Blog by Shabainoor | Digital Diary
" To Present local Business identity in front of global market"
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गोल्ड लॉन क्या है? गोल्ड लॉन एक सुरक्षित लॉन है, जिसमें आप अपने सोने के आभूषण (gold jewellery) या सिक्को को बैंक या NBFC के पास गिरवी रखकर, उसकी कीमत के बदले 75-90% तक तत्काल नकदी प्राप्त करते है यह एक तेज और आसान प्रक्रिया है, जिसमें कम डॉक्यूमेंटेशन, पर्सनल लॉन की तुलना मैं कम ब्याज दर और क्रेडिट स्कोर की आवश्यकता नहीं होती है, साथ ही आप अपने सोने के मालिक बने रहते है. गोल्ड लॉन लेन...
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गोल्ड लॉन एक सुरक्षित लॉन है, जिसमें आप अपने सोने के आभूषण (gold jewellery) या सिक्को को बैंक या NBFC के पास गिरवी रखकर, उसकी कीमत के बदले 75-90% तक तत्काल नकदी प्राप्त करते है यह एक तेज और आसान प्रक्रिया है, जिसमें कम डॉक्यूमेंटेशन, पर्सनल लॉन की तुलना मैं कम ब्याज दर और क्रेडिट स्कोर की आवश्यकता नहीं होती है, साथ ही आप अपने सोने के मालिक बने रहते है.
गोल्ड लॉन लेना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह आपातकालीन वित्तीय जरूरतों के लिए सबसे तेज, सुरक्षित और किफायती विकल्प है। इसमें सोने को बेचते नहीं, सिर्फ गिरवी रखकर तुरंत नकदी प्राप्त करते है। यह पर्सनल लॉन की तुलना मैं कम ब्याज दर और न्यूनतम कागजी कार्रवाई पर उपलब्ध है.
गोल्ड लॉन लेने के मुख्य कारण:
यह एक बेकार पड़ी संपत्ति (idle asset) को आर्थिक रूप से उपयोगी बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।
गोल्ड लॉन प्राप्त करने के लिए, आप बजाज फिनसर्व ऐप या वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन अप्लाई कर सकते है या बस नजदीकी बजाज फिनसर्व गोल्ड लॉन शाखा मैं जा सकते है.
गोल्ड लॉन एक प्रकार का सुरक्षित ऋण है जो आपको अपने सोने के आभूषणों को संपाश्रिवका के रूप मैं गिरवी रखकर पैसे उधार लेने की सुविधा देता है.
ऋण का भुगतान ना होने पर सोना खोने का जोखिम ब्याज दरों मैं उतार चढ़ाव से ऋण चुकौती की लागत बढ़ सकती है। अल्पकालिक कार्यकाल: आमतौर पर 12-36 महीनों तक सीमित। ऋण-से-मूल्य (एलटीवी) सीमा: सोने के मूल्य का केवल एक निश्चित प्रतिशत ही ऋण के रूप मैं दिया जाता है।
गोल्ड लॉन लेते समय ब्याज दर (Interest Rate), LTV अनुपात, ऋणदाता की विश्वसनीयता और प्रोसेसिंग फीस की तुलना करना सबसे महत्वपूर्ण है। हमेशा बैंक या भरोसेमंद NBFC से लॉन ले, सोने की शुद्धता जांचें और अपने चुकाने की क्षमता के अनुसार ही अवधि चुने।
गोल्ड लॉन लेते समय मुख्य ध्यान देने योग्य बातें:
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आपको हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ बीमा) लेना चाहिए क्योंकि यह अचानक होने वाले मेडिकल खर्चों से आपकी बचत को बचाता है, आपको बिना पैसों की चिंता किए अच्छी और समय पर स्वास्थ्य सेवा (डॉक्टर, अस्पताल, दवाइयां) लेने मैं मदद करता है, और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर) के बढ़ते खतरे के बीच मानसिक शान्ति (peace of mind) देता है, जो आज के समय मैं बहुत जरूरी है यह आपके परिवार को आर्...
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आपको हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ बीमा) लेना चाहिए क्योंकि यह अचानक होने वाले मेडिकल खर्चों से आपकी बचत को बचाता है, आपको बिना पैसों की चिंता किए अच्छी और समय पर स्वास्थ्य सेवा (डॉक्टर, अस्पताल, दवाइयां) लेने मैं मदद करता है, और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर) के बढ़ते खतरे के बीच मानसिक शान्ति (peace of mind) देता है, जो आज के समय मैं बहुत जरूरी है यह आपके परिवार को आर्थिक संकट से बचाता है और आपको बेहतर इलाज चुनने की आजादी देता है.
वित्तीय सुरक्षा (financial security): मेडिकल एमरजेंसी के दौरान लाखों के बिल आ सकते है हेल्थ इंश्योरेंस इन बड़े खर्चों को कवर करता है, जिससे आपकी जमा–पूंजी सुरक्षित रहती है.
उच्च चिकित्सा लागतों से बचाव (Protection from high meadical coats): आजकल इलाज बहुत मंहगा हो गया है बीमा आपको मंहगे अस्पताल, ऑपरेशन, और दवाइयों का खर्च उठाने मैं मदद करता है.
गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच (Access to quality healthcare): पैसों की चिंता किए बिना आप अच्छे डॉक्टर, विशेषज्ञ और बड़े अस्पतालों मैं इलाज करवा सकते है.
मन की शांति (peace of mind): यह जानकर कि मेडिकल एमरजेंसी में आप पर वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, आपको मानसिक शान्ति मिलती है और आप अपनी रिकवरी पर ध्यान दे पाते है.
बढ़ती बीमारियों से सुरक्षा (Safety from lifestyle Diseases): खराब लाइफस्टाइल के कारण डायबिटीज, हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां बढ़ रही है, जिनके के लिए लगातार इलाज की जरूरत होती है.
निवारक देखभाल (Preventive care): कईं प्लान नियमित चेकअप और स्क्रीनिंग को कवर करते है, जिससे आप बीमारियों को शुरुआती स्टेज़ में ही पकड़ सकते है और उन्हें गंभीर होने से रोक सकते है.
संक्षेप में, हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ एक खर्च नहीं, बल्कि आपके स्वास्थ और भविष्य के लिए एक जरूरी निवेश है.
सुबह उठकर सबसे पहले गुनगुना पानी (नींबू-शहद के साथ) पिएं, फिर योग/व्यायाम करें और नाश्ते में फल, औट्स, दही या अंकुरित अनाज जैसे पोषटिक खाद्य पदार्थ खाएं; जंक फ़ूड और ज्यादा चाय/कॉफ़ी से बचें, और शरीर को हाईड्रेत एनर्जीटिक रखने के लिए हेल्दी आदतें अपनाएं. सुबह उठकर क्या करें (What to Do): पानी पिएं: एक-दो गिलास गुनगुना पानी (नींबू और शहद मिलाकर) पिएं, यह शरीर को हाईड्रेत करता है, और डिटॉ...
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सुबह उठकर सबसे पहले गुनगुना पानी (नींबू-शहद के साथ) पिएं, फिर योग/व्यायाम करें और नाश्ते में फल, औट्स, दही या अंकुरित अनाज जैसे पोषटिक खाद्य पदार्थ खाएं; जंक फ़ूड और ज्यादा चाय/कॉफ़ी से बचें, और शरीर को हाईड्रेत एनर्जीटिक रखने के लिए हेल्दी आदतें अपनाएं.
पानी पिएं: एक-दो गिलास गुनगुना पानी (नींबू और शहद मिलाकर) पिएं, यह शरीर को हाईड्रेत करता है, और डिटॉक्स करता है.
एक्सरसाइज/योग: बॉडी और माइंड को एक्टिव रखने के लिए योग, धियान (मैडिटेशन) या हलकी एक्सरसाइज करें इसमे ब्लड सरकुलेशन और एनर्जी बढ़ती है.
पॉजिटिव सोच: दिन की शुरुआत सकारात्मक विचारों से करें.
तेज रौशनी: सुबह उठते ही तेज रौशनी में रहने से आपकी आंतरिक घड़ी सेट होती है.
फल: सेब, केला, पपीता या बेरीज़ जैसे फल खाएं.
अंकुरित अनाज: मूंग, चना, या मेथी के अंकुरित अनाज प्रोटीन और विटामिन देते है (रातभर भिगोकर रखें).
औट्स: फाइबर से भरपूर औट्स आपको लम्बे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते है.
डेयरी उत्पाद: दही (ग्रीक योगर्ट) या पनीर प्रोटीन का अच्छा स्रोत है.
नट्स और बीज: बादाम, अखरोट, चिया सीड्स या अलसी के बीज हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं.
हर्बल टी: दूध वाली चाय की जगह तुलसी या अन्य हर्ब्स से बनी हर्बल टी पीएं.
ज्यादा चाय/कॉफी: खली पेट दूध वाली चाय, कॉफी या ज्यादा कैफ़ीन से बचे.
जंक फूड: पराठे, पूरी, समोसे, बर्गर या ज्यादा घी वाले नाश्ते से बचें.
प्रोसेस्ड फूड: पैकेट वाले चिप्स, बिस्कुट या रेडी–टू –ईट फूड्स न लें.
Al (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस या कृत्रिम बुद्धिमत्ता) वह तकनीक है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, सीखने, समझने, तर्क करने औऱ समस्या हल करने में सक्षम बनाती है; यह डेटा का विश्लेषण करके पेटर्न पहचानती है, भाषा समझती है, औऱ खुद निर्णय लेती है, जिससे नयी सामग्री बनाना (जैसे ChatGPT) सुवाचालित कार्य करना, औऱ वियक्तिगत सहायता देना संभव हो पाता है, औऱ आजकल जनरेटिव AI (जैसे इमेज औऱ टेक्स बनाने वाले...
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Al (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस या कृत्रिम बुद्धिमत्ता) वह तकनीक है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, सीखने, समझने, तर्क करने औऱ समस्या हल करने में सक्षम बनाती है; यह डेटा का विश्लेषण करके पेटर्न पहचानती है, भाषा समझती है, औऱ खुद निर्णय लेती है, जिससे नयी सामग्री बनाना (जैसे ChatGPT) सुवाचालित कार्य करना, औऱ वियक्तिगत सहायता देना संभव हो पाता है, औऱ आजकल जनरेटिव AI (जैसे इमेज औऱ टेक्स बनाने वाले) इसका एक बड़ा हिस्सा है, जो डिजिटल दुनिया को बदल रहें है.
AI कंप्यूटर विज्ञान का वह क्षेत्र है जो ऐसी मशीने बनाता है जो मानव बुद्धि से जुड़े काम कर सकती है, जैसे सीखना (learning), तर्क करना (reasoning), समस्या समाधान (problem-solving), धारणा (perception), और भाषा समझना (language understanding).
डेटा से सीखना: AI सिस्टम भारी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करके इंसानी वयवहार और पैटर्न की नकल करना सीखते है.
मशीन लर्निंग (ML): यह AI का एक हिस्सा है जहां कंप्यूटर डेटा से खुद सीखते है और अनुभव के साथ बेहतर होते जाते है, बिना स्पर्श प्रोग्रामिंग के.
जनरेटिव AI: यह नया टेक्स, इमेज, वीडियो आदि बनाने की क्षमता रखता है, जैसे ChatGPT या Midjourney.
ग्राहक सेवा: चेतबोट्स के जरिये सवालों के जवाब देना.
निर्णय लेना: डेटा के आधार पर व्यवसाओ को बेहतर निर्णय लेने में मदद करना.
स्वचालन (Automation): सेल्फ ड्राइविंग कारें, विनिमार्ण में जटिल कार्य.
सामग्री निर्माण: टेक्स, इमेज, म्यूजिक बनाना (जैसे GenAI).
व्यक्तिगत अनुभव: आपको सुझाव देना (जैसे Netflix, Amazon).
संक्षेप में: AI शक्तिशाली तकनीक है जो मशीनों को बुद्धिमान बनाती है, जिससे वह इंसानों की तरह काम कर सकें और हमारी दुनिया को बदल सकें, जिसमे मशीन लर्निंग और जनरेटिव AI प्रमुख भूमिका निभा रहें है.
नौकरियों का विस्थापन: AI दोहराव वाले कई मैनुअल कार्यों को स्वचालित करके बड़े पैमाने पर नौकरियों को ख़तम कर सकता है, जिससे बेरोज़गारी बढ़ सकती है
दीपफेक और गलत सुचना: AI का प्रयोग नकली वीडियो और तस्वीरे (दीपफेक) बनाने के लिए किया जा सकता है, जिससे गलत सुचना फैलती है और लोगो को बदनाम किया जा सकता है, खास्कार बच्चों पर मानसिक प्रभाव पड़ता है.
साइबर सिरक्षा जोखिम: AI सिस्टम साइबर हमलों के प्रति संवेदनशील हो सकते है, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है.
बेसन के फायदे: बेसन (चना, आटा) प्रोटीन, फाइबर और खनिजो से भरपूर होता है, जो पाचन सुधारने, वज़न नियंत्रित करने, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को प्रबंधित करने, हड्डियां मज़बूत करने, ख़ून क़ी क़मी दूर करने और त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करता है; यह ग्लूटेन फ्री होने के कारण भी फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा सेंवन से पाचन सम्बन्धी समस्याएं हो सकती है, इसलिए सिमित मात्रा में खाना चाहिए. बेसन के सुवस्थ्य लाभ (He...
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बेसन (चना, आटा) प्रोटीन, फाइबर और खनिजो से भरपूर होता है, जो पाचन सुधारने, वज़न नियंत्रित करने, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को प्रबंधित करने, हड्डियां मज़बूत करने, ख़ून क़ी क़मी दूर करने और त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करता है; यह ग्लूटेन फ्री होने के कारण भी फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा सेंवन से पाचन सम्बन्धी समस्याएं हो सकती है, इसलिए सिमित मात्रा में खाना चाहिए.
पाचन में सहायक: फाइबर से भरपूर होने के कारण यह कब्ज़, गैस और अपच जैसी समस्याओ को कम करता है और पेट को सुवस्थ रखता है.
वज़न नियंत्रण: इसमे प्रोटीन और फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पेट लम्बे समय तक भरा रहता है और वजन घटाने में मदद मिलती है.
ह्रदय सुवस्थय: इसमे मौजूद फाइबर और सुवस्थ वसा कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ह्रदय रोगों के जोखिम को घटाने में मदद करते है.
ऐनीमिया दूर करें: आयरन का अच्छा स्त्रोत है, जो खून की कमी (ऐनीमिया) को दूर करता है और ऊर्जा देता है.
मजबूत हड्डियां: केलशीयम, फास्फोरस और मेगनीशियम से भरपूर होने के कारण हड्डियों को मजबूत बनाता है.
ग्लूटेन फ्री: ग्लूटेन से एलर्जी वाले लोगो के लिए गेंहू के आटे का एक बेहतरीन विकल्प है
बेसन के ज्यादा सेवन से पेट फूलना, गैस, कब्ज़ और ऐंठन जैसी पाचन सम्बन्धी दिक्कते हो सकती है क्यूंकि इसमे फाइबर ज्यादा होता है, और कुछ लोगो को इससे ऐलर्जी भी हो सकती है; वही रूखी त्वचा और बच्चों के लिए बेसन का इस्तेमाल नुकसान्देह हो सकता है, खासकर अगर इसे गलत तरीके से या ज्यादा लगाया जाए तो, इससे खुजली या जलन हो सकती है.
पाचन सम्बन्धी समस्याएं: ज्यादा फाइबर के कारण गैस, पेट फूलना (bloating), और कबज़ हो सकती है खासकर अगर पानी कम पिया जाये.
ऐलर्जी: जिन लोगो को फलिया (legumes) या चने से ऐलर्जी है, उन्हें बेसन से रिएक्शन हो सकता है.
वज़न बढ़ना: ज्यादा बेसन (खासकर पकोड़ों या तले हुए रूप में) केलोरी बढ़ाकर वज़न बढ़ा सकता है.
किडनी की समस्या: किडनी के मरीज़ों को डॉक्टर की सलाह पर ही बेसन खाना चाहिए.
रूखी त्वचा: बेसन प्राकर्तिक तेल हटाता है, जिससे रूखी त्वचा और ज्यादा खिंच सकती है, खुजली या पपड़ी जम सकती है.
बच्चों और नवजात शिशोओं के लिए: इनकी नाजुक त्वचा पर बेसन लगाने से जलन या नुकसान हो सकता है.
सर्दियों में: ठन्डे मौसम में ज्यादा रूखी त्वचा पर बेसन लगाने से समस्या बढ़ सकती है.
दही के साथ प्याज़, आम, खट्टे फल, (नींबू, संतरा), मछली तला हुआ और मसालेदार खाना, तथा उड़द डाल जैसी भारी चीज़े नहीं खानी चाहिए, क्यूंकि यह ऐसीडिटी, पेटदर्द, गैस और त्वचा सम्बन्धी समस्याएं पैदा कर सकती है, जबकि आयुर्वेद खट्टे और भारी भोजन को दही के साथ मिलाने से रोकता है, जिससे पाचन ख़राब हो सकता है. क्या नहीं खाना चाहिए: दही: दही और प्याज़ दोनों की तासीर अलग होती है, जिससे गैस, कब्ज़ या दाने निकल सक...
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दही के साथ प्याज़, आम, खट्टे फल, (नींबू, संतरा), मछली तला हुआ और मसालेदार खाना, तथा उड़द डाल जैसी भारी चीज़े नहीं खानी चाहिए, क्यूंकि यह ऐसीडिटी, पेटदर्द, गैस और त्वचा सम्बन्धी समस्याएं पैदा कर सकती है, जबकि आयुर्वेद खट्टे और भारी भोजन को दही के साथ मिलाने से रोकता है, जिससे पाचन ख़राब हो सकता है.
तला हुआ और भारी खाना: पराठे, पकोड़े या भारी भोजन के साथ दही खाने से पेट में भारीपन और अपच हो सकती है.
उड़द दाल: उड़द दाल दही के साथ मिलाकर भारी हो जाती है और पाचन किर्या को धीमा कर देती है.
आयुर्वेदिक कारण: आयुर्वेद के अनुसार दही की तासीर ठंडी होती है और इसे गरम या खट्टी चीज़ो के साथ मिलाने से शरीर में असंतुलन पैदा होता है.
पाचन सम्बन्धी समस्याएं: ये कॉम्बिनेशन पेट में भारीपन, गैस, ऐसडिटी, कब्ज़ और पेट दर्द का कारण बन सकते है.
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अजवाइन के फायदे:- सुबह खाली पेट सप्ताह में एक बार एक चाय का चम्मच आज्वाइन मुँह मेंर खे और पानी से निगल लें चबाये नहीं यह सर्दी, खाँसी, बदनदर्द, कमर-दर्द, पेट दर्द, कब्जीयत और घुटनो के दर्द से दूर रखेंगा 10 साल से नीचे के बच्चों को आधा चम्मच 2 ग्राम और 10 से ऊपर सभी को एक चम्मच यानी 5 ग्राम लेना चाहिए. अजवाइन के प्रमुख फायदे: पाचन में सहायक: यह जेठरागनी (पाचन अग्नि) को बढाती है, जिससे भोजन अच...
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सुबह खाली पेट सप्ताह में एक बार एक चाय का चम्मच आज्वाइन मुँह मेंर खे और पानी से निगल लें चबाये नहीं यह सर्दी, खाँसी, बदनदर्द, कमर-दर्द, पेट दर्द, कब्जीयत और घुटनो के दर्द से दूर रखेंगा 10 साल से नीचे के बच्चों को आधा चम्मच 2 ग्राम और 10 से ऊपर सभी को एक चम्मच यानी 5 ग्राम लेना चाहिए.
पाचन के लिए: 1-3 ग्राम अजवाइन (1/4 से 1/2 चम्मच) को थोड़े से सेंधा नमक के साथ लें और ऊपर से गरम पानी पिएं.
अजवाइन का पानी: रातभर पानी में अजवाइन भिगोकार सुबह खाली पेट इसका पानी पीने से पेट साफ होता है और वजन कम करने में मदद मिलती है.
अजवाइन के ज्यादा सेंवन से सीने में जलन, ऐसीडिटी, पेट में अल्सर, ब्लड प्रेशर बढ़ना और किडनी में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती है, खास्कार गर्भवती महिलाओ, अल्सर या किडनी के मरीज़ो को सावधानी बरतनी चाहिए और इसकी तासीर गरम होने के कारण गर्मियों में कम लेना चाहिए; यह त्वचा पर एलर्जी और रैशेज़ भी करसकता है.
त्वचा सम्बन्धी समस्या: ज्यादा इस्तेमाल से त्वचा संवेदनशील हो सकती है, एलर्जी, रैशेज़ या सूजन हो सकती है.
अन्य: मतली, उलटी या सिरदर्द भी हो सकता है.
निष्कर्ष: अजवाइन फायदेमंद है, लेकिन हमेशा सिमित मात्रा में लें और किसी भी सुवस्थय समस्या में डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें.
सुवस्थ और चमकदार त्वचा के लिए, एलोवेरा, नारियल तेल, शहद और हल्दी जैसे प्राकर्तिक तत्वों का उपयोग करें, खूब पानी पिए, और विटामिन सी, डी, ई युक्त सब्जियाँ खाएं, साथ ही धूप से बचाव, और हलके कलिंज़र का इस्तेमाल करें; ज्यादा गरम पानी से ना नाहाए और अपनी त्वचा को धीरे से थपथाकर सुखाए. घरेलु स्किन केयर उपाए (home remedies): एलो वेरा (Aloe vera): त्वचा को नमी देता है, मुहाँसों और जलन को कम करता है, और त्व...
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सुवस्थ और चमकदार त्वचा के लिए, एलोवेरा, नारियल तेल, शहद और हल्दी जैसे प्राकर्तिक तत्वों का उपयोग करें, खूब पानी पिए, और विटामिन सी, डी, ई युक्त सब्जियाँ खाएं, साथ ही धूप से बचाव, और हलके कलिंज़र का इस्तेमाल करें; ज्यादा गरम पानी से ना नाहाए और अपनी त्वचा को धीरे से थपथाकर सुखाए.
घरेलु स्किन केयर उपाए (home remedies):
दैनिक देखभाल (Daily care):
क्या ना करें (What to avoid):
जरुरी सलाह (Important advice):
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Home remedies for cough, such as honey, ginger, turmeric, milk, steam inhalation, and salt water gargles, are very effective in soothing the throat and helping two clear mucus; ginger and honey mixtures, basil and black pepper, and warms soup also provide cough relief, while adequate rest and drinking warm fluids are essential. Effective home remedies: Honey and ginger: Mix Ginger juic...
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Home remedies for cough, such as honey, ginger, turmeric, milk, steam inhalation, and salt water gargles, are very effective in soothing the throat and helping two clear mucus; ginger and honey mixtures, basil and black pepper, and warms soup also provide cough relief, while adequate rest and drinking warm fluids are essential.
Effective home remedies:
Other useful solution:
Important advice: If the cough doesn't get better on the symptoms worsen, So, definitely consult a doctor, because these home remedies only help in reducing the symptoms, not cure any serious disease.
Read Full Blog...There are hardly any person who as not heard the name of Mother Teresa. She is a name of world fame. She dedicated her life to the service and help of the poorest and needy people.
Near the famous Kali temple of Kolkata, there is a home for the poor and the ailing. The home is called, "Nirmal Haridaya". It provides shelter to those who are very sick, helpless and whom nobody wants. Mother Teresa treated these people with full love and affection. She, as a nurse made them feel at home. She provided shelter to the orphans, i.e., the children who had no one to look after them, unwanted old people, men and women whose sickness was beyond treatment. Mother Teresa treated the lepers. She worked in the slums of Kolkata where the living conditions were extremely miserable and pathetic.
Mother Teresa was born on 27th August, 1910, in Yugoslavia. Her name was Agnes Gonxha Bajahin. She joined the Lareto Convert at the age of 18 and became a nun. She took up the profession of teaching at Darjeeling and later on at Entally (kolkota). She taught Geography from 1929 to 1928 at St. Marys High School and Lorelo Convent in Kolkata. As she had a great desire to serve the sick and poor, she got the training of a nurse. She was grieved to see the miserable living conditions of slum dwellers. So she started her first school in the Moti Jheel Slum in Kolkata. The people of Moti Jheel lived in great poverty and misery.
When Mother Teresa saw this, she felt very sad and thought that she had no right to stay in the comfortable environment of her convent. She thought that the best way to serve God would be to serve and look after the sick and poor. She decided to leave the convent and later established a new order of her own called the 'Missionaries of chari.'
When the Kolkata Corporation saw the noble work of Mother Teresa, they gave her a building near the Kali temple.
Mother Teresa and other nuns working with her led a very simple life. They wore rough white sarees with blue borders.
People donated as much as they could for Mother's homes. There were a few incidents which are interested to note about how Mother got the things when she needed them. One such incident occurred during winter, when the sister had no quilts for the poor patients. Just then, a man brought quilts and mattresses to donate. Another incident relates to a time when the sisters of charity ran out of rice and an unknown lady brought the adequate amount rice that was required by them
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