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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
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दा शहनाई ऑफ़ बिस्मिल्लाह खान

दा शहनाई ऑफ़ बिस्मिल्लाह खान
सम्रा औरंगजेब दे राज दिवस में पुंगी नमक वाद्य यंत्र बजाना प्रतिबंधित कर दिया क्योंकि इसकी आवाज अच्छी वह वृक्ष थी पुगी दरकत से बने शोर मचाने वाले सभी का सामान्य नाम पड़ गया शायद ही किसी ने सोचा होगा किया है एक दिन उधर जीवित हो जाएगी पेशेवर संगीतकारों के एक दी जिसकी राजमहल तक पहुंच थ्री डे पुंगी लंबा वह छोड़ा था और पाइप के शरीर में साथ छेड़ कर दिए जब उसने इसमें से कुछ शब्दों को बंद करके तथा खोलकर इस... Read More
सम्रा औरंगजेब दे राज दिवस में पुंगी नमक वाद्य यंत्र बजाना प्रतिबंधित कर दिया क्योंकि इसकी आवाज अच्छी वह वृक्ष थी पुगी दरकत से बने शोर मचाने वाले सभी का सामान्य नाम पड़ गया शायद ही किसी ने सोचा होगा किया है एक दिन उधर जीवित हो जाएगी पेशेवर संगीतकारों के एक दी जिसकी राजमहल तक पहुंच थ्री डे पुंगी लंबा वह छोड़ा था और पाइप के शरीर में साथ छेड़ कर दिए जब उसने इसमें से कुछ शब्दों को बंद करके तथा खोलकर इसे बजाय तो कुबल में मधुर धनिया उत्पन्न हुई उसने राज परिवार के सदस्य के सामने वाद्य यंत्र को बजाय और इसे हर कोई प्रभावित हुआ पुंगी से एकदम भेद इस बगेंद्र को एक नया नाम दे रहा था जैसे की कथा कहीं जाती है क्योंकि यह पहली बार सब के कक्षा में बजाई गई थी तथा एक नई के द्वारा बजाई गई थी इस बगेंद्र को शहनाई नाम दिया गया   शहनाई की आवाज को शुभ माना जाना लगा तथा इसी कारण से इसे आज भी मंदिरों में बचाया जाता है और यह किसी भी उत्तर भारतीय विभाग का अनिवार्य अंग है अतीत में शहनाई डोबेट या राज दरबारों में पाए जाने वाले दो परंपरागत बगेंद्र समूह का अंग थी हाल ही तक इसका प्रयोग केवल मंदिरों में विवाहों में होता था इस वाद्य यंत्र को शास्त्रीय बचपन पर लाने का से उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को जाता है  5 वर्ष की अवस्था में बिहार में डूब राव के प्राचीन इलाके में तालाब के पास बिस्मिल्लाह खान दिल्ली दादा खेलने करते थे वह नियमित रूप से निकट के ब्याह है जी के मंदिर में भोजपुरी चेता गाने जाया करते थे जिनकी समाप्ति पर उन्हें एक पॉइंट 25 किलोग्राम का बड़ा लड्डू मिलता था जो उन्हें स्थानीय महाराज द्वारा पुरस्कार में दिया जाता था यह 80 वर्ष पुरानी बात है और यह छोटा बालक भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न प्राप्त करने के लिए दूर-दूर की यात्रा कर चुका है  21 मार्च 1916 को जन्मे बिस्मिल्लाह खान बिहार के एक संगीत्रों के सुविचार परिवार में आते है उनके दादा रसूल बख्श खान भोजपुरी के राजा के दरबार के शहनाई वाज थी उनके पिता पैगंबर बख्श तथा पिता के पक्ष के दूसरे पूर्वाझा भी वहां शहनाई वादक थे  छोटे बालक ने प्रारंभिक जीवन में ही संगीत में रुचि लेना प्रारंभ कर दिया था 3 वर्ष के अवस्था में जब उनकी माताजी उन्हें उनके बाबा जी के घर पर बनारस अब वाराणसी ले गई तो बिस्मिल्लाह खान अपने बाबो को शहनाई का आरंभ करते देखकर मुग्ध हो गए शीघ्र ही बिस्मिल्लाह दे अपने मामा अली बक्स के साथ बनारस के विष्णु मंदिर जाना प्रारंभ कर दिया जहां वक्त शहनाई वादन के लिए नियुक्त थे अली बक्स शहनाई बजाय करते थे और बिस्मिल्लाह करो तक लगातार मुक्त बैठे रहते थे धीरे-धीरे उन्होंने वाद्य यंत्र बजाने में पाठ देना प्रारंभ कर दिया और वह पूरे दिन बैठे आरंभ किया करते थे आने वाले वर्षों में बालाजी और मंगल मैया के मंदिर और गंगा के किनारे युवा प्रशिक्षण के प्रिया स्थान बन गए जहां वह एकांत में अभ्यास कर सकता था गंगा के बहते जल ने उन्हें नए रगों में एकांक परिवर्तन करने तथा नवीन राघव की रचना करने की ने पहले शहनाई की सीमा से परे माना जाता था की प्रेरणा दी   14 वर्ष की अवस्था में बिस्मिल्लाह अपने पिता के साथ इलाहाबाद संगीत सम्मेलन में गए उनकी संगीत प्रस्तुति के अंत में उस्ताद फायदा खान ने युवा लड़के की पीठ थपथपाई और कहां मेहनत करो और तुम आवश्यक कर पाओगे लखनऊ में 1938 में ऑल इंडिया रेडियो के प्रारंभ के साथ ही बिस्मिल्लाह को बड़ा स अक्षर प्राप्त हुआ वह शीघ्र ही रेडियो पर बहुत सुने जाने वाले शहनाई वादक बन गए  जब भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त हुई तो बिस्मिल्लाह खान राष्ट्र को अपनी शहनाई से राष्ट्र का अभिवादन करने वाले प्रथम भारतीय बने इन्होंने लाल किले श्रोतागण के सम्मुख जिम पंडित जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे राग काफी में अपनी आत्मा उदल दी जिन्होंने नेहरू ने बाद में अपना प्रसिद्ध भाषण ट्रस्ट विद डिसीजन दिया   धन्यवाद-
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[email protected] 02 Feb 2026 146 Views

स्थानीय स्वास्थ्य संस्थाएं प्रशासन एवं सेवाएं

स्थानीय स्वास्थ्य संस्थाएं प्रशासन एवं सेवाएं
 प्रस्तावना  "स्वस्थ नागरिक ही देश की वास्तविक विरासत है"  प्रत्येक राष्ट्रीय की उन्नति वहां के नागरिकों पर निर्भर करती है जिस देश के नागरिक स्वस्थ होंगे वह देश भी उन्नत सील होगा जनता का स्वास्थ्य वहां के प्रशासन पर निर्भर करता है सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने देश के नागरिकों को स्वच्छ जल पौष्टिक भोजन उचित शिक्षा में साफ सुथरा घर हेतु पर्याप्त सुविधा दे जिससे देश के नागरिक स्वस्थ  स्वतंत्रता प्रा... Read More
 प्रस्तावना  "स्वस्थ नागरिक ही देश की वास्तविक विरासत है"  प्रत्येक राष्ट्रीय की उन्नति वहां के नागरिकों पर निर्भर करती है जिस देश के नागरिक स्वस्थ होंगे वह देश भी उन्नत सील होगा जनता का स्वास्थ्य वहां के प्रशासन पर निर्भर करता है सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने देश के नागरिकों को स्वच्छ जल पौष्टिक भोजन उचित शिक्षा में साफ सुथरा घर हेतु पर्याप्त सुविधा दे जिससे देश के नागरिक स्वस्थ  स्वतंत्रता प्राप्ति के पक्ष भारत सरकार ने इस और विशेष प्रयास किए हैं विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से सरकार ने जन स्वास्थ्य के स्तर को ऊंचा उठाने की विशेष प्रयास किए हैं  जन स्वास्थ्य का अर्थ-  सामान्य रूप से स्वास्थ्य को एक व्यक्तिगत गुण माना जाता है तथा अलग-अलग व्यक्तियों के स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया जाता है परंतु स्वास्थ्य विज्ञान के अंतर्गत यह कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य हिंदी व्यक्तियों के स्वास्थ्य से भी प्रभावित होता है यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य के नियमों का पालन करता है तो उसका स्वास्थ्य अच्छा होता है यदि किसी क्षेत्र में अधिकांश व्यक्ति का स्वास्थ्य चलना है तथा विभिन्न लोगों के शिकार रहते हो तो उसके भी स्वास्थ्य के सांसद नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति भी अधिक समय तक स्वस्थ नहीं रह पाता वास्तव में व्यक्तिगत स्वास्थ्य का घनिष्ठ समझ जन स्वास्थ्य से भी है जन स्वास्थ्य का अर्थ किसी क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों का सामूहिक स्वास्थ्य है किसी क्षेत्र के अधिकांश व्यक्तियों के स्वस्थ होने से जन स्वास्थ्य का स्तर उन्नत होता है समाज के अधिकांश व्यक्तियों द्वारा स्वास्थ्य के नियमों का पालन करने से क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है अतः प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ जन स्वास्थ्य के प्रति भी संचित रहे इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को जल स्वास्थ्य के नियमों का पालन करना चाहिए जन स्वास्थ्य के मुख्य   व्यक्ति को खने तथा सीखने नेता आसानी बरतनी चाहिए   व्यक्ति को इधर-उधर ठोकना नहीं चाहिए  मल मूत्र त्यागने के लिए शौचालय का प्रयोग करना चाहिए  जहां था कूड़ा करकट नहीं फेंकना चाहिए  कभी भी सकारात्मक रोग के फैलने की आशंका होते ही स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना चाहिए  जन स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य  जन स्वास्थ्य शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्य है   समाज के प्रत्येक व्यक्ति तथा राष्ट्र का स्वास्थ्य उत्तम हो सके तथा राष्ट्र प्रगति के शिखर पर बढ़ सके   जनता को स्वास्थ्य संबंधित सभी वैज्ञानिक ज्ञान के लाभों की जानकारी देना  स्वास्थ्य सुरक्षा संपत्ति जानकारी देना   सांसद देसी विदेशी स्वास्थ्य संगठनों के द्वारा समय-समय पर चलाए गए अभियानों तथा कार्यक्रमों की जानकारी देना धन्यवाद-
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[email protected] 01 Feb 2026 104 Views

सार्वजनिक स्वच्छता

सार्वजनिक स्वच्छता
​​​​ सार्वजनिक स्वच्छता  सामान्य रूप से घर की संपूर्ण सफाई को ही प्राथमिकता दी जाती है परंतु जन स्वास्थ्य तथा सफाई के विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए घर की आंतरिक सफाई के साथ ही साथ घर के आसपास की सफाई अर्थात सार्वजनिक सफाई की भी समुचित व्यवस्था करनी अनिवार्य वास्तव में सफाई के विभिन्न लबों को प्राप्त करने के लिए घर पर्यावरण दोनों की संस्थान अनिवार्य है घर की आंतरिक सफाई वाले ही पूर्ण रूप से... Read More
​​​​ सार्वजनिक स्वच्छता  सामान्य रूप से घर की संपूर्ण सफाई को ही प्राथमिकता दी जाती है परंतु जन स्वास्थ्य तथा सफाई के विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए घर की आंतरिक सफाई के साथ ही साथ घर के आसपास की सफाई अर्थात सार्वजनिक सफाई की भी समुचित व्यवस्था करनी अनिवार्य वास्तव में सफाई के विभिन्न लबों को प्राप्त करने के लिए घर पर्यावरण दोनों की संस्थान अनिवार्य है घर की आंतरिक सफाई वाले ही पूर्ण रूप से सर्वोत्तम श्रेणी की क्यों ना हो यदि घर के आसपास गंदगी का सामाजिक से हो तो घर में रहने वाले व्यक्ति सफाई के लाभों से कार्य वर्जित भी रह सकते हैं यदि घर के आसपास गंदगी हो तो वहां विभिन्न लोगों के रोगाणु बनाते हैं दुर्गंध उत्पन्न होती है मक्खी मच्छर एवं अन्य आसपास की गंदगी की हर किसी के लिए अशोक के लिए भी होती है जिसे देखकर काफी बुरा महसूस होता है तथा घर की सफाई से उत्पन्न होने वाली प्रशंसा कार्य समाप्त हो जाती है इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक रेडियो सभी नागरिकों को सुझाव दिया जाता है कि घर की सफाई के साथ-साथ घर के आसपास की सफाई का भी समुचित ध्यान रखें घर के आसपास अर्थात् अपने पर्यावरण को संपूर्ण स्वच्छता के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित उपायों को अनिवार्य रूप से बनाएं     खुले में सोच का पूर्ण बहिष्कार-  पारंपरिक रूप से बहुत से लोग खुले विशेष क्रिया करते रहे हैं अब इसे पूर्ण रूप से अनुचित तथा अशोक भी नहीं मान लिया गया है खुले में सोच से पर्यावरण प्रदूषण होता है तथा गंदगी फैलती है जो की जन स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है खुले में सोच को पूरी तरह समाप्त करने के लिए हमारी सरकार कृत संकल्प है स्वच्छ भारत स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत घरों में शौचालय बनाने के लिए अनुदान की भी व्यवस्था है तथा इसके लिए जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार भी किया जा रहा है  घर के आसपास के कूड़े करकट की समुचित व्यवस्था-  किसी भी प्रकार की सफाई के लिए संबंधित कूड़े करकट को सही ढंग से ठिकाना लगाना थी आवश्यक है हम अपने घर के अंदर की सफाई के लिए हर प्रकार के कूड़े करकट को ठिकाना लगाने के लिए हर संभव उपाय करते हैं इस सत्य को ध्यान में रखते हुए घर के आसपास के कूड़े करकट को फीस माफ करने के दास संभव उपाय किए जाने चाहिए इसके लिए सर्व प्रमुख उपाय यह है कि घर के आसपास कूड़ा करकट एकत्रित न होली भाई घर से निकलने वाले घोड़े को किसी भी दशा में घर के बाहर या आसपास ना फेलने दे इसके बावजूद यदि घर के आसपास किसी भी प्रकार का घोड़ा करके देखरत होने लगे तो उसे वहां से हटाने अथवा नष्ट करने का उचित उपाय किया जाना चाहिए कूड़े में यदि खास पत्ते तथा कागज आदि हो तो उन्हें जलाकर समाप्त कर दे अथवा उसमें खाद बनाने की प्रक्रिया को अपने ध्यान रखें रबर प्लास्टिक तथा पॉलिथीन आदि के अवशेषों को कदापि न जलाए इसके जलने से पर्यावरण में दूषित है हानिकारक गैसों से व्यापक होने का खतरा रहता है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि घर के आस-पास की सफाई का दायित्व प्रत्येक निवासी का है केवल अपने घर के सामने के मुख्य द्वार की सफाई का ही ध्यान रखना पर्याप्त नहीं है संपूर्ण पर्यावरण की सफाई अभीष्ट है   आसपास के खरपतवार को समाप्त करना-  घर के आसपास की सफाई के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण उपाय है घर के आसपास के खरपतवार को समाप्त करना सामान्य रूप से आवश्यक क्षेत्र में कुछ खाली स्थान खाली प्लाट या गली का कोण है होते हैं इन खाली स्थान में तरह-तरह के खरपतवार उगने लगते हैं एक खरपतवारों के कारण वातावरण में गंदगी की व्यापक होने लगती है वह तरह-तरह के कीट पतंगे पड़ने लगते हैं खुदाई मृत होने लगता है तथा आवारा पशु भी वह गंदगी फैलाने लगते हैं कुछ खरपतवार टोचन स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले होते हैं जिनकी गांडिया पराग करो से एलर्जी जनित रोग उत्पन्न होने की आशंका रहती है अनेक क्षेत्रों में होने वाली अमेरिकी का इसका एक स्पष्ट उदाहरण है इन संस्कृत तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिया जाता है कि घर के आसपास आवश्यक खरपतवार न पान अपने दे यदि खरपतवार को प्रारंभ में ही नष्ट कर दिया जाए तो समस्या बढ़ती ही नहीं  गंदे पानी की समुचित व्यवस्था-  घर के आसपास की सफाई व्यवस्था के अंतर्गत गंदे पानी की समुचित व्यवस्था करना भी आवश्यक होता है सार्वजनिक डोलियों की व्यवस्था के अभाव में घरों से निकलने वाला गंदा पानी तथा बरसात का पानी भी वातावरण में गंदगी का कारण बन जाता है यदि इस प्रकार की स्थिति हो तो इस विषय में समुचित उपाय करना अति आवश्यक होता है इसका सर्वोत्तम उपाय है डालियन की समुचित व्यवस्था करना यदि नालियों की व्यवस्था करने में कोई कठिनाई हो तो प्रत्येक घर के बाहर ढके हुए शॉकिंग पित्त बनाए जाने चाहिए इसके अतिरिक्त यदि घर के आसपास कई गड्ढे हो या गहरे स्थान हो जहां पानी एकत्रित हो जाता है वहां मिट्टी डालकर उन्हें तक देना चाहिए ताकि वहां पानी एकत्रित न होने पाए यदि इस प्रकार के गधों को थकना कठिन हो तो उन में दर्द होने वाले पानी पर समय-समय पर मिट्टी के तेल अथवा मच्छर मार तेल का छिड़काव करना आवश्यक होता है इसमें मच्छरों की उत्पत्ति को नियंत्रित किया जा सकता है  सार्वजनिक नालियों की सफाई व्यवस्था-  अवश्य वातावरण को स्वच्छ और स्वस्थ कर बनाए रखने के लिए क्षेत्र की सार्वजनिक नालियों की व्यवस्था होनी चाहिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की नालियों में गंदा पानी न रोकना पाए इसके लिए नालियों की ढाल ठीक होनी चाहिए तथा उनकी नियमित सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए नालियों में कूड़ा कर कर नहीं डालना चाहिए डोलियों में पानी के बहन को अवरुद्ध करने में पॉलिथीन का सर्वाधिक योगदान रहता है अतः पॉलिथीन को जहां तहां न फेक सार्वजनिक नालियों के आसपास चुनाव या कोई रोगाणु नाशक खोल का छिड़काव भी करते रहना चाहिए  मृत पशुओं को हटाने की व्यवस्था-  अवश्य वातावरण की स्वच्छता के लिए आवश्यक है कि यदि पशु मर जाए तो उसके मृत शरीर को वहां से सरक हटाने की व्यवस्था की जाए अन्यथा क्षेत्र में तीव्र दुर्गंध तथा विभिन्न रोगाणु व्यापक होने लगते हैं पशुओं के मृत शरीर को हटाने के लिए स्थानीय संस्थाओं अथवा निर्धारित ठेकेदार को सूचित करना चाहिए  संपूर्ण पर्यावरण की स्वच्छता सार्वजनिक स्वच्छता के लिए चंद जागरूकता अनिवार्य है इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने दायित्व निभाना चाहिए वर्तमान समय में हमारी सरकार इस दिशा में अत्यधिक प्रयत्नशील है तथा स्वच्छ भारत मिशन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है आशा है की सीख रही हमारा देश पूर्ण रूप से स्वच्छ भारत बन जाएगा तथा गंदगी का पूर्ण अनुलन हो जाएगा   धन्यवाद-
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[email protected] 01 Feb 2026 132 Views

किस किस विटामिन की कमी से कौन कौन से रोग होते हैं

किस किस विटामिन की कमी से कौन कौन से रोग होते हैं
 विटामिनों की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव- विटामिनों को स्वास्थ्य विज्ञान की भाषा में सुरक्षात्मक तत्व कहा जाता है यह व्यक्ति को स्वस्थ रहने में विशेष रूप में सहायक होते हैं तथा उनकी कमी करने वाले रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न विटामिनों की कमी से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पढ़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का विवरण निम्नलिखित है   विटामिन ए - विटामिन ए की कमी से आंख... Read More
 विटामिनों की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव- विटामिनों को स्वास्थ्य विज्ञान की भाषा में सुरक्षात्मक तत्व कहा जाता है यह व्यक्ति को स्वस्थ रहने में विशेष रूप में सहायक होते हैं तथा उनकी कमी करने वाले रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न विटामिनों की कमी से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पढ़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का विवरण निम्नलिखित है   विटामिन ए - विटामिन ए की कमी से आंखों और त्वचा संबंधित विभिन्न रोग हो जाते हैं विटामिन ए की कमी से होने वाले मुख्य आंखों संबंधित रोग है रतौंधी कांच कटी वाइडएस्ट जीरो तथा कीटो मलेशिया उसके तीर्थ विटामिन ए की कमी के कारण फॉलिकुलर हाइपोक्रेटोसिस नामक त्वचा संबंधित रोग भी हो जाते हैं  विटामिन बी कंपलेक्स- विटामिन बी समूह के विटामिनों की कमी के कारण रूप से बेरी बेरी तथा प्लेन का नामक रोग हो जाता है इन रोगों के अतिरिक्त विटामिन बी की कमी से व्यक्ति के सामान्य स्वास्थ्य पर भी अनेक प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं   विटामिन सी - विटामिन सी की कमी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति नामक रोग का शिकार हो जाता है  विटामिन डी - विटामिन डी की कमी के कारण व्यक्ति की अस्थियां कमजोर हो जाती है तथा वह अस्थि विकृत या रिकेट्स नामक रोग का शिकार हो जाता है इसके अतिरिक्त इस विटामिन की कमी से व्यक्ति का सामान्य स्वास्थ्य भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित होता है  विटामिन ई - विटामिन ई की कमी के कारण स्त्री पुरुषों में प्रजनन क्षमता घट जाती है तथा वह ब्येपन के शिकार हो जाते हैं   विटामिन के - विटामिन के की कमी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति के रक्त में थक्के जमने की क्षमता का हर्ष हो जाता है इस स्थिति में चोट लग जाने पर रक्त का बहाना मुश्किल से रुकता है  धन्यवाद
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[email protected] 01 Feb 2026 145 Views

आहार भोजन एवं स्वास्थ्य

आहार भोजन एवं स्वास्थ्य
 परिचय  प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है जिस प्रकार इंजन को चलाने के लिए तेल कोयला तथा ईंधन की जरूरत होती है उसी प्रकार मानव शरीर को सक्रिय रखने के लिए भोजन की अति आवश्यकता होती है प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे सभी आवश्यक पोषक तत्व उपस्थित हो भोजन में आवश्यक तत्वों की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रह सके अर्थात ऐसा भोजन जिसमे... Read More
 परिचय  प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है जिस प्रकार इंजन को चलाने के लिए तेल कोयला तथा ईंधन की जरूरत होती है उसी प्रकार मानव शरीर को सक्रिय रखने के लिए भोजन की अति आवश्यकता होती है प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे सभी आवश्यक पोषक तत्व उपस्थित हो भोजन में आवश्यक तत्वों की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रह सके अर्थात ऐसा भोजन जिसमें सभी तत्व उपस्थित हो उसे संतुलित भोजन आहार कहते हैं  संतुलित आहार का अर्थ एवं परिभाषा   संतुलित आहार की अर्थ क्रिया को नीचे दी गई परिभाषाओं द्वारा स्पष्ट रूप से संबंध जा सकता है विभिन्न पदार्थों के बना वह भोजन जो हमारे शरीर को सभी पौष्टिक तत्व हमारे आवश्यकताओं के अनुसार उचित मात्रा में प्रदान करता है संतुलित आहार कहलाता है C. Gopalan के अनुसार संतुलित आहार वह ऊर्जा है जो विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ को ऐसी मात्रा एवं अनुपात में लेने से आती है जिसमें क्लोरीन खनिज विटामिन आवश्यक पोषक तत्वों की तथा शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके और पोषण की कुछ अतिरिक्त मात्रा भी बच जाए  आहार और स्वास्थ्य का संबंध -  आहार द्वारा संपन्न होने वाले कार्यों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट कहा जा सकता है की आहार और स्वास्थ्य में पारस्परिक घनिष्ठ संबंध है व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक आवश्यक कारक है समुचित एवं संतुलित आहार ग्रहण करना स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को ऊर्जावान एवं रोग मुक्त होना अनिवार्य है ऊर्जा की प्राप्ति संतुलित आहार से होती है नियमित रूप से संतुलित आहार ग्रहण करने से व्यक्ति को आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती रहती है आहार में विद्वान कार्बोहाइड्रेट वसा तथा प्रोटीन व्यक्ति को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं स्वास्थ्य में संबंधित दूसरा महत्वपूर्ण कारक है व्यक्ति का रोग मुक्त रहना इस कारक के संबंध में दो बातें महत्वपूर्ण है प्रथम यह है कि रोगों से बचाव के लिए व्यक्ति के शरीर में एक विशिष्ट क्षमता होती है जिसे रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं इस क्षमता के बल पर ही व्यक्ति का शरीर विभिन्न रोगों को उत्पन्न करने वाले कारकों का मुकाबला करता है तथा उन कारकों को परसत करके निरंतर स्वस्थ बना रहता है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि व्यक्ति के शरीर में रोग रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में सर्वाधिक योगदान संतुलित अप पोस्टिक आहार का ही होता है आहार में विद्वान प्रोटीन विटामिन तथा खनिज लवण व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सामान्य बनाए रखने तथा विकसित करने में भरपूर योगदान प्रदान करते हैं आहार द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के तथ्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि आईएस स्वास्थ्य में घनिष्ठ संबंध है   स्वास्थ्य एवं आहार के पारस्परिक संबंध को स्पष्ट करने वाला दूसरा तृतीय है अभाव जनित रोगों का नियंत्रण स्वस्थ रहने के लिए रोग मुक्त रहना अति आवश्यक है रोगों की उत्पत्ति संबंधी कारकों का विश्लेषण करने से स्पष्ट होता है कि कुछ रोग सकारात्मक तथा रोगाणुओं द्वारा उत्पन्न होने वाले हैं परंतु अनेक रोग ऐसे भी है जो शरीर के पोषक तत्वों की कमी या अभाव के कारण होते हैं इन रोगों को अभाव जनित रोग कहते हैं जैसे कि विटामिन सी की कमी से डिस्कवरी तथा आयोडीन की कमी से घेंघा नामक रोग हो जाता है तथा तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा गया है कि संतुलित आहार ग्रहण करते रहने से व्यक्ति को अभाव जनित रोग नहीं होते इसके साथ-साथ यह भी सत्य है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई अभाव जनित रोग हो जाता है तो उसे स्थिति में व्यक्ति के उपचार के लिए उसके आहार में संबंधित पोषक तत्व की मात्रा बढ़ा दी जाती है इससे व्यक्ति अभाव जनित रोग से मुक्त हो जाता है इस स्थिति में व्यक्ति को किसी औषधि की आवश्यकता कार्य नहीं होती इस तथ्य के आधार पर ही कहा जाता है की आहार तथा स्वास्थ्य का घनिष्ठ संबंध है   
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[email protected] 01 Feb 2026 108 Views

अर्थव्यवस्था क्या है

अर्थव्यवस्था क्या है
 अर्थव्यवस्था का अर्थ :-  वास्तव में गृह व्यवस्था में कार्य व्यवस्था के अतिरिक्त अर्थव्यवस्था भी शामिल होती है यहां पर अर्थव्यवस्था से तात्पर्य ग्रह की अर्थ अथवा धन संबंधी व्यवस्था है अर्थात ग्रह के आए हुए को व्यवस्थित करना ही ग्रह की अर्थव्यवस्था है ग्रहणी को परिवार की आए और वे में संतुलन स्थापित करके परिवार की अधिकार अधिक आवश्यकताओं को संतुष्ट करना होता है निखिल तथा डारसी के अनुसार परिवार की आय... Read More
 अर्थव्यवस्था का अर्थ :-  वास्तव में गृह व्यवस्था में कार्य व्यवस्था के अतिरिक्त अर्थव्यवस्था भी शामिल होती है यहां पर अर्थव्यवस्था से तात्पर्य ग्रह की अर्थ अथवा धन संबंधी व्यवस्था है अर्थात ग्रह के आए हुए को व्यवस्थित करना ही ग्रह की अर्थव्यवस्था है ग्रहणी को परिवार की आए और वे में संतुलन स्थापित करके परिवार की अधिकार अधिक आवश्यकताओं को संतुष्ट करना होता है निखिल तथा डारसी के अनुसार परिवार की आय तथा वह पर नियंत्रण होना तथा आए को ग्रह के संजना आत्मक कार्यों में व्यय करना गृह अर्थव्यवस्था कहलाती है   अर्थव्यवस्था का महत्व:-  परिवार का जीवन स्तर सुख समृद्धि परिवार की अर्थव्यवस्था पर निर्भर होता है गृहणी का यह उत्तरदायित्व होता है कि वह परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकता को बुद्धिमत्ता पूर्ण तरीके से पूरी कर उसे संतुष्टि प्रदान करें साथ ही हमारी जितनी आए हो उसी में आवश्यकता है पूरी होनी चाहिए अर्थव्यवस्था का महत्व निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है  परिवार में आए का स्रोत मुख्यतः मुख्य होता है अतः उसकी भूमिका बहुत उपयोगी होती है  अर्थव्यवस्था एक प्रक्रिया है जिसमें आई का नियोजन नियंत्रण तथा मूल्यांकन होता है परिवार के अर्थव्यवस्था चलाने के लिए कुशलता बुद्धिमता की आवश्यकता होती है  यह को एक योजना बनाकर किया जाए तथा समय-समय पर आए को आवश्यकताओं के अनुसार बढ़ाना चाहिए  अर्थव्यवस्था की विधियां :-  निखिल तथा डारसी के अनुसार अर्थव्यवस्था की पांच विधियां है इन पांच वीडियो के द्वारा ही प्रत्येक परिवार अपने लिए की योजना बनाता है यह विद्या निम्नलिखित है-  परिवार वित्त विधि - परिवार की आय के अनुसार बजट बनाया जाता है इसका संचालन परिवार का मुखिया करता है  भता विधि  - इसमें मुखिया अपनी आय का आवश्यक भाग घर के सदस्यों में व्यक्तिगत या सामूहिक रूप में व्यय करता है और शेष धन अपने पास रखता है जो भविष्य की योजनाओं के लिए होता है  समान वेतन विधि - इसमें घर के कई सदस्य अपनी आवश्यकता अनुसार धन खर्च करते हैं और शेष धन अपने-अपने नियंत्रण में रखते हैं यह उन परिवारों में लागू होता है जहां पर घर के कई सदस्य धन कमाते हैं   आदर्श विधि - इस विधि में परिवार की आय को दो भागों में व्यक्त किया जाता है एक भाग में घर का खर्च होता है तथा दूसरे भाग का धन बैंक में जमा कर दिया जाता है जहां पर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं वहां पर इसी प्रकार का भी होता है  आशिक विधि- इस विधि में घर के सभी सदस्य की आय का धन परिवार के मुखिया के पास जमा होता है एवं उसी का इस पर नियंत्रण होता है शेष बचा धन भी मुखिया के नाम से ही संचित होता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग किया जाता है यह विधि संयुक्त प्रणाली वाले परिवारों में अधिक अपनाई जाती है  अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले कारक  परिवार के सदस्यों की संख्या - अधिक सदस्य संख्या वाले परिवार में अधिक हुए होता है तथा कम सदस्य वाले संख्या में परिवार में काम हुए होता है फल स्वरुप दोनों प्रकार के परिवारों के रहन-सहन का स्तर अलग-अलग होता है अतः अर्थव्यवस्था को परिवार की सदस्य संख्या प्रभावित करती है  मुखिया की स्थिति- जिस परिवार के मुखिया की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है वहां पर अर्थव्यवस्था भी अच्छी होती है मुखिया की आई अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है  परिवार वे का नियोजन- वे की योजना बना लेने से वह करने में आसानी रहती है और आवश्यक भी एक नहीं होने पता ऐसा होने से अर्थव्यवस्था उत्तम रहती है  सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तनों का प्रभाव- वैज्ञानिक युग होने के कारण सामाजिक तथा आर्थिक परिवर्तन होते हैं इसका प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ता है अधिक फैशन वाली वस्तुओं उपकरणों आदि को खरीदने से अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है अतः आए देखकर ही व्यय करना चाहिए   जीवन स्तर - गृह अर्थव्यवस्था हमारे रहन-सहन के स्तर से भी प्रभावित होती है वर्तमान आधुनिक युग में सभी लोग रहन-सहन के स्तर को ऊंचा उठने के लिए प्रयत्नशील दिखाई देते हैं वैसे तो ठीक है क्योंकि रहन-सहन का स्टार परिवार की प्रतिष्ठा को दर्शाता है लेकिन जहां तक हो रहन-सहन के स्तर को अपनी पारिवारिक आय के अनुकूलन रखना चाहिए इस मध्य पर आए से अधिक खर्च करने पर अर्थव्यवस्था का को प्रभाव पड़ेगा  गृह अर्थव्यवस्था में ग्रहणी की भूमिका-  सामान्य रूप से गृह अर्थव्यवस्था को कार्य रूप देने का दायित्व गृहणी का होता है इस स्थिति में गृहणी का दायित्व होता है कि वह परिवार की संपूर्ण व्यवस्था का निर्धन परिवार की आय को ध्यान में रखकर ही करें  अच्छी गृहणी का एक गुण माना जाता है मिट्टी व्ययता पूर्वक खर्च करना इस गुण से संपन्न ग्रहणीय परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति उनकी प्राथमिकता के आधार पर करती है  कुशल ग्रहणीय घर के लिए आवश्यक वस्तुओं को खरीदते समय भी विशेष सूझबूझ से कम लेती है उचित स्थान से कम से कम मूल्य देकर अधिक सेवा देने वाली वस्तु खरीदना ही समझदारी कहलाती है ऐसा करके कुशल ग्रहणीय कुछ धन की बचत कर लेती है तथा इस प्रकार से की गई बचत परिवार की आर्थिक व्यवस्था को उत्तम बनाने में सहायक सिद्ध होती है  उपयुक्त कार्यों के अतिरिक्त कुशल एवं योग्य ग्रहणीय परिवार के अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष रूप से भी योगदान दे सकती है आजकल पढ़ी-लिखी अथवा किसी व्यवसाय का प्रशिक्षण प्राप्त महिला नौकरी करके अथवा किसी व्यवसाय में संकलन होकर धनोपाजर्न कर सकती है तथा परिवार की अर्थव्यवस्था को उत्तम बन सकती है इसके अतिरिक्त कुशल ग्रहणियां घर पर रहकर भी किसी हस्तशिल्प अथवा घरेलू व्यवसाय के माध्यम से धनोपाजर्न कर सकती है यही नहीं कुशल महिलाएं अपने ही बच्चों को पढ़कर उनके ट्यूशन पर होने वाले वे को बचा सकती है  उपयुक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि ग्रहणी की कुशलता अनिवार्य रूप से परिवार के आर्थिक व्यवस्था पर अनुकूलन तथा अच्छा प्रभाव डालती है कुशल ग्रहण या परिवार की अर्थव्यवस्था को अच्छा बनाने में प्रत्येक तथा प्रत्येक दोनों ही रूपों में योगदान दे सकती है  धन्यवाद-
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[email protected] 01 Feb 2026 146 Views

गुरु रविदास जयंती

गुरु रविदास जयंती
आज हम सभी गुरु रविदास जयंती के शुभ अवसर पर एकत्रित हुए हैं यह दिन महान संत गुरु रविदास जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है गुरु रविदास जी 15वीं शताब्दी के एक महान संत समाज सुधारक और कवि थे उन्होंने समाज में पहले जातिवाद छुआछूत और अन्य का विरोध किया और सामान्य प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया  गुरु रविदास जी का जीवन परिचय  गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था वह बचपन से ही भक्त... Read More
आज हम सभी गुरु रविदास जयंती के शुभ अवसर पर एकत्रित हुए हैं यह दिन महान संत गुरु रविदास जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है गुरु रविदास जी 15वीं शताब्दी के एक महान संत समाज सुधारक और कवि थे उन्होंने समाज में पहले जातिवाद छुआछूत और अन्य का विरोध किया और सामान्य प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया  गुरु रविदास जी का जीवन परिचय  गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था वह बचपन से ही भक्ति और आध्यात्मिकता भेरुजी रखते थे उन्होंने समाज को यह सिखाया की कोई भी व्यक्ति अपने जन्म से महान नहीं होता बल्कि उसके कर्म उसे महान बनाते हैं   गुरु रविदास जी की शिक्षाएं   सभी इंसान समान है- इन्होंने समाज में सभी को एक सम्मान मानने की बात कही  ईश्वर की भक्ति सर्वोपरि है -इन्होंने कहा कि सच्चे मन से की गई भक्ति सबसे बड़ी पूजा है  परिश्रम और सच्चाई -इन्होंने मेहनत और ईमानदारी से जीवन जीने पर जोर दिया  बेगमपुर की कल्पना -इन्होंने एक ऐसा समाज की कल्पना की जहां कोई दुख गरीबी और भेदभाव न हो   गुरु रविदास जयंती का महत्व  इस दिन भक्तगण भजन कीर्तन शोभायात्रा और लंगर सेवा का आयोजन करते हैं उनकी शिक्षाएं आज भी समाज के लिए प्रेरणादायक है   निष्कर्ष  गुरु रविदास जी के विचार हमें सामान्य प्रेम और भाईचारा की सीख देते हैं यदि हम उनके दिखाएं मार्ग पर चले तो समझ में सद्भाव बना रहेगा  जय गुरु रविदास जी  धन्यवाद
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[email protected] 01 Feb 2026 137 Views

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान
 "हर नागरिक का हुई  ये सपना,  स्वच्छ हो संपूर्ण भारत अपना "  प्रस्तावना :- स्वच्छता का हम सभी के जीवन में विशेष महत्व है स्वछता हमारे घर अथवा गली मोहल्ले के लिए तो जरूरी होती ही है साथ ही संपूर्ण देश हेतु भी आवश्यक होती है यदि हमारे घर आंगन की तरह पूरा देश भी स्वच्छ रहे तो भारत स्वर्ग समान बन जाएगा इसी को मध्य नजर रखते हुए भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत अभियान आरंभ किया गया है यह एक राष्ट्रीय स्तर... Read More
 "हर नागरिक का हुई  ये सपना,  स्वच्छ हो संपूर्ण भारत अपना "  प्रस्तावना :- स्वच्छता का हम सभी के जीवन में विशेष महत्व है स्वछता हमारे घर अथवा गली मोहल्ले के लिए तो जरूरी होती ही है साथ ही संपूर्ण देश हेतु भी आवश्यक होती है यदि हमारे घर आंगन की तरह पूरा देश भी स्वच्छ रहे तो भारत स्वर्ग समान बन जाएगा इसी को मध्य नजर रखते हुए भारत सरकार द्वारा स्वच्छ भारत अभियान आरंभ किया गया है यह एक राष्ट्रीय स्तर का ध्यान है   स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत:- इस अभियान की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर 2014 को हुई स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है माननीय प्रधानमंत्री बहुते द्वारा प्रत्येक देशवासी से स्वच्छ भारत अभियान पर भाग लेने और इसे सफल बनाने की अपील की गई है इस प्रकार से साफ सफाई के संदर्भ में देश के सबसे बड़े अभियान को जन आंदोलन बनाकर इसकी शुरुआत की गई है यह अभियान हमारे देश के प्रत्येक गांव और शहर में आरंभ किया गया है  अभियान का उद्देश्य:- इस अभियान का उद्देश्य देश के प्रत्येक गली मोहल्ले गांव से लेकर प्रत्येक शहर पक्की सड़कों से लेकर शौचालय का निर्माण करना साफ सफाई कूड़े का उचित निस्तारण और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करना है लोगों की मानसिकता को बदलकर उन्हें उचित स्वच्छता रखने के पर्दे जागरूक करना घरों तक पाइपलाइन के द्वारा स्वच्छ पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित करना आती इस अभियान के उद्देश्य है   आखिर इस अभियान की जरूरत क्यों? यह अभियान सभी भारतवासियों के लिए बेहद जरूरी है इसके तहत भारत के हर घर में शौचालय होने से लोगों पर खुले में सोच के पर्ववर्ती खत्म हो रही है जिससे खुले पैसों से होने वाले ऑडियो से भी बचा जा रहा है और स्वच्छता भी बनी रहेगी कचरे का फुट चक्कर और दोबारा इस्तेमाल सुरक्षित दस्तरण वैज्ञानिक तरीके से बोल प्रबंध का खुदा भी स्वच्छता और हरियाली हेतु अति आवश्यक है गद्य की जानलेवा है यह कई प्रकार की बीमारियों का कारण बनती है आता लोगों पर खुद के स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक और साफ सफाई की प्रक्रियाओं का पालन करना होने के लिए हितकर होगा  "स्वच्छता ही सेवा है,               गद्य की जानलेवा है "  स्वच्छ भारत अभियान का क्रियान्वयन :- इस अभियान के कितने देश से निर्धारित किए गए थे उन सभी का जीवनी स्तर पर क्रियान्वयन होता हुआ साफ दिखाई दे रहा है सरकारी आंकड़ों की बात करें तो इस अभियान के तहत अब तक लगभग 10,19,64, 757 घरों में शौचालय का निर्माण किया जा चुका है 63,55 दिखाओ ऊपर डेफिनेशन फ्री हो चुके हैं 706 जिले इसकी श्रेणी में आ चुके हैं 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में लेकर,  इस मुहिम को सफल बना रहे हैं इस अभियान का प्रतीक चिन्ह गांधीजी का चश्मा है इसे भारत सरकार मंत्रालय के जल शक्ति मंत्रालय के अधीन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को सोपा गया है  प्रधानमंत्री जी की अपील को पूरे देश में सहमति प्रदान की ओर यह अभियान राष्ट्रीय व्यापी आंदोलन बन कर कोबरा बड़ी-बड़ी सेलिब्रिटिस्ट डे इन अभियान में सहयोग किया सफाई आंदोलन के तहत सभी जीएफ के साथ सड़कों पर उतरे  ​​​​​​ उप संहार -  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश को दासता से मुक्त कराया परंतु स्वच्छ भारत का उनका सपना पूरा नहीं हुआ किंतु अब उनका यह सपना प्रधानमंत्री जी की अगुवाई में हम सब मिलकर पूरा करेंगे एक सच्चा नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम ना तो गंदगी फैलाएंगे और ना ही फैलाने देंगे देश को अपने घर की तरह जब गाय के ताकि हम सभी तरह से कह सके कि हम सभी भारत देश में निवास करते हैं  "बापू के सपने को करना है साकार,  स्वच्छता से भारत को देना है आकर"  
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[email protected] 31 Jan 2026 159 Views

विश्व हिंदी दिवस

विश्व हिंदी दिवस
 "सम्मान की अधिकारी है हिंदी  हमें जान से प्यारी है हिंदी "  विश्व हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना करना हिंदी के प्रति अनुराग पैदा करना हिंदी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिंदी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है  विदेश में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप में मनाते हैं सभी स... Read More
 "सम्मान की अधिकारी है हिंदी  हमें जान से प्यारी है हिंदी "  विश्व हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता पैदा करना करना हिंदी के प्रति अनुराग पैदा करना हिंदी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिंदी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है  विदेश में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप में मनाते हैं सभी सरकारी कार्यालय में विभिन्न विषयों पर हिंदी में व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं विश्व में मिट्टी का विकास करने और इसे प्रचारित प्रसारित करने के उद्देश्य में विश्व हिंदी सम्मेलनों की शुरुआत की गई और प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया था  1975 से भारत मॉरीशस यूनाइटेड किंगडम 3D दांत और टॉकबैक को संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विभिन्न देश में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजित किया गया है विश्व हिंदी दिवस पहली बार 10 जनवरी 2006 को बनाया गया था तब से यह हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रतिवर्ष विश्व हिंदी दिवस के रूप में बनाए जाने की घोषणा की थी  उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय देवी देश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिंदी दिवस मनाया था  हिंदी दिवस अभी यह एहसास दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि हिंदी भाषा पूरी दुनिया में सबसे पुरानी और सबसे प्राचीन और प्रभावशाली भाषाओं में से एक है और ऐसे में हमें अपनी मातृभाषा यानी हिंदी भाषा में बोलने में करो महसूस करना चाहिए  हिंदी एक राष्ट्रीय के रूप में भारत को एक साथ रखती है और भारत की अखंडता और एकता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है तो लिए हम एक साथ कहे कि हमें हिंदी भाषा होने पर गर्व है   "हिंदी हमारी शान है,  हिंदुस्तानियों का मान है "  धन्यवाद:-
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[email protected] 31 Jan 2026 115 Views

विश्व शांति दिवस

विश्व शांति दिवस
​​​ विश्व शांति दिवस अथवा अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता शांति और खुशी का एक आदर्श बन जाता है विश्व शांति दिवस मुख्य रूप से पूरी पृथ्वी पर शांति और अहिंसा स्थापित करने के लिए बनाया जाता है शांति सभी को प्यारी होती है  आपको बता दे कि विश्व शांति दिवस साल 1981 से मनाया जा रहा है संयुक्त राष्ट्रीय ने दुनिया भर में इस दिन... Read More
​​​ विश्व शांति दिवस अथवा अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को मनाया जाता है यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता शांति और खुशी का एक आदर्श बन जाता है विश्व शांति दिवस मुख्य रूप से पूरी पृथ्वी पर शांति और अहिंसा स्थापित करने के लिए बनाया जाता है शांति सभी को प्यारी होती है  आपको बता दे कि विश्व शांति दिवस साल 1981 से मनाया जा रहा है संयुक्त राष्ट्रीय ने दुनिया भर में इस दिन को बनाने की घोषणा की था कि तब आप देश और अनेक लोगों के बीच शाब्दिक कायम रह सके और वक्त का थीम write two piece of people साल 1982 से लेकर विश्व शांति दिवस को हर साल सितंबर महीने के तीसरे मंगलवार के दिन मनाया जाता है बाद में इसे बदलकर साल 2002 में 21 सितंबर कर दिया गया  2002 के बाद से यह दिवस 21 सितंबर के दिन ही हर साल मनाया जाता है सफेद कबूतरों को हमेशा से शांति दूत माना जाता है इसलिए इस दिन सफेद कबूतरों को उड़ाने की परंपरा भी है शांति किस प्यारी नहीं होती शांति की ही खोज में मनुष्य अपना जीवन लिए सवार कर देता है लेकिन अफसोस आज इंसान दिन वह दिन इस शांति से दूर जाता जा रहा है आज चारों तरफ फैल बाजार बाद दे शांति को हमसे और भी दूर कर दिया है  हमें यह समझना होगा कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है मानव कल्याण की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है भाषा संस्कृति पहनते भिन्न-भिन्न हो सकते हैं लेकिन विश्व के कल्याण का मार्ग एक ही है मनुष्य को नफरत का मार्ग छोड़कर प्रेम के मार्ग पर चलना चाहिए शांति के महत्व को स्वीकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 1981 में एक प्रस्ताव प्रेषित किया था जिसमें कहा गया कि हर 21 सितंबर को विश्व शांति दिवस मनाया जाएगा  कई लोग हैं शांति का कारण विज्ञान को बताते हैं किंतु यह बात स्वच्छता गलत है विज्ञान तो एक साधन है उसे भले काम में भी लगाया जा सकता है और पूरे काम में भी जिस प्रकार बिजली भाव आदि वैज्ञानिक आविष्कारों ने विश्व को उन्नति की राह दिखाई है और जीवन को सुखी बनाया है क्या इस प्रकार अनु शक्ति का शुद्ध प्रयोग नहीं किया जा सकता इसके विपरीत बिजली और भाग को भी तो विलास कार्य स्रोतों के रूप में बढ़ता जा सकता है इससे सिद्ध हुआ की अशांति के मूल कारण विज्ञान नहीं है अभी तू उसकी आज्ञा है   धन्यवाद-
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[email protected] 31 Jan 2026 104 Views