Blog by Vanshika | Digital Diary
" To Present local Business identity in front of global market"
" To Present local Business identity in front of global market"
Digital Diary Submit Post
'मंदिर बाई' रघुनाथ सिंह ने कहा रानी साहब का साथ एक शरण के लिए भी ना छुटने भाभी आज अंतिम युद्ध लड़ने जा रही है
मंदिर– 'आप कहां रहेंगे?'
रघुनाथ सिंह- 'जहां उनकी आज्ञा होगी वैसे आप लोगों के समीप ही रहने का प्रयत्न करूंगा'
मंदिर -में जाती हूं आप बिल्कुल निकट ही रहे मुझे लगता है, मैं आज मारी जाऊंगी आपके निकट होने से शांति मिलेगी'
रघुनाथ सिंह-' मैं भी नहीं बेचूंगा रानी साहब को किसी प्रकार सुरक्षित रहना है मैं तुम्हें तुरंत ही स्वर्ग में मिलेगा केवल आगे पीछे की बात है वह सुखी हंसी हसा '
सुंदर ने रघुनाथ सिंह की ओर आंसू भरी आंखों से देखा कुछ खाने के लिए हॉट हिले रघुनाथ की आंखें भी दूध ली हुई
दूर से दुश्मन के बिल्कुल के शब्द की चाई कान में पड़ी मुंडन ने रघुनाथ सिंह को मस्तक नया कर प्रणाम किया और उसके वोट में जल्दी-जल्दी आंसू पहुंच डाले रघुनाथ ने मूंदड़ा को नमस्कार किया और दोनों सरपट लिए हुए पानी के पास पहुंचे
मुंडन ने जूही को पिलाया रघुनाथ ने रानी को अंग्रेजों के भूल का साफ शब्द सुनाई दिया तो का धड़का हुआ गोला सन्नाकर ऊपर से निकल गया रानी दूसरा कटोरा नहीं पी सकी
रानी ने रामचंद्र देशमुख को आदेश दिया दामोदर को आज तुम पीठ पर बंद हो यदि मैं मरी जाऊं तो इसको किसी तरह दक्षिण सुरक्षित पहुंच देना तुमको आज मेरे प्राणों से बढ़कर अपनी रक्षा की चिंता करनी होगी दूसरी बात यह है कि मेरी जाने पर यह विधर्मी मेरी तरह को छोड़ ना पाए बस घोड़ा लाओ
मंदिर घोड़े ले आई उसकी आंखें चल चल रही थी पूर्व दिशा में अरुणिमा फैल गई अब की बार कई तोपों का धड़का हुआ
रानी मुस्कुराई बोली है तात्या की तोपों का जवाब है
मंदिर की चाल चलती हुई आंखों को देखकर कहा यह समय आंसू का नहीं है मूंदड़ा जा तुरंत अपने घोड़े पर सवार हो अपने लिए आए हुए घोड़े को देखकर बोली यह अस्तबल को प्यार करने वाला जानवर है परंतु अब दूसरे को चुनने का समय ही नहीं है इसी से काम निकलूंगी
जूही के सिर पर हाथ फेर कर कहीं जा जूही अपने तो खाने पर छक्का तो दे इन वैल्यू को आज
जूही ने प्रणाम किया जाते हुए कहा गई इस जीवन का यथोचित अभिन्न आपको ना दिखला पाई खेल
इतने में सूर्य का उदय हुआ
सूर्य की किरणों ने रानी के सुंदर मुख को प्रदीप किया उनके नेत्रों की ज्योति दोहरे चमत्कार से भस्म हुई लाल वर्दी के ऊपर मोती हीरो का कांटा धमक उठा और धमक पड़ी बयान से निकली हुई तलवार
रानी ने घोड़े को ऐड लगे पहले जरा इसका फिर तेज हो गया
उत्तर और पश्चिम की दिशा में तात्या और राव साहब के मोर्चे थे दक्षिण में बांध के नवाब का रानी ने पूर्व की और झापड़ लगे
गति दिवस की हार के कारण अंग्रेज जनरल संविधान और चिंतत हो गए थे इन लोगों ने अपनी पैदल पलटन पूर्व और दक्षिण की बिहार में छुपा ली और हजूर स्वरों को कहीं दिशाओं में आक्रमण की योजना की टॉप स्पीड पर रक्षा के लिए थी हजूर स्वरों ने पहला हमला कड़ाबीन बंदूकन से किया बंदूकन का जवाब बंदूकन से दिया गया रानी ने आक्रमण पर आक्रमण करके असुर स्वरों को पीछे हटाया दोनों और के सवालों की पहचान दौड़ से धूल के बादल छा गए रानी के रण कौशल के मारे अंग्रेज जनरल धारा गए काफी समय हो गया तुरंत अंग्रेजों को पेशवाई मोर्चा से निकल जाने की गुंजाइश न मिली
Read Full Blog...
बचपन की बात है उसे समय आर्य समाज का सुधारवादी आंदोलन पूरे जोर पर था मेरे पिता आर्य समाज रानी मंडी के प्रधान थे और मां ने स्त्री शिक्षा के लिए आदर्श कन्या पाठशाला की स्थापना की थी
पिता की अच्छी खासी सरकारी नौकरी थी वर्मा रोड जब बन रही थी तब बहुत कमाया था उन्होंने लेकिन मेरे जन्म के पहले ही गांधी जी के आह्वान पर उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी हम लोग बड़े आर्थिक कासन से गुजर रहे थे फिर भी घर में नियमित पत्र पत्रिका आई थी आर्य मित्र, साप्ताहिक,वेदों के,सरस्वती,ग्रहणी, और दो बाल पत्रिका खास मेरे लिए बोल शका और चमचम उनमें होती थी परियों राजकुमारों दावों और सुंदर राज कन्याओं की कहानी और रेखाचित्र मुझे पढ़ने की चाहत लग गई हर समय पढ़ता रहता खाना खाते समय थाली के पास पत्रिका रखकर पड़ता अपनी दोनों पत्रिकाओं के अलावा भी सरस्वती और आर्य मित्र पढ़ने की कोशिश करता घर में पुस्तक भी थी उपनिषदों और उनके हिंदी अनुवाद सत्यार्थ प्रकाश के खानदान मंडल वाले अध्याय पूरी तरह समझ में नहीं आते थे पर पढ़ने में मजा आता था
मेरी प्रिय पुस्तक थी स्वामी दयानंद की एक जीवनी रोचक शैली में लिखी हुई अनेक चित्रों से सूचित में तत्कालीन पकड़े के विरुद्ध आदमी साहस दिखाने वाले अद्भुत व्यक्ति थे कितनी ही रोमांचक घटनाएं थीं उनके जीवन की जो मुझे बहुत प्रभावित करती थी चूहे को भगवान का मीठा खाते देख कर मान लेना की प्रतिमाएं भगवान नहीं होती घर छोड़कर भाग जाना तमाम तीर्थ जंगलों गुफाओं हम सिरोही पर साधुओं के बीच घूमने और हर जगह इसकी तलाश करना कि भगवान क्या है सत्य क्या है जो भी समाज विरोधी मनुष्य विरोधी मूल्य है गुड़िया है उनका खंडन करना और अंत में अपने हत्यारे को क्षमा कर उसे सहारा देना यह सब मेरे बालमन को बहुत रोमांचित करता
मां स्कूली पढ़ाई पर जोर देती चिंतित रहती कि लड़का कक्षा की किताबें नहीं पड़ता पास कैसे होगा कहीं खुद साधु बनकर फिर से भाग गया तो पिता कहते जीवन में यही पढ़ाई काम आएगी पढ़ने दो मैं स्कूल नहीं भेजा गया था शुरू की पढ़ाई के लिए घर पर मास्टर रखे गए थे पिता नहीं चाहते थे कि नासमझ उम्र में मैं गलत संगति में पड़कर कल दोनों सीखो बुरे संस्कार ग्रहण करूं अत स्कूल में मेरा नाम तब लिखवाया गया जब मैं कक्षा 2 तक की पढ़ाई घर पर कर चुका था तीसरे दर्जे में भर्ती हुआ उसे दिन शाम को पिता उंगली पड़कर मुझे घुमाने ले गए लोकनाथ की एक दुकान से ताजा अनार का शरबत मिट्टी के कलर में पिलाया और सर पर हाथ रखकर बोले वादा करो कि पाठ्यक्रम की किताबें भी इतने ही ध्यान से पढ़ोगे मां की चिंता मिटाओगे उसका आशीर्वाद था या मेरी जो तोड़ परिश्रम की तीसरी चौथी में मेरे अच्छे नंबर आए और पांचवें दर्जे में तो मैं फर्स्ट आया मां ने आंसू भारत कर गले लगा लिया पिता मुस्कुराते रहे कुछ बोल नहीं
अंग्रेजी में मेरे नंबर सबसे ज्यादा थे अत स्कूल से इनाम में दो अंग्रेजी किताबें मिली थी एक में दो छोटे बच्चे घोसले की खोज में बाघों और कुंजो में भटकते हैं और इन बहाने पक्षियों की जातियां उनकी बोलियां उनकी आदतों की जानकारी उन्हें मिलती है दूसरी किताब ट्रस्टी दा रंग जिनमें पानी के जहाज की कथाएं थी कितने प्रकार के होते हैं कौन-कौन सा माल याद कर लाते हैं कहां ले जाते हैं नविको की जिंदगी कैसी होती है कैसे-कैसे जीव मिलते हैं कहां हवेल होती है कहां शक होती है
Read Full Blog...आज का योग विज्ञान का योग है इस युग में समाज मैं नई-नई मशीन तथा उपकरणों का प्रयोग होता है घर और बाहर दोनों जगह जरा सी ऐसा सावधानी होने पर दुर्घटना हो सकती है इसके अतिरिक्त कीड़े मकोड़े जानवर आदि के काटने से दुर्घटना होती है ऐसी अवस्था में प्राथमिक चिकित्सा के द्वारा घायल की चिकित्सा की जाती है तथा जीवन संकट से उभारा जाता है
दुर्घटना के कारण निम्नलिखित प्रकार के हैं
असावधानी - आज व्यक्ति इतनी जल्दी कार्य करना चाहता है कि उसे अपनी जिंदगी का भी ध्यान नहीं रहता सड़क पर चलने फिरने अथवा वाहन चलाने आदि में है असावधानी बरतता है और दुर्घटना का सामना करता है
अशिक्षा तथा अज्ञानता - बहुत सी मशीनों की पर्याप्त जानकारी न होने से अधिकतम मशीन को चलाने का ज्ञान न होने के कारण भी दुर्घटना संभव होती है
शारीरिक असमर्थता- कभी-कभी शारीरिक रूप से असमर्थ होने पर भी दुर्घटना का खतरा रहता है जैसे पैरों से विकलांग होने पर दुर्घटना हो जाना
सार्वजनिक स्थानों पर भीड़भाड़ के कारण- कभी-कभी अधिक भीड़ भाड़ होने पर दुर्घटना हो जाती है लोग गिर सकते हैं अथवा बेहोश भी हो सकते हैं
जीव जंतु के काटने पर- सांप बंदर कुत्ते हाथी के काटने से भी दुर्घटनाएं संभव हो सकती है
सामान्य दुर्घटनाएं ऐसा धनिया लापरवाही के कारण ही होती है कुछ प्रमुख दुर्घटनाएं निम्नलिखित है
यह दुर्घटना अक्सर खाना बनाते समय अथवा अधिकता वाले स्थान पर कार्य करते समय होती है आज से जल जाना को लेते तेल का शरीर पर गिर जाना भाव से जालना ग्राम वस्तु का शरीर पर गिर जाना बिजली के करंट आदि से व्यक्ति
यह दुर्घटना नदी तालाब समुद्र आदि के तट पर होती है अचानक पर पानी में फिसल जाने आदि से यह दुर्घटना होती है ऐसी स्थिति में सर्वप्रथम उसे व्यक्ति को पानी से बाहर निकलना चाहिए
कभी-कभी तक समाप्त बिजली के तारों अथवा पलंग या स्विच को छूने से करंट लग जाता है यह खतरनाक दुर्घटना है इसमें मिलते तक हो सकती है
कभी-कभी सांप के काट लेने से रोगी के शरीर में भी फैलने लगता है अधिकतर यह घटनाएं गांव या पेड़ पौधे युक्त स्थान में अथवा सड़क पर होते हैं सांप की अनेक जातियां होती है कुछ विषैला होते हैं तथा कुछ भी सीन होते हैं कहा जाता है कि सांप का कांटा व्यक्ति मरता नहीं है फिर बेहोशी की दशा में उसकी सभी इंदिरा निशि करिया हो जाती है और उसे मरा हुआ समझ लिया जाता है
बिटवीन जहरीला जीव है बिच्छू की पूंछ में डंक होता है बिच्छू का विश्व नदी तंत्र को प्रभावित करता है
पागल कुत्ते के काटने से हाइड्रोफोबिया नामक रोग हो जाता है पागल कुत्ते की जीत सदैव बाहर निकली होती है तथा तेजी से होता है पागल कुत्ता किसी व्यक्ति को काटने की 10 15 दिन बाद मर जाता है पागल कुत्ते के काटने से मानसिक शक्ति सिंह हो जाती है
कभी-कभी किसी तेज धार वाली वस्तु से जब शरीर कट जाता है और खून बहता है तो इसे रक्तस्राव कहते हैं रक्तस्राव दो प्रकार के होते हैं फर्स्ट बराक किस तरह सेकंड आंतरिक रक्त स्राव
कभी-कभी चोट आदि लग जाने से त्वचा के नीचे के तंत्र कट फट जाते हैं तथा घाव हो जाते हैं गांव कई प्रकार के होते हैं
1. कछला घाव
अचानक काम करते समय हाथ या पर पर कोई भारी वस्तु गिरने से चोट लग जाती है इस स्थिति में उंगली का रंग नीला पड़ जाता है तथा तीव्र दर्द होता है
2. कटा हुआ घाव
इसमें कटे हुए स्थान से खून बहता है इसे कटा हुआ भाव कहते हैं
3. फटा घाव
यह गांव किसी भारी वस्तु के गिर जाने से लगी चोट के कारण होता है यह घाव किनारे से टेढ़े मेढ़े या कट फट जाते हैं
गर्मी चोट रत्नलिका के फटने या रक्त की न्यूनता के कारण नाक से रक्त बहने को नकसीर फोड़ना कहते हैं ऐसी अवस्था में रोगी को तुरंत खुले ताजी हवा में गर्दन को पीछे झुककर सीधा कुर्सी आ चुकी पर बैठा देना चाहिए उसके वेस्टन को ढीली करके उससे मुंह द्वारा सांस लेने को कहा जाए तत्पश्चात नाक से ऊपर तथा गर्दन पर बर्फ की थैली से सिकाई करना चाहिए उसके पैरों को गर्म पानी में रखना चाहिए और चूसने के लिए बर्फ देना चाहिए रोगी को बिना इलाज बुलाए उसकी नाक को अंगूठे और उंगली के बीच पड़कर लगभग 5 मिनट तक दबाना चाहिए दक्षिण के बंधन होने पर कुछ और से नाग दबाए या नाक के अंदर भी
शहर की मक्खियों भर के काटने पर उसे स्थान पर बहुत पीड़ा होती है जलन होने लगती है कटे हुए स्थान के चारों ओर सूजन आ जाती है कभी-कभी कटे हुए स्थान पर धक रह जाता है शहर की मक्खेड़ पर के काटने से उसके डॉग को पीने या चाबी की सहायता से बाहर निकाला जाता है कटे हुए स्थान पर कोई बिना जंग लगा साफ लोहा तुरंत रगड़ना चाहिए और स्पीड कटे हुए स्थान पर कोई बिना जंग लगा साफ लोहा तुरंत रगड़ना चाहिए और स्पीड चुनाव अथवा कॉसिस्टिक सोडा मिलना चाहिए रोगी को पानी को पिलाना चाहिए गांव के तुरंत एक पट्टी कसकर पान देनी से विश्व को पहले से रोका जा सकता है
दोहे कार्बन डाइऑक्साइड यानी विषैली गैसें संयुक्त हवा में सांस लेने डूबने फांसी लगाने आदि कर्म से दम घुटने लगता है
विशाली हवा में सांस लेने से दम घुटने पर व्यक्ति को तुरंत खोली गया ताजी हवा में लेटा देना चाहिए उसकी पंखे से हवा करें और उसके आसपास भीड़ इकट्ठी ना होने दे
डूबने से तुम घुटने पर व्यक्ति को पानी से बाहर निकाल कर उल्टा लेटना चाहिए और पेट का पानी निकाल देना चाहिए फिर डूबने से तुम घुटने पर व्यक्ति को पानी से बाहर निकाल कर उल्टा लेटना चाहिए और पेट का पानी निकाल देना चाहिए फिर गले वस्त्र उतार कर उसे कंबल में लपेट देना चाहिए तब क्रिसमस विधि से इस स्वास्थ्य देना चाहिए उसे पीने के लिए गर्म चाय कॉफी या दूध देना चाहिए
फांसी लगने से दम घुटने पर व्यक्ति को थोड़ा ऊपर उठकर उसकी गर्दन से रस्सी का फंदा निकालना चाहिए फिर उसे लिटाकर क्रिसमस विधि से स्वास्थ्य देनी चाहिए उपयुक्त प्राथमिक चिकित्सा के पश्चात डॉक्टर से सिर्फ ही परामर्श आवश्यक कर लेना चाहिए
Read Full Blog...there is something disarming about Maria Sharapova something at odds with her ready is my and glamorous attire and that something in her lifted her on Monday 22 August 2005 to the world number on position in women tennis all things happened in almost two time poised beyond Her years the siberian born teenager took just 4 years as a professional to reach the pinnacle.
However the repid ascent in a fiercely competitive world begin 9 year before with a level of sacrifice few children would be preparedto endure little Maurya had not yet celebrated Har 10th birthday when she was packed of Two train in the United State that trip to Florida with her father yuri launched Har on the path two success and Stadium but it also required a heart - wrenching 2 years separation from her mother Elina the letter was complete to step back in Siberia because of visa restriction. The 9 year old girl had a lady learnt an important lesson in life that tennis exclation word only come at a price
" I used to be so lonely " Maria Sharapova recalls I missed by mother terribly my father was working as much as he could to keep my tennis training going so he could not see me either.
Because I was so young I used to go to bed at 8:00 p.m. The Other tennis pupils would come in at 11 p.m. and wake me up and order me to daddy up the room and clean it
Read Full Blog...the only woman in the world who has scaled Mt Everest twice was born in a society where the birth of a son was regarded as a blessing and a daughter thought not considered a curse was not generally welcome Van her mother was expecting Santosh a travelling Holy behan giving her his blessing assumed Dead Sea wanted a son but to everyone's surprise the Unborn childs grandmother who was standing close by told him that they did not want a son the holy man was also surprised Nevertheless he gave the requested blessing and as dashiny bird have it the blessing seemed two work Santosh was born the 6th child in a family with five sons a sister to my brothers she was born in the small village of joniyawas of rewari district in haryana.
The girl was given the name Santosh which means contentment. But Santosh was not always content with her place in a traditional way of live C begin living life on her own terms from the start where other girls wore traditional Indian dresses Santosh Preferred shorts looking back from the very beginning I was quite determined that if I chose Ek correct and a rational path the others around me had to change not me. "
Santosh parents were Affuent landowners who could afford to send their children to the best school even to the countries capital New Delhi which was quit close by but in line with the prevailing custom in the family Santosh had to make do with the local village school so she designing to fight the system in her own wait wave and the right moment arrived. And the right moment came when she turns 16 at 16 most of the girl in her village use to get married Santosh who's also under Pressure parents to do the same
Read Full Blog...
A slumber did my Spirit seal
I had no human fears
See seemed a think that could not feel
The torch of early years.
No motion has she now, no force -
She neather hears nor sees,
Rolled round in earth ' s diurnal course
With rockes and stones and trees.
Read Full Blog...
I get a cheap room in the centre of town and sleep for hours. The nest morning ,with Mr saha's son and nephew I visit the two temple in Kathmandu that are most sacred to hindus and buddhists
At Pashupatinath (outside which a sign proclaims' Entrance for the Hindus only ') there is an atmosphere of febrile confusion priest hawkers, devotees, tourist, cows monkeys seasons and dog roam Through the ground. We offer a Few flowers there are so many worshippers that some people trying to get the priest's attention are elbowed a side by others pushing their way to the front a princess way by the main gate a party of saffron -clad westerners struggle for permission to enter the policeman is not convinced that they are the' Hindus only '(Hindus are allowed to enter the temple ) a fight breaks out between two monkeys one chases The Other who jumps into a shivalinga,then rans screaming round the temples and down to the rivers the holi Bhagwati that flows below.A corpse is begging cremated on its banks washerwomen are at their work and children bathe from a balcony a basket of flowers and leaves old offerings now wilted, is dropped into the river a small shrine half protrudes from the stone platform on the river bank when it emerges fully the Goddess inside will escape and the Evil Period of kaliyug will end on earth.
At the budhnath stupa the Buddhist shrine of Kathmandu there is in contrast, a sense of stillness, its immense white dome is ringed buy a road small shops, stand on its outer edge many of these are owned by tibetan immigrants, felt bags Tibetan Prince and silver jewellery can bought here. There are no crowds this is a heaven of quietness in the busy streets around.
Read Full Blog... देख कर बांध विविध, बहुत विघ्न घबराते नहीं
वह भरोसे भाग्य के दुख भोग पछताते नहीं
काम कितना ही कठिन हो किंतु उकता ते नहीं
भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं
हो गए एक आज में उनके बुरे दिन भी भले
सब जगह सब कल में वही मिले फूले फूले
आज करना है जिसे करते उसे है आज ही
सोचते रहते हैं जो कुछ,कर दिखाते हैं वही
मानते जो भी है 'सुनते हैं' सदा सब की कही
जो मदद करते हैं अपनी इस जगत में आप ही
भूल कर वे दूसरों का मुंह कभी ताकते नहीं
कौन ऐसा काम है वे कर जिसे सकते नहीं
जो कभी अपने समय को तो बिताते हैं नहीं
काम करने की जगह बातें बनाते हैं नहीं
हां आजकल करते हुए जो दिन गवाते हैं नहीं
यत्न करने से कभी जो जी चुराते हैं नहीं
बात है वह कौन जो होती नहीं उसके लिए
वे नमूना बन जाते हैं औरों के लिए
व्योम को छूते हुए दुर्गम पहाड़ों के शिखर
वे घने जंगल जहां रहता है तुम ऑटो पहाड़
गरजते जल राशि की उड़ती हुई ऊंची लहर
आज की भय दाहिनी फैली दिशा में लवर
यह कपास शक्ति कभी जिसके कलेजे को नहीं
भूल कर भी वह नहीं नाकाम रहता है कहीं
Read Full Blog...
विद्वानों का यह कथन बहुत ठीक है कि नर्मदा की स्वतंत्रता की थोड़ी बहुत मानसिक स्वतंत्रता परम आवश्यक है उसे स्वतंत्रता में अभिमान हो नर्मदा दोनों का मेल हो चाहे वह नर्मदा ही से उत्पन्न हो यह बात तो निश्चित है कि जो मनुष्य मर्यादा पूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहता है उसके लिए वह अच्छा अनिवार्य है जिससे आत्मनिर्भरता आती है और जिस अपने पैरों के बल खड़ा होना आता है युवा कोई है सदा इस मां रखना चाहिए कि उसकी आकांक्षाएं उसकी योग्यता से कई बड़ी हुई है उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने बड़ों का सम्मान करें छोटू और बराबर वालों से कोमलता का व्यवहार करें यह बातें आत्मा मर्यादा के लिए आवश्यक है यह सारा संसार हमारे घर की ओर बाहर की दशा हमारे बहुत से अवगुण और थोड़े गुण इसी बात की आवश्यकता प्रकट करते हैं कि हमें अपनी आत्मा को नर्म रखना चाहिए नर्मदा से मेरा अभिप्राय है दुकान से नहीं है जिसके कारण मनुष्य दूसरों का मुंह ताकता है जिससे उसका संकल्प चीन हा और उसकी प्रज्ञा मंद हो जाती है जिसके कारण आगे बढ़ाने के समय भी वह पीछे रहता है और अवसर पढ़ने पर चटपट किसी बात करने में नहीं कर सकता मनुष्य का बेड़ा अपने ही हाथ में है उसे वह चाहे जिधर लगे सच्ची आत्मा वही है जो प्रत्येक दशा में प्रत्येक स्थिति के बीच अपनी रहा आप निकलती है
अब तुम्हें क्या करना चाहिए इसका ठीक-ठाक उत्तर तुम ही को देना होगा दूसरा कोई नहीं दे सकता कैसे भी विश्वास पात्र मित्र हो तुम्हारे इस काम को वह अपने ऊपर नहीं ले सकता हम अनुभवी लोगों की बातों को आधार के साथ सुन बुद्धिमानों की सलाह को व्रत कथा पूर्वक मन पर इस बात को निश्चित समझकर कि हमारे कामों से ही हमारी रक्षा वह हमारा पतन होगा हमें अपने विचार और निर्णय की स्वतंत्रता को दंडीठ पूर्वक बनाए रखना चाहिए जिस पुरुष की दृष्टि सदा नीति रहती है उसका सर कभी ऊपर नहीं होगा नीचे दृष्टि रहने से यद्यपि रास्ते पर रहेंगे पर इस बात को न देखेंगे कि यह रास्ता कहां ले जाता है चिंता की स्वतंत्रता ता का मतलब चेष्टा की कठोरता या प्रकृति की उग्रता नहीं है अपने व्यवहार में कोमल रहो और अपने देश को इस प्रकार नम और ऊंचा से दोनों बानो अपने मन को कभी मरा हुआ ना रखो जितना ही हो जो मनुष्य अपना लक्ष्य ऊपर रखता है उतना ही उसका तीर ऊपर जाता है
संसार मैं ऐसे ऐसे डैंडचित मनुष्य हो गए हैं जिन्होंने मरते दम तक सत्य की टेक नहीं छोड़ी अपनी आत्मा के विरुद्ध कोई काम नहीं किया राजा हरिश्चंद्र के ऊपर इतनी इतनी विपत्तियां आई पर उन्होंने अपना सत्य नहीं छोड़ा उसकी प्रतिज्ञा यही यही रही
महाराणा प्रताप जंगल जंगल मारे मारे फिरते थे अपनी स्त्री और बच्चों को भूख से तड़पते देखते थे परंतु उन्होंने उन लोगों की बात ना माने जिन्होंने उन्हें अधीन पूर्वक जीते रहने की संपत्ति दी क्योंकि वह जानते थे कि जानते थे कि अपनी मर्यादा की चिंता जितनी अपने को हो सकती है उतनी दूसरे को नहीं एक बार एक रोमन राजनीतिक के साथ में पड़ गया बाल भाइयों ने उसे व्यय पूर्वक पूछा अब तेरा किला कहां है उसने हृदय पर हाथ रखकर उत्तर दिया यह ज्ञान के जिज्ञासुओं के लिए यही बड़ा भारी गढ़ है मैं निश्चय पूर्वक कहता हूं कि जो युवा पुरुष सब बातों में दूसरों का सहारा चाहते हैं जो सदा एक न एक नया आगा ढूंढा करते हैं और उनके अनुयाई बन करते हैं वह आत्म संस्कार के कार्य में उन्नति नहीं कर सकते उन्हें स्वयं विचार करना अपनी समिति आप स्टार करना दूसरों की उचित बातों का मूल्य समझते हुए भी उनके अंधभक्त ना होना सीखना चाहिए एक इतिहासकार कहता है प्रत्येक मनुष्य का भाग्य उसके हाथ में है प्रत्येक मनुष्य अपना जीवन निर्वाह श्रेष्ठ रीति से कर सकता है यही मैंने किया है और यदि अवसर मिले तो यही करो इसे चाहे स्वतंत्रता कहो चाहे आत्मनिर्भरता कहो चाहे स्वाबल्लंबन कहो जो कुछ कहे यह है वही भाव है जिससे मनुष्य और दास में भेद जाना पड़ता है यही वही भाव है जिसकी प्रेरणा से राम लक्ष्मण ने घर से निकाल बड़े-बड़े पराक्रमी वीरों पर विजय प्राप्त की यह वही भाव है जिसकी प्रेरणा से हनुमान ने अकेले सीता की खोज की यह वही भाव है जिसकी प्रेरणा से कोलंबस ने अमेरिका सामान बड़ा महाद्वीप ढूंढ निकाला
किसी चित्र वृत्ति की दानदाता के सहारे नरेंद्र लोग दरिद्रता और अनपढ़ लोग अज्ञात से निकलकर उन्नत हुए हैं तथा उद्योगी और अंधविश्वासी लोगों ने अपनी समृद्धि का मार्ग निकला है इसी चिंतित वृत्ति से आलंबन से पुरुष सिंह को यह कहने की क्षमता हुई है मैं रहा ढूंढ लूंगा या रहा निकलेगा यही चिन्ह वृत्ति थी जिसकी उत्तेजना से शिवाजी ने थोड़े वीर मराठी सिपाहियों को लेकर औरंगजेब की बड़ी भारी सी पर छाप मारा और उसे तीतर भीतर कर दिया यही चित्र वृत्ति थी जिसके सहारे एकलव्य बिना किसी गुरु या संगीत साथी के जंगल के बीच निशाने पर तीर पर तीर चलता रहा और अंत में एक बड़ा ढूंढ धार हुआ यही चित्र वृति है जो मनुष्य को सामान्य जनों से उच्च बनती है जिसके जीवन को सार्थक और उद्देश्य पूर्ण करती है तथा उसे उत्तम संस्कारों को ग्रहण करने योग्य बनाती है जिस मनुष्य की बुद्धि और चतुराई उसके हृदय के आश्रम पर स्थित रहती है वह जीवन और कर्म क्षेत्र में स्वयं भी श्रेष्ठ और उत्तम रहता है और दूसरों को भी श्रेष्ठ और उत्तम बनता है प्रसिद्ध उपन्यासकार स्टॉक एक भाषण के बोझ से बिल्कुल दब गए मित्रों ने उनकी सहायता करनी चाहिए पर उन्होंने यह बात स्वीकार नहीं की और स्वयं अपनी प्रतिभा का सहारा लेकर अनेक उपन्यास थोड़े समय के बीच लिखकर लाखों रुपए का कर अपने सिर पर से उतार दिया
Read Full Blog...(इस कविता के माध्यम से कवि ने पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा दी गई है)
बहुत दिनों से सोच रहा था,थोड़ी सी धरती पाव
उसे धरती में बाग बगीचा,जो हो सके लगाओ
खिले फूल फल,चिड़िया बोले प्यारी खुशबू डॉल
ताजी हवा जलाशय में अपना हर अंग भिगोले
हो सकता है पास तुम्हारे, अपने कुछ धरती हो
फूल फल लगे अपने अपवाहन हो, अपनी पारती हो
हो सकता है छोटी सी प्यारी हो,महक रही हो
छोटी सी खेती हो,जो फसलों से दहक रही हो
हो सकता है कई शांत जो पे घूम रहे हो
हो सकता है कहीं शहर में पक्षी झूम रहे हो
तो विनती है यही,कभी मत उसे दुनिया को खोना
पेड़ों को मत कटने देना मत चिड़ियों को रोने देना
एक एक पत ती पर हम हम सब के सपने सोते हैं
सके काटने पर वह भोले शिशु सर होते हैं
पेड़ों के संग बढ़ना सीखो,पेड़ों के संग हिलाना
पेड़ों के संग संग इतराना, पेड़ों के संग हिला ना
बच्चे और पेड़ दुनिया को हरा भरा रखते हैं
नहीं समझते जो,मैं दुष्कर्मों का फल चक दे है
आज सभ्यता वैसीबन,पेड़ों को काट रही है
जहर फेफड़ों में भर, जहर फेफड़ों में भर इंसानों को बांट रही है
( इस कविता से हमें ऐसी मिलती है कि हमें पेड़ को नहीं काटना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना चाहिए पेड़ों से ही हमें फल फूल सब्जियां और सांस लेने में सहायता मिलते हैं )
Read Full Blog...--icon----> --icon---->