Computer System Architecture (कंप्यूटर सिस्टम आर्किटेक्चर)

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1. कंप्यूटर सिस्टम की संरचना (Computer System Architecture)

 

कंप्यूटर की परिभाषा और उत्पत्ति

  • उत्पत्ति: कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द 'कंप्यूट' (Compute) से हुई है, जिसका अर्थ है 'गणना करना'।
  • परिभाषा: यह बहुत उच्च कंप्यूटिंग क्षमता वाला एक शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो कंप्यूटर प्रोग्राम (निर्देशों के सेट) के आधार पर अंकगणितीय और तार्किक संचालन (Arithmetic and Logical Operations) बहुत तेज गति और सटीकता से करता है।

 

कंप्यूटर प्रोसेसिंग चक्र के 5 मूल सिद्धांत (Processing Cycle)

दुनिया का कोई भी कंप्यूटर, स्मार्टफोन या मजबूत सर्वर इन्हीं 5 सिद्धांतों पर काम करता है:

  • इनपुट (Input): इनपुट उपकरणों के माध्यम से डेटा (संख्या, शब्द, चित्र, ऑडियो, वीडियो) या निर्देशों को कंप्यूटर में दर्ज करना। 

    इस चरण में इनपुट उपकरणों (Input Devices) के माध्यम से डेटा या निर्देशों को कंप्यूटर में दर्ज (Enter) किया जाता है। कंप्यूटर में दर्ज किया जाने वाला डेटा कई रूपों में हो सकता है, जैसे: संख्या, शब्द, चित्र (Images), ऑडियो और वीडियो।

    मुख्य इनपुट डिवाइसेस और उनके कार्य:

  • कीबोर्ड (Keyboard): इसका प्रयोग कंप्यूटर में मुख्य रूप से संख्याओं (Numbers) और कैरेक्टर्स/अक्षरों (Letters) को टाइप करके दर्ज करने के लिए किया जाता है।
  • माउस (Mouse): इसका प्रयोग एक पॉइंटिंग डिवाइस (Pointing Device) के रूप में किया जाता है, जिससे स्क्रीन पर कर्सर को नियंत्रित करके विकल्पों को चुना जाता है।
  • टचस्क्रीन (Touchscreen) और माइक्रोफोन (Microphone): टचस्क्रीन छूकर निर्देश देने के लिए और माइक्रोफोन आवाज (ऑडियो) रिकॉर्ड करने के लिए इनपुट का काम करते हैं।
  • एमआईसीआर (MICR - Magnetic Ink Character Reader): इसका उपयोग मुख्य रूप से बैंकों में चेक पर छपे विशेष चुंबकीय स्याही वाले नंबरों को पढ़ने के लिए किया जाता है।
  • ओसीआर (OCR - Optical Character Reader): यह कागज़ पर हाथ से लिखे या छपे हुए टेक्स्ट को पढ़कर उसे डिजिटल टेक्स्ट में बदल देता है।

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  • प्रोसेसिंग (Processing): सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) इनपुट डिवाइस से प्राप्त डेटा और निर्देशों को प्रोसेस करता है। सीपीयू की तीन इकाइयाँ हैं - मेमोरी यूनिट (Memory Unit), अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU) और कंट्रोल यूनिट (Control Unit) जैसा कि चित्र में दर्शाया जाता है। मेमोरी यूनिट सीपीयू से जुड़ी होती है। इनपुट डिवाइस और आउटपुट डिवाइस भी कंप्यूटर से जुड़े होते हैं।

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  • स्टोरेज (Storage): डेटा और प्रोग्राम्स को स्थायी या अस्थायी रूप से सुरक्षित रखना।

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  • आउटपुट (Output): प्रोसेसिंग के बाद तैयार परिणाम को यूजर के सामने प्रदर्शित करना।
  • कम्युनिकेशन (Communication): डेटा या जानकारी को एक डिवाइस से दूसरी डिवाइस में भेजना या साझा करना।

 

2. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) के आंतरिक भाग

सीपीयू को कंप्यूटर का मस्तिष्क (Brain) कहा जाता है। इसके मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं:

  • क) मेमोरी यूनिट (Memory Unit - MU): यह डेटा को प्रोसेसिंग से पहले या बाद में अस्थायी (Temporary) रूप से तब तक होल्ड करती है जब तक सीपीयू इसे प्रोसेस नहीं करता।
  • ख) अंकगणित और तर्क इकाई (Arithmetic and Logic Unit - ALU): यह कंप्यूटर की सभी मूल गणितीय गणनाएँ (जैसे- जोड़, घटाव, गुणा, भाग) और तार्किक कार्य (Logical comparison - जैसे दो डेटा की तुलना करना) करता है。
  • ग) कंट्रोल यूनिट (Control Unit - CU): यह कंप्यूटर सिस्टम के सभी घटकों के बीच कार्यों का समन्वय (Coordination) करती है। यह इनपुट यूनिट से डेटा लेकर प्रोसेसिंग यूनिट को भेजती है और प्रोसेस्ड डेटा को आउटपुट यूनिट तक पहुँचाती है।

3. कंप्यूटर के मुख्य आंतरिक हार्डवेयर (Internal Hardware)

  • मदरबोर्ड (Motherboard): यह कंप्यूटर कैबिनेट के अंदर लगा मुख्य सर्किट बोर्ड (Circuit Board) होता है। प्रोसेसर, मेमोरी, हार्ड डिस्क आदि सभी महत्वपूर्ण घटक इसी से जुड़े होते हैं।
  • प्रोसेसर्स (CPU Chip): मदरबोर्ड पर लगी लगभग एक इंच वर्गाकार इलेक्ट्रॉनिक चिप। यह अरबों ट्रांजिस्टर से बनी होती है। इसकी स्पीड (फ्रीक्वेंसी) को गीगाहर्ट्ज़ (GHz) में मापा जाता है।
  • ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU): इसे डिस्प्ले एडॉप्टर या गेमिंग कार्ड भी कहते हैं। सामान्य कंप्यूटर में ऑनबोर्ड जीपीयू होता है, लेकिन ग्राफिक्स डिजाइनिंग या गेमिंग जैसे भारी कार्यों के लिए उन्नत और समर्पित (Dedicated) उन्नत जीपीयू की आवश्यकता होती है।
  • मुख्य मेमोरी (Main/Primary Memory): यह दो प्रकार की होती है:
    • (i) रैंडम-एक्सेस मेमोरी (RAM): यह एक अस्थिर (Volatile) मेमोरी है। कंप्यूटर चालू रहने तक ही इसमें डेटा रहता है, बिजली बंद होते ही इसमें स्टोर जानकारी खो जाती है। (आधुनिक नवीनतम प्रकार: DDR4, SDRAM)।
    • (ii) रीड ओनली मेमोरी (ROM): यह एक गैर-अस्थिर (Non-Volatile) मेमोरी है। कंप्यूटर बंद होने पर भी इसका डेटा नष्ट नहीं होता। इसमें कंप्यूटर को शुरू (बूट) करने वाले निर्देश जैसे BIOS (बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम) या बूट प्रोग्राम स्टोर होते हैं। इसके प्रकार PROM, EPROM, EEPROM हैं।

4. सहायक उपकरण (Peripheral Devices)

ये उपकरण अतिरिक्त रूप से कंप्यूटर सिस्टम से बाहर से जुड़े होते हैं और इसके मूल घटक नहीं होते।

 

इनपुट डिवाइसेज (Input Devices)

यूजर से डेटा और निर्देश लेने के लिए उपयोग होते हैं:

  • कीबोर्ड और माउस: ये मूल इनपुट उपकरण हैं। कीबोर्ड टेक्स्ट/संख्या डालने के लिए और माउस पॉइंटिंग डिवाइस के रूप में काम करता है।
  • टचस्क्रीन: इसमें इनपुट और आउटपुट दोनों होते हैं (जैसे स्मार्टफोन, एटीएम)।
  • स्कैनर: हार्डकॉपी (कागज के दस्तावेजों/तस्वीरों) को डिजिटल सॉफ्टकॉपी में बदलने के लिए।
  • विशेष इनपुट उपकरण (Direct Input):
    • MICR (मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकॉग्निशन): मुख्य रूप से बैंकों में चेक को तेजी से प्रोसेस करने के लिए।
    • OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर): कागज पर लिखे या छपे टेक्स्ट को स्कैन करके सीधे एडिट करने योग्य डिजिटल फॉर्मेट में बदलने के लिए।
    • OMR (ऑप्टिकल मार्क रीडर): पेन या पेंसिल से बने निशानों को पढ़ने के लिए (जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं/Answer Sheets को जांचने में)।
    • बारकोड स्कैनर: उत्पादों पर मौजूद बारकोड (जिसमें उत्पाद की आईडी और निर्माता की जानकारी होती है) को स्कैन करने के लिए。

 

आउटपुट डिवाइसेज (Output Devices)

  • मॉनिटर: कंप्यूटर का मुख्य आउटपुट डिवाइस जो डेटा का विजुअल प्रतिनिधित्व दिखाता है। आधुनिक कंप्यूटरों में LCD (लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले) और LED (लाइट एमिटिंग डायोड) स्क्रीन तकनीक का उपयोग होता है। मॉनिटर चुनते समय पिक्सेल, स्क्रीन आकार और रिफ्रेश रेट महत्वपूर्ण कारक हैं।
  • प्रिंटर: इलेक्ट्रॉनिक डेटा को कागज पर हार्डकॉपी के रूप में प्रिंट करता है। इसके दो प्रकार हैं:
    • इम्पेक्ट प्रिंटर: जो कागज पर स्याही के रिबन पर चोट (भौतिक प्रहार) करके छपाई करते हैं। ये बहुत शोर करते हैं (जैसे- डॉट-मैट्रिक्स प्रिंटर, लाइन प्रिंटर)।
    • नॉन-इम्पेक्ट प्रिंटर: जो कागज के साथ सीधे भौतिक संपर्क में आए बिना शांत और तेज गति से काम करते हैं (जैसे- इंकजेट प्रिंटर और उच्च गुणवत्ता वाला लेज़र प्रिंटर)।

5. सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस (Secondary Storage)

यह गैर-वोलेटाइल (Non-Volatile) मेमोरी है, जिसका उपयोग बड़ी मात्रा में डेटा को स्थायी और दीर्घकालिक आधार पर बैकअप रखने के लिए किया जाता है।

  • आंतरिक हार्ड डिस्क ड्राइव (Internal HDD): कैबिनेट के अंदर फिक्स होती है, क्षमता आमतौर पर 1 TB से 4 TB (या आधुनिक सिस्टम में 12 TB तक) होती है। इसकी औसत रोटेशन गति 7200 RPM (रेवोल्यूशन प्रति मिनट) अच्छी मानी जाती है।
  • सॉलिड-स्टेट ड्राइव (SSD): यह पारंपरिक हार्ड डिस्क की तरह यांत्रिक (मैकेनिकल) भागों का उपयोग नहीं करती, बल्कि इसमें सिलिकॉन से बनी फ्लैश मेमोरी चिप्स होती हैं। यह सामान्य हार्ड डिस्क से कई गुना तेज होती है और कंप्यूटर के प्रदर्शन को बेहतर बनाती है।
  • यूनिवर्सल सीरियल बस (USB) / फ्लैश ड्राइव: बहुत छोटा, पोर्टेबल और दोबारा लिखे जाने योग्य उपकरण (जैसे पेन ड्राइव), जो दो कंप्यूटरों के बीच डेटा ट्रांसफर के लिए सबसे अच्छा माध्यम है।
  • क्लाउड स्टोरेज (Cloud Storage): आधुनिक तकनीक जहाँ डेटा इंटरनेट का उपयोग करके ऑनलाइन सर्वर पर सुरक्षित रखा जाता है (जैसे Google ड्राइव 15 GB और Apple iCloud 5 GB की मुफ्त क्षमता देते हैं)। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के लिए यह पसंदीदा स्टोरेज है क्योंकि डेवलपर्स सीधे क्लाउड एनवायरनमेंट में कोड रन कर सकते हैं।

 

6. डेटा प्रस्तुतीकरण और मापन इकाइयाँ (Data Representation)

 

डेटा और सूचना (Data and Information)

  • डेटा (Data): शुरुआती रूप में बिना व्यवस्थित (Raw), असंगठित संख्या, संकेत या तथ्य हैं जिनका कोई सीधा अर्थ नहीं निकलता (जैसे केवल परीक्षा के अंक)।
  • सूचना (Information): जब कच्चे डेटा को संसाधित (Process) और व्यवस्थित कर दिया जाता है ताकि वह लोगों के लिए उपयोगी और समझने योग्य बन जाए, तो उसे सूचना कहते हैं (जैसे रिपोर्ट कार्ड)।

 

कंप्यूटर मेमोरी मापन इकाइयाँ

डिजिटल कंप्यूटर डेटा को विद्युत संकेतों (Electrical pulses) के रूप में समझता है, जहाँ चालू (ON) स्थिति को '1' और बंद (OFF) स्थिति को '0' द्वारा दर्शाया जाता है।

  • 1 बिट (Bit) = 0 या 1 (बाइनरी अंक, डेटा की सबसे छोटी इकाई)।
  • 1 निबल (Nibble) = 4 बिट्स (आधा बाइट)।
  • 1 बाइट (Byte) = 8 बिट्स (एक कैरेक्टर या अक्षर को दर्शाने की मूल इकाई)।
  • 1 किलोबाइट (KB) = 1024 बाइट्स
  • 1 मेगाबाइट (MB) = 1024 किलोबाइट
  • 1 गीगाबाइट (GB) = 1024 मेगाबाइट
  • 1 टेराबाइट (TB) = 1024 गीगाबाइट
  • 1 पेटाबाइट (PB) = 1024 टेराबाइट

7. डेटा एन्कोडिंग और कोडिंग सिस्टम (Coding Systems)

जब हम कीबोर्ड पर कोई अक्षर (जैसे 'A') दबाते हैं, तो कंप्यूटर उसे सीधे नहीं समझता। कंप्यूटर इसे अपने समझने योग्य बाइनरी कोड (जैसे '1000001') में मैप करता है, इस तंत्र को एन्कोडिंग (Encoding) कहा जाता है। प्रमुख कोडिंग प्रणालियाँ निम्न हैं:

  • बाइनरी कोडेड दशमलव (BCD): कंप्यूटिंग के शुरुआती दौर की प्रणाली है। इसमें प्रत्येक अंक को 4 बिट द्वारा दर्शाया जाता है और यह केवल 16 प्रतीकों (केवल दशमलव संख्या 0 से 9) को दर्शा सकती है। इसका विस्तृत 6-बिट प्रारूप 64 कैरेक्टर दर्शा सकता है।
  • अमेरिकन स्टैंडर्ड कोड फॉर इंफॉर्मेशन इंटरचेंज (ASCII): यह कैरेक्टर प्रतिनिधित्व को मानकीकृत करने के लिए बनी। मूल ASCII कोड 7-बिट का होता है जिससे 128 कैरेक्टर दर्शाए जा सकते हैं। बाद में इसका 8-बिट संस्करण आया जो 256 कैरेक्टर प्रदान करता है। यह केवल अंग्रेजी भाषा के अक्षरों को सपोर्ट करता है।
  • विस्तारित बाइनरी कोडेड दशमलव इंटरचेंज कोड (EBCDIC): यह 8-बिट की कोडिंग प्रणाली है जो 256 कैरेक्टर के उपयोग की सुविधा देती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से आईबीएम (IBM) मेनफ्रेम कंप्यूटरों में किया गया था।
  • यूनिकोड सिस्टम (Unicode): चूँकि पुरानी प्रणालियाँ हिंदी (देवनागरी), तमिल, चीनी, जापानी जैसी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के 256 से अधिक अक्षरों को प्रदर्शित नहीं कर सकती थीं, इसलिए यूनिकोड को विकसित किया गया। यह दुनिया की हर लिखित भाषा के हर कैरेक्टर को एक यूनिक कोड प्रदान करता है। इसके प्रमुख प्रकार हैं:
    • UTF-8: परिवर्तनीय (Variable) लंबाई वाली एन्कोडिंग योजना, जिसमें एक कैरेक्टर के लिए न्यूनतम 8 बिट्स की आवश्यकता होती है। वेबसाइटों पर इसका व्यापक उपयोग होता है।
    • UTF-16: परिवर्तनीय लंबाई योजना, जिसमें कैरेक्टर के लिए 16 बिट्स की आवश्यकता होती है।
    • UTF-32: निश्चित (Fixed) लंबाई योजना, जहाँ प्रत्येक कैरेक्टर को दर्शाने के लिए हमेशा 32 बिट्स का उपयोग होता है।

 

8. संख्या प्रणाली (Number System)

संख्या प्रणाली कंप्यूटर में डेटा को प्रदर्शित करने की एक विधि है। इसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है:

  • गैर-स्थितीय (Non-positional): जैसे रोमन अंक (I=1, V=5, X=10) जहाँ अंकों की स्थिति बदलने से उनका भार नहीं बदलता। यह अंकगणितीय गणनाओं के लिए प्रभावी नहीं है।
  • स्थितीय (Positional): इसमें अंकों का मान उनके स्थान (Position) और संख्या प्रणाली के आधार या मूलांक (Radix/Base) पर निर्भर करता है।

कंप्यूटर विज्ञान में उपयोग होने वाली 4 प्रमुख स्थितीय संख्या प्रणालियाँ इस प्रकार हैं:

  • बाइनरी संख्या प्रणाली (Binary Number System): इस प्रणाली का आधार (Base) 2 होता है। इसमें केवल दो अंकों, 0 और 1 का उपयोग किया जाता है। कंप्यूटर का आंतरिक सर्किट केवल इसी भाषा को समझता है। उदाहरण के लिए: (1011)₂।
  • ऑक्टल संख्या प्रणाली (Octal Number System): इस प्रणाली का आधार (Base) 8 होता है। इसमें 0 से 7 तक के कुल आठ अंकों का उपयोग किया जाता है। ध्यान रहे, इसमें 8 या 9 अंक नहीं आ सकते। उदाहरण के लिए: (234)₈।
  • दशमलव संख्या प्रणाली (Decimal Number System): इस प्रणाली का आधार (Base) 10 होता है। इसमें 0 से 9 तक के कुल दस अंकों का उपयोग किया जाता है। यह वही गणित है जो हम इंसान अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए: (512)₁₀।
  • हेक्साडेसिमल संख्या प्रणाली (Hexadecimal Number System): इस प्रणाली का आधार (Base) 16 होता है। इसमें 0 से 9 तक की संख्याएँ और उसके बाद A से F तक के अक्षरों का उपयोग किया जाता है (जहाँ A का मतलब 10, B का 11, C का 12, D का 13, E का 14 और F का मतलब 15 होता है)। उदाहरण के लिए: (A4)₁₆।

 

*नोट: ऑक्टल प्रणाली में '8' या '9' अंक मान्य नहीं होते (जैसे 641₈ एक अमान्य संख्या है)। बाइनरी संख्या में सबसे बाईं ओर के बिट को MSB (Most Significant Bit) और सबसे दाईं ओर के बिट को LSB (Least Significant Bit) कहा जाता है। *

 

हेक्साडेसिमल संख्या प्रणाली के प्रमुख अनुप्रयोग:

  • मेमोरी एड्रेस निरूपण: कंप्यूटर के लंबे 16-बिट या 32-बिट बाइनरी मेमोरी एड्रेस (जैसे 1100000011110001) को छोटे और आसानी से याद रखने योग्य रूप C0F1 में बदलने के लिए हेक्साडेसिमल का उपयोग होता है।
  • वेबपेज पर रंग कोड (RGB): अधिकांश डिजिटल रंगों को 24-बिट बाइनरी कोड (लाल, हरे और नीले रंग के लिए 8-8 बिट) की आवश्यकता होती है। इसे याद रखना मुश्किल है, इसलिए इसे हेक्साडेसिमल नोटेशन के रूप में कॉम्पैक्ट लिखा जाता है। उदाहरण के लिए, शुद्ध लाल रंग को बाइनरी के बजाय आसानी से (FF, 00, 00) लिखा जाता है।

 

 

9. समस्या समाधान, एल्गोरिदम और फ्लोचार्ट (Problem Solving & Logic)

  • सॉफ्टवेयर का उद्देश्य: जटिल समस्याओं को हल करना और असल जिंदगी के कार्यों को स्वचालित (Automate) करना है।
  • डेवलपर का कौशल: एक डेवलपर के पास समस्या को समझने, आवश्यक इनपुट पर विचार करने और तार्किक चरणों (Logical steps) के द्वारा समाधान तक पहुँचने का कौशल होना चाहिए।
  • बिल्डिंग ब्लॉक्स (Building Blocks): किसी भी प्रोग्राम को कोडिंग भाषा में लिखने से पहले दो प्रमुख बिल्डिंग ब्लॉक्स की मदद ली जाती है:
    • एल्गोरिदम (Algorithm): किसी समस्या को हल करने के लिए लिखे गए तार्किक निर्देशों या चरणों का एक क्रमिक सेट (Step-by-step instructions)।
    • फ्लोचार्ट (Flowchart): एल्गोरिदम या समस्या के समाधान के चरणों का एक चित्रात्मक या आरेखीय रूप (Graphical Representation)।
  • प्रोग्रामिंग भाषा प्रतिमान (Programming Paradigm): प्रोग्रामिंग भाषा एक व्यवस्थित संकेत या भाषा है जिसका उपयोग कंप्यूटर को यह समझाने के लिए किया जाता है कि उसे क्या प्रक्रिया करनी है।

 

सॉफ्टवेयर विकास में कंप्यूटर की भूमिका (The Role of Computer in Software Development)

कोई भी कंप्यूटिंग डिवाइस-जैसे कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्टफोन-ये सभी कंप्यूटर के ही विभिन्न रूप हैं। सॉफ्टवेयर विकास (Software Development) के लिए इन डिवाइसेस का उपयोग किया जाना अनिवार्य है। हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के विकास और प्रसार के लिए कंप्यूटर ही मूल हार्डवेयर (Base Hardware) है।

 दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले वेब एप्लीकेशन के मुख्य उदाहरण:

सॉफ्टवेयर आज हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं और हम रोज़ाना कई तरह के वेब एप्लीकेशन (Web Applications) का उपयोग करते हैं, जैसे:

  • ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स (E-commerce): अमेज़ॅन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart) और अन्य समान शॉपिंग वेबसाइट्स।
  • ऑनलाइन बैंकिंग ऐप्स (Net Banking): पैसों का लेनदेन करने और बैंक खाते को सुरक्षित प्रबंधित करने वाले एप्लीकेशन।
  • ऑनलाइन आरक्षण प्रणाली (Online Reservation System): हवाई जहाज (Flight) और रेल टिकट बुक करने के लिए उपयोग होने वाले सॉफ्टवेयर।
  • प्रबंधन प्रणालियाँ (Management Systems): अस्पतालों को व्यवस्थित चलाने के लिए अस्पताल प्रबंधन प्रणाली (Hospital Management System) और होटलों के लिए हॉटेल प्रबंधन प्रणाली (Hotel Management System)।

 

FAQ

+ Q1. कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति किस शब्द से हुई है और इसका क्या अर्थ है?

उत्तर: कंप्यूटर शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द 'कंप्यूट' (Compute) से हुई है। इसका सीधा और सरल अर्थ 'गणना करना' होता है।

+ Q2. कंप्यूटर प्रोसेसिंग चक्र के 5 मूल सिद्धांत कौन-से हैं?

उत्तर: कोई भी कंप्यूटिंग डिवाइस मुख्य रूप से इन 5 चरणों या सिद्धांतों पर काम करती है:इनपुट (Input): डेटा या निर्देशों को दर्ज करना।प्रोसेसिंग (Processing): डेटा को उपयोगी जानकारी में बदलना।स्टोरेज (Storage): डेटा को सुरक्षित रखना。आउटपुट (Output): परिणाम को प्रदर्शित करना।कम्युनिकेशन (Communication): डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजना。

+ Q3. सीपीयू (CPU) के तीन मुख्य भाग कौन-से हैं और उनके क्या कार्य हैं?

उत्तर: सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) के तीन मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:मेमोरी यूनिट (MU): यह डेटा को प्रोसेसिंग से पहले या बाद में अस्थायी रूप से होल्ड करके रखती है।अर्थमेटिक और तर्क इकाई (ALU): यह कंप्यूटर के सभी गणितीय कार्य (जैसे- जोड़, घटाव, गुणा, भाग) और तार्किक तुलनाएँ करता है।कंट्रोल यूनिट (CU): यह कंप्यूटर सिस्टम के सभी भागों के बीच कार्यों का तालमेल (coordination) और नियंत्रण करती है।

+ Q4. रैम (RAM) और रोम (ROM) में क्या मुख्य अंतर है?

उत्तर: इन दोनों मेमोरी में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:रैम (RAM): यह एक अस्थायी (Volatile) मेमोरी है। कंप्यूटर बंद होने या बिजली कटने पर इसका पूरा डेटा नष्ट हो जाता है। इसमें चालू ऐप्स का डेटा रहता है।रोम (ROM): यह एक स्थायी (Non-Volatile) मेमोरी है। कंप्यूटर बंद होने पर भी इसका डेटा सुरक्षित रहता है। इसमें कंप्यूटर को शुरू करने वाले निर्देश (जैसे- BIOS) स्टोर होते हैं।

+ Q5. एसएसडी (SSD) पारंपरिक हार्ड डिस्क (HDD) से बेहतर क्यों मानी जाती है?

उत्तर: पारंपरिक हार्ड डिस्क (HDD) के अंदर घूमने वाले मैकेनिकल पार्ट्स होते हैं, जिससे उसकी गति सीमित होती है। इसके विपरीत, एसएसडी (SSD) में कोई यांत्रिक भाग नहीं होते; यह सिलिकॉन फ्लैश मेमोरी चिप्स से बनी होती है। इस कारण एसएसडी सामान्य हार्ड डिस्क की तुलना में कई गुना तेज होती है और कंप्यूटर की परफॉर्मेंस को बहुत बेहतर बना देती है।

+ Q6. डायरेक्ट इनपुट डिवाइसेज जैसे OMR, OCR और MICR का क्या काम होता है?

उत्तर: ये तीनों ही विशेष प्रकार के इनपुट उपकरण हैं:OMR (ऑप्टिकल मार्क रीडर): यह कागज पर पेन या पेंसिल से बने निशानों को पढ़ता है, इसका उपयोग परीक्षा की आंसर शीट जांचने में होता है।OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर): यह कागज पर छपे हुए टेक्स्ट को स्कैन करके सीधे कंप्यूटर में एडिट करने योग्य डिजिटल टेक्स्ट में बदल देता है।MICR (मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकॉग्निशन): यह विशेष चुंबकीय स्याही से लिखे अक्षरों को पढ़ता है, इसका उपयोग मुख्य रूप से बैंकों में चेक को तेजी से प्रोसेस करने के लिए किया जाता है।

+ Q7. इम्पेक्ट (Impact) और नॉन-इम्पेक्ट (Non-Impact) प्रिंटर में क्या अंतर है?

उत्तर: प्रिंटर की इन दोनों श्रेणियों में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:इम्पेक्ट प्रिंटर: ये प्रिंटर कागज पर छपाई करने के लिए एक स्याही वाले रिबन पर भौतिक रूप से प्रहार (स्ट्राइक) करते हैं। ये काम करते समय बहुत शोर करते हैं, जैसे- डॉट-मैट्रिक्स प्रिंटर।नॉन-इम्पेक्ट प्रिंटर: ये बिना किसी भौतिक प्रहार के आधुनिक तकनीक (जैसे लेजर बीम या इंक स्प्रे) से शांत और बहुत तेज गति से छपाई करते हैं, जैसे- लेजर और इंकजेट प्रिंटर।

+ Q8. डेटा (Data) और सूचना (Information) में क्या अंतर है? उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर:डेटा (Data): यह शुरुआती रूप में बिखरे हुए कच्चे तथ्य, अंक या संकेत (Raw facts) होते हैं जिनका अपने आप में कोई सीधा अर्थ नहीं निकलता। उदाहरण के लिए- कंप्यूटर में पड़े किसी छात्र के अलग-अलग विषयों के अंक (जैसे: 85, 90, 78)।सूचना (Information): जब उसी कच्चे डेटा को व्यवस्थित और संसाधित (Process) कर दिया जाता है ताकि वह उपयोगी बन जाए, तो उसे सूचना कहते हैं। उदाहरण के लिए- उन अंकों को मिलाकर तैयार किया गया छात्र का फाइनल 'रिपोर्ट कार्ड' या 'औसत' जिससे उसके प्रदर्शन का पता चलता है।

+ Q9. डेटा एन्कोडिंग (Encoding) क्या है और यूनिकोड (Unicode) की क्या आवश्यकता पड़ी?

उत्तर: जब हम कीबोर्ड पर कोई अक्षर दबाते हैं, तो कंप्यूटर उसे सीधे नहीं समझ सकता। उस अक्षर को कंप्यूटर के समझने योग्य मशीनी भाषा (0 और 1) में बदलने की प्रक्रिया को एन्कोडिंग कहते हैं।पुराने सिस्टम (जैसे ASCII) केवल अंग्रेजी भाषा के अक्षरों को सपोर्ट करते थे। दुनिया की अन्य भाषाओं (जैसे हिंदी/देवनागरी, चीनी, तमिल) के अक्षरों को भी कंप्यूटर में प्रदर्शित करने के लिए यूनिकोड सिस्टम की आवश्यकता पड़ी, क्योंकि यह दुनिया की हर लिखित भाषा के लिए एक यूनिक कोड देता है।

+ Q10. ऑक्टल और हेक्साडेसिमल संख्या प्रणाली का मुख्य उपयोग क्या है?

उत्तर: कंप्यूटर आंतरिक रूप से केवल बाइनरी संख्या (0 और 1) समझता है। लेकिन कंप्यूटर के बड़े और लंबे बाइनरी कोड या मेमोरी एड्रेस (जैसे: 1100000011110001) को इंसानों के लिए पढ़ना और याद रखना बहुत मुश्किल होता है। बाइनरी के इस बड़े प्रतिनिधित्व को छोटा और सरल बनाने के लिए प्रोग्रामर ऑक्टल और हेक्साडेसिमल संख्या प्रणालियों का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, ऊपर लिखे लंबे कोड को हेक्साडेसिमल में आसानी से C0F1 लिखा जा सकता है।

+ Q11. एल्गोरिदम (Algorithm) और फ्लोचार्ट (Flowchart) में क्या अंतर है?

उत्तर: किसी भी सॉफ्टवेयर को कोडिंग भाषा में लिखने से पहले इन दोनों टूल्स का उपयोग समस्या सुलझाने के लिए किया जाता है:एल्गोरिदम (Algorithm): किसी समस्या को हल करने के लिए लिखे गए तार्किक और क्रमिक निर्देशों का एक लिखित सेट (Step-by-step text instructions) होता है।फ्लोचार्ट (Flowchart): उसी एल्गोरिदम या समस्या के समाधान के चरणों का एक चित्रात्मक या आरेखीय रूप (Graphical/Visual Representation) होता है।

+ Q12. कंप्यूटर सिस्टम के साथ आम तौर पर उपयोग किए जाने वाले विभिन्न इनपुट/आउटपुट डिवाइस कौन से हैं?

उत्तर:इनपुट डिवाइसेस (Input Devices): कीबोर्ड, माउस, स्कैनर, माइक्रोफोन, वेबकैम, और ओसीआर/एमआईसीआर रीडर।आउटपुट डिवाइसेस (Output Devices): मॉनिटर (स्क्रीन), प्रिंटर (लेजर/इंकजेट), स्पीकर, हेडफोन, और प्रोजेक्टर।

+ Q13. कंप्यूटर के विभिन्न प्रकारों के साथ-साथ उनकी विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: आकार और कार्यक्षमता के आधार पर कंप्यूटर के 4 मुख्य प्रकार हैं:माइक्रो कंप्यूटर (Microcomputer): ये सामान्य सिंगल-यूज़र कंप्यूटर हैं (जैसे PC, लैपटॉप)। विशेषता: आकार में छोटे, सस्ते और व्यक्तिगत कार्यों के लिए उपयुक्त।मिनी कंप्यूटर (Minicomputer): ये माइक्रो कंप्यूटर से अधिक शक्तिशाली होते हैं। विशेषता: मल्टी-यूज़र सपोर्ट, मध्यम आकार के व्यवसायों में सर्वर के रूप में उपयोग।मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer): ये बहुत बड़े और शक्तिशाली कंप्यूटर होते हैं। विशेषका: विशाल डेटा प्रोसेसिंग क्षमता, बैंकों और बीमा कंपनियों में हज़ारों यूज़र्स को एक साथ संभालने की क्षमता।सुपर कंप्यूटर (Supercomputer): यह दुनिया का सबसे तेज़ और शक्तिशाली कंप्यूटर है। विशेषता: जटिल वैज्ञानिक गणनाएं, मौसम का पूर्वानुमान और अंतरिक्ष अनुसंधान में उपयोग।

+ Q14. प्रिंटर कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: प्रिंटर को उनकी छपाई तकनीक के आधार पर मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है:इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers): जो कागज़ पर रिबन से चोट करके छपाई करते हैं (जैसे- डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर, कैरेक्टर प्रिंटर, लाइन प्रिंटर)।नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर (Non-Impact Printers): जो बिना चोट किए लेजर या स्याही के छिड़काव से छपाई करते हैं (जैसे- लेजर प्रिंटर, इंकजेट प्रिंटर, थर्मल प्रिंटर)।

+ Q15. रैम (RAM) और रोम (ROM) के बीच प्रमुख अंतर क्या हैं?

उत्तर:RAM (Random Access Memory): यह एक अस्थायी (Volatile) मेमोरी है। इसमें कंप्यूटर के चालू रहने पर वर्तमान में चल रहे ऐप्स का डेटा लोड होता है। इसे पढ़ा और लिखा (Read/Write) दोनों जा सकता है।ROM (Read Only Memory): यह एक स्थायी (Non-Volatile) मेमोरी है। इसमें कंप्यूटर को शुरू (Boot) करने वाले ज़रूरी निर्देश (BIOS) निर्माता कंपनी द्वारा स्थायी रूप से स्टोर किए जाते हैं। इसे केवल पढ़ा (Read) जा सकता है, बदला नहीं जा सकता।

+ Q16. मुख्य मेमोरी (Main Memory) की विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर: मुख्य मेमोरी (जैसे RAM) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:यह सीपीयू (CPU) का एक सीधा हिस्सा होती है, जिससे प्रोसेसर इस तक बहुत तेज़ी से पहुँच सकता है।यह आमतौर पर वोलेटाइल (Volatile) होती है, यानी कंप्यूटर बंद होते ही इसका डेटा नष्ट हो जाता है।सेकेंडरी मेमोरी (हार्ड डिस्क) की तुलना में इसकी गति अत्यधिक तेज़ होती है, लेकिन इसकी भंडारण क्षमता सीमित और महंगी होती है।

+ Q17. फ्लैश मेमोरी क्या है? फ्लैश मेमोरी के लाभ बताएँ।

उत्तर: फ्लैश मेमोरी (Flash Memory) एक नॉन-वोलेटाइल (स्थायी) इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर स्टोरेज माध्यम है, जिसे इलेक्ट्रिकली मिटाया और दोबारा प्रोग्राम किया जा सकता है (जैसे पेन ड्राइव, SSD)।लाभ:इसमें कोई घूमने वाला या चलने वाला यांत्रिक भाग (Moving Part) नहीं होता, जिससे यह जल्दी खराब नहीं होती।इसकी डेटा रीड और राइट करने की गति बहुत तेज़ होती है।यह आकार में बहुत छोटी, हल्की और कम बिजली की खपत करने वाली होती है

+ Q18. विभिन्न अनुप्रयोगों में मेमोरी कार्ड और पेन ड्राइव के उपयोगों की सूची बनाएँ।

उत्तर:मेमोरी कार्ड (SD Card) के उपयोग: डिजिटल कैमरों में फोटो/वीडियो स्टोर करने में, स्मार्टफोन्स की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने में, और पोर्टेबल गेमिंग कंसोल में।पेन ड्राइव (Flash Drive) के उपयोग: एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में डेटा ट्रांसफर करने में, महत्वपूर्ण फाइलों का बैकअप सुरक्षित रखने में, और कंप्यूटर को बूट (Format) करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम की बूटेबल फाइल रखने में।

+ Q19. उपयुक्त उदाहरण की सहायता से लाइन प्रिंटर के उपयोगों को समझाइए।

उत्तर: लाइन प्रिंटर (Line Printer) एक बार में एक अक्षर छापने के बजाय पूरी की पूरी लाइन एक साथ छापता है। यह एक इंपैक्ट प्रिंटर है जो बहुत तेज़ गति से भारी मात्रा में टेक्स्ट छापने के काम आता है।उपयोग का उदाहरण: इसका उपयोग बड़े सरकारी विभागों, बैंकों या रेलवे में मासिक स्टेटमेंट, थोक बिल (Bulk Bills) या इनवॉइस छापने के लिए किया जाता है, जहाँ ग्राफिक्स (फोटो) की आवश्यकता नहीं होती, केवल टेक्स्ट डेटा बहुत बड़े पैमाने पर प्रिंट करना होता है।

+ Q20. इंकजेट प्रिंटर, लेजर प्रिंटर से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:तकनीक: इंकजेट प्रिंटर कागज़ पर लिक्विड स्याही (Liquid Ink) की छोटी बूंदों का छिड़काव करके प्रिंट करता है, जबकि लेजर प्रिंटर सूखी स्याही (Toner Powder) और लेजर बीम तकनीक का उपयोग करता है।गति और गुणवत्ता: लेजर प्रिंटर की प्रिंटिंग गति बहुत तेज़ होती है और टेक्स्ट की गुणवत्ता (Quality) इंकजेट से काफी बेहतर और साफ होती है।लागत: इंकजेट प्रिंटर खरीदने में सस्ते होते हैं लेकिन उनकी प्रति पेज छपाई लागत महंगी होती है। लेजर प्रिंटर महंगे आते हैं पर उनकी प्रति पेज छपाई लागत बहुत कम होती है।

+ Q21. उन डिवाइसेस की सूची बनाएँ जिन्हें यूएसबी पोर्ट से जोड़ा जा सकता है।

उत्तर: यूएसबी पोर्ट से जोड़ी जाने वाली मुख्य डिवाइसेस:कीबोर्ड (Keyboard) और माउस (Mouse)पेन ड्राइव (Pen Drive) और बाहरी हार्ड डिस्क (External Hard Disk)प्रिंटर (Printer) और स्कैनर (Scanner)स्मार्टफोन (Smartphones) और डिजिटल कैमरामाइक्रोफोन और यूएसबी हेडफ़ोन
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