पूर्वोतानासन करने का तरीका और फायदे

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पूर्वोतानासन का नाम दो शब्दों के मेल से बना है: पूर्व, और उत्तान। पूर्व यानी पूर्व दिशा या शरीर का अगला हिस्सा, और उत्तान मतलब खिचा हुआ। इस आसन से आपका स्वास्थ्य अच्छा होता है और तनाव से भी मुक्त रहते हैं। इस लेख में पूर्वोतानासन करने के तरीके व उससे होने वाले लाभों के बारे में बताया गया है। साथ ही लेख में यह भी बतायाा गया है कि पूर्वोतानासन के दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए। 

पूर्वोतानासन के फायदे -

हर आसन की तरह पूर्वोतानासन के भी कई लाभ होते हैं। उनमें से कुछ हैं यह:

1.हाथों, कलाईयों और पैरों को मज़बूत करता है।

2.छाती, कंधों और टख़नों में खिचाव लाता है।

3.स्वसन प्रक्रिया में सुधार होता है|

4.थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है।

पूर्वोतानासन कैसे करें? -

पूर्वोतानासन करने का तरीका हम यहाँ विस्तार से दे रहे हैं, इसे ध्यानपूर्वक पढ़ें।

1.दंडासन में बैठ जायें। हल्का सा हाथों से ज़मीन को दबाते हुए, और साँस अंदर लेते हुए रीढ़ की हड्डी को लंबा करने की कोशिश करें।

2.हांतों को कूल्हों से एक फुट पीछे रख लें। इस बात का ख़ास ध्यान रहें कि उंगलियाँ आगे की तरफ होनी चाहिए (तस्वीर देखिए)।

3.अब साँस अंदर लेते हुए कूल्हों को ऊपर उठायें। कोशिश करें की पैरों के तलवे ज़मीन पर टिक जायें। अगर ऐसा ना हो तो थोड़े समय और अभ्यास के साथ ऐसा होना शुरू हो जाएगा - अभी शरीर को उसकी क्षमता से ज़्यादा ना धकेलें।

4.जब आप पूर्ण रूप से उपर उठ चुके हों, तब अपने सिर को उठायें ताकि अपने पीछे देख सकें। सिर को इस मुद्रा में लाने के बाद दृष्टि अपनी नाक पर केंद्रित करें।

5.इस मुद्रा में लोशिश करें के आपकी टाँगें बिल्कुल सीधी रहें और एड़ियां साथ जुड़ी हों।

6.कुल मिला कर पाँच बार साँस अंदर लें और बाहर छोड़ें ताकि आप आसन में 30 से 60 सेकेंड तक रह सकें। धीरे धीरे जैसे आपके शरीर में ताक़त और लचीलापन बढ़ने लगे, आप समय बढ़ा सकते हैं - 90 सेकेंड से ज़्यादा ना करें।

7.5 बार साँस लेने के बाद आप इस मुद्रा से बाहर आ सकते हैं। आसन से बाहर निकलने के लिए साँस छोड़ते हुए सिर को ऊपर कर लें, और फिर कूल्हों को वापिस ज़मीन पर ले आयें। दंडासन में समाप्त करें।

पूर्वोतानासन करने में क्या सावधानी बरती जाए -

1.अगर आपकी कलाई में चोट हो तो पूर्वोतानासन बहुत सावधानी से करें।

2.अगर आपकी गर्दन में दर्द या चोट हो, तो पूर्वोतानासन ना करें।

3.अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न लगायें।

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