हमारा शरीर एक मशीन के समान है जिस प्रकार मशीन को चलाने से उसके पुर्जे घिसते हैं उसे प्रकार शरीर रूपी मशीन में भी टूट-फूट होती रहती है मशीन में जिस प्रकार पुराने पुर्जे के स्थान पर नया पुर्जा लगाना पड़ता है उसी प्रकार शरीर में भी कोशिकाओं के नष्ट हो जाने पर दूसरी नवीन कोशिकाएं उनका स्थान ग्रहण कर लेते हैं जिस प्रकार तेल के अभाव में मशीन नहीं चल सकती है उसी प्रकार भोजन के अभाव में शेयर नहीं चल सकता है
धन्यवाद
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Vanshika
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