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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

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कार्बन डाइऑक्साइड क्या है


 कार्बन डाइऑक्साइड क्या है  वायु में कार्बन डाइऑक्साइड गैस अल्प मात्रा में ही पाई जाती है यह भी एक रंगीन गैस है जिसमें गढ़ तथा हल्का स्वाद भी होता है यह गैस विभिन्न वस्तुओं के सड़ने गैलन तथा जीव धारी के श्वसन के परिणाम स्वरुप बनती रहती है ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन दोनों से भारी होने के कारण यह वायुमंडल में गेराज स्थान पर एकत्रित हो जाती है केन तथा गहरी खानों में इस गैस की मात्रा बहुत अधिक हो... Read More

 कार्बन डाइऑक्साइड क्या है

 वायु में कार्बन डाइऑक्साइड गैस अल्प मात्रा में ही पाई जाती है यह भी एक रंगीन गैस है जिसमें गढ़ तथा हल्का स्वाद भी होता है यह गैस विभिन्न वस्तुओं के सड़ने गैलन तथा जीव धारी के श्वसन के परिणाम स्वरुप बनती रहती है ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन दोनों से भारी होने के कारण यह वायुमंडल में गेराज स्थान पर एकत्रित हो जाती है केन तथा गहरी खानों में इस गैस की मात्रा बहुत अधिक होती है यह गैस जीवधारी के जीवित रहने में तो सहायक नहीं होती परंतु पेड़ पौधे के लिए बहुत उपयोगी होती है सूर्य के प्रकाश में पेड़ पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं तथा अपना भोजन तैयार करते हैं यह गैस छूने के पानी को धो दिया तथा नीले लिटमस को लाल कर देती है ऑक्सीजन के विपरीत कार्बन डाइऑक्साइड जलने की क्रिया में बाधक होती है अतः आज को बुझाने के लिए इस गैस को इस्तेमाल किया जाता है यह डबल रोटी आदि बनाने हेतु आवश्यक खमीर तैयार करने के लिए भी उपयोगी होती है

 धन्यवाद


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जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव


 जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव  हमारे आहार में जल का भी विशेष महत्वपूर्ण स्थान है यदि हम जल की अल्प मात्रा ग्रहण करते हैं या शरीर में जल की कमी हो जाती है तो निश्चित रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है शरीर में जल की कमी को निर्जलीकरण कहते हैं निर्जलीकरण अपने आप में एक गंभीर स्थिति है तथा इसके तुरंत उपचार न होने की दशा में व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है &nbsp... Read More

 जल की कमी का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव

 हमारे आहार में जल का भी विशेष महत्वपूर्ण स्थान है यदि हम जल की अल्प मात्रा ग्रहण करते हैं या शरीर में जल की कमी हो जाती है तो निश्चित रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है शरीर में जल की कमी को निर्जलीकरण कहते हैं निर्जलीकरण अपने आप में एक गंभीर स्थिति है तथा इसके तुरंत उपचार न होने की दशा में व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है

 उपयुक्त विवरण द्वारा स्वास्थ्य की कुछ उन असामान्य प्रतिकूल दशाओं का परिचय प्राप्त होता है जो आहार के पोषक तत्व ऑन की कमी के परिणाम स्वरुप उत्पन्न होती है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि स्वास्थ्य की इन असामान्य दशाओं रोगों से मुक्ति पानी के लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती बल्कि केवल आहार में विद्वान अभाव या कमी को दूर करना ही पर्याप्त होता है

 उपयुक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि आई हैव स्वास्थ्य का परस्पर घनिष्ठ संबंधी वास्तव में स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों में सर्वाधिक महत्व उचित पोषण का है नवीनतम अनुसंधानों से शुद्ध हो चुका है कि प्रत्येक मनुष्य को अपनी आयु लिंग एवं कार्य आदि के अनुसार एक निश्चित मात्रा में आहार की आवश्यकता होती है इस आहार में भोजन के सभी अनिवार्य तत्व एक निश्चित अनुपात में होने आवश्यक है यदि किसी व्यक्ति को आहार के माध्यम से भोजन के सभी तत्व समुचित मात्रा एवं अनुपात में प्राप्त होते रहते हैं तो उसे व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहता है तथा शरीर की वृद्धि विकास साहब रखरखाव की उचित प्रकार से होता है इस प्रकार के आहार प्राप्त होने की स्थिति को उचित पोषण कहते हैं उचित पोषण आहार प्राप्त करने की उसे अवस्था को कहा जाता है जिसमें आहार के सभी कार्य एवं उद्देश्य संचार रूप से पूर्ण होते रहते हैं उचित पोषण के अंतर्गत भोजन की मात्रा एवं प्रकार इस तरह का होता है कि शरीर की संसद आवश्यकताओं एवं क्रियाकलापों के लिए पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाते हैं इस अवस्था में शरीर की संसद कोशिकाओं का पोषण होता रहता है शरीर की संसद ग्रंथियां में उचित मात्रा में रसों का निर्माण एवं श्रवण होता रहता है सांसद एंजाइम उचित मात्रा में बनते रहते हैं इसके अतिरिक्त शरीर की क्रियो के लिए पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त होती रहती है तथा शरीर में होने वाली टूट-फूट की मरम्मत भी होती रहती है उचित पोषण की अवस्था में शमशाद शारीरिक क्रियो सुचारू रूप से चलती रहती है तथा शरीर का ढांचा भी स्वस्थ एवं सुविक्षित होता रहता है इस प्रकार स्पष्ट है कि उत्तम स्वास्थ्य के लिए उचित पोषण अनिवार्य कारक है इस प्रकार की संदेश रूप से कहा जा सकता है कि आर एवं स्वास्थ्य में पारस्परिक घनिष्ठ संबंध है

धन्यवाद-


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मधुमक्खी पालन


 मधुमक्खी पालन  मधु या शहर का सावित्री उपयोग होता है तथा इसके लिए मधुमक्खी पालन का उगम एक कृषि उद्योग बन गया है क्योंकि मधुमक्खी पालन में पूंजी निवेश कम होता है इसलिए किसान इस धन अर्जन का अतिरिक्त साधन मानते हैं शहर के अतिरिक्त मधुमक्खी के चट्टे मॉम के बहुत अच्छे स्रोत है मॉम का उपयोग औषधि तैयार करने में किया जाता है  व्यावसायिक स्तर पर मधु उत्पादन के लिए देसी किस्म की मक्खी एपिसोड... Read More

 मधुमक्खी पालन

 मधु या शहर का सावित्री उपयोग होता है तथा इसके लिए मधुमक्खी पालन का उगम एक कृषि उद्योग बन गया है क्योंकि मधुमक्खी पालन में पूंजी निवेश कम होता है इसलिए किसान इस धन अर्जन का अतिरिक्त साधन मानते हैं शहर के अतिरिक्त मधुमक्खी के चट्टे मॉम के बहुत अच्छे स्रोत है मॉम का उपयोग औषधि तैयार करने में किया जाता है

 व्यावसायिक स्तर पर मधु उत्पादन के लिए देसी किस्म की मक्खी एपिसोड से रहना इंडिका सामान्य भारतीय मक्खी एपिसोड एक सेल मक्खी तथा एपिसोड फ्लोरी डिलीट मक्खी का उपयोग करते हैं एक इटली मक्खी एपिसोड का उपयोग मधु के उत्पादन को बढ़ाने के लिए किया जाता है अतः व्यवसायिक मधु उत्पादन में इस मक्खी का कार्य उपयोग किया जाता है

 धन्यवाद-


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मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)


 मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)  हमारे भोजन में मछली प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है मछली उत्पादन में प्रयुक्त मछलियां कवचीय मछलियां जैसे प्रों तथा मूल शक सम्मिलित है मछली प्राप्त करने की दो विधियां है एक प्राकृतिक स्रोत जिसे मछली पकड़ना कहते हैं तथा दूसरा स्रोत मछली पालन या मछली सावधान   मछली के जल स्रोत समुद्री जल तथा ताजा जल अलवर में जल है अलबरणीय जल नदियां तथा तालाबों में होता... Read More

 मत्स्य उत्पादन (मछली उत्पादन)

 हमारे भोजन में मछली प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है मछली उत्पादन में प्रयुक्त मछलियां कवचीय मछलियां जैसे प्रों तथा मूल शक सम्मिलित है मछली प्राप्त करने की दो विधियां है एक प्राकृतिक स्रोत जिसे मछली पकड़ना कहते हैं तथा दूसरा स्रोत मछली पालन या मछली सावधान 

 मछली के जल स्रोत समुद्री जल तथा ताजा जल अलवर में जल है अलबरणीय जल नदियां तथा तालाबों में होता है इसलिए मछली पकड़ना तथा मछली संवर्धन समुद्र तथा ताजे जल के पारिस्थितिकी तंत्र में किया जा सकता है

 धन्यवाद-

 


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मुर्गी पालन


 मुर्गी पालन-  अंडे में कुक्कुट मास के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मुर्गी पालन किया जाता है इसलिए कुकुट पालन में उन्नत मुर्गी की नेस्ले विकसित की जाती है अंडों के लिए अंडे देने वाली लेयर मुर्गी पालन किया जाता है तथा मांस के लिए ब्रायलर को पाला जाता है   नइ -नई किस में विकसित की जाती है नहीं किस में बनाने के लिए देसी जैसे अश्लील तथा विदेशी जैसे लेखन नसों का संकरण कराया जाता है &nbs... Read More

 मुर्गी पालन-

 अंडे में कुक्कुट मास के उत्पादन को बढ़ाने के लिए मुर्गी पालन किया जाता है इसलिए कुकुट पालन में उन्नत मुर्गी की नेस्ले विकसित की जाती है अंडों के लिए अंडे देने वाली लेयर मुर्गी पालन किया जाता है तथा मांस के लिए ब्रायलर को पाला जाता है 

 नइ -नई किस में विकसित की जाती है नहीं किस में बनाने के लिए देसी जैसे अश्लील तथा विदेशी जैसे लेखन नसों का संकरण कराया जाता है

 चीजों की संख्या तथा गुणवत्ता:

 छोटे कद के रोलर माता पिता द्वारा चीजों के व्यावसायिक उत्पादन हेतु:

  गर्मी अनुकूलन क्षमता उच्च तापमान को सहने की क्षमता

 देखभाल में कम खर्च की आवश्यकता


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आएइ जाने की पशुपालन क्या है


 पशुपालन-  पशुधन के प्रबंधन को पशुपालन कहते हैं इसके अंतर्गत बहुत से कार्य जैसे भजन देना प्रजनन तथा रोगों पर नियंत्रण करना आता है जनसंख्या वृद्धि तथा दहन सहन के स्तर में वृद्धि के कारण दूध तथा मांस खपत भी बढ़ रही है पशुधन के लिए मानवीय व्यवहार के प्रति जागरूकता होने के कारण पशुधन खेती में कुछ नहीं परेशानियां भी आ गई है इसलिए पशुधन उत्पादन बढ़ाने व उसमें सुधार की आवश्यकता है   ध... Read More

 पशुपालन-

 पशुधन के प्रबंधन को पशुपालन कहते हैं इसके अंतर्गत बहुत से कार्य जैसे भजन देना प्रजनन तथा रोगों पर नियंत्रण करना आता है जनसंख्या वृद्धि तथा दहन सहन के स्तर में वृद्धि के कारण दूध तथा मांस खपत भी बढ़ रही है पशुधन के लिए मानवीय व्यवहार के प्रति जागरूकता होने के कारण पशुधन खेती में कुछ नहीं परेशानियां भी आ गई है इसलिए पशुधन उत्पादन बढ़ाने व उसमें सुधार की आवश्यकता है 

 धन्यवाद


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आंखों की स्वच्छता


 आंखों की स्वच्छता  आंखों का मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व होता है आंख के द्वारा ही संपूर्ण संसार को देखा जा सकता है अतः आंखों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए थोड़ी सी लापरवाही आंखों को भयंकर नुकसान पहुंचती है  आंखों की स्वच्छता के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-  आंखों में रात्रि को सोते समय गुलाब जल डालना चाहिए तथा प्राप्त ठंडे पानी के चीते देना चाहिए  आंखों को तेज... Read More

 आंखों की स्वच्छता

 आंखों का मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व होता है आंख के द्वारा ही संपूर्ण संसार को देखा जा सकता है अतः आंखों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए थोड़ी सी लापरवाही आंखों को भयंकर नुकसान पहुंचती है

 आंखों की स्वच्छता के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-

 आंखों में रात्रि को सोते समय गुलाब जल डालना चाहिए तथा प्राप्त ठंडे पानी के चीते देना चाहिए

 आंखों को तेज धूप प्रकाश में धुएं से बचना चाहिए

 गंदा ओला या रुमाल आंखों पर नहीं लगना चाहिए और ना ही आंखों को अधिक रगड़ना चाहि

 पढ़ने लिखने अथवा महीन कार्य करते समय रोशनी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए

 आंखों की रोशनी बढ़ाने वह उन्हें स्वस्थ रखने के लिए विटामिन ए युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए

 अध्ययन करते समय पुस्तक को नेत्रों के बहुत निकट नहीं रखना चाहिए

 आशिक दृष्टि दोष का पता चलते ही तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए

 नेटवर्क को तेज रोशनी में धूप से भी बचना चाहिए धूप में घर से बाहर जाते समय उच्च कोटि का धूप का चश्मा लगाना चाहिए

 धन्यवाद


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दांतों की स्वच्छता


 दांतों की स्वच्छता   दांत मुंह की शोभा होते हैं चमकते हुए दांत हंसी में चार चांद लगा देते हैं और व्यक्ति के व्यक्ति तत्व को प्रभावशाली बना देते हैं इसके अतिरिक्त दांत ग्रहण किया आहार को चबाकर पाचन योग्य बनाने का कार्य करते हैं अतः शारीरिक स्वास्थ्य में दांतों का विशेष योगदान होता है स्वस्थ दांतों से पाचन का कार्य ठीक ढंग से हो पता है परंतु अस्वस्थ दांत होने पर भोजन ठीक से नहीं चलाय... Read More

 दांतों की स्वच्छता 

 दांत मुंह की शोभा होते हैं चमकते हुए दांत हंसी में चार चांद लगा देते हैं और व्यक्ति के व्यक्ति तत्व को प्रभावशाली बना देते हैं इसके अतिरिक्त दांत ग्रहण किया आहार को चबाकर पाचन योग्य बनाने का कार्य करते हैं अतः शारीरिक स्वास्थ्य में दांतों का विशेष योगदान होता है स्वस्थ दांतों से पाचन का कार्य ठीक ढंग से हो पता है परंतु अस्वस्थ दांत होने पर भोजन ठीक से नहीं चलाया जा सकता है और दांतों का शेष कार्य आंतों को करना पड़ता है ऐसा होने से पहले पेट संबंधित रोग हो जाते हैं और मुंह से बदबू आने लगती है यदि दांतों की सुरक्षा का स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है तो कैरिज व्यापार या नामक रोग हो जाते हैं 

 धन्यवाद


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आंतों की स्वच्छता


 आंतों की स्वच्छता  जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं वह पाचन तंत्र के विभिन्न भागों द्वारा बचाया जाता है और भोजन में विद्वान सभी पौष्टिक तत्व ग्रहण कर लिए जाते हैं शेष बचे हुए व्यर्थ पदार्थ का शरीर से बाहर निकलना आवश्यक होता है जिसे माल के रूप में बड़ी आंत द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है   जो व्यक्ति ठीक समय पर सो जाते हैं उनकी आंखे तुरंत साफ हो जाती है परंतु जो व्यक्ति सो जाने में... Read More

 आंतों की स्वच्छता

 जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं वह पाचन तंत्र के विभिन्न भागों द्वारा बचाया जाता है और भोजन में विद्वान सभी पौष्टिक तत्व ग्रहण कर लिए जाते हैं शेष बचे हुए व्यर्थ पदार्थ का शरीर से बाहर निकलना आवश्यक होता है जिसे माल के रूप में बड़ी आंत द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है 

 जो व्यक्ति ठीक समय पर सो जाते हैं उनकी आंखे तुरंत साफ हो जाती है परंतु जो व्यक्ति सो जाने में अलसी या अनियमित बढ़ाते हैं उन्हें विभिन्न प्रकार के रोग जैसे कब्ज जीव मिचलाना चक्कर आना अलसी पेट दर्द बवासीर आदि रोग हो जाते हैं

 पता प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपनी आंतों की स्वच्छता आवश्यक करें इसके लिए सदा पानी नींबू का पानी अशुभ गोल की भूसी त्रिफला चूर्ण आदि का नियमित प्रयोग भी किया जा सकता है

 धन्यवाद


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हाथ व पैरों की स्वच्छता


 हाथ व पैरों की स्वच्छता  भोजन करने से पहले हाथ वह पैरों को भली भांति स्वच्छ कर लेना चाहिए हाथों में जमीन गंदगी भोजन के माध्यम से हमारे पेट में पहुंच जाती है और विभिन्न प्रकार के रोग हो जाते हैं हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए हाथ धोने के लिए वास बेसिन साबुन तथा तोलिए का एक स्नान पर प्रबंध होना चाहिए  हाथ के साथ-साथ पैरों को भी भली प्रकार साफ करना चाहिए स्नान करते समय पैरों क... Read More

 हाथ व पैरों की स्वच्छता

 भोजन करने से पहले हाथ वह पैरों को भली भांति स्वच्छ कर लेना चाहिए हाथों में जमीन गंदगी भोजन के माध्यम से हमारे पेट में पहुंच जाती है और विभिन्न प्रकार के रोग हो जाते हैं हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए हाथ धोने के लिए वास बेसिन साबुन तथा तोलिए का एक स्नान पर प्रबंध होना चाहिए

 हाथ के साथ-साथ पैरों को भी भली प्रकार साफ करना चाहिए स्नान करते समय पैरों को अच्छी तरह रगड़कर साफ करना चाहिए हाथों की तरह पैरों के नाखून भी साफ करने चाहिए पैरों में चप्पल पहननी चाहिए साफ पर करके ही रात्रि में सोना चाहिए ऊंची हील की चप्पल नहीं पहननी चाहिए 

धन्यवाद


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