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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

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Meri Kalam Se
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1. होम रूल आंदोलन: भारत की आज़ादी की पहली हुंकार

1. होम रूल आंदोलन: भारत की आज़ादी की पहली हुंकार
 होम रूल आंदोलन (Home Rule Movement)    पृष्ठभूमि (Background) प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत: सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ। भारतीय संसाधनों का दोहन: ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के लिए भारतीय जनता, सैनिकों और करोड़ों रुपयों का भरपूर इस्तेमाल किया।   भारतीय नेताओं की उम्मीद और रणनीति सहयोग की भावना: भारत के कुछ राष्ट्रीय नेता इस उम्मीद में इंग्लैंड की मदद कर रहे थे कि युद्ध के बाद ब्रिटिश... Read More
 होम रूल आंदोलन (Home Rule Movement)    पृष्ठभूमि (Background) प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत: सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ। भारतीय संसाधनों का दोहन: ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के लिए भारतीय जनता, सैनिकों और करोड़ों रुपयों का भरपूर इस्तेमाल किया।   भारतीय नेताओं की उम्मीद और रणनीति सहयोग की भावना: भारत के कुछ राष्ट्रीय नेता इस उम्मीद में इंग्लैंड की मदद कर रहे थे कि युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार भारत को स्वशासन (Self-rule) का अधिकार देगी। ब्रिटिश सरकार पर दबाव: कुछ नेता युद्ध के समय ही अंग्रेजों पर दबाव बनाना चाहते थे ताकि अधिकारों की घोषणा जल्द हो सके। इसी उद्देश्य के साथ सन 1916 में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट द्वारा होम रूल आंदोलन की शुरुआत की गई।    अंग्रेजों का विश्वासघात झूठा आश्वासन: ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के दौरान कांग्रेस की मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया था। वादे से मुकरना: इसी आश्वासन पर भारतीयों ने युद्ध में मदद की, लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद अंग्रेज अपने वादे से पूरी तरह मुकर गए।  होम रूल आंदोलन (Home Rule Movement)   ? प्रथम विश्व युद्ध और भारत (World War I & India) युद्ध की शुरुआत (1914): सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध का आरंभ हुआ था। भारतीय संसाधनों का दोहन: ब्रिटिश सरकार ने इस युद्ध को लड़ने के लिए भारतीय जनता, भारी संख्या में सैनिकों और भारत के करोड़ों रुपयों का इस्तेमाल किया था।     ? भारतीय नेताओं की रणनीति (Strategy of Indian Leaders) युद्ध के दौरान भारतीय राष्ट्रीय नेताओं के विचार दो अलग-अलग रणनीतियों में बंटे हुए थे: सहयोग और स्वशासन की उम्मीद: कुछ नेता इंग्लैंड की मदद करने के पक्ष में थे। उन्हें आशा थी कि इस मदद के बदले ब्रिटिश सरकार युद्ध के बाद भारत को सर्वशासन (स्वशासन या Self-Rule) का अधिकार और कुछ राजनीतिक सुविधाएं देगी। ब्रिटिश सरकार पर दबाव की नीति: इसके विपरीत, कुछ भारतीय नेता युद्ध के दौरान ही इंग्लैंड पर राजनीतिक दबाव बनाना चाहते थे। उनका मानना था कि दबाव बनाने से देश के संसाधनों और अधिकारों के विषय में अंग्रेज जल्दी घोषणा करने पर मजबूर हो जाएंगे।      मुख्य तथ्य: इसी राजनीतिक माहौल के बीच सन 1916 में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट द्वारा होम रूल आंदोलन की शुरुआत की गई थी, जिसका मुख्य लक्ष्य भारत में स्वशासन लाना था।   ? ब्रिटिश सरकार का विश्वासघात (The British Betrayal)     झूठा आश्वासन: अपनी स्थिति कमजोर देखकर ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के दौरान कांग्रेस की मांगों को पूरा करने का पूरा आश्वासन दिया था। भारतीयों द्वारा सहायता: अंग्रेजों के इसी वादे के भरोसे पर भारतीयों ने विश्व युद्ध में ब्रिटिश सरकार की बढ़-चढ़कर सहायता भी की। वादे से मुकरना: लेकिन जैसे ही युद्ध समाप्त हुआ, अंग्रेज अपने वादे से पूरी तरह मुकर गए और उन्होंने भारतीयों को अधिकारों के बदले दमनकारी कानून (जैसे रौलट एक्ट) दिए।                                                                                                                                                                       ? 1. प्रथम विश्व युद्ध और भारत की भूमिका (World War I & India) युद्ध की शुरुआत (1914): सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध का आरंभ हुआ था। (ध्यान दें: मूल लेख में लिखी गई तारीख 1924 गलत थी, इसे सुधार कर 1914 कर दिया गया है)। भारतीय संसाधनों का उपयोग: इंग्लैंड ने इस युद्ध में लड़ने के लिए भारतीय जनता, भारी संख्या में सैनिकों और भारत के करोड़ों रुपयों का इस्तेमाल किया।   ? 2. भारतीय नेताओं की सोच और रणनीतियाँ (Strategy of Indian Leaders) युद्ध काल के दौरान भारतीय नेताओं के विचार दो अलग-अलग हिस्सों में बंटे हुए थे:   सहयोग और स्वशासन की उम्मीद: कुछ राष्ट्रीय नेता इंग्लैंड की मदद करने के पक्ष में थे। उन्हें उम्मीद थी कि इस सहायता के बदले ब्रिटिश सरकार युद्ध के बाद भारत को सर्वशासन (स्वशासन या Self-Rule) के अधिकार और कुछ विशेष सुविधाएं देगी। ब्रिटिश सरकार पर दबाव की नीति: इसके विपरीत, कुछ नेता युद्ध के दौरान ही ब्रिटिश सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाना चाहते थे। उनका मानना था कि दबाव बनाने से देश के संसाधनों और अधिकारों के विषय में अंग्रेज जल्दी घोषणा करने पर मजबूर हो जाएंगे। इसी वैचारिक पृष्ठभूमि से देश में होम रूल आंदोलन (1916) का जन्म हुआ, जिसका नेतृत्व बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने किया था।   ? 3. ब्रिटिश सरकार का आश्वासन और विश्वासघात (The British Betrayal)   कांग्रेस की मांगों पर सहमति: युद्ध के दौरान अपनी स्थिति कमजोर देखकर ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस की मांगों को पूरा करने का पूरा आश्वासन दिया था। भारतीयों द्वारा सहायता: अंग्रेजों के इसी वादे और आश्वासन के आधार पर भारतीयों ने प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश सरकार की जी-जान से सहायता की। युद्ध के बाद धोखा: लेकिन जैसे ही युद्ध समाप्त हुआ, अंग्रेज अपने वादे से पूरी तरह मुकर गए और उन्होंने भारतीयों को अधिकारों के बदले दमनकारी कानून (जैसे रौलट एक्ट) दिए।     ? धन्यवाद                                                    
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[email protected] 04 Apr 2026 167 Views

गदर पार्टी: जिसने सात समंदर पार से हिला दी थी अंग्रेजी शासन की नींव

गदर पार्टी: जिसने सात समंदर पार से हिला दी थी अंग्रेजी शासन की नींव
गदर पार्टी का इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका गदर पार्टी: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में सशस्त्र राष्ट्रवादियों द्वारा ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह की योजनाएं तैयार होने लगी थीं। भारत से बाहर, अमेरिका और कनाडा में बसे भारतीय देशभक्तों ने 1913 ईस्वी में 'गदर पार्टी' की स्थापना की। इस ऐतिहासिक पार्टी के प्रमुख नेता लाला हरदयाल थे। द... Read More
गदर पार्टी का इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका गदर पार्टी: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में सशस्त्र राष्ट्रवादियों द्वारा ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह की योजनाएं तैयार होने लगी थीं। भारत से बाहर, अमेरिका और कनाडा में बसे भारतीय देशभक्तों ने 1913 ईस्वी में 'गदर पार्टी' की स्थापना की। इस ऐतिहासिक पार्टी के प्रमुख नेता लाला हरदयाल थे। दल के अन्य सक्रिय और मुख्य सदस्यों में निम्नलिखित नाम शामिल थे: रासबिहारी बोस राजा महेंद्र प्रताप बरकतउल्ला उबैदुल्लाह सिंधी भाई भगवान सिंह सोहन सिंह भकना गदर पार्टी द्वारा राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने के लिए 'गदर' नाम का एक साप्ताहिक समाचार पत्र भी प्रकाशित किया जाता था। इस पत्र के मुख्य पृष्ठ (Front Page) पर स्पष्ट अक्षरों में लिखा रहता था: "अंग्रेजी राज का दुश्मन"।     गदर पार्टी: इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब भारत में आजादी की लड़ाई तेज हो रही थी, तब देश और विदेश में कई क्रांतिकारी गतिविधियां चल रही थीं। इसी दौरान गदर पार्टी की नींव रखी गई।   स्थापना और पृष्ठभूमि युद्ध काल में बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में सशस्त्र राष्ट्रवादी विद्रोह की योजनाएं तैयार होने लगी थीं। इसी बीच, भारत से बाहर अमेरिका और कनाडा में बसे भारतीय देशभक्तों ने एकजुट होकर वर्ष 1913 में गदर पार्टी की स्थापना की।   प्रमुख नेता और सदस्य इस क्रांतिकारी पार्टी के प्रमुख नेता लाला हरदयाल थे। उनके साथ इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में कई अन्य देशभक्तों ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:   रासबिहारी बोस राजा महेंद्र प्रताप बरकतउल्ला उबैदुल्लाह सिंधी भाई भगवान सिंह सोहन सिंह भकना   'गदर' समाचार पत्र: क्रांति की आवाज गदर पार्टी केवल एक संगठन नहीं था, बल्कि विचारों को फैलाने का एक माध्यम भी था। पार्टी की ओर से 'गदर' नाम का एक सामाजिक व राजनीतिक पत्र प्रकाशित किया जाता था। इस पत्र के मुख्य पृष्ठ (Front Page) पर बड़े अक्षरों में लिखा रहता था:    
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[email protected] 03 Apr 2026 175 Views

आएइ जानते हैं क्रांतिकारी आंदोलन के बारे में

आएइ जानते हैं क्रांतिकारी आंदोलन के बारे में
 क्रांतिकारी आंदोलन  ब्रिटिश शासन द्वारा राष्ट्रीय आंदोलन के क्रूर दमन के कारण कुछ देशभक्ति ने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए सशस्त्र क्रांति का मार्ग अपनाया क्रांतिकारी सिर्फ परिणाम के इच्छुक थे बंगाल पंजाब और महाराष्ट्र में क्रांतिकारी आंदोलन ने गति प्राप्त कर ली इसका विश्वास था की क्रांति से ही देश को आजाद कराया जा सकता है क्रांतिकारियों ने बंगाल में अनुशीलन समिति की स्थापना की खुदीराम बोस पर फूल च... Read More
 क्रांतिकारी आंदोलन  ब्रिटिश शासन द्वारा राष्ट्रीय आंदोलन के क्रूर दमन के कारण कुछ देशभक्ति ने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए सशस्त्र क्रांति का मार्ग अपनाया क्रांतिकारी सिर्फ परिणाम के इच्छुक थे बंगाल पंजाब और महाराष्ट्र में क्रांतिकारी आंदोलन ने गति प्राप्त कर ली इसका विश्वास था की क्रांति से ही देश को आजाद कराया जा सकता है क्रांतिकारियों ने बंगाल में अनुशीलन समिति की स्थापना की खुदीराम बोस पर फूल चकी और अरविंद घोष प्रमुख क्रांतिकारी थे महाराष्ट्र के चाफेकर भाइयों की भी इस प्रकार के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका थी उसे आंदोलन को व्यापार बनाने के लिए क्रांतिकारी समाचार पत्रों का प्रशासन भी शुरू किया गया बंगाल के संध्या और युगांतर तथा महाराष्ट्र का काल प्रमुख समाचार पत्र थे  धन्यवाद
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[email protected] 02 Apr 2026 193 Views

बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन

बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन
 बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन  बंग भंग का विरोध करने के लिए भारतीयों ने अंग्रेजों से प्रार्थना करने की बजाय अपने बल पर स्वराज्य हासिल करने की भावना से दो तरह के कार्यक्रम बनाएं   बड़ी मात्रा में अंग्रेजी कपड़े शंकर आदि माल का बहिष्कार  दूसरा स्वदेशी यानी अपने देश के लोगों द्वारा बनाई चीजों का ही उपयोग भारतीयों में स्वदेशी का विचार पनपन लगावे कहते हम अपने अवॉगड़ लगाएंगे अपने स्कूल कॉलेज खोलेंगे ग... Read More
 बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन  बंग भंग का विरोध करने के लिए भारतीयों ने अंग्रेजों से प्रार्थना करने की बजाय अपने बल पर स्वराज्य हासिल करने की भावना से दो तरह के कार्यक्रम बनाएं   बड़ी मात्रा में अंग्रेजी कपड़े शंकर आदि माल का बहिष्कार  दूसरा स्वदेशी यानी अपने देश के लोगों द्वारा बनाई चीजों का ही उपयोग भारतीयों में स्वदेशी का विचार पनपन लगावे कहते हम अपने अवॉगड़ लगाएंगे अपने स्कूल कॉलेज खोलेंगे गांव के लोगों के बीच काम करके उनकी समस्या दूर करेंगे हम अपनी अपनी पंचायत व कचहरी चलाएंगे हम अपने विकास के लिए अंग्रेजों पर निर्भर नहीं रहेंगे और अपनी आत्म शक्ति बढ़ाएंगे   धन्यवाद
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[email protected] 01 Apr 2026 155 Views

बंग भंग आंदोलन (1905): इतिहास, कारण और इसके मुख्य परिणाम

बंग भंग आंदोलन (1905): इतिहास, कारण और इसके मुख्य परिणाम
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में बंग भंग आंदोलन (जिसे स्वदेशी आंदोलन भी कहा जाता है) एक बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ था। यह आंदोलन अंग्रेजों की सोची-समझी राजनीतिक चाल और फूट डालो राज करो की नीति के खिलाफ भारतीयों का पहला बड़ा सामूहिक विरोध था।   आंदोलन की पृष्ठभूमि (Background) 20वीं सदी की शुरुआत में बंगाल भारतीय राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका था। इस तेजी से बढ़ते राष्ट्रीय आंदोलन के प्रभ... Read More
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में बंग भंग आंदोलन (जिसे स्वदेशी आंदोलन भी कहा जाता है) एक बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ था। यह आंदोलन अंग्रेजों की सोची-समझी राजनीतिक चाल और फूट डालो राज करो की नीति के खिलाफ भारतीयों का पहला बड़ा सामूहिक विरोध था।   आंदोलन की पृष्ठभूमि (Background) 20वीं सदी की शुरुआत में बंगाल भारतीय राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका था। इस तेजी से बढ़ते राष्ट्रीय आंदोलन के प्रभाव को कम करने और भारतीयों की एकता को तोड़ने के लिए तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड कर्जन ने सन 1905 ईस्वी में बंगाल को दो भागों में विभाजित करने का निर्णय लिया।    विभाजन का कारण: दिखावा बनाम हकीकत ब्रिटिश सरकार का बहाना: अंग्रेजों ने कागजों पर यह दिखाया कि बंगाल बहुत बड़ा प्रांत है, इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था (Administration) को बेहतर बनाने के लिए इसका विभाजन ज़रूरी है। वास्तविक कारण: अंग्रेजों का असली मकसद राजनीतिक था। वे हिंदू और मुसलमान लोगों में फूट डालकर राष्ट्रवाद की भावना को कुचलना चाहते थे।    बंगाल का विभाजन कैसे हुआ? ब्रिटिश सरकार ने बंगाल प्रेसीडेंसी प्रांत को धार्मिक आधार पर दो हिस्सों में बांट दिया: पश्चिम बंगाल: इस हिस्से में हिंदू आबादी बहुसंख्यक (अधिक) थी। पूर्वी बंगाल: इस हिस्से में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक थी (यह क्षेत्र आज का बांग्लादेश है)।   आंदोलन की शुरुआत और व्यापक असर राष्ट्रव्यापी आक्रोश: इस विभाजन की घोषणा होते ही पूरे बंगाल और देश भर में रोष की लहर दौड़ गई। 16 अक्टूबर 1905 (विभाजन के दिन) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया। नेताओं की एकजुटता: कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के नेताओं ने अपने मतभेदों को भुलाकर एक साथ मिलकर इस आंदोलन को एक मजबूत नेतृत्व दिया। स्वदेशी और बहिष्कार: इस आंदोलन के तहत विदेशी सामानों और कपड़ों का बहिष्कार किया गया और स्वदेशी चीजों को अपनाने पर जोर दिया गया। मुस्लिम लीग की स्थापना: इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, आगे चलकर सन 1906 ईस्वी में ढाका में भारतीय मुस्लिम लीग की स्थापना हुई।   आंदोलन का परिणाम भारतीयों के कड़े विरोध और बढ़ते क्रांतिकारी आंदोलनों के आगे आखिरकार ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा। साल 1911 ईस्वी में दिल्ली दरबार में बंगाल के विभाजन को रद्द (वापस) कर दिया गया
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[email protected] 01 Apr 2026 155 Views

कांग्रेस में प्रथम अधिवेशन में घोषित उद्देश्य

कांग्रेस में प्रथम अधिवेशन में घोषित उद्देश्य
 कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में घोषित उद्देश्य -  देश के विभिन्न भागों के राजनीतिक व सामाजिक नेताओं को एकजुट करना  भारतीयों में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करना  राजनीतिक और सार्वजनिक प्रश्नों पर अपने विचार को अभिव्यक्त करना  कांग्रेस के अधिवेशन में देश के हर वर्ग के लोगों की समस्याओं पर चर्चा होती थी सरकारी नीतियों की आलोचना भी होती थी सरकार को कैसी नीतियां अपनानी चाहिए इसके बारे में प्... Read More
 कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में घोषित उद्देश्य -  देश के विभिन्न भागों के राजनीतिक व सामाजिक नेताओं को एकजुट करना  भारतीयों में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करना  राजनीतिक और सार्वजनिक प्रश्नों पर अपने विचार को अभिव्यक्त करना  कांग्रेस के अधिवेशन में देश के हर वर्ग के लोगों की समस्याओं पर चर्चा होती थी सरकारी नीतियों की आलोचना भी होती थी सरकार को कैसी नीतियां अपनानी चाहिए इसके बारे में प्रस्ताव पास किए जाते हैं धन्यवाद
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[email protected] 01 Apr 2026 142 Views

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में अग्रणी भूमिका श्री एलेन ऑक्टेवियन हम नमक अवकाश प्राप्त अधिकारी की राही में आधार वादी अंग्रेज थे कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में सम्मिलित होने वाले प्रमुख भारतीय नेता दादा भाई नूराजे नाथ फिरोज शाह मेहता बनर्जी इस अधिवेशन के अध्यक्ष थे Read More
 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में अग्रणी भूमिका श्री एलेन ऑक्टेवियन हम नमक अवकाश प्राप्त अधिकारी की राही में आधार वादी अंग्रेज थे कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में सम्मिलित होने वाले प्रमुख भारतीय नेता दादा भाई नूराजे नाथ फिरोज शाह मेहता बनर्जी इस अधिवेशन के अध्यक्ष थे
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[email protected] 31 Mar 2026 145 Views

नए बुद्धिजीवी वर्ग

 नए बुद्धिजीवी वर्ग   नए बुद्धिजीवी लोग कार्य कनिष्ठ प्रशासनक वकील डॉक्टर अध्यापक अत्यधिक है इनमें से कुछ लोग इंग्लैंड में भी शिक्षा प्राप्त कर चुके थे उन्हें वहां इन राजनीतिक संस्थाओं की व्यवस्था भी देखी थी यहां लौटने पर उन्हें यह अनुभव हुआ कि उनके मौलिक अधिकार सुनने के बराबर है और वातावरण में दास्तान ही दस्त है  अंग्रेजी पढ़कर लिखे बुद्धिजीवी वर्ग अपने राजनीतिक अधिकार से परिचित थे उन्होंने अनुभव... Read More
 नए बुद्धिजीवी वर्ग   नए बुद्धिजीवी लोग कार्य कनिष्ठ प्रशासनक वकील डॉक्टर अध्यापक अत्यधिक है इनमें से कुछ लोग इंग्लैंड में भी शिक्षा प्राप्त कर चुके थे उन्हें वहां इन राजनीतिक संस्थाओं की व्यवस्था भी देखी थी यहां लौटने पर उन्हें यह अनुभव हुआ कि उनके मौलिक अधिकार सुनने के बराबर है और वातावरण में दास्तान ही दस्त है  अंग्रेजी पढ़कर लिखे बुद्धिजीवी वर्ग अपने राजनीतिक अधिकार से परिचित थे उन्होंने अनुभव किया की सन 1833 ई के चार्टर एक्ट तथा रानी विक्टोरिया की सन 1858 ईस्वी में की गई घोषणा के दिए गए वचनों के बावजूद ऊंचे ऊंचे पदों के द्वारा भारतीय के लिए बंद ही थे यही लोग नवोदित राजनीतिक असंतोष का क्रोध बिंदु बने तथा भारतीय राजनीतिक संस्थाओं को नृत्य तत्व प्रदान किया  धन्यवाद
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[email protected] 27 Mar 2026 172 Views

आर्थिक राष्ट्रवाद के बारे में जाने

आर्थिक राष्ट्रवाद के बारे में जाने
 आर्थिक राष्ट्रवाद :-  अंग्रेजों की पक्षपातपुर आर्थिक तथा राजस्व नीति की प्रतिक्रिया के रूप में भारत में राष्ट्रवाद का उदय हुआ 19वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में इंग्लैंड औद्योगिक क्रांति का नेता था और उसे अपने सत्य कच्चे माल तथा तैयार माल के लिए एक मंडी चाहिए थी भारत की सभी आर्थिक नीतियों कृषि उद्योग वित्त शुल्क विदेशी पूंजी निवेदन विदेशी व्यापार बैंक व्यापार अत्यधिक अंग्रेजी अर्थव्यवस्था को बनाए रखन... Read More
 आर्थिक राष्ट्रवाद :-  अंग्रेजों की पक्षपातपुर आर्थिक तथा राजस्व नीति की प्रतिक्रिया के रूप में भारत में राष्ट्रवाद का उदय हुआ 19वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में इंग्लैंड औद्योगिक क्रांति का नेता था और उसे अपने सत्य कच्चे माल तथा तैयार माल के लिए एक मंडी चाहिए थी भारत की सभी आर्थिक नीतियों कृषि उद्योग वित्त शुल्क विदेशी पूंजी निवेदन विदेशी व्यापार बैंक व्यापार अत्यधिक अंग्रेजी अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए घटित की गई जब कभी भी भारतीय विकास तथा अंग्रेजों हटाना में टकराव होता था तो बाली सदैव भारतीय हितों की होती थी इस व्यवस्था का दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक द प्रॉपर्टी और उन ब्रिटिश रूल इन इंडिया में धन निष्कासन के सिद्धांत द थ्योरी ऑफ़ ड्रेन के रूप में उल्लेख किया है  धन्यवाद
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[email protected] 27 Mar 2026 176 Views

अंग्रेज शासको का नस्लीय दम

अंग्रेज शासको का नस्लीय दम
 अंग्रेज शासको का नक्सलीय डब   भारत में राष्ट्रीय भावनाओं के विकास का एक महत्वपूर्ण कारण अंग्रेजों की जातियां श्रेष्ठ कदम था भारतीय यूरोपीय लोगों के कमल में नहीं जा सकते थे और उन्हें गाड़ी के उसे डिब्बे में यात्रा की अनुमति नहीं थी जिसमें यूरोपीय यात्रा जा रहे हो  धन्यवाद Read More
 अंग्रेज शासको का नक्सलीय डब   भारत में राष्ट्रीय भावनाओं के विकास का एक महत्वपूर्ण कारण अंग्रेजों की जातियां श्रेष्ठ कदम था भारतीय यूरोपीय लोगों के कमल में नहीं जा सकते थे और उन्हें गाड़ी के उसे डिब्बे में यात्रा की अनुमति नहीं थी जिसमें यूरोपीय यात्रा जा रहे हो  धन्यवाद
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[email protected] 27 Mar 2026 147 Views