Company Logo

Priyanshi

WEFRU6550291115202
Scan to visit website

Scan QR code to visit our website

Blog by Priyanshi | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
Digital Diary Submit Post Priyanshi

आहार का अर्थ एवं परिभाषा

आहार का अर्थ एवं परिभाषा
भूख लगा प्रमाणमत्र का एक का एक नसीब लक्षण है जो कुछ भी खाद्य पदार्थ ग्रहण करने से बोल सकती हो चाहिए साधारण उसे आहार कहा जाता है उदाहरण के लिए किसी प्राणी या मनुष्य को भूख लगे और वह कोई फल य कंदमूल खा लेता उसकी भूख शक्ति हो जाइए तो उसे फल या खुद मुल्क का उसके आहार कहां जाएगा अंत जो सामग्री ग्रहण करने से प्राणी या मनुष्य की की भूख शक्ति हो जाए वह सामग्री आहार हैं आहार का यह अर्थ आती सधारण अति आशिक ह... Read More
भूख लगा प्रमाणमत्र का एक का एक नसीब लक्षण है जो कुछ भी खाद्य पदार्थ ग्रहण करने से बोल सकती हो चाहिए साधारण उसे आहार कहा जाता है उदाहरण के लिए किसी प्राणी या मनुष्य को भूख लगे और वह कोई फल य कंदमूल खा लेता उसकी भूख शक्ति हो जाइए तो उसे फल या खुद मुल्क का उसके आहार कहां जाएगा अंत जो सामग्री ग्रहण करने से प्राणी या मनुष्य की की भूख शक्ति हो जाए वह सामग्री आहार हैं आहार का यह अर्थ आती सधारण अति आशिक है मनुष्य एक वैक्सीन प्राणी है  उनके हर के विषयम विज्ञापन किया तथाज्ञान किया कि इसका एक मैन उद्देश्य भूल मिटाना ही नहीं है वास्तव म आहार की विभिन्न उद्देश्य है यह हमारे बुक को तो शांत करती है इसके अतिरिक्त यह शरीर को शक्तियां ऊर्जा प्रदान करता है उसकी विद्या विद्या एवं वकास मैं योगदान देती है उसके रख रखावक उनको रोगों से बचने का क्षमता भी प्रदान करती है इनके समस्त उद्देश्य के पुत्र करने वाली सामग्री को आहार कहते हैं
Read Full Blog
[email protected] 12 Feb 2026 105 Views

संतुलित आहार का अर्थ

संतुलित आहार का अर्थ
सामान्य रूप से माना जाता है की यदि व्यक्ति को रक्त मात्रा में अर्थात भरपेट आहार उपलब्ध हो जाए तो उसकी आहार संबंधों आवश्यकता पूरी हो जlती है परंतु वर्तमान पोषण विज्ञान अध्ययनों ने स्पष्ट कर दिया है की आहार संबंध यह है मान्यता गलत है वास्तविक में आहार ग्रहण करने के विभिन्न उपदेश है आहार के कारण करने से जाने हमारी भूख शक्ति होती है यह और और ग्रहण करने से हमें शारीरिक श्रम करने के लिए आवश्यकता ऊर्जा प... Read More
सामान्य रूप से माना जाता है की यदि व्यक्ति को रक्त मात्रा में अर्थात भरपेट आहार उपलब्ध हो जाए तो उसकी आहार संबंधों आवश्यकता पूरी हो जlती है परंतु वर्तमान पोषण विज्ञान अध्ययनों ने स्पष्ट कर दिया है की आहार संबंध यह है मान्यता गलत है वास्तविक में आहार ग्रहण करने के विभिन्न उपदेश है आहार के कारण करने से जाने हमारी भूख शक्ति होती है यह और और ग्रहण करने से हमें शारीरिक श्रम करने के लिए आवश्यकता ऊर्जा प्राप्त होती है आहार से ही हमेंशरीर नर्माण एवं रख रखवा होता है उनके अतिरिक्त तक आहार की हमारे शरीर का विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है इस स्थिति में जिस आहर का ग्रहण करने से इन सभी उपदेशों की भूख भक्त हो जाती है उसे आहार को संतुलित आहार कहा जाता है संतुलित आहार में सभी पोषण तत्व सही मात्रा तथा गलत अनुपात विद्यमान होते हैं
Read Full Blog
[email protected] 12 Feb 2026 138 Views

भोजन मैं सब्जियों का महत्व

भोजन मैं सब्जियों का महत्व
पोषक तत्व  के कारण सब्जियां मानव के दैनिक भोजन में आयतन महत्व पूर्ण स्थान रखती है अंत पर्वत मात्रा में विटामिन, प्रोटीन, के लिए दैनिक भोजन में विभिन्न सब्जियो को बदल बदलकर लेना जाना चाहिए सब्जियों मे पाए जाने वाले कब्ज दूर करते हैं उनके सारे एव लक्षण भक्ति शुद्ध करते हैं सल्फर, कोलोसियम, चाम रोगों को छूट कर दिलात है और यह उन तत्व के साथ शरीर में का पूर्व पोषण करते है अधिक कच्ची सब्जी अधिक  सब्जियो... Read More
पोषक तत्व  के कारण सब्जियां मानव के दैनिक भोजन में आयतन महत्व पूर्ण स्थान रखती है अंत पर्वत मात्रा में विटामिन, प्रोटीन, के लिए दैनिक भोजन में विभिन्न सब्जियो को बदल बदलकर लेना जाना चाहिए सब्जियों मे पाए जाने वाले कब्ज दूर करते हैं उनके सारे एव लक्षण भक्ति शुद्ध करते हैं सल्फर, कोलोसियम, चाम रोगों को छूट कर दिलात है और यह उन तत्व के साथ शरीर में का पूर्व पोषण करते है अधिक कच्ची सब्जी अधिक  सब्जियों पाचन को खराब कर कर गैस उत्पन्न कर सकती है अंत इन्हें भली भक्ति पाककर खाने ही अधिक उचित है
Read Full Blog
[email protected] 12 Feb 2026 98 Views

लालची कुत्ता

लालची कुत्ता
एक गांव में एक कुत्ता रहता था वह बहुत लालची था वह भोजन की तलाश में यहां वहां भटकता रहता था लेकिन उसका पेट कभी नहीं भरता था एक दिन की बात है वह हमेशा की तरह खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था उसे कहीं भी भोजन नहीं मिला अंत में उस एक होटल के बाहर एक मानस का टुकड़ा दिखाई दिया उसने जाट से उसे टुकड़े को मुंह में पकड़ लिया और सोचा कि एकता मैं दूर जाकर खा सकू वह उसेअकेल बैठकर खाना चाहता था इसलिए वह मांस... Read More
एक गांव में एक कुत्ता रहता था वह बहुत लालची था वह भोजन की तलाश में यहां वहां भटकता रहता था लेकिन उसका पेट कभी नहीं भरता था एक दिन की बात है वह हमेशा की तरह खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था उसे कहीं भी भोजन नहीं मिला अंत में उस एक होटल के बाहर एक मानस का टुकड़ा दिखाई दिया उसने जाट से उसे टुकड़े को मुंह में पकड़ लिया और सोचा कि एकता मैं दूर जाकर खा सकू वह उसेअकेल बैठकर खाना चाहता था इसलिए वह मांसक टुकड़ा लेकिन वहां से जल्दी से जल्दी भाग गया वह कुत्ता एक नदी के पास जा पहुंचा नदी के किनारे जाकर उसने पानी में जाकर तो अचानक उसने अपनी परछाई नदी मे देख वह समझ नहीं पाया की है उसकी है उसकी ही परछाई है उसे लगा कि पानी में कोई दूसरा कुत्ता है जिसके मुंह मैं भी मांस का टुकड़ा है                       उसे लालची कत्ते ने सोचा क्या नहीं इसका मांस  टुकड़ा छीन लिया जाए इसका मांसक टुकड़ा जाएगा तो खाने का  मजा ही दुगनाह जाएगा वह उसे परछाई को जोर से बोका भौंकने से उसके मुंह का दबा हुआ टुकड़ा नदी में गिर पड़ा अब वह अपना टुकड़ा भीख बैठा उसे तब जकर यह समझ मैं आया कि जिससे वह दूसरा कुत्ता ता समझ रहा था वह तो उसकी खुद की परछाई है
Read Full Blog
[email protected] 21 Jan 2026 147 Views

सच्चा लकड़हारा

सच्चा लकड़हारा
एक गांव में एक लकड़हारा रहता था वह बहुत गरीब था जंगल से लड़कियों कटकर उन्हें बाजार में बेचकर वह थोड़े पैसे कमा लेता था एक दिन लकड़हारा रोज की तरह जंगल में चला गया लकड़िया काटते समय उसके कुल्हाड़ी नदीमें गिर गई वह नदी किनारे बैठकर रोने लगा उसे अपने परिवार की चिंता सताने लगी इतने में देवता प्रकट हए लकड़हारे को रोते दखा लकड़हारे को रोते देखा पूछा तुम क्यों रो रहे हो लकड़हारे ने देवता को अपनी व्यवस्था... Read More
एक गांव में एक लकड़हारा रहता था वह बहुत गरीब था जंगल से लड़कियों कटकर उन्हें बाजार में बेचकर वह थोड़े पैसे कमा लेता था एक दिन लकड़हारा रोज की तरह जंगल में चला गया लकड़िया काटते समय उसके कुल्हाड़ी नदीमें गिर गई वह नदी किनारे बैठकर रोने लगा उसे अपने परिवार की चिंता सताने लगी इतने में देवता प्रकट हए लकड़हारे को रोते दखा लकड़हारे को रोते देखा पूछा तुम क्यों रो रहे हो लकड़हारे ने देवता को अपनी व्यवस्था बतइए देवता ने कहा रो मत तुम्हारी कल्हाड़ी वापस दिलवाता हूं देवता ने पानी में डुबकी लगाई और एक चांदी की कुल्हाड़ी बाहर निकाली और लकड़हारे से बोले यह लो तुम्हारी कुल्हाड़ी लकड़हारा बोला यह तो मेरी कुल्हा नहीं है देवता न फिर से डुबकी लगाई और इस बार सोने की कुल्हाड़ी लेकर बाहर निकले तब लकड़हारा बोला यह तो सोने की कुल्हाड़ी है मैं इसे लड़कियां नहीं कैट पाऊंगा मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की है यह सब सुनकर देवता ने फिर से पानी में डुबकी लगाई और लोहे की  कुल्हाड़ी लेकर बाहर निकले लकड़हारा अपनी कुल्हाड़ी देखकर बहुत खुश हुआ लकड़हारे की ईमानदारी देखकर देवता प्रसन्न हुए और उसे सोने चांदी की कुल्हाड़ी बेट दीl
Read Full Blog
[email protected] 09 Jan 2026 162 Views

लालच बुरी बला

लालच बुरी बला
एक समय की बात है एक गांव में किसान रहता था वह बहुत गरीब था एक दिन किस को एक मुर्गा मिला सोन के अडे देता था वह रोज सोने के अंडे बेचता था और बदले में पैसे लेता था अब किसान के साथ बहुत पैसा जमा गया था किसान कुछ ही दिन अमीर हो गया था उनके चर्चे दूर-दूर तक सुने जाती थी एक दिन एक दिन उसे आदमी  मन ही मन मैं सच कि यह मुर्गा रोज आना अंडे देत है मतलब की इस मर्गी पेट के अंदर बहुत सारे अड होंगे क्यों ना मुर्ग... Read More
एक समय की बात है एक गांव में किसान रहता था वह बहुत गरीब था एक दिन किस को एक मुर्गा मिला सोन के अडे देता था वह रोज सोने के अंडे बेचता था और बदले में पैसे लेता था अब किसान के साथ बहुत पैसा जमा गया था किसान कुछ ही दिन अमीर हो गया था उनके चर्चे दूर-दूर तक सुने जाती थी एक दिन एक दिन उसे आदमी  मन ही मन मैं सच कि यह मुर्गा रोज आना अंडे देत है मतलब की इस मर्गी पेट के अंदर बहुत सारे अड होंगे क्यों ना मुर्गी को मार कर उसके पेट से सारे एअड निकाल दिया जाए और मैं सबसे अमीर बन जाऊंगा                              अगले दिन उसे आदमी ने अपनी पत्नी के मिलकर एक दानेदार सोच से मुर्गे को पकड़ लया और उसका पेट चीर दिया मुर्गे को मार डला मुर्गा मार्कर जो पाना था एक दिन में एक अंडा भी खो दिया सिख = इस कहानी से हम यह सिख मिलते हैं कि किसी भी मनुष्य को जितनाहै इतने में ही संतुष्ट करना चाहिए क्योंकि लालच बुरी बला है 
Read Full Blog
[email protected] 08 Jan 2026 408 Views

शरीर के लिए भोजन की उपयोगिता

शरीर के लिए भोजन की उपयोगिता
हमारा शरीर एक मशीन के समान है जिस प्रकार मशीन को चलने से उसकी पूछ घिस है इस प्रकार शरीर रूप मशीनों  मैं भी टूटा फटा होता रहता है मशीन में जैसे प्रकार पुराने पूछ के स्थान पर नया लगाना पड़ता है इस प्रकार शरीर में भी कोशिकाएं की ओ जाने पर दूसरी नव कोशिकाएं उनका स्थान ग्रहण कर लेती हैं जिस प्रकार तेल के अभी भाव में मशीन नहीं चल सकती है, उसे प्रकार भोजन के अभी में शरीर नहीं चल सकता अंत भोजन की उपयोगिता... Read More
हमारा शरीर एक मशीन के समान है जिस प्रकार मशीन को चलने से उसकी पूछ घिस है इस प्रकार शरीर रूप मशीनों  मैं भी टूटा फटा होता रहता है मशीन में जैसे प्रकार पुराने पूछ के स्थान पर नया लगाना पड़ता है इस प्रकार शरीर में भी कोशिकाएं की ओ जाने पर दूसरी नव कोशिकाएं उनका स्थान ग्रहण कर लेती हैं जिस प्रकार तेल के अभी भाव में मशीन नहीं चल सकती है, उसे प्रकार भोजन के अभी में शरीर नहीं चल सकता अंत भोजन की उपयोगिता या कर्य निम्नलिखित है
Read Full Blog
[email protected] 08 Jan 2026 367 Views

Fear no More

Fear no More
       Fear No More  Fear no more the heat o' the sun, ?  Nor the furiour winter's rages;  Thou thy worldly task hast done,  Home art gone, and ta' en thy weges:    Golden lads and girls all must, As chimney -sweepers, come to dust.  fear no more the frown o' the great,   Thou art past the tyrant 's stroke;   Care no more to clothe and eat ;   To thee the reed is as the oak : ... Read More
       Fear No More  Fear no more the heat o' the sun, ?  Nor the furiour winter's rages;  Thou thy worldly task hast done,  Home art gone, and ta' en thy weges:    Golden lads and girls all must, As chimney -sweepers, come to dust.  fear no more the frown o' the great,   Thou art past the tyrant 's stroke;   Care no more to clothe and eat ;   To thee the reed is as the oak :  The sceptred, learning, physic, must  All follow this , and come to dust. fear no more the lightning - flash, Nor the all - dreaded thunder -stone;   fear not slander, censure rash ;  Thou hast finished joy and moan : All lovers yourg, all lovers must  Consign to thee, and come to dust.
Read Full Blog
[email protected] 03 Jan 2026 168 Views

Green snake

Green snake
          Green snake Early morning, the day before yesterday                under a slab of stone,  in a crack,                 eyes glittering,  forked tongue licking and flashing,           a frog swelling his belly,          he lay there quietly: a baby snake, two hands long ,            a green snake. "Poor thing. It 's a green snake. still a baby.      What hare can it do?" I said.      ... Read More
          Green snake Early morning, the day before yesterday                under a slab of stone,  in a crack,                 eyes glittering,  forked tongue licking and flashing,           a frog swelling his belly,          he lay there quietly: a baby snake, two hands long ,            a green snake. "Poor thing. It 's a green snake. still a baby.      What hare can it do?" I said.            My father replied,            "A snake 's a snake."                   And mother, " That 's where everyone walks.   We don't need trouble. Kill it." Father struck him with a piece of firewood,           Chased him outside,           and killied him flat.  
Read Full Blog
[email protected] 03 Jan 2026 136 Views

The sanke trying Central Idea

         Central Idea  The poem shows man's relationship with nature. In the poem describes a green snake who is lying at a secluded place, perhaps resting. He is harmless, even to children. A person is chasing him in order to kill him because of fear. To save himself, he disappears in the water by making a wave movement. He hides in the green and thin grasses which grow in or near the water.... Read More
         Central Idea  The poem shows man's relationship with nature. In the poem describes a green snake who is lying at a secluded place, perhaps resting. He is harmless, even to children. A person is chasing him in order to kill him because of fear. To save himself, he disappears in the water by making a wave movement. He hides in the green and thin grasses which grow in or near the water. Despite being attencked, the sanke makes its good escape, rather than retaliate. The poet applicates his grace and because it is harmless. The poet seems to be somewhat irritated with the behaviour of humans towards the nature. He says that it is foolish to kill a snake as soon as we see it. A snake generally bites in self protection only. He will do us no harm if he doesn't see any danger from us.
Read Full Blog
[email protected] 03 Jan 2026 150 Views

Blog Catgories