Blog by Sanskriti Digital content writer | Digital Diary
" To Present local Business identity in front of global market"
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हमारे शरीर का हर छोटा-बड़ा कार्य-जैसे आँखों का रंग, बालों की बनावट, कद, सोचने की क्षमता, रोगों से लड़ने की शक्ति-सब कुछ जीन द्वारा नियंत्रित होता है। लेकिन जीन अपने आप कुछ नहीं करते। जब जीन अपना काम करते हैं और उनसे प्रोटीन बनते हैं, उसी प्रक्रिया को जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) कहा जाता है। सरल शब्दों में, DNA में छिपी जानकारी का उपयोग करके प्रोटीन बनना ही जीन अभिव्यक्ति है।
जीन, DNA का एक विशेष भाग होता है जिसमें किसी विशेष प्रोटीन या गुण (Trait) की जानकारी होती है।
लेकिन सभी जीन हर समय सक्रिय नहीं रहते।
जीन अभिव्यक्ति का मतलब है-जीन का "ON" या "OFF" होना।
यही कारण है कि
का DNA एक जैसा होने के बावजूद उनका काम अलग-अलग होता है।
जीन अभिव्यक्ति जीवन के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि:
जीन अभिव्यक्ति दो मुख्य चरणों में होती है:
1. ट्रांसक्रिप्शन (Transcription)
इस प्रक्रिया में DNA की जानकारी को RNA में बदला जाता है।
सरल भाषा में:
DNA की कॉपी बनाकर उसे RNA में लिखा जाता है।
2. ट्रांसलेशन (Translation)
इस चरण में mRNA की सहायता से प्रोटीन बनाया जाता है।
सरल भाषा में:
RNA की भाषा को प्रोटीन की भाषा में बदला जाता है।
सभी जीन हर समय काम नहीं करते। शरीर जीनों को नियंत्रित करता है:
इसे ही जीन नियमन (Gene Regulation) कहते हैं।
हमारा वातावरण भी जीन अभिव्यक्ति को प्रभावित करता है:
उदाहरण: अगर कोई व्यक्ति नियमित व्यायाम करता है, तो कुछ जीन ऐसे प्रोटीन बनाते हैं जो शरीर को मजबूत बनाते हैं।
जब जीन अभिव्यक्ति ठीक से नहीं होती, तो कई बीमारियाँ हो सकती हैं:
कई बार जीन सही होते हैं, लेकिन उनका अभिव्यक्ति नियंत्रण बिगड़ जाता है।
सब कुछ जीन अभिव्यक्ति पर निर्भर करता है।
एपिजेनेटिक्स बताता है कि "जीन बदले बिना भी उनका प्रभाव बदला जा सकता है।" यानी DNA वही रहता है, लेकिन जीन का ON–OFF बदल जाता है।
जीन अभिव्यक्ति जीवन की मूल प्रक्रिया है। यह DNA में लिखी जानकारी को काम में लाकर हमारे शरीर को जीवित, सक्रिय और संतुलित रखती है। बिना जीन अभिव्यक्ति के जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती।
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