ऋषियों का 1:2:1 प्राणायाम नियम: फेफड़ों को बनाएं लोहे जैसा मजबूत | हरिद्वार शांतिकुंज गाइड

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1:2:1 का गुप्त नियम: जो फेफड़ों को बना देगा लोहे जैसा मजबूत!

आज की भागदौड़ और मानसिक तनाव वाली लाइफस्टाइल में हमारी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा डॉक्टरों और दवाओं पर खर्च हो रहा है। इस समस्या का सबसे आसान और मुफ़्त समाधान आपकी श्वास में छिपा है! ऋषियों की इस असाधारण विद्या को प्राणायाम कहते हैं-जो सिर्फ सांस लेना नहीं, बल्कि शरीर की प्राणशक्ति को रीचार्ज करना है।

अंतरंग व्यायाम परक प्राणायाम:-

पुस्तक के अनुसार, अंतरंग प्राणायाम में समय का एक खास गणित काम करता है। इसे हमेशा 1:2:1 के अनुपात में ही करना चाहिए, जो इस प्रकार है:

पूरक (Inhale): नाक के माध्यम से धीमी और गहरी सांस को अंदर खींचना।

कुम्भक (Retain): श्वास को अंदर रोककर दिव्य ऊर्जा को पूरे शरीर में फैलने देना।

रेचक (Exhale): पूरी कार्बन डाइऑक्साइड और शरीर के हानिकारक विजातीय तत्वों को बाहर निकाल फेंकना

उपासना परक प्राणायाम:-

यह प्राणायाम प्रणाली शारीरिक व्यायाम की अपेक्षा मन की एकाग्रता और उपासना के अधिक निकट है। इसके अभ्यास से शरीर की प्रमुख नाड़ियाँ संतुलित होती हैं:

इड़ा नाड़ी (बायां स्वर): इसे शरीर का प्राकृतिक AC समझिए। इससे श्वास लेने पर शरीर को असीम शीतलता और मानसिक शांति मिलती है।

पिंगला नाड़ी (दायां स्वर): यह शरीर का हीटर है। इससे श्वास लेने पर शरीर में उष्णता, ऊर्जा और पाचन शक्ति बढ़ती है।

सुषुम्ना नाड़ी: जब दोनों नाड़ियाँ संतुलित होकर समान रूप से चलती हैं, तब सुषुम्ना जागृत होती है, जिससे मानसिक विकारों और अंगों की पीड़ा (दर्द) का पूरी तरह नाश होता है।

इसे अभियान का रूप दें

इस जीवनदायिनी विद्या को केवल विद्यालयों या प्रज्ञा संस्थानों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। आज समय की मांग है कि:हर गली-मोहल्ले में बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के छोटे-छोटे प्रशिक्षण समूह बनाए जाएं।घर-परिवार के सभी सदस्य एक निश्चित समय और नियत स्थान पर एकत्रित होकर इसका नियमित अभ्यास करें।

हरिद्वार टूरिस्ट गाइड: 

यह दिव्य ज्ञान किसी सामान्य स्रोत का नहीं, बल्कि हरिद्वार के विश्वप्रसिद्ध शांतिकुंज आश्रम की अनमोल देन है। यदि आप शांतिकुंज के दर्शन करने आ रहे हैं, तो इन प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों पर जरूर जाएं और भारी ट्रैफिक व भीड़-भाड़ से बचने के लिए इन स्मार्ट टिप्स का पालन करें:

शांतिकुंज आश्रम (Gayatri Pariwar): यह अखिल विश्व गायत्री परिवार का मुख्यालय है, जो प्रज्ञा योग का वैश्विक केंद्र है। यहाँ का वातावरण अत्यंत शांत और सात्विक है।

हर की पौड़ी (मां गंगा आरती): हरिद्वार का सबसे प्रमुख आकर्षण। शाम की विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती के समय यहाँ अत्यधिक व्हीकल ट्रैफिक और श्रद्धालुओं की भीड़ होती है।

ट्रैफिक टिप: पार्किंग की समस्या और जाम से बचने के लिए आरती के समय से कम से कम 1.5 से 2 घंटे पहले ही घाट पर पहुँच जाएं।

मां मनसा देवी मंदिर: बिलवा पर्वत पर स्थित इस सिद्धपीठ पर जाने के लिए उड़न खटोला (Ropeway) का विकल्प है। वीकेंड और त्योहारों पर यहाँ रोपवे की लंबी लाइनें मिलती हैं।श्री मां चंडी देवी मंदिर: नील पर्वत पर स्थित जहाँ से गंगा नदी और पूरे हरिद्वार शहर का विहंगम दृश्य (Scenic View) दिखाई देता है

भारत माता मंदिर: शांतिकुंज के बिल्कुल पास स्थित यह एक अनूठा 8-मंजिला (Multi-Storey) मंदिर है, जो भारत के वीरों और संस्कृति को समर्पित है। यहाँ बुजुर्गों के लिए लिफ्ट की उत्तम सुविधा है।

सप्तऋषि आश्रम: मुख्य शहर के कोलाहल से दूर गंगा नदी के तट पर स्थित एक अत्यंत शांत तपोभूमि। यदि आप हर की पौड़ी की भारी भीड़ से बचना चाहते हैं, तो यहाँ का शांत वातावरण ध्यान के लिए सर्वोत्तम है

 

FAQ

+ . क्या अंतरंग प्राणायाम में 1:2:1 का अनुपात रखना सभी के लिए अनिवार्य है?

पुस्तक के अनुसार शुरुआत में 1:2:1 का अभ्यास ही सबसे उचित माना जाता है। अभ्यास ठीक से सिद्ध हो जाने के बाद ही विशेषज्ञ की सलाह पर समय अवधि को बढ़ाया जा सकता है।

+ शांतिकुंज हरिद्वार आश्रम में प्रवेश और ठहरने का क्या नियम है?

शांतिकुंज आश्रम में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क (Free) है। यहाँ आध्यात्मिक सत्रों में भाग लेने वाले साधकों के लिए 2 दिनों तक रुकने और सात्विक भोजन की बुनियादी व्यवस्था बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाती है।

+ हरिद्वार में चंडी देवी और मनसा देवी दर्शन के दौरान भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम से कैसे बचें?

दोपहर और शाम के समय यहाँ सबसे ज्यादा भीड़ होती है। भारी ट्रैफिक से बचने के लिए सुबह 7:00 से 9:00 बजे का समय सबसे उत्तम है। साथ ही, ऑनलाइन कॉम्बो रोपवे टिकट लेने से आपका घंटों का समय बच जाएगा।

+ इड़ा और पिंगला नाड़ी असंतुलित होने पर शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

: यदि इड़ा (ठंडा स्वर) अत्यधिक सक्रिय हो तो शरीर में सुस्ती और कफ बढ़ता है, और यदि पिंगला (गर्म स्वर) अधिक सक्रिय हो तो पित्त, क्रोध और उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है। प्राणायाम इन्हें संतुलित रखता है।
Khushi prerna

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