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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

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ऑक्सीजन क्या है


 ऑक्सीजन क्या है  ऑक्सीजन एक महत्वपूर्ण रंगीन गांधी में स्वाधीन गैस है जो सांसद प्राणियों के जीवन हेतु परम आवश्यक है शुद्ध वायु में लगभग 21% ऑक्सीजन की मात्रा पाई जाती है यह अत्यंत सक्रिय गैस है और अन्य अनेक गैसों से सिरका के साथ क्रिया करती है यह सभी वस्तुओं के जलने में सहायक होती है तथा गंदगियों को जलाकर वायुमंडल को शुद्ध करने का कार्य भी करती है इसके अभाव की स्थिति में ज्वलन क्रिया सं... Read More

 ऑक्सीजन क्या है

 ऑक्सीजन एक महत्वपूर्ण रंगीन गांधी में स्वाधीन गैस है जो सांसद प्राणियों के जीवन हेतु परम आवश्यक है शुद्ध वायु में लगभग 21% ऑक्सीजन की मात्रा पाई जाती है यह अत्यंत सक्रिय गैस है और अन्य अनेक गैसों से सिरका के साथ क्रिया करती है यह सभी वस्तुओं के जलने में सहायक होती है तथा गंदगियों को जलाकर वायुमंडल को शुद्ध करने का कार्य भी करती है इसके अभाव की स्थिति में ज्वलन क्रिया संभव नहीं है यह जब अन्य तत्वों से क्रिया करती है तो विभिन्न ऑक्साइड बनते हैं तथा इस क्रिया को ऑक्सीकरण कहा जाता है

 प्राणी शरीर की विभिन्न क्रियो में भी ऑक्सीजन का उल्लेख में योगदान रहता है हमारे शरीर को गर्म रखने का कार्य ऑक्सीजन ही करती है इसके अतिरिक्त इसे ही हमारा शरीर शक्ति ग्रहण करता है हम जो भोजन ग्रहण करते हैं शरीर के अंदर उसे भोजन का ज्वलन भी इसके द्वारा ही होता है जोलना के बाद ही हमारा भोजन शरीर को शक्ति प्रदान करता है इसलिए हम निरंतर सांस लेते रहते हैं हम ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड निकासीट करते हैं यह हमारे रक्त के शोध में भी सहायक होता है स्पष्ट है कि ऑक्सीजन एक उपयोगी एवं महत्वपूर्ण गैस है 

 धन्यवाद


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आएइ जाने की नाइट्रोजन क्या है


 नाइट्रोजन क्या है  वायु में मिश्रित दूसरी मुख्य गैस नाइट्रोजन है वायु में यह बहुत अधिक मात्रा में होती है यह ऑक्सीजन के विपरीत गुना से युक्त होती है इसलिए यह गैस वायुमंडल में ऑक्सीजन की तीव्रता तथा क्रियाशीलता को घटती है यह गैस जलने की क्रिया को रोकते हैं वायु में इसकी उपस्थिति ही वायु को स्वास्थ्य लेने के लिए उपयुक्त बनती है यदि वायु में नाइट्रोजन ना हो तो सांस लेने से हमारे फेफड़ों ही... Read More

 नाइट्रोजन क्या है

 वायु में मिश्रित दूसरी मुख्य गैस नाइट्रोजन है वायु में यह बहुत अधिक मात्रा में होती है यह ऑक्सीजन के विपरीत गुना से युक्त होती है इसलिए यह गैस वायुमंडल में ऑक्सीजन की तीव्रता तथा क्रियाशीलता को घटती है यह गैस जलने की क्रिया को रोकते हैं वायु में इसकी उपस्थिति ही वायु को स्वास्थ्य लेने के लिए उपयुक्त बनती है यदि वायु में नाइट्रोजन ना हो तो सांस लेने से हमारे फेफड़ों ही जल जाए यह भी स्वयं में एक गांधी रंगीन और स्वाधीन गैस होती है तथा पानी में अति अल्प मात्रा में घुलनशील होती है हमारे लिए नाइट्रोजन गैस का मुख्य उपयोग यह है कि इससे ऑक्सीजन की तीव्रता कम होती है

 धन्यवाद


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कार्बन डाइऑक्साइड क्या है


 कार्बन डाइऑक्साइड क्या है  वायु में कार्बन डाइऑक्साइड गैस अल्प मात्रा में ही पाई जाती है यह भी एक रंगीन गैस है जिसमें गढ़ तथा हल्का स्वाद भी होता है यह गैस विभिन्न वस्तुओं के सड़ने गैलन तथा जीव धारी के श्वसन के परिणाम स्वरुप बनती रहती है ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन दोनों से भारी होने के कारण यह वायुमंडल में गेराज स्थान पर एकत्रित हो जाती है केन तथा गहरी खानों में इस गैस की मात्रा बहुत अधिक हो... Read More

 कार्बन डाइऑक्साइड क्या है

 वायु में कार्बन डाइऑक्साइड गैस अल्प मात्रा में ही पाई जाती है यह भी एक रंगीन गैस है जिसमें गढ़ तथा हल्का स्वाद भी होता है यह गैस विभिन्न वस्तुओं के सड़ने गैलन तथा जीव धारी के श्वसन के परिणाम स्वरुप बनती रहती है ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन दोनों से भारी होने के कारण यह वायुमंडल में गेराज स्थान पर एकत्रित हो जाती है केन तथा गहरी खानों में इस गैस की मात्रा बहुत अधिक होती है यह गैस जीवधारी के जीवित रहने में तो सहायक नहीं होती परंतु पेड़ पौधे के लिए बहुत उपयोगी होती है सूर्य के प्रकाश में पेड़ पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं तथा अपना भोजन तैयार करते हैं यह गैस छूने के पानी को धो दिया तथा नीले लिटमस को लाल कर देती है ऑक्सीजन के विपरीत कार्बन डाइऑक्साइड जलने की क्रिया में बाधक होती है अतः आज को बुझाने के लिए इस गैस को इस्तेमाल किया जाता है यह डबल रोटी आदि बनाने हेतु आवश्यक खमीर तैयार करने के लिए भी उपयोगी होती है

 धन्यवाद


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जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव


 जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव  हमारे आहार में जल का भी विशेष महत्वपूर्ण स्थान है यदि हम जल की अल्प मात्रा ग्रहण करते हैं या शरीर में जल की कमी हो जाती है तो निश्चित रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है शरीर में जल की कमी को निर्जलीकरण कहते हैं निर्जलीकरण अपने आप में एक गंभीर स्थिति है तथा इसके तुरंत उपचार न होने की दशा में व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है &nbsp... Read More

 जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव

 हमारे आहार में जल का भी विशेष महत्वपूर्ण स्थान है यदि हम जल की अल्प मात्रा ग्रहण करते हैं या शरीर में जल की कमी हो जाती है तो निश्चित रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है शरीर में जल की कमी को निर्जलीकरण कहते हैं निर्जलीकरण अपने आप में एक गंभीर स्थिति है तथा इसके तुरंत उपचार न होने की दशा में व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है

 उपयुक्त विवरण द्वारा स्वास्थ्य की कुछ उन असामान्य प्रतिकूल दशाओं का परिचय प्राप्त होता है जो आहार के पोषक तत्व ऑन की कमी के परिणाम स्वरुप उत्पन्न होती है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि स्वास्थ्य की इन असामान्य दशाओं रोगों से मुक्ति पानी के लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती बल्कि केवल आहार में विद्वान अभाव या कमी को दूर करना ही पर्याप्त होता है

 उपयुक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि आई हैव स्वास्थ्य का परस्पर घनिष्ठ संबंधी वास्तव में स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों में सर्वाधिक महत्व उचित पोषण का है नवीनतम अनुसंधानों से शुद्ध हो चुका है कि प्रत्येक मनुष्य को अपनी आयु लिंग एवं कार्य आदि के अनुसार एक निश्चित मात्रा में आहार की आवश्यकता होती है इस आहार में भोजन के सभी अनिवार्य तत्व एक निश्चित अनुपात में होने आवश्यक है यदि किसी व्यक्ति को आहार के माध्यम से भोजन के सभी तत्व समुचित मात्रा एवं अनुपात में प्राप्त होते रहते हैं तो उसे व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहता है तथा शरीर की वृद्धि विकास साहब रखरखाव की उचित प्रकार से होता है इस प्रकार के आहार प्राप्त होने की स्थिति को उचित पोषण कहते हैं उचित पोषण आहार प्राप्त करने की उसे अवस्था को कहा जाता है जिसमें आहार के सभी कार्य एवं उद्देश्य संचार रूप से पूर्ण होते रहते हैं उचित पोषण के अंतर्गत भोजन की मात्रा एवं प्रकार इस तरह का होता है कि शरीर की संसद आवश्यकताओं एवं क्रियाकलापों के लिए पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाते हैं इस अवस्था में शरीर की संसद कोशिकाओं का पोषण होता रहता है शरीर की संसद ग्रंथियां में उचित मात्रा में रसों का निर्माण एवं श्रवण होता रहता है सांसद एंजाइम उचित मात्रा में बनते रहते हैं इसके अतिरिक्त शरीर की क्रियो के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त होती रहती है तथा शरीर में होने वाली टूट-फूट की मरम्मत भी होती रहती है उचित पोषण की अवस्था में शमशाद शारीरिक क्रियो सुचारू रूप से चलती रहती है तथा शरीर का ढांचा भी स्वस्थ एवं सुविक्षित होता रहता है इस प्रकार स्पष्ट है कि उत्तम स्वास्थ्य के लिए उचित पोषण अनिवार्य कारक है इस प्रकार की संदेश रूप से कहा जा सकता है कि आर एवं स्वास्थ्य में पारस्परिक घनिष्ठ संबंध है

धन्यवाद-


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मधुमक्खी पालन


 मधुमक्खी पालन  मधु या शहर का सावित्री उपयोग होता है तथा इसके लिए मधुमक्खी पालन का उगम एक कृषि उद्योग बन गया है क्योंकि मधुमक्खी पालन में पूंजी निवेश कम होता है इसलिए किसान इस धन अर्जन का अतिरिक्त साधन मानते हैं शहर के अतिरिक्त मधुमक्खी के चट्टे मॉम के बहुत अच्छे स्रोत है मॉम का उपयोग औषधि तैयार करने में किया जाता है  व्यावसायिक स्तर पर मधु उत्पादन के लिए देसी किस्म की मक्खी एपिसोड... Read More

 मधुमक्खी पालन

 मधु या शहर का सावित्री उपयोग होता है तथा इसके लिए मधुमक्खी पालन का उगम एक कृषि उद्योग बन गया है क्योंकि मधुमक्खी पालन में पूंजी निवेश कम होता है इसलिए किसान इस धन अर्जन का अतिरिक्त साधन मानते हैं शहर के अतिरिक्त मधुमक्खी के चट्टे मॉम के बहुत अच्छे स्रोत है मॉम का उपयोग औषधि तैयार करने में किया जाता है

 व्यावसायिक स्तर पर मधु उत्पादन के लिए देसी किस्म की मक्खी एपिसोड से रहना इंडिका सामान्य भारतीय मक्खी एपिसोड एक सेल मक्खी तथा एपिसोड फ्लोरी डिलीट मक्खी का उपयोग करते हैं एक इटली मक्खी एपिसोड का उपयोग मधु के उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया जाता है अतः व्यवसायिक मधु उत्पादन में इस मक्खी का कार्य उपयोग किया जाता है

 धन्यवाद-


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मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)


 मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)  हमारे भोजन में मछली प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है मछली उत्पादन में प्रयुक्त मछलियां कवचीय मछलियां जैसे प्रों तथा मूल शक सम्मिलित है मछली प्राप्त करने की दो विधियां है एक प्राकृतिक स्रोत जिसे मछली पकड़ना कहते हैं तथा दूसरा स्रोत मछली पालन या मछली सावधान   मछली के जल स्रोत समुद्री जल तथा ताजा जल अलवर में जल है अलबरणीय जल नदियां तथा तालाबों में होता... Read More

 मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)

 हमारे भोजन में मछली प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है मछली उत्पादन में प्रयुक्त मछलियां कवचीय मछलियां जैसे प्रों तथा मूल शक सम्मिलित है मछली प्राप्त करने की दो विधियां है एक प्राकृतिक स्रोत जिसे मछली पकड़ना कहते हैं तथा दूसरा स्रोत मछली पालन या मछली सावधान 

 मछली के जल स्रोत समुद्री जल तथा ताजा जल अलवर में जल है अलबरणीय जल नदियां तथा तालाबों में होता है इसलिए मछली पकड़ना तथा मछली संवर्धन समुद्र तथा ताजे जल के पारिस्थितिकी तंत्र में किया जा सकता है

 धन्यवाद-

 


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मुर्गी पालन


 मुर्गी पालन-  अंडे में कुक्कुट मास के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मुर्गी पालन किया जाता है इसलिए कुकुट पालन में उन्नत मुर्गी की नेस्ले विकसित की जाती है अंडों के लिए अंडे देने वाली लेयर मुर्गी पालन किया जाता है तथा मांस के लिए ब्रायलर को पाला जाता है   नइ -नई किस में विकसित की जाती है नहीं किस में बनाने के लिए देसी जैसे अश्लील तथा विदेशी जैसे लेखन नसों का संकरण कराया जाता है &nbs... Read More

 मुर्गी पालन-

 अंडे में कुक्कुट मास के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मुर्गी पालन किया जाता है इसलिए कुकुट पालन में उन्नत मुर्गी की नेस्ले विकसित की जाती है अंडों के लिए अंडे देने वाली लेयर मुर्गी पालन किया जाता है तथा मांस के लिए ब्रायलर को पाला जाता है 

 नइ -नई किस में विकसित की जाती है नहीं किस में बनाने के लिए देसी जैसे अश्लील तथा विदेशी जैसे लेखन नसों का संकरण कराया जाता है

 चीजों की संख्या तथा गुणवत्ता:

 छोटे कद के रोलर माता पिता द्वारा चीजों के व्यावसायिक उत्पादन हेतु:

  गर्मी अनुकूलन क्षमता उच्च तापमान को सहने की क्षमता

 देखभाल में कम खर्च की आवश्यकता


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आएइ जाने की पशुपालन क्या है


 पशुपालन-  पशुधन के प्रबंधन को पशुपालन कहते हैं इसके अंतर्गत बहुत से कार्य जैसे भजन देना प्रजनन तथा रोगों पर नियंत्रण करना आता है जनसंख्या वृद्धि तथा दहन सहन के स्तर में वृद्धि के कारण दूध तथा मांस खपत भी बढ़ रही है पशुधन के लिए मानवीय व्यवहार के प्रति जागरूकता होने के कारण पशुधन खेती में कुछ नहीं परेशानियां भी आ गई है इसलिए पशुधन उत्पादन बढ़ाने व उसमें सुधार की आवश्यकता है   ध... Read More

 पशुपालन-

 पशुधन के प्रबंधन को पशुपालन कहते हैं इसके अंतर्गत बहुत से कार्य जैसे भजन देना प्रजनन तथा रोगों पर नियंत्रण करना आता है जनसंख्या वृद्धि तथा दहन सहन के स्तर में वृद्धि के कारण दूध तथा मांस खपत भी बढ़ रही है पशुधन के लिए मानवीय व्यवहार के प्रति जागरूकता होने के कारण पशुधन खेती में कुछ नहीं परेशानियां भी आ गई है इसलिए पशुधन उत्पादन बढ़ाने व उसमें सुधार की आवश्यकता है 

 धन्यवाद


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आंखों की स्वच्छता


 आंखों की स्वच्छता  आंखों का मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व होता है आंख के द्वारा ही संपूर्ण संसार को देखा जा सकता है अतः आंखों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए थोड़ी सी लापरवाही आंखों को भयंकर नुकसान पहुंचती है  आंखों की स्वच्छता के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-  आंखों में रात्रि को सोते समय गुलाब जल डालना चाहिए तथा प्राप्त ठंडे पानी के चीते देना चाहिए  आंखों को तेज... Read More

 आंखों की स्वच्छता

 आंखों का मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व होता है आंख के द्वारा ही संपूर्ण संसार को देखा जा सकता है अतः आंखों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए थोड़ी सी लापरवाही आंखों को भयंकर नुकसान पहुंचती है

 आंखों की स्वच्छता के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-

 आंखों में रात्रि को सोते समय गुलाब जल डालना चाहिए तथा प्राप्त ठंडे पानी के चीते देना चाहिए

 आंखों को तेज धूप प्रकाश में धुएं से बचना चाहिए

 गंदा ओला या रुमाल आंखों पर नहीं लगना चाहिए और ना ही आंखों को अधिक रगड़ना चाहि

 पढ़ने लिखने अथवा महीन कार्य करते समय रोशनी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए

 आंखों की रोशनी बढ़ाने वह उन्हें स्वस्थ रखने के लिए विटामिन ए युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए

 अध्ययन करते समय पुस्तक को नेत्रों के बहुत निकट नहीं रखना चाहिए

 आशिक दृष्टि दोष का पता चलते ही तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए

 नेटवर्क को तेज रोशनी में धूप से भी बचना चाहिए धूप में घर से बाहर जाते समय उच्च कोटि का धूप का चश्मा लगाना चाहिए

 धन्यवाद


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दांतों की स्वच्छता


 दांतों की स्वच्छता   दांत मुंह की शोभा होते हैं चमकते हुए दांत हंसी में चार चांद लगा देते हैं और व्यक्ति के व्यक्ति तत्व को प्रभावशाली बना देते हैं इसके अतिरिक्त दांत ग्रहण किया आहार को चबाकर पाचन योग्य बनाने का कार्य करते हैं अतः शारीरिक स्वास्थ्य में दांतों का विशेष योगदान होता है स्वस्थ दांतों से पाचन का कार्य ठीक ढंग से हो पता है परंतु अस्वस्थ दांत होने पर भोजन ठीक से नहीं चलाय... Read More

 दांतों की स्वच्छता 

 दांत मुंह की शोभा होते हैं चमकते हुए दांत हंसी में चार चांद लगा देते हैं और व्यक्ति के व्यक्ति तत्व को प्रभावशाली बना देते हैं इसके अतिरिक्त दांत ग्रहण किया आहार को चबाकर पाचन योग्य बनाने का कार्य करते हैं अतः शारीरिक स्वास्थ्य में दांतों का विशेष योगदान होता है स्वस्थ दांतों से पाचन का कार्य ठीक ढंग से हो पता है परंतु अस्वस्थ दांत होने पर भोजन ठीक से नहीं चलाया जा सकता है और दांतों का शेष कार्य आंतों को करना पड़ता है ऐसा होने से पहले पेट संबंधित रोग हो जाते हैं और मुंह से बदबू आने लगती है यदि दांतों की सुरक्षा का स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है तो कैरिज व्यापार या नामक रोग हो जाते हैं 

 धन्यवाद


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