वज्रासन करने का सही तरीका क्या है ?और इसके क्या फायदे हैं? वज्रासन( Vajrasana) इसे धनात्मक आसान भी कहते हैं। इस आसन को करने हेतु सर्वप्रथम दोनों टांगों को आगे की ओर फैला कर बैठिए । उसके बाद बाएं व पैर पर शरीर का भार रखते हुए दाहिनी टांग के घुटने को मोड कर दाएं हाथ की मदद से नितम के नीचे रखें। इसके पश्चात दाएं हाथ व मुड़े हुए घुटने पर शरीर के भार कै रखते हुए बाएं हाथ की मदद से बाएं पैर को बाय नितिन के नीचे रखिए इस अवस्था में घुटने, टाखने, और पैरों की उंगलियां फर्श से स्पर्श होनी चाहिए । अब अपने हाथों की हथेलियां अपने घुटनों पर रखिए । ऊपर का शरीर सीधा रहना चाहिए। इस समय श्व़ास गहरी,सम व धीमी होनी चाहिए। लाभ( Benefits) यह एकाग्रता हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पेट दर्द व छाती से संबंधित विकारों से बचाव पर सहायक है। यह स्मरन शक्ति को बढ़ाता है। यह राजोधर्म से संबंधित समस्याओं के बचाव में सहायक है। इस आसन के नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव कम होता है। यह श्रोणी संबंधित मांसपेशियों की शक्ति में वृद्धि करता है। यह आसान संबंधी विकृति ( Postural deformities) को दूर करने में मदद करता है यह हर्निया से बचाव करता है और बवासीर में आराम देता है। यह आसान उन लोगों हेतु उचित ध्यानासन है जोकटिस्नायुशूल ( Sciatical) तथा त्रिक् संक्रमक रोगों से पीड़ित है। यह नितंबों की वसा को कम करने में सहायता करता है। यह आसान पाचन तंत्र को मजबूत करता है। यह आसान मोटापा नहीं अने में मदद करता है।
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