सच्चा लकड़हारा
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एक गांव में एक लकड़हारा रहता था वह बहुत गरीब था
जंगल से लड़कियों कटकर उन्हें बाजार में बेचकर वह थोड़े पैसे कमा लेता था एक दिन लकड़हारा रोज की तरह जंगल में चला गया लकड़िया काटते समय उसके कुल्हाड़ी नदीमें गिर गई वह नदी किनारे बैठकर रोने लगा उसे अपने परिवार की चिंता सताने लगी इतने में देवता प्रकट हए लकड़हारे को रोते दखा लकड़हारे को रोते देखा पूछा तुम क्यों रो रहे हो लकड़हारे ने देवता को अपनी व्यवस्था बतइए देवता ने कहा रो मत तुम्हारी कल्हाड़ी वापस दिलवाता हूं देवता ने पानी में डुबकी लगाई और एक चांदी की कुल्हाड़ी बाहर निकाली और लकड़हारे से बोले यह लो तुम्हारी कुल्हाड़ी लकड़हारा बोला यह तो मेरी कुल्हा नहीं है देवता न फिर से डुबकी लगाई और इस बार सोने की कुल्हाड़ी लेकर बाहर निकले तब लकड़हारा बोला यह तो सोने की कुल्हाड़ी है मैं इसे लड़कियां नहीं कैट पाऊंगा मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की है यह सब सुनकर देवता ने फिर से पानी में डुबकी लगाई और लोहे की कुल्हाड़ी लेकर बाहर निकले लकड़हारा अपनी कुल्हाड़ी देखकर बहुत खुश हुआ लकड़हारे की ईमानदारी देखकर देवता प्रसन्न हुए और उसे सोने चांदी की कुल्हाड़ी बेट दीl
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