भारतीय संविधान के पीछे जो दर्शन कार्य कर रहा था। उसी से इसके आदर्श स्पष्ट हो जाते हैं। भारतीय संविधान के मूल आदर्श निम्नलिखित है।
1. भारतीय संविधान का मूल आदर्श होगा : राष्ट्र के निर्माण में निर्धन से निर्धन व्यक्ति की भूमिका तथा सत्ता में उसकी भागीदारी।
2. भारतीय संविधान का मूल आदर्श छुआछूत, नशीले पदार्थों का उन्मूलन तथा स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकारों में समाहित होगा।
3. यह डॉक्टर भीमराव के सपने, "भेदभाव और असमानता से मुक्त भारत के निर्माण के आदर्श का पोषण होगा।"
4. भारतीय संविधान का मूल आदर्श लोगों को सामाजिक समानता के सथ-साथ आर्थिक समानता देना भी होगा।
5. भारतीय संविधान का मूल आदर्श निर्धनता, अज्ञानता, असमानता को दूर कर रोगों से लड़कर नागरिकों को स्वस्थ जीवन प्रदान करना होगा।
6. भारतीय संविधान का मूल आदर्श देश में एक प्रमुख संपन्न और पंथ निरपेक्ष गणराज्य की स्थापना करना है।
7. भारतीय संविधान के मूल आदर्श राष्ट्र मैं समानता, स्वतंत्रता और भाईचारा की छटा बिसराने के लक्ष्य को पूरा करेगा।
8. भारतीय संविधान के मूल आदर्श देश में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और मौलिक मानव अधिकारों की स्थापना से संबंध होगे।
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मेरा नाम प्रतीक्षा प्रजापति है। मैं दसवीं क्लास में पढ़ती हूं। मेरे पिताजी का नाम श्रीमान सोनू कुमार है। मेरी माता जी का नाम श्रीमती रेखा देवी है। मेरे दो बहन भाई और है। मेरी बहन का नाम प्रिया है, और मेरे भाई का नाम आर्यन प्रजापति है। मेरे गांव का नाम असदपुर करांजलि देवबंद सहारनपुर हैं। मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना मेरी कामयाबी है। मैं अपने जीवन में कामयाब होना चाहती हूं।
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