कंप्यूटर की परिभाषा क्या है? भारत का पहला कंप्यूटर
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क्या आपने कभी सोचा है कि कंप्यूटर आखिर काम कैसे करता है? आइए, इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।
कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है। इसका काम है आपसे डेटा (Input) लेना, दिए गए निर्देशों (Program) के अनुसार उस पर प्रक्रिया (Process) करना, और फिर आपको नतीजा (Output) देना। इतना ही नहीं, यह आपके कीमती डेटा को भविष्य के लिए स्टोर भी कर सकता है। इसे कंप्यूटर का IPO चक्र (Input, Process, Output) कहते हैं और यही इसकी आत्मा है।
कंप्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक मशीन है, जो निर्धारित आँकड़ों ( Input) पर दिए गए निर्देशों की शृंखला (Program) के अनुसार विशेषीकृत प्रक्रिया (Process) करके अपेक्षित सूचना या परिणाम (Output) प्रस्तुत करती है।
OR
कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो उपयोगकर्ता से डेटा (इनपुट) लेती है, उसे प्रोसेस करती है, और सूचना (आउटपुट) के रूप में परिणाम देती है। यह डेटा को भविष्य के लिए स्टोर भी कर सकता है। संक्षेप में: यह एक ऐसी मशीन है जो निर्देशों के अनुसार गणना और संचालन करती है। इसका प्रमुख कार्य है - IPO चक्र (Input, Process, Output)।
आपको जानकर हैरानी होगी कि कंप्यूटर का कोई फुल फॉर्म नहीं होता, यह एक शॉर्ट फॉर्म है | इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि कंप्यूटर का असली फुल फॉर्म क्या है और इसका मतलब क्या होता है इस आर्टिकल का मुख्य उद्देश्य कंप्यूटर का फुल फॉर्म स्पष्ट करना ताकि सभी को सही जानकारी मिल सके !
Common Operating Machine Purposely Used for Technological and Education Research

जैसे की हमें रिसर्च करके ये पता चला की कंप्यूटर के कोई सही फुल फॉर्म नहीं होता है ये एक सिर्फ शब्द है, तो काफी सरे लोग कंप्यूटर के फुल फॉर्म लिस्ट बनाया है वही निचे बताया है। आप अगर इन सभी नाम को कंप्यूटर के फुल फॉर्म के कहते हो तो गलत नहीं होगा।
कंप्यूटर आज जो आधुनिक रूप ले चुका है, वह एक दिन में नहीं हुआ। इसके पीछे दशकों की मेहनत और विकास की एक दिलचस्प कहानी है। हम कंप्यूटर के इस क्रमिक विकास को पाँच पीढ़ियों में बाँट सकते हैं:
पहली पीढ़ी (1940-1956): वैक्यूम ट्यूब का ज़माना - ये विशालकाय मशीनें थीं, जो पूरे कमरे घेर लेती थीं और बहुत गर्मी पैदा करती थीं।
दूसरी पीढ़ी (1956-1963): ट्रांजिस्टर की क्रांति - वैक्यूम ट्यूब की जगह छोटे, सस्ते और तेज़ ट्रांजिस्टर ने ले ली, जिससे कंप्यूटर का आकार छोटा हुआ।
तीसरी पीढ़ी (1964-1971): इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का जादू - कई ट्रांजिस्टर को एक छोटी सी चिप पर समेट दिया गया, जिससे कंप्यूटर और भी छोटे, तेज़ और भरोसेमंद बन गए।
चौथी पीढ़ी (1971 से अब तक): माइक्रोप्रोसेसर का उदय - एक ही चिप पर पूरा CPU आ गया, जिसने पर्सनल कंप्यूटर (PC) के युग की शुरुआत की, जो आज हम सबके घरों में हैं।
पाँचवीं पीढ़ी (वर्तमान और भविष्य): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दौर - यह पीढ़ी अभी चल रही है और इसमें कंप्यूटरों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने लायक बनाया जा रहा है।
Computer की वो क्या विसेश्तायें हैं जो की इसे दूसरों से अलग करती है. चलिए इसके विषय में और अच्छे तरीके से जानते हैं।
जैसे की हम जानते हैं की computer बहुत ही तेजी से काम करता है. इसे केवल कुछ ही seconds लगते हैं कोई calculations करने के लिए, जो की हमें करीब कई घंटे ये उससे भी ज्यादा लग सकते हैं।
आपको ये जानकर बड़ा आश्चर्य होगा की computer एक second में करीब 1 millions (1,000,000) की instructions को process कर सकता है या इससे भी ज्यादा।
इसलिए Computer की speed को microsecond (एक second का 10^6 part ) या nanosecond (एक second का 10^9 part) में determine किया जाता है. इससे आप सोच सकते हैं की ये computers कितने fast होते हैं और कैसे ये काम करते हैं।
Computer की degree of accuracy बहुत ही ज्यादा high होती है और प्रत्येक calculation को उसी accuracy के साथ perform किया जाता है. Accuracy Level को determine किया जाता है computer के design के basis पर।
वहीँ computer में जो भी errors होते हैं वो हम इंसानों के लिए होते हैं या फिर inaccurate data के होने से।
एक Computer पूरी तरह से आलस्य से दूर होता है, इसमें tiredness, lack of concentration, fatigue, जैसे humanly emotion नहीं होते हैं. क्यूंकि ये आखिर में एक machine ही होता है. बिना कोई error किये ही ये घंटों काम कर सकता है।
अगर इसमें millions की तादाद में calculations perform किया जाये, तब भी एक computer सभी calculation को समान accuracy के साथ ही perform करेगा।
इसकी यही capability के कारण ये हम इंसानों को मात देता है routine type की work करने में।
इसका मतलब ये की ये अलग अलग प्रकार के काम करने में सक्षम होता है. जैसे की आप अपने computer से एक समय में payroll silps perpare करे रहे होते हैं, वहीँ दुसरे ही वक़्त में आप कोई electric bill बना रहे होते हैं. कोई भी काम आप इसमें कर सकते हैं जो की इसे versatile बनाता है।
Computer में वो खासियत है की वो कितनी भी मात्रा की information या data store कर सकते हैं. कोई भी information को store और recall किया जा सकता है, जब भी आप चाहें तब. इसे कई वर्षो तक safely store किया जा सकता है।
ये user को ऊपर निर्भर करता है की वो कितनी data store करना चाहता है और उसे वो कब retrieve करना चाहता है।
Computer पूरी तरह से एक dumb machine होती है और ये कोई भी कार्य खुद से नहीं कर सकता है, बल्कि इसे प्रत्येक कार्य करने के लिए instruction देना होता है।
और निर्देश देते मात्र ही ये बहुत ही speed और accuracy के साथ अपना कार्य perform करता है. ये आपके ऊपर निर्भर करता है की आप अपने computer से क्या करवाना चाहते हैं।
इसकी खुदकी कोई feelings या emotion, taste, knowledge या experience नहीं होती है. आप भले ही कुछ समय काम करने के बाद थक सकते हैं लेकिन computer कभी भी नहीं थकता है।
Computer की खुदकी in-built memory होती है जहाँ ये बहुत ही बड़ी मात्रा की data को store कर सकती है. इसके साथ आप चाहें तो अपने data को दुसरे secondary storage devices में भी store कर सकते हैं. इसे computer के बहार store किया जाता है और इसे कहीं पर भी store कर सकते हैं।

यह एक बेहद दिलचस्प विषय है, लेकिन अक्सर इसे लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी रहती है। सच्चाई यह है कि 'पहला' कंप्यूटर कई तरह से परिभाषित किया जा सकता है। आइए, तथ्यों पर आधारित पूरी कहानी समझते हैं।
भारत का पहला कंप्यूटर TIFRAC था। जिसे मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में विकसित किया गया था। इसका पूरा नाम टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च आटोमेटिक कैलकुलेटर है। यह नाम इसे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिया था। प्रारंभ में TIFR पायलट मशीन 1950 के दशक में विकसित की गई थी। आईएएस मशीन डिज़ाइन के आधार पर, अंतिम मशीन का विकास 1955 में शुरू किया गया था और औपचारिक रूप से 1960 में चालू किया गया था। और 1965 तक यह काम करता रहा।

21 जनवरी 1969 को भारत में निर्मित पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर विक्रम साराभाई द्वारा भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में चालू किया गया था।
साल 1966 में भारत का पहला कंप्यूटर ISIJU विकसित किया गया। ISIJU कंप्यूटर को भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) और कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी (Jadavpur University) ने मिलकर तैयार किया था। ISIJU एक ट्रांजिस्टर युक्त कंप्यूटर था। इस कंप्यूटर का विकास भारतीय कंप्यूटर तकनीक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कदम था।
यह "पैरेलल मशीन" का संक्षिप्त रूप है । परम का निर्माण विजय पांडुरंग भटकर ने किया था।
कब बना? 1953
क्यों बनाया गया? भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) के वैज्ञानिकों को जटिल सांख्यिकीय गणनाएँ तेज़ी से करने के लिए एक उपकरण की ज़रूरत थी। यह एक शोध परियोजना थी।
क्या चुनौतियाँ/अड़चनें थीं?
जानकारी का अभाव: उस समय कंप्यूटर बनाने की जानकारी बहुत सीमित और गोपनीय थी।
कलपुर्जों की कमी: इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे भारत में आसानी से उपलब्ध नहीं थे। वैज्ञानिकों को जुगाड़ और सीमित संसाधनों से काम चलाना पड़ा।
कब बना? 1955 में भारत में स्थापित हुआ।
क्यों बनाया/मंगवाया गया? प्रो. पी. सी. महालनोबिस को भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61) के लिए करोड़ों लोगों के विशाल आर्थिक आँकड़ों का विश्लेषण करना था। यह काम हाथ से असंभव था, इसलिए इसे ब्रिटेन से खरीदा गया।
क्या चुनौतियाँ/अड़चनें थीं?
विदेशी मुद्रा की भारी कीमत: यह मशीन बहुत महँगी थी और इसे खरीदने के लिए सीमित विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ी।
बुनियादी ढाँचे की कमी: इस मशीन को चलाने के लिए धूल-मुक्त, वातानुकूलित कमरा और स्थिर बिजली आपूर्ति चाहिए थी, जो उस समय के भारत में एक बड़ी चुनौती थी।
विदेशी निर्भरता: खराब होने पर इसके पुर्जे और मरम्मत के लिए पूरी तरह से ब्रिटेन पर निर्भर रहना पड़ता था।
कब बना? विकास 1955 में शुरू, 1960 में पूर्ण और राष्ट्र को समर्पित।
क्यों बनाया गया? डॉ. होमी भाभा के महत्वाकांक्षी परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए जटिल वैज्ञानिक गणनाएँ करने के लिए एक शक्तिशाली मशीन की ज़रूरत थी। रणनीतिक तकनीक होने के कारण पश्चिमी देश इसे बेचना नहीं चाहते थे, इसलिए खुद बनाने का फ़ैसला हुआ।
क्या चुनौतियाँ/अड़चनें थीं?
शून्य से शुरुआत: टीम के पास कोई खाका नहीं था, उन्हें कंप्यूटर का डिज़ाइन खुद बनाना था।
अविश्वसनीय तकनीक: उस समय केवल वैक्यूम ट्यूब उपलब्ध थीं, जो बहुत गर्म होती थीं और बार-बार खराब हो जाती थीं। 2,700 ट्यूबों को लगातार चालू रखना एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती थी।
बिजली की भारी खपत और कूलिंग: इतनी बड़ी मशीन को ठंडा रखने के लिए विशेष प्रबंध की ज़रूरत थी।
कब बना? 1974
क्यों बनाया गया? देश भर के शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटरों की भारी माँग थी। हर बार विदेश से मँगाना बहुत खर्चीला और धीमा था। ECIL को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐसा कंप्यूटर बनाने की ज़िम्मेदारी मिली जिसे बेचा जा सके।
क्या चुनौतियाँ/अड़चनें थीं?
शोध से उत्पाद तक का सफर: TIFRAC जैसी एक प्रयोगशाला मशीन को एक विश्वसनीय, मानकीकृत और बड़े पैमाने पर बनाने लायक उत्पाद में बदलना एक बहुत बड़ी तकनीकी छलांग थी।
कलपुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला: व्यावसायिक उत्पादन के लिए एक स्थिर और सस्ती आपूर्ति श्रृंखला बनाना, जो उस समय के भारत में अपने आप में एक चुनौती थी।
प्रतिस्पर्धा: इसे विदेशी कंपनियों के स्थापित और भरोसेमंद कंप्यूटरों से प्रतिस्पर्धा करनी थी।
कब बना? 1991 (अगस्त)
क्यों बनाया गया? यह अमेरिकी प्रौद्योगिकी प्रतिबंध और अपमान का सीधा परिणाम था। जब अमेरिका ने रणनीतिक बहाने बनाकर भारत को सुपरकंप्यूटर देने से मना कर दिया, तो राष्ट्रीय स्वाभिमान और सुरक्षा के लिए स्वदेशी सुपरकंप्यूटर बनाना अनिवार्य हो गया।
क्या चुनौतियाँ/अड़चनें थीं?
असंभव समय-सीमा: सरकार ने C-DAC को 3 साल का लक्ष्य दिया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मज़ाक समझते थे।
अवरोध और संदेह: देश के अंदर और बाहर, दोनों जगह बहुत से लोगों को विश्वास नहीं था कि भारत यह कर सकता है। परियोजना को लगातार अवरोधों और संदेह का सामना करना पड़ा।
दिमागी जुगाड़ की ज़रूरत: नवीनतम प्रोसेसर तकनीक न होने के कारण, डॉ. भटकर की टीम ने पारंपरिक डिज़ाइन छोड़कर कई साधारण प्रोसेसरों को जोड़ने (पैरेलल प्रोसेसिंग) का बिल्कुल नया और जटिल रास्ता चुना। इसके लिए खास सॉफ्टवेयर और नेटवर्किंग को पूरी तरह भारत में विकसित करना सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती थी।
कंप्यूटर एक ऐसी मशीन है जो इंसानों से कई गुना तेज़, सटीक और लगातार काम कर सकती है। इसकी शक्ति को हम अलग-अलग बिंदुओं में समझ सकते हैं ?
कंप्यूटर की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्पीड है।
यह कुछ सेकंड के अंश (microseconds या nanoseconds) में लाखों गणनाएँ कर सकता है।
जहाँ इंसान को घंटों लगते हैं, वहाँ कंप्यूटर कुछ ही सेकंड में काम कर देता है।
उदाहरण: बिलिंग सिस्टम, बैंक ट्रांजैक्शन, डेटा विश्लेषण आदि।

कंप्यूटर गलती नहीं करता, जब तक इंसान गलत निर्देश न दे।
यह हमेशा सटीक और भरोसेमंद परिणाम देता है।
उदाहरण: वैज्ञानिक गणनाएँ, बैंकिंग डेटा प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग डिज़ाइन आदि।
कंप्यूटर एक ही समय में कई प्रकार के कार्य कर सकता है।
जैसे - लिखना, गणना करना, गेम खेलना, वीडियो बनाना, इंटरनेट चलाना आदि।
यह हर क्षेत्र (शिक्षा, व्यापार, चिकित्सा, बैंकिंग, वैज्ञानिक अनुसंधान आदि) में उपयोगी है।
कंप्यूटर बहुत अधिक मात्रा में डेटा सहेज (Store) सकता है।
यह डेटा को आसान तरीके से खोजने, बदलने और उपयोग करने की सुविधा देता है।
उदाहरण: TBs डेटा एक छोटे ड्राइव में स्टोर हो सकता है।
कंप्यूटर थकता नहीं है, भावनाएँ नहीं रखता, और बिना रुके 24×7 लगातार काम कर सकता है।
इंसान की तरह उसे आराम या ब्रेक की जरूरत नहीं होती।
कंप्यूटर इंटरनेट और नेटवर्क के माध्यम से दुनिया भर के कंप्यूटरों से जुड़ सकता है।
इससे ईमेल, वीडियो कॉल, क्लाउड स्टोरेज, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन आदि संभव हैं।
एक बार प्रोग्राम सेट कर देने पर कंप्यूटर स्वतः कार्य (Automatically) करता है।
इंसान को हर बार निर्देश देने की जरूरत नहीं होती।
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