खेल के मैदान में खिलाड़ी को खेलते समय ऐसी चोट लगती है। जिससे त्वचा तथा उसके नीचे के तंतु फट जाती है, या कट जाती है, उसे ही घाव कहते हैं। घाव कई प्रकार के होते है।
• कटा हुआ घाव : -
यह गांव गहरे होते हैं। चोट लगने से धमनियां या नाड़ियां भी कट जाती है। कांच चुभना, चाकू या ब्लेड से घाव हो जाते हैं।
• कुचला हुआ घाव : -
कई बार हाथ यहां जोड़ों की उंगलियों के को चल जाने से घाव हो जाते हैं जिससे नील पड़ जाते हैं। पीड़ा भी हो जाती हैं।
• फटाका हुआ घाव : -
यह गांव काटे एवं कुचले हुए घाव से अधिक खतरनाक होते हैं। गांव के किनारे फटे फटे से एवं टेढ़े मेढ़े होते हैं। इसमें से रक्त अधिक नहीं बहता किंतु उनके विषैली होने का अधिक में भर रहता है। घाव के भर जाने पर भी शरीर पर स्थायी एवं भद्दे निशान पड़ जाते हैं।
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