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प्राथना

हे प्रभु, मेरे कुल देवी-कुल देवता, पितृ, ग्राम देवता, प्रकृति के सभी शक्तिया आप का बहुत बहुत धन्यवाद् जो भी आप ने दिया, सबसे अच्छा ही दिया है और आप मेरे लिए हमेशा ही बहुत अच्छा ही करते है प्रभु मेरे वाणी में अमृत घोलना मेरे से कोई बुरा कर्म मत करवाना और मेै करने भी जाऊ तो कैसे भी रोक लेना हे प्रभु आप कृपया करे, मेरे ऊपर अपने अनुग्रह शक्ति से, तिरोधान शक्ति से, क्रिया शक्ति से, ज्ञान शक्ति से, इच्छ... Read More
हे प्रभु, मेरे कुल देवी-कुल देवता, पितृ, ग्राम देवता, प्रकृति के सभी शक्तिया आप का बहुत बहुत धन्यवाद् जो भी आप ने दिया, सबसे अच्छा ही दिया है और आप मेरे लिए हमेशा ही बहुत अच्छा ही करते है प्रभु मेरे वाणी में अमृत घोलना मेरे से कोई बुरा कर्म मत करवाना और मेै करने भी जाऊ तो कैसे भी रोक लेना हे प्रभु आप कृपया करे, मेरे ऊपर अपने अनुग्रह शक्ति से, तिरोधान शक्ति से, क्रिया शक्ति से, ज्ञान शक्ति से, इच्छा शक्ति से  देवता / कार्य सामग्री (लोटा: पीतल) दिशा (मुख) मुख्य मंत्र विशेष लाभ सूर्य देव जल + लाल चंदन या गुड़ पूर्व (East) ॐ घृणि सूर्याय नमः सरकारी नौकरी और आत्मविश्वास आदित्य हृदय स्तोत्र (पाठ करना है) पूर्व (East) (पूरा स्तोत्र - 3 बार) 5 अप्रैल परीक्षा में विजय पितृ (Ancestors) जल + काले तिल दक्षिण (South) ॐ पितृभ्यः नमः रुकावटें और कर्ज दूर करना शिवलिंग जल + साबुत चावल (अक्षत) उत्तर (North) ॐ नमः शिवाय / महामृत्युंजय मानसिक शांति और बिजनेस वृद्धि केले का पेड़ जल + हल्दी (केवल गुरुवार) उत्तर-पूर्व (NE) ॐ बृं बृहस्पतये नमः टीचिंग करियर और ज्ञान पीपल का पेड़ जल + कच्चा दूध/गंगाजल पश्चिम (West) ॐ शं शनैश्चराय नमः कमर दर्द और बाधा निवारण पढ़ाई (Study) हरा रुमाल (पास रखें) उत्तर या पूर्व ॐ बुं बुधाय नमः एकाग्रता और टेक्निकल लॉजिक   आदित्य हृदय स्तोत्र (पूर्ण पाठ + हिंदी अर्थ) ? 1. प्रारंभ (उपदेश) संस्कृत: ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्। रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्। उपगम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवान् ऋषिः॥ हिंदी अर्थ: युद्ध से थके हुए और चिंतित खड़े श्रीराम के पास, जब रावण सामने था, तब देवताओं के साथ अगस्त्य ऋषि आए और बोले। ? 2. स्तोत्र का महत्व संस्कृत: राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम्। येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसि॥ अर्थ: हे राम! यह सनातन और गोपनीय स्तोत्र सुनो, जिससे तुम युद्ध में सभी शत्रुओं को जीत जाओगे। ? 3. आदित्य हृदय की महिमा संस्कृत: आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्। जयावहं जपेन्नित्यं अक्षयं परमं शिवम्॥ अर्थ: यह आदित्य हृदय स्तोत्र पवित्र है, शत्रुओं का नाश करने वाला, विजय देने वाला और अक्षय सुख देने वाला है। ? 4. सूर्य देव की स्तुति संस्कृत: सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम्। चिन्ताशोकप्रशमनम् आयुर्वर्धनमुत्तमम्॥ अर्थ: यह सभी मंगलों में श्रेष्ठ, पापों का नाश करने वाला, चिंता और शोक को दूर करने वाला और आयु बढ़ाने वाला है। ? 5. सूर्य का स्वरूप संस्कृत: रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्। पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्॥ अर्थ: किरणों से युक्त, उदय होने वाले, देव-असुरों द्वारा पूजित सूर्य भगवान की पूजा करो। ? 6. सर्वदेव स्वरूप संस्कृत: सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः। एष देवासुरगणान् लोकान् पाति गभस्तिभिः॥ अर्थ: यह सूर्य सभी देवताओं का आत्मरूप है और अपनी किरणों से संसार की रक्षा करता है। ? 7. सूर्य = सभी देवता संस्कृत: एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः। महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यपां पतिः॥ अर्थ: सूर्य ही ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इन्द्र, कुबेर, काल, यम, चन्द्र और वरुण हैं। ? 8. प्रकृति और जीवन के स्रोत संस्कृत: पितरो वसवः साध्या अश्विनौ मरुतो मनुः। वायुर्वह्निः प्रजाप्राण ऋतुकर्ता प्रभाकरः॥ अर्थ: सूर्य ही पितर, वसु, मरुद्गण, मनु, वायु, अग्नि, प्राण और ऋतुओं के निर्माता हैं। ? 9. सूर्य के नाम संस्कृत: आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गभस्तिमान्। सुवर्णसदृशो भानुः हिरण्यरेता दिवाकरः॥ अर्थ: सूर्य के कई नाम हैं-आदित्य, सविता, सूर्य, पूषा, भानु, दिवाकर आदि। ? 10. सूर्य की शक्ति संस्कृत: हरिदश्वः सहस्रार्चिः सप्तसप्तिर्मरीचिमान्। तिमिरोन्मथनः शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्ड अंशुमान्॥ अर्थ: सूर्य हजारों किरणों वाले, अंधकार का नाश करने वाले और जीवनदाता हैं। ? 11. अंधकार विनाशक संस्कृत: हिरण्यगर्भः शिशिरस्तपनः भास्करो रविः। अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शङ्खः शिशिरनाशनः॥ अर्थ: सूर्य सृष्टि के मूल, ठंड का नाश करने वाले और प्रकाश देने वाले हैं। ? 12. दिशा और समय के स्वामी संस्कृत: व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजुःसामपारगः। घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः॥ अर्थ: सूर्य आकाश के स्वामी, अंधकार को दूर करने वाले और वेदों के ज्ञाता हैं। ? 13. जीवन चक्र नियंत्रक संस्कृत: आतपी मण्डली मृत्युः पिङ्गलः सर्वतापनः। कविर्विश्वो महातेजा रक्तः सर्वभवोद्भवः॥ अर्थ: सूर्य जीवन, मृत्यु, ऊर्जा और सृष्टि के कारण हैं। ? 14. प्रार्थना संस्कृत: नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः। ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः॥ अर्थ: पूर्व और पश्चिम दिशा के स्वामी तथा प्रकाश के देवता सूर्य को नमस्कार। ? 15. अंतिम उपदेश (फल) संस्कृत: एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत् तदा। धारयामास सुप्रीतो राघवः प्रयतात्मवान्॥ अर्थ: यह सुनकर श्रीराम का शोक समाप्त हो गया और उन्होंने एकाग्र होकर इसका स्मरण किया। ? 16. विजय संस्कृत: आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वा तु परं हर्षमवाप्तवान्। त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्॥ अर्थ: सूर्य का ध्यान करके श्रीराम ने ऊर्जा प्राप्त की और युद्ध के लिए तैयार हुए।    
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[email protected] 20 Dec 2024 718 Views

नवग्रहों की शांति के लिए उपयोग होने वाली लकड़ियों के क्या नाम है?

आप सूर्य के लिए आर्क की लकड़ियां। राहु के लिए दुर्वा की लकड़ियां। केतु के लिए कुशा की लकड़ियां। शनि के लिए शमि की लकड़ियां। शुक्र के लिए औदुम्बर की लकड़ियां। गुरु के लिए पीपल की लकड़ियां। बुध के लिए अपामार्ग की लकड़ियां। मंगल के लिए खदिर की लकड़ियां। चंद्र के लिए पलाश की लकड़ियां। Read More
आप सूर्य के लिए आर्क की लकड़ियां। राहु के लिए दुर्वा की लकड़ियां। केतु के लिए कुशा की लकड़ियां। शनि के लिए शमि की लकड़ियां। शुक्र के लिए औदुम्बर की लकड़ियां। गुरु के लिए पीपल की लकड़ियां। बुध के लिए अपामार्ग की लकड़ियां। मंगल के लिए खदिर की लकड़ियां। चंद्र के लिए पलाश की लकड़ियां।
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[email protected] 11 Aug 2024 508 Views

नागरमोथा का पौधा

नागरमोथा का पौधा
नागर मोथा नाम की घास है। ज्यादातर खेतो के आसपास यू ही उग जाती है। यह खेतों में छोटी प्रजाति का होता हैं..... नदी नालों में बड़ी प्रजाति का होता हैं.....ok छोटी प्रजाति में ख़ुशबू ज़ायदा होती हैं और दवाओं में काम आता हैं..... इसका प्रयोग यज्ञ हवन में भी होता है। इस घास के बीज खाने के लिए सुअर पूरा खेत खोद देते है.....जहां सूअर होते हैं हलांकि हर गांव में हैं नहीं ये... आपने नागरमोथा का पौधा (nagarm... Read More
नागर मोथा नाम की घास है। ज्यादातर खेतो के आसपास यू ही उग जाती है। यह खेतों में छोटी प्रजाति का होता हैं..... नदी नालों में बड़ी प्रजाति का होता हैं.....ok छोटी प्रजाति में ख़ुशबू ज़ायदा होती हैं और दवाओं में काम आता हैं..... इसका प्रयोग यज्ञ हवन में भी होता है। इस घास के बीज खाने के लिए सुअर पूरा खेत खोद देते है.....जहां सूअर होते हैं हलांकि हर गांव में हैं नहीं ये... आपने नागरमोथा का पौधा (nagarmotha plant) जरूर देखा होगा, लेकिन नागरमोथा के फायदे के बारे में नहीं जानते होंगे। यह एक प्रकार का खर-पतवार है जो धान की फसल के साथ होता है। आप नागरमोथा का उपयोग एक औषधि के रूप में कर सकते हैं और भूख बढ़ाने, पाचन विकार को ठीक करने के साथ-साथ अन्य कई रोगों में नागरमोथा के फायदे ले सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अधिक प्यास लगने की समस्या, बुखार और पेट में कीड़े होने पर नागरमोथा (nagarmotha) से लाभ मिलता है। इसका लेप लगाने से सूजन ठीक होती है। इतना ही नहीं यह स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध को बढ़ाता है......
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[email protected] 11 Aug 2024 726 Views

श्री लक्ष्मी आरती

卐 श्री लक्ष्मी आरती 卐   ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥... Read More
卐 श्री लक्ष्मी आरती 卐   ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ ॥ इति श्री लक्ष्मी आरती ॥ Om Jai Laxmi Mata, Maiya Jai Laxmi Mata Tumko Nis Din Sewat, Hari Vishnu Vidhaata Om Jai Laxmi Mata Uma, Rama, Brahmaani, Tum Hi Jag Mata Surya Chanrama Dhyaawat , Naarad Rishi Gaata Om Jai Laxmi Mata Durga Roop Niranjani, Sukh Sampati Data Jo Koyi Tumko Dhyaawat , Ridhee Sidhee Dhan Paataa Om Jai Laxmi ata Tum Patal Niwasani , Tum Hi Shubh Daata Karma Prabhav Prakashini , Bhav Nidhi Ki Traata Om Jai Laxmi Mata Jis Ghar Mein Tum Rahatee, Tah Sab Sad Guna Aataa Sab Sambhaw Ho Jaata, Man Nahin Ghabaraata Om Jai Laxmi Mata Tum Bin Yagnya Na Hote, Vastra Na Koi Paata Khan Paan Ka Vaibhava, Sab Tum Se Aata Om jai laxmi Mata Shubh Gun mMandir Sundar, Kshirodadhi Jata Ratan Chaturdash Tum Bin, Koi Nahi Paata Om Jai Laxmi Mata Maha Laxmi Ji Ki Aarati, Jo Koi Jan Gaata Ur Aanand Samaata, Paap Utar Jaata Om Jai Laxmi Mata ॥ It's Shree Laxmi Aarati॥   आरती से पहले इन मंत्रों से भी मां की पूजा करनी चाहिए इससे इंसान को दोहरे फल की प्राप्ति होती है। ऊँ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।। श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा। ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम: लक्ष्मी नारायण नम: ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम: धनाय नमो नम: ॐ लक्ष्मी नम: ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम: पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम् . ऊं ह्रीं त्रिं हुं फट   लक्ष्मी जी का मंत्र: हम आपको लक्ष्मी मंत्र की जानकारी भी दे रहे हैं। इस मंत्र को 42 दिनों के भीतर 1.25 लाख बार जप किया जाता है। इसके बाद हवन कर देवी लक्ष्मी की षोडशोपचार विधि से पूजा की जाती है।  पढ़ें मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।  
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[email protected] 08 Jan 2024 1269 Views

श्री विन्ध्येश्वरी आरती

卐 श्री विन्ध्येश्वरी आरती 卐 सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, कोई तेरा पार ना पाया । पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले तेरी भेट .चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ सुवा चोली तेरी अंग विराजे, केसर तिलक लगाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ नंगे पग माँ अकबर आया, सोने का छत्र चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ उँचे पर्वत बन्यो देवालय, नीचे शहर बसाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ सतयुग, द्वापर, त्र... Read More
卐 श्री विन्ध्येश्वरी आरती 卐 सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, कोई तेरा पार ना पाया । पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले तेरी भेट .चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ सुवा चोली तेरी अंग विराजे, केसर तिलक लगाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ नंगे पग माँ अकबर आया, सोने का छत्र चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ उँचे पर्वत बन्यो देवालय, नीचे शहर बसाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ सतयुग, द्वापर, त्रेता मध्ये, कलयुग राज सवाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ धूप दीप नैवेद्य आरती, मोहन भोग लगाया ॥सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गाया, मनवांछित् फल पाया ॥सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ ॥ इति श्री विन्ध्येश्वरी आरती ॥   Sun Meri Devi Parvatvaasini, Koi Tera Paar Na Paya Paan Supari Dhvaja Nariyal , Le Teri Bhet Chadhaya, Sun Meri Devi Parvatvaasini Suva Choli Tere Ang Viraje, Kesar Tilak Lagaya, Sun Meri Devi Parvatvaasini Nange Pag Maa Akbar Aaya , Sone Ka Chhatra Chdhaya, Sun Meri Devi Parvatvaasini Uche Parvat Banyo Devalay Niche Shahar Basaya Sun Meri Devi Parvatvaasini Satyug Dwapar Treta Madhye, Kalyug Raaj Sawaya, Sun Meri Devi Parvatvaasini Dhoop Deep Naivaidy Aarati, Mohan Bhog Lagaaya Sun Meri Devi Parvatvaasini Dhyanu Bhagat Maiya Tere Gun Gaya Mannvanchit Phal Paya, Sun Meri Devi Parvatvaasini ॥ It's Shree Vindhyeshwari Aarati॥
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[email protected] 08 Jan 2024 1284 Views

भगवान विष्णु जी की आरती

卐 श्री विष्णु आरती 卐   ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे || || ॐ जय जगदीश हरे || जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का स्वामी दुख विनसे मन का सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का || || ॐ जय जगदीश हरे || मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी स्वामी शरण गहूं मैं किसकी तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी || || ॐ जय जगदीश हरे || तुम पूरण परमात्मा,... Read More
卐 श्री विष्णु आरती 卐   ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे || || ॐ जय जगदीश हरे || जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का स्वामी दुख विनसे मन का सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का || || ॐ जय जगदीश हरे || मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी स्वामी शरण गहूं मैं किसकी तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी || || ॐ जय जगदीश हरे || तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी स्वामी तुम अंतर्यामी पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी || || ॐ जय जगदीश हरे || तुम करुणा के सागर, तुम पालन कर्ता स्वामी तुम पालन कर्ता मैं मूरख खल कामी , कृपा करो भर्ता || || ॐ जय जगदीश हरे || तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति || || ॐ जय जगदीश हरे || दीनबंधु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी ठाकुर तुम मेरे अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा मैं तेरे || || ॐ जय जगदीश हरे || विषय विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा, श्रद्धा भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा || || ॐ जय जगदीश हरे || श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे || || ॐ जय जगदीश हरे || ॥ इति श्री विष्णु आरती॥   Om Jai Jagadish Hare, Swami Jai Jagadish Hare Bhakt Jano Ke Sankat , Daas Jano Ke Sankat, Kshan Me Door kare । । Om Jai Jagadish Hare ..। Jo Dhyaave Phal Paave, Dukh Vinase Manaka, Swami Dukh Vinase Manaka । Sukh Sampati Ghar Aave, Kasht Mite Tan Ka । । Om Jai Jagadish Hare ..। Maat Pita Tum Mere, Sharan Gahoon Main Kisaki, Swami Sharan Gahoon Main Kisaki । Tum Bin Aur Na Dooja, Aas Karoon Main Jisaki । । Om Jai Jagadish Hare ..। Tum Pooran Paramaatma, Tum Antarayaami, Swami Tum Antarayaami Paarabrahm Parameshwar, Tum Sabake Swami । । Om Jai Jagadish Hare ..। Tum Karuna Ke Sagar, Tum Palan Karta, Swami Tum Palan Karta । Main Moorakh Khal Kaami, Kripa Karo Bharta । । Om Jai Jagadish Hare ..। Tum Ho Ek Agochar, Sabke Pranapati, Swami Sabke Pranapati, Swami, Kis Vidhi Miloon Dayamay, Tumko Main Kumati। । Om Jai Jagadish Hare ..। Deen Bandhu, Dukh Harta, Thakur Tum Mere, Swami Thakur Tum Mere । Apane Haath Uthao, Dwar Pada Main Tere । ।Om Jai Jagadish Hare ..। Vishay Vikar Mitao , Paap Haro Deva, Swami Paap Haro Deva । Shraddha Bhakti Badhao , Santan Ki Seva। । Om Jai Jagadish Hare ..। Shree Jagadish Jee Ki Aarati, Jo Koi Nar Gaave, Swami Jo Koi Nar Gaave । Kahat Shivaanand Swami, Sukh Sampatti Paave । ।Om Jai Jagadish Hare ..। ॥ It's Vishnu Jee ki Aarati
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[email protected] 08 Jan 2024 1125 Views

मां वैष्णो आरती

卐 श्री वैष्णो आरती 卐 जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता। हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी। गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥ ॥ जय वैष्णवी माता ॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे। सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे। बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ भवन पे... Read More
卐 श्री वैष्णो आरती 卐 जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता। हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी। गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥ ॥ जय वैष्णवी माता ॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे। सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे। बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे। ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा। दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे। उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥ ॥ जय वैष्णवी माता ॥ इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे। कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे॥ ॥ जय वैष्णवी माता ॥ ॥ इति वैष्णो आरती ॥         Jai Vaishnavi Mata, Maiya Jai Vaishnavi Mata Hatha Joda Tere Age, Aarti Main Gata. Jai Vaishnavi Mata.. Shisha Pe Chhatra Viraje, Muratiya Pyari Ganga Bahati Charanana, Jyoti Jage Nyari Jai Vaishnavi Mata.. Brahma Veda Padhe Nit Dware, Shankara Dhyan Dhare. Sevaka Chanwar Dulavata, Narad Nritya Kare. Jai Vaishnavi Mata.. Sundara Gufa Tumhari, Man Ko Ati Bhave. Bar-Bar Dekhana Ko, Ye Maa Man Chave . Jai Vaishnavi Mata.. Bhavan Pe Jhande Jhulein, Ghanta Dhwani Baje. Uncha Parvat Tera, Mata Priya Lage. Jai Vaishnavi Mata.. Pan Supari Dhwaja Nariyal, Bhent Pushp Meva. Daas Khadein Charanon Mein, Darshan Do Deva. Jai Vaishnavi Mata.. Jo Jan Nishchay Karake, Dwara Tere Aave. Usaki Ichchha Purana, Mata Ho Jave. Jai Vaishnavi Mata.. Itani Stuti Nish-Din, Jo Nar Bhi Gaave. Kahate Sevak Dhyanu, Sukh Sampatti Paave. Jai Vaishnavi Mata.. ॥ It's Shree Vaishno Mata Aarati॥
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[email protected] 08 Jan 2024 1145 Views

श्री शनि आरती

卐 श्री शनि आरती 卐 जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धर नाथ गज की असवारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ देव दनुज ऋषि... Read More
卐 श्री शनि आरती 卐 जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धर नाथ गज की असवारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ ॥ इति श्री शनि आरती ॥   Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan Hitkari Suraj Ke Putra Prabhu Chaaya Mahtari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ Shyam Ank Vakra Drishti Chaturbhurja Dhaari Nilambar Dhar Nath Gaj Ki Aswari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ Krit Mukut Sheesh Ranjit Dipat Hain Lilari Muktan Ki Mala Gale Shobhit Balihari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ Modak Mishtaan Pan Chadhat Hain Supari Loha, Til, Tel,Urad Mahishi Ati Pyari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ Dev Danuj Rishi Muni Sumiran Nar Nari Vishwanath Dharat Dhayan Sharan Hain Tumhari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ ॥ It's Shani Dev Ki Aarati॥
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[email protected] 08 Jan 2024 1065 Views

शिव आरती

卐 श्री शिव आरती 卐 ॐ जय शिव ओंकारा , प्रभु हर ॐ शिव ओंकारा | ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| एकानन चतुरानन पंचांनन राजै | हंसासंन , गरुड़ासन , वृषवाहन साजै॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| दो भुज चार चतुर्भज दस भुज अति सोहें | तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| अक्षमाला , वनमाला , मुण्डमालाधारी | चंदन , मृगमद सोहें, भाले शशिधारी ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा…... Read More
卐 श्री शिव आरती 卐 ॐ जय शिव ओंकारा , प्रभु हर ॐ शिव ओंकारा | ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| एकानन चतुरानन पंचांनन राजै | हंसासंन , गरुड़ासन , वृषवाहन साजै॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| दो भुज चार चतुर्भज दस भुज अति सोहें | तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| अक्षमाला , वनमाला , मुण्डमालाधारी | चंदन , मृगमद सोहें, भाले शशिधारी ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें। सनकादिक, ब्रह्मादिक , भूतादिक संगें॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| कर मध्ये कमण्डलु , चक्र त्रिशूलधर्ता | जगकर्ता, जगहर्ता, जगपालनकर्ता ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका | प्रवणाक्षर के मध्यें ये तीनों एका ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| त्रिगुण शिव की आरती जो कोई नर गावें | कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| ॥ इति श्री शिव आरती॥   Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Har Shiv Omkara। Brahma,Vishnu,Sadashiv, Ardhangi Dhara॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Ekanan Chaturanan Panchanan Raje। Hansanan, Garudasan Vrishvahan Saje॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Do Bhuj, Chaar Chaturbhuj Dashabhuj Ati Sohe। Teeno Roop Nirakhata Tribhuvan Jan Mohe॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Akshamala Vanamala Mundamala Dhari। Chandan Mrig Mad Sohe Bhale Shashi Dhari॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Shvetambar Pitambar Baaghambar Ange। Sankadik Brahmadik Bhootadik Sange॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Kar Madhye Kamandalu Chakra Trishuldharta। Jagharta Jagkarta Jagpalan Karta॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Brahma Vishnu Sadashiv Janat Aviveka। Pranaavakshar Ke Madhye , Yah Teeno Ekaa॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Trigunswami Ji Ki Aarti Jo Koi Nar Gave। Kahat Shivanand Swami, Manvanchhit Phal Pave॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ ॥ It's Shiv Aarti ॥
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[email protected] 08 Jan 2024 664 Views

आपकी हर परिस्थति हर समस्या का समाधान है इसमें : सम्पूर्ण श्रीमद भागवत गीता Bhagavad-gītā

श्रीमद्भगवद्गीता वर्तमान में धर्म से ज्यादा जीवन के प्रति अपने दार्शनिक दृष्टिकोण को लेकर भारत में ही नहीं विदेशों में भी लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर रही है। निष्काम कर्म का गीता का संदेश प्रबंधन गुरुओं को भी लुभा रहा है। विश्व के सभी धर्मों की सबसे प्रसिद्ध पुस्तकों में शामिल है। श्रीमद्भगवद्‌गीता की पृष्ठभूमि महाभारत का युद्ध है। जिस प्रकार एक सामान्य मनुष्य अपने जीवन की समस्याओं में उलझकर... Read More
श्रीमद्भगवद्गीता वर्तमान में धर्म से ज्यादा जीवन के प्रति अपने दार्शनिक दृष्टिकोण को लेकर भारत में ही नहीं विदेशों में भी लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर रही है। निष्काम कर्म का गीता का संदेश प्रबंधन गुरुओं को भी लुभा रहा है। विश्व के सभी धर्मों की सबसे प्रसिद्ध पुस्तकों में शामिल है। श्रीमद्भगवद्‌गीता की पृष्ठभूमि महाभारत का युद्ध है। जिस प्रकार एक सामान्य मनुष्य अपने जीवन की समस्याओं में उलझकर किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाता है और जीवन की समस्यायों से लड़ने की बजाय उससे भागने का मन बना लेता है उसी प्रकार अर्जुन जो महाभारत के महानायक थे, अपने सामने आने वाली समस्याओं से भयभीत होकर जीवन और क्षत्रिय धर्म से निराश हो गए थे, अर्जुन की तरह ही हम सभी कभी-कभी अनिश्चय की स्थिति में या तो हताश हो जाते हैं और या फिर अपनी समस्याओं से विचलित होकर भाग खड़े होते हैं।   नीचे दिए गए टेबल में हर अध्याय और उसमे उल्लेखित विशेषताओं का लिंक दिया गया है जिसे आप क्लिक करके पढ़ सकते हैं: 1.पहला अध्याय - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद / श्रीमद्भगवद्गीता अर्जुनविषादयोग ~ अध्याय एक 2.श्रीमद्भगवद्गीता सांख्ययोग ~ अध्याय दो 3.श्रीमद्भगवद्गीता कर्मयोग ~ अध्याय तीन 4.श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञानकर्मसंन्यासयोग ~ अध्याय चार 5.श्रीमद्भगवद्गीता कर्मसंन्यासयोग ~ अध्याय पाँच 6.श्रीमद्भगवद्गीता आत्मसंयमयोग ~ छठा अध्याय 7.श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञानविज्ञानयोग सातवाँ अध्याय 8.श्रीमद्भगवद्गीता अक्षरब्रह्मयोग आठवाँ अध्याय 9.श्रीमद्भगवद्गीता राजविद्याराजगुह्ययोग नौवाँ अध्याय 10.श्रीमद्भगवद्गीता विभूतियोग दसवाँ अध्याय 11. श्रीमद्भगवद्गीता विश्वरूपदर्शनयोग ग्यारहवाँ अध्याय 12.श्रीमद्भगवद्गीता भक्तियोग बारहवाँ अध्याय 13.श्रीमद्भगवद्गीता क्षेत्र क्षेत्रज्ञविभागयोग तेरहवाँ अध्याय 14.श्रीमद्भगवद्गीता गुणत्रयविभागयोग चौदहवाँ अध्याय 15.श्रीमद्भगवद्गीता पुरुषोत्तमयोग पंद्रहवाँ अध्याय 16.श्रीमद्भगवद्गीता दैवासुरसम्पद्विभागयोग सोलहवाँ अध्याय 17.श्रीमद्भगवद्गीता श्रद्धात्रयविभागयोग सत्रहवाँ अध्याय 18. श्रीमद्भगवद्गीता मोक्षसंन्यासयोग अठारहवाँ अध्याय  
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[email protected] 04 Jan 2024 968 Views

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