हम प्रतिदिन विभिन्न स्रोतों जैसे मानव पक्षियों घाटियों मशीनों बहनों टेलीविजन रेडियो आदि की ध्वनि सुनते हैं ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है जो हमारे कानों में स्वर्ण का संवेदन उत्पन्न करती है ऊर्जा के अन्य रूप ही है जैसे आंतरिक ऊर्जा प्रकाश ऊर्जा आई पिछले अध्याय में आप यांत्रिक ऊर्जा का अध्ययन कर चुके हैं आपको ऊर्जा संरक्षण के बारे में ज्ञात है इसके अनुसार आप ऊर्जा को ना तो उत्पन्न कर सकते हैं और ना ही उसका विनाश कर सकते हैं आप इसे केवल एक से दूसरे रूप में रूपांतरित कर सकते हैं जब आप ताली बजाते हैं तो ध्वनि उत्पन्न होती है क्या आप अपनी ऊर्जा का उपयोग किए बिना ध्वनि उत्पन्न कर सकते हैं ध्वनि उत्पन्न करने के लिए अपने ऊर्जा के किस रूप का उपयोग किया इस अध्याय में हम सीखेंगे की ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है और किसी माध्यम में यह किस प्रकार संचालित होकर हमारे कानों द्वारा ग्रहण की जाती है ध्वनि का संचरन हम जानते हैं कि ध्वनि कंपन करते हुए वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है धर्म या पदार्थ जिससे होकर ध्वनि संचालित होती है मध्य कहलाती है मध्य के कारण स्वयं आगे नहीं बढ़ते लेकिन विश्व आगे बढ़ जाता है कंपन का अर्थ कंपन का अर्थ होता है किसी वस्तु का तेजी से बार-बार इधर-उधर गति करना ध्वनि तारण के अभिलक्षण किसी ध्वनि तरंग के निम्नलिखित अभिलक्षण होते हैं आवृत्ति, आयाम, वेग ध्वनि तरंग को ग्राफ रूप में दिखाया गया है जो प्रदर्शित करता है कि जब ध्वनि तरंग किसी माध्यम में गति करती है तो घंटा तथा दाब में कैसे परिवर्तन होता है किसी निश्चित समय पर माध्यम का गणतंत्र तथा दोनों ही उनके स्रोत मन से ऊपर और नीचे दूरी के साथ परिवर्तन होते हैं प्रदर्शित करते हैं कि जब ध्वनि तरंग माध्यम में संचालित होती है तो घनत्व तथा दाब में क्या उतार-चढाव होते हैं ध्वनि का परावर्तन किसी ठोसिया तरफ से टकराकर धन्य इस प्रकार वापस लौटी है जैसे कोई रबड़ की गेंद किसी दीवार से टकराकर वापस आती है प्रकाश की भांति ध्वनि भी किसी ठोस या धर्म की सतह से परिवर्तित होती है तथा परावर्तन के उन्हें नियमों का पालन करती है जिनका अध्ययन आप अपनी पिछली कक्षाओं में कर चुके हैं परावर्तक सतह पर खींचे गए फिल्म तथा ध्वनि के अवतल होने की दशा तथा परिवर्तन होने की दिशा के बीच बने कौन आपस में बराबर होते हैं और यह तीनों दर्शन एक ही ताल में होते हैं ध्वनि तरंगों के परिवर्तनों के लिए बड़े आकर के अवरोधों की आवश्यकता होती है जो चाहे पॉलिश किए हुए हो या खुरदरे अनुरण किसी बड़े हॉल में उत्पन्न होने वाले ध्वनि दीवारों से बराबर परिवर्तन के कारण काफी समय तक बने रहती है जब तक की यह इतनी कम ना हो जाए कि यह सुनाई ना पड़े यहां बराबर परिवर्तन जिसके कारण ध्वनि निर्भर होता है अनुरण कहलाता है प्रावधानी के अनुप्रयोग प्राधनीय उच्च आकृति की तरंगे है प्राधनीय उच्च आकृति की तरंगे है प्रावधानिया अवरोधों की उपस्थिति में भी एक निश्चित पद पर गण कर सकती है आंखों को तथा चिकित्सा के क्षेत्र में प्रावधानियां का विस्तृत रूप में प्रयोग किया जाता है
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