जिम या योग? जानिए क्यों बिना पसीना बहाए 'आसन और प्राणायाम' से मिलती है असली अंदरूनी ताकत
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई फिट रहना चाहता है। लेकिन क्या भारी-भरकम वजन उठाना और जिम में घंटों पसीना बहाना ही सेहतमंद रहने का इकलौता तरीका है? हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति और योग विज्ञान के अनुसार, सेहत का असली राज जिम के कठिन व्यायामों में नहीं, बल्कि 'आसन और प्राणायाम' में छिपा है।
आइए जानते हैं कि क्यों आधुनिक कसरत आपके शरीर को कमजोर कर सकती है और कैसे योग आपको बिना थकाए अंदरूनी ताकत दे सकता है

आजकल युवाओं में दंड-बैठक, पहलवानी या जिम जाकर भारी कसरत करने का क्रेज बहुत बढ़ गया है। लेकिन हमारे आयुर्वेद और स्वास्थ्य विज्ञान के पन्ने साफ बताते हैं कि हर इंसान का शरीर कठिन व्यायामों के लिए नहीं बना होता है।
1.नसों और मांसपेशियों में खिंचाव
जो लोग अचानक या बिना सोचे-समझे भारी कसरत शुरू करते हैं, कुछ ही दिनों में उनकी नसें दुखने लगती हैं और पूरे शरीर में दर्द (Body Ache) होने लगता है
2. अंगों का बेडौल होना
बहुत ज्यादा और गलत तरीके से मेहनत करने से शरीर के टिश्यूज (तंतु) फट जाते हैं, जिससे शरीर कठोर, निर्जीव और बेडौल दिखाई देने लगता है।

साधारण व्यायामों के विपरीत, आसनों का एक गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। यह केवल बाहरी शरीर को नहीं, बल्कि आपकी आंतरिक शक्तियों को जगाता है।
• चक्रों का जागरण: आसनों को सही तरीके से करने से शरीर के सूक्ष्म मर्म ग्रंथियों जैसे- सूर्य चक्र, मणिपुर चक्र और अनाहत चक्र का जागरण होता है। इससे मानसिक शक्तियों का असाधारण विकास होता है।
• सभी अंगों की समान कसरत: आसन एकमात्र ऐसा माध्यम है जिससे शरीर के प्रत्येक छोटे-बड़े अंग की यथोचित (समान रूप से) कसरत हो जाती है।
• कम ऊर्जा में ज्यादा फायदा: मानसिक कार्य करने वाले बुद्धिजीवियों के लिए योग सबसे बड़ा वरदान है, क्योंकि इसमें इतनी शारीरिक शक्ति खर्च नहीं होती जिसके लिए आपको बहुत भारी डाइट लेनी पड़े।

आप जो खाते हैं, वैसे ही आपके विचार और आपकी सेहत बनती है। स्वास्थ्य विज्ञान के अनुसार, पहलवानों और योग करने वालों की डाइट में जमीन-आसमान का अंतर होना चाहिए:
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Khushi prerna
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