Company Logo

Vanshika

WEFRU9450291115202
Scan to visit website

Scan QR code to visit our website

Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se Digital Diary Submit Post


प्रेमचंद के जीवन के बारे में


 मैं आज आपको एक महान लेखक के बारे में बताने जा रही हूं जिनका नाम धनपत राय श्रीवास्तव है और उनका उपनाम प्रेमचंद है  प्रेमचंद-  कहानी है उपन्यास सम्राट की उपाधि से विभूषित सब नाम धन्य प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई सन 1880 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लेमी ग्राम में हुआ था उनके बचपन का नाम धनपत राय था किंतु यह अपनी कहानी उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखते थे और हिंदी में प्रेमचंद के... Read More

 मैं आज आपको एक महान लेखक के बारे में बताने जा रही हूं जिनका नाम धनपत राय श्रीवास्तव है और उनका उपनाम प्रेमचंद है

 प्रेमचंद-

 कहानी है उपन्यास सम्राट की उपाधि से विभूषित सब नाम धन्य प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई सन 1880 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लेमी ग्राम में हुआ था उनके बचपन का नाम धनपत राय था किंतु यह अपनी कहानी उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखते थे और हिंदी में प्रेमचंद के नाम से कुछ राजनीतिक कहानी इन्होंने उर्दू में ही धनपत राय नाम से लिखिए उनके द्वारा रचित सोजे वतन ने ऐसी हलचल मचाई की सरकार ने उसे जप्त कर लिया गरीब परिवार में जन्म लेने और अल्पायु में ही पिता की मृत्यु हो जाने के कारण इनका बचपन बड़े कासन मैं पिता किंतु जिस सास और परिश्रम से इन्होंने अपना अध्ययन जारी रखा वह सावधनहीन किंतु कुशरण बुद्धि और परिसर में छात्रों के लिए प्रेरणाप्रद है अभावग्रस्त होने पर भी इन्होंने मां और बा की परीक्षा उत्तरण की प्रारंभ में यह कुछ वर्षों तक एक स्कूल में ₹20 मासिक पर अध्यापक रहे बाद में शिक्षा विभाग में एक डिप्टी स्पेक्टर हो गए कुछ दिनों बाद ऐसे योग आंदोलन से सहानुभूति रखने के कारण इन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और आजीवन साहित्य सेवा करते रहे इन्होंने अनेक पत्रिकाओं का संपादन किया अपना प्रेस खोला और हंस नामक पत्रिका भी निकाली

 प्रेमचंद का विवाह विद्यार्थी जीवन में ही हो चुका था परंतु वह सफल न हो सका शिवरानी देवी के साथ इनका दूसरा विवाह हुआ शिवरानी देवी एक पढ़ी-लिखी विदुषी महिला थी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से इन्होंने प्रेमचंद नाम रखा और इसी नाम से साहित्य सृजन करने लगे इन्होंने अपने जीवन काल में एक दर्जन उपन्यास और 300 से अधिक कहानियों की रचना की गोदान इसका विश्व प्रसिद्ध उपन्यास है लंबी बीमारी के बाद सन 1836 ईस्वी में इनका देहावसान हो गया 

 प्रेमचंद ने हिंदी कथा साहित्य में युगांतर उपस्थित किया इनका साहित्य समाज सुधारो राष्ट्रीय भावना से अनूप प्रेरित है वह अपने समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का पूरा प्रतिनिधित्व करता है उसमें किसने की दशा सामाजिक बंधनों की तड़पती नरिया की वेदना और वर्ण व्यवस्था की कठोरता के भीतर सत्तर हरिजन की पीड़ा का मां अमेरिकी चित्रण मिलता है उनकी सहानुभूति भारत की दलित जनता शोषण किसानों मजदूरों और अपेक्षित नदियों के प्रति रही है समीक्षा के साथ ही उनके साहित्य में ऐसे तत्व विद्यमान है जो उसे शाश्वत और स्थाई बनाते हैं प्रेमचंद अपने युग के उन सिद्ध कलाकारों में थे जिन्होंने हिंदी को नवीन योग की आशा आशंकाओं की अभिव्यक्ति का सफल माध्यम बनाया

 साहित्यिक जीवन में प्रवेश करने के पश्चात इन्होंने सर्वप्रथम मर्यादा पत्रिका का संपादन भारत संभाल लगभग डेढ़ वर्ष तक कार्य करने के पश्चात यह काशी विद्यापीठ आ गए और यहां प्रधान अध्यापक नियुक्त हुए तट पश्चात माधुरी पत्रिका का संपादन भार संभाला इसी के चलते स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया अपना प्रेस लगाकर हंस पत्रिका और जागरण नामक पत्र निकाला किंतु आर्थिक स्थिति होने के कारण यह कार्य बंद करना पड़ा अनंत मुंबई आकर ₹8000 वार्षिक वेतन पर एक फिल्म कंपनी में नौकरी कर ली किंतु स्वास्थ्य ने इनका साथ में दिया और लिए अपने गांव लौट आए

 प्रेमचंद की प्रमुख रचनाएं-

 कर्मभूमि, गोदान, गबन, सेवा सदन, निर्मला,वरदान प्रतिज्ञा, रंगभूमि, कर्मभूमि,प्रेमश्रम (अपूर्ण)

धन्यवाद:-


Read Full Blog...


सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम


प्रत्येक व्यक्ति का जीवन एवं मूल्य है इसका कोई विकल्प नहीं हो सकता जब हम घर से बाहर सड़क पर निकलते हैं तो दुर्घटनाओं की आशंकाओं के चलते हमारा जीवन जिंदगी की कसम कस के बीच दाव पर लगा होता है सड़क पर चलते जीवन पर मेड्रिड इस खतरे को हम सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियमों का पालन करके यदि समाप्त नहीं कर सकते तो न्यूनतम आवश्यक कर सकते हैं सड़क दुर्घटनाओं एवं उनसे होने वाली महतो का सबसे मुख्य कारण याताया... Read More

प्रत्येक व्यक्ति का जीवन एवं मूल्य है इसका कोई विकल्प नहीं हो सकता जब हम घर से बाहर सड़क पर निकलते हैं तो दुर्घटनाओं की आशंकाओं के चलते हमारा जीवन जिंदगी की कसम कस के बीच दाव पर लगा होता है सड़क पर चलते जीवन पर मेड्रिड इस खतरे को हम सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियमों का पालन करके यदि समाप्त नहीं कर सकते तो न्यूनतम आवश्यक कर सकते हैं सड़क दुर्घटनाओं एवं उनसे होने वाली महतो का सबसे मुख्य कारण यातायात के नियमों की जानकारी का अभाव और उन नियमों का पालन न करना ही है लोग इन नियमों को जाने समझे उनका पालन करें और दूसरों को भी उनके पालन के लिए प्रेरित करके सड़क यातायात को सुरक्षित बनाने में सहयोग करें यही इस पाठ के पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने का मुख्य उद्देश्य है 

 यातायात दो शब्दों से मिलकर बना है यात+ आयत जिसका अर्थ है आना-जाना प्राचीन काल से ही मानव सभ्यता की संसद जीवन शैली आवाज मां पर ही निर्भर है आधुनिक काल में बढ़ते संसाधन एवं विकास क्षेत्र को देखते हुए देश में ही नहीं संपूर्ण विश्व में यातायात से संबंधित महत्वपूर्ण नियम बनाए गए हैं क्योंकि इसे न केवल यातायात सुगम बनता है बल्कि सड़क दुर्घटना से होने वाले भैया वह खतरों से भी बचा जा सकता है आम जनता खास तौर से युवा पत्र के लोगों में अधिक जागरूकता लाने के लिए इसे शिक्षा सामाजिक जागरूकता अत्यधिक आयाम से जोड़ा जाना प्रासंगिक है क्योंकि विश्व में सड़क यातायात में मोटे और जख्मी होना एक साधारण घटना हो गई है विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक सड़क हादसों के शिकार व्यक्तियों की मौत हो जाती है

 हाथों से बचने के लिए यातायात के नियमों का पालन करना अति आवश्यक है इसके ज्ञान के भाव में असचरू रूप से पालन न करने के कारण भारत में प्रत्येक वर्ष 140000 से अधिक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं ऐसी विकट परिस्थितियों की भैया बहता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि विश्व भर के कुल वाहनों में से केवल एक प्रतिशत ही वहां भारत में है जबकि विश्व की कुल सड़क दुर्घटना में से 10% हद से भारत में होते हैं वीडियो बनाया है कि कोई नियम तब तक अपने लक्ष्य को नहीं प्राप्त कर सकता जब तक पालन करता उसे आत्म साथ करने की कोशिश ना करें

 सड़क यातायात के नियम विवेक पूर्ण होते हैं और उनका विवेकपूर्ण पालन करना भी आवश्यक होता है सड़क पर चलने वालों की सुरक्षा के लिए अनेक कानून एवं नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व  होता है जिससे हर कोई सुरक्षित घर पहुंच सके यदि हम इन नियमों का उल्लेख करते हैं तो स्वयं के साथ दूसरों को भी हानि पहुंचाते हैं यातायात के मुख्य नियमों को सीखने की सुख माता के अनुसार दो भागों में विभक्त कर सकते हैं- 1 सुरक्षा से संबंधित यातायात के नियम एवं सुविधाएं  2 वाहन चलाने के नियम एवं सुविधाएं

 पैदल साइकिल हैव रिक्शा चालकों को हमेशा अपनी लाइन में अर्थात बाई तरफ रहना चाहिए और सड़क पार करते समय डेन बाय देखने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए व्यस्त सड़कों पर हमेशा ज़ेबरा क्रॉसिंग का प्रयोग करना चाहिए तथा क्रॉस करते समय कभी यह न सोचना चाहिए कि वहां चालक उसे देख रहा है सड़क की संरचनात्मक ढांचा का सुविधाओं का पूरा उपयोग हो इसलिए सब में टाल मार्ग फुट ओवर ब्रिज सबका पालन नियामगत करना आवश्यक होता है शॉर्टकट या आसान विकल्प खोजना खतरनाक हो सकता है

 पैदल यात्राओं को सड़क पार करते समय मोटर वाहन अपने बीच पर्याप्त दूरी रखनी चाहिए और पार्क की गई या खड़ी गाड़ियों के बीच में रास्ता नहीं बनना चाहिए सड़क के खतरों से अधिकांक्षित बच्चे ज्यादा प्रभावित होते हैं जिसमें हमेशा चालक की गलती नहीं होती क्योंकि बच्चों के लापरवाही और जागरूकता की कमी से भी सड़क दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है बच्चे हमेशा बड़ों का आंदोलन करते हैं इसलिए उनके सामने व्यवस्था में भी सड़क के नियम का उल्लेख नहीं करना चाहिए और उन्हें रोक देखें सुने कमलीय मंत्र बताना व्यापालन करना अति आवश्यक होता है 

 वाहन चलाते समय यातायात के नियम एवं सुरक्षा की जानकारी के साथ-साथ वाहन चलाने की योग्यता उम्र एवं परिपक्वता की जानकारी प्रिया आवश्यक होती है सड़कों पर तीव्रता से बढ़ती दुखहिया और चौपाइयां वाहनों की भीड़ को व्यवस्थित करने एवं सड़क पर आवश्यक जगह हो पर लगे सड़क नियम यातायात नियम से संबंधित महत्वपूर्ण संकेत की जानकारी रखना भी आवश्यक होता है क्योंकि भारत में वर्ष 2011 की अवधि में लगभग 4. 98 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुई है जिसमें 1,42,485 लोगों की मृत्यु हुई वाहन चलाते समय कुछ मानवीय भूल होती है जिसे दुर्घटना हो जाती है इसलिए ऐसे तथ्यों पर गहन विवेचन की आवश्यकता है बहुत तेज गति से बहन चलाना नशे में गाड़ी चलाना चालक का ध्यान भटकना वाली चीज लाल बत्ती का उल्लंघन करना सीट बेल्ट और हेलमेट जैसे सुरक्षा साधनों की अपेक्षा लेने ड्राइविंग का पालन न करना और गलत तरीके से ओवरटेकिंग करना आदि कर्म से सड़क दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है इसलिए उपयुक्त निर्देशी सांसद बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए सावधानियां बरतनी चाहिए वर्तमान में वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के बढ़ते प्रयोग के कारण दुर्घटनाएं बड़ी है सुरक्षा की दृष्टि से वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं करना चाहिए

 सभी को पीछे छोड़ने की परवर्ती परिहार हर किसी में होती है गति में तीव्रता दुर्घटना का जोखिम और दुर्घटना के दौरान चोट की गंभीरता बढ़ती है खुशी के मुंह के आंसू के कारण लोगों में नशे की प्रवृत्ति होती है परंतु नशे की हालत में गाड़ी चलाना दुर्घटना में वृद्धि करता है कभी-कभी गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन होर्डिंग पर ध्यान चले जाने जैसी क्रियो मस्तिष्क से केंद्रक को प्रभावित करती है इसलिए गाड़ी चलाते समय ऐसी वस्तुओं से दूरी बना लेनी चाहिए कुछ अन्य बातें भी इसमें शामिल होती है जैसे गाड़ी का शीशा समायोजित करना वहां में स्टीरियो और रेडियो का चलाना सड़क पर जानवरों का आ जाना विज्ञापन पर सूचना प्राप्त आदि चीजों से चालक को अपना ध्यान नहीं भंग करना चाहिए और मगर परिवर्तन एवं ध्यान हटाने वाली बाहरी चीज देखने के दौरान सुरक्षित रहने के लिए वहां गति धीमी रखने की आवश्यकता होती है

 वाहन चलाते समय चौराहा पर लगी पत्तियों पर चौराहा पर किसी नियम की आवश्यकता होती है उसे पर चर्चा जरूरी है लाल 32 संकेत देती है कि वहां को रोकना है पीली पट्टी का संकेत है कि चलने के लिए तैयार होना एवं अंत में हरी बत्ती का संकेत होता है कि अब आगे बढ़ाना या चलना है इसके साथ ही चौराहे पर बाय मुड़ना लेफ्ट टर्न हमेशा खुला रहने का मतलब है की बाई तरफ मुड़ने के लिए या जाने के लिए रोकने की आवश्यकता नहीं है परंतु ध्यान रखना होता है कि चौराहे पर हमारी दाहिनी तरफ से आने वाले वहां से भी हमें बाई तरफ रहना है और जब तक पर्याप्त जगह ना मिले हमें दयानी लेने में नहीं आना चाहिए पर यह बहन विभाग से जारी किए गए सड़क से संबंधित कई महत्वपूर्ण संकेत निर्धारित किए गए हैं जिसकी जानकारी रखने या पालन करने या तैयार को सुगम सहज और सुखद बनाया जा सकता है सामान्य रूप से उसे दो भागों में बांटा गया है लिखित संकेत एवं चित्र संकेत लिखित संकेत में शब्दों को तथा वाक्य का प्रयोग करके आवश्यक बातें बताई जाती है लेकिन संकेत को इतिहास बहुत पुराना है पर इनकी संख्या बहुत कम है मिल के पत्थर होर्डिंग द्वारा दिशा निर्देश गंतव्य स्थान का ज्ञान करने तथा सड़क यातायात से संबंधित अचानक किसी परिवर्तन आदि की जानकारी देने के लिए लिखित संकेत का प्रयोग करते हैं कभी-कभी कुछ मार्गों पर यातायात संकेत के साथ मोड तिरु मोड सड़क की मरम्मत हो रही है कृपया धीरे चल सावधान बच्चे हैं जैसे लिखित संकेतों के माध्यम से भी सावधानी बरतने के लिए आजा किया जाता है प्रयोजन के आधार पर चरित्र संकेत को तीन श्रेणी में प्रदर्शित करते हैं

 1.खतरे की चेतावनी देने वाले संकेत 2. विनियामक संकेत 3. सूचनात्मक संकेत

 चित्र संकेत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि उन्हें आसानी से देखा समझा और पालन किया जा सकता है प्रत्येक वाहन चालक को निर्देशित चिन्ह को समझ कर ही वहां चलना चाहिए परिवहन विभाग द्वारा प्रयुक्त कॉन का सही ज्ञान कराया ही वाहन चालक को वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस चलन अनुमति पत्र दिया जाता है परंतु उसका उचित पालन ही यातायात को सुगम एवं सुखदाई बनता है चित्र संकेतों के आकार और रंग अलग-अलग होते हैं लाल रंग के गोलाकार संकेत आदेश आत्मक होते हैं लाल रंग के त्रिकोणीय संकेत चेतावनी देने वाले होते हैं और नीले रंग के आयातकर संकेत सूचना पर दायक होते हैं 

 यातायात के संकेत भारतीय रोड क्रॉसिंग आरसी द्वारा जारी किए जाते हैं तथा संकेत कॉन और नियमों का प्रयोग कर बनाए जाते हैं जिसका अनुपालन देश के सभी नागरिकों से करने की अपेक्षा की जाती है

 यातायात के नियमों का पालन करने में कभी-कभी अन्य गतिरोध भी उत्पन्न हो जाते हैं क्योंकि नियमों की अनदेखी करके अति शीघ्रता करने की कोशिश करते हैं जिसके कारण सड़कों पर जाम की स्थिति बन जाती है एवं यातायात बैंडिट होने लगता है ऐसी स्थिति में कभी-कभी विकल्प के अभाव में जनता यातायात के नियमों को तोड़ने के लिए विवश हो जाती है

 परिवहन नियमों के अनुसार उक्त समस्याओं से निपटने के लिए विवेकपूर्ण तथ्यों का अनुपालन करना चाहिए जिसमें कोई दुर्घटना या यह परेशानी का सामना न करना पड़े उल्लेखित परिस्थितियों में कभी-कभी रोड रेस सड़क पर झगड़ा की संभावना बन जाती है जिसको विविध संकेतों से पहचान कर बचा जा सकता है उदाहरण अर्थ उत्तेजक वाहन चलाना अचानक तीव्रता लाना और ब्रेक लगाना सड़कों पर टेढ़ी-मेढ़ी जग जैक ड्राइविंग करना तीव्र गति में बार-बार लेने बदलना अपनी लेने से अचानक दूसरे वाहन के आगे अपना वाहन लाना जानबूझकर अन्य वाहनों के लिए अवरोध उत्पन्न करना दूसरे वाहन की पीछे से या बगल से टक्कर मारना वहां को दूसरे वाहन के पीछे एकदम से सटाकर चलाना निरंतर हॉर्न बजाना वह लाइट फ्लैश करना वाहन चालक को समझदारी दिखाते हुए अपने बचाव के लिए ऐसी स्थिति में उलझने से बचने की कोशिश करनी चाहिए

 यातायात के नियम पालन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सड़क सुरक्षा में सुधार करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं जैसे सड़क फर्नीचर सड़क चिन्ह रोड मार्किंग अनंत परिवहन प्रणाली का प्रयोग करते हुए रोज मर गया टीटी प्रबंधन प्रणाली आरंभ करना निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदारों में अनुशासन बनाए रखना चुनिंदा क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा ऑडिट हत्या दी है संगठित क्षेत्र में भारी मोटर वाहनों के लिए पुरुष जरिया परिश्रम चलाना राज्यों में ड्राइविंग प्रशिक्षण स्कूलों की स्थापना दृश्य श्रव्य तथा प्रिंट माध्यम के द्वारा सड़क सुरक्षा जागरूकता का प्रचार अभियान सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए स्वैच्छिक संगठनों व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों का संचालन वहां ऑन में सुरक्षा मां को और अधिक सख्त बनाना जैसे सेल बेल्ट पावर स्टेरिंग रियर व्यू मिरर अत्यधिक राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना सहायता सेवा योजना के अंतर्गत विभिन्न राज्य सरकारों और सरकारी संगठनों को क्रेन तथा एंबुलेंस उपलब्ध करना राष्ट्रीय राजमार्गों को दो लेने से आठ लेन का 8 लाइन से 6 लाइन का करने का प्रावधान तथा युवा वर्ग में जागरूकता सड़क सुरक्षा का प्रचार करने की प्रक्रिया को भी शामिल करना है

 अनंत यातायात के नियमों के बहू आर्मी उद्देश्यों को ध्यान में रखकर प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बनता है कि वह परिवहन विभाग द्वारा बनाए गए यातायात से संबंधित सांसद सैद्धांतिक है व्यवहारिक संकेत को एवं नियमों का पालन कर देश की समृद्धि एवं विकास में अहम योगदान देने का प्रयास करें जिससे हमारा देश समाज एवं परिवार सुरक्षित रहकर विकास की पराकाष्ठा को प्राप्त करने में सफल रहे

   धन्यवाद:-


Read Full Blog...


(I C T)— आईसीटी किसे कहते हैं


 (ICT)- आईसीटी किसे कहते हैं:-  आईसीटी का मतलब सूचना संचार प्रौद्योगिकी (Information Communication Technology) है जो सूचना को संभालने स्टोर करने संचालित करने साझा करने उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरणों (जैसे कंप्यूटर, स्मार्टफोन, इंटरनेट) और सेवाओं (जैसे सॉफ्टवेयर  नेटवर्किंग  ) का एक व्यापार समूह है जिसने हमारे काम करने सीखने और स्वाद करने के तरीके में क्रांति ला दी है  &nb... Read More

 (ICT)- आईसीटी किसे कहते हैं:-

 आईसीटी का मतलब सूचना संचार प्रौद्योगिकी (Information Communication Technology) है जो सूचना को संभालने स्टोर करने संचालित करने साझा करने उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरणों (जैसे कंप्यूटर, स्मार्टफोन, इंटरनेट) और सेवाओं (जैसे सॉफ्टवेयर  नेटवर्किंग  ) का एक व्यापार समूह है जिसने हमारे काम करने सीखने और स्वाद करने के तरीके में क्रांति ला दी है 

 आईसीटी में क्या-क्या शामिल है:-

 हार्डवेयर:- कंप्यूटर,लैपटॉप, स्मार्टफोन, टैबलेट सरवर, राइटर,प्रिंटर

 सॉफ्टवेयर:- ऑपरेटिंग, सिस्टम एप्लीकेशन (जैसे- MS Office) डेटाबेस ग्राफिक,सॉफ्टवेयर

 नेटवर्क:-  इंटरनेट,मोबाइल नेटवर्क, वाई-फाई,क्लाउड कंप्यूटिंग 

 संचार उपकरण:- टेलीफोन, सेटेलाइट सिस्टम,वीडियोकांफ्रेसिंग ईमेल, सोशल मीडिया, स्टेज मैसेजिंग

  अन्य तकनीकी:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा एनालिटिक्स,साइबर सुरक्षा( इंटरनेट का थिंग्स )

 उदाहरण :-

 ईमेल भेजना,ऑनलाइन वीडियो देखना यूट्यूब,सोशल मीडिया पर चैट करना

 स्कूल में कंप्यूटर का उपयोग करके पढ़ाई करना ई लर्निंग 

 कंपनियां ग्राहकों के दाता का मैसेज करने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग करती है

 महत्व:-

 यह शिक्षा स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय और सरकार सहित हर क्षेत्र में दक्षता और पहुंच बढ़ता है

 यह सूचना तक पहुंच को आसान बनाता है और लोगों को जोड़ता है

 संक्षेप में आईसीटी डिजिटल युग का वह आधार है जो हमें जानकारी के साथ काम करने और एक दूसरे से जोड़ने में मदद करता है

 आईसीटी का महत्व:-

 आईसीटी सूचना संचार प्रौद्योगिकी आईसीटी का महत्व हर क्षेत्र में है क्योंकि है संचार को तेज शिक्षा को इंटरएक्टिव व्यापार को कुशल और जीवन को सुविधाजनक बनता है सूचना तक पहुंच बढ़ती है टूरिस्ट शिक्षा संभव होती है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है यह शिक्षा स्वास्थ्य व्यवसाय और मनोरंजन जैसे कहीं क्षेत्र को आधुनिक बनता है जिससे लोग भौगोलिक बढ़ाओ के बिना जुड़ सकते हैं और काम कर सकते हैं

 शिक्षा में महत्व:- मल्टीमीडिया ऑनलाइन कोर्स इंटरएक्टिव व्हाई इट बोर्ड से सीखना मजेदार और प्रभावी बनता है

 पहुंचे और समावेशन:- दूरस्थ शिक्षा और डिजिटल संस्थाओं से सभी छात्रों विशेष आवश्यकता वाले छात्रों सहित को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है 

 नवीनतम जानकारी:- छात्र रोज शिक्षक इंटरनेट के माध्यम से तुरंत नहीं जानकारी प्राप्त कर सकते हैं

 व्यवसाय और उद्योग में महत्व:-

 दक्षता और स्वचालन :- व्यावसायिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है जिससे उत्पादकता पड़ती है और लागत कम होती है

  संचार और सहयोग:- कर्मचारी और टीमों के बीच कुशल संचार जैसे ईमेल वीडियो कॉन्फ्रेंस को समक्ष बनता है

 ई-कॉमर्स और मार्केटिंग :- ऑनलाइन बिक्री ई-कॉमर्स को ग्राहक संबंध प्रबंधन को बढ़ावा देता है

 दैनिक जीवन में महत्व:-

 तवरित संचार:- ईमेल सोशल मीडिया वीडियो कॉल से तुरंत जुड़ना संभव

 सुविधा:- ऑनलाइन बैंकिंग खरीदारी और मनोरंजन फिल्म संगीत गेम को आसान बनाता है

 दूर से कम या पढ़ाई:- घर से काम करना वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन पढ़ाई को संभव बनाता है

 अन्य लाभ:-

 डिजिटल अर्थव्यवस्था:- स्वास्थ्य सेवा शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति को बढ़ावा देता है

 वैश्विक जुड़ाव :- भौगोलिक दूरियां को मतकर लोगों और संस्कृतियों को जोड़ता है

 संक्षेप में आईसीटी आधुनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है जो दक्षता पहुंचे और कनेक्टिविटी में सुधार करके हमारे जीने काम करने और सीखने के तरीके में क्रांति ला रहा है 


Read Full Blog...


प्रताप नारायण मिश्र


  "मैं आज आपको एक महान कवि के बारे में बताने जा रही हूं जिनका पूरा नाम प्रताप नारायण मिश्र है "  हिंदी की बहुमुखी प्रतिभा के धनी में भारतेंदु हरिश्चंद्र बालकृष्ण भट्ट और प्रताप नारायण मिश्र की गणना होती है इनका जन्म सन 1856 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का बैजे गांव मैं हुआ था मिश्रा जी को ना तो भारतेंदु जैसे साधन मिले थे और ना ही भट्ट जैसी लंबी आयु फिर भी मिश्रा ज... Read More

  "मैं आज आपको एक महान कवि के बारे में बताने जा रही हूं जिनका पूरा नाम प्रताप नारायण मिश्र है "

 हिंदी की बहुमुखी प्रतिभा के धनी में भारतेंदु हरिश्चंद्र बालकृष्ण भट्ट और प्रताप नारायण मिश्र की गणना होती है इनका जन्म सन 1856 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का बैजे गांव मैं हुआ था मिश्रा जी को ना तो भारतेंदु जैसे साधन मिले थे और ना ही भट्ट जैसी लंबी आयु फिर भी मिश्रा जी ने अपनी प्रतिभा और लगन से उसे युग में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बना लिया था

मिश्रा जी के जन्म के कुछ दिनों बाद ही इनके ज्योतिषी पिता पंडित संकटा प्रसाद मिश्र कानपुर आकर सह परिवार रहने लगे यहीं पर उनकी शिक्षा दीक्षा हुई पिता इन्हें ज्योतिष पढ़कर अपने प्रत्येक व्यवसाय में ही लगाना चाहते थे परंतु इनका मनमौजी स्वभाव उसमें नहीं राम इन्होंने कुछ समय तक अंग्रेजी स्कूल में भी शिक्षा प्राप्त की किंतु कोई भी अनुशासन और निष्ठा का कार्य जिसमें विषय की निराशता के साथ प्रति घंटा भी आवश्यक होती उनके मोची और फक्कड़ स्वभाव के विपरीत था बताइए यहां भी पढ़ ना सके घर में स्वाध्याय से ही इन्होंने संस्कृत उर्दू फारसी अंग्रेजी और बांग्ला पर अच्छा अधिकार प्राप्त कर लिया

मिश्रा जी के साहित्यिक जीवन का प्रारंभ बाद ही दिलचस्प रहा कानपुर उन दिनों लावनी बाजू का केंद्र था और मिश्र जी को लावणी अत्यंत प्रिय थी लावणी बड़ो के संपर्क में आकर इन्होने लावण्या और ख्याल लिखना आरंभ किया यही से उनके कवि और लेखक जीवन का प्रारंभ हुआ

मिश्रा जी साहित्यकार होने के साथ हिसार सामाजिक जीवन से भी जुड़े थे सामाजिक राजनीतिक धार्मिक संस्थाओं से इनका निकट का संपर्क था और देश में जो नव जागरण की लहर आ रही थी इसके प्रति यह संचित है वास्तव में नवजागरण का संदेश ही जनजीवन तक पहुंचने के लिए इन्होंने साहित्य सेवा का व्रत लिया और ब्राह्मण प्रतीक का आजीवन संपादन करते रहे

मिश्रा जी विपुल प्रतिभा और विविध रुचियां के धनी थे कानपुर में इन्होंने नाटक सभा नमक की एक संस्था बनाई थी उनके माध्यम से यह पारसी थिएटर के सामान्य अंतर हिंदी का अपना रंग मैच खड़ा करना चाहते थे यह स्वयं भी भारतेंदु की भांति कुशल अभिनय करते थे

मिश्रा जी भारतेंदु के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित थे तथा उन्हें अपना गुरु और आदर्श मानते थे यह वाक्य दुग्ध के धनी थे और अपनी हाजिर जवाब भी है विनती स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे बहुमुखी प्रतिभा के धनी मिश्रा जी का 38 वर्ष की अल्प आयु में सन 1894 में कानपुर में निधन हो गया


Read Full Blog...


गृह कार्य व्यवस्था


 प्रस्तावना  "गृह कार्य व्यवस्था से आशय है कि ग्रह के सभी कार्यों को एक योजना बनाकर किया जाए जिससे समय धन व शर्म की बचत हो सके"  प्रत्येक परिवार में ए सीमित कार्य होते हैं इसमें अधिकतर कार्यों का संपादन ग्रैनी को ही करना पड़ता है किसी भी कार्यों को रोक नहीं जा सकता अतः ग्रहणी की सुविधा के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह कार्य का उसकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण कर ली तथा गृ... Read More

 प्रस्तावना

 "गृह कार्य व्यवस्था से आशय है कि ग्रह के सभी कार्यों को एक योजना बनाकर किया जाए जिससे समय धन व शर्म की बचत हो सके"

 प्रत्येक परिवार में ए सीमित कार्य होते हैं इसमें अधिकतर कार्यों का संपादन ग्रैनी को ही करना पड़ता है किसी भी कार्यों को रोक नहीं जा सकता अतः ग्रहणी की सुविधा के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह कार्य का उसकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण कर ली तथा गृह कार्य में परिवार के प्रत्येक सदस्य का सुविधा कर सहयोग भी ले जिन घरों में सभी छोटे-बड़े कार्य ग्रैनी ही करती है वहां गृहणी का शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और परिणाम स्वरुप घर का वातावरण भी कल युक्त बन जाता है अतः ग्रहणी को अपनी शांति है वह बुद्धिमानी से कार्य को व्यवस्थित ढंग से करना चाहिए

 गृह कार्य व्यवस्था का अर्थ -

 किसी भी कार्य को योजना प्रबंधन से करने की क्रिया को व्यवस्था कहते हैं ऐसा करने से प्रत्येक कार्य सरलता से हो जाता है तथा संवेदन और श्रम की बचत भी होती है गृह कार्य व्यवस्था से तात्पर्य है कि घर के सभी कार्यों को इस ढंग से व्यवस्थित करके एवं क्रमानुसार करना कि जिस घर के सभी कार्य ठीक समय पर संबंध हो जाए साथ ही ग्रहणी के समय और शक्ति को बचत हो घर व्यवस्थित और परिवार सुखी रहे वह घर का वातावरण शांत रहे

 गृह कार्य व्यवस्था की परिभाषा-

 "गृह कार्य व्यवस्था के अर्थ से आशय है कि ग्रह के सभी कार्यों को एक योजना बनाकर किया जाए जिससे समय धन व श्रम की बचत हो सके "

 गृह कार्य व्यवस्था करते समय निम्नलिखित तत्वों पर ध्यान दिया जाता है-

1. सर्वप्रथम घर के सांसद कार्यों की एक योजना बनाई चाहिए 

 2.योजना के अनुसार कार्य को किया जाना चाहिए

3. कार्य प्रक्रिया पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए 

4. कार्यों को प्राथमिकता के अनुसार करना चाहिए

 5.परिवार के संसद सदस्यों को उसकी आयु योग्यता एवं क्षमता के अनुसार कार्य सपना चाहिए

 उपयुक्त विवरण से स्पष्ट है कि घर के विभिन्न कार्यों को करने की ऐसी व्यवस्था करना कि सभी ग्रह कार्य नियमित रूप से तथा सहजता से हो जाए कार्य व्यवस्था करना कहलाता है 

 कार्य व्यवस्था की सफलता ग्रहणी की बुद्धिमानी और कुशलता पर निर्भर करती है

  गृह कार्यों का वर्गीकरण-

  दैनिक कार्य- दैनिक कार्यों में वे सभी कार्य आते हैं जो ग्रहणी द्वारा प्रतिदिन किए जाते हैं उदाहरण के लिए प्रतिदिन नाश्ता बनाना भोजन बनाना घर की सफाई कपड़े धोना बर्तन साफ करना बच्चों को तैयार करना खरीदी तारी करना विश्राम तथा मनोरंजन के लिए समय निकालना आदि कार्य सम्मिलित है एक कुशल ग्रहणी अपने घर के इन सभी कार्यों को योजना बंद करके बड़ी से निपटा  सकती है 

 साप्ताहिक कार्य- कुछ कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें प्रतिदिन नहीं किया जा सकता अतः सप्ताह में एक दिन इन कार्यों के लिए निर्धारित किया जाता है अधिकतर घरों में यह कार्य रविवार के दिन किए जाते हैं इसका मुख्य कारण यह होता है कि उसे दिन परिवार के सभी सदस्यों की छुट्टी होती है तो सभी से सहायता ली जा सकती है साप्ताहिक कार्यों के अंतर्गत पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करना चादर बदलना ढूंढने के लिए कपड़े देना रसोई की अच्छी तरह सफाई करना बच्चों के साथ कुछ समय व्यतीत करना बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाना अधिकारी आते हैं

 मानसिक कार्य - कुछ कार्य महीने भर में एक बार किए जाते हैं जैसे बाजार से महीने भर की खाक सामग्री लाना उन्हें टीपू में भरकर सो व्यवस्थित करना बच्चों की फीस जमा करना महेरी धोबी दूध अखबार का बिल टेलीफोन का बिल बिजली का बिल गैस सिलेंडर भरवाना घर के व्यर्थ सामान को निकलवाना वह भेजना आदि आवश्यक कार्य मानसिक कार्य के अंतर्गत आते हैं

 वार्षिक कार्य- यह कार्य वर्ष में एक बार किए जाते हैं यह कार्य अधिकतर वर्षा ऋतु की समाप्ति के पश्चात किए जाते हैं इन कार्यों के अंतर्गत घर की टूट-फूट की मरम्मत घर की पुताई तथा रंग रोगन अनु उपयोगी वस्तुओं को घर से बाहर करना फर्नीचर और दरवाजों पर पेंट करवाना वार्षिक टैक्स जमा करना सालभर का अनाज व तेल खरीदना पापड़ चिप्स अचार मुरब्बा चटनी आदि तैयार करना आता है

 सामयीक कार्य- कुछ कार्य समय-समय पर करने पड़ते हैं जैसे स्वेटर बनाना अचार डालना उन्हें वेस्टन को साफ करके रखना भारी साड़ियां का रख रखा करना विभिन्न त्योहार वह जन्मदिन की तैयारी करना आदि इन कार्यों के करने में परिवार के सदस्यों का सहयोग लिया जा सकता है

 आकस्मिक कार्य - यह कार्य में होते हैं कि जो अक्षय कुमार सामने आ जाते हैं जैसे परिवार में होने वाली शादी विवाह जन्म मृत्यु अतिथि आगमन स्नान तोरण मित्र या सगे संबंधियों के यहां जाना आदि ग्रहणी को इन कार्यों को संपन्न करने में अपने परिवार के सदस्यों का यथायोग्य सहयोग लेना चाहिए इससे परिवार के सभी सहयोगी बनते हैं तथा सारे कार्य बड़ी सरलता से निपट जाते हैं

 


Read Full Blog...


गृह व्यवस्था का महत्व


 गृह व्यवस्था का महत्व :-  गृह व्यवस्था का प्रत्येक परिवार में विशेष महत्व होता है जिस घर में गृह व्यवस्था से चालू रूप से चलती है उसे घर में उन्नति होती है आज के आधुनिक युग में परिवार की आवश्यकताओं में भी वृद्धि होती है अतः सभी आवश्यकताओं की पूर्ति संभव नहीं है ऐसी स्थिति में परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता को तीव्रता के आधार पर एक व्यवस्थित क्रम में पूरा किया जा सकता है तथा परिवार... Read More

 गृह व्यवस्था का महत्व :-

 गृह व्यवस्था का प्रत्येक परिवार में विशेष महत्व होता है जिस घर में गृह व्यवस्था से चालू रूप से चलती है उसे घर में उन्नति होती है आज के आधुनिक युग में परिवार की आवश्यकताओं में भी वृद्धि होती है अतः सभी आवश्यकताओं की पूर्ति संभव नहीं है ऐसी स्थिति में परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता को तीव्रता के आधार पर एक व्यवस्थित क्रम में पूरा किया जा सकता है तथा परिवार के प्रत्येक सदस्य को अधिकतम संतुष्टि मिल सकती है इसके साथ ही साथ परिवार के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य बनता है कि वह गृह व्यवस्था के कुशलता पूर्वक संचालन में गृहणी का पूरा सहयोग करें 

 गृह व्यवस्था के महत्व का वर्णन निम्नलिखित प्रकार से-

 1.रहन-सहन के स्तर को ऊंचा बनने में सहायक- परिवार के रहन-सहन का स्तर ऊंचा बनने में गृह व्यवस्था से पारिवारिक साधनों का उपयोग हो जाता है तथा समय शक्ति व शर्म की बचत होती है परिणाम स्वरुप परिवार के रहन-सहन का स्तर भी ऊंचा उठता है

2. पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति में सहायक - परिवार वह केंद्र है जहां परिवार के सभी सदस्यों की अनेक आवश्यकता है होती है तथा उनकी पूर्ति के लिए नियंत्रित रूप से प्रयास किए जाते हैं परिवार की आवश्यकता है सीमित होती है तथा पूर्ति के साधन सीमित होते हैं ऐसी स्थिति में पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति गृह व्यवस्था के द्वारा ही संभव होती है गृह व्यवस्था के अंतर्गत सर्वप्रथम तीव्रता के आधार पर आवश्यकताओं की वरीयता का निर्धारण किया जाता है उत्तम ग्रह व्यवस्था में परिवार के सभी सदस्यों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को ध्यान में रखा जाता है इसी प्रकार गृह व्यवस्था सभी पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक सिद्ध होती है

3. पारिवारिक आय व्यय के नियोजन में सहायक- पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नियंत्रण धन की आवश्यकता होती है प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के लिए किए व्यय करना पड़ता है परिवार की आय सीमित होती है तथा पारिवारिक आय को ध्यान में रखकर बजट को तैयार करना चाहिए बजट सदैव बचत का होना चाहिए ऐसा करने से परिवार के सदस्य अपने आप को सुरक्षित अनुभव करते हैं

4. बच्चों वह पति की सफलता में सहायक- घर में उचित व्यवस्था होने से घर का वातावरण शांतिपूर्ण होता है जिसमें रहते हुए बच्चों का पढ़ने में बहुत मन लगता है अर्थात उनकी शिक्षक उन्नति होती है साथ ही उनका शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है 

 इसी प्रकार व्यवस्थित परिवार में पति को सुख शांति मिलती है तो उन्हें और अधिक परिश्रम करके धन अर्जित करने के लिए उत्साह मिलता है 

5. पारिवारिक वातावरण सुखी बनाने में सहायक- जब परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की अधिकतम संतुष्टि हो जाती है तो परिवार का वातावरण सोहर में वह संतोषजनक हो जाता है परिणाम स्वरुप घर में नैतिक सामाजिक आध्यात्मिक तथा धार्मिक मूल्यों का विकास संभव होता है

 गृह व्यवस्था के संचालन में आने वाली बधाए:-

 यह सत्य है कि एक कुशल वह बुद्धिमान ग्रहणी अपने घर को नियोजित तथा सुव्यवस्थित ढंग से चलती है परंतु कभी-कभी ऐसी कठिन परिस्थितियों पैदा हो जाती है कि ग्रहणी गृह व्यवस्था के सफल संचालन में असफल हो जाती है अतः व्यवस्था के संचालन में आने वाली बधाओ की गृहणी को जानकारी होनी चाहिए जिसमें वह इसे यथा संभव निपट सके गृह व्यवस्था के कुशल संचालन में आने वाली बढ़ाएं निम्नलिखित प्रकार की होती है

1. लक्ष का ज्ञान न होना- गृह व्यवस्था में मुख्य बाधा लक्षण की जानकारी ना होना होती है ग्रहणी सही समय पर सही कार्य नहीं कर पाती और परिणाम स्वरुप गृह व्यवस्था में समस्या उत्पन्न होती है उदाहरण के लिए धन संचय करके उस मकान बनवाने की अपेक्षा यदि कपड़े अत्यधिक खरीद लिए जाए तो बनाए गए लक्षण की पूर्ति नहीं हो पाएगी

2. नई जानकारी का अभाव - आज विज्ञान का योग है तथा प्रतिदिन नए-नए उपकरण आते रहते हैं जिसे समय वह श्रम की बचत होती है यदि ग्रहणी को नहीं उपकरणों के बारे में जानकारी नहीं होगी तो गृह व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है 

3. समस्याएं व उनके समाधान के ज्ञान का अभाव - यह सत्य है कि गृह व्यवस्था में बहुत सी समस्याएं आती है प्रत्येक परिवार की अपनी समस्या होती है तथा उसका समाधान भी इस परिवार में ही संभव होता है कुछ परिवारों में वही समस्याएं बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो जाती है और कहीं-कहीं वही समस्या एक विशालकाय समस्या के रूप में प्रस्तुत हो जाती है यदि परिवार में कभी कोई समस्या आ जाए तो उसका किसी तरह शांतिपूर्वक समाधान करना है इसका जी गृहणी या परिवार को ज्ञान नहीं होता उसी परिवार में कोई भी समस्या आने का तूफान आ जाता है

4. कार्य कुशलता में कमी आना- कभी-कभी परिवार में पर्याप्त साधन होते हुए भी उसे परिवार की गृह व्यवस्था अच्छी नहीं होती इसका कारण कार्य कुशलता में कमी का होना होता है साधनों की उपयोग विधि का ज्ञान नहीं होता और परिणाम स्वरुप गृह व्यवस्था सफल नहीं हो पाती

5. परिवार के सदस्यों का असहयोग- गृह व्यवस्था कितनी भी ठीक हो यदि परिवार के सभी सदस्य उसमें सहयोग नहीं करते हैं तो गृह व्यवस्था कुशलता पूर्वक संचालित नहीं हो सकती

 एक कुशल ग्रहणी को इन सभी समस्याओं के प्रति संचित रहना चाहिए और कोई भी समस्या आने पर वह बड़ी सूझबूझ के साथ दूर करने गृह व्यवस्था का सफलतापूर्वक संचालन कर सकती है

  गृह व्यवस्था के साधन -

गृह संबंधित आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बहुत से साधनों की आवश्यकता पड़ती है अध्ययन की दृष्टि से करे व्यवस्था के साधनों को तीन भागों में बनता है

भौतिक साधन- परिवार को भली प्रकार सुव्यवस्थित रूप से चलने के लिए भौतिक साधनों की आवश्यकता पड़ती है भौतिक साधनों में धान का विशेष महत्व भौतिक साधनों के अंतर्गत परिवार की आए घर की स्थिति तथा बनावट रहन-सहन का स्टार परिवार के कार्यों में उपयोग होने वाले आधुनिक यंत्र तथा उपकरण आते हैं परिवार की आय होने से आवश्यकता अनुसार व्यय किया जाना संभव हो जाता है परिवार के निवास के लिए एक ऐसा मकान होना चाहिए जिसमें परिवार के सभी सदस्य पूर्ण सुविधा के साथ अपना जीवन यापन कर सके परिवार में कार्यों को करने के लिए आधुनिक यंत्र होने के कार्य सरलता से तथा कम समय में पूर्ण हो जाता है अर्थात श्रम शक्ति वह समय की बचत होती है

 भौतिक साधनों में उन सभी वस्तुओं तथा संपत्ति का महत्वपूर्ण स्थान होता है जिन्हें हम प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में उपयोग में लाते हैं जैसे मकान फर्नीचर आधुनिक उपकरण भोज्य पदार्थ आदि में सभी भौतिक साधन उत्तम प्रकार के होने चाहिए जिससे कार्य कुशलता में वृद्धि हो सके

 मानवीय साधन- भौतिक साधनों के अतिरिक्त मानवीय साधनों की भी आवश्यकता होती है मानवीय साधनों के अंतर्गत परिवार के सदस्यों की संख्या नौकर परिवार के सदस्यों का व्यवहार वह मनोवृति ज्ञान व प्रवीणता तथा रुचि आदि आते हैं 

 गृह व्यवस्था के लिए परिवार के सदस्य तथा नौकरों की सहायता भी लेनी पड़ती है मानवीय साधनों का उपयोग करते समय ग्रहण की विशेष भूमिका होती है तब रानी को चाहिए कि वह परिवार के सदस्यों को उनकी रुचि वह क्षमता किया था पर कार्य का विभाजन करें सदस्य तथा नौकरों से इसने युक्त व मृदुलतापूर्ण व्यवहार करें और आवश्यकता पढ़ने पर उनकी सहायता भी करती रहे ऐसा करने से कार्य शीघ्र वह उत्तम होगा

 सार्वजनिक साधन- गृह व्यवस्था के कुशल संचालन हेतु सरकार द्वारा प्रदत सार्वजनिक साधनों का उपयोग करना आवश्यक हो जाता है सार्वजनिक साधनों के अंतर्गत विद्यालय पुस्तकालय अस्पताल बैंक डाकघर धार्मिक स्थल विद्युत एवं दूरसंचार विभाग कानून व सुरक्षा यातायात संबंधित साधन तथा व्यापार आदि आते हैं 

 हमारे दैनिक जीवन में इन सभी सुविधाओं का विशेष महत्व है यह संस्थाएं यदि अपनी सेवाएं बंद कर दे तो हमारा जीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा दूरसंचार बिजली पानी आता इसके उत्तम उदाहरण है सार्वजनिक साधनों का उपयोग ग्रहण की योग्यता पर निर्भर करता है साथ ही साथ सार्वजनिक केदो की पूर्ण जानकारी भी आवश्यक होती है

 


Read Full Blog...


गृह व्यवस्था ग्रह और परिवार के संदर्भ में


 प्रस्तावना:-  गृह व्यवस्था निर्णय की एक श्रृंखला है जिसमें पारिवारिक साधनों के अनुसार पारिवारिक लक्षण को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है इस प्रयास में नियोजन नियंत्रण एवं मूल्यांकन इन तीनों चरणों को सम्मिलित किया जाता है  परिवार तभी सुखी वह समृद्ध होता है जब उसे परिवार को चलने वाली निर्देशिका अर्थात ग्रहणी है कुशल व्यक्तित्व की हो परिवार को अच्छा ऐप सुख अर्थात सुव्यवस्थित घर दे... Read More

 प्रस्तावना:-

 गृह व्यवस्था निर्णय की एक श्रृंखला है जिसमें पारिवारिक साधनों के अनुसार पारिवारिक लक्षण को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है इस प्रयास में नियोजन नियंत्रण एवं मूल्यांकन इन तीनों चरणों को सम्मिलित किया जाता है

 परिवार तभी सुखी वह समृद्ध होता है जब उसे परिवार को चलने वाली निर्देशिका अर्थात ग्रहणी है कुशल व्यक्तित्व की हो परिवार को अच्छा ऐप सुख अर्थात सुव्यवस्थित घर देखकर ग्रैनी के योग्य होने का परिचय मिलता है परिवार को अच्छा वह सुखी बनाने के लिए ग्रहणी को अनेक कार्य करने पड़ते हैं एक परिवार के सदस्यों के रहन-सहन के स्तर को उच्च बनाने में धन अथवा संपत्ति की इतनी आवश्यकता नहीं होती जितनी करनी की सूचना वह कुशलता की किसी भी परिवार के स्तर को देखने से परिवार की संचालिका के गुना की झलक मिलती है 

 गृह व्यवस्था का अर्थ:-

 गृह व्यवस्था का शाब्दिक अर्थ है- 'घर की व्यवस्था या घर का प्रबंध ग्रह कार्यों को योजना बंद है संयोजित ढंग से संपन्न करना ही गृह व्यवस्था कहलाता है'

 वास्तव में व्यवस्था शब्द मनुष्य के संपूर्ण जीवन से जुड़ा हुआ है यह सारी प्रकृति एवं व्यवस्थित ढंग से ही कार्य कर रही है इसी प्रकार यदि मनुष्य अपने जीवन को आदर्श जीवन के रूप में बनाना चाहता है तो उसे व्यवस्था के बंधन में बांधना ही पड़ेगा इसी प्रकार ग्रह को यदि एक आदर्श ग्रह के रूप में दर्शन है तो प्रत्येक कार्य व्यवस्थित ढंग से ही करना पड़ेगा

 व्यवस्था या प्रबंध एक मानसिक प्रक्रिया है जो योजना के रूप में प्रकट होती है तथा योजना के अनुरूप ही संपादित एवं नियंत्रित होती है व्यवस्था के रूप में योजना कहां कार्यांव लक्ष्य प्राप्ति का उत्तम साधन बन जाता है

  डेविस के अनुसार, " व्यवसाय कार्यकारी नृत्य तब का कार्य यह मुख्यत एक मानसिक प्रक्रिया है यह कार्य नियोजन संगठन तथा सामूहिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए अन्य व्यक्तियों के कार्य के नियंत्रण से संबंधित है"

 क्रो एवं क्रो के अनुसार  गृह व्यवस्था घर के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक सीमित साधनों के विषय में उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया है

 प्राचीन समय में मनुष्य की आवश्यकता बहुत सीमित थी व्यक्ति का रहन-सहन सामान्य वह साधारण हुआ करता था अतः घर को चलाने में कठिनाइयों का सामना काम करना पड़ता था परंतु वर्तमान में वैज्ञानिक आधुनिक फैशन परिषद युग में कदम कदम पर समस्या है वर्तमान मनुष्य की आवश्यकता में वृद्धि हुई है साथ ही साथ एसएमएस साधन भी उपलब्ध हो गए हैं जिससे ग्रहणी के लिए गृह व्यवस्था करने का कार्य जटिल हो गया है अतः एक कुशल ग्रैनी ही परिवार के उपलब्ध साधन का उचित उपयोग करके परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करके उन्हें अधिकतम संतुष्ट प्रधान कर सकती है

 गृह व्यवस्था की परिभाषा :-

 गृह व्यवस्था के संदर्भ में निखिल तथा डारसी  मैं अपने विचार इस प्रकार प्रस्तुत किए हैं -" गृह व्यवस्था परिवार के लक्षण की पूर्ति के उद्देश्य से परिवार के साधनों के प्रयोग का नियोजन नियंत्रण व मूल्यांकन है अर्थात पारिवारिक लक्षण की प्राप्ति के लिए गृह प्रबंध योजना बंद ढंग से करना चाहिए तथा समय-समय पर मूल्यांकन भी आवश्यक है करो या करो के अनुसार गृह व्यवस्था ग्रह के उद्देश्य की पूर्ति में सहायक सीमित साधनों के विषय में उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया मात्र है  गुड जॉनसन मैं गृह व्यवस्था को इन शब्दों में परिभाषित किया है गृह व्यवस्था निर्णय की ऐसी श्रृंखला है जो पारिवारिक लक्षण की प्राप्ति के लिए पारिवारिक साधनों को प्रयुक्त करने की प्रक्रिया प्रस्तुत करती है

  गृह व्यवस्था के चरण:-

 उपयुक्त परिभाषा से स्पष्ट है कि ग्राम व्यवस्था के तीन चरण होते हैं इन्हें गृह व्यवस्था के तत्व या अंग भी कहा जाता है

 गृह व्यवस्था के चरण- नियोजन -नियंत्रण -मूल्यांकन -( सापेक्ष,निरपेक्ष)

​​​​​ नियोजन- किसी कार्य की सफलता के मूल में नियोजन का बहुत महत्व होता है उदाहरण के लिए घर में चार बच्चे हैं परिवार की आय के अनुसार उनकी शिक्षा की एक योजना बनाने होगी अर्थात नियोजन का अर्थ है कि भविष्य में हमें क्या और कैसे करना है इसका पूर्ण निश्चय कर लिया जाना इससे भविष्य में होने वाला कार्य सहज हो जाता है और उसकी सफलता में संदेह भी काम रह जाता है निखिल और दर्शी ने नियोजन को इस प्रकार परिभाषित किया है- एक वांछित लक्ष्य एक पहुंचने के विभिन्न संभावित मार्गों के विषय में सूचना कल्पना करना तथा उनकी योजना की संपत्ति तक अनुसरण करना और व्यापक योजना का चयन करना है

 योजना लक्ष्य निर्दिष्ट प्रक्रिया होती है इससे इन बातों का उपयोग किया जाता है

 1चिंतन  2 कल्पना  3 तक शक्ति तथा  4 सिमरन शक्ति

 नियोजन के अनेक लाभ भी होते हैं

 नियंत्रण:- नियोजित कार्य को करने में नियंत्रण की आवश्यकता होती है यदि कार्य करने में नियंत्रण नहीं रह पाएगा तो नियोजित कार्य भी पूर्ण नहीं हो सकता नियंत्रण में परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग आवश्यक है

  मूल्यांकन - कार्य को संपन्न करने के पश्चात उसका मूल्यांकन आवश्यक है पूर्व नियोजन के अनुसार कार्य करने में कितनी सफलता और कितनी असफलता मिली तथा क्या उचित हुआ वह क्या अनुचित हुआ इसका निर्धारण करने को मूल्यांकन कहते हैं मूल्यांकन से कार्य में पाए जाने वाली त्रुटियां का ज्ञान होता है तथा भविष्य में उन त्रुटियों से बचा जा सकता है साथ ही यह भी ज्ञात हो जाता है कि मूल्यांकन करने के आगे इस कार्य को करने में कौन-कौन से परिवर्तन आवश्यक है 

 गृह व्यवस्था के उद्देश्य 

 गृह करने वाली संस्था है मनुष्य के जीवन में घर का विशेष महत्व है परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं को पूर्ण करना ग्रैनी का उत्तरदायित्व होता है अतः ग्रहों को इस बात का पूर्ण ज्ञान होता है चाहिए कि गृह व्यवस्था को क्या उद्देश्य होते हैं

 गृह व्यवस्था के निम्नलिखित उद्देश्य होते हैं

 अनिवार्य आवश्यकताओं की संतुष्टि- गृह व्यवस्था का प्रथम उद्देश्य परिवार की सभी अनिवार्य आवश्यकता की संतुष्टि करना है परिवार के सभी सदस्यों को उत्तम व पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए भोजन परोसते समय परिवार के प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता में रुचि का भी ध्यान रखना आवश्यक है परिवार के सभी सदस्यों के लिए वस्त्रो का उचित प्रबंध होना चाहिए तथा एक मकान की व्यवस्था हो जिसमें परिवार के सभी सदस्य सुख पूर्वक रह सके 

  समय का शुद्ध प्रयोग - घर के सभी कार्यों को इतनी कुशलता से करना चाहिए जिससे बच्चे हुए समय का अधिकतम शुद्ध प्रयोग हो सके इसके लिए ग्रहणी अपनी सामर्थ्य के अनुसार आधुनिक यंत्रों का प्रयोग भी कर सकती है

 आय वय का संतुलन- घर के संचालन में आए तथा वे में समाज से होना अत्यंत आवश्यक है परिवार की आई सीमित होती है तथा आवश्यकता है स सीमित होती है अतः उसे सीमित आय में ही वह करना चाहिए तथा साथ ही साथ इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि परिवार के सदस्यों को अधिकतम संतुष्टि भी मिल सके 

 समाज सेवा - ग्रह के विभिन्न कार्य इस प्रकार व्यवस्थित होने चाहिए कि परिवार के सदस्य अपने समय में से कुछ समय बचाकर समाज की सेवा अधिकारियों में भाग ले सके जिससे मैं सच्चा आत्मिक संतोष कर सके 

  विश्राम एवं मनोरंजन- घर के सभी कार्यों में प्रत्येक सदस्य को थकान होती है अतः इसके लिए विश्राम करना आवश्यक होता है विश्राम के साथ-साथ मनोरंजन के लिए समय निकलने से परिवार के सदस्यों में सामाजिक बना रहता है 

  सर्वांगीण विकास - एक कुशल गृह व्यवस्था परिवार के लिए सुख शांति का वातावरण उत्पन्न करके परिवार के संसद सदस्यों का शारीरिक मानसिक आर्थिक है वह अत्यधिक विकास करती है

  गृह व्यवस्था के तत्व या कारक-

 गृह एवं परिवार दो भिन्न शब्द है- गृह वह स्थान है जहां कोई परिवार रहकर जीवन व्यतीत करता है इस प्रकार ग्रह का आशय मकान से है परिवार व्यक्ति का वह समूह है जो आपस में रक्त संबंधों से संबंध होते हैं व्यवस्था के तत्वों के संदर्भ में गृह तथा परिवार संबंधित तत्वों का अलग-अलग विवेचन करना चाहिए ग्रह के संदर्भ में व्यवस्था के तत्वों या कारक ऑन का सामान्य परिचय निम्नलिखित है 

 घर का सुविधाजनक होना- घर का निर्माण करते समय अथवा किराए पर लेते समय ध्यान रखना चाहिए की विभिन्न कक्षाओं का नियोजन सुविधाजनक हो धारण के लिए डाइनिंग रूम और रसोईघर निकट होने से शक्तियां समय की बचत होती है स्टोर रूम और रसोई घर भी निकट होना चाहिए अध्ययन कक्ष और स्वयं कक्षा का डाइनिंग रूम से अंतर होना चाहिए जिससे विश्राम में अध्ययन में बाधा ना पड़े शौचालय और गुसलखाने निकट होने चाहिए इसी प्रकार डाइनिंग रूम की व्यवस्था इस प्रकार की होनी चाहिए की मेहमान घर में आंतरिक हिस्सों में काम से कम प्रवेश करते हुए डाइनिंग रूम तक पहुंच जाएं गृह संबंधित इस विशेषता या तत्व को पर्सपानुकूलता कहा जाता है अवश्य भवन में इस विशेषता के होने पर गृह व्यवस्था में लागू की जा सकती है

 सफाई- परिवार का लक्ष्य परिवार के सदस्यों को स्वस्थ रखना है और यह तब तक संभव नहीं है जब तक घर में सफाई की उचित व्यवस्था न हो व्यवस्थित और आकर्षक घर के लिए भी सफाई का होना आवश्यक है यदि घर मैं सफाई नहीं है तो मक्खी मच्छर मकड़िया आदि जन्म लेंगे और रोग फैलेंगे रसोई घर की सफाई स्वच्छता के लिए अनिवार्य डाइनिंग रूम की सफाई से ग्रैनी की सुरुचि पूर्णता का आभास होता है बच्चों का पर्याप्त समय अध्ययन कक्ष में बिकता है यदि अध्ययन पक्ष साफ सुथरा है किताबें करने से सजी है मेज कुर्सियां पर धूल नहीं है तो बच्चे के पढ़ने में अधिक रुचि लगे इस प्रकार स्पष्ट है कि गृह व्यवस्था के लिए घर की सफाई एक महत्वपूर्ण तथा अति आवश्यक कारक है

 जलवायु और प्रकाश की उचित व्यवस्था- शुद्ध वायु शुद्ध जल और प्रकाश की घर में उचित व्यवस्था होनी चाहिए सभी कमरों में पर्याप्त खिड़की दरवाजे और रोशनदान होने चाहिए जिससे स्वच्छ वायु और प्रकाश का प्रवेश हो सके घर में धूप का आना भी आवश्यक होता है जिन घरों में सूर्य का प्रकाश नहीं आता आता है वहां शिलान और अनेक कीटाणुओं का सामाजिक हो जाता है जो परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है अध्ययन कक्षा में प्रकाश की तथा शौचालय स्नानागार और रसोई में जल की उचित व्यवस्था होनी चाहिए यदि घर में यह सांसद कारक ठीक है तो निश्चित रूप से उत्तम गृह व्यवस्था के अनुपालन में सरलता होगी

 भोज्य सामग्री की व्यवस्था - परिवार के सदस्यों को समय पर उचित और संतुलित भोजन उपलब्ध होना चाहिए भोजन अल्पाहार में अतिथि सरकार के लिए सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए अतिथियों के आने पर चाय या कॉफी से उनका सत्कार होना चाहिए यदि घर में दूध या चाय की पट्टी समय पर उपलब्ध नहीं है तो उसे ग्रहण की या कुशलता और व्यवस्था का पता चलता है भोजन सामग्री की व्यवस्था के अंतर्गत घर में शुद्ध और पर्याप्त मात्रा में खाद सामग्री रहनी चाहिए तथा समय-समय पर उनकी सफाई की जानी चाहिए खाद्य पदार्थों का संरक्षण भी इसी में सम्मिलित है काग पदार्थ का अपव्यव नहीं होना चाहिए

 घर की सामग्री की व्यवस्था- घर की सामग्री से तात्पर्य है दैनिक प्रयोग की वस्तुएं जैसे बर्तन वस्त्र पुस्तक के बिस्तर फर्नीचर आदि आधुनिक परिवारों में रेडियो टेप रिकॉर्डर टेलीविजन फीस पंखे कूलर सिलाई मशीन कपड़े धोने की मशीन प्रेशर कुकर टोस्टर ओवन चाहिए जिससे इन उपकरणों की टूट-फूट कम से कम हो आवश्यकता अनुसार सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए यदि कोई उपकरण या वस्तु टूट जाती है या खराब तो उसको ठीक करने का प्रबंध होना चाहिए 

 

 

 

 

 


Read Full Blog...


व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं देखरेख तथा रक्षा


 प्रस्तावना:- " स्वस्थ जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा परोक्ष रूप से सेवा करने के योग्य बनता है"  "स्वस्थ मनुष्य की पूर्ण शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्थिति है केवल रोगी की अनुपस्थिति स्वास्थ्य नहीं है "  स्वास्थ्य शब्द मानव जीवन से संबंधित है प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह स्वस्थ रहे स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठाता है... Read More

 प्रस्तावना:-

" स्वस्थ जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा परोक्ष रूप से सेवा करने के योग्य बनता है"

 "स्वस्थ मनुष्य की पूर्ण शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्थिति है केवल रोगी की अनुपस्थिति स्वास्थ्य नहीं है "

 स्वास्थ्य शब्द मानव जीवन से संबंधित है प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह स्वस्थ रहे स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठाता है स्वस्थ व्यक्ति जीवन में अनेक सफलता प्राप्त कर सकता है

" Health is wealth" अर्थात स्वास्थ्य ही धन है स्वस्थ व्यक्ति अपने लिए परिवार के लिए और समाज के लिए एक धन के समान है इसके विपरीत एक स्वस्थ व्यक्ति सबके लिए बोझ होता है रोग से दुखी व्यक्ति के जीवन में उत्साह नहीं रहता आर्थिक सामाजिक आत्मिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है किसी ने कहा है किसी देश की उन्नति उसके नागरिकों की प्रबलता है जो की खानों नदिया वह वनों की संपत्ति से कहीं ज्यादा मूल्यवान है किसी भी समाज व राष्ट्रीय की उन्नति उसके व्यक्तियों की कमतता तथा साहस पर निर्भर करती है कमर्टता तथा साहस के लिए स्वास्थ्य उत्तम होना आवश्यक है

 व्यक्तिगत स्वास्थ्य का अर्थ:-

 शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्तिगत स्वास्थ्य कहते हैं यदि व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा हो तो व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और परिणाम स्वरुप घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहेगी स्वास्थ्य का अर्थ मंत्र रोग मुक्त होना ही नहीं है बल्कि कार्य क्षमता व क्रियाशीलता से भी है अतः व्यक्तिगत स्वास्थ्य को सदैव उत्तम बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य का सीधा संबंध व्यक्तिगत स्वास्थ्य से होता है वह स्वच्छता जो हमारे शरीर की देखभाल से संबंध रहती है व्यक्तिगत स्वच्छता कहलाती है व्यक्तिगत स्वच्छता के सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिसमें वह इनका सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिससे वह इनका पालन करते हुए पूर्ण स्वच्छ रह सके और अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सके

  व्यक्तिगत स्वास्थ्य के नियम:-

 अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य के कुछ नियम इस प्रकार है

आदत:- स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति में अच्छी आदतों का विकास होना चाहिए प्राकृतिक नियमों का पालन न करना है भोज्य भोजन का प्रयोग करना नाशाहत्री रात्रि में देर से सोना और सुबह देर से उठाना आदि बुरी आदतें हैं यदि ऐसी आदतों को नहीं छोड़ा जाए तो व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है आदतों का जीवन में विशेष महत्व है आदतें एक दिन में नहीं बन जाती आदतों का विकास तो बाल्यावस्था से शुरू हो जाता है अतः माता को चाहिए कि प्रारंभ से ही बच्चों मे अच्छी आदतों का विकास करें जैसे प्राप्त सूर्योदय से पहले उठना सच में दांत साफ करने के पश्चात ही कुछ आहार ग्रहण करना समय से स्नान करना स्वच्छ वस्त्र पहनना दूसरे का तोलिया गंगा वह कपड़ों का उपयोग न करना आदि

  स्वच्छता:-  स्वच्छ रहने के लिए स्वच्छता का भी होना आवश्यक है शारीरिक स्वच्छता होने से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है शारीरिक रूप से स्वच्छ होने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता के नियमों के विषय में पूर्ण ज्ञान रखता है स्वच्छ रहने के लिए अच्छा वातावरण बनाया जाए शुद्ध भोजन किया जाए तथा शुद्ध व ताजी हवा का सेवन किया जाए इस प्रकार का वातावरण बनाने पर व्यक्ति रोग मुक्त रह सकेगा

 पौष्टिक भोजन:- स्वस्थ रहने के लिए शुद्ध तथा पौष्टिक भोजन बहुत आवश्यक है पौष्टिक भोजन का अभिप्राय है व्यक्ति की आवश्यकता अनुसार पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा विटामिन वह खनिज लवण युक्त भोजन ही भोजन शुद्ध होना चाहिए भोजन को स्वच्छता से बनाना चाहिए भोजन करने का समय निर्धारित होना चाहिए तथा अधिक तला भुनाव घनिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए सभी बातों को ध्यान में रखने से व्यक्ति पूर्णता स्वस्थ रहता है

 मानसिक शांति:- शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति के मस्तिष्क में शांति होनी चाहिए घर का वातावरण कल है युक्त नहीं बनना चाहिए तथा किसी भी समस्या का हाल आपस में विचार विमर्श तथा विचारों का आदान-प्रदान करके किया जाना चाहिए

 जीवन में नियम बांधता :- अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए यह आवश्यक है कि दैनिक कार्यों को नियम अनुसार किया जाए उदाहरण के लिए समय पर सो आदि में निवृत होना नाश्ता भोजन आदि समय से करना व्यायाम नियम अनुसार एवं नृत्य प्रतिदिन करना समय पर सोने तथा समय से उठाना आदि अनेक कार्य प्रतिदिन श्याम अनुसार करने चाहिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या तथा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही अपने दैनिक जीवन के नियमों को शुद्ध भुज पूर्वक निर्धारित करना चाहिए तथा निर्धारित नियमों को यथासंभव सदैव पालन करना चाहिए 

 नियमित रूप से व्यायाम :- शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन व्यायाम करना आवश्यक है व्यायाम का आशय शरीर के अंगों की व्यवस्थित गति से है व्यायाम के अनेक प्रकार है टहलने दौड़ना धड़ बैठक लगाना योगाभ्यास एवं प्रनियम मलखंब आदि सभी व्यायाम के उदाहरण है अब व्यायाम के लिए विभिन्न मशीनों एवं कर्म को भी तैयार कर लिया गया है व्यायाम शरीर की मांसपेशियों को क्रियाशील बनता है जिससे कार्य करने की क्षमता बढ़ती है इसके अतिरिक्त शरीर स्वस्थ प्रतिनियुक्त तथा सुंदर रहता है

  पर्याप्त निद्रा तथा विश्राम :- उत्तम स्वास्थ्य के लिए निंद्रा एवं विश्राम अत्यंत आवश्यक होता है हम जो भी शारीरिक तथा मानसिक कार्य करते हैं उसे हमारे शरीर में थकान आ जाती है वास्तव में शारीरिक परिश्रम करते समय हमारे शरीर में अनेक हानिकारक पदार्थ एक तरफ हो जाते हैं यह पदार्थ ही हमारी मांसपेशियों को ताकते हैं इससे अतिरिक्त कार्य करते समय हमारे शरीर में ऊतक टूटे फट्टे रहते हैं कार्य करते समय इसकी मरम्मत नहीं हो पाती है अतः शरीर के स्वस्थ रहने के लिए इन उत्तकों की मरम्मत तथा हानिकारक पदार्थों का बाहर निकलना अनिवार्य होता है इसके लिए निद्रा अविश्रम ही सर्वोत्तम उपाय हैं 

 शारीरिक स्वच्छता:-

 शारीरिक स्वच्छता के अंतर्गत संपूर्ण शरीर के प्रत्येक अंगों की स्वच्छता आती है अतः हमें अपने शरीर के विभिन्न अंगों की संस्थान प्रकार करनी चाहिए 

 त्वचा की स्वच्छता:- तू अच्छा शरीर का बाहरी आवरण होता है जो शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है त्वचा के विभिन्न रंग होते हैं किसी त्वचा का रंग काला होता है किसी का रंग सांवला या किसी त्वचा का रंग गेहुआ तथा किसी त्वचा का रंग गोरा होता है

 त्वचा में करोड़ों छिद्र होते हैं इसमें कुछ छिद्रतलीय ग्रंथि में खुलते हैं और कुछ श्वेत ग्रंथियां में श्वेत ग्रंथियां हमारे शरीर से पसीना निकलने का कार्य करती है इससे हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है साथ ही पसीने के द्वारा हमारे शरीर की गंदगी एवं उत्सर्जी पदार्थ का विसर्जन हो जाता है ग्रंथि तेल उत्पन्न करती है जिससे हमारी त्वचा चिकनी व चमकदार बनती है 

 हमारे शरीर से पसीना निकलना अनेक प्रकार के कार्य करना बाहर जाने आदि से हमारी त्वचा गंदी हो जाती है त्वचा के रोमचंद्र बंद हो जाते हैं जिससे सफेद वह तो लिए ग्रंथियां बंद हो जाती है गांधी त्वचा पर विभिन्न प्रकार के रोगाणु बैठते हैं और त्वचा संबंधित रोग उत्पन्न करते हैं जैसे फुंसी फोड़े आदि साथ ही शरीर से पसीने की दुर्गंध आने लगती है अतः त्वचा की प्रतिदिन सफाई करनी चाहिए स्नान करने से हमारे शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और त्वचा में रक्त संचार होता है और शरीर में चमक आती है

 


Read Full Blog...


Information of Cyber society


 साइबर समिति का मतलब:-  'साइबर सोसाइटी 'को हिंदी में मुख्य रूप से ' साइबर समाज' या  'डिजिटल समाज' कहते हैं जो कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों के वैश्विक नेटवर्क को दर्शाता है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार ऑनलाइन शॉपिंग और अभ्यासी दुनिया शामिल है और इसका संबंध साइबर सुरक्षा और डिजिटल जीवन से भी है जिसे डिजिट... Read More

 साइबर समिति का मतलब:-

 'साइबर सोसाइटी 'को हिंदी में मुख्य रूप से ' साइबर समाज' या  'डिजिटल समाज' कहते हैं जो कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों के वैश्विक नेटवर्क को दर्शाता है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार ऑनलाइन शॉपिंग और अभ्यासी दुनिया शामिल है और इसका संबंध साइबर सुरक्षा और डिजिटल जीवन से भी है जिसे डिजिटल दुनिया या आभासी दुनिया भी कहा जाता है 

  मुख्य शब्द और अर्थ:

 साइबर समाज (cyber society):- कंप्यूटर नेटवर्क द्वारा निर्मित इलेक्ट्रॉनिक समाज जैसे इंटरनेट पर होने वाले सामाजिक मेलजोल 

 डिजिटल समास (digital society):- प्रौद्योगिकी और डिजिटल माध्यमों पर आधारित समाज

  साइबर स्पेस (cyberspace ):-   कंप्यूटर नेटवर्क काव्य आवासी स्थान जहां जानकारी और संचार होता है जिसे आभासी दुनिया भी कहते हैं

 उदाहरण और संदर्भ:

- साइबर सोसाइटी ऑफ़ इंडिया जैसी संस्थाएं साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलती है

  - यह शब्द उन सामाजिक अतः क्रियो को दर्शाता है जो कंप्यूटर मध्य स्थिरता से होती है जैसे ऑनलाइन चैट और ईमेल

 साइबर सोसाइटी है क्या:-

 साइबर सोसाइटी (cyber society)का मतलब एक ऐसी दुनिया या समुदाय से है जो कंप्यूटर इंटरनेट और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर आधारित है जहां लोग ऑनलाइन जुड़ते हैं जानकारी शेयर करते हैं और डिजिटल सेवा का उपयोग करते हैं लेकिन साथ ही हैकिंग फिशिंग मलेरिया जैसे साइबर खतरों से बचने के लिए साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है जो हमारे डिजिटल जीवन को सुरक्षित रखती है

 यह एक ऐसा समाज है जहां संचार व्यापार शिक्षा मनोरंजन और लगभग हर गतिविधि डिजिटल माध्यम इंटरनेट कंप्यूटर मोबाइल से होता है 

 इसमें सोशल मीडिया ऑनलाइन शॉपिंग बैंकिंग सरकारी सेवाएं और वर्चुअल दुनिया जैसे मेंटावर शामिल है

 साइबर समिति से जुड़े मुख्य पहलू:-

1. साइबर स्पेस:  कंप्यूटर और नेटवर्क से बनी आभासी दुनिया

2. साइबर सुरक्षा (cyber society):  कंप्यूटर सिस्टम नेटवर्क और डाटा को साइबर हम लोग से बचने के तरीके और तकनीकी (जैसे एंटीवायरस फायरवॉल )

 

 


Read Full Blog...


AI—( Artificial Intelligence)


AI के बारे में कुछ जानकारी:- IA  का मतलब साधना के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) इंटेलिजेंस ऑग्मेंटेशन (intelligence augmentation- AI) हो सकता है जिसमें AI- मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने में चश्मा बनता है जबकि IA- मानव बुद्धि को बढ़ाने और उसे सपोर्ट करने पर केंद्रित है जिसे siri और हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक में इसका मतलब सूचना और आश्वासन&n... Read More

AI के बारे में कुछ जानकारी:-

IA  का मतलब साधना के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) इंटेलिजेंस ऑग्मेंटेशन (intelligence augmentation- AI) हो सकता है जिसमें AI- मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने में चश्मा बनता है जबकि IA- मानव बुद्धि को बढ़ाने और उसे सपोर्ट करने पर केंद्रित है जिसे siri और हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक में इसका मतलब सूचना और आश्वासन  (Information Assurance ) भी हो सकता है या कुछ नाम जैसे (आयोवा ) के लिए एक संक्षिप्त रूप 

 

 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI)

A) क्या है: यह कंप्यूटर साइंस का एक क्षेत्र है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, सीखने,समस्याओं को हल करने और निर्णय लेने की क्षमता देता है

B) कैसे काम करता है:  यह एल्गोरिदम और डाटा का उपयोग करता है ताकि मशीन पेटरन  पहचान सके,और काम कर सके, जैसे चेहरे पहचाने, भाषा समझने,और डाटा का विश्लेषण करना

 उदाहरण : चैट बोर्ड,सिफारिश प्रणाली 

( recommendation system ) और सेल्फ ड्राइविंग करें 

2.  इंटेलिजेंस ओंगमेंटेशन (AI)

A) क्या है: यह AI का एक प्रकार है जो मशीनों को इंसानों की जगह लेने के बजाय उनकी क्षमताओं (जैसे निर्णय लेने और रचनात्मकता) को बढ़ाने में मदद करता है

B) कैसे काम करता है: यह इंसानों और टेक्नोलॉजी के बीच सहयोग पर जोर देता है जिससे वह मिलकर बेहतर काम कर सके

 उदाहरण : डॉक्टर को मेडिकल इमेज का विश्लेषण करने में मदद करने वाले तोलिया श्री जैसे व्यक्तिगत सहायक जो जानकारी ढूंढने में मदद करते हैं

3. अन्य अर्थ

A) सूचना आश्वासन (Information Assurance)-AI : साइबर सुरक्षा से संबंधित है जो डाटा और सूचना की सुरक्षा सुनिश्चित करती है

B) संक्षिप्त रूप (Acronym)  जैसे आयोवा (lowa) राज्य के लिए AI

 संक्षेप में जब आप IA देखते हैं तो यह अक्सर कृत्रिम बुद्धिमत्ता AI या मानव क्षमताओं को बढ़ाने वाली बुद्धिमत्ता के (AI) बारे में होता है लेकिन इसका मतलब सूचना सुरक्षा या किसी स्थान का संक्षिप्त नाम भी हो सकता है

AI - का मतलब

IA का मतलब मुख्य रूप से दो संदर्भ में होता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता )या इंटेलिजेंस ऑग्मेंटेशन (बुद्धि वृद्धि) जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने सीखने और समस्याओं का हल करने की क्षमता देता है और कभी-कभी किसी भाषा में प्रयुक्त के रूप में या फिर किसी स्थान के संक्षिप्त नाम जैसेआयोवा के रूप में भी होता है

   AI- Artificial Intelligence- कृत्रिम बुद्धिमत्ता 

 AI कितने प्रकार के होते हैं

 हाल ही में विभिन्न औद्योगिक में कृत्रिम बुद्धिमता ए के अनुप्रयोगों में भारी वृद्धि हुई है और उनकी क्षमता और प्रभाव का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है हम मोटे तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीन प्रकारों को पहचान सकते हैं संकीर्ण या कमजोर एआई  (एएन आई) सामान्य  एआई  ( AGI ) और कृत्रिम आती बुद्धिमत्ता (ASI)

AI( कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को मुख्य रूप से क्षमता  (ability) और कार्य क्षमता ( functionality) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जिसमें संता के आधार पर संकीर्ण AI( Narrow all) सामान्य AI ( AGI ) और सुपर AI ( ASI ) प्रमुख है जबकि कार्य क्षमता के आधार पर प्रतिक्रियाशील मशीन (Reactive Machines) सीमित मेमोरी  (Limited Memory) मां का सिद्धांत theory of mind और आत्मा जागरूक AI (salf aware) जैसे प्रकार होते हैं जिनमें से अधिकांश वर्तमान में मौजूद है और कुछ भविष्य की अवधारणाएं है 

 समता आधारित प्रकार-: (types of ability)

1. संकीर्ण AI -: यह AI किसी एक विशिष्ट कार्य के लिए बनाया जाता है जैसे सिरी गूगल स्टेटस या चेहरे की पहचान

2. सामान्यAI-: यह इंसानों की तरह किसी भी भौतिक कार्य को करने की क्षमता रखता है लेकिन यह अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है

3. सुपरAI:- यह मानव से कहीं ज्यादा बुद्धिमान होगा और अपनी सोच को खुद सुधर सकेगा जो अभी केवल एक काल्पनिक अवधारणा है

 कार्य क्षमता आधारित प्रकार( types of functionality)

1. प्रतिक्रियाशील मशीन:-  यह सिर्फ वर्तमान इनपुट पर प्रतिक्रिया करती है कोई पिछली या दस्त नहीं होती जैसे डीप ब्लू शतरंज कंप्यूटर

2. सीमित मेमोरी:- यह थोड़े समय के लिए पिछली जानकारी को याद रख सकती है और उनका उपयोग करती है जैसे सेल्फ ड्राइविंग करो 

3. मां का सिद्धांत:- यह AI भावनाओं विश्वासों और इरादों को समझने और उनसे बातचीत करने में सक्षम होगा (अभी विकास के अधीन है)

4. आत्म जागरूक :- यह सबसे अनंत स्टार है जिससे(AI) में चेतना और स्वयं की समझ होगी पूरी तरह सिद्धांत ट्रिक 

AI मैं कितने प्रकार के अभिज्ञान है?

 कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षमता आधारित प्रकार 

 मैं किस प्रकार सीखते हैं और अपने ज्ञान को किस हद तक लागू कर सकते हैं इसके आधार पर सभी AI को तीन समता प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है संकीर्ण कृत्रिम  AI सामान्य बुद्धिमत्ता और कृत्रिम सुपर इंटेलिजेंस

AI मॉडल कितने प्रकार के होते हैं?

 

​​​​​​ विभिन्न प्रकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( AI )अलग-अलग समस्याओं का समाधान करती है जेनरेटिव AI सर्जन करती है प्रिडिकेटिव AI परमाणु लगती है ईस्ट आई कार्य में सहायता करती है और एग्जॉटिक आई स्वत रूप से कार्य करती है बड़े भाषा मॉडल आईआईएम और मल्टी मॉडल सिस्टम अब आधुनिक कार्य स्थल विशेष रूप से ज्ञान आधारित कार्यों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं

​​​​AI के पिता:-

AI के जनक john macarthy है जिन्होंने 1956 में दांत माउस सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द गदा और इसे एक अकादमिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया साथ ही इन्होंने  LIPS प्रोग्रामिंग भाषा का भी विकास किया जो AI रिसर्च में महत्वपूर्ण रही है

 मुख्य बिंदु :

 जनक : john macarthy अमेरिका कंप्यूटर वैज्ञानिक और संज्ञानात्मक वैज्ञानिक 

  शब्द गणना:- उन्होंने 1956 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AIशब्द का आविष्कार किया

डॉट माउस सम्मेलन :-  उन्होंने 1956 में डार्क माउस सम्मेलन आयोजित किया जिसे AI का जन्म स्थान माना जाता है

 योगदान :-इन्होंने  AI के शुरुआती विकास और जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया 

 जबकि एलेन टरिक को AI के शुरुआती विचारों और तुरी कि टेस्ट के लिए जाना जाता है जॉन में करती को AI के क्षेत्र के संस्थापक और जनक के रूप में मान्यता प्राप्त है

 AI के फायदे व नुकसान-

AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कई फायदे हैं जैसे उत्पादकता बढ़ाना दोहराए जाने वाले कामों को स्वचालित करना स्वास्थ्य सेवा में सुधार 24/7और उपलब्धता लेकिन इसके नुकसान भी है जिसमें नौकरियों का विस्थापन उच्च लागत को पंत संबंधी चिंताएं एल्गोरिदम में पक्षपात और मानवीय भावनाओं व रचनात्मक की कमी शामिल है इसलिए इसका उपयोग संतुलन और जिम्मेदारी के साथ करना महत्वपूर्ण है

 फायदे( benefits )

 उत्पादकता और दक्षता:-AI कार्यों को तेजी से और अधिक सटीक रूप से करता है जिस समय बचता है और काम की गुणवत्ता बढ़ती है

​​​​​​स्वचालन: यह दोहराए जाने वाले और निराशा कार्यों को स्वचालित करता है जिससे मानव कर्मचारी अधिक जटिल कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं

24/7 उपलब्धता: AI सिस्टम बिना थके जब से घंटे काम कर सकते  हैं 

 बेहतर निर्णय :- यह बड़े बेटे सेट का विश्लेषण करके पैटर्न और अंतर्दृष्टि प्रदान करता है जिसे बेहतर और तेज निर्णय लेने में मदद मिलती है जैसे स्वास्थ्य सेवा में

  नवाचार : यह नहीं खोजो और समाधानों को बढ़ावा देता है

 नुकसान (Disadvantages)

  नौकरी का विस्थापन:- स्वचालन के कारण कुछ नौकरियां खत्म हो सकती है जिससे बेरोजगारी बढ़ सकती है

 उच्च लागत: AI सिस्टम को विकसित करना और लागू करना बहुत महंगा हो सकता है

 गोपनीयता और सुरक्षा:- AI बड़ी मात्रा में डाटा का प्रयोग करता है जिससे गोपनीयता के उल्लंघन और सुरक्षा जोखिम का खतरा होता है

  पक्षपात : यदि प्रशिक्षण उत्तर पक्ष पाती है तो AI सिस्टम भी पक्षपाती निर्णय ले सकते हैं

 मानवीय स्पर्श की कमी:-AI  मैं भावना रचनात्मक और सुहानुभूति की कमी होती है जो कुछ क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है 

​​​​AI का इतिहास( history of AI)

AI का इतिहास 1905 के दशक में शुरू हुआ जब जॉन में मैं मेकाथरी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट शब्द गदा और दांत माउस कार्यशाला में इसे एक वैज्ञानिक क्षेत्र के रूप में स्थापित किया हालांकि एलन टयूरिंग जैसे अग्रद्ध हो तो ने पहले ही मशीनों बुद्धिमता की नींव रखी थी और तब यह यह कई चरणों जैसे संकीर्ण AI  सामान्य AI में गुजरते हुए आदमी मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के जरिए तेजी से विकसित हो रहे हैं 

 शुरुआती विचार ने नीव (1940- 1950)

1950: एलेन टरिक ने मशीनस सोच सकती है लेख में टयूरिंग टेस्ट का प्रस्ताव रखा जो मशीन की बुद्धिमत्ता मापने का एक तरीका था और मशीनों के सोने की संभावना पर विचार किया

1952: ऑथर सैमुअल ने पहले सीखने वाला चेकर प्रोग्राम बनाया

1956: जॉन मैंकाथ्री  ने डांट माउस कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द का प्रयोग किया और इस क्षेत्र को एक नाम दिया जिससे ए आई का औपचारिक जन्म हुआ 

  प्रारंभिक उत्साह और शीतकाल (1960-1960)

AI शुरुआती प्रोग्राम जैसे लॉजिक थियोसिटी बने लेकिन जल्द ही कंप्यूटर की सीमित शक्ति और जटिल समस्याओं के कारण उत्साह कम हुआ AI विंटर

  विशेषज्ञ सिस्टम और  AI पुनरुत्थान 1980

विशेषज्ञ सिस्टम लोकप्रिय हुए जो विशिष्ट क्षेत्रों में मानव ज्ञान का अनुकरण करते थे जिससे आई में नये जान आई 

 मशीन लर्निंग और दीप लर्निंग का युग (1990 वर्तमान)

1917:  IBS का डीप ब्लू शतरंज में विश्व चैंपियन गिरी कस्प रोग को हराया

   2010: मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग की प्रगति ने AI को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंचा बड़े डाटा सेट और शक्तिशाली कंप्यूटर्स ने इमेज रिकॉर्डिंग नेचुरल लैंग्वेज  प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में क्रांति लाती 

 मुख्य मिल के पत्थर 

NLP:- सीरी (siri) अलकासा( alexa) जैसे वर्चुअल  अीस्टेट 

 कंप्यूटर विजन:- सेल्फ ड्राइविंग कर फेस रिकॉग्निशन

 वर्तमान: जेनरेटिव AI जैसी तकनीकी जो मानव जैसी सामग्री बन सकती है

 संक्षेप में का इतिहास काल्पनिक से शुरू होकर सिद्धांत्रिक आधार उत्साह और निराशा के दौर से गुजरते हुए आवाज के दाता संचालित तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिदृश्य तक पहुंचा है जिसका उद्देश्य मशीनों को बुद्धिमान बनाना है

 

 

 

 


Read Full Blog...



<--icon---->