
मूर्खों के राज्य में राजा और मंत्री दोनों मुर्गी थे वे दूसरे राज्यों की तरह राजकाज नहीं चलाना चाहते थे इसलिए उन्होंने रात को दिन में और दिन को रात में बदलने का फैसला कर लिया उन्होंने आदेश दिया कि हर कोई रात में जागे अपने खेत जोत और अपने व्यापार को केवल अंधेरा होने के बाद चलाया करें और जैसे ही सूर्य ऊपर आए ज स जाए कोई भी जो आदेश का उंगलन करेगा उसे मृत्युदंड दिया जाएगा लोगों ने मृत्यु के दर से वैसा...
Read More
मूर्खों के राज्य में राजा और मंत्री दोनों मुर्गी थे वे दूसरे राज्यों की तरह राजकाज नहीं चलाना चाहते थे इसलिए उन्होंने रात को दिन में और दिन को रात में बदलने का फैसला कर लिया उन्होंने आदेश दिया कि हर कोई रात में जागे अपने खेत जोत और अपने व्यापार को केवल अंधेरा होने के बाद चलाया करें और जैसे ही सूर्य ऊपर आए ज स जाए कोई भी जो आदेश का उंगलन करेगा उसे मृत्युदंड दिया जाएगा लोगों ने मृत्यु के दर से वैसा ही किया जैसा उन्हें कहा गया था राजा और बद्री अपनी योजना की सफलता पर प्रश्न थे एक दिन एक गुरु तथा उनका शिष्य शहर में आए यह सुंदर शहर दीघा का समय था लेकिन आसपास कोई भी नहीं था हर कोई सोया हुआ था एक चुहिया भी घूम नहीं रही थी यहां तक की गाय बैलों को भी दिन में सोना सिखाया गया था दोनों अजनबी उसे देखकर आश्चर्यचकित थे जो कुछ इन्होंने अपने चारों ओर देखा था और शाम तक शहर में चारों ओर तब तक घूमते रहे जब तक की अचानक सारा शहर जाग नहीं गया और अपना रात का क्रियाकलाप नहीं करने लगा
दोनों लोगों को भूख लग आई थी अब जब दुकान खुल गई थी वह कुछ खाने पीने का सामान खरीदने चले गए उदय आश्चर्य हुआ जब उन्होंने पाया कि हर चीज का दान एक ही था एक अकेला लड्डू चाहे उन्होंने चावल की एक मात्र खरीदी या खेलों का एक गुंजा इसका मूल्य एक लड्डू था गुरुजी और उसका शिष्य प्रश्न थे उन्होंने कभी भी ऐसी बात नहीं सुनी थी वह एक रुपए में वह सारा भोजन खरीद सकते थे जो वह चाहते थे
पाक हाथ चुकाने के बाद गुरुजी को एहसास हुआ कि यह मूर्खों का राज्य है और उनके लिए यहां रुकने का विचार अच्छा नहीं होगा यह स्थान हमारे लिए नहीं है आओ चले उन्होंने अपने शिष्य से कहा लेकिन सीसी वह स्थान छोड़ नहीं जाता था यहां सब कुछ सस्ता था वह बस अच्छा सस्ता खाना चाहता था गुरुजी ने कहा वह सब मुर्ख है यह सब ज्यादा समय तक नहीं चलेगा और तू नहीं कह सकता कि वह इसके बाद तेरे साथ क्या करेंगे
लेकिन फिर से देव गुरुजी की बुद्धिमानी की बात को नहीं सुना वह ठहरना चाहता था अंत में गुरुजी के हर बाली और कहा वह कर जो तू चाहता है बचा रहा हूं और चले गए इसी से ठहर गया रोग भरपेट खाना खाने लगा के ले और घी और चावल और गेहूं और पवित्र अवार्ड गली के सांड की तरह मोटा हो गया
एक दिन खिली धूप में एक चोर ने एक धनी व्यापारी के घर में शहर लगाया उसने एक दीवार में किया हो चुपचाप अंदर चला गया और जब वह अपनी लूट को बाहर ले जा रहा था तब पुराने मकान की दीवार उसके सिर पर डे गई और वही उसी स्थान पर मर गया उसका भाई राजा के पास दौड़कर गया और शिकायत की है महाराज जब मेरा भाई अपना प्राचीन व्यापार कर रहा था तो एक दीवार उसे पर गिर गई और वह मर गया दोस्त व्यापारी का है उसे अच्छी और मजबूत दीवार बनाने चाहिए थी आपको उसे धार्मिक को दंडित करना चाहिए तथा परिवार को इस अध्याय की श्रुति पूर्ति करनी चाहिए
राजा ने कहा न्याय किया जाएगा चिंता मत करो और तुरंत मकान के मालिक को बुलाया लिया जब व्यापारी आया तब राजा ने से प्रश्न किया
तुम्हारा नाम क्या है अमुक और आमुख महाराज क्या तुम घर पर थे जब मृतक ने तुम्हारी घर पर चोरी की थी हां महाराज उसने शेर लगाई थी और दीवार कमजोर थी यह उसे पर गिर पड़ी आरोपी ने अपना प्राप्त स्वीकार कर लिया है तुम्हारे दीवाने इस आदमी के भाई को मार डाला तुमने एक व्यक्ति की हत्या की है अब तुम्हें दंडित करना पड़ेगा
स्वामी आसाई व्यापारी ने कहा मैंने दीवार नहीं बनाई थी यह तो प्रस्तुत उसे आदमी का दोष है जिसने दीवार बनाई थी उसमें उसे ठीक से नहीं बनाई थी आपको उसे दंडित करना चाहिए वह कौन है स्वामी यह दीवार मेरे पिताजी के समय में बढ़ाई गई थी मैं उसे आदमी को जानता हूं अब वह बूढ़ा हो चुका है वह पास में ही रहता है राजा ने उसे राज मिस्त्री को जिसने दीवार बनाई थी को बुलाने के लिए दूध भेज दिया वे उसके हाथ पांव बंद कर उसे ले अरे तुम क्या तुमने इस आदमी की दीवार इसके पिताजी के समय भी बनाई थी हां महाराज मैंने बनाई थी यह किस तरह की दीवार तुमने बनाई थी यह बेचारे आदमी पर गिर गई और उसे मार डाला तुमने उसकी हत्या की है हमें तुम्हें मृत्युदंड देना पड़ेगा
इससे पहले की राजा फांसी का आदेश देता बेचारे राजमिस्त्री ने प्रार्थना की कृपया अपना आदेश देने से पहले मेरी बात सुन लीजिए यह सच है कि मैं ही यह दीवार बनाई थी और यह अच्छी नहीं थी लेकिन ऐसा इसलिए था कि मेरा मन इसमें नहीं था मुझे अच्छी तरह याद है कि एक नाचने वाली लड़की जो कि सारा दिन उसे गली से इधर-उधर अपनी पायल झुनझुन कर दी जा रही थी और मैं अपनी आंखों या अपना दिमाग उसे दीवार में नहीं रख सका जिसे मैं बना रहा था आपको उसे नाचने वाली लड़की को पकड़ना चाहिए मुझे पता है कि वह कहां रहती है
तुम ठीक रहते हो बला गहरा गया है हमें इसमें जाना पड़ेगा इतनी जटिल बाबू का न्याय करना आसान नहीं है पकड़ना चाहिए उसे व्यक्ति को चाहे वह कहां जहां भी होना अच्छी वाली लड़की अब बड़ी स्त्री काटते हुए दरबार में आई क्या तुम कई वर्षों पहले उसे गली में इधर से उधर जा रही थी जबकि यह बेचारा आदमी दीवार बना रहा था क्या तुमने उसे देखा था हां मेरे स्वामी मुझे यह अच्छी तरह से याद है तो तुम इधर-उधर आ जा रही थी अपनी पायल छठ छठ कटे हुए तुम युवा थी और तुमने उसका ध्यान बता दिया इसलिए उसने खराब दीवार बनाई
यह एक गरीब कर पर गिर गई है और उसे मार डाला तुमने एक दिन दोस्त व्यक्ति को मार डाला है तुम्हें दंड मिलेगा
उसने 1 मिनट तक सोच और कहां स्वामी रुक अब मैं जान गई हूं कि मैं गली में आज क्यों रही थी मैंने सुंदर को अपने लिए आभूषण बनाने के लिए कुछ सोना दिया था वह आलसी बेईमान आदमी था उसने इतने सारे बहाने बनाए कहां में इसे अब दूंगा मैं इसे अब दूंगा विज्ञान विज्ञान सारे दिन उसकी वजह से ही वह उसके घर एक दर्जन बाहर आती जाती रही और तभी इस राज मिस्त्री ने मुझे देखा इसमें मेरा दोस्त नहीं है स्वामी यह इस घटिया सुधार का दोष है
बेचारी वह बिल्कुल ठीक कह रही है राजा ने सोचा साक्षी को तोड़ते हुए अतः हमें वास्तविक दोषी मिल गया है पड़कर लो उसे सुंदर को जहां कहीं भी वह छुपा है तुरंत
राजा के कार्य उद्योग ने उसे सुनार की तलाश की जो अपनी दुकान के कोने में छुपा था जब उसने अपने विरुद्ध आप सुन तो उसने अपनी खुद की कहानी सुना दी
स्वामी उसने कहा मैं गरीब सुंदर हो यह सच है कि इस नाटकी को कई बार अपने द्वार पर बुलाया था मैंने उससे इसलिए बहाने बनाए थे क्योंकि धनी व्यापारी ऑडर खत्म करने से पहले उसके आभूषण पूरे नहीं बन सकता था उनके यहां शादी आ रही थी और वह प्रतीक्षा नहीं कर सकते थे आप जानते ही है की धनी व्यक्ति कितने अधिक होते हैं
कौन है यह धनी व्यापारी जिसने तुम्हें इस निर्धन स्त्री के आभूषण उधर चलाया जिसने राजमिस्त्री का ध्यान भटका दिया जिसने अपनी दीवार को गड़बड़ कर गिर गई है और उसे मार डाला क्या तुम उसका नाम बता सकते हो
सुना नहीं उसने परी का नाम बताया और वह और कोई नहीं वरन् मूल स्वामी था उसे मकान का जिसकी दीवार गिरी थी अब न्याय हूं फिर कर्म ही आ गया है राजा ने सोचा वापस व्यापारी पर जब उसे कठोरता से वापस दरबार में बुलाया गया तो वह रोता हुआ आया मैं नहीं था बल्कि मेरे पिताजी थे जिन्होंने आभूषण बनाने को दिया था वह मर चुके हैं वह मैं निर्दोष हो
लेकिन राजा ने मंत्री से वापस किया और निर्णय दिया यह सच है कि तुम्हारे पिताजी ही असली हत्यारे हैं वह मर चुके हैं लेकिन उनके स्थान पर किसी को तो दंडित किया जाना चाहिए तुमने अपने अपराधी पिता से सब कुछ प्रत्येक करता में पाया है उनकी संपत्ति और साथ ही उनके पाप भी में तो तुरंत जान गया था तब ही जब मैं तुम्हें पहली बार देखा था कि तुम ही इस भयानक अपराध के मूल में हो तुम्हें मरना पड़ेगा
और उसने राजा ने फांसी के लिए एक नई सूली तैयार करने का आदेश दिया जब नौकरों ने सली को तेज किया और अपराधी की अंतिम सजा के लिए तैयार किया तो मंत्री को लगा की धनी व्यापारी ठीक से सूली पर फांसी देने के लिए कुछ अधिक ही पतला है उसने राजा का ध्यान इस और दिलाया राजा भी इस विषय में चिंतित हुआ
हम क्या करें वह बोला जब अचानक उसके दिमाग में आया कि जो कुछ उन्हें करना है वह इतना मोटा आदमी तलाशना है जिस पर फंदा ठीक आए नौकरों को तुरंत सारे शहर में भेजा गया ऐसे आदमी की तलाश में जिसे फंदा सही आ सके और उसकी दृष्टि शिष्य पर पड़ी जो महीना तक अकेले और चावल और गेहूं और घी खाकर मोटा हो गया था
मैंने क्या गलत किया है मैं निर्दोष हूं मैं एक संन्यासी हूं वह चिल्लाया यह सच सच हो सकता है लेकिन यह राजश्री निर्णय है कि हम इतने मोटे ताजे आदमी को तलाश से जिसे फंदा ठीक बैठे हुए बोले और उसे फांसी दिए जाने के स्थान पर ले गए उसे अपने बुद्धिमान गुरुजी के शब्द याद आए यह मूर्खों का शहर है तुम्हें नहीं पता कि वे इसके बाद क्या करेंगे जब वह मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहा था तो उसने मन में अपने गुरु जी की प्रार्थना की कहते हुए कि वह जहां भी हो उसका रोना सुन ले गुरुजी ने सब कुछ स्वप्न में देखा उनमें जादुई ताकत थी वह दूर तक देख सकते थे और वह भविष्य देख सकते थे वैसे ही जैसे में वर्तमान और भूत देख सकते थे वह तुरंत शिष्य को बचाने के लिए प्रकट हो गए जिसे खुद को खाने के प्रेम के चक्कर में ऐसी मुसीबत में डाल दिया था
Read Full Blog...

सम्रा औरंगजेब दे राज दिवस में पुंगी नमक वाद्य यंत्र बजाना प्रतिबंधित कर दिया क्योंकि इसकी आवाज अच्छी वह वृक्ष थी पुगी दरकत से बने शोर मचाने वाले सभी का सामान्य नाम पड़ गया शायद ही किसी ने सोचा होगा किया है एक दिन उधर जीवित हो जाएगी पेशेवर संगीतकारों के एक दी जिसकी राजमहल तक पहुंच थ्री डे पुंगी लंबा वह छोड़ा था और पाइप के शरीर में साथ छेड़ कर दिए जब उसने इसमें से कुछ शब्दों को बंद करके तथा खोलकर इस...
Read More
सम्रा औरंगजेब दे राज दिवस में पुंगी नमक वाद्य यंत्र बजाना प्रतिबंधित कर दिया क्योंकि इसकी आवाज अच्छी वह वृक्ष थी पुगी दरकत से बने शोर मचाने वाले सभी का सामान्य नाम पड़ गया शायद ही किसी ने सोचा होगा किया है एक दिन उधर जीवित हो जाएगी पेशेवर संगीतकारों के एक दी जिसकी राजमहल तक पहुंच थ्री डे पुंगी लंबा वह छोड़ा था और पाइप के शरीर में साथ छेड़ कर दिए जब उसने इसमें से कुछ शब्दों को बंद करके तथा खोलकर इसे बजाय तो कुबल में मधुर धनिया उत्पन्न हुई उसने राज परिवार के सदस्य के सामने वाद्य यंत्र को बजाय और इसे हर कोई प्रभावित हुआ पुंगी से एकदम भेद इस बगेंद्र को एक नया नाम दे रहा था जैसे की कथा कहीं जाती है क्योंकि यह पहली बार सब के कक्षा में बजाई गई थी तथा एक नई के द्वारा बजाई गई थी इस बगेंद्र को शहनाई नाम दिया गया
शहनाई की आवाज को शुभ माना जाना लगा तथा इसी कारण से इसे आज भी मंदिरों में बचाया जाता है और यह किसी भी उत्तर भारतीय विभाग का अनिवार्य अंग है अतीत में शहनाई डोबेट या राज दरबारों में पाए जाने वाले दो परंपरागत बगेंद्र समूह का अंग थी हाल ही तक इसका प्रयोग केवल मंदिरों में विवाहों में होता था इस वाद्य यंत्र को शास्त्रीय बचपन पर लाने का से उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को जाता है
5 वर्ष की अवस्था में बिहार में डूब राव के प्राचीन इलाके में तालाब के पास बिस्मिल्लाह खान दिल्ली दादा खेलने करते थे वह नियमित रूप से निकट के ब्याह है जी के मंदिर में भोजपुरी चेता गाने जाया करते थे जिनकी समाप्ति पर उन्हें एक पॉइंट 25 किलोग्राम का बड़ा लड्डू मिलता था जो उन्हें स्थानीय महाराज द्वारा पुरस्कार में दिया जाता था यह 80 वर्ष पुरानी बात है और यह छोटा बालक भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न प्राप्त करने के लिए दूर-दूर की यात्रा कर चुका है
21 मार्च 1916 को जन्मे बिस्मिल्लाह खान बिहार के एक संगीत्रों के सुविचार परिवार में आते है उनके दादा रसूल बख्श खान भोजपुरी के राजा के दरबार के शहनाई वाज थी उनके पिता पैगंबर बख्श तथा पिता के पक्ष के दूसरे पूर्वाझा भी वहां शहनाई वादक थे
छोटे बालक ने प्रारंभिक जीवन में ही संगीत में रुचि लेना प्रारंभ कर दिया था 3 वर्ष के अवस्था में जब उनकी माताजी उन्हें उनके बाबा जी के घर पर बनारस अब वाराणसी ले गई तो बिस्मिल्लाह खान अपने बाबो को शहनाई का आरंभ करते देखकर मुग्ध हो गए शीघ्र ही बिस्मिल्लाह दे अपने मामा अली बक्स के साथ बनारस के विष्णु मंदिर जाना प्रारंभ कर दिया जहां वक्त शहनाई वादन के लिए नियुक्त थे अली बक्स शहनाई बजाय करते थे और बिस्मिल्लाह करो तक लगातार मुक्त बैठे रहते थे धीरे-धीरे उन्होंने वाद्य यंत्र बजाने में पाठ देना प्रारंभ कर दिया और वह पूरे दिन बैठे आरंभ किया करते थे आने वाले वर्षों में बालाजी और मंगल मैया के मंदिर और गंगा के किनारे युवा प्रशिक्षण के प्रिया स्थान बन गए जहां वह एकांत में अभ्यास कर सकता था गंगा के बहते जल ने उन्हें नए रगों में एकांक परिवर्तन करने तथा नवीन राघव की रचना करने की ने पहले शहनाई की सीमा से परे माना जाता था की प्रेरणा दी
14 वर्ष की अवस्था में बिस्मिल्लाह अपने पिता के साथ इलाहाबाद संगीत सम्मेलन में गए उनकी संगीत प्रस्तुति के अंत में उस्ताद फायदा खान ने युवा लड़के की पीठ थपथपाई और कहां मेहनत करो और तुम आवश्यक कर पाओगे लखनऊ में 1938 में ऑल इंडिया रेडियो के प्रारंभ के साथ ही बिस्मिल्लाह को बड़ा स अक्षर प्राप्त हुआ वह शीघ्र ही रेडियो पर बहुत सुने जाने वाले शहनाई वादक बन गए
जब भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त हुई तो बिस्मिल्लाह खान राष्ट्र को अपनी शहनाई से राष्ट्र का अभिवादन करने वाले प्रथम भारतीय बने इन्होंने लाल किले श्रोतागण के सम्मुख जिम पंडित जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे राग काफी में अपनी आत्मा उदल दी जिन्होंने नेहरू ने बाद में अपना प्रसिद्ध भाषण ट्रस्ट विद डिसीजन दिया
धन्यवाद-
Read Full Blog...

प्रस्तावना "स्वस्थ नागरिक ही देश की वास्तविक विरासत है" प्रत्येक राष्ट्रीय की उन्नति वहां के नागरिकों पर निर्भर करती है जिस देश के नागरिक स्वस्थ होंगे वह देश भी उन्नत सील होगा जनता का स्वास्थ्य वहां के प्रशासन पर निर्भर करता है सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने देश के नागरिकों को स्वच्छ जल पौष्टिक भोजन उचित शिक्षा में साफ सुथरा घर हेतु पर्याप्त सुविधा दे जिससे देश के नागरि...
Read More
प्रस्तावना
"स्वस्थ नागरिक ही देश की वास्तविक विरासत है"
प्रत्येक राष्ट्रीय की उन्नति वहां के नागरिकों पर निर्भर करती है जिस देश के नागरिक स्वस्थ होंगे वह देश भी उन्नत सील होगा जनता का स्वास्थ्य वहां के प्रशासन पर निर्भर करता है सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने देश के नागरिकों को स्वच्छ जल पौष्टिक भोजन उचित शिक्षा में साफ सुथरा घर हेतु पर्याप्त सुविधा दे जिससे देश के नागरिक स्वस्थ
स्वतंत्रता प्राप्ति के पक्ष भारत सरकार ने इस और विशेष प्रयास किए हैं विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से सरकार ने जन स्वास्थ्य के स्तर को ऊंचा उठाने की विशेष प्रयास किए हैं
जन स्वास्थ्य का अर्थ-
सामान्य रूप से स्वास्थ्य को एक व्यक्तिगत गुण माना जाता है तथा अलग-अलग व्यक्तियों के स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया जाता है परंतु स्वास्थ्य विज्ञान के अंतर्गत यह कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य हिंदी व्यक्तियों के स्वास्थ्य से भी प्रभावित होता है यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य के नियमों का पालन करता है तो उसका स्वास्थ्य अच्छा होता है यदि किसी क्षेत्र में अधिकांश व्यक्ति का स्वास्थ्य चलना है तथा विभिन्न लोगों के शिकार रहते हो तो उसके भी स्वास्थ्य के सांसद नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति भी अधिक समय तक स्वस्थ नहीं रह पाता वास्तव में व्यक्तिगत स्वास्थ्य का घनिष्ठ समझ जन स्वास्थ्य से भी है जन स्वास्थ्य का अर्थ किसी क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों का सामूहिक स्वास्थ्य है किसी क्षेत्र के अधिकांश व्यक्तियों के स्वस्थ होने से जन स्वास्थ्य का स्तर उन्नत होता है समाज के अधिकांश व्यक्तियों द्वारा स्वास्थ्य के नियमों का पालन करने से क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है अतः प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ जन स्वास्थ्य के प्रति भी संचित रहे इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को जल स्वास्थ्य के नियमों का पालन करना चाहिए जन स्वास्थ्य के मुख्य
व्यक्ति को खने तथा सीखने नेता आसानी बरतनी चाहिए
व्यक्ति को इधर-उधर ठोकना नहीं चाहिए
मल मूत्र त्यागने के लिए शौचालय का प्रयोग करना चाहिए
जहां था कूड़ा करकट नहीं फेंकना चाहिए
कभी भी सकारात्मक रोग के फैलने की आशंका होते ही स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना चाहिए
जन स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य
जन स्वास्थ्य शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्य है
समाज के प्रत्येक व्यक्ति तथा राष्ट्र का स्वास्थ्य उत्तम हो सके तथा राष्ट्र प्रगति के शिखर पर बढ़ सके
जनता को स्वास्थ्य संबंधित सभी वैज्ञानिक ज्ञान के लाभों की जानकारी देना
स्वास्थ्य सुरक्षा संपत्ति जानकारी देना
सांसद देसी विदेशी स्वास्थ्य संगठनों के द्वारा समय-समय पर चलाए गए अभियानों तथा कार्यक्रमों की जानकारी देना
धन्यवाद-
Read Full Blog...

सार्वजनिक स्वच्छता सामान्य रूप से घर की संपूर्ण सफाई को ही प्राथमिकता दी जाती है परंतु जन स्वास्थ्य तथा सफाई के विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए घर की आंतरिक सफाई के साथ ही साथ घर के आसपास की सफाई अर्थात सार्वजनिक सफाई की भी समुचित व्यवस्था करनी अनिवार्य वास्तव में सफाई के विभिन्न लबों को प्राप्त करने के लिए घर पर्यावरण दोनों की संस्थान अनिवार्य है घर की आंतरिक सफाई वाले ही पूर्ण र...
Read More
सार्वजनिक स्वच्छता
सामान्य रूप से घर की संपूर्ण सफाई को ही प्राथमिकता दी जाती है परंतु जन स्वास्थ्य तथा सफाई के विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए घर की आंतरिक सफाई के साथ ही साथ घर के आसपास की सफाई अर्थात सार्वजनिक सफाई की भी समुचित व्यवस्था करनी अनिवार्य वास्तव में सफाई के विभिन्न लबों को प्राप्त करने के लिए घर पर्यावरण दोनों की संस्थान अनिवार्य है घर की आंतरिक सफाई वाले ही पूर्ण रूप से सर्वोत्तम श्रेणी की क्यों ना हो यदि घर के आसपास गंदगी का सामाजिक से हो तो घर में रहने वाले व्यक्ति सफाई के लाभों से कार्य वर्जित भी रह सकते हैं यदि घर के आसपास गंदगी हो तो वहां विभिन्न लोगों के रोगाणु बनाते हैं दुर्गंध उत्पन्न होती है मक्खी मच्छर एवं अन्य आसपास की गंदगी की हर किसी के लिए अशोक के लिए भी होती है जिसे देखकर काफी बुरा महसूस होता है तथा घर की सफाई से उत्पन्न होने वाली प्रशंसा कार्य समाप्त हो जाती है इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक रेडियो सभी नागरिकों को सुझाव दिया जाता है कि घर की सफाई के साथ-साथ घर के आसपास की सफाई का भी समुचित ध्यान रखें घर के आसपास अर्थात् अपने पर्यावरण को संपूर्ण स्वच्छता के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित उपायों को अनिवार्य रूप से बनाएं
खुले में सोच का पूर्ण बहिष्कार-
पारंपरिक रूप से बहुत से लोग खुले विशेष क्रिया करते रहे हैं अब इसे पूर्ण रूप से अनुचित तथा अशोक भी नहीं मान लिया गया है खुले में सोच से पर्यावरण प्रदूषण होता है तथा गंदगी फैलती है जो की जन स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है खुले में सोच को पूरी तरह समाप्त करने के लिए हमारी सरकार कृत संकल्प है स्वच्छ भारत स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत घरों में शौचालय बनाने के लिए अनुदान की भी व्यवस्था है तथा इसके लिए जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार भी किया जा रहा है
घर के आसपास के कूड़े करकट की समुचित व्यवस्था-
किसी भी प्रकार की सफाई के लिए संबंधित कूड़े करकट को सही ढंग से ठिकाना लगाना थी आवश्यक है हम अपने घर के अंदर की सफाई के लिए हर प्रकार के कूड़े करकट को ठिकाना लगाने के लिए हर संभव उपाय करते हैं इस सत्य को ध्यान में रखते हुए घर के आसपास के कूड़े करकट को फीस माफ करने के दास संभव उपाय किए जाने चाहिए इसके लिए सर्व प्रमुख उपाय यह है कि घर के आसपास कूड़ा करकट एकत्रित न होली भाई घर से निकलने वाले घोड़े को किसी भी दशा में घर के बाहर या आसपास ना फेलने दे इसके बावजूद यदि घर के आसपास किसी भी प्रकार का घोड़ा करके देखरत होने लगे तो उसे वहां से हटाने अथवा नष्ट करने का उचित उपाय किया जाना चाहिए कूड़े में यदि खास पत्ते तथा कागज आदि हो तो उन्हें जलाकर समाप्त कर दे अथवा उसमें खाद बनाने की प्रक्रिया को अपने ध्यान रखें रबर प्लास्टिक तथा पॉलिथीन आदि के अवशेषों को कदापि न जलाए इसके जलने से पर्यावरण में दूषित है हानिकारक गैसों से व्यापक होने का खतरा रहता है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि घर के आस-पास की सफाई का दायित्व प्रत्येक निवासी का है केवल अपने घर के सामने के मुख्य द्वार की सफाई का ही ध्यान रखना पर्याप्त नहीं है संपूर्ण पर्यावरण की सफाई अभीष्ट है
आसपास के खरपतवार को समाप्त करना-
घर के आसपास की सफाई के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण उपाय है घर के आसपास के खरपतवार को समाप्त करना सामान्य रूप से आवश्यक क्षेत्र में कुछ खाली स्थान खाली प्लाट या गली का कोण है होते हैं इन खाली स्थान में तरह-तरह के खरपतवार उगने लगते हैं एक खरपतवारों के कारण वातावरण में गंदगी की व्यापक होने लगती है वह तरह-तरह के कीट पतंगे पड़ने लगते हैं खुदाई मृत होने लगता है तथा आवारा पशु भी वह गंदगी फैलाने लगते हैं कुछ खरपतवार टोचन स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले होते हैं जिनकी गांडिया पराग करो से एलर्जी जनित रोग उत्पन्न होने की आशंका रहती है अनेक क्षेत्रों में होने वाली अमेरिकी का इसका एक स्पष्ट उदाहरण है इन संस्कृत तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिया जाता है कि घर के आसपास आवश्यक खरपतवार न पान अपने दे यदि खरपतवार को प्रारंभ में ही नष्ट कर दिया जाए तो समस्या बढ़ती ही नहीं
गंदे पानी की समुचित व्यवस्था-
घर के आसपास की सफाई व्यवस्था के अंतर्गत गंदे पानी की समुचित व्यवस्था करना भी आवश्यक होता है सार्वजनिक डोलियों की व्यवस्था के अभाव में घरों से निकलने वाला गंदा पानी तथा बरसात का पानी भी वातावरण में गंदगी का कारण बन जाता है यदि इस प्रकार की स्थिति हो तो इस विषय में समुचित उपाय करना अति आवश्यक होता है इसका सर्वोत्तम उपाय है डालियन की समुचित व्यवस्था करना यदि नालियों की व्यवस्था करने में कोई कठिनाई हो तो प्रत्येक घर के बाहर ढके हुए शॉकिंग पित्त बनाए जाने चाहिए इसके अतिरिक्त यदि घर के आसपास कई गड्ढे हो या गहरे स्थान हो जहां पानी एकत्रित हो जाता है वहां मिट्टी डालकर उन्हें तक देना चाहिए ताकि वहां पानी एकत्रित न होने पाए यदि इस प्रकार के गधों को थकना कठिन हो तो उन में दर्द होने वाले पानी पर समय-समय पर मिट्टी के तेल अथवा मच्छर मार तेल का छिड़काव करना आवश्यक होता है इसमें मच्छरों की उत्पत्ति को नियंत्रित किया जा सकता है
सार्वजनिक नालियों की सफाई व्यवस्था-
अवश्य वातावरण को स्वच्छ और स्वस्थ कर बनाए रखने के लिए क्षेत्र की सार्वजनिक नालियों की व्यवस्था होनी चाहिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की नालियों में गंदा पानी न रोकना पाए इसके लिए नालियों की ढाल ठीक होनी चाहिए तथा उनकी नियमित सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए नालियों में कूड़ा कर कर नहीं डालना चाहिए डोलियों में पानी के बहन को अवरुद्ध करने में पॉलिथीन का सर्वाधिक योगदान रहता है अतः पॉलिथीन को जहां तहां न फेक सार्वजनिक नालियों के आसपास चुनाव या कोई रोगाणु नाशक खोल का छिड़काव भी करते रहना चाहिए
मृत पशुओं को हटाने की व्यवस्था-
अवश्य वातावरण की स्वच्छता के लिए आवश्यक है कि यदि पशु मर जाए तो उसके मृत शरीर को वहां से सरक हटाने की व्यवस्था की जाए अन्यथा क्षेत्र में तीव्र दुर्गंध तथा विभिन्न रोगाणु व्यापक होने लगते हैं पशुओं के मृत शरीर को हटाने के लिए स्थानीय संस्थाओं अथवा निर्धारित ठेकेदार को सूचित करना चाहिए
संपूर्ण पर्यावरण की स्वच्छता सार्वजनिक स्वच्छता के लिए चंद जागरूकता अनिवार्य है इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने दायित्व निभाना चाहिए वर्तमान समय में हमारी सरकार इस दिशा में अत्यधिक प्रयत्नशील है तथा स्वच्छ भारत मिशन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है आशा है की सीख रही हमारा देश पूर्ण रूप से स्वच्छ भारत बन जाएगा तथा गंदगी का पूर्ण अनुलन हो जाएगा
धन्यवाद-
Read Full Blog...

विटामिनों की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव- विटामिनों को स्वास्थ्य विज्ञान की भाषा में सुरक्षात्मक तत्व कहा जाता है यह व्यक्ति को स्वस्थ रहने में विशेष रूप में सहायक होते हैं तथा उनकी कमी करने वाले रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न विटामिनों की कमी से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पढ़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का विवरण निम्नलिखित है विटामिन ए -&nbs...
Read More
विटामिनों की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव- विटामिनों को स्वास्थ्य विज्ञान की भाषा में सुरक्षात्मक तत्व कहा जाता है यह व्यक्ति को स्वस्थ रहने में विशेष रूप में सहायक होते हैं तथा उनकी कमी करने वाले रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न विटामिनों की कमी से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पढ़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का विवरण निम्नलिखित है
विटामिन ए - विटामिन ए की कमी से आंखों और त्वचा संबंधित विभिन्न रोग हो जाते हैं विटामिन ए की कमी से होने वाले मुख्य आंखों संबंधित रोग है रतौंधी कांच कटी वाइडएस्ट जीरो तथा कीटो मलेशिया उसके तीर्थ विटामिन ए की कमी के कारण फॉलिकुलर हाइपोक्रेटोसिस नामक त्वचा संबंधित रोग भी हो जाते हैं
विटामिन बी कंपलेक्स- विटामिन बी समूह के विटामिनों की कमी के कारण रूप से बेरी बेरी तथा प्लेन का नामक रोग हो जाता है इन रोगों के अतिरिक्त विटामिन बी की कमी से व्यक्ति के सामान्य स्वास्थ्य पर भी अनेक प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं
विटामिन सी - विटामिन सी की कमी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति नामक रोग का शिकार हो जाता है
विटामिन डी - विटामिन डी की कमी के कारण व्यक्ति की अस्थियां कमजोर हो जाती है तथा वह अस्थि विकृत या रिकेट्स नामक रोग का शिकार हो जाता है इसके अतिरिक्त इस विटामिन की कमी से व्यक्ति का सामान्य स्वास्थ्य भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित होता है
विटामिन ई - विटामिन ई की कमी के कारण स्त्री पुरुषों में प्रजनन क्षमता घट जाती है तथा वह ब्येपन के शिकार हो जाते हैं
विटामिन के - विटामिन के की कमी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति के रक्त में थक्के जमने की क्षमता का हर्ष हो जाता है इस स्थिति में चोट लग जाने पर रक्त का बहाना मुश्किल से रुकता है
धन्यवाद
Read Full Blog...

परिचय प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है जिस प्रकार इंजन को चलाने के लिए तेल कोयला तथा ईंधन की जरूरत होती है उसी प्रकार मानव शरीर को सक्रिय रखने के लिए भोजन की अति आवश्यकता होती है प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे सभी आवश्यक पोषक तत्व उपस्थित हो भोजन में आवश्यक तत्वों की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रह सके अर्थात ऐसा...
Read More
परिचय
प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है जिस प्रकार इंजन को चलाने के लिए तेल कोयला तथा ईंधन की जरूरत होती है उसी प्रकार मानव शरीर को सक्रिय रखने के लिए भोजन की अति आवश्यकता होती है प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे सभी आवश्यक पोषक तत्व उपस्थित हो भोजन में आवश्यक तत्वों की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रह सके अर्थात ऐसा भोजन जिसमें सभी तत्व उपस्थित हो उसे संतुलित भोजन आहार कहते हैं
संतुलित आहार का अर्थ एवं परिभाषा
संतुलित आहार की अर्थ क्रिया को नीचे दी गई परिभाषाओं द्वारा स्पष्ट रूप से संबंध जा सकता है विभिन्न पदार्थों के बना वह भोजन जो हमारे शरीर को सभी पौष्टिक तत्व हमारे आवश्यकताओं के अनुसार उचित मात्रा में प्रदान करता है संतुलित आहार कहलाता है
C. Gopalan के अनुसार संतुलित आहार वह ऊर्जा है जो विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ को ऐसी मात्रा एवं अनुपात में लेने से आती है जिसमें क्लोरीन खनिज विटामिन आवश्यक पोषक तत्वों की तथा शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके और पोषण की कुछ अतिरिक्त मात्रा भी बच जाए
आहार और स्वास्थ्य का संबंध -
आहार द्वारा संपन्न होने वाले कार्यों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट कहा जा सकता है की आहार और स्वास्थ्य में पारस्परिक घनिष्ठ संबंध है व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक आवश्यक कारक है समुचित एवं संतुलित आहार ग्रहण करना स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को ऊर्जावान एवं रोग मुक्त होना अनिवार्य है ऊर्जा की प्राप्ति संतुलित आहार से होती है नियमित रूप से संतुलित आहार ग्रहण करने से व्यक्ति को आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती रहती है आहार में विद्वान कार्बोहाइड्रेट वसा तथा प्रोटीन व्यक्ति को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं स्वास्थ्य में संबंधित दूसरा महत्वपूर्ण कारक है व्यक्ति का रोग मुक्त रहना इस कारक के संबंध में दो बातें महत्वपूर्ण है प्रथम यह है कि रोगों से बचाव के लिए व्यक्ति के शरीर में एक विशिष्ट क्षमता होती है जिसे रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं इस क्षमता के बल पर ही व्यक्ति का शरीर विभिन्न रोगों को उत्पन्न करने वाले कारकों का मुकाबला करता है तथा उन कारकों को परसत करके निरंतर स्वस्थ बना रहता है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि व्यक्ति के शरीर में रोग रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में सर्वाधिक योगदान संतुलित अप पोस्टिक आहार का ही होता है आहार में विद्वान प्रोटीन विटामिन तथा खनिज लवण व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सामान्य बनाए रखने तथा विकसित करने में भरपूर योगदान प्रदान करते हैं आहार द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के तथ्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि आईएस स्वास्थ्य में घनिष्ठ संबंध है
स्वास्थ्य एवं आहार के पारस्परिक संबंध को स्पष्ट करने वाला दूसरा तृतीय है अभाव जनित रोगों का नियंत्रण स्वस्थ रहने के लिए रोग मुक्त रहना अति आवश्यक है रोगों की उत्पत्ति संबंधी कारकों का विश्लेषण करने से स्पष्ट होता है कि कुछ रोग सकारात्मक तथा रोगाणुओं द्वारा उत्पन्न होने वाले हैं परंतु अनेक रोग ऐसे भी है जो शरीर के पोषक तत्वों की कमी या अभाव के कारण होते हैं इन रोगों को अभाव जनित रोग कहते हैं जैसे कि विटामिन सी की कमी से डिस्कवरी तथा आयोडीन की कमी से घेंघा नामक रोग हो जाता है तथा तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा गया है कि संतुलित आहार ग्रहण करते रहने से व्यक्ति को अभाव जनित रोग नहीं होते इसके साथ-साथ यह भी सत्य है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई अभाव जनित रोग हो जाता है तो उसे स्थिति में व्यक्ति के उपचार के लिए उसके आहार में संबंधित पोषक तत्व की मात्रा बढ़ा दी जाती है इससे व्यक्ति अभाव जनित रोग से मुक्त हो जाता है इस स्थिति में व्यक्ति को किसी औषधि की आवश्यकता कार्य नहीं होती इस तथ्य के आधार पर ही कहा जाता है की आहार तथा स्वास्थ्य का घनिष्ठ संबंध है
Read Full Blog...

अर्थव्यवस्था का अर्थ :- वास्तव में गृह व्यवस्था में कार्य व्यवस्था के अतिरिक्त अर्थव्यवस्था भी शामिल होती है यहां पर अर्थव्यवस्था से तात्पर्य ग्रह की अर्थ अथवा धन संबंधी व्यवस्था है अर्थात ग्रह के आए हुए को व्यवस्थित करना ही ग्रह की अर्थव्यवस्था है ग्रहणी को परिवार की आए और वे में संतुलन स्थापित करके परिवार की अधिकार अधिक आवश्यकताओं को संतुष्ट करना होता है निखिल तथा डारसी के...
Read More
अर्थव्यवस्था का अर्थ :-
वास्तव में गृह व्यवस्था में कार्य व्यवस्था के अतिरिक्त अर्थव्यवस्था भी शामिल होती है यहां पर अर्थव्यवस्था से तात्पर्य ग्रह की अर्थ अथवा धन संबंधी व्यवस्था है अर्थात ग्रह के आए हुए को व्यवस्थित करना ही ग्रह की अर्थव्यवस्था है ग्रहणी को परिवार की आए और वे में संतुलन स्थापित करके परिवार की अधिकार अधिक आवश्यकताओं को संतुष्ट करना होता है निखिल तथा डारसी के अनुसार परिवार की आय तथा वह पर नियंत्रण होना तथा आए को ग्रह के संजना आत्मक कार्यों में व्यय करना गृह अर्थव्यवस्था कहलाती है
अर्थव्यवस्था का महत्व:-
परिवार का जीवन स्तर सुख समृद्धि परिवार की अर्थव्यवस्था पर निर्भर होता है गृहणी का यह उत्तरदायित्व होता है कि वह परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकता को बुद्धिमत्ता पूर्ण तरीके से पूरी कर उसे संतुष्टि प्रदान करें साथ ही हमारी जितनी आए हो उसी में आवश्यकता है पूरी होनी चाहिए अर्थव्यवस्था का महत्व निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है
परिवार में आए का स्रोत मुख्यतः मुख्य होता है अतः उसकी भूमिका बहुत उपयोगी होती है
अर्थव्यवस्था एक प्रक्रिया है जिसमें आई का नियोजन नियंत्रण तथा मूल्यांकन होता है परिवार के अर्थव्यवस्था चलाने के लिए कुशलता बुद्धिमता की आवश्यकता होती है
यह को एक योजना बनाकर किया जाए तथा समय-समय पर आए को आवश्यकताओं के अनुसार बढ़ाना चाहिए
अर्थव्यवस्था की विधियां :-
निखिल तथा डारसी के अनुसार अर्थव्यवस्था की पांच विधियां है इन पांच वीडियो के द्वारा ही प्रत्येक परिवार अपने लिए की योजना बनाता है यह विद्या निम्नलिखित है-
परिवार वित्त विधि - परिवार की आय के अनुसार बजट बनाया जाता है इसका संचालन परिवार का मुखिया करता है
भता विधि - इसमें मुखिया अपनी आय का आवश्यक भाग घर के सदस्यों में व्यक्तिगत या सामूहिक रूप में व्यय करता है और शेष धन अपने पास रखता है जो भविष्य की योजनाओं के लिए होता है
समान वेतन विधि - इसमें घर के कई सदस्य अपनी आवश्यकता अनुसार धन खर्च करते हैं और शेष धन अपने-अपने नियंत्रण में रखते हैं यह उन परिवारों में लागू होता है जहां पर घर के कई सदस्य धन कमाते हैं
आदर्श विधि - इस विधि में परिवार की आय को दो भागों में व्यक्त किया जाता है एक भाग में घर का खर्च होता है तथा दूसरे भाग का धन बैंक में जमा कर दिया जाता है जहां पर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं वहां पर इसी प्रकार का भी होता है
आशिक विधि- इस विधि में घर के सभी सदस्य की आय का धन परिवार के मुखिया के पास जमा होता है एवं उसी का इस पर नियंत्रण होता है शेष बचा धन भी मुखिया के नाम से ही संचित होता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग किया जाता है यह विधि संयुक्त प्रणाली वाले परिवारों में अधिक अपनाई जाती है
अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले कारक
परिवार के सदस्यों की संख्या - अधिक सदस्य संख्या वाले परिवार में अधिक हुए होता है तथा कम सदस्य वाले संख्या में परिवार में काम हुए होता है फल स्वरुप दोनों प्रकार के परिवारों के रहन-सहन का स्तर अलग-अलग होता है अतः अर्थव्यवस्था को परिवार की सदस्य संख्या प्रभावित करती है
मुखिया की स्थिति- जिस परिवार के मुखिया की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है वहां पर अर्थव्यवस्था भी अच्छी होती है मुखिया की आई अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है
परिवार वे का नियोजन- वे की योजना बना लेने से वह करने में आसानी रहती है और आवश्यक भी एक नहीं होने पता ऐसा होने से अर्थव्यवस्था उत्तम रहती है
सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तनों का प्रभाव- वैज्ञानिक युग होने के कारण सामाजिक तथा आर्थिक परिवर्तन होते हैं इसका प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ता है अधिक फैशन वाली वस्तुओं उपकरणों आदि को खरीदने से अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है अतः आए देखकर ही व्यय करना चाहिए
जीवन स्तर - गृह अर्थव्यवस्था हमारे रहन-सहन के स्तर से भी प्रभावित होती है वर्तमान आधुनिक युग में सभी लोग रहन-सहन के स्तर को ऊंचा उठने के लिए प्रयत्नशील दिखाई देते हैं वैसे तो ठीक है क्योंकि रहन-सहन का स्टार परिवार की प्रतिष्ठा को दर्शाता है लेकिन जहां तक हो रहन-सहन के स्तर को अपनी पारिवारिक आय के अनुकूलन रखना चाहिए इस मध्य पर आए से अधिक खर्च करने पर अर्थव्यवस्था का को प्रभाव पड़ेगा
गृह अर्थव्यवस्था में ग्रहणी की भूमिका-
सामान्य रूप से गृह अर्थव्यवस्था को कार्य रूप देने का दायित्व गृहणी का होता है इस स्थिति में गृहणी का दायित्व होता है कि वह परिवार की संपूर्ण व्यवस्था का निर्धन परिवार की आय को ध्यान में रखकर ही करें
अच्छी गृहणी का एक गुण माना जाता है मिट्टी व्ययता पूर्वक खर्च करना इस गुण से संपन्न ग्रहणीय परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति उनकी प्राथमिकता के आधार पर करती है
कुशल ग्रहणीय घर के लिए आवश्यक वस्तुओं को खरीदते समय भी विशेष सूझबूझ से कम लेती है उचित स्थान से कम से कम मूल्य देकर अधिक सेवा देने वाली वस्तु खरीदना ही समझदारी कहलाती है ऐसा करके कुशल ग्रहणीय कुछ धन की बचत कर लेती है तथा इस प्रकार से की गई बचत परिवार की आर्थिक व्यवस्था को उत्तम बनाने में सहायक सिद्ध होती है
उपयुक्त कार्यों के अतिरिक्त कुशल एवं योग्य ग्रहणीय परिवार के अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष रूप से भी योगदान दे सकती है आजकल पढ़ी-लिखी अथवा किसी व्यवसाय का प्रशिक्षण प्राप्त महिला नौकरी करके अथवा किसी व्यवसाय में संकलन होकर धनोपाजर्न कर सकती है तथा परिवार की अर्थव्यवस्था को उत्तम बन सकती है इसके अतिरिक्त कुशल ग्रहणियां घर पर रहकर भी किसी हस्तशिल्प अथवा घरेलू व्यवसाय के माध्यम से धनोपाजर्न कर सकती है यही नहीं कुशल महिलाएं अपने ही बच्चों को पढ़कर उनके ट्यूशन पर होने वाले वे को बचा सकती है
उपयुक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि ग्रहणी की कुशलता अनिवार्य रूप से परिवार के आर्थिक व्यवस्था पर अनुकूलन तथा अच्छा प्रभाव डालती है कुशल ग्रहण या परिवार की अर्थव्यवस्था को अच्छा बनाने में प्रत्येक तथा प्रत्येक दोनों ही रूपों में योगदान दे सकती है
धन्यवाद-
Read Full Blog...

आज हम सभी गुरु रविदास जयंती के शुभ अवसर पर एकत्रित हुए हैं यह दिन महान संत गुरु रविदास जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है गुरु रविदास जी 15वीं शताब्दी के एक महान संत समाज सुधारक और कवि थे उन्होंने समाज में पहले जातिवाद छुआछूत और अन्य का विरोध किया और सामान्य प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया गुरु रविदास जी का जीवन परिचय गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था वह बचपन...
Read More
आज हम सभी गुरु रविदास जयंती के शुभ अवसर पर एकत्रित हुए हैं यह दिन महान संत गुरु रविदास जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है गुरु रविदास जी 15वीं शताब्दी के एक महान संत समाज सुधारक और कवि थे उन्होंने समाज में पहले जातिवाद छुआछूत और अन्य का विरोध किया और सामान्य प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया
गुरु रविदास जी का जीवन परिचय
गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था वह बचपन से ही भक्ति और आध्यात्मिकता भेरुजी रखते थे उन्होंने समाज को यह सिखाया की कोई भी व्यक्ति अपने जन्म से महान नहीं होता बल्कि उसके कर्म उसे महान बनाते हैं
गुरु रविदास जी की शिक्षाएं
सभी इंसान समान है- इन्होंने समाज में सभी को एक सम्मान मानने की बात कही
ईश्वर की भक्ति सर्वोपरि है -इन्होंने कहा कि सच्चे मन से की गई भक्ति सबसे बड़ी पूजा है
परिश्रम और सच्चाई -इन्होंने मेहनत और ईमानदारी से जीवन जीने पर जोर दिया
बेगमपुर की कल्पना -इन्होंने एक ऐसा समाज की कल्पना की जहां कोई दुख गरीबी और भेदभाव न हो
गुरु रविदास जयंती का महत्व
इस दिन भक्तगण भजन कीर्तन शोभायात्रा और लंगर सेवा का आयोजन करते हैं उनकी शिक्षाएं आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है
निष्कर्ष
गुरु रविदास जी के विचार हमें सामान्य प्रेम और भाईचारा की सीख देते हैं यदि हम उनके दिखाएं मार्ग पर चले तो समझ में सद्भाव बना रहेगा
जय गुरु रविदास जी
धन्यवाद
Read Full Blog...

"हर नागरिक का हुई ये सपना, स्वच्छ हो संपूर्ण भारत अपना " प्रस्तावना :- स्वच्छता का हम सभी के जीवन में विशेष महत्व है स्वछता हमारे घर अथवा गली मोहल्ले के लिए तो जरूरी होती ही है साथ ही संपूर्ण देश हेतु भी आवश्यक होती है यदि हमारे घर आंगन की तरह पूरा देश भी स्वच्छ रहे तो भारत स्वर्ग समान बन जाएगा इसी को मध्य नजर रखते हुए भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत अभियान आरं...
Read More
"हर नागरिक का हुई ये सपना,
स्वच्छ हो संपूर्ण भारत अपना "
प्रस्तावना :- स्वच्छता का हम सभी के जीवन में विशेष महत्व है स्वछता हमारे घर अथवा गली मोहल्ले के लिए तो जरूरी होती ही है साथ ही संपूर्ण देश हेतु भी आवश्यक होती है यदि हमारे घर आंगन की तरह पूरा देश भी स्वच्छ रहे तो भारत स्वर्ग समान बन जाएगा इसी को मध्य नजर रखते हुए भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत अभियान आरंभ किया गया है यह एक राष्ट्रीय स्तर का ध्यान है
स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत:- इस अभियान की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर 2014 को हुई स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है माननीय प्रधानमंत्री बहुते द्वारा प्रत्येक देशवासी से स्वच्छ भारत अभियान पर भाग लेने और इसे सफल बनाने की अपील की गई है इस प्रकार से साफ सफाई के संदर्भ में देश के सबसे बड़े अभियान को जन आंदोलन बनाकर इसकी शुरुआत की गई है यह अभियान हमारे देश के प्रत्येक गांव और शहर में आरंभ किया गया है
अभियान का उद्देश्य:- इस अभियान का उद्देश्य देश के प्रत्येक गली मोहल्ले गांव से लेकर प्रत्येक शहर पक्की सड़कों से लेकर शौचालय का निर्माण करना साफ सफाई कूड़े का उचित निस्तारण और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करना है लोगों की मानसिकता को बदलकर उन्हें उचित स्वच्छता रखने के पर्दे जागरूक करना घरों तक पाइपलाइन के द्वारा स्वच्छ पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित करना आती इस अभियान के उद्देश्य है
आखिर इस अभियान की जरूरत क्यों? यह अभियान सभी भारतवासियों के लिए बेहद जरूरी है इसके तहत भारत के हर घर में शौचालय होने से लोगों पर खुले में सोच के पर्ववर्ती खत्म हो रही है जिससे खुले पैसों से होने वाले ऑडियो से भी बचा जा रहा है और स्वच्छता भी बनी रहेगी कचरे का फुट चक्कर और दोबारा इस्तेमाल सुरक्षित दस्तरण वैज्ञानिक तरीके से बोल प्रबंध का खुदा भी स्वच्छता और हरियाली हेतु अति आवश्यक है गद्य की जानलेवा है यह कई प्रकार की बीमारियों का कारण बनती है आता लोगों पर खुद के स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक और साफ सफाई की प्रक्रियाओं का पालन करना होने के लिए हितकर होगा
"स्वच्छता ही सेवा है,
गद्य की जानलेवा है "
स्वच्छ भारत अभियान का क्रियान्वयन :- इस अभियान के कितने देश से निर्धारित किए गए थे उन सभी का जीवनी स्तर पर क्रियान्वयन होता हुआ साफ दिखाई दे रहा है सरकारी आंकड़ों की बात करें तो इस अभियान के तहत अब तक लगभग 10,19,64, 757 घरों में शौचालय का निर्माण किया जा चुका है 63,55 दिखाओ ऊपर डेफिनेशन फ्री हो चुके हैं 706 जिले इसकी श्रेणी में आ चुके हैं 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में लेकर,
इस मुहिम को सफल बना रहे हैं इस अभियान का प्रतीक चिन्ह गांधीजी का चश्मा है इसे भारत सरकार मंत्रालय के जल शक्ति मंत्रालय के अधीन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को सोपा गया है
प्रधानमंत्री जी की अपील को पूरे देश में सहमति प्रदान की ओर यह अभियान राष्ट्रीय व्यापी आंदोलन बन कर कोबरा बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटिस्ट डे इन अभियान में सहयोग किया सफाई आंदोलन के तहत सभी जीएफ के साथ सड़कों पर उतरे
उप संहार - राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश को दासता से मुक्त कराया परंतु स्वच्छ भारत का उनका सपना पूरा नहीं हुआ किंतु अब उनका यह सपना प्रधानमंत्री जी की अगुवाई में हम सब मिलकर पूरा करेंगे एक सच्चा नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम ना तो गंदगी फैलाएंगे और ना ही फैलाने देंगे देश को अपने घर की तरह जब गाय के ताकि हम सभी तरह से कह सके कि हम सभी भारत देश में निवास करते हैं
"बापू के सपने को करना है साकार,
स्वच्छता से भारत को देना है आकर"
Read Full Blog...

"सम्मान की अधिकारी है हिंदी हमें जान से प्यारी है हिंदी " विश्व हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना करना हिंदी के प्रति अनुराग पैदा करना हिंदी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिंदी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है विदेश में भारत के दूतावास इस दिन को...
Read More
"सम्मान की अधिकारी है हिंदी
हमें जान से प्यारी है हिंदी "
विश्व हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना करना हिंदी के प्रति अनुराग पैदा करना हिंदी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिंदी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है
विदेश में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप में मनाते हैं सभी सरकारी कार्यालय में विभिन्न विषयों पर हिंदी में व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं विश्व में मिट्टी का विकास करने और इसे प्रचारित प्रसारित करने के उद्देश्य में विश्व हिंदी सम्मेलनों की शुरुआत की गई और प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया था
1975 से भारत मॉरीशस यूनाइटेड किंगडम 3D दांत और टॉकबैक को संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विभिन्न देश में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजित किया गया है विश्व हिंदी दिवस पहली बार 10 जनवरी 2006 को बनाया गया था तब से यह हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रतिवर्ष विश्व हिंदी दिवस के रूप में बनाए जाने की घोषणा की थी
उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय देवी देश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिंदी दिवस मनाया था
हिंदी दिवस अभी यह एहसास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि हिंदी भाषा पूरी दुनिया में सबसे पुरानी और सबसे प्राचीन और प्रभावशाली भाषाओं में से एक है और ऐसे में हमें अपनी मातृभाषा यानी हिंदी भाषा में बोलने में करो महसूस करना चाहिए
हिंदी एक राष्ट्रीय के रूप में भारत को एक साथ रखती है और भारत की अखंडता और एकता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है तो लिए हम एक साथ कहे कि हमें हिंदी भाषा होने पर गर्व है
"हिंदी हमारी शान है,
हिंदुस्तानियों का मान है "
धन्यवाद:-
Read Full Blog...