सैकड़ो कारखाने इसका उत्पादन करते हैं बस या लकड़ी की लोदी को रासायनिक पदार्थ और वीडियो द्वारा दर्द के रूप में परिवर्तित करके मशीन के द्वारा रेशों के रूप में लाकर सुख लिया जाता है और इन्हीं देशों से वस्त्र तैयार कर लिया जाता है अधिक गर्मी से इसका तंतु पिघल जाता है गर्म पानी से धोने वह स्त्री करने से यह कमजोर हो जाता है

 खनिज पदार्थों के तंतु:-

 कुछ खनिज पदार्थ से भी वस्त्र का निर्माण किया जाता है इस पर स्टोर्स जालीदार वह किम ख्वाब के तंतु खनिज पदार्थ से ही प्राप्त किए जाते हैं इस पर स्टोर्स कोशिला तंतु कहते हैं इन कपड़ो पर अग्नि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों के वस्त्र इसी तंतु के बने होते हैं जालीदार तंतु सोने चांदी वह अल्युमिनियम नमक धातु से तार खींचकर बनाए जाते हैं यह बहुत कीमती होते हैं तथा देखने में भड़कीले तथा भारी होते है

 रियान को प्राकृतिक तथा कृत्रिम दोनों प्रकार का तंतु कहा जाता है

 धन्यवाद


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प्राकृतिक तंतु किसे कहते हैं


 प्राकृतिक तंतु किसे कहते हैं:-  प्रथम वर्ग के तंतु को प्राकृतिक तंतु कहा जाता है इस वर्ग में उन वेस्टन पर योगी तंतुओं को शामिल किया जाता है जिन्हें भिन्न-भिन्न प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किया जाता है प्राकृतिक तंतु प्राणी जगत से भी प्राप्त किए जाते हैं तथा वनस्पति जगत से भी प्रमुख वस्त्रपयोगी    तंतु के उन रेशम कपास झूठ हम तथा लेनन आदि इसके अलावा खनिज स्रोतों से भी कुछ वस्त्... Read More

 प्राकृतिक तंतु किसे कहते हैं:-

 प्रथम वर्ग के तंतु को प्राकृतिक तंतु कहा जाता है इस वर्ग में उन वेस्टन पर योगी तंतुओं को शामिल किया जाता है जिन्हें भिन्न-भिन्न प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किया जाता है प्राकृतिक तंतु प्राणी जगत से भी प्राप्त किए जाते हैं तथा वनस्पति जगत से भी प्रमुख वस्त्रपयोगी    तंतु के उन रेशम कपास झूठ हम तथा लेनन आदि इसके अलावा खनिज स्रोतों से भी कुछ वस्त्रपयोगी तंतु प्राप्त किए जाते हैं

 वनस्पति से प्राप्त तंतु :-

 पेड़ पौधों से प्राप्त तंत्र राई फ्लेक्स जोड़ तथा एमपी मुख्य है कुछ पेड़ पौधों में रेशों युक्त पदार्थ पाए जाते हैं तथा यह जैसे पेड़ पौधे के विभिन्न भागों से प्राप्त होते हैं कुछ तंतु बाल जैसे होते हैं कुछ तंतु बीजों से प्राप्त होते हैं जैसे कपास के बीच से हुई प्राप्त होती है कुछ तंतु पेड़ पौधों की छाल से प्राप्त होते हैं यह तंतु खड़े होने के कारण रस्सी चटाई आदि बनाने के काम आते हैं

 जीव जंतु से प्राप्त तंतु :-

 कुछ जंतु जीव जंतु से भी प्राप्त होते हैं उनका तंतु मुख्यतः पेड़ों से प्राप्त होता है साधारण पेड़ों से साधारण तथा घटिया हूं तथा अच्छी जाति की बीडीओ से बढ़िया ऊन प्राप्त होती है कश्मीरी पशमीना की उन एक उत्तम मल होती है रेशम का तंतु रेशम के कीड़ों से प्राप्त होता है जो कीड़े पालतू होते हैं उनका रेशम बहुत अच्छा होता है तथा जंगली कीड़ों का रेशम काम अच्छा होता है

 धन्यवाद


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तंतु का अर्थ


 तंतु का अर्थ:-  आधुनिक युग में इस वस्त्र विज्ञान की भाषा में वस्त्र निर्माण की सामग्री की सबसे लघु इकाई को रेशा या तंतु के नाम से पुकारते हैं हर एक वस्त्र का निर्माण संबंधित टांटन से ही होता है तंतुओं से धागा या सूट बनाया जाता है अनेक तंतु ऑन के निर्माण से धागा तैयार होता है जिसके लिए अनेक क्रियो को अपनाना पड़ता है तैयार धागे से बनाई की प्रक्रिया द्वारा वस्त्र तैयार किए जाते हैं Read More

 तंतु का अर्थ:-

 आधुनिक युग में इस वस्त्र विज्ञान की भाषा में वस्त्र निर्माण की सामग्री की सबसे लघु इकाई को रेशा या तंतु के नाम से पुकारते हैं हर एक वस्त्र का निर्माण संबंधित टांटन से ही होता है तंतुओं से धागा या सूट बनाया जाता है अनेक तंतु ऑन के निर्माण से धागा तैयार होता है जिसके लिए अनेक क्रियो को अपनाना पड़ता है तैयार धागे से बनाई की प्रक्रिया द्वारा वस्त्र तैयार किए जाते हैं


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वस्त्र के तंतु तथा जीवन में उनका उपयोग


 प्रस्तावना   'तंतु यार ऐसा वस्त्र की मूल इकाई है तंतुओं के संयोजन से ही वस्त्र बनता है'  वस्त्र भोजन के पश्चात मनुष्य की दूसरी मूल आवश्यकता होती है वस्त्रो का हमारे जीवन के प्रत्येक पहलू को निकालने में बहुत महत्व होता है शरीर की सुंदरता तथा शारीरिक सुरक्षा के लिए वेस्टन की ही आवश्यकता होती है साफ सुथरे ढंग से सुव्यवस्थित वस्त्र पहनना मनुष्य की रहन-सहन तथा सभ्यता को प्र... Read More

 प्रस्तावना 

 'तंतु यार ऐसा वस्त्र की मूल इकाई है तंतुओं के संयोजन से ही वस्त्र बनता है'

 वस्त्र भोजन के पश्चात मनुष्य की दूसरी मूल आवश्यकता होती है वस्त्रो का हमारे जीवन के प्रत्येक पहलू को निकालने में बहुत महत्व होता है शरीर की सुंदरता तथा शारीरिक सुरक्षा के लिए वेस्टन की ही आवश्यकता होती है साफ सुथरे ढंग से सुव्यवस्थित वस्त्र पहनना मनुष्य की रहन-सहन तथा सभ्यता को प्रभावित करते हैं प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में विभिन्न प्रकार के वस्त्र का प्रयोग करता है यदि वस्त्र के तंतु रेशों का पर्याप्त रूप से ज्ञान हो तो प्रत्येक व्यक्ति को अपने लिए वस्त्र चुनने में आसानी होती है कुछ समय पहले तक मनुष्य को केवल प्राकृतिक तंतुओं से बने वस्त्रो का सहारा लेना पड़ता था परंतु अब कृत्रिम तंतुओं का निर्माण किया जाने लगा है

 तंतु से कपड़ों का निर्माण

 अत्यंत प्राचीन काल में जब मानव असभ्य था और जंगलों में रहता था तो वह पेड़ों की छाल और पशुओं की खाल से ही अपना शरीर ढक लेता था किंतु सभ्यता के विकास के साथ उसने धीरे-धीरे वस्त्र का निर्माण आरंभ कर दिया वेस्टन के निर्माण के लिए मानव ने टैटो की खोज की किसी पदार्थ की वह इकाई जिससे कपड़ों के निर्माण के लिए धागा बनाया जाता है तंतु कहलाता है

 धन्यवाद:-


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अशुद्धियां दूर करने के उपाय


​​​​ अशुद्धियां दूर करने के उपाय  गैसों को संभाल कर - गैस एक स्थान पर न रहकर दूर-दूर तक फैल जाती है जब वायु अशुद्ध होती है तो वह गर्म वह हल्की होकर ऊपर उड़ती है तथा नीचे का खाली स्थान शुद्ध वायु ग्रहण कर लेता है यही कारण है कि चिमनी एवं रोशनदान ऊपर की तरफ होते हैं और खिड़की वह दरवाजे नीचे की तरफ  ऑक्सीजन द्वारा- ऑक्सीजन में ज्वलनशीलता का गुण पाया जाता है इस ज्वलनशीलता के गुण के... Read More

​​​​ अशुद्धियां दूर करने के उपाय

 गैसों को संभाल कर - गैस एक स्थान पर न रहकर दूर-दूर तक फैल जाती है जब वायु अशुद्ध होती है तो वह गर्म वह हल्की होकर ऊपर उड़ती है तथा नीचे का खाली स्थान शुद्ध वायु ग्रहण कर लेता है यही कारण है कि चिमनी एवं रोशनदान ऊपर की तरफ होते हैं और खिड़की वह दरवाजे नीचे की तरफ

 ऑक्सीजन द्वारा- ऑक्सीजन में ज्वलनशीलता का गुण पाया जाता है इस ज्वलनशीलता के गुण के कारण वायु की अशुद्धि या जल जाती है और वायु संवत ही शुद्ध हो जाती है

 आंधी द्वारा- आंधी तीव्र गति से चलती है और एक स्थान पर स्थित अशुद्ध वायु उड़कर सारे वायुमंडल में फैल जाती है तथा परिणाम स्वरुप वायु शुद्ध हो जाती है

 पेड़ पौधे द्वारा- पेड़ पौधों स शुद्ध वायु को ग्रहण कर लेते हैं मैं वातावरण को शुद्ध बनाते हैं यही कारण है कि पेड़ पौधों वाले स्थानों की वायु शुद्ध वह स्वस्थ होती है

 सूर्य का प्रकाश तथा वर्षा - सूर्य के प्रकाश में उपस्थित पराबैंगनी करने वायुमंडल में उपस्थित अशुद्धियों को नष्ट कर देती है इसी प्रकार वर्ष का पानी जब पृथ्वी पर जाता है तो वह अपने साथ अशुद्धियां गोल लेता है और परिणाम स्वरुप वायुमंडल शुद्ध हो जाता है

 धन्यवाद:-

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कार्बन डाइऑक्साइड गैस के गुण


 कार्बन डाइऑक्साइड गैस के गुण   कार्बन डाइऑक्साइड गैस मैं निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं  1.कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा वायु में अधिकतम 0. 4% तक होती है जो बहुत कम है  2.हम जब सांस छोड़ते हैं तो हमारे शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है  3.पेड़ पौधों कार्बन डाइऑक्साइड गैस के न मिलने पर मुरझा जाते हैं अतः यह गैस पेड़ पौधों के लिए आवश्यक है  4.पेड़ पौधे कार्बन... Read More

 कार्बन डाइऑक्साइड गैस के गुण 

 कार्बन डाइऑक्साइड गैस मैं निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं

 1.कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा वायु में अधिकतम 0. 4% तक होती है जो बहुत कम है

 2.हम जब सांस छोड़ते हैं तो हमारे शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है

 3.पेड़ पौधों कार्बन डाइऑक्साइड गैस के न मिलने पर मुरझा जाते हैं अतः यह गैस पेड़ पौधों के लिए आवश्यक है

 4.पेड़ पौधे कार्बन डाइऑक्साइड से कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं जो मनुष्य के भजन का अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है

5. कार्बन डाइऑक्साइड गैस ऑक्सीजन गैस के विपरीत काम करती है ऑक्सीजन गैस आग जलाने का काम करती है तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस आग बुझाने का काम करती है

6. कार्बन डाइऑक्साइड गैस खमीर बनाने में सहायता प्रदान करती है खमीर से ही डबल रोटी आदि बन पाती है इस गैस का प्रयोग सोडा वाटर बनाते समय भी किया जाता है यह रंगहीन में स्वाधीन गैस है परंतु अगर इस गैस को छूने के पानी में छोड़ जाए तो उसे दूदिया कर देती है

 धन्यवाद


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नाइट्रोजन गैस के गुण


 नाइट्रोजन गैस के गुण  ​​​​​​वायु में पाए जाने वाले नाइट्रोजन गैस के निम्नलिखित गुण होते हैं  1.वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा नाइट्रोजन गैस की ही होती है यह वायु में लगभग 78% होती है   2.नाइट्रोजन गैस ऑक्सीजन गैस के साथ मिलकर उसके जलने के गुण की तीव्रता को काम करके उसे सांस लेने के लिए उपयुक्त बनती है   3.नाइट्रोजन एक रंगीन गांधी एवं स्वाधीन कैसे जो पानी में बहुत... Read More

 नाइट्रोजन गैस के गुण 

​​​​​​वायु में पाए जाने वाले नाइट्रोजन गैस के निम्नलिखित गुण होते हैं

 1.वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा नाइट्रोजन गैस की ही होती है यह वायु में लगभग 78% होती है 

 2.नाइट्रोजन गैस ऑक्सीजन गैस के साथ मिलकर उसके जलने के गुण की तीव्रता को काम करके उसे सांस लेने के लिए उपयुक्त बनती है 

 3.नाइट्रोजन एक रंगीन गांधी एवं स्वाधीन कैसे जो पानी में बहुत कम घुलती है 

4. नाइट्रोजन गैस अपने स्वरूप को परिवर्तित करती रहती है यह गैस से ठोस रूप में भी बदल जाती है

 धन्यवाद


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ऑक्सीजन गैस के गुण


 ऑक्सीजन गैस के गुण   प्राण दायक शक्ति - ऑक्सीजन सभी प्राणियों और पेड़ पौधों के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है तथा इस गैस को प्राण वायु भी कहा जाता है स्वास्थ्य द्वारा हम ऑक्सीजन को फेफड़ों में ग्रहण करते हैं फेफड़ों में गई वायु में से ऑक्सीजन का कुछ अंश रक्त अपने साथ मिल लेता है यह ऑक्सीजन रक्त में उपस्थित बचे हुए पाचन के साथ मिलकर जलता है इस जलने की क्रिया को किसी कारण कहते... Read More

 ऑक्सीजन गैस के गुण 

 प्राण दायक शक्ति - ऑक्सीजन सभी प्राणियों और पेड़ पौधों के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है तथा इस गैस को प्राण वायु भी कहा जाता है स्वास्थ्य द्वारा हम ऑक्सीजन को फेफड़ों में ग्रहण करते हैं फेफड़ों में गई वायु में से ऑक्सीजन का कुछ अंश रक्त अपने साथ मिल लेता है यह ऑक्सीजन रक्त में उपस्थित बचे हुए पाचन के साथ मिलकर जलता है इस जलने की क्रिया को किसी कारण कहते हैं जिससे शरीर में उर्जा उत्पन्न होती है उर्जा शरीर को क्रियाशील एवं जीवित रखती है

 दहन क्रिया में सहायक - ऑक्सीजन न केवल भोजन के साथ जलकर ऊर्जा उत्पन्न करती है वरन यह अन्य ज्वलन या दहन क्रियो में भी सहायक होती है जैसे घर में खाना बनाने के लिए अंगूठियां चूल्हे को जालना बस का ट्रैक्टर रेलवे इंजन हवाई जहाज, समुद्र जहाज में ज्वलन दहन क्रिया करना ताकि वे चल सके बिजली का उत्पादन करना आदि

 अत्यंत क्रियाशील गैस- ऑक्सीजन एक अत्यंत क्रियाशील गैस है जिसके कारण यह है अन्य गैसों के साथ शीघ्र ही मिल जाती है

 अशुद्धियों को दूर करने में सहायक- ऑक्सीजन वायुमंडल की सभी अशुद्धियां को नष्ट करती है सड़े हुए पदार्थ के जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न की गई गढ़ ऑक्सीजन के प्रभाव से नष्ट हो जाती है

 अन्य गैसों का निर्माण- ऑक्सीजन कार्बन के साथ मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन के साथ मिलकर हाइड्रोजन ऑक्साइड गैस पानी बनती है इस प्रकार यह अन्य गैस का निर्माण करती है

 मूल रूप से ग्रहण करना संभव नहीं- यद्यपि ऑक्सीजन हमारे अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक  है तो भी हम इसको मूल रूप से स्वास्थ्य द्वारा ग्रहण नहीं कर सकते यदि मूल रूप में इसे ग्रहण किया जाए तो हमारा शरीर जल जाएगा अतः वायु में ऑक्सीजन के साथ नाइट्रोजन मिलकर ऑक्सीजन के ज्वलन गुनिया तीव्रता को काफी कम कर देती है ताकि हम ऑक्सीजन में सांस ले सके 

 धन्यवाद -


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वायु के कार्य एवं महत्ववायु के कार्य एवं महत्व


 वायु के कार्य महत्व ​​​​ मुख्यतः वायु के कार्य तथा महत्व निम्नलिखित होते हैं   गैसों का आदान-प्रदान - जब हम सांस लेते हैं तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस बाहर निकलती है तथा ऑक्सीजन गैस ग्रहण करते हैं जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है ऑक्सीजन शरीर में पहुंचकर रक्त को शुद्ध करती है वह शरीर की प्रत्येक कोशिका को जीवन देती है और शरीर में विभिन्न प्रकार की क्रियाएं होने के पश्... Read More

 वायु के कार्य महत्व

​​​​ मुख्यतः वायु के कार्य तथा महत्व निम्नलिखित होते हैं 

 गैसों का आदान-प्रदान - जब हम सांस लेते हैं तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस बाहर निकलती है तथा ऑक्सीजन गैस ग्रहण करते हैं जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है ऑक्सीजन शरीर में पहुंचकर रक्त को शुद्ध करती है वह शरीर की प्रत्येक कोशिका को जीवन देती है और शरीर में विभिन्न प्रकार की क्रियाएं होने के पश्चात कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में शरीर से बाहर कर दी जाती है

 शरीर के ताप को सामान्य बनती है- वायु शरीर की अशुद्धियों को बाहर करती है तथा शरीर को वाष्प के रूप में बदलकर त्वचा को सुख देती है और शरीर के ताप को सामान्य 98.4 डिग्री अप बना देती है

 जल की उत्पत्ति करती है- दो भाग हाइड्रोजन और एफ भाग ऑक्सीजन को मिलने से जल की उत्पत्ति होती है इसका संकेत h2o लिखा जाता है

 वनस्पति को भोजन देकर उनकी वृद्धि करती है - पेड़ पौधे कार्बन डाइऑक्साइड और सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन बनाते हैं तथा वृद्धि करते हैं और बदले में ऑक्सीजन गैस वायुमंडल में छोड़ देते हैं इसके विपरीत मनुष्य ऑक्सीजन ग्रहण करता है और कार्बन डाइऑक्साइड निकलता है इसलिए मनुष्य को बाघों में टहलने तथा घूमने के लिए कहा जाता है क्योंकि ऐसे स्थान में ऑक्सीजन का अनुपात अधिक मात्रा में रहता है जो मानव के लिए हितकर होता है तथा स्वास्थ्य मैं वृद्धि करता है

 धन्यवाद


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