प्रेम एक शिक्षक है परंतु इसे प्राप्त करना कठिन है इसे श्रमपूर्वक धीरे-धीरे जीता जाता है। बाहर के लोग आपको तभी सम्मान और प्रेम देंगे, जब आप स्वयं से प्रेम करेगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात, सिमस झूठ ना बोले। जो व्यक्ति स्वयं से झूठ बोलता है। अपने झूठ को सुनता है, वह एक ऐसी बिंदु पर पहुंच जाता है, जहां वह सत्य और झूठ के बीच फर्क करने की क्षमता खो जाता है। प्रेम के अभाव में वह खोखला हो जाता है। आपने खालीपन को भरने के लिए वह अनावश्यक गतिविधियों में लिप्ट हो जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप वह जीवन के उद्देश्य से भटक जाता है। समय के साथ वह पशुवत व्यवहार और अनैतिकता पर उत्तर जाता है। जो व्यक्ति स्वयं से झूठ बोलता है। वह अक्सर सबसे पहले नाराज़ होता है। हर दिन, हर घंटे, हर मिनट, अपने क्या अपनी छवि सभ्य है। यदि आप एक छोटे बच्चों के पास से ऐसी छवि के साथ गुजारते हैं। जो कूट और क्रोधी हो, तो भले ही अपने बच्चों को न देखा हो। उसने आपको देखा है।
यदि आप पूरी दुनिया पर विजय प्राप्त करना चाहते हैं। तो पहले स्वयं पर विजय प्राप्त करें। जीवन का अर्थ आपने भी ढूंढ सारी हो। पर इससे अधिक से अधिक प्रेम करें।
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pratiksha
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