होम रूल आंदोलन (Home Rule Movement) पृष्ठभूमि (Background) प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत: सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ। भारतीय संसाधनों का दोहन: ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के लिए भारतीय जनता, सैनिकों और करोड़ों रुपयों का भरपूर इस्तेमाल किया। भारतीय नेताओं की उम्मीद और रणनीति सहयोग की भावना: भारत के कुछ राष्ट्रीय नेता इस उम्मीद में इंग्लैंड की मदद कर रहे थे कि युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार भारत को स्वशासन (Self-rule) का अधिकार देगी। ब्रिटिश सरकार पर दबाव: कुछ नेता युद्ध के समय ही अंग्रेजों पर दबाव बनाना चाहते थे ताकि अधिकारों की घोषणा जल्द हो सके। इसी उद्देश्य के साथ सन 1916 में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट द्वारा होम रूल आंदोलन की शुरुआत की गई। अंग्रेजों का विश्वासघात झूठा आश्वासन: ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के दौरान कांग्रेस की मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया था। वादे से मुकरना: इसी आश्वासन पर भारतीयों ने युद्ध में मदद की, लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद अंग्रेज अपने वादे से पूरी तरह मुकर गए। होम रूल आंदोलन (Home Rule Movement) ? प्रथम विश्व युद्ध और भारत (World War I & India) युद्ध की शुरुआत (1914): सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध का आरंभ हुआ था। भारतीय संसाधनों का दोहन: ब्रिटिश सरकार ने इस युद्ध को लड़ने के लिए भारतीय जनता, भारी संख्या में सैनिकों और भारत के करोड़ों रुपयों का इस्तेमाल किया था। ? भारतीय नेताओं की रणनीति (Strategy of Indian Leaders) युद्ध के दौरान भारतीय राष्ट्रीय नेताओं के विचार दो अलग-अलग रणनीतियों में बंटे हुए थे: सहयोग और स्वशासन की उम्मीद: कुछ नेता इंग्लैंड की मदद करने के पक्ष में थे। उन्हें आशा थी कि इस मदद के बदले ब्रिटिश सरकार युद्ध के बाद भारत को सर्वशासन (स्वशासन या Self-Rule) का अधिकार और कुछ राजनीतिक सुविधाएं देगी। ब्रिटिश सरकार पर दबाव की नीति: इसके विपरीत, कुछ भारतीय नेता युद्ध के दौरान ही इंग्लैंड पर राजनीतिक दबाव बनाना चाहते थे। उनका मानना था कि दबाव बनाने से देश के संसाधनों और अधिकारों के विषय में अंग्रेज जल्दी घोषणा करने पर मजबूर हो जाएंगे। मुख्य तथ्य: इसी राजनीतिक माहौल के बीच सन 1916 में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट द्वारा होम रूल आंदोलन की शुरुआत की गई थी, जिसका मुख्य लक्ष्य भारत में स्वशासन लाना था। ? ब्रिटिश सरकार का विश्वासघात (The British Betrayal) झूठा आश्वासन: अपनी स्थिति कमजोर देखकर ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के दौरान कांग्रेस की मांगों को पूरा करने का पूरा आश्वासन दिया था। भारतीयों द्वारा सहायता: अंग्रेजों के इसी वादे के भरोसे पर भारतीयों ने विश्व युद्ध में ब्रिटिश सरकार की बढ़-चढ़कर सहायता भी की। वादे से मुकरना: लेकिन जैसे ही युद्ध समाप्त हुआ, अंग्रेज अपने वादे से पूरी तरह मुकर गए और उन्होंने भारतीयों को अधिकारों के बदले दमनकारी कानून (जैसे रौलट एक्ट) दिए। ? 1. प्रथम विश्व युद्ध और भारत की भूमिका (World War I & India) युद्ध की शुरुआत (1914): सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध का आरंभ हुआ था। (ध्यान दें: मूल लेख में लिखी गई तारीख 1924 गलत थी, इसे सुधार कर 1914 कर दिया गया है)। भारतीय संसाधनों का उपयोग: इंग्लैंड ने इस युद्ध में लड़ने के लिए भारतीय जनता, भारी संख्या में सैनिकों और भारत के करोड़ों रुपयों का इस्तेमाल किया। ? 2. भारतीय नेताओं की सोच और रणनीतियाँ (Strategy of Indian Leaders) युद्ध काल के दौरान भारतीय नेताओं के विचार दो अलग-अलग हिस्सों में बंटे हुए थे: सहयोग और स्वशासन की उम्मीद: कुछ राष्ट्रीय नेता इंग्लैंड की मदद करने के पक्ष में थे। उन्हें उम्मीद थी कि इस सहायता के बदले ब्रिटिश सरकार युद्ध के बाद भारत को सर्वशासन (स्वशासन या Self-Rule) के अधिकार और कुछ विशेष सुविधाएं देगी। ब्रिटिश सरकार पर दबाव की नीति: इसके विपरीत, कुछ नेता युद्ध के दौरान ही ब्रिटिश सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाना चाहते थे। उनका मानना था कि दबाव बनाने से देश के संसाधनों और अधिकारों के विषय में अंग्रेज जल्दी घोषणा करने पर मजबूर हो जाएंगे। इसी वैचारिक पृष्ठभूमि से देश में होम रूल आंदोलन (1916) का जन्म हुआ, जिसका नेतृत्व बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने किया था। ? 3. ब्रिटिश सरकार का आश्वासन और विश्वासघात (The British Betrayal) कांग्रेस की मांगों पर सहमति: युद्ध के दौरान अपनी स्थिति कमजोर देखकर ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस की मांगों को पूरा करने का पूरा आश्वासन दिया था। भारतीयों द्वारा सहायता: अंग्रेजों के इसी वादे और आश्वासन के आधार पर भारतीयों ने प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश सरकार की जी-जान से सहायता की। युद्ध के बाद धोखा: लेकिन जैसे ही युद्ध समाप्त हुआ, अंग्रेज अपने वादे से पूरी तरह मुकर गए और उन्होंने भारतीयों को अधिकारों के बदले दमनकारी कानून (जैसे रौलट एक्ट) दिए। ? धन्यवाद
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