Blog by Vanshika | Digital Diary
" To Present local Business identity in front of global market"
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( क्योंकि हमारे देश का राष्ट्रीय खेल है इस खेल की ओलंपिक प्रतियोगिताओं में भारत पर विजय होता आया है अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त होगी खिलाड़ी कुंवर दिग्विजय सिंह बाबू ने हेलन की फिनलैंड में हुए हॉकी मैच का सम्राट आत्मक परिचय दिया है) बहुत से लोगों का ऐसा विचार है कि खेलकूद से समय नष्ट होता है और स्वास्थ्य के लिए व्यायाम कर लिया जाए यही काफी है पर यह ठीक नहीं है खेल कोशिश स्वास्थ्य तो बनता ही है...
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बहुत से लोगों का ऐसा विचार है कि खेलकूद से समय नष्ट होता है और स्वास्थ्य के लिए व्यायाम कर लिया जाए यही काफी है पर यह ठीक नहीं है खेल कोशिश स्वास्थ्य तो बनता ही है साथ-साथ मनुष्य कुछ ऐसे गुण विशेषता है जिनका जीवन में विशेष महत्व होता है और जो व्यायाम से नहीं प्राप्त हो सकते जैसे घमंड ना करना हारने में सांस ना छोड़ना दूसरे से चोट लग जाए तो उसे सहन कर लेना विशेष दिए के लिए नियम पूर्वक कार्य करना लोग सफलता न पाने पर साहस छोड़ बैठे हैं और दोबारा प्रयास नहीं करते परंतु खिलाड़ी ऐसा नहीं करता हर के बाद भी वह प्रयास करता है की हरी बड़ी जीत लेता है
दंड संकल्प द्वारा अपने देश की सेवा का मेरा स्वप्न उन दिन पूरा हुआ जिस दिन में हेलसिंग की फिनलैंड के मैदान में अपनी हॉकी टीम को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक में जीता सका उसे दिन के जन गण मन का मधुर वादन आज कई वर्षों के पश्चात भी मेरे कानों में गूंज रहा है
यूं तो खेल मेरे सारे कुटुंब को प्रिया है परंतु यह कहना है कि मेरे पिता स्वर्गीय राय बहादुर रघुनाथ सिंह खेल में विशेष रूचि रखते थे मेरे पास बहुत सी तस्वीरों के साथ एक तस्वीर दी साल की उम्र की है जिसमें में होगी और बोल लिए बैठा हूं
मेरे खेल का प्रारंभ बाराबंकी में हुआ मेरे बड़ों का कहना है की कमाई का काफी पैसा मेरे घर के मोटर खाने का फाटक बनाने में खर्च हुआ क्योंकि वह हर महीने मेरी होगी की गेंद से टूटा था कुछ ऐसी ही कहानी लखनऊ के कार्य कुछ कॉलेज में छात्रावास की दीवारें भी कहती है मुझे यह आज तक ठीक से याद है कि जब मैं बाराबंकी से लखनऊ पढ़ने आया तो मेरे सामान में सबसे अधिक हॉकी स्टिक की महत्ता थी अपने कॉलेज की टीम में खेलने का मुझे इस साल सौभाग्य प्राप्त हुआ
सन 1936 में में दिल्ली के एक टूर्नामेंट में खेलने गया जिसमें देश किए सुप्रसिद्ध खिलाड़ी मोह हुसैन फुल बैंक खेल रहे थे उसे दिन खेल पर मुझे एक सुंदर उपहार मिला मेरा साहस और प्रयास बढ़ता गया मेरी सदैव इच्छा होती रही कि किस प्रकार खेलों की जिससे इस खेल के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच जाओ सन 1936 से 40 में मुझको अपने प्रदेश की ओर से खेलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ
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बच्चों आपके विद्यालय में 2 अक्टूबर को दो महान विभूतियों का जन्मदिन मनाया जाता है एक मोहनदास करमचंद गांधी और दूसरे जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 ई को मुगल सारी तत्कालीन वाराणसी वर्तमान चंदौली के साधारण परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम शारदा प्रसाद तथा माता का नाम रामदुलारी देवी था मात्र डेढ़ वर्ष की अवस्था में पिता का देहांत हो ज...
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बच्चों आपके विद्यालय में 2 अक्टूबर को दो महान विभूतियों का जन्मदिन मनाया जाता है एक मोहनदास करमचंद गांधी और दूसरे जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 ई को मुगल सारी तत्कालीन वाराणसी वर्तमान चंदौली के साधारण परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम शारदा प्रसाद तथा माता का नाम रामदुलारी देवी था मात्र डेढ़ वर्ष की अवस्था में पिता का देहांत हो जाने के कारण अनेक अभाव और कठिनाइयों को झेलते हुए में जीवन पद पर आगे बढ़े में स्वतंत्र भारत के पहले रेल मंत्री बने उनके बाद उद्योग मंत्री तथा सौराष्ट्र मंत्री भी बने जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद यह सर्व संपत्ति से भारत के दूसरे प्रधानमंत्री भी बने देशवासियों के स्वाभिमान को जगाने वाले महान लोकप्रिय नेता लाल बहादुर शास्त्री का निधन 10 जनवरी 1966 को ताशकंद मैं हुआ था
शास्त्री जी उन दिनों रेल मंत्री थे एक बार उन्हें बनारस के पास सेव पुरी जाना पड़ा छोटे कद का होने के कारण शास्त्री जी को गाड़ी से प्लेटफार्म पर उतरने में काफी दिक्कत हुई यह देखकर वहां खड़ी कुछ औरतें हंस कर कहने लगे कि अब महसूस हो रहा होगा कि महिलाओं को प्लेटफार्म पर उतरते समय कितनी कठिनाई का सामना करना पड़ता है प्लेटफार्म पर पहुंचते ही शास्त्री जी ने स्टेशन मास्टर को बुलाया और उनसे कहा कि क्या वह एक फावड़े का इंतजाम कर सकते हैं फावड़े तुरंत लाया गया शास्त्री जी ने फावड़ा लेकर उसे नीचे प्लेटफार्म के दूसरी ओर जमीन खोदने शुरू कर दी और मिट्टी प्लेटफार्म पर डालने लगे यह देखकर वहां जो लोग खड़े थे में भी फावड़ा और उसी तरह की चीज ले आए और शास्त्री जी का अनुकरण करने लगे सभी को जब सुखद आश्चर्य हुआ जब 3 घंटे के अंदर वह नीचे प्लेटफार्म मानक स्तर तक ऊंचा बना
यह प्रसंग भी उसे समय का है जब शास्त्री जी रेल मंत्री थे और सरकारी काम से इलाहाबाद प्रयागराज जा रहे थे शास्त्री जी की कार्यालय फटाक से थोड़ी ही दूर थी कि लाइनमैन ने फाटक बंद कर दिया शास्त्री जी के स्टाफ का एक सदस्य लाइनमैन की ओर दौड़कर गया और उससे कहा कि कर में रेल मंत्री बैठे हैं तुम तुरंत फाटक खोल दो लाइनमैन ने फाटक खोलने से साफ मना कर दिया और बोला कि मैं नहीं जानता कि कौन रेल मंत्री है और कौन प्रधानमंत्री में अपनी ड्यूटी कर कर रहा हूं जब आने वाली गाड़ी गुजर जाएगी फाटक खोल दूंगा स्टाफ के अवसर ने लौटकर कहा श्रीमान वह आदमी बड़ा जिद्दी है उसके विरुद्ध सक्त कार्रवाई की जानी चाहिए दूसरे दिन जब लाइनमैन की तरक्की कर उसे आगे का ग्रेड दिया गया तो सभी लोग अजब्दे में पड़ गए
यह प्रश्न उन दिनों का है जब शास्त्री जी प्रधानमंत्री थे एक बार उनका ड्राइवर सुबह निश्चित समय पर नहीं आया उन्होंने कुछ समय प्रतीक्षा की फिर हाथ में फाइल लेकर पैदल ही दफ्तर की ओर चल दिए उनका दफ्तर घर से करीब 1 किलोमीटर दूर था इस बात से सचिवालय में हड़कंप मच गया ड्राइवर से जवाब तलब किया गया जवाब में उसने कहा कि एकांक उसका छोटा बच्चा गंभीर रूप से बीमार हो गया था और उसे भाकर डॉक्टर के पास जाना पड़ा शिकायती फाइल जब शास्त्री जी के पास पहुंची तो उन्होंने उसे पर टिप्पणी लिखी की उसके लिए उसके बेटे के जीवन का महत्व और किसी भी कार्य से अधिक महत्वपूर्ण
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( प्रस्तुत निबंध में लेखक ने युवकों को स्वयं पर निर्भर रहने की प्रेरणा दी) विद्वानों का यह कथन बहुत ठीक है कि नम्रता ही स्वतंत्रता की दरिया माता है इस बात को सब लोग मानते हैं कि आत्म संस्कार के लिए थोड़ी बहुत मानसिक स्वतंत्रता परम आवश्यक है चाहे उसे स्वतंत्रता में अभियान और नर्मदा दोनों का मेल हो और चाहे वह निर्माता ही से उत्पन्न हो यह बात तो निश्चित है कि जो बहुत ज्यादा पूर्वक जीवन व्यतीत करना चा...
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विद्वानों का यह कथन बहुत ठीक है कि नम्रता ही स्वतंत्रता की दरिया माता है इस बात को सब लोग मानते हैं कि आत्म संस्कार के लिए थोड़ी बहुत मानसिक स्वतंत्रता परम आवश्यक है चाहे उसे स्वतंत्रता में अभियान और नर्मदा दोनों का मेल हो और चाहे वह निर्माता ही से उत्पन्न हो यह बात तो निश्चित है कि जो बहुत ज्यादा पूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहता है उसके लिए वह गुण अनिवार्य है जिससे आत्मनिर्भरता आती है और जिसे अपने पैरों के बल खड़ा होना आता है युवा को यह सदा स्मरण रखना चाहिए कि उसकी आकांक्षाएं उसकी योग्यता से कई बड़ी हुई है उसे इस बात ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने बड़ों का सम्मान करें चोटों और बराबर वालों से कोमलता का व्यवहार करेंगे बातें आत्म मर्यादा के लिए आवश्यक है यह सारा संसार जो कुछ हम है और जो कुछ हमारा है हमारा शरीर हमारी आत्मा हमारे कर्म हमारे भोग हमारे घर की ओर बाहर की दशा हमारे बहुत से अवगुण और थोड़े से गुण सब इसी बात की आवश्यकता प्रकट करते हैं कि हमें अपनी आत्मा को नाम रखना चाहिए नर्मदा से मेरा अभिप्राय दब्बूपन से नहीं है जिसके कारण मनुष्य दूसरों का मुंह ताकता है जिससे उसका संकल्प सेन और उसकी प्रज्ञा बंद हो जाती है जिसके कारण आगे बढ़ने के समय भी वह पीछे रहता है अवसर पढ़ने पर चटपट किसी बात का निर्णायक नहीं कर सकता मनुष्य का बेड़ा अपने ही हाथ में है उसे वह चाहे जितना लगे सच्ची आत्मा वही है जो प्रत्येक दशा में प्रत्येक स्थिति के अपनी रहा आप निकलती है
अब तुम्हें क्या करना चाहिए इसका ठीक-ठाक उत्तर तू ही को देना होगा दूसरा कोई नहीं दे सकता कैसा भी विश्वास पात्र मित्र हो तुम्हारे इस काम को वह अपने ऊपर नहीं ले सकता हम अनुभवी लोगों की बातों को आधार के साथ सुन बुद्धिमानों की सलाह को मृत ज्ञात पूर्वक माने पर इस बात को निश्चित समझ कर कि हमारे कामों से ही हमारी रक्षा में हमारा पतन होगा हमें अपने विचारों और निर्णय की स्वतंत्रता को दानदाता पूर्वक बनाए रखना चाहिए जिस पुरुष की दृष्टि सदा नीचे रहती है उसका सर कभी ऊपर नहीं होगा नीचे दृष्टि रखने से यद्यपि रास्ते पर रहेंगे पर इस बात को न देखेंगे कि यह रास्ता कहां ले जाता है चित्र की स्वतंत्रता को मतलब चेष्टा की कठोरता या प्रकृति की उग्रता नहीं है अपने व्यवहारों में कोमल रहो और अपने देश को उच्च रखो इस प्रकार नम और उच्च से दोनों बानो अपने मन को कभी मरा हुआ ना रखो जितना ही जो मनुष्य अपना लक्ष्य ऊपर रखता है उतना ही उसका
संसार में ऐसे ऐसे दंड चित्र मनुष्य हो गए हैं जिन्हें मरते दम तक सत्य की टेक नहीं छोड़ी अपनी आत्मा के विरुद्ध कोई काम नहीं किया राजा हरिश्चंद्र के ऊपर इतनी इतनी विपत्तियां आई पर उन्होंने अपना सत्य नहीं छोड़ा उसकी प्रतिज्ञा यही रही
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(प्रस्तुत पाठ में एक दिव्यांग लड़की के आदमी साहस एवं विलक्षण प्रतिभा का वर्णन करते हुए स्पष्ट किया गया है कि व्यक्ति ड्रेंड इच्छा शक्ति से विपरीत परिस्थितियों में भी अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकता है) कभी-कभी अचानक ही विधाता हमें ऐसे विलक्षण व्यक्ति से मिला देता है जिसे देख स्वयं अपने जीवन की जीत देता बहुत छोटी लगने लगती है हमें तब लगता है कि भले ही उसे अंतर्यामी में हमें जीवन के कभी अक्षम रात का कार...
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कभी-कभी अचानक ही विधाता हमें ऐसे विलक्षण व्यक्ति से मिला देता है जिसे देख स्वयं अपने जीवन की जीत देता बहुत छोटी लगने लगती है हमें तब लगता है कि भले ही उसे अंतर्यामी में हमें जीवन के कभी अक्षम रात का कारण ही दंडित कर दिया हो किंतु हमारे किसी अंग को हमसे विषण कर हमें उससे वंचित तो नहीं किया फिर भी हमने से कौन ऐसा मानव है जो अपनी विपत्ति के कठिन श्रेणी में विधाता को दोषी नहीं ठहरता मैं अभी पिछले ही महीने एक ऐसी अभी शब्द काय अच्छी है जिसे विधाता ने कठोरता दंड दिया है किंतु उसे वह लत मस्तक आनंदी मुंद्रा में झेल रही है विधाता को कोसकर नहीं
उसकी कोठी का अहाता एकदम हमारे बंगले के आटे से जुड़ा था अपनी शानदार कोठी में उसे पहली बार कर से उतरते देखा तो आश्चर्य से देखते ही रही गई कर का द्वार खुला एक प्रोडक्ट ने उतरकर पिछली सीट से एक वहीं से निकलकर सामने रख दिया और भीतर चली गई दूसरे ही कर धीरे-धीरे बिना किसी सहारे के कर से एक युवती ने अपनी निर्जीव निकले धड़ की बड़ी क्षमता से नीचे उतर फिर बैसाखियों से ही वहीं चेयर तक पहुंच उसमें बैठ गई और बड़ी तट स्थित से उसे स्वयं चलते कोटि के भीतर चली गई में फिर चित्र नियत समय पर उसका यह विचलित अब आगमन देखी और आश्चर्य चकित रह जाती ठीक जैसे कोई मशीन बटन खटखटाती अपना काम किया चली जा रही हो
धीरे-धीरे मेरा उसे परिचय हुआ कहानी सुनी तो दंग रह गई नियति के प्रत्येक कठोर आघात को अति सामान्य धैर्य एवं साहस से झेलती वह बीते भर की लकड़ी मुझे किसी देवनागना से काम नहीं लगी में चाहती हूं कि मेरी पंक्तियों को उदास आंखों वाला वह गोरा उजाले वेस्टन से सज्जित लखनऊ का मेधावी युवक भी पड़े जिसे मैंने कुछ महापुरुष अपनी बहन के यहां देखा था वह इस की परीक्षा देने इलाहाबाद प्रयागराज गया लौटते समय किसी स्टेशन पर चाय लेने उतरा की गाड़ी चल पड़ी चलती ट्रेन में हाथ के कुल्हड़ सहित चढ़ने के प्रयास में गिरा और पहिए के नीचे हाथ पर गया प्राण तो बच गए पर बाया हाथ चला गया वह विच्छेद बुझा के साथ-साथ मानसिक संतुलन भी खो बैठा पहले दुख बुलाने के लिए नशे की गोलियां खाने लगा और अब नूर मंजिल की शरण गई है केवल एक हाथ खोकर ही उसने हथियार डाल दिए इधर चंद्र जिसका निकला दर्द है निस्तारण मानसिक पेड़ मात्रा सदा उटफुल है चेहरे पर विषाद की एक रेखा भी नहीं बुद्धि आंखों में आदमी उत्साह प्रतिफल प्रतिशत भर पर उत्कट जीजी विशाल और फिर कैसी-कैसी महत्वाकांक्षाएं
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(इस पाठ में लेखक ने समय या अनुसार मनुष्य के खानपान में आया आधुनिक तथा मिश्रित शैली के परिवर्तनों को बताया है) पिछले 10 -15 वर्षों में हमारे खानपान की संस्कृति में एक बड़ा बदलाव आया है इटली -डोसा, बड़ा-सांभर,रसम और केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है यह उत्तर भारत के भी हर शहर में उपलब्ध है और अब तो उत्तर भारत की ढाबा संस्कृति लगभग पूरे देश में फैल चुकी है अब आप कहीं भी हो उत्तर भारतीय रोटी दाल सांग...
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पिछले 10 -15 वर्षों में हमारे खानपान की संस्कृति में एक बड़ा बदलाव आया है इटली -डोसा, बड़ा-सांभर,रसम और केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है यह उत्तर भारत के भी हर शहर में उपलब्ध है और अब तो उत्तर भारत की ढाबा संस्कृति लगभग पूरे देश में फैल चुकी है अब आप कहीं भी हो उत्तर भारतीय रोटी दाल सांग आपको मिल ही जाएगी फास्ट फूड (शीघ्रता से तैयार किया जा सकने वाला खाद्य पदार्थ) का चलन भी बड़े शहरों में खूब बड़ा
इस फास्ट फूड में बर्गर नूडल्स जैसी कई चीजे शामिल है एक जमाने में कुछ ही लोगों तक सीमित चाइनीस नूडल्स अब सॉन्ग भगत किसी के लिए अजनबी नहीं रही इस तरह नमकीन के कई स्थानीय प्रकार अभी तक भले मौजूद हो लेकिन आलू चिप्स के कहीं विद्यापीठ रूप तेजी से घर-घर में अपनी जगह बनते जा रहे हैं
गुजराती ढोकला -गठिया भी अब देश के कई हिस्सों में स्वाद लेकर खा जाते हैं और बंगाली मिठाई की केवल रास्पबेरी चर्चा ही नहीं होती में कई शहरों में पहले की तुलना में अधिक उपलब्ध है यानी स्थाई व्यंजनों के साथ ही अब अन्य प्रदेशों के व्यंजन पकवान भी परी हर क्षेत्र में मिलते हैं और मध्यम वर्गीय जीवन में भोजन विविधता अपनी जगह बना चुकी है
कुछ चीजों और भी हुई है मसाला अंग्रेजी राज तक जो ब्रेड केवल साहिबी ठिकानों तक सीमित थी वह पशुओं तक पहुंच चुकी है और नाश्ते के रूप में लाखों करोड़ों भारतीय घरों में से की ताली जा रही है खानपान की इस बदली हुई संस्कृति से सबसे अधिक प्रभावित नहीं पीढ़ी हुई है जो पहले के स्थानीय व्यंजनों के बारे में बहुत कम जानती है पर कहीं नहीं व्यंजनों के बारे में बहुत कुछ जानती है स्थानीय व्यंजन भी तो अब घटकर कुछ ही चीजों तक सीमित रहे गए हैं मुंबई की पाव भाजी और दिल्ली के बोले कुलचे की दुनिया पहले की तुलना में बड़ी जरूर है पर अन्य स्थानीय व्यंजनों की दुनिया छोटी हुई है जानकारी यह भी बताते हैं कि मथुरा के पेड़ों और आगरा के बेटे नमकीन में अब वह बात कहां रही
यानी जो चीज बची भी हुई है उनकी गुणवत्ता में फर्क फिर मौसम और ऋतु के अनुसार फलों याद नो से जो व्यंजनों और पकवान बना करते हैं उन्हें बनाने की फुर्सत भी अब कितने लोगों को रह गई है अब ग्रहणियों या कामकाजी महिलाओं के लिए खरबूजे के बीज सुखना छीलना और फिर उनसे व्यंजन तैयार करना सचमुच दुख साध्य है
यानी हम पाते हैं कि एक और तो स्थानीय व्यंजनों में कमी आई है दूसरी ओर में ही देसी विदेशी व्यंजन अपनाई जा रही है जिन्हें बनाने पकाने में सुविधा हो जटिल प्रक्रियाओं वाली चीज तो कभी कब्र व्यंजन पुस्तिकाओं के आधार पर तैयार की जाती है अब शहरी जीवन में जो भाग्यम भाग है उसे देखते हुए यह स्थिति स्वभाव भाविक लगती है फिर कमर तोड़ महंगाई ने भी लोगों को कहीं चीजों से धीरे-धीरे वंचित किया है जिन व्यंजनों में बिना मेरे के स्वाद नहीं आता उन्हें बनाने पकाने के बारे में भला कौन चार बार नहीं सोचेगा
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(प्रस्तुत व्यंग्य में लेखक ने पुरानी बस को सजीव रूप में दिखाते हुए बस यात्रा को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है) हम पांच मित्रों ने तय किया कि शाम 4:00 की बस से चले पन्ना से अब इसी कंपनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है जो जबलपुर की ट्रेन मिला देती है सुबह घर पहुंच जाएंगे हमें से दो को सुबह काम पर हाजिर होना था इसलिए वापसी का यही रास्ता अपनाना जरूरी था लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस्लाम वाल...
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हम पांच मित्रों ने तय किया कि शाम 4:00 की बस से चले पन्ना से अब इसी कंपनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है जो जबलपुर की ट्रेन मिला देती है सुबह घर पहुंच जाएंगे हमें से दो को सुबह काम पर हाजिर होना था इसलिए वापसी का यही रास्ता अपनाना जरूरी था लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस्लाम वाली बस से सफल नहीं करते क्या रास्ते में डाकू मिलते हैं नहीं बस डाकिन है
बस को देखा तो श्रद्धा उम्र पड़ी खूब विपरीत थी सर्दियों के अनुभव के निशान लिए हुए थे लोग इसलिए इसे सफल नहीं करना चाहते कि वृद्धावस्था में इसे कष्ट होगा यह बस पूजा के योग्य थी उसे पर सवार कैसे हुआ जा सकता है
बस कंपनी के एक हिस्सेदारी भी उसे बस में जा रहे थे हमने उनसे पूछा यह बस चलती भी है वह बोले चलती क्यों नहीं है जी अभी चलेगी हमने कहा वहीं तो हम देखना चाहते हैं अपने आप चलती है यह हां जी और कैसे चलेगी
गजब हो गया ऐसी बस अपने आप चलती है हम आगे पीछे करने लगे डॉक्टर मित्र ने कहा डरो मत चलो बस हेलो भाभी है नई नवेली बेसन से ज्यादा विश्व में है हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी हम बैठ गए जो छोड़ने आए थे में इस तरह देख रहे थे जैसे अंतिम विदा दे रहे हैं उनकी आंखों का रही थी आना-जाना तो लगा ही रहता है पाया है सो जाएगा राजा रंग फकीर आदमी को कुछ करने के लिए एक नियमित चाहिए
इंजन सचमुच स्टार्ट हो गया ऐसा जैसे सॉरी बस ही इंजन है और हम इंजन के भीतर बैठे हैं कांच बहुत कम बच्चे थे जो बच्चे थे उनसे हमें बचाना था हम फॉरेन खिड़की से दूर सड़क गए इंजन चल रहा था हमें लग रहा था कि हमारी सीट के नीचे इंजन है
बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गांधी जी के सहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन के वक्त आवश्यक जवान रही होगी उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी हर हिस्सा दूसरे से सहयोग कर रहा था पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के तौर से गुजर रही थी सीट पर बॉडी से सहयोग चल रहा था कभी लगता सेट बॉडी को छोड़कर आगे निकल गई है कभी लगता की सीट को छोड़कर बॉडी आगे आगे जा रही है 8 10 मिल चलने पर सारे भेदभाव मिट गए यह समझ में नहीं आता था की सीट पर हम बैठे हैं या सेट हम पर बैठी है
एक आंख बस रुक गई मालूम हुआ कि पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया ड्राइवर ने बाल्टी में पेट्रोल निकाल कर उसे बगल में रखा और नली डालकर इंजन में भेजने लगा अब मैं उम्मीद कर रहा था कि थोड़ी देर बाद बस कंपनी के हिस्सेदार इंजन को निकाल कर गोद में रख लेंगे और उसे नाली से पेट्रोल पिलाएंगे जैसे मां बच्चों के मुंह में दूध की सीसी लगती है
बस की रफ्तार अब 15:20 मिल हो गई थी मुझे उसके किसी हिस्से पर भरोसा नहीं था ब्रेक फेल हो सकता है स्टेरिंग टूट सकता है प्रकृति के दृश्य बहुत लोग भावना थे दोनों तरफ हरे-भरे पेड़ थे जिन पर पक्षी बैठे थे मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था जो भी पेड़ आता डर लगता कि इससे बस टकराएगी वह निकल जाता तो दूसरे पेड़ का इंतजार करता झील दिखती तो सोचता कि इसमें बस कोटा लगा
एकांक फिर बस रुक ड्राइवर ने तरह-तरह की तरकीपर की पर वह चली नहीं सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हो गया था कंपनी के हिस्सेदार कह रहे थे बस तो फर्स्ट क्लास है जी यह तो इत्तेफाक की बात है
सेन चांदनी में वृक्षों की छाया के नीचे वह बस बड़ी दैनिक लग रही थी लगता जैसे कोई वृद्ध थककर बैठ गई हो हमें गलानी हो रही थी कि बेचारी पर लटकर हम चले आ रहे थे अगर इसका प्रनाथ हो गया तो इस ब्यावन में हमें इसकी अत्याशिष्ट करनी पड़ेगी
रिश्तेदार सब ने इंजन खोला और कुछ सुधार बस आगे चली उसकी चाल और काम हो गई धीरे-धीरे बस की आंखों की ज्योति जाने लगी चांदनी में रास्ता काटोल कर वह देख रही थी आगे आप पीछे से कोई गाड़ी आते दिखती तो वह एक कदम किनारे खड़ी हो जाती और कहती निकल जाओ बेटी अपनी तो वह उम्र ही नहीं रही
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(प्रस्तुत पाठ वृंदावन के प्रसिद्ध उपन्यास झांसी की रानी से लिया गया है इसमें अंग्रेजों के साथ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के अंतिम युद्ध का वर्णन है) 'मंदिर बाई' रघुनाथ सिंह ने कहा रानी साहब का साथ एक शरण के लिए भी ना छुटने भाभी आज अंतिम युद्ध लड़ने जा रही है मंदिर– 'आप कहां रहेंगे?' रघुनाथ सिंह- 'जहां उनकी आज्ञा होगी वैसे आप लोगों के समीप ही रहने का प्रयत्...
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'मंदिर बाई' रघुनाथ सिंह ने कहा रानी साहब का साथ एक शरण के लिए भी ना छुटने भाभी आज अंतिम युद्ध लड़ने जा रही है
मंदिर– 'आप कहां रहेंगे?'
रघुनाथ सिंह- 'जहां उनकी आज्ञा होगी वैसे आप लोगों के समीप ही रहने का प्रयत्न करूंगा'
मंदिर -में जाती हूं आप बिल्कुल निकट ही रहे मुझे लगता है, मैं आज मारी जाऊंगी आपके निकट होने से शांति मिलेगी'
रघुनाथ सिंह-' मैं भी नहीं बेचूंगा रानी साहब को किसी प्रकार सुरक्षित रहना है मैं तुम्हें तुरंत ही स्वर्ग में मिलेगा केवल आगे पीछे की बात है वह सुखी हंसी हसा '
सुंदर ने रघुनाथ सिंह की ओर आंसू भरी आंखों से देखा कुछ खाने के लिए हॉट हिले रघुनाथ की आंखें भी दूध ली हुई
दूर से दुश्मन के बिल्कुल के शब्द की चाई कान में पड़ी मुंडन ने रघुनाथ सिंह को मस्तक नया कर प्रणाम किया और उसके वोट में जल्दी-जल्दी आंसू पहुंच डाले रघुनाथ ने मूंदड़ा को नमस्कार किया और दोनों सरपट लिए हुए पानी के पास पहुंचे
मुंडन ने जूही को पिलाया रघुनाथ ने रानी को अंग्रेजों के भूल का साफ शब्द सुनाई दिया तो का धड़का हुआ गोला सन्नाकर ऊपर से निकल गया रानी दूसरा कटोरा नहीं पी सकी
रानी ने रामचंद्र देशमुख को आदेश दिया दामोदर को आज तुम पीठ पर बंद हो यदि मैं मरी जाऊं तो इसको किसी तरह दक्षिण सुरक्षित पहुंच देना तुमको आज मेरे प्राणों से बढ़कर अपनी रक्षा की चिंता करनी होगी दूसरी बात यह है कि मेरी जाने पर यह विधर्मी मेरी तरह को छोड़ ना पाए बस घोड़ा लाओ
मंदिर घोड़े ले आई उसकी आंखें चल चल रही थी पूर्व दिशा में अरुणिमा फैल गई अब की बार कई तोपों का धड़का हुआ
रानी मुस्कुराई बोली है तात्या की तोपों का जवाब है
मंदिर की चाल चलती हुई आंखों को देखकर कहा यह समय आंसू का नहीं है मूंदड़ा जा तुरंत अपने घोड़े पर सवार हो अपने लिए आए हुए घोड़े को देखकर बोली यह अस्तबल को प्यार करने वाला जानवर है परंतु अब दूसरे को चुनने का समय ही नहीं है इसी से काम निकलूंगी
जूही के सिर पर हाथ फेर कर कहीं जा जूही अपने तो खाने पर छक्का तो दे इन वैल्यू को आज
जूही ने प्रणाम किया जाते हुए कहा गई इस जीवन का यथोचित अभिन्न आपको ना दिखला पाई खेल
इतने में सूर्य का उदय हुआ
सूर्य की किरणों ने रानी के सुंदर मुख को प्रदीप किया उनके नेत्रों की ज्योति दोहरे चमत्कार से भस्म हुई लाल वर्दी के ऊपर मोती हीरो का कांटा धमक उठा और धमक पड़ी बयान से निकली हुई तलवार
रानी ने घोड़े को ऐड लगे पहले जरा इसका फिर तेज हो गया
उत्तर और पश्चिम की दिशा में तात्या और राव साहब के मोर्चे थे दक्षिण में बांध के नवाब का रानी ने पूर्व की और झापड़ लगे
गति दिवस की हार के कारण अंग्रेज जनरल संविधान और चिंतत हो गए थे इन लोगों ने अपनी पैदल पलटन पूर्व और दक्षिण की बिहार में छुपा ली और हजूर स्वरों को कहीं दिशाओं में आक्रमण की योजना की टॉप स्पीड पर रक्षा के लिए थी हजूर स्वरों ने पहला हमला कड़ाबीन बंदूकन से किया बंदूकन का जवाब बंदूकन से दिया गया रानी ने आक्रमण पर आक्रमण करके असुर स्वरों को पीछे हटाया दोनों और के सवालों की पहचान दौड़ से धूल के बादल छा गए रानी के रण कौशल के मारे अंग्रेज जनरल धारा गए काफी समय हो गया तुरंत अंग्रेजों को पेशवाई मोर्चा से निकल जाने की गुंजाइश न मिली
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(इस पाठ में लेखक ने जीवन में पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डाला है) बचपन की बात है उसे समय आर्य समाज का सुधारवादी आंदोलन पूरे जोर पर था मेरे पिता आर्य समाज रानी मंडी के प्रधान थे और मां ने स्त्री शिक्षा के लिए आदर्श कन्या पाठशाला की स्थापना की थी पिता की अच्छी खासी सरकारी नौकरी थी वर्मा रोड जब बन रही थी तब बहुत कमाया था उन्होंने लेकिन मेरे जन्म के पहले ही गांधी जी के आह्वान पर उन्होंने सरकारी...
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बचपन की बात है उसे समय आर्य समाज का सुधारवादी आंदोलन पूरे जोर पर था मेरे पिता आर्य समाज रानी मंडी के प्रधान थे और मां ने स्त्री शिक्षा के लिए आदर्श कन्या पाठशाला की स्थापना की थी
पिता की अच्छी खासी सरकारी नौकरी थी वर्मा रोड जब बन रही थी तब बहुत कमाया था उन्होंने लेकिन मेरे जन्म के पहले ही गांधी जी के आह्वान पर उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी हम लोग बड़े आर्थिक कासन से गुजर रहे थे फिर भी घर में नियमित पत्र पत्रिका आई थी आर्य मित्र, साप्ताहिक,वेदों के,सरस्वती,ग्रहणी, और दो बाल पत्रिका खास मेरे लिए बोल शका और चमचम उनमें होती थी परियों राजकुमारों दावों और सुंदर राज कन्याओं की कहानी और रेखाचित्र मुझे पढ़ने की चाहत लग गई हर समय पढ़ता रहता खाना खाते समय थाली के पास पत्रिका रखकर पड़ता अपनी दोनों पत्रिकाओं के अलावा भी सरस्वती और आर्य मित्र पढ़ने की कोशिश करता घर में पुस्तक भी थी उपनिषदों और उनके हिंदी अनुवाद सत्यार्थ प्रकाश के खानदान मंडल वाले अध्याय पूरी तरह समझ में नहीं आते थे पर पढ़ने में मजा आता था
मेरी प्रिय पुस्तक थी स्वामी दयानंद की एक जीवनी रोचक शैली में लिखी हुई अनेक चित्रों से सूचित में तत्कालीन पकड़े के विरुद्ध आदमी साहस दिखाने वाले अद्भुत व्यक्ति थे कितनी ही रोमांचक घटनाएं थीं उनके जीवन की जो मुझे बहुत प्रभावित करती थी चूहे को भगवान का मीठा खाते देख कर मान लेना की प्रतिमाएं भगवान नहीं होती घर छोड़कर भाग जाना तमाम तीर्थ जंगलों गुफाओं हम सिरोही पर साधुओं के बीच घूमने और हर जगह इसकी तलाश करना कि भगवान क्या है सत्य क्या है जो भी समाज विरोधी मनुष्य विरोधी मूल्य है गुड़िया है उनका खंडन करना और अंत में अपने हत्यारे को क्षमा कर उसे सहारा देना यह सब मेरे बालमन को बहुत रोमांचित करता
मां स्कूली पढ़ाई पर जोर देती चिंतित रहती कि लड़का कक्षा की किताबें नहीं पड़ता पास कैसे होगा कहीं खुद साधु बनकर फिर से भाग गया तो पिता कहते जीवन में यही पढ़ाई काम आएगी पढ़ने दो मैं स्कूल नहीं भेजा गया था शुरू की पढ़ाई के लिए घर पर मास्टर रखे गए थे पिता नहीं चाहते थे कि नासमझ उम्र में मैं गलत संगति में पड़कर कल दोनों सीखो बुरे संस्कार ग्रहण करूं अत स्कूल में मेरा नाम तब लिखवाया गया जब मैं कक्षा 2 तक की पढ़ाई घर पर कर चुका था तीसरे दर्जे में भर्ती हुआ उसे दिन शाम को पिता उंगली पड़कर मुझे घुमाने ले गए लोकनाथ की एक दुकान से ताजा अनार का शरबत मिट्टी के कलर में पिलाया और सर पर हाथ रखकर बोले वादा करो कि पाठ्यक्रम की किताबें भी इतने ही ध्यान से पढ़ोगे मां की चिंता मिटाओगे उसका आशीर्वाद था या मेरी जो तोड़ परिश्रम की तीसरी चौथी में मेरे अच्छे नंबर आए और पांचवें दर्जे में तो मैं फर्स्ट आया मां ने आंसू भारत कर गले लगा लिया पिता मुस्कुराते रहे कुछ बोल नहीं
अंग्रेजी में मेरे नंबर सबसे ज्यादा थे अत स्कूल से इनाम में दो अंग्रेजी किताबें मिली थी एक में दो छोटे बच्चे घोसले की खोज में बाघों और कुंजो में भटकते हैं और इन बहाने पक्षियों की जातियां उनकी बोलियां उनकी आदतों की जानकारी उन्हें मिलती है दूसरी किताब ट्रस्टी दा रंग जिनमें पानी के जहाज की कथाएं थी कितने प्रकार के होते हैं कौन-कौन सा माल याद कर लाते हैं कहां ले जाते हैं नविको की जिंदगी कैसी होती है कैसे-कैसे जीव मिलते हैं कहां हवेल होती है कहां शक होती है
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प्रस्तावना " ऐसावधानी ही दुर्घटना का कारण होती है सावधानी बार रखने पर दुर्घटना डाली जा सकती है" आज का योग विज्ञान का योग है इस युग में समाज मैं नई-नई मशीन तथा उपकरणों का प्रयोग होता है घर और बाहर दोनों जगह जरा सी ऐसा सावधानी होने पर दुर्घटना हो सकती है इसके अतिरिक्त कीड़े मकोड़े जानवर आदि के काटने से दुर्घटना होती है ऐसी अवस्था में प्राथमिक चिकित्सा के द्वारा घायल की चि...
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आज का योग विज्ञान का योग है इस युग में समाज मैं नई-नई मशीन तथा उपकरणों का प्रयोग होता है घर और बाहर दोनों जगह जरा सी ऐसा सावधानी होने पर दुर्घटना हो सकती है इसके अतिरिक्त कीड़े मकोड़े जानवर आदि के काटने से दुर्घटना होती है ऐसी अवस्था में प्राथमिक चिकित्सा के द्वारा घायल की चिकित्सा की जाती है तथा जीवन संकट से उभारा जाता है
दुर्घटना के कारण निम्नलिखित प्रकार के हैं
असावधानी - आज व्यक्ति इतनी जल्दी कार्य करना चाहता है कि उसे अपनी जिंदगी का भी ध्यान नहीं रहता सड़क पर चलने फिरने अथवा वाहन चलाने आदि में है असावधानी बरतता है और दुर्घटना का सामना करता है
अशिक्षा तथा अज्ञानता - बहुत सी मशीनों की पर्याप्त जानकारी न होने से अधिकतम मशीन को चलाने का ज्ञान न होने के कारण भी दुर्घटना संभव होती है
शारीरिक असमर्थता- कभी-कभी शारीरिक रूप से असमर्थ होने पर भी दुर्घटना का खतरा रहता है जैसे पैरों से विकलांग होने पर दुर्घटना हो जाना
सार्वजनिक स्थानों पर भीड़भाड़ के कारण- कभी-कभी अधिक भीड़ भाड़ होने पर दुर्घटना हो जाती है लोग गिर सकते हैं अथवा बेहोश भी हो सकते हैं
जीव जंतु के काटने पर- सांप बंदर कुत्ते हाथी के काटने से भी दुर्घटनाएं संभव हो सकती है
सामान्य दुर्घटनाएं ऐसा धनिया लापरवाही के कारण ही होती है कुछ प्रमुख दुर्घटनाएं निम्नलिखित है
यह दुर्घटना अक्सर खाना बनाते समय अथवा अधिकता वाले स्थान पर कार्य करते समय होती है आज से जल जाना को लेते तेल का शरीर पर गिर जाना भाव से जालना ग्राम वस्तु का शरीर पर गिर जाना बिजली के करंट आदि से व्यक्ति
यह दुर्घटना नदी तालाब समुद्र आदि के तट पर होती है अचानक पर पानी में फिसल जाने आदि से यह दुर्घटना होती है ऐसी स्थिति में सर्वप्रथम उसे व्यक्ति को पानी से बाहर निकलना चाहिए
कभी-कभी तक समाप्त बिजली के तारों अथवा पलंग या स्विच को छूने से करंट लग जाता है यह खतरनाक दुर्घटना है इसमें मिलते तक हो सकती है
कभी-कभी सांप के काट लेने से रोगी के शरीर में भी फैलने लगता है अधिकतर यह घटनाएं गांव या पेड़ पौधे युक्त स्थान में अथवा सड़क पर होते हैं सांप की अनेक जातियां होती है कुछ विषैला होते हैं तथा कुछ भी सीन होते हैं कहा जाता है कि सांप का कांटा व्यक्ति मरता नहीं है फिर बेहोशी की दशा में उसकी सभी इंदिरा निशि करिया हो जाती है और उसे मरा हुआ समझ लिया जाता है
बिटवीन जहरीला जीव है बिच्छू की पूंछ में डंक होता है बिच्छू का विश्व नदी तंत्र को प्रभावित करता है
पागल कुत्ते के काटने से हाइड्रोफोबिया नामक रोग हो जाता है पागल कुत्ते की जीत सदैव बाहर निकली होती है तथा तेजी से होता है पागल कुत्ता किसी व्यक्ति को काटने की 10 15 दिन बाद मर जाता है पागल कुत्ते के काटने से मानसिक शक्ति सिंह हो जाती है
कभी-कभी किसी तेज धार वाली वस्तु से जब शरीर कट जाता है और खून बहता है तो इसे रक्तस्राव कहते हैं रक्तस्राव दो प्रकार के होते हैं फर्स्ट बराक किस तरह सेकंड आंतरिक रक्त स्राव
कभी-कभी चोट आदि लग जाने से त्वचा के नीचे के तंत्र कट फट जाते हैं तथा घाव हो जाते हैं गांव कई प्रकार के होते हैं
1. कछला घाव
अचानक काम करते समय हाथ या पर पर कोई भारी वस्तु गिरने से चोट लग जाती है इस स्थिति में उंगली का रंग नीला पड़ जाता है तथा तीव्र दर्द होता है
2. कटा हुआ घाव
इसमें कटे हुए स्थान से खून बहता है इसे कटा हुआ भाव कहते हैं
3. फटा घाव
यह गांव किसी भारी वस्तु के गिर जाने से लगी चोट के कारण होता है यह घाव किनारे से टेढ़े मेढ़े या कट फट जाते हैं
गर्मी चोट रत्नलिका के फटने या रक्त की न्यूनता के कारण नाक से रक्त बहने को नकसीर फोड़ना कहते हैं ऐसी अवस्था में रोगी को तुरंत खुले ताजी हवा में गर्दन को पीछे झुककर सीधा कुर्सी आ चुकी पर बैठा देना चाहिए उसके वेस्टन को ढीली करके उससे मुंह द्वारा सांस लेने को कहा जाए तत्पश्चात नाक से ऊपर तथा गर्दन पर बर्फ की थैली से सिकाई करना चाहिए उसके पैरों को गर्म पानी में रखना चाहिए और चूसने के लिए बर्फ देना चाहिए रोगी को बिना इलाज बुलाए उसकी नाक को अंगूठे और उंगली के बीच पड़कर लगभग 5 मिनट तक दबाना चाहिए दक्षिण के बंधन होने पर कुछ और से नाग दबाए या नाक के अंदर भी
शहर की मक्खियों भर के काटने पर उसे स्थान पर बहुत पीड़ा होती है जलन होने लगती है कटे हुए स्थान के चारों ओर सूजन आ जाती है कभी-कभी कटे हुए स्थान पर धक रह जाता है शहर की मक्खेड़ पर के काटने से उसके डॉग को पीने या चाबी की सहायता से बाहर निकाला जाता है कटे हुए स्थान पर कोई बिना जंग लगा साफ लोहा तुरंत रगड़ना चाहिए और स्पीड कटे हुए स्थान पर कोई बिना जंग लगा साफ लोहा तुरंत रगड़ना चाहिए और स्पीड चुनाव अथवा कॉसिस्टिक सोडा मिलना चाहिए रोगी को पानी को पिलाना चाहिए गांव के तुरंत एक पट्टी कसकर पान देनी से विश्व को पहले से रोका जा सकता है
दोहे कार्बन डाइऑक्साइड यानी विषैली गैसें संयुक्त हवा में सांस लेने डूबने फांसी लगाने आदि कर्म से दम घुटने लगता है
विशाली हवा में सांस लेने से दम घुटने पर व्यक्ति को तुरंत खोली गया ताजी हवा में लेटा देना चाहिए उसकी पंखे से हवा करें और उसके आसपास भीड़ इकट्ठी ना होने दे
डूबने से तुम घुटने पर व्यक्ति को पानी से बाहर निकाल कर उल्टा लेटना चाहिए और पेट का पानी निकाल देना चाहिए फिर डूबने से तुम घुटने पर व्यक्ति को पानी से बाहर निकाल कर उल्टा लेटना चाहिए और पेट का पानी निकाल देना चाहिए फिर गले वस्त्र उतार कर उसे कंबल में लपेट देना चाहिए तब क्रिसमस विधि से इस स्वास्थ्य देना चाहिए उसे पीने के लिए गर्म चाय कॉफी या दूध देना चाहिए
फांसी लगने से दम घुटने पर व्यक्ति को थोड़ा ऊपर उठकर उसकी गर्दन से रस्सी का फंदा निकालना चाहिए फिर उसे लिटाकर क्रिसमस विधि से स्वास्थ्य देनी चाहिए उपयुक्त प्राथमिक चिकित्सा के पश्चात डॉक्टर से सिर्फ ही परामर्श आवश्यक कर लेना चाहिए
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Part-2- Maria Sharapova there is something disarming about Maria Sharapova something at odds with her ready is my and glamorous attire and that something in her lifted her on Monday 22 August 2005 to the world number on position in women tennis all things happened in almost two time poised beyond Her years the siberian born teenager took just 4 years as a professional to reach t...
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there is something disarming about Maria Sharapova something at odds with her ready is my and glamorous attire and that something in her lifted her on Monday 22 August 2005 to the world number on position in women tennis all things happened in almost two time poised beyond Her years the siberian born teenager took just 4 years as a professional to reach the pinnacle.
However the repid ascent in a fiercely competitive world begin 9 year before with a level of sacrifice few children would be preparedto endure little Maurya had not yet celebrated Har 10th birthday when she was packed of Two train in the United State that trip to Florida with her father yuri launched Har on the path two success and Stadium but it also required a heart - wrenching 2 years separation from her mother Elina the letter was complete to step back in Siberia because of visa restriction. The 9 year old girl had a lady learnt an important lesson in life that tennis exclation word only come at a price
" I used to be so lonely " Maria Sharapova recalls I missed by mother terribly my father was working as much as he could to keep my tennis training going so he could not see me either.
Because I was so young I used to go to bed at 8:00 p.m. The Other tennis pupils would come in at 11 p.m. and wake me up and order me to daddy up the room and clean it
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