गदर पार्टी का इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
गदर पार्टी: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में सशस्त्र राष्ट्रवादियों द्वारा ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह की योजनाएं तैयार होने लगी थीं। भारत से बाहर, अमेरिका और कनाडा में बसे भारतीय देशभक्तों ने 1913 ईस्वी में 'गदर पार्टी' की स्थापना की।
इस ऐतिहासिक पार्टी के प्रमुख नेता लाला हरदयाल थे। दल के अन्य सक्रिय और मुख्य सदस्यों में निम्नलिखित नाम शामिल थे:
रासबिहारी बोस
राजा महेंद्र प्रताप
बरकतउल्ला
उबैदुल्लाह सिंधी
भाई भगवान सिंह
सोहन सिंह भकना
गदर पार्टी द्वारा राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने के लिए 'गदर' नाम का एक साप्ताहिक समाचार पत्र भी प्रकाशित किया जाता था। इस पत्र के मुख्य पृष्ठ (Front Page) पर स्पष्ट अक्षरों में लिखा रहता था: "अंग्रेजी राज का दुश्मन"।
गदर पार्टी: इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब भारत में आजादी की लड़ाई तेज हो रही थी, तब देश और विदेश में कई क्रांतिकारी गतिविधियां चल रही थीं। इसी दौरान गदर पार्टी की नींव रखी गई।
स्थापना और पृष्ठभूमि
युद्ध काल में बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में सशस्त्र राष्ट्रवादी विद्रोह की योजनाएं तैयार होने लगी थीं। इसी बीच, भारत से बाहर अमेरिका और कनाडा में बसे भारतीय देशभक्तों ने एकजुट होकर वर्ष 1913 में गदर पार्टी की स्थापना की।
प्रमुख नेता और सदस्य
इस क्रांतिकारी पार्टी के प्रमुख नेता लाला हरदयाल थे। उनके साथ इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में कई अन्य देशभक्तों ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
रासबिहारी बोस
राजा महेंद्र प्रताप
बरकतउल्ला
उबैदुल्लाह सिंधी
भाई भगवान सिंह
सोहन सिंह भकना
'गदर' समाचार पत्र: क्रांति की आवाज
गदर पार्टी केवल एक संगठन नहीं था, बल्कि विचारों को फैलाने का एक माध्यम भी था। पार्टी की ओर से 'गदर' नाम का एक सामाजिक व राजनीतिक पत्र प्रकाशित किया जाता था। इस पत्र के मुख्य पृष्ठ (Front Page) पर बड़े अक्षरों में लिखा रहता था:
FAQ
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गदर पार्टी की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
उत्तर: गदर पार्टी की स्थापना 1913 ईस्वी में अमेरिका और कनाडा में बसे भारतीय देशभक्तों द्वारा की गई थी। इसका मुख्य मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में था, जिसे 'युगांतर आश्रम' कहा जाता था।
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गदर पार्टी के प्रमुख नेता और संस्थापक कौन थे?
उत्तर: इस क्रांतिकारी दल के प्रमुख नेता लाला हरदयाल थे। इसके अलावा सोहन सिंह भकना (पार्टी के पहले अध्यक्ष), रासबिहारी बोस, राजा महेंद्र प्रताप, बरकतउल्ला और भाई भगवान सिंह इसके मुख्य व सक्रिय सदस्य थे।
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गदर' नाम का सामाजिक पत्र क्या था और इसका क्या नारा था?
उत्तर: 'गदर' इस पार्टी द्वारा प्रकाशित किया जाने वाला एक साप्ताहिक क्रांतिकारी समाचार पत्र था। इसके मुख्य (भोग) पृष्ठ पर हमेशा "अंग्रेजी राज का दुश्मन" लिखा रहता था, जो ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ उनके विरोध को दर्शाता था।
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Q4. प्रथम विश्व युद्ध (युद्ध काल) के दौरान गदर पार्टी की क्या योजना थी?
उत्तर: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर पार्टी के क्रांतिकारियों ने बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे अनेक क्षेत्रों में ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए एक बड़े सहस्त्र राष्ट्रवादी विद्रोह (Armed Rebellion) की योजना तैयार की थी।
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Q5. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गदर आंदोलन का क्या महत्व है?
उत्तर: गदर आंदोलन ने विदेशों में रह रहे भारतीयों को देश की आजादी के लिए एकजुट किया। इसने भारतीय युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना फूंकी और यह साबित किया कि भारत की आजादी की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूती से उठ रही थी।
Vanshika
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