प्राणी जगत से प्राप्त तंतु-
इन तंतुओं की उत्पत्ति जीव जंतु जगत से होती है इसलिए इनको केंद्रीय जनता तंतु कहते हैं यह प्रोटीन निर्मित तंतु है इनके दो प्रमुख उदाहरण उन और रेशम है इसके बारे में मैं आपको इस ब्लॉग मैं मैं आपको रेशम के बारे में बताऊंगी और अगर आपको उनके बारे में जानना है तो मैं आपको दूसरे ब्लॉक में जानकारी दूंगी
रेशम-
रेशम का निर्माण एक विशेष प्रकार के कीड़ों द्वारा होता है इन्हें रेशम के कीड़े रहते हैं रेशम के कीड़े अधिकतर शहतूत के पेड़ों पर पाले जाते हैं युवा अवस्था में यह कीड़ा अपने मुख से एक विशेष प्रकार का लसदर पदार्थ निकलता है जिससे कोई कोकून के रूप में अपने चारों ओर लपेट चला जाता है यह रस हवा में सुख कर लंबा तंतु बन जाता है रेशम के कीड़ों को मारकर रेशम प्राप्त कर लिया जाता है रेशम पा अवस्था में ही प्राप्त होता है यदि थोड़ी देर हो जाए तो कीड़ा अपने चारों ओर धागे को काटकर पा की अवस्था से निकलकर बाहर हो जाता है और चारों ओर का लगता हुआ धागा नष्ट हो जाता है रेशम दो प्रकार का होता है प्रथम प्रकार के रेशम का तंतु शहतूत के पत्तों पर पहले कीड़ों से प्राप्त होता है जो चिकन चमकीला एक सा मोटा और पारदर्शक होता है यह तंतु कार्य क्रीम रंग का और उच्च कोटि का होता है इसी से रेशम होता है इस रेशम के तंतुओं की लंबाई सामान्य 800 से 1200 मीटर तक होती है लेकिन कभी-कभी यह 3000 मीटर तक लंबे होते हैं
घटिया रेशम जंगली कीड़ों से प्राप्त होता है और जंगली कीड़े आंख के पत्तों पर पाले जाते हैं यह रेशम मोटा कड़ा तथा कुछ भूरापन लिए होता है
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Vanshika
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