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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

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अहिंसा और सत्याग्रह


 अहिंसा और सत्याग्रह  शिवराज के लिए अंग्रेजों की हत्या करने का रास्ता सबको उचित नहीं लगता था हिंसा वह हत्या का विरोध करने बालों में गांधी की प्रमुख थे उनका मन था कि अगर हमारी बात सत्य है तो बिना जोर जबरदस्ती वह हिंसा के उसे प्राप्त करना चाहिए अतः हमें सत्य के लिए सिर्फ आग्रह करना चाहिए यानी सत्याग्रह सत्य को हिंसा से प्राप्त करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए  धन्यवाद Read More

 अहिंसा और सत्याग्रह

 शिवराज के लिए अंग्रेजों की हत्या करने का रास्ता सबको उचित नहीं लगता था हिंसा वह हत्या का विरोध करने बालों में गांधी की प्रमुख थे उनका मन था कि अगर हमारी बात सत्य है तो बिना जोर जबरदस्ती वह हिंसा के उसे प्राप्त करना चाहिए अतः हमें सत्य के लिए सिर्फ आग्रह करना चाहिए यानी सत्याग्रह सत्य को हिंसा से प्राप्त करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए

 धन्यवाद


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गांधी जी ने सत्याग्रह करने के लिए यह कार्यक्रम बनाए थे जिनके बारे में मैं आज आपको बताऊंगी


 गांधी जी ने सत्याग्रह करने के लिए यह कार्यक्रम बनाए हैं  अन्याय करने वाले का सहयोग न करना यानी अ सहयोग करना  अनुचित लग रही बातों को मारने से इनकार कर देना यानि अविद्या करना   गांधी जी ने राष्ट्रीय आंदोलन में अंग्रेज शासन के सहयोग और अवज्ञा का तरीका जोड़ा जब गांधी जी राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुए तो उसे आंदोलन में एक नया मोड़ आया गांधी जी लोगों की छोटी... Read More

 गांधी जी ने सत्याग्रह करने के लिए यह कार्यक्रम बनाए हैं

 अन्याय करने वाले का सहयोग न करना यानी अ सहयोग करना

 अनुचित लग रही बातों को मारने से इनकार कर देना यानि अविद्या करना 

 गांधी जी ने राष्ट्रीय आंदोलन में अंग्रेज शासन के सहयोग और अवज्ञा का तरीका जोड़ा जब गांधी जी राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुए तो उसे आंदोलन में एक नया मोड़ आया गांधी जी लोगों की छोटी-छोटी वह ठोस डिकटों को हल करने के लिए आंदोलन चढ़ते थे वह अंग्रेज सरकार से मांग करते थे की लगन कम करें नमक पर कर हटाए जंगल के उपयोग पर पाबंदी हटाए शराब की बिक्री बंद करें शराब की बिक्री से सरकार को बहुत आए मिलती थी गांधी जी के नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोग अपनी ईट हो समस्याओं से लड़ने के लिए आंदोलन की रहा पर निकलने लगे इसके पहले के किसी भी प्रयास से भारी संख्या में आम लोग राष्ट्रीय आंदोलन में नहीं उतरे थे गांधी जी ने ही देश भर में छुआछूत मिटाने का अभियान भी शुरू किया ताकि लोग नया राष्ट्रीय बनाने के आंदोलन में शामिल हो सके

धन्यवाद


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आएइ जाने जंग फूड के बारे में


 जंक फूड :-  आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ   जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व म... Read More

 जंक फूड :-

 आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ 

 जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व में बहुत तेजी से हुआ है वैसे तो यह भोज्य पदार्थ सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों द्वारा अपनाई जा रहे हैं परंतु बच्चों तथा युवा वर्ग की यह पहली पसंद बन गए हैं

 परी सभी जंक फूड में पर संस्कृत कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा होती है इनमें तेल तथा खाद पदार्थों के संरक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रेट काफी अधिक मात्रा में होती है इसके अतिरिक्त इन भोज्य पदार्थों को स्वादिष्ट बनाने के लिए अनेक प्रकार के मिर्च मसाले भी इस्तेमाल किए जाते हैं

 जंक फूड के प्रभाव

 जंक फूड का प्रचलन बहुत अधिक है तथा इन्होंने सुविधाजनक होने के कारण हमारे आहार में विशेष स्थान पा लिया है परंतु विभिन्न अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि जंक फूड के अधिक इस्तेमाल से जन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है

धन्यवाद

 


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यूरोपीय व्यापार


 यूरोपीय व्यापार  पुर्तगालियों ने हिंद महासागर के माध्यम से होने वाले व्यापार पर अपना अधिकार कर लिया वह सोना चांदी आदि और हमारे देश से सूती रेशमी कपड़े और विभिन्न मसाले ले जाते थे और बहुत मुनाफा कमाते थे पुर्तगाल की मजबूत नौसेना के कारण हिंद महासागर से कोई दूसरा देश पुर्तगाल की इजाजत के बिना अपना जहाज नहीं ले जा सकता था वास्कोडिगामा के भारत पहुंचने के बाद एक-एक करके हाइलैंड फ्रांस और इंग... Read More

 यूरोपीय व्यापार

 पुर्तगालियों ने हिंद महासागर के माध्यम से होने वाले व्यापार पर अपना अधिकार कर लिया वह सोना चांदी आदि और हमारे देश से सूती रेशमी कपड़े और विभिन्न मसाले ले जाते थे और बहुत मुनाफा कमाते थे पुर्तगाल की मजबूत नौसेना के कारण हिंद महासागर से कोई दूसरा देश पुर्तगाल की इजाजत के बिना अपना जहाज नहीं ले जा सकता था वास्कोडिगामा के भारत पहुंचने के बाद एक-एक करके हाइलैंड फ्रांस और इंग्लैंड के व्यापारी भारत आने लगे

धन्यवाद


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यूरोपीय शक्ति का भारत में आगमन


 यूरोपीय शक्ति का भारत में आगमन  व्यापारिक मार्ग:-  प्राचीन काल से ही भारत का विदेश से संपर्क रहा है 16वीं शताब्दी से भारत से व्यापार करने के लिए यूरोपीय शक्तियों ने भारत आना प्रारंभ किया जिसमें पुर्तगाली डच फ्रांसीसी और ब्रिटिश प्रमुख थी भारत और यूरोप के मध्य व्यापार जल और थल द्वारा होता था इन मार्गों की संख्या तीन थी प्रथम मार्ग फ्रांस की खाड़ी से होता हुआ समुद्री मार्ग था इस मार्... Read More

 यूरोपीय शक्ति का भारत में आगमन

 व्यापारिक मार्ग:-

 प्राचीन काल से ही भारत का विदेश से संपर्क रहा है 16वीं शताब्दी से भारत से व्यापार करने के लिए यूरोपीय शक्तियों ने भारत आना प्रारंभ किया जिसमें पुर्तगाली डच फ्रांसीसी और ब्रिटिश प्रमुख थी भारत और यूरोप के मध्य व्यापार जल और थल द्वारा होता था इन मार्गों की संख्या तीन थी प्रथम मार्ग फ्रांस की खाड़ी से होता हुआ समुद्री मार्ग था इस मार्ग से इराक तुर्की वेनिस और जिनेवा से व्यापार होता था दूसरा मार्ग लाल सागर से अलेक्जेंड्रिया का था जहां से समुद्र द्वारा वेनिस और जिनेवा को जाया जाता था तीसरा मार्ग मध्य एशिया से मिर्च और फिर यूरोप के लिए था

 इस प्रकार से यूरोप के सभी क्षेत्रों में भारत की वस्तुओं के वितरण के लिए वेनिस और जिनेवा प्रमुख व्यापारिक केंद्र थे इटली ने भारत की प्रमुख वस्तुओं के व्यापार पर अपना एकाधिकार जमाए रखने के लिए यूरोप की शक्तियों की व्यापार में हिस्सेदारी को रोक दिया

धन्यवाद


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आएइ जानते हैं कि प्लीहा क्या है


 प्लीहा   इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है  धन्यवाद Read More

 प्लीहा 

 इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है 

धन्यवाद


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कोल्लम ग्रंथि क्या है हम इसके बारे में जानेंगे


 कोल्लम ग्रंथि   कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं  धन्यवाद Read More

 कोल्लम ग्रंथि 

 कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं 

धन्यवाद


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अग्नाशय के बारे में जाने


 अग्नाशय के बारे में जाने  यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं धन्यवाद Read More

 अग्नाशय के बारे में जाने

 यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं

धन्यवाद


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आएइ जाने की पिताशय से क्या है


 पिताशय क्या है  यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है  धन्यवाद Read More

 पिताशय क्या है

 यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है

 धन्यवाद


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Whst is Duodenum


Duodenum:-  amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain&n... Read More

Duodenum:-

 amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain 

 thank you 


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