Company Logo

Vanshika

WEFRU9450291115202
Scan to visit website

Scan QR code to visit our website

Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
Digital Diary Submit Post Vanshika

कविता( कोई लाकर दे मुझे )

कुछ रंग भरे फूल  कुछ खट्टे-मीठे फल थोड़ी बांसुरी की धुन थोड़ा जमुना का जल  कोई लाकर दे मुझे  मुझे एक सोना चढ़ा दिन एक रूपों भरी रात एक फूलों भरा गीत एक गीतों भरी बात  कोई लाकर दे मुझे एक छाता छाव का एक धूप की घड़ी एक बादलों का कोर्ट एक धूप की छड़ी कोई लाकर दे मुझे एक छुट्टी वाला दिन एक अच्छी सी किताब एक मीठा सा सवाल एक नन्हा सा जवाब कोई ला कर दे मुझे   दामोदर अग्रवाल     Read More
कुछ रंग भरे फूल  कुछ खट्टे-मीठे फल थोड़ी बांसुरी की धुन थोड़ा जमुना का जल  कोई लाकर दे मुझे  मुझे एक सोना चढ़ा दिन एक रूपों भरी रात एक फूलों भरा गीत एक गीतों भरी बात  कोई लाकर दे मुझे एक छाता छाव का एक धूप की घड़ी एक बादलों का कोर्ट एक धूप की छड़ी कोई लाकर दे मुझे एक छुट्टी वाला दिन एक अच्छी सी किताब एक मीठा सा सवाल एक नन्हा सा जवाब कोई ला कर दे मुझे   दामोदर अग्रवाल    
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 177 Views

नए स्कूल का पहला दिन

नए स्कूल का पहला दिन
मेरा नाम वंशिका है मैं आपको अपने नए स्कूल जाने की कुछ बातें बताने वाली हूं पहले तो मैं आपको अपने स्कूल की बातें बताती हूं तो मैं आपको बताने जा रही हूं आई शुरू करते हैं मैं 8th क्लास में थी तो हमारे पेपर मार्च को होते थे तो हमारे फाइनली पेपर मार्च को हुए फिर 1 अप्रैल को हमें रिजल्ट मिला उसी दिन हमारी फेयरवेल पार्टी थी तो रिजल्ट में मैं फर्स्ट आई थी जो हमारी प्रिंसिपल मैम थी उन्होंने मुझे गिफ्ट दिया... Read More
मेरा नाम वंशिका है मैं आपको अपने नए स्कूल जाने की कुछ बातें बताने वाली हूं पहले तो मैं आपको अपने स्कूल की बातें बताती हूं तो मैं आपको बताने जा रही हूं आई शुरू करते हैं मैं 8th क्लास में थी तो हमारे पेपर मार्च को होते थे तो हमारे फाइनली पेपर मार्च को हुए फिर 1 अप्रैल को हमें रिजल्ट मिला उसी दिन हमारी फेयरवेल पार्टी थी तो रिजल्ट में मैं फर्स्ट आई थी जो हमारी प्रिंसिपल मैम थी उन्होंने मुझे गिफ्ट दिया और एक ट्राफी दी ट्राफी देते हुए हमारी फोटो खींची गई फोटो खींचने के बाद मैं बहुत खुश थी क्योंकि मैं फर्स्ट आई थी और सेकंड हमारी क्लास में एक लड़का आया था जिसका नाम विक्रांत था और प्रियांशु आया था जो हमारी क्लास में था फिर उन्हे ट्रॉफी मिली ट्रॉफी मिलने के बाद फिर हमारी फेयरवेल पार्टी शुरू हो गई शुरू होने के बाद फिर हमें नाश्ता कर गया नाश्ता करने के बाद फिर हमने खाना खाया खाना खाने के बाद फिर म्यूजिक स्टार्ट हुआ मिस यू स्टार्ट होने के बाद हम थोड़ा नाच गए और फिर नाचने के बाद हमें हमारी मैम ने समझाया   फिर मैं 2 अप्रैल को एडमिशन लेने गई एडमिशन एक मैडम कर रही थी उनका मुझे पहले नाम नहीं पता था उनका नाम था अंजू मैडम और वही हमारी क्लास टीचर थी तो उन्होंने मेरा टेस्ट लिया टेस्ट में उन्होंने एप्लीकेशन दी और माइसेल्फ और डिक्टेशन बोली तो मैंने पूरा टेस्ट कर दिया फिर उन्होंने मुझसे पूछा की संज्ञा क्या है मैंने बताया किसी व्यक्ति प्रस्तुत अथवा प्राणी के नाम को संज्ञा कहते हैं फिर मैंने कहा कि ठीक है तुम बैठ जाओ फिर मेरा टेस्ट पूरा हो गया तो मैं टेस्ट में पास हो गई और फिर मैं एडमिशन हो गया उन्होंने मुझे डॉक्यूमेंट लिए फिर उन्होंने कहा कि तुम्हारा एडमिशन हो गया है तो तुम स्कूल आ जाना फिर मैं थोड़े दिन बाद स्कूल गई तो मेरा स्कूल का पहला दिन मैं क्लास में जाकर बैठ गई फिर मैं में पढ़ाया हम पढ़ लिए फिर एक घंटा खा ले गया जो घंटा खाली था उसमें मेरा मन नहीं लगा लेकिन वहां पर मेरी तब तक कोई फ्रेंड नहीं बनी थी क्योंकि बोल तो रहे थे तब मेरा नाम पूछा और कहां कहां की हो तो मैं बता दिया फिर मेरा वहां पर मन नहीं लगा एक-दो दिन तक क्योंकि जो मेरी बेस्ट फ्रेंड थी उन्होंने कहीं और एडमिशन लिया था और मैं कहीं और तो मेरा मन नहीं लगा वहां पर फिर मैं जब दूसरे दिन गई फिर मेरा थोड़ा मन लगा वहां पर और फिर फ्रेंड भी बन गई फ्रेंड बनते फिर वहां पर मेरी एक क्लास की बेस्ट फ्रेंड बनी फरिया तो जब हमें महीने हो गए तो फिर हमारी होल बेस्ट फ्रेंड भी बनी हमारा पूरा ग्रुप बना पर बेस्ट फ्रेंड क्लास की फरिया थी  फरिया में और मुझ में कभी-कभी लड़ाई भी बस जाती है लेकिन हम फिर बोलने लगते हैं तो हमारे नए स्कूल की बात नहीं थी और अब हम यहीं पर खत्म करते हैं धन्यवाद?
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 157 Views

(मैं एटीएम हूं) एटीएम के बारे में

(मैं एटीएम हूं)  एटीएम के बारे में
(एटीएम के बारे में कुछ सूचनाओं )  मैं एटीएम हूं मेरा पूरा नाम ऑटोमेटेड टेलर मशीन कुछ लोग मुझे मिनी मशीन कैश मशीन और कैश प्वाइंट कहते हैं इतना ही नहीं कुछ लोग प्यार से मुझे एनी टाइम मनी भी कह देते हैं  कुछ वर्ष पहले तक लोगों को अपना पैसा निकालने के लिए बैंक जाना होता था कहीं बैंक घरों से दूर होते हैं उसमें बहुत समय भी लगता है लेकिन मेरे आ जाने के बाद बैंकों ने अपने खाता धारकों को सुविधा दे दी है कि... Read More
(एटीएम के बारे में कुछ सूचनाओं )  मैं एटीएम हूं मेरा पूरा नाम ऑटोमेटेड टेलर मशीन कुछ लोग मुझे मिनी मशीन कैश मशीन और कैश प्वाइंट कहते हैं इतना ही नहीं कुछ लोग प्यार से मुझे एनी टाइम मनी भी कह देते हैं  कुछ वर्ष पहले तक लोगों को अपना पैसा निकालने के लिए बैंक जाना होता था कहीं बैंक घरों से दूर होते हैं उसमें बहुत समय भी लगता है लेकिन मेरे आ जाने के बाद बैंकों ने अपने खाता धारकों को सुविधा दे दी है कि वह मेरे द्वारा कभी भी अपना पैसा निकाल सकते हैं आजकल तो मैं पैसा निकालने के अलावा पैसा जमा करने खाता बैलेंस पता करने दूसरों के खाते में पैसा भेजने जैसे कई अन्य काम भी झटपट कर दे रहा हूं   मुझे प्रयोग में लाने के लिए बैंक अपने खाता धारक को एक प्लास्टिक कार्ड देते हैं जिसे एटीएम कार्ड कहते हैं इसमें कार्ड का नंबर और कुछ गोपनी जानकारी होती है इसके प्रयोग के लिए बैंक एक ओपन ने नंबर भी देता है जिस दिन (पर्सनल आईडेंटिफिकेशन )नंबर कहते हैं  मेरा उपयोग बहुत आसान है मेरी सुविधा प्राप्त करने के लिए मशीन में बने खाते में अपना एटीएम कार्ड डाले तुरंत कंप्यूटर स्क्रीन पर भाषा चुनने के लिए विकल्प आएगा आपको हिंदी या अंग्रेजी जो भी भाषा चुन्नी है उसके सामने का बटन दबाया स्क्रीन को टच स्पर्श करें इसके बाद स्क्रीन पर पिन नंबर डालने का विकल्प आएगा उसमें अपना को पनीर नंबर डालें अब स्क्रीन पर आएगा कि आपको क्या सेवा चाहिए पैसा निकालना है खाते में बैलेंस पता करना है या अन्य कोई अगर आप पैसा निकालते हैं तो विड्रोल निकासी का बटन दबाए मैं अब पूछूंगा कि आपको कितना रुपया निकालना है खाली जगह में उतनी संख्या भर दे जितना रुपया चाहिए फिर मैं पूछूंगा कि क्या आपको इस निकासी की पर्ची चाहिए यदि हां तो हां का बटन दबाए थोड़ी देर में आप देखेंगे कि आपके द्वारा चाहा गया रुपया और पर्ची बाहर आ रही है   इसके बाद भी स्क्रीन पर कुछ निर्देश आते रहेंगे उन्हें पढ़ते हुए अपनी आवश्यकता के अनुसार विकल्प चुनने स्क्रीन को टच स्पर्श करते अथवा बटन दबाते रहे   यह तो हुई मेरे इस्तेमाल की की बात पर मुझे प्रयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी है जैसे कि अपना पिन नंबर कभी किसी को ना बताएं ना ही किसी के सामने मशीन में अपना पिन नंबर दर्ज करें  हमेशा एक बार में एक ही व्यक्ति मेरा प्रयोग करें भीड़ होने पर अंदर से लोगों को बाहर जाने को कह दे   पर्ची देखने के बाद अपने साथ ले जाए अथवा कूड़ादन में डालें किसी भी प्रकार की गंदगी ना फैलाएं   
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 61 Views

मैं और हॉकी

मैं और हॉकी
( क्योंकि हमारे देश का राष्ट्रीय खेल है इस खेल की ओलंपिक प्रतियोगिताओं में भारत पर विजय होता आया है अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त होगी खिलाड़ी कुंवर दिग्विजय सिंह बाबू ने हेलन की फिनलैंड में हुए हॉकी मैच का सम्राट आत्मक परिचय दिया है) बहुत से लोगों का ऐसा विचार है कि खेलकूद से समय नष्ट होता है और स्वास्थ्य के लिए व्यायाम कर लिया जाए यही काफी है पर यह ठीक नहीं है खेल कोशिश स्वास्थ्य तो बनता ही है... Read More
( क्योंकि हमारे देश का राष्ट्रीय खेल है इस खेल की ओलंपिक प्रतियोगिताओं में भारत पर विजय होता आया है अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त होगी खिलाड़ी कुंवर दिग्विजय सिंह बाबू ने हेलन की फिनलैंड में हुए हॉकी मैच का सम्राट आत्मक परिचय दिया है) बहुत से लोगों का ऐसा विचार है कि खेलकूद से समय नष्ट होता है और स्वास्थ्य के लिए व्यायाम कर लिया जाए यही काफी है पर यह ठीक नहीं है खेल कोशिश स्वास्थ्य तो बनता ही है साथ-साथ मनुष्य कुछ ऐसे गुण विशेषता है जिनका जीवन में विशेष महत्व होता है और जो व्यायाम से नहीं प्राप्त हो सकते जैसे घमंड ना करना हारने में सांस ना छोड़ना दूसरे से चोट लग जाए तो उसे सहन कर लेना विशेष दिए के लिए नियम पूर्वक कार्य करना लोग सफलता न पाने पर साहस छोड़ बैठे हैं और दोबारा प्रयास नहीं करते परंतु खिलाड़ी ऐसा नहीं करता हर के बाद भी वह प्रयास करता है की हरी बड़ी जीत लेता है  दंड संकल्प द्वारा अपने देश की सेवा का मेरा स्वप्न उन दिन पूरा हुआ जिस दिन में हेलसिंग की फिनलैंड के मैदान में अपनी हॉकी टीम को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक में जीता सका उसे दिन के जन गण मन का मधुर वादन आज कई वर्षों के पश्चात भी मेरे कानों में गूंज रहा है  यूं तो खेल मेरे सारे कुटुंब को प्रिया है परंतु यह कहना है कि मेरे पिता स्वर्गीय राय बहादुर रघुनाथ सिंह खेल में विशेष रूचि रखते थे मेरे पास बहुत सी तस्वीरों के साथ एक तस्वीर दी साल की उम्र की है जिसमें में होगी और बोल लिए बैठा हूं  मेरे खेल का प्रारंभ बाराबंकी में हुआ मेरे बड़ों का कहना है की कमाई का काफी पैसा मेरे घर के मोटर खाने का फाटक बनाने में खर्च हुआ क्योंकि वह हर महीने मेरी होगी की गेंद से टूटा था कुछ ऐसी ही कहानी लखनऊ के कार्य कुछ कॉलेज में छात्रावास की दीवारें भी कहती है मुझे यह आज तक ठीक से याद है कि जब मैं बाराबंकी से लखनऊ पढ़ने आया तो मेरे सामान में सबसे अधिक हॉकी स्टिक की महत्ता थी अपने कॉलेज की टीम में खेलने का मुझे इस साल सौभाग्य प्राप्त हुआ  सन 1936 में में दिल्ली के एक टूर्नामेंट में खेलने गया जिसमें देश किए सुप्रसिद्ध खिलाड़ी मोह हुसैन फुल बैंक खेल रहे थे उसे दिन खेल पर मुझे एक सुंदर उपहार मिला मेरा साहस और प्रयास बढ़ता गया मेरी सदैव इच्छा होती रही कि किस प्रकार खेलों की जिससे इस खेल के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच जाओ सन 1936 से 40 में मुझको अपने प्रदेश की ओर से खेलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 116 Views

लाल बहादुर शास्त्री

लाल बहादुर शास्त्री
बच्चों आपके विद्यालय में 2 अक्टूबर को दो महान विभूतियों का जन्मदिन मनाया जाता है एक मोहनदास करमचंद गांधी और दूसरे जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 ई को मुगल सारी तत्कालीन वाराणसी वर्तमान चंदौली के साधारण परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम शारदा प्रसाद तथा माता का नाम रामदुलारी देवी था मात्र डेढ़ वर्ष की अवस्था में पिता का देहांत हो ज... Read More
बच्चों आपके विद्यालय में 2 अक्टूबर को दो महान विभूतियों का जन्मदिन मनाया जाता है एक मोहनदास करमचंद गांधी और दूसरे जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 ई को मुगल सारी तत्कालीन वाराणसी वर्तमान चंदौली के साधारण परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम शारदा प्रसाद तथा माता का नाम रामदुलारी देवी था मात्र डेढ़ वर्ष की अवस्था में पिता का देहांत हो जाने के कारण अनेक अभाव और कठिनाइयों को झेलते हुए में जीवन पद पर आगे बढ़े में स्वतंत्र भारत के पहले रेल मंत्री बने उनके बाद उद्योग मंत्री तथा  सौराष्ट्र मंत्री भी बने जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद यह सर्व संपत्ति से भारत के दूसरे प्रधानमंत्री भी बने देशवासियों के स्वाभिमान को जगाने वाले महान लोकप्रिय नेता लाल बहादुर शास्त्री का निधन 10 जनवरी 1966 को ताशकंद मैं हुआ था                     प्रसंग - 1 शास्त्री जी उन दिनों रेल मंत्री थे एक बार उन्हें बनारस के पास सेव पुरी जाना पड़ा छोटे कद का होने के कारण शास्त्री जी को गाड़ी से प्लेटफार्म पर उतरने में काफी दिक्कत हुई यह देखकर वहां खड़ी कुछ औरतें हंस कर कहने लगे कि अब महसूस हो रहा होगा कि महिलाओं को प्लेटफार्म पर उतरते समय कितनी कठिनाई का सामना करना पड़ता है प्लेटफार्म पर पहुंचते ही शास्त्री जी ने स्टेशन मास्टर को बुलाया और उनसे कहा कि क्या वह एक फावड़े का इंतजाम कर सकते हैं फावड़े तुरंत लाया गया शास्त्री जी ने फावड़ा लेकर उसे नीचे प्लेटफार्म के दूसरी ओर जमीन खोदने शुरू कर दी और मिट्टी प्लेटफार्म पर डालने लगे यह देखकर वहां जो लोग खड़े थे में भी फावड़ा और उसी तरह की चीज ले आए और शास्त्री जी का अनुकरण करने लगे सभी को जब सुखद आश्चर्य हुआ जब 3 घंटे के अंदर वह नीचे प्लेटफार्म मानक स्तर तक ऊंचा बना                    प्रसंग -2  यह प्रसंग भी उसे समय का है जब शास्त्री जी रेल मंत्री थे और सरकारी काम से इलाहाबाद प्रयागराज जा रहे थे शास्त्री जी की कार्यालय फटाक से थोड़ी ही दूर थी कि लाइनमैन ने फाटक बंद कर दिया शास्त्री जी के स्टाफ का एक सदस्य लाइनमैन की ओर दौड़कर गया और उससे कहा कि कर में रेल मंत्री बैठे हैं तुम तुरंत फाटक खोल दो लाइनमैन ने फाटक खोलने से साफ मना कर दिया और बोला कि मैं नहीं जानता कि कौन रेल मंत्री है और कौन प्रधानमंत्री में अपनी ड्यूटी कर कर रहा हूं जब आने वाली गाड़ी गुजर जाएगी फाटक खोल दूंगा स्टाफ के अवसर ने लौटकर कहा श्रीमान वह आदमी बड़ा जिद्दी है उसके विरुद्ध सक्त कार्रवाई की जानी चाहिए दूसरे दिन जब लाइनमैन की तरक्की कर उसे आगे का ग्रेड दिया गया तो सभी लोग अजब्दे में पड़ गए                        प्रसंग-2   यह प्रश्न उन दिनों का है जब शास्त्री जी प्रधानमंत्री थे एक बार उनका ड्राइवर सुबह निश्चित समय पर नहीं आया उन्होंने कुछ समय प्रतीक्षा की फिर हाथ में फाइल लेकर पैदल ही दफ्तर की ओर चल दिए उनका दफ्तर घर से करीब 1 किलोमीटर दूर था इस बात से सचिवालय में हड़कंप मच गया ड्राइवर से जवाब तलब किया गया जवाब में उसने कहा कि एकांक उसका छोटा बच्चा गंभीर रूप से बीमार हो गया था और उसे भाकर डॉक्टर के पास जाना पड़ा शिकायती फाइल जब शास्त्री जी के पास पहुंची तो उन्होंने उसे पर टिप्पणी लिखी की उसके लिए उसके बेटे के जीवन का महत्व और किसी भी कार्य से अधिक महत्वपूर्ण    
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 284 Views

आत्मनिर्भरता

आत्मनिर्भरता
( प्रस्तुत निबंध में लेखक ने युवकों को स्वयं पर निर्भर रहने की प्रेरणा दी) विद्वानों का यह कथन बहुत ठीक है कि नम्रता ही स्वतंत्रता की दरिया माता है इस बात को सब लोग मानते हैं कि आत्म संस्कार के लिए थोड़ी बहुत मानसिक स्वतंत्रता परम आवश्यक है चाहे उसे स्वतंत्रता में अभियान और नर्मदा दोनों का मेल हो और चाहे वह निर्माता ही से उत्पन्न हो यह बात तो निश्चित है कि जो बहुत ज्यादा पूर्वक जीवन व्यतीत करना चा... Read More
( प्रस्तुत निबंध में लेखक ने युवकों को स्वयं पर निर्भर रहने की प्रेरणा दी) विद्वानों का यह कथन बहुत ठीक है कि नम्रता ही स्वतंत्रता की दरिया माता है इस बात को सब लोग मानते हैं कि आत्म संस्कार के लिए थोड़ी बहुत मानसिक स्वतंत्रता परम आवश्यक है चाहे उसे स्वतंत्रता में अभियान और नर्मदा दोनों का मेल हो और चाहे वह निर्माता ही से उत्पन्न हो यह बात तो निश्चित है कि जो बहुत ज्यादा पूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहता है उसके लिए वह गुण अनिवार्य है जिससे आत्मनिर्भरता आती है और जिसे अपने पैरों के बल खड़ा होना आता है युवा को यह सदा स्मरण रखना चाहिए कि उसकी आकांक्षाएं उसकी योग्यता से कई बड़ी हुई है उसे इस बात ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने बड़ों का सम्मान करें चोटों और बराबर वालों से कोमलता का व्यवहार करेंगे बातें आत्म मर्यादा के लिए आवश्यक है यह सारा संसार जो कुछ हम है और जो कुछ हमारा है हमारा शरीर हमारी आत्मा हमारे कर्म हमारे भोग हमारे घर की ओर बाहर की दशा हमारे बहुत से अवगुण और थोड़े से गुण सब इसी बात की आवश्यकता प्रकट करते हैं कि हमें अपनी आत्मा को नाम रखना चाहिए नर्मदा से मेरा अभिप्राय दब्बूपन से नहीं है जिसके कारण मनुष्य दूसरों का मुंह ताकता है जिससे उसका संकल्प सेन और उसकी प्रज्ञा बंद हो जाती है जिसके कारण आगे बढ़ने के समय भी वह पीछे रहता है अवसर पढ़ने पर चटपट किसी बात का निर्णायक नहीं कर सकता मनुष्य का बेड़ा अपने ही हाथ में है उसे वह चाहे जितना लगे सच्ची आत्मा वही है जो प्रत्येक दशा में प्रत्येक स्थिति के अपनी रहा आप निकलती है  अब तुम्हें क्या करना चाहिए इसका ठीक-ठाक उत्तर तू ही को देना होगा दूसरा कोई नहीं दे सकता कैसा भी विश्वास पात्र मित्र हो तुम्हारे इस काम को वह अपने ऊपर नहीं ले सकता हम अनुभवी लोगों की बातों को आधार के साथ सुन बुद्धिमानों की सलाह को मृत ज्ञात पूर्वक माने पर इस बात को निश्चित समझ कर कि हमारे कामों से ही हमारी रक्षा में हमारा पतन होगा हमें अपने विचारों और निर्णय की स्वतंत्रता को दानदाता पूर्वक बनाए रखना चाहिए जिस पुरुष की दृष्टि सदा नीचे रहती है उसका सर कभी ऊपर नहीं होगा नीचे दृष्टि रखने से यद्यपि रास्ते पर रहेंगे पर इस बात को न देखेंगे कि यह रास्ता कहां ले जाता है चित्र की स्वतंत्रता को मतलब चेष्टा की कठोरता या प्रकृति की उग्रता नहीं है अपने व्यवहारों में कोमल रहो और अपने देश को उच्च रखो इस प्रकार नम और उच्च से दोनों बानो अपने मन को कभी मरा हुआ ना रखो जितना ही जो मनुष्य अपना लक्ष्य ऊपर रखता है उतना ही उसका  संसार में ऐसे ऐसे दंड चित्र मनुष्य हो गए हैं जिन्हें मरते दम तक सत्य की टेक नहीं छोड़ी अपनी आत्मा के विरुद्ध कोई काम नहीं किया राजा हरिश्चंद्र के ऊपर इतनी इतनी विपत्तियां आई पर उन्होंने अपना सत्य नहीं छोड़ा उसकी प्रतिज्ञा यही रही   
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 110 Views

अपराजिता

अपराजिता
(प्रस्तुत पाठ में एक दिव्यांग लड़की के आदमी साहस एवं विलक्षण प्रतिभा का वर्णन करते हुए स्पष्ट किया गया है कि व्यक्ति ड्रेंड इच्छा शक्ति से विपरीत परिस्थितियों में भी अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकता है) कभी-कभी अचानक ही विधाता हमें ऐसे विलक्षण व्यक्ति से मिला देता है जिसे देख स्वयं अपने जीवन की जीत देता बहुत छोटी लगने लगती है हमें तब लगता है कि भले ही उसे अंतर्यामी में हमें जीवन के कभी अक्षम रात का कार... Read More
(प्रस्तुत पाठ में एक दिव्यांग लड़की के आदमी साहस एवं विलक्षण प्रतिभा का वर्णन करते हुए स्पष्ट किया गया है कि व्यक्ति ड्रेंड इच्छा शक्ति से विपरीत परिस्थितियों में भी अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकता है) कभी-कभी अचानक ही विधाता हमें ऐसे विलक्षण व्यक्ति से मिला देता है जिसे देख स्वयं अपने जीवन की जीत देता बहुत छोटी लगने लगती है हमें तब लगता है कि भले ही उसे अंतर्यामी में हमें जीवन के कभी अक्षम रात का कारण ही दंडित कर दिया हो किंतु हमारे किसी अंग को हमसे विषण कर हमें उससे वंचित तो नहीं किया फिर भी हमने से कौन ऐसा मानव है जो अपनी विपत्ति के कठिन श्रेणी में विधाता को दोषी नहीं ठहरता मैं अभी पिछले ही महीने एक ऐसी अभी शब्द काय अच्छी है जिसे विधाता ने कठोरता दंड दिया है किंतु उसे वह लत मस्तक आनंदी मुंद्रा में झेल रही है विधाता को कोसकर नहीं  उसकी कोठी का अहाता एकदम हमारे बंगले के आटे से जुड़ा था अपनी शानदार कोठी में उसे पहली बार कर से उतरते देखा तो आश्चर्य से देखते ही रही गई कर का द्वार खुला एक प्रोडक्ट ने उतरकर पिछली सीट से एक वहीं से निकलकर सामने रख दिया और भीतर चली गई दूसरे ही कर धीरे-धीरे बिना किसी सहारे के कर से एक युवती ने अपनी निर्जीव निकले धड़ की बड़ी क्षमता से नीचे उतर फिर बैसाखियों से ही वहीं चेयर तक पहुंच उसमें बैठ गई और बड़ी तट स्थित से उसे स्वयं चलते कोटि के भीतर चली गई में फिर चित्र नियत समय पर उसका यह विचलित अब आगमन देखी और आश्चर्य चकित रह जाती ठीक जैसे कोई मशीन बटन खटखटाती अपना काम किया चली जा रही हो   धीरे-धीरे मेरा उसे परिचय हुआ कहानी सुनी तो दंग रह गई नियति के प्रत्येक कठोर आघात को अति सामान्य धैर्य एवं साहस से झेलती वह बीते भर की लकड़ी मुझे किसी देवनागना से काम नहीं लगी में चाहती हूं कि मेरी पंक्तियों को उदास आंखों वाला वह गोरा उजाले वेस्टन से सज्जित लखनऊ का मेधावी युवक भी पड़े जिसे मैंने कुछ महापुरुष अपनी बहन के यहां देखा था वह इस की परीक्षा देने इलाहाबाद प्रयागराज गया लौटते समय किसी स्टेशन पर चाय लेने उतरा की गाड़ी चल पड़ी चलती ट्रेन में हाथ के कुल्हड़ सहित चढ़ने के प्रयास में गिरा और पहिए के नीचे हाथ पर गया प्राण तो बच गए पर बाया हाथ चला गया वह विच्छेद बुझा के साथ-साथ मानसिक संतुलन भी खो बैठा पहले दुख बुलाने के लिए नशे की गोलियां खाने लगा और अब नूर मंजिल की शरण गई है केवल एक हाथ खोकर ही उसने हथियार डाल दिए इधर चंद्र जिसका निकला दर्द है निस्तारण मानसिक पेड़ मात्रा सदा उटफुल है चेहरे पर विषाद की एक रेखा भी नहीं बुद्धि आंखों में आदमी उत्साह प्रतिफल प्रतिशत भर पर उत्कट जीजी विशाल और फिर कैसी-कैसी महत्वाकांक्षाएं     
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 42 Views

खानपान की बदलती तस्वीर

खानपान की बदलती तस्वीर
(इस पाठ में लेखक ने समय या अनुसार मनुष्य के खानपान में आया आधुनिक तथा मिश्रित शैली के परिवर्तनों को बताया है) पिछले 10 -15 वर्षों में हमारे खानपान की संस्कृति में एक बड़ा बदलाव आया है इटली -डोसा, बड़ा-सांभर,रसम और केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है यह उत्तर भारत के भी हर शहर में उपलब्ध है और अब तो उत्तर भारत की ढाबा संस्कृति लगभग पूरे देश में फैल चुकी है अब आप कहीं भी हो उत्तर भारतीय रोटी दाल सांग... Read More
(इस पाठ में लेखक ने समय या अनुसार मनुष्य के खानपान में आया आधुनिक तथा मिश्रित शैली के परिवर्तनों को बताया है) पिछले 10 -15 वर्षों में हमारे खानपान की संस्कृति में एक बड़ा बदलाव आया है इटली -डोसा, बड़ा-सांभर,रसम और केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है यह उत्तर भारत के भी हर शहर में उपलब्ध है और अब तो उत्तर भारत की ढाबा संस्कृति लगभग पूरे देश में फैल चुकी है अब आप कहीं भी हो उत्तर भारतीय रोटी दाल सांग आपको मिल ही जाएगी फास्ट फूड (शीघ्रता से तैयार किया जा सकने वाला खाद्य पदार्थ) का चलन भी बड़े शहरों में खूब बड़ा   इस फास्ट फूड में बर्गर नूडल्स जैसी कई चीजे शामिल है एक जमाने में कुछ ही लोगों तक सीमित चाइनीस नूडल्स अब सॉन्ग भगत किसी के लिए अजनबी नहीं रही इस तरह नमकीन के कई स्थानीय प्रकार अभी तक भले मौजूद हो लेकिन आलू चिप्स के कहीं विद्यापीठ रूप तेजी से घर-घर में अपनी जगह बनते जा रहे हैं  गुजराती ढोकला -गठिया भी अब देश के कई हिस्सों में स्वाद लेकर खा जाते हैं और बंगाली मिठाई की केवल रास्पबेरी चर्चा ही नहीं होती में कई शहरों में पहले की तुलना में अधिक उपलब्ध है यानी स्थाई व्यंजनों के साथ ही अब अन्य प्रदेशों के व्यंजन पकवान भी परी हर क्षेत्र में मिलते हैं और मध्यम वर्गीय जीवन में भोजन विविधता अपनी जगह बना चुकी है  कुछ चीजों और भी हुई है मसाला अंग्रेजी राज तक जो ब्रेड केवल साहिबी ठिकानों तक सीमित थी वह पशुओं तक पहुंच चुकी है और नाश्ते के रूप में लाखों करोड़ों भारतीय घरों में से की ताली जा रही है खानपान की इस बदली हुई संस्कृति से सबसे अधिक प्रभावित नहीं पीढ़ी हुई है जो पहले के स्थानीय व्यंजनों के बारे में बहुत कम जानती है पर कहीं नहीं व्यंजनों के बारे में बहुत कुछ जानती है स्थानीय व्यंजन भी तो अब घटकर कुछ ही चीजों तक सीमित रहे गए हैं मुंबई की पाव भाजी और दिल्ली के बोले कुलचे की दुनिया पहले की तुलना में बड़ी जरूर है पर अन्य स्थानीय व्यंजनों की दुनिया छोटी हुई है जानकारी यह भी बताते हैं कि मथुरा के पेड़ों और आगरा के बेटे नमकीन में अब वह बात कहां रही  यानी जो चीज बची भी हुई है उनकी गुणवत्ता में फर्क फिर मौसम और ऋतु के अनुसार फलों याद नो से जो व्यंजनों और पकवान बना करते हैं उन्हें बनाने की फुर्सत भी अब कितने लोगों को रह गई है अब ग्रहणियों या कामकाजी महिलाओं के लिए खरबूजे के बीज सुखना छीलना और फिर उनसे व्यंजन तैयार करना सचमुच दुख साध्य है   यानी हम पाते हैं कि एक और तो स्थानीय व्यंजनों में कमी आई है दूसरी ओर में ही देसी विदेशी व्यंजन अपनाई जा रही है जिन्हें बनाने पकाने में सुविधा हो जटिल प्रक्रियाओं वाली चीज तो कभी कब्र व्यंजन पुस्तिकाओं के आधार पर तैयार की जाती है अब शहरी जीवन में जो भाग्यम भाग है उसे देखते हुए यह स्थिति स्वभाव भाविक लगती है फिर कमर तोड़ महंगाई ने भी लोगों को कहीं चीजों से धीरे-धीरे वंचित किया है जिन व्यंजनों में बिना मेरे के स्वाद नहीं आता उन्हें बनाने पकाने के बारे में भला कौन चार बार नहीं सोचेगा 
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 70 Views

बस की यात्रा

बस की यात्रा
(प्रस्तुत व्यंग्य में लेखक ने पुरानी बस को सजीव रूप में दिखाते हुए बस यात्रा को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है) हम पांच मित्रों ने तय किया कि शाम 4:00 की बस से चले पन्ना से अब इसी कंपनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है जो जबलपुर की ट्रेन मिला देती है सुबह घर पहुंच जाएंगे हमें से दो को सुबह काम पर हाजिर होना था इसलिए वापसी का यही रास्ता अपनाना जरूरी था लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस्लाम वाल... Read More
(प्रस्तुत व्यंग्य में लेखक ने पुरानी बस को सजीव रूप में दिखाते हुए बस यात्रा को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है) हम पांच मित्रों ने तय किया कि शाम 4:00 की बस से चले पन्ना से अब इसी कंपनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है जो जबलपुर की ट्रेन मिला देती है सुबह घर पहुंच जाएंगे हमें से दो को सुबह काम पर हाजिर होना था इसलिए वापसी का यही रास्ता अपनाना जरूरी था लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस्लाम वाली बस से सफल नहीं करते क्या रास्ते में डाकू मिलते हैं नहीं बस डाकिन है  बस को देखा तो श्रद्धा उम्र पड़ी खूब विपरीत थी सर्दियों के अनुभव के निशान लिए हुए थे लोग इसलिए इसे सफल नहीं करना चाहते कि वृद्धावस्था में इसे कष्ट होगा यह बस पूजा के योग्य थी उसे पर सवार कैसे हुआ जा सकता है  बस कंपनी के एक हिस्सेदारी भी उसे बस में जा रहे थे हमने उनसे पूछा यह बस चलती भी है वह बोले चलती क्यों नहीं है जी अभी चलेगी हमने कहा वहीं तो हम देखना चाहते हैं अपने आप चलती है यह हां जी और कैसे चलेगी  गजब हो गया ऐसी बस अपने आप चलती है हम आगे पीछे करने लगे डॉक्टर मित्र ने कहा डरो मत चलो बस हेलो भाभी है नई नवेली बेसन से ज्यादा विश्व में है हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी हम बैठ गए जो छोड़ने आए थे में इस तरह देख रहे थे जैसे अंतिम विदा दे रहे हैं उनकी आंखों का रही थी आना-जाना तो लगा ही रहता है पाया है सो जाएगा राजा रंग फकीर आदमी को कुछ करने के लिए एक नियमित चाहिए  इंजन सचमुच स्टार्ट हो गया ऐसा जैसे सॉरी बस ही इंजन है और हम इंजन के भीतर बैठे हैं कांच बहुत कम बच्चे थे जो बच्चे थे उनसे हमें बचाना था हम फॉरेन खिड़की से दूर सड़क गए इंजन चल रहा था हमें लग रहा था कि हमारी सीट के नीचे इंजन है बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गांधी जी के सहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन के वक्त आवश्यक जवान रही होगी उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी हर हिस्सा दूसरे से सहयोग कर रहा था पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के तौर से गुजर रही थी सीट पर बॉडी से सहयोग चल रहा था कभी लगता सेट बॉडी को छोड़कर आगे निकल गई है कभी लगता की सीट को छोड़कर बॉडी आगे आगे जा रही है 8 10 मिल चलने पर सारे भेदभाव मिट गए यह समझ में नहीं आता था की सीट पर हम बैठे हैं या सेट हम पर बैठी है   एक आंख बस रुक गई मालूम हुआ कि पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया ड्राइवर ने बाल्टी में पेट्रोल निकाल कर उसे बगल में रखा और नली डालकर इंजन में भेजने लगा अब मैं उम्मीद कर रहा था कि थोड़ी देर बाद बस कंपनी के हिस्सेदार इंजन को निकाल कर गोद में रख लेंगे और उसे नाली से पेट्रोल पिलाएंगे जैसे मां बच्चों के मुंह में दूध की सीसी लगती है  बस की रफ्तार अब 15:20 मिल हो गई थी मुझे उसके किसी हिस्से पर भरोसा नहीं था ब्रेक फेल हो सकता है स्टेरिंग टूट सकता है प्रकृति के दृश्य बहुत लोग भावना थे दोनों तरफ हरे-भरे पेड़ थे जिन पर पक्षी बैठे थे मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था जो भी पेड़ आता डर लगता कि इससे बस टकराएगी वह निकल जाता तो दूसरे पेड़ का इंतजार करता झील दिखती तो सोचता कि इसमें बस कोटा लगा  एकांक फिर बस रुक ड्राइवर ने तरह-तरह की तरकीपर की पर वह चली नहीं सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हो गया था कंपनी के हिस्सेदार कह रहे थे बस तो फर्स्ट क्लास है जी यह तो इत्तेफाक की बात है  सेन चांदनी में वृक्षों की छाया के नीचे वह बस बड़ी दैनिक लग रही थी लगता जैसे कोई वृद्ध थककर बैठ गई हो हमें गलानी हो रही थी कि बेचारी पर लटकर हम चले आ रहे थे अगर इसका प्रनाथ हो गया तो इस ब्यावन में हमें इसकी अत्याशिष्ट करनी पड़ेगी  रिश्तेदार सब ने इंजन खोला और कुछ सुधार बस आगे चली उसकी चाल और काम हो गई धीरे-धीरे बस की आंखों की ज्योति जाने लगी चांदनी में रास्ता काटोल कर वह देख रही थी आगे आप पीछे से कोई गाड़ी आते दिखती तो वह एक कदम किनारे खड़ी हो जाती और कहती निकल जाओ बेटी अपनी तो वह उम्र ही नहीं रही 
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 64 Views

झांसी की रानी

झांसी की रानी
 (प्रस्तुत पाठ वृंदावन के प्रसिद्ध उपन्यास झांसी की रानी से लिया गया है इसमें अंग्रेजों के साथ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के अंतिम युद्ध का वर्णन है) 'मंदिर बाई' रघुनाथ सिंह ने कहा रानी साहब का साथ एक शरण के लिए भी ना छुटने भाभी आज अंतिम युद्ध लड़ने जा रही है  मंदिर– 'आप कहां रहेंगे?'  रघुनाथ सिंह- 'जहां उनकी आज्ञा होगी वैसे आप लोगों के समीप ही रहने का प्रयत्न करूंगा'  मंदिर... Read More
 (प्रस्तुत पाठ वृंदावन के प्रसिद्ध उपन्यास झांसी की रानी से लिया गया है इसमें अंग्रेजों के साथ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के अंतिम युद्ध का वर्णन है) 'मंदिर बाई' रघुनाथ सिंह ने कहा रानी साहब का साथ एक शरण के लिए भी ना छुटने भाभी आज अंतिम युद्ध लड़ने जा रही है  मंदिर– 'आप कहां रहेंगे?'  रघुनाथ सिंह- 'जहां उनकी आज्ञा होगी वैसे आप लोगों के समीप ही रहने का प्रयत्न करूंगा'  मंदिर -में जाती हूं आप बिल्कुल निकट ही रहे मुझे लगता है, मैं आज मारी जाऊंगी आपके निकट होने से शांति मिलेगी'  रघुनाथ सिंह-' मैं भी नहीं बेचूंगा रानी साहब को किसी प्रकार सुरक्षित रहना है मैं तुम्हें तुरंत ही स्वर्ग में मिलेगा केवल आगे पीछे की बात है वह सुखी हंसी हसा '  सुंदर ने रघुनाथ सिंह की ओर आंसू भरी आंखों से देखा कुछ खाने के लिए हॉट हिले रघुनाथ की आंखें भी दूध ली हुई   दूर से दुश्मन के बिल्कुल के शब्द की चाई कान में पड़ी मुंडन ने रघुनाथ सिंह को मस्तक नया कर प्रणाम किया और उसके वोट में जल्दी-जल्दी आंसू पहुंच डाले रघुनाथ ने मूंदड़ा को नमस्कार किया और दोनों सरपट लिए हुए पानी के पास पहुंचे  मुंडन ने जूही को पिलाया रघुनाथ ने रानी को अंग्रेजों के भूल का साफ शब्द सुनाई दिया तो का धड़का हुआ गोला सन्नाकर ऊपर से निकल गया रानी दूसरा कटोरा नहीं पी सकी  रानी ने रामचंद्र देशमुख को आदेश दिया दामोदर को आज तुम पीठ पर बंद हो यदि मैं मरी जाऊं तो इसको किसी तरह दक्षिण सुरक्षित पहुंच देना तुमको आज मेरे प्राणों से बढ़कर अपनी रक्षा की चिंता करनी होगी दूसरी बात यह है कि मेरी जाने पर यह विधर्मी मेरी तरह को छोड़ ना पाए बस घोड़ा लाओ   मंदिर घोड़े ले आई उसकी आंखें चल चल रही थी पूर्व दिशा में अरुणिमा फैल गई अब की बार कई तोपों का धड़का हुआ  रानी मुस्कुराई बोली है तात्या की तोपों का जवाब है   मंदिर की चाल चलती हुई आंखों को देखकर कहा यह समय आंसू का नहीं है मूंदड़ा जा तुरंत अपने घोड़े पर सवार हो अपने लिए आए हुए घोड़े को देखकर बोली यह अस्तबल को प्यार करने वाला जानवर है परंतु अब दूसरे को चुनने का समय ही नहीं है इसी से काम निकलूंगी  जूही के सिर पर हाथ फेर कर कहीं जा जूही अपने तो खाने पर छक्का तो दे इन वैल्यू को आज   जूही ने प्रणाम किया जाते हुए कहा गई इस जीवन का यथोचित अभिन्न आपको ना दिखला पाई खेल  इतने में सूर्य का उदय हुआ  सूर्य की किरणों ने रानी के सुंदर मुख को प्रदीप किया उनके नेत्रों की ज्योति दोहरे चमत्कार से भस्म हुई लाल वर्दी के ऊपर मोती हीरो का कांटा धमक उठा और धमक पड़ी बयान से निकली हुई तलवार  रानी ने घोड़े को ऐड लगे पहले जरा इसका फिर तेज हो गया   उत्तर और पश्चिम की दिशा में तात्या और राव साहब के मोर्चे थे दक्षिण में बांध के नवाब का रानी ने पूर्व की और झापड़ लगे   गति दिवस की हार के कारण अंग्रेज जनरल संविधान और चिंतत हो गए थे इन लोगों ने अपनी पैदल पलटन पूर्व और दक्षिण की बिहार में छुपा ली और हजूर स्वरों को कहीं दिशाओं में आक्रमण की योजना की टॉप स्पीड पर रक्षा के लिए थी हजूर स्वरों ने पहला हमला कड़ाबीन बंदूकन से किया बंदूकन का जवाब बंदूकन से दिया गया रानी ने आक्रमण पर आक्रमण करके असुर स्वरों को पीछे हटाया दोनों और के सवालों की पहचान दौड़ से धूल के बादल छा गए रानी के रण कौशल के मारे अंग्रेज जनरल धारा गए काफी समय हो गया तुरंत अंग्रेजों को पेशवाई मोर्चा से निकल जाने की गुंजाइश न मिली     
Read Full Blog
[email protected] 17 Dec 2025 62 Views