लालची कुत्ता
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एक गांव में एक कुत्ता रहता था वह बहुत लालची था वह भोजन की तलाश में यहां वहां भटकता रहता था लेकिन उसका पेट कभी नहीं भरता था एक दिन की बात है वह हमेशा की तरह खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था उसे कहीं भी भोजन नहीं मिला अंत में उस एक होटल के बाहर एक मानस का टुकड़ा दिखाई दिया उसने जाट से उसे टुकड़े को मुंह में पकड़ लिया और सोचा कि एकता मैं दूर जाकर खा सकू वह उसेअकेल बैठकर खाना चाहता था इसलिए वह मांसक टुकड़ा लेकिन वहां से जल्दी से जल्दी भाग गया वह कुत्ता एक नदी के पास जा पहुंचा नदी के किनारे जाकर उसने पानी में जाकर तो अचानक उसने अपनी परछाई नदी मे देख वह समझ नहीं पाया की है उसकी है उसकी ही परछाई है उसे लगा कि पानी में कोई दूसरा कुत्ता है जिसके मुंह मैं भी मांस का टुकड़ा है
उसे लालची कत्ते ने सोचा क्या नहीं इसका मांस टुकड़ा छीन लिया जाए इसका मांसक टुकड़ा जाएगा तो खाने का मजा ही दुगनाह जाएगा वह उसे परछाई को जोर से बोका भौंकने से उसके मुंह का दबा हुआ टुकड़ा नदी में गिर पड़ा अब वह अपना टुकड़ा भीख बैठा उसे तब जकर यह समझ मैं आया कि जिससे वह दूसरा कुत्ता ता समझ रहा था वह तो उसकी खुद की परछाई है
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Priyanshi
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