Blog by Ishika Dhiman | Digital Diary
" To Present local Business identity in front of global market"
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इन दिनों जिस प्रकार की हम जीवन शैली जी रहे हैं ऐसे में तनाव होना स्वभाविक है। इस तनाव को दूर करने के लिए आप अपनी दिनचर्या में योग, एक्सरसाइज, प्राणायाम आदि जोड़ सकते हैं। आज हम आपके लिए एक ऐसे आसन को लेकर आए हैं जिसे करने से सेहत को कई तरीकों से लाभ होता है। इस आसन का नाम है गरुड़ासन (Garudasana/Eagle Pose)। जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है यह दो शब्दों से मिलकर बना है गरुड़ और आसन। गरुण का अर्थ है चील वहीं आसन यानी मुद्रा। इस आसन को करते वक्त व्यक्ति चील की मुद्रा में आ जाता है। आज हम आपको अपने लेख के माध्यम से बताएंगे की गरुड़ासन को करने से सेहत को क्या-क्या फायदे होते हैं। साथ ही इसे करने की विधि और जरूरी सावधानियां भी जानेंगे।
सबसे पहले जमीन पर मैट बिछाएं और उस पर खड़े हो जाएं। अब ताड़ासन की स्थिति में आने के बाद गहरी लंबी सांस लें। अपने बाएं टांग को दाईं टांग के ऊपर पीछे से लेकर जाएं और टिकाएं। अब बाएं पैर की उंगलियों को जमीन पर रखने की कोशिश करें। अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और दाएं हाथ की बाजू को बाएं हाथ के पीछे लेकर जाएं और अब हाथ जोड़ने की कोशिश करें। जैसा कि ऊपर तस्वीर में बताया गया है। अब इस स्थिति में तकरीबन 40 से 50 सेकंड तक खड़े रहें। अब इस आसन से बाहर निकलने के लिए ऊपर बताए गए स्टेप्स को उल्टा करें। अब दूसरी तरफ से भी इस प्रक्रिया को दोहराएं।
इस आसन को करते वक्त शरीर पर काबू होना जरूरी है और अपना बैलेंस बनाना भी जरूरी है। शुरुआत में इस आसन को करते वक्त आपके पिंडलियों पर जोर पड़ सकता है और दर्द शुरू हो सकता है लेकिन इसके बाद भी संतुलन को डगमगाएं नहीं। शुरुआत में आप इस योग को करने के लिए दीवार का भी सहारा ले सकते हैं। अगर आपकी हथेली एक दूसरे से नहीं छू रही हैं तो कोई बात नहीं। आप जितना कर पा रहे हैं केवल उतना ही क।रें अपनी क्षमता पर ज्यादा जोर ना दें।
1 - गरुड़ासन को करने से एकाग्रता शक्ति में सुधार आता है।
2 - अगर आप शारीरिक संतुलन में सुधार लाना चाहते हैं तो यह एक अच्छा विकल्प है।
3 - कंधों में खिंचाव और पीठ के ऊपरी हिस्से में खिंचाव के लिए आप इस आसन को कर सकते हैं।
4 - तंत्रिकाओं को टोन करने के साथ-साथ यह बाजू की मांसपेशियों को भी मजबूती देता है।
अगर आप गठिया के दर्द से परेशान हैं तो केवल डॉक्टर की सलाह पर ही इस आसन को करें। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति के घुटनों में चोट लगी है या भयंकर दर्द है तब भी इस आसन को ना दोहराएं वरना दर्द और बढ़ सकता है।
प्राचीन काल से भारत में योग किया जाता रहा है। भगवान शिव स्वंय एक योगी हैं, जो कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं और सदैव योग करते रहते हैं। योग करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अनुकूल असर पड़ता है। व्यक्ति न केवल सेहतमंद रहता है, बल्कि हर समय एनर्जेटिक महसूस करता है। योग के कई आसन हैं। इनमें एक आसन मयूरासन है। इस योगासन के कई स्वास्थ्य लाभ हैं। खासकर पेट संबंधी विकारों को दूर करने के लिए यह रामबाण दवा है। विशेषज्ञ कई अन्य बीमारियों में भी मयूरासन करने की सलाह देते हैं। अगर आपको मयूरासन के बारे में नहीं पता है, तो आइए जानते हैं-
यह दो शब्दों मयूर अर्थात मोर और आसन यानी बैठना से मिलकर बना है। इसका शाब्दिक अर्थ मोर की मुद्रा में बैठना है। इस योग को करते समय शरीर की आकृति मोर जैसी दिखाई देती है। हालांकि, शुरुआत में इस योग को करने में कठिनाई होती है, लेकिन अभ्यास के साथ मयूरासन करना आसान हो जाता है। इस योग को करने से पहले विशेषज्ञ की जरूर सलाह लें।
इसके लिए समतल भूमि पर दरी बिछा लें। अब उस पर घुटनों के बल बैठ जाएं। इसके बाद अपने दोनों हाथों को ज़मीन पर टिकाएं। इस समय ध्यान रखें कि हाथों के पंजे पैरों की ओर रहें। इसके बाद हाथों पर भार देते हुए अपने पैरों को हवा में लहराएं। साथ ही शरीर का अगर भाग भी हवा में उठाने की कोशिश करें। इस दौरान कोशिश रहे कि आपका शरीर हवा में और शरीर का भार दोनों हाथों पर रहें। इस मुद्रा में कुछ पल रुकें। इसके बाद पुनः पहली अवस्था में आ जाएं।
-इस योग को करने से हाथ और भुजाएं मजबूत होती है।
-इसे करने से पेट संबंधी सारे विकार दूर हो जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति को कब्ज, अपच, बदहजमी की शिकायत हैं, तो वह व्यक्ति मयूरासन को अपनी ज़िंदगी में अपना सकते हैं।
-इससे शरीर लचीला बनता है। साथ ही हाथ, पैर और कंधे को मजबूती मिलती है।
-ऐसा कहा जाता है कि मयूरासन करने से चेहरे पर कांति आती है। अगर आप अपनी खूबसूरती को लेकर अधिक सजग हैं, तो आपको मयूरासन जरूर करना चाहिए।
-ऐसा कहा जाता है कि मयूरासन करने से चेहरे पर कांति आती है। अगर आप अपनी खूबसूरती को लेकर अधिक सजग हैं, तो आपको मयूरासन जरूर करना चाहिए
अक्सर ऐसा होता है कि व्यक्ति काम करते-करते थक जाता है और वह खुद को रिलैक्स करना चाहता है। आमतौर पर, लोग काम की थकान को दूर करने के लिए चाय-कॉफी आदि का सेवन करना पसंद करते हैं। लेकिन वास्तव चाय-कॉफी का अधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है। ऐसे में अगर आप सुरक्षित तरीके से अपनी थकान को दूर करने का मन बना रही हैं तो ऐसे में योगाभ्यास करना अच्छा विचार हो सकता है।
दरअसल, ऐसे कई योगासन होते हैं, जिनका अगर अभ्यास किया जाए तो वह शरीर व मसल्स में एकदम से ऑक्सीजन का लेवल बढ़ाते हैं। जिसके कारण मसल्स एकदम से रिलैक्स हो जाती हैं। इससे व्यक्ति की थकान भी दूर होती है।
मर्कटासन का अभ्यास करने से ना केवल थकान दूर होती है, बल्कि यह एकाग्रता को बढ़ाने में भी कारगर है। साथ ही, इससे व्यक्ति की अनिद्रा की समस्या भी दूर होती है।
मर्कटासन का अभ्यास करने के लिए पहले मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
अब घुटनों को ऊपर उठाएं और अपने पैरों को मोड़ लें।
अब अपने दोनों हाथों को सीधा फैलाएं। इस दौरान आपके हाथ फर्श पर लगे हों और हथेलियां आसमान की ओर होंगी।
अब गहरी सांस लें और सिर को दाईं ओर व घुटनों को बाईं ओर मोड़ें।
कुछ सेकंड के लिए इस स्थिति में रूकें।
अब सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति में वापस आ जाएं।
अब विपरीत दिशा में इसी आसन को दोहराएं।
अगर आपको तनाव के कारण थकान का अहसास हो रहा है तो शवासन का अभ्यास करने से आपको तुरंत आराम मिलेगा।
इस आसन का अभ्यास करने के लिए आप मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
अब आप दोनों हाथों को शरीर से कम से कम 5 इंच की दूरी पर करें। आपकी हथेलियां आसमान की ओर होंगी।
हाथों की तरह ही दोनों पैरों के बीच में भी कम से कम 1 फुट की दूरी बनाएं।
अब आप अपनी आंखें बंद कर लें और शरीर को ढ़ीला छोड़ दें।
अब धीरे-धीरे सांस लें और पूरा ध्यान अब अपनी सांसों पर ही केंद्रित करें।
कुछ देर तक ऐसे ही करें। आपको महसूस होगा कि आपके दिमाग में विचार आने धीरे-धीरे खत्म होने लगेंगे।
साथ ही आपका तनाव व थकान भी दूर हो जाएगा।
मकरासन को पीठ व जोड़ों के दर्द से आराम दिलाने के लिए जाना जाता है, लेकिन यह थकान को भी दूर करने में मददगार है। इस आसन के अभ्यास से थकान से होने वाला सिरदर्द भी दूर होता है।
इस आसन के अभ्यास के लिए मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
अब अपनी दोनों कोहनियों को जमीन पर रखें।
अब आप अपने सिर और कंधों को ऊपर की ओर उठाएं। ध्यान रहे कि इस दौरान आपकी कोहनी ऊपर नहीं उठनी चाहिए।
अब आप अपनी ठुड्डी को हथेलियों पर रख दें। कुछ देर इसी अवस्था में रूकें।
अब आप सामान्य स्थिति में लौट आएं।
स्वस्थ रहने के लिए हम कई तरह के योगासनों का अभ्यास करते हैं। इन्हीं में से पद्मासन भी एक है। पद्मासन दो शब्दों पद्म और आसन से मिलकर बना है। पद्म का मतलब कमल होता है यानी इस योगासन में साधक कमल के पुष्प के समान नजर आता है। इसे अंग्रेजी में लोट पोज (lotus pose yoga) के नाम से जाना जाता है। पद्मासन में बैठने से मन, तन और आत्मा को शांत मिलती है। शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। रोजाना पद्मासन का अभ्यास करने से हम सामान्य से लेकर कई गंभीर बीमारियों से अपना बचाव कर सकते हैं।
1. घुटनों को मजबूत बनाए पद्मासन
उम्र बढ़ने पर घुटनों से जुड़ी समस्याएं होना आम है। पद्मासन के नियमित अभ्यास से आप अपने घुटनों को मजबूत बना सकते हैं। पद्मासन में बैठने से घुटनों में होने वाले दर्द से बचाव होता है। पद्मासन करने से आप अर्थराइटिस की समस्या से भी अपना बचाव कर सकते हैं।
2. दिमाग शांत रखे पद्मासन
आजकल के बढ़ते तनाव और चिंता के कारण हमारे दिमाग में कुछ न कुछ दौड़ता रहता है। ऐसे में दिमाग को शांत रखने के लिए आप पद्मासन का अभ्यास कर सकते हैं। दरअसल, पद्मासन के दौरान ध्यान भी लगाया जाता है, इससे मन, मस्तिष्क तो शांति मिलती है। बेचैनी महसूस होने पर रोजाना सुबह-शाम पद्मासन का अभ्यास करना फायदेमंद होता है।
3. अनिद्रा की समस्या दूर करे पद्मासन
वैसे तो अनिद्रा की समस्या कई कारणों से हो सकती है। लेकिन स्ट्रेस या तनाव इसका आम कारण है। ऐसे में पद्मासन का अभ्यास करना फायदेमंद होता है। पद्मासन योग का अभ्यास करने से स्ट्रेस कम होता है, अनिद्रा की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। रोजाना पद्मासन करने से आपको रात के समय सुकून भरी और गहरी नींद आने लगेगी।
4. ऊर्जावान बनाए पद्मासन
पद्मासन को सुबह खाली पेट करना अधिक लाभकारी होता है। इससे आप पूरे दिनभर ऊर्जावान बने रहेंगे। पद्मासन की अवस्था में बैठने से शारीरिक और मानसिक थकान दूर होती है। साथ ही पद्मासन करने से ऊर्जा का स्तर भी बढ़ता है।
5. पाचन क्रिया में सुधार करे पद्मासन
कमजोर पाचन तंत्र कई बीमारियों का कारण बनता है। इससे गैस, एसिडिटी, अपच और कब्ज की समस्या बनी रहती है। इतना ही नहीं यह गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है। ऐसे में पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए पद्मासन का रोजाना अभ्यास करना फायदेमंद माना जाता है। यह आसन पाचन क्रिया को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है।
इनके अलावा पद्मासन करने से मांसपेशियों का तनाव कम होता है। जांघ, पैरों और घुटनों को मजबूती मिलती है। साथ ही यह एकाग्रता को भी बढ़ाता है। पद्मासन का अभ्यास गर्भवती महिलाएं भी आसानी से कर सकती हैं। इसे हर उम्र के लोग कर सकते हैं।
पद्मासन हमेशा सुबह खाली पेट करना चाहिए। अगर आपको सुबह समय नहीं मिल पाता, तो शाम को भी पद्मासन किया जा सकता है। लेकिन इस दौरान आपका पेट खाली होना चाहिए। जानें पद्मासन करने का सही तरीका-
पद्मासन करने के लिए सबसे पहले किसी शांत और स्वस्थ वातावरण में जमीन पर एक योग मैट बिछा लें।
इस पर पैरों को आगे फैलाकर बैठ जाएं।
अपनी कमर, पीठ और रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें।
अब दाएं घुटने को मोड़ते हुए दाएं पैर को बाईं जांघ पर रख लें।
इसके बाद बाएं घुटने को मोड़ते हुए बाएं पैर को दाईं जांघ पर रखें।
अब अपनी दोनों हथेलियों को घुटनों पर रखें। इस दौरान पर कोई भी हस्त मुद्रा बना सकते हैं।
फिर लंबी सांस लें। कुछ सेकेंड तक रोकें और छोड़ दें।
पद्मासन का अभ्यास आप 1-5 मिनट तक कर सकते हैं।
अगर आपके घुटनों या टखनों पर कोई चोट लगी है, तो पद्मासन करने से बचें। जिन लोगों की हाल ही में घुटने या कूल्हे की सर्जरी हुई है, उन्हें भी पद्मासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
करें योग, रहें निरोग" इन लाइन से आप भलीभांति वाकिफ होंगे। इसका अर्थ है, नियमित योग करने से आप बीमारियों से दूर रह सकते हैं। प्राचीन काल से ही योग का अभ्यास किया जा रहा है। खासतौर पर भारत में योग का विशेष महत्व है। धीरे-धीरे इसका प्रचार-प्रसार दुनियाभर में हो रहा है। योग के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (international yoga day) मनाया जाता है। इस सीरीज में हम त्रिकोणासन के बारे में जानेंगे। त्रिकोणासन एक ऐसा योग है, जिसका नियमित रूप से अभ्यास करने से व्यक्ति लंबी आयु और रोग मुक्त शरीर प्राप्त कर सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं
त्रिकोणासन का नियमित रूप से अभ्यास करने से शरीर को काफी लाभ हो सकते हैं। आइए जानते हैं इस योग फायदों के बारे में विस्तार से -
1. कमर दर्द से दिलाए राहत
त्रिकोणासन के नियमित अभ्यास से आप कमर दर्द की परेशानी को दूर कर सकते हैं। इस योग के अभ्यास से शरीर को लचीला बनाया जा सकता है। साथ ही यह योग कमर दर्द से राहत देने में असरदार हो सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि सिर्फ त्रिकोणासन करने से कमर दर्द को कम नहीं किया जा सकता है।
2. तनाव और चिंता करे कम
त्रिकोणासन योग नियमित रूप से करने से आप स्ट्रेस और चिंता विकृति को कम कर सकते हैं। दरअसल, यह योग आपकी नींद में सुधार करके आपके मूड को बेहतर कर सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित होता है। ऐसे में इस योग के नियमित अभ्यास से आप चिंता और तनाव को कम कर सकते हैं।
3. पाचन क्रिया करे दुरुस्त
पाचन क्रिया को दुरुस्त करने के लिए त्रिकोणासान लाभकारी होता है। दरअसल, यह योग आपके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित करता है, जिससे आपके शरीर को एनर्जी मिलती है। नियमित रूप से इस आसन को करने से पाचन को दुरुस्त करने में मदद मिलती है। साथ ही यह डाइजेस्टिव ग्लैंड को फायदा पहुंचाने में असरदार होती है। मजबूत पाचन के लिए आप इस आसन का नियत्रित रूप से अभ्यास कर सकते हैं।
4. मांसपेशियों को करे मजबूत
त्रिकोणासन का नियमित अभ्यास करने से आप अपनी मांसपेशियों को मजबूत कर सकते हैं। इस योग से आपकी मांसपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह आसन आपके कूल्हों और जांघ की जकड़न को कम कर सकता है। साथ ही इस आसन से आपकी बॉडी पोस्चर सही हो सकती है। त्रिकोणासन आपके ट्रंक और थाई मसल्स के लिए काफी अच्छा फिजिकल थेरेपी हो सकता है।
5. स्किन को करे साफ
नियमित रूप से त्रिकोणासन का अभ्यास करने से स्किन संबंधी परेशानी दूर हो सकती है। यह आसन आपकी स्किन पर बार-बार होने वाले दानों और पिंपल्स की परेशानी को कम कर सकता है। साथ ही यह आपकी स्किन पर निखार लाने में असरदार होता है।
6. हाइट बढ़ाए
त्रिकोणासन का अभ्यास करने से हाइट बढ़ाया जा सकता है। खासतौर बढ़ती उम्र के बच्चों को इस आसन का नियमित अभ्यास करने की सलाह देनी चाहिए।
7. फेफड़ों को करे मजबूत
फेफड़ों की मजबूती के लिए त्रिकोणासन लाभकारी होता है। दरअसल, इस योग के अभ्यास में अधिक से अधिक ऑक्सीजन लिया जाता है, जिसमें लंग्स की भी एक्सरसाइज होती है। ऐसे में यह आपके फेफड़ों की मजबूती के बढ़ाता है।
8. शरीर को बनाए एनर्जेटिक
त्रिकोणासन का नियत्रित रूप से अभ्यास करने से आपका शरीर एनर्जेटिक रहता है। यह शरीर में ऊर्जा प्रदान करता है। साथ ही दिनभर होने वाली थकान को कम कर सकता है।
9. डायबिटीज करे कंट्रोल
डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए त्रिकोणासन काफी असरदार योग है। इस योग के नियमित अभ्यास से टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर आपको डायबिटीज की परेशानी है, तो त्रिकोणासन का नियमित रूप से अभ्यास करें।
10. वजन करे कम
शरीर के बढ़ते वजन को कंट्रोल करने के लिए त्रिकोणासन का अभ्यास किया जा सकता है। यह पेट की चर्बी और कमर की चर्बी को कम करने में असरदार होता है। दरअसल, इस योग के अभ्यास से आपके शरीर में खिंचाव उत्पन्न होता है, जो शरीर के अतिरिक्त फैट को कम करने में प्रभावी माना जाता है।
इस आसन को करने के लिए योग मैट पर खड़े हो जाएं।
इस दौरान अपने पैरों के बीच दो फीट की दूरी बनाएं। साथ ही अपने हाथों को शरीर से सटाकर रखें।
इसके बाद बांहों को शरीर से दूर कंधे तक फैलाएं।
अब सांस को अंदर की ओर खींचते हुए दाएं हाथ को ऊपर उठाकर कान के पास लाएं।
इसके साथ ही बाएं पैर को बाहर की ओर मोड़ें। अब अपनी सांस को बाहर की ओर छोड़ते हुए कमर को बाईं ओर झुकाएं।
ध्यान रखें कि इस दौरान अपने घुटनों को न मोड़ें। साथ ही अपने दाएं हाथ को कान से सटाकर रखें।
इसके बाद दाएं हाथ को जमीन के समानांतर लाने की कोशिश करें। साथ ही बाएं हाथ से बाएं एंकल को छूने की कोशिश करें।
इस मुद्रा में करीब 30 सेकंड तक रहें। अब सांस लेते हुए अपनी प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाएं।
पूरे दिन में कम से कम 4 से 5 बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।
त्रिकोणासन योग से शरीर को कई फायदे हो सकते हैं। लेकिन इस योग को करने के दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।
ब्लड प्रेशर रोगियों को त्रिकोणासन नहीं करना चाहिए।
अगर आपको कमर दर्द और स्लिप डिस्क की परेशानी है, तो एक्सपर्ट की सलाह पर ही इसका अभ्यास करें।
पीठ दर्द होने पर इस योग का अभ्यास करने से बचें।
हाइपर एसिडिटी की परेशानी होने पर इस योग का अभ्यास करने से बचें।
सायटिका की परेशानी होने पर इस योग का अभ्यास करने से बचें।
पूर्वोतानासन का नाम दो शब्दों के मेल से बना है: पूर्व, और उत्तान। पूर्व यानी पूर्व दिशा या शरीर का अगला हिस्सा, और उत्तान मतलब खिचा हुआ। इस आसन से आपका स्वास्थ्य अच्छा होता है और तनाव से भी मुक्त रहते हैं। इस लेख में पूर्वोतानासन करने के तरीके व उससे होने वाले लाभों के बारे में बताया गया है। साथ ही लेख में यह भी बतायाा गया है कि पूर्वोतानासन के दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए।
हर आसन की तरह पूर्वोतानासन के भी कई लाभ होते हैं। उनमें से कुछ हैं यह:
1.हाथों, कलाईयों और पैरों को मज़बूत करता है।
2.छाती, कंधों और टख़नों में खिचाव लाता है।
3.स्वसन प्रक्रिया में सुधार होता है|
4.थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है।
पूर्वोतानासन करने का तरीका हम यहाँ विस्तार से दे रहे हैं, इसे ध्यानपूर्वक पढ़ें।
1.दंडासन में बैठ जायें। हल्का सा हाथों से ज़मीन को दबाते हुए, और साँस अंदर लेते हुए रीढ़ की हड्डी को लंबा करने की कोशिश करें।
2.हांतों को कूल्हों से एक फुट पीछे रख लें। इस बात का ख़ास ध्यान रहें कि उंगलियाँ आगे की तरफ होनी चाहिए (तस्वीर देखिए)।
3.अब साँस अंदर लेते हुए कूल्हों को ऊपर उठायें। कोशिश करें की पैरों के तलवे ज़मीन पर टिक जायें। अगर ऐसा ना हो तो थोड़े समय और अभ्यास के साथ ऐसा होना शुरू हो जाएगा - अभी शरीर को उसकी क्षमता से ज़्यादा ना धकेलें।
4.जब आप पूर्ण रूप से उपर उठ चुके हों, तब अपने सिर को उठायें ताकि अपने पीछे देख सकें। सिर को इस मुद्रा में लाने के बाद दृष्टि अपनी नाक पर केंद्रित करें।
5.इस मुद्रा में लोशिश करें के आपकी टाँगें बिल्कुल सीधी रहें और एड़ियां साथ जुड़ी हों।
6.कुल मिला कर पाँच बार साँस अंदर लें और बाहर छोड़ें ताकि आप आसन में 30 से 60 सेकेंड तक रह सकें। धीरे धीरे जैसे आपके शरीर में ताक़त और लचीलापन बढ़ने लगे, आप समय बढ़ा सकते हैं - 90 सेकेंड से ज़्यादा ना करें।
7.5 बार साँस लेने के बाद आप इस मुद्रा से बाहर आ सकते हैं। आसन से बाहर निकलने के लिए साँस छोड़ते हुए सिर को ऊपर कर लें, और फिर कूल्हों को वापिस ज़मीन पर ले आयें। दंडासन में समाप्त करें।
1.अगर आपकी कलाई में चोट हो तो पूर्वोतानासन बहुत सावधानी से करें।
2.अगर आपकी गर्दन में दर्द या चोट हो, तो पूर्वोतानासन ना करें।
3.अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न लगायें।
पवनमुक्तासन को यह नाम इसलिए दिया गया है की यह आपके पाचन तंत्र में जो भी अधिक वायु होती है, उसे निकालने में मदद करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है।
इस लेख में पवनमुक्तासन के आसन को करने के तरीके और उससे होने वाले लाभों ंके बारे में बताया गया है। साथ में यह भी बताया गया है कि आसन करने के दौरान क्या सावधानी बरतें।
पवनमुक्तासन के फायदे इस प्रकार हैं:
1.पवनमुक्तासन पीठ की निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत करता है और रीढ़ की हड्डी में लचक बढ़ाता है।
2.यह पेट और पाचन अंगों की मालिश करता है और इसलिए पेट में गैस और कब्ज को हटाने में बहुत प्रभावी है। (और पढ़ें - पेट में गैस के घरेलू उपाय)
3.श्रोणि की मांसपेशियों और प्रजनन अंगों की मालिश करके, यह नपुंसकता, बाँझपन और मासिक धर्म की समस्याओं के उपाय में भी उपयोगी है।
पवनमुक्तासन करने का तरीका इस प्रकार है:
1.अपनी पीठ के बाल सीधा ज़माईन पर लेट जायें।
2.श्वास छोड़ते हुए दोनों घुटनों को मोड़ें और जांघों को छाती की तरफ लाएं। घुटनों के ठीक नीचे दोनो हाथों की उंगलियों को एक दूसरे के साथ पकड़ लें।
3.गहरा श्वास लेंश्वास को छोड़ते हुए सिर और कंधों को ऊपर उठायें और घुटनों के बीच के स्थान में नाक लगाने का प्रयास करें। कुछ सेकंड के लिए इस स्थिति में श्वास लें और छोड़ें।
4.धीरे-धीरे सिर, कंधों और पैरों को वापिस शुरुआती मुद्रा में ले आयें।
5.यह 3 बार अभ्यास करें।
यदि आप हाई बीपी या गंभीर कमर दर्द या चोट से पीड़ित हैं, या पीठ की कोई और समस्या जैसे कि कटिस्नायुशूल (साएटिका) और स्लिप डिस्क, तो पवनमुक्तासन ना करें।
भ्रामरी प्राणायाम हिंदी शब्द भ्रामर से बना है, जिसका अर्थ है भौंरा और प्राणायाम का अर्थ श्वास तकनीक है, इसलिए इसे मधुमक्खी श्वास भी कहा जा सकता है। भ्रामरी (बी ब्रीथ) ध्यान के लिए एक प्रभावी प्राणायाम (श्वास व्यायाम) है। भ्रामरी प्राणायाम थकान और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। इस तकनीक में सांस छोड़ने की आवाज मधुमक्खी के गुंजन की आवाज के समान होती है, इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहा जाता है। मन को शांत करने के लिए भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास बहुत मददगार होता है। आप अपने जबड़े, गले और चेहरे में ध्वनि कंपन को आसानी से महसूस कर सकते हैं।
मन को शांत करता है और शरीर को फिर से जीवंत करता है।
स्वाद और सुगंध के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाता है।
तनाव और चिंता से राहत देता है।
आवाज को मधुर बनाता है और स्वर-तंत्र को मजबूत करता है।
गले की परेशानी का इलाज करता है।
ब्लड प्रेशर को संतुलित करता है।
एकाग्रता में सुधार करता है।
इसकी सहायता से मन स्थिर होता है, मानसिक तनाव, व्याकुलता आदि कम होती है।
लकवा और माइग्रेन को ठीक करने में सहायक।
प्रेग्नेंट महिलाओं सहित सभी उम्र के लोग सांस लेने के इस व्यायाम को आजमा सकते हैं।
प्रेग्नेंसी के समय में, यह एंडोक्राइन सिस्टम के कामकाज को बनाए रखने और विनियमित करने में मदद करता है और बच्चे के जन्म को आसान बनाता है।
यह अल्जाइमर रोग के लिए बहुत अच्छा है।
किसी भी आरामदायक मुद्रा (जैसे सुखासन, अर्धपद्मासन या पद्मासन) में बैठें।
अपनी पीठ को सीधा करें और आंखें बंद करें।
हथेलियों को अपने घुटनों पर रखें (प्राप्ति मुद्रा में), अपने अंगूठे को ट्रैगस पर रखें।
आपकी तर्जनी को आपके माथे पर रखा जाना चाहिए।
मध्यमा उंगली मेडियल कैन्थस पर और अनामिका आपके नथुने के कोने पर होनी चाहिए।
श्वास लें और अपने फेफड़ों को हवा से भरें।
जैसे ही आप सांस छोड़ते हैं, धीरे-धीरे मधुमक्खी की तरह एक भनभनाहट की आवाज़ करें, यानी ''मम्मम्मम।''
अपना मुंह पूरे समय बंद रखें और महसूस करें कि ध्वनि का कंपन आपके पूरे शरीर में फैल रहा हो।
कैट-काऊ पोज या मार्जरी आसन का नियमित अभ्यास कई प्रकार से शरीर के लिए लाभदायक हो सकता है। यह मुद्रा आपकी रीढ़ की बेहतर स्ट्रेचिंग करने के साथ पेट के अंगों के लिए विशेष लाभप्रद मानी जाती है। योग विशेषज्ञों के अनुसार नियमित रूप से दिनचर्या में योगासनों को शामिल करना आपकी सेहत को गजब का बूस्ट दे सकता है। शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा देने के साथ मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और शरीर की एकाग्रता में सुधार करने में मार्जरी आसन का नियमित अभ्यास आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। यह आसन पेट से लेकर पीठ तक और पैर से लेकर सिर तक की कई बड़ी मांसपेशियों को सक्रिय करके रक्त के संचार को सुधारने में सहायक है।
योग विशेषज्ञों के मुताबिक यह योग मुद्रा आपके मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करती है। इसके अलावा फोकस, शारीरिक समन्वय और मानसिक स्थिरता में सुधार करने में इस योग के अभ्यास को विशेष लाभकारी माना जाता है। रीढ़ की हड्डी के बीच रक्त परिसंचरण में सुधार करने से यह पीठ दर्द और अतिरिक्त तनाव से राहत दिलाने में मदद करती है। रोजाना 5-10 मिनट तक इस आसन का अभ्यास करना आपके लिए विशेष लाभप्रद हो सकता है।
कैट-काऊ पोज का अभ्यास करना आसान है। किसी विशेषज्ञ से शुरुआत में इसके सही तरीके के बारे में जानकारी ले लें। सबसे पहले फर्श पर दोनों घुटनों और दोनों हाथों को टेक कर बिल्ली जैसी मुद्रा बनाएं। जांघों को ऊपर की ओर सीधा करके पैर के घुटनों पर 90 डिग्री का कोण बनाएं। अब लंबी सांस लें और सिर को पीछे की ओर झुकाते हुए टेलबोन को ऊपर उठाएं। फिर सांस छोड़ते हुए सिर को नीचे की ओर झुकाएं और ठुड्डी को छाती से लगाने का प्रयास करें। इस प्रक्रिया को दोहराएं।
मार्जरी आसन का नियमित अभ्यास शरीर के कई अंगों की बेहतर स्ट्रेचिंग के साथ शरीर में रक्त के संचार को बढ़ावा देने में विशेष लाभकारी हो सकता है। शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत में इस योग के अभ्यास के लाभ देखे गए हैं।
शारीरिक मुद्रा और संतुलन में सुधार करता है।
रीढ़ और गर्दन को मजबूत बनाने और स्ट्रेचिंग में सहायक है।
कूल्हों, पेट और पीठ को स्ट्रेच करता है।
शारीरिक-मानसिक समन्वय बढ़ाता है।
पेट के अंगों जैसे गुर्दे और अधिवृक्क ग्रंथियां को उत्तेजित करता है।
भावनात्मक संतुलन बनाता है।
तनाव से राहत देकर मन को शांत करता है।
कुछ स्थितियों में कैट-काऊ पोज का अभ्यास न करने की सलाह दी जाती है। पीठ या घुटनों में दर्द से पीड़ित लोग, गर्भवस्था के दौरान, गर्दन में चोट या दर्द, सिर की चोट जैसी स्थितियों में इसका अभ्यास न करें। योग से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए किसी विशेषज्ञ से सही आसन की जानकारी जरूर ले लें।
शरीर को स्वस्थ और सेहतमंद बनाने के लिए समय निकालना बेहद आवश्यक होता है। जैसे आप जॉब करने, पढ़ाई और अन्य कार्यों के लिए समय निकालते हैं, ठीक ऐसे ही शरीर के लिए भी समय निकालना जरूरी होता है। लेकिन वर्तमान समय में लोगों जॉब और घर के काम में इतना व्यस्त हो गए हैं कि वह अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दे पाते हैं। लंबे समय तक तनाव व थकान की वजह से शरीर में कई तरह के रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए आप सुबह करीब एक घंटे योग व एक्सरसाइज रोजाना करें। इससे आपके शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और दर्द में आराम मिलता है। योग व एक्सराइज से आपको मानसिक शांति मिलती है, जिसकी वजह से आप हर कार्य को बेहतर ढ़ंग से कर पाते हैं।इस लेख में आपको अर्ध मत्स्येन्द्रासन के फायदों के बारे में बताया गया है। इस आसान से आप रीढ़ की हड्डी से जुड़े दर्द और तनाव को आसानी से दूर कर सकते हैं। आगे जानते हैं अर्ध मत्स्येन्द्रासन से मिलने वाले फायदे और इसे करने का सही तरीका।
मांसपेशियों को स्ट्रेच करें
दिनभर एक ही पोस्चर में बैठे रहने से आपकी पीठ में दर्द होने लगता है। इससे बचने के लिए आप अर्ध मत्स्येन्द्रासन कर सकते हैं। सुबह करीब 10 से 15 मिनट इस आसन को करने से पीठ का दर्द दूर होता है। साथ ही अन्य पैरों, हाथों और ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव आता है।
ब्लड सर्कुलेशन के बनाए बेहतर
अर्धमत्स्येन्द्रासन करने आपके शरीर की मांसपेशियां में लचीलापन आता है और आपका ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन को नियमित करने आपके शरीर के विषैल तत्व बाहर होते हैं और शरीर डिटॉक्स होता है।
पाचन को करें दुरुस्त
इस आसन के नियमित अभ्यास से आप अपनी पाचन क्रिया को बेहतर बना सकते हैं। इससे पेट के मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है और आपकी पाचन क्रिया बेहतर होती है।
तनाव को करें दूर
काम के प्रेशर की वजह से आज के समय में लोगों को तनाव और स्ट्रेस रहने लगा है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन को नियमित करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और आपके दिमाग तक ऑक्सीजन आसानी से पहुंचती है। इससे आपका तनाव कम होता है और चिंता दूर होने लगती है।
रीढ़ की हड्डी को बनाएं लचीला
ऑफिस में घंटों कुर्सी में बैठकर काम करने से रीढ़ की हड्डी पर प्रेशर पड़ता है। साथ ही उसके पोस्चर में भी बदलाव आने लगता है। लेकिन अर्ध मत्स्येन्द्रासन से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है और इसकी वजह से होने वाला पीठ का दर्द दूर होता है।
इस आसन को करने के लिए आप जमीन बैठ जाएं और पैरों को सीधा कर लें।
इस समय आप रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
इसके बाद बाएं पैर को मोड़े और इससे कुल्हे के नीचे दबाएं।
अब दाएं पैर को ऊपर की मोड़े, इसका घुटना ऊपर की ओर रखें।
इसके बाद जो पैर ऊपर की ओर है, उस ओर शरीर के ऊपरी हिस्से को घुमाएं।
ऐसा करते समय आप ऊपर वाले पैर को नीचे वाले पैर से क्रॉस करें और तलवे को घुटने के पास ले आएं।
बाएं हाथ को जमीन पर रखें और गहरी सांस को अंदर भरें।
इस पोजिशन में करीब 20 से 30 सेकेंड तक शरीर को होल्ड करें।
इसके बाद ठीक विपरीत दिशा में आसन को दोहराएं।
शुरुआत में आसन को ज्यादा देर तक न करें। इसके बाद धीरे-धीरे समय को बढ़ाएं।
योग करने से आप अपने शरीर को रोग मुक्त बना सकते हैं। यदि आपको इस आसन को करते समय शरीर के किसी हिस्से में दर्द महसूस हो रहा है, तो ऐसे में कुछ समय के लिए इसे न करें।