Blog by Priyanshi | Digital Diary
" To Present local Business identity in front of global market"
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एक जंगल में एक आलसी कौवे रहता था वह एक डाल पर बैठा रहता था वह सोचता मैं क्यों मेहनत करूं खाना तो मिल ही जाएगा एक दिन बारिश हुई सारे पक्षी अपने लिए दाना कथा कर चुके आलसी कुआं खाली पेट बैठा था भूख से बोल काश मैं भी मेहनत की होती तभी एक चिड़िया ने बोला मेहनत करने वाले को भूख नहीं रहना पड़ता कौवे को अपनी गलती समझ आ गई अगले दिन से वे भी मेहनत करने लगा
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एक जंगल में एक आलसी कौवे रहता था वह एक डाल पर बैठा रहता था वह सोचता मैं क्यों मेहनत करूं खाना तो मिल ही जाएगा एक दिन बारिश हुई सारे पक्षी अपने लिए दाना कथा कर चुके आलसी कुआं खाली पेट बैठा था भूख से बोल काश मैं भी मेहनत की होती तभी एक चिड़िया ने बोला मेहनत करने वाले को भूख नहीं रहना पड़ता कौवे को अपनी गलती समझ आ गई अगले दिन से वे भी मेहनत करने लगा
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कान खराब होने से सुनने में अवरोध उत्पादन होता है काम में एक मौत जिससे चिलकाना पदार्थ निकलता है जो बाहर की गंदगी को अंदर जाने से रोकना है यह कान का माल कहलाता है इस समय समय रुई की मदद से निकलते रहना चाहिए कान मैं पानी नहीं जाना देना चाहिए कान को रोग मुफ्त रखना के लिए गली के ट्रेसरीन वह जो काम से बचान चाहिए कानों की रंग बनता एवं सुरेश के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए
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कान खराब होने से सुनने में अवरोध उत्पादन होता है काम में एक मौत जिससे चिलकाना पदार्थ निकलता है जो बाहर की गंदगी को अंदर जाने से रोकना है यह कान का माल कहलाता है इस समय समय रुई की मदद से निकलते रहना चाहिए कान मैं पानी नहीं जाना देना चाहिए कान को रोग मुफ्त रखना के लिए गली के ट्रेसरीन वह जो काम से बचान चाहिए कानों की रंग बनता एवं सुरेश के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए
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हमारे आहार में जल का भी विशेष महत्वपूर्ण स्थान है यदि हम जल की कलम मात्रा ग्रहण करते हैं या शरीर में जल की कमी हो जाती है तो निश्चित रूप से व्यक्ति के स्वास्थ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है शरीर में जल की कमी को निरंजन कारण कहते हैं निर्जन कलर अपने आप में एक गंभीर स्थिति है तथा उनके तंत्र उपचार न होने की दशा मैं व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है
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हमारे आहार में जल का भी विशेष महत्वपूर्ण स्थान है यदि हम जल की कलम मात्रा ग्रहण करते हैं या शरीर में जल की कमी हो जाती है तो निश्चित रूप से व्यक्ति के स्वास्थ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है शरीर में जल की कमी को निरंजन कारण कहते हैं निर्जन कलर अपने आप में एक गंभीर स्थिति है तथा उनके तंत्र उपचार न होने की दशा मैं व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है
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रोगी के कमरे का महत्व रोगी के कमरे का अपना अलग महत्व है अलग कमरा होने से घर के सभी सदस्यों सकमक बीमारियों से ग्रसित नहीं हो सकेंगे रोगी भी संयुक्त वतावरण से दूर हो जएगा उसे अपने कमरे मैं शुद्ध वह स्वस्थ वातावरण मिलेगा जिससे वह अपने को जल्दी स्वस्थ महसूस कर लेगा
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रोगी के कमरे का अपना अलग महत्व है अलग कमरा होने से घर के सभी सदस्यों सकमक बीमारियों से ग्रसित नहीं हो सकेंगे रोगी भी संयुक्त वतावरण से दूर हो जएगा उसे अपने कमरे मैं शुद्ध वह स्वस्थ वातावरण मिलेगा जिससे वह अपने को जल्दी स्वस्थ महसूस कर लेगा
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भारतीय प्राचीन काल मैं जब मानव था और जंगलों में रहता था तो वह पेड़ों की चल और पशुओं कि कल से ही अपने शरीर दुख लेता था किंतु सभ्यता की विशाल के साथ उसने धीरे-धीरे वस्त्रो का आरंभ कर दिया वस्त्र का निर्माण के लिए मानव नेट तत्वोंक खोज कि किसी पदार्थ की वह इकई जिससे कपड़ों का निर्माण के लिए धागे बनाए जाता है तंत्र कहलाता है
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भारतीय प्राचीन काल मैं जब मानव था और जंगलों में रहता था तो वह पेड़ों की चल और पशुओं कि कल से ही अपने शरीर दुख लेता था किंतु सभ्यता की विशाल के साथ उसने धीरे-धीरे वस्त्रो का आरंभ कर दिया वस्त्र का निर्माण के लिए मानव नेट तत्वोंक खोज कि किसी पदार्थ की वह इकई जिससे कपड़ों का निर्माण के लिए धागे बनाए जाता है तंत्र कहलाता है
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भूख लगा प्रमाणमत्र का एक का एक नसीब लक्षण है जो कुछ भी खाद्य पदार्थ ग्रहण करने से बोल सकती हो चाहिए साधारण उसे आहार कहा जाता है उदाहरण के लिए किसी प्राणी या मनुष्य को भूख लगे और वह कोई फल य कंदमूल खा लेता उसकी भूख शक्ति हो जाइए तो उसे फल या खुद मुल्क का उसके आहार कहां जाएगा अंत जो सामग्री ग्रहण करने से प्राणी या मनुष्य की की भूख शक्ति हो जाए वह सामग्री आहार हैं आहार का यह अर्थ आती सधारण...
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भूख लगा प्रमाणमत्र का एक का एक नसीब लक्षण है जो कुछ भी खाद्य पदार्थ ग्रहण करने से बोल सकती हो चाहिए साधारण उसे आहार कहा जाता है उदाहरण के लिए किसी प्राणी या मनुष्य को भूख लगे और वह कोई फल य कंदमूल खा लेता उसकी भूख शक्ति हो जाइए तो उसे फल या खुद मुल्क का उसके आहार कहां जाएगा अंत जो सामग्री ग्रहण करने से प्राणी या मनुष्य की की भूख शक्ति हो जाए वह सामग्री आहार हैं आहार का यह अर्थ आती सधारण अति आशिक है मनुष्य एक वैक्सीन प्राणी है उनके हर के विषयम विज्ञापन किया तथाज्ञान किया कि इसका एक मैन उद्देश्य भूल मिटाना ही नहीं है वास्तव म आहार की विभिन्न उद्देश्य है यह हमारे बुक को तो शांत करती है इसके अतिरिक्त यह शरीर को शक्तियां ऊर्जा प्रदान करता है उसकी विद्या विद्या एवं वकास मैं योगदान देती है उसके रख रखावक उनको रोगों से बचने का क्षमता भी प्रदान करती है इनके समस्त उद्देश्य के पुत्र करने वाली सामग्री को आहार कहते हैं
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सामान्य रूप से माना जाता है की यदि व्यक्ति को रक्त मात्रा में अर्थात भरपेट आहार उपलब्ध हो जाए तो उसकी आहार संबंधों आवश्यकता पूरी हो जlती है परंतु वर्तमान पोषण विज्ञान अध्ययनों ने स्पष्ट कर दिया है की आहार संबंध यह है मान्यता गलत है वास्तविक में आहार ग्रहण करने के विभिन्न उपदेश है आहार के कारण करने से जाने हमारी भूख शक्ति होती है यह और और ग्रहण करने से हमें शारीरिक श्रम करने के लिए आवश्यक...
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सामान्य रूप से माना जाता है की यदि व्यक्ति को रक्त मात्रा में अर्थात भरपेट आहार उपलब्ध हो जाए तो उसकी आहार संबंधों आवश्यकता पूरी हो जlती है परंतु वर्तमान पोषण विज्ञान अध्ययनों ने स्पष्ट कर दिया है की आहार संबंध यह है मान्यता गलत है वास्तविक में आहार ग्रहण करने के विभिन्न उपदेश है आहार के कारण करने से जाने हमारी भूख शक्ति होती है यह और और ग्रहण करने से हमें शारीरिक श्रम करने के लिए आवश्यकता ऊर्जा प्राप्त होती है आहार से ही हमेंशरीर नर्माण एवं रख रखवा होता है उनके अतिरिक्त तक आहार की हमारे शरीर का विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है इस स्थिति में जिस आहर का ग्रहण करने से इन सभी उपदेशों की भूख भक्त हो जाती है उसे आहार को संतुलित आहार कहा जाता है संतुलित आहार में सभी पोषण तत्व सही मात्रा तथा गलत अनुपात विद्यमान होते हैं
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पोषक तत्व के कारण सब्जियां मानव के दैनिक भोजन में आयतन महत्व पूर्ण स्थान रखती है अंत पर्वत मात्रा में विटामिन, प्रोटीन, के लिए दैनिक भोजन में विभिन्न सब्जियो को बदल बदलकर लेना जाना चाहिए सब्जियों मे पाए जाने वाले कब्ज दूर करते हैं उनके सारे एव लक्षण भक्ति शुद्ध करते हैं सल्फर, कोलोसियम, चाम रोगों को छूट कर दिलात है और यह उन तत्व के साथ शरीर में का पूर्व पोषण करते है अधिक कच्ची सब्जी अधिक &nb...
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पोषक तत्व के कारण सब्जियां मानव के दैनिक भोजन में आयतन महत्व पूर्ण स्थान रखती है अंत पर्वत मात्रा में विटामिन, प्रोटीन, के लिए दैनिक भोजन में विभिन्न सब्जियो को बदल बदलकर लेना जाना चाहिए सब्जियों मे पाए जाने वाले कब्ज दूर करते हैं उनके सारे एव लक्षण भक्ति शुद्ध करते हैं सल्फर, कोलोसियम, चाम रोगों को छूट कर दिलात है और यह उन तत्व के साथ शरीर में का पूर्व पोषण करते है अधिक कच्ची सब्जी अधिक सब्जियों पाचन को खराब कर कर गैस उत्पन्न कर सकती है अंत इन्हें भली भक्ति पाककर खाने ही अधिक उचित है
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एक गांव में एक कुत्ता रहता था वह बहुत लालची था वह भोजन की तलाश में यहां वहां भटकता रहता था लेकिन उसका पेट कभी नहीं भरता था एक दिन की बात है वह हमेशा की तरह खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था उसे कहीं भी भोजन नहीं मिला अंत में उस एक होटल के बाहर एक मानस का टुकड़ा दिखाई दिया उसने जाट से उसे टुकड़े को मुंह में पकड़ लिया और सोचा कि एकता मैं दूर जाकर खा सकू वह उसेअकेल बैठकर खाना चाहता था इसलिए वह...
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एक गांव में एक कुत्ता रहता था वह बहुत लालची था वह भोजन की तलाश में यहां वहां भटकता रहता था लेकिन उसका पेट कभी नहीं भरता था एक दिन की बात है वह हमेशा की तरह खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था उसे कहीं भी भोजन नहीं मिला अंत में उस एक होटल के बाहर एक मानस का टुकड़ा दिखाई दिया उसने जाट से उसे टुकड़े को मुंह में पकड़ लिया और सोचा कि एकता मैं दूर जाकर खा सकू वह उसेअकेल बैठकर खाना चाहता था इसलिए वह मांसक टुकड़ा लेकिन वहां से जल्दी से जल्दी भाग गया वह कुत्ता एक नदी के पास जा पहुंचा नदी के किनारे जाकर उसने पानी में जाकर तो अचानक उसने अपनी परछाई नदी मे देख वह समझ नहीं पाया की है उसकी है उसकी ही परछाई है उसे लगा कि पानी में कोई दूसरा कुत्ता है जिसके मुंह मैं भी मांस का टुकड़ा है
उसे लालची कत्ते ने सोचा क्या नहीं इसका मांस टुकड़ा छीन लिया जाए इसका मांसक टुकड़ा जाएगा तो खाने का मजा ही दुगनाह जाएगा वह उसे परछाई को जोर से बोका भौंकने से उसके मुंह का दबा हुआ टुकड़ा नदी में गिर पड़ा अब वह अपना टुकड़ा भीख बैठा उसे तब जकर यह समझ मैं आया कि जिससे वह दूसरा कुत्ता ता समझ रहा था वह तो उसकी खुद की परछाई है
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एक गांव में एक लकड़हारा रहता था वह बहुत गरीब था जंगल से लड़कियों कटकर उन्हें बाजार में बेचकर वह थोड़े पैसे कमा लेता था एक दिन लकड़हारा रोज की तरह जंगल में चला गया लकड़िया काटते समय उसके कुल्हाड़ी नदीमें गिर गई वह नदी किनारे बैठकर रोने लगा उसे अपने परिवार की चिंता सताने लगी इतने में देवता प्रकट हए लकड़हारे को रोते दखा लकड़हारे को रोते देखा पूछा तुम क्यों रो रहे हो लकड़हारे ने देवता को अपनी व्यवस्था...
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एक गांव में एक लकड़हारा रहता था वह बहुत गरीब था
जंगल से लड़कियों कटकर उन्हें बाजार में बेचकर वह थोड़े पैसे कमा लेता था एक दिन लकड़हारा रोज की तरह जंगल में चला गया लकड़िया काटते समय उसके कुल्हाड़ी नदीमें गिर गई वह नदी किनारे बैठकर रोने लगा उसे अपने परिवार की चिंता सताने लगी इतने में देवता प्रकट हए लकड़हारे को रोते दखा लकड़हारे को रोते देखा पूछा तुम क्यों रो रहे हो लकड़हारे ने देवता को अपनी व्यवस्था बतइए देवता ने कहा रो मत तुम्हारी कल्हाड़ी वापस दिलवाता हूं देवता ने पानी में डुबकी लगाई और एक चांदी की कुल्हाड़ी बाहर निकाली और लकड़हारे से बोले यह लो तुम्हारी कुल्हाड़ी लकड़हारा बोला यह तो मेरी कुल्हा नहीं है देवता न फिर से डुबकी लगाई और इस बार सोने की कुल्हाड़ी लेकर बाहर निकले तब लकड़हारा बोला यह तो सोने की कुल्हाड़ी है मैं इसे लड़कियां नहीं कैट पाऊंगा मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की है यह सब सुनकर देवता ने फिर से पानी में डुबकी लगाई और लोहे की कुल्हाड़ी लेकर बाहर निकले लकड़हारा अपनी कुल्हाड़ी देखकर बहुत खुश हुआ लकड़हारे की ईमानदारी देखकर देवता प्रसन्न हुए और उसे सोने चांदी की कुल्हाड़ी बेट दीl
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